गाय माता को काटने वाला हमारा भाई कैसे हुआ ?

२० जनवरी को  प.पू. तात्यासाहेब कोटनीस महाराज की ९० वें पुण्यतिथि उत्सव के निमित्त आयोजित ‘हिंदु राष्ट्र की आवश्यकता’ विषयपर मार्गदर्शन करते समय हिंदू जनजागृति समिति के पश्चिम महाराष्ट्र समन्वयक श्री. मनोज खाडये ने स्पष्ट रूप से प्रश्न उपस्थित करते हुए कहा कि प्रतिदिन नए-नए पशुवधगृहों का निर्माण कार्य हो रहा है । जो लोग भूमाता, स्वमाता एवं गोमाता का वंदन करते हैं, उन्हें हम हमारे अपने मानते हैं । निरपेक्षतावादी राजनेता हिंदू-मुसलमान भाई-भाई ऐसी भ्रामक कल्पनाओं को हमारे गले उतारने का प्रयास कर रहे हैं; परंतु हमारी माता समान गाय को जो काटता है, वह हमारा बंधु कैसे हो सकता है ? आरंभ में प.पू. गुरुनाथ कोटनीस महाराजद्वारा श्री. खाडये का सम्मान किया गया । 

श्री. खाडये ने स्वतंत्राप्राप्ति के पश्चात हुई देश की दुरावस्था के संदर्भ में जानकारी देकर कहा कि कांग्रेसी राजनेताओं के कारण ही देश की पहचान भ्रष्टाचारी एवं बलात्कारी के रूपमें हो गई है । हिंदु धर्म पर होने वाले विविध आघातों की जानकारी देकर उन्होंने आवाहन किया कि राजनेताओं को झुकाने हेतु हिंदुओं को दबावगुट स्थापित करना चाहिए । धर्मशिक्षा के अभाव के कारण हिंदुओं में धर्माभिमान नहीं है । 

इसके लिए प्रत्येक को धर्मशिक्षा लेकर प्रतिदिन न्यूनतम एक घंटा धर्मके लिए देना अपेक्षित है । उत्सव में होने वाली अनुचित घटानाएं टालकर ‘हिंदु राष्ट्र’ की स्थापना करने हेतु कार्यरत हिंदू जनजागृति समिति के कार्यमें यशाशक्ति साम्मिलित होना चाहिए । 

मार्गदर्शन सुननेपर अनेक लोगों द्वारा श्री. खाडये के  मार्गदर्शन की दृक्श्राव्य चक्रिका की मांग की गई ।

मडगांव विस्फोट: न्यायालय ने कांग्रेस तथा पुलिस को नंगा किया !

31 दिसंबर 2013 को गोवा के विशेष न्यायालय ने मडगांव विस्फोट की घटना में सनातन के सभी छह साधकों को निर्दोष मुक्त किया । विस्फोट के समय सनातन की ‘सुपारी’ लेकर छाती पीटने वाले चैनलवालों के अभियोग का परिणाम सुनकर सधी चुप्पी तोडने तथा पुलिस के कान साफ करने हेतु यह लेख :

न्यायालय ने कांग्रेस तथा पुलिस को नंगा किया !

31 दिसंबर 2013  को मडगांव विस्फोट घटना के सारे छह आरोपियों को गोवा विशेष न्यायालय ने निर्दोष मुक्त किया । राष्ट्रीय अन्वेषण तंत्र इन आरोपियों के विरुद्ध कोई भी पक्का प्रमाण न्यायालय के सामने न ला सका । प्रथमदर्शी विवरण तो सनातन संस्था को लटकाने के उद्देश्य से ही लिखा गया है, यह बात न्यायालय ने विशेष रूप से निर्देशित की है ।

16 अक्तूबर 2009 को मडगांव विस्फोट के पश्चात पुलिस ने आगे-पीछे कुछ भी सोचे बिना सीधे सनातन आश्रम पर धावा बोल दिया । वहां कुछ भी न मिलनेके कारण पुलिस की नाक कट गई । अब घटी घटना से सनातन का संबंध जोडने हेतु कुछ तो करना ही चाहिए, इस सनातनद्वेषी विचार ने पुलिस एवं कांग्रेसी इन दानों को व्यथित कर दिया । उस व्यथित अवस्था में ही पुलिस तथा दिगंबर कामत प्रशासन ने अन्वेषण में बहुत परिश्रम किए; किंतु अंत में कांग्रेस तथा पुलिस दोनों को ही न्यायालय में ‘दिगंबर’ होना पडा !

चैनेलवालों में सनातन की निर्दोषता का वृत्त दिखाने का साहस नहीं !

मडगांव में विस्फोट हुआ । उसमें सनातन के दो कार्यकर्ता मारे गए । ऐसी स्थिति में सनातन को ही आरोपी के पिंजरे में खडा कर दिगंबर प्रशासन, पुलिस तथा उससे भी अधिक उत्साह से चैनेलवालों ने हमला करना प्रारंभ किया । आइ.बी.एन. लोकमत के संपादक निखिल वागले की नींद तो कब की उड चुकी थी ।8-10 दिनों पश्चात भी उनके चैनल पर चर्वण करने हेतु अन्य विषय ही नहीं था । चर्चा एवं आरोप बडी मात्रा में चल रहे थे । अब पृथ्वी का ही विस्फोट हो जाएगा, इस भाव से वागले की बकबक आरंभ थी । किंतु अभियोग के निर्णय से सबके निर्दोष छूटने पर एक भी चैनेल ने उस संदर्भ में चर्चा आयोजित नहीं की । अजी, चर्चा आयोजित करना तो बडी दूरकी बात हो गई, सनातन की निर्दोषता का केवल वृत्त दिखाने का साहस भी इन चैनेलवालों से हुआ नहीं । 

निरंतर वृत्तपत्र स्वतंत्रता का समर्थन करने वाले सारे बातूनी 31 दिसंबर को कहां छुप गए थे ? कहते हैं, एक हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताने, ‘सनातन की निर्दोषताका वृत्त क्यों नहीं दिखाते ?’, ऐसा पूछने हेतु ‘आइ.बी.एन'. लोकमत के कार्यालय में फोन भी किया था । उस समय सामने से उत्तर आया कि, ‘आज थर्टीफस्र्ट' है, अत: वागले साहब नहीं आए हैं तथा दो दिन (होशमें ?) उनके आने की संभावना न होने के कारण कल भी आएंगे अथवा नहीं, कह नहीं सकते । अत: आप ३ जनवरी के पश्चात ही फोन करें । '

क्या चैनेलवालों को पुलिस बहनों की प्रतिष्ठा कौडी के मोल लगती है ?

पूर्व में 11 अगस्त को आजाद मैदान पर मुसलमानों ने दंगा किया । महिला पुलिस बहनों के कपडे फाडकर उनकी विडंबना की, ओ बी वेन जलाई; वे घटनाएं जब घट रही थीं, तो कुछ वाहिनियों ने ही यह वृत्त दिखाया । किंतु वागले नारायण राणे तथा ‘सिंचन’ के नामसे चैनेल पर चिल्ला रहे थे । इसका अर्थ है, वार्ताकारिता के कथित प्रेमियों को पुलिस बहनों की प्रतिष्ठा का कुछ भी मोल नहीं लगा । अथवा पुलिस बहनों की प्रतिष्ठा कौडी के मोल होती है, क्या इन्हें ऐसा लगता है ?

कुछ घंटों में ही तामिलनाडू पहुंचने वाले वार्ताकारों को आठ दिनों में भिवंडी नहीं मिली !

भिवंडी में दो पुलिसकर्मी को मुसलमान दंगाखोरों ने पत्थरों से मार दिया तथा उसके पश्चात पुलिस की ही गाडी में डालकर गाडी जला दी । उन दो पुलिसवालों के शवविच्छेदन का विवरण देखें । वह विवरण बताता है कि उन दो पुलिसवालों के नाखून उखाड दिए गए थे, उनकी आंखें फोड दी गर्इं, उनका लिंग काट दिया गया था, हाथ-पांव जोडों से तोडे गए थे । धर्मांधों ने पुलिस को इस पद्धति से मारा था । इस एक विवरण पर ही अनेक चर्चा आयोजित हो सकती थी; किंतु किसी ने भी साहस नहीं किया । उस समय भी वार्ताकारिता प्रेमी कहीं जाकर छुप गए ।

कांची कामकोटी पीठ के शंकराचार्य को बंदी बनाया गया था । उस समय ‘ब्रेकिंग न्यूज - जेल में जगद्गुरु' इस नाम से चैनल वाले ऊधम मचा रहे थे । मैंने स्वयं स्टार न्यूज के कार्यालय में दूरध्वनि किया तथा उनसे पूछा कि, `शंकराचार्य का वृत्त आप अनेक दिनों से दिखा रहे है; किंतु भिवंडी में घटी घटनाओं के विषयमें अपने चैनल वर केवल ‘तलटिपणी ’ भी क्यों नहीं दिखाते ?' इसपर उस ओर से एक बहन ने कहा कि `हमारे रिपोर्टर अभी भिवंडी नहीं पहुंचे हैं ।’ इसका अर्थ है, कुछ ही घंटों में इनके वार्ताकार कांची पीठ पहुंच गए; किंतु क्या ‘भिवंडी’ नाम की चीज उनके वार्ताकारों को मिली ही नहीं ? यह बात ध्यान में रखें !

सारे चैनलवाले तथा पुलिस अब तो कुछ सोचें । राजनीतिज्ञों की सुनकर पुलिस ने हम हिंदुओं पर झूठे अपराध प्रविष्ट किए, किंतु पुलिस की मां -बहनें हमारी भी मां-बहनें हैं, हम हिंदू यह कभी भी भूलेंगे नहीं; किंतु जिन धर्मांधों को प्रसन्न करने हेतु आप हम पर झूठे अपराध प्रविष्ट करते हो, उनकी दृष्टि में आपकी मां -बहनें युद्ध में प्राप्त हुई लूट अथवा अपने हक की खेती हैं, यह न भूलें ।

धर्मांधों को प्रसन्न करने हेतु चैनेलवालों ने कितने भी प्रयास किए, तो भी धर्मांधों की  दृष्टि में चैनलवालों का मोल ही क्या है, यह 11 अगस्त को आप-हमने देखा है । इतना होने पर भी यह चापलूसी रुकने वाली न हो, तो 11 अगस्त तथा भिवंडी की घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी; किंतु कुछ समय पश्चात हिंदू आपकी सहायता करने नहीं आएंगे, यह बात याद रखें।

बंगाली बाबाओं व ईसाई धर्मप्रसारकों के विरुद्ध एफआईआर पर कोई कार्यवाही नहीं

जादूटोना अधिनियम हिंदू विरोधी होने का डर सनातन संस्था ने पूर्व से ही स्पष्ट किया था । डा. दाभोलकर की मृत्युके पश्चात शीघ्रता से पारित किए अध्यादेश को १०६ दिन हो गए, प्रशासन ने अध्यादेश कठोर बनाने के नाम पर सारे अपराध ‘हस्तक्षेपवाले’ घोषित किए; किंतु इस कालावधि में जादूटोना तथा चमत्कारों का दावा करने वाले बंगाली बाबा तथा ईसाई धर्मप्रसारकों के विरुद्ध आई लिखित ७ परिवादों में कार्यवाही करना तो दूर; अभी तक पुलिस ने अपराध भी प्रविष्ट नहीं किए । 

अत: इस संदर्भ में प्रशासन स्पष्टीकरण दे तथा यदि यह अधिनियम सर्वधर्मियों हेतु समान हो, तो संबंधित व्यक्तियों पर अपराध प्रविष्ट कर उन पर तुरंत कार्यवाही करने की बात घोषित करे, हिंदू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. रमेश शिंदे ने वार्ताकार परिषद में ऐसी मांग की । इस समय हिंदू विधिज्ञ परिषद के अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर उपस्थित थे ।

अधिवक्ता इचलकरंजीकर ने कहा, २६ अगस्त २०१३ को प्रशासन ने आपातकाल उत्पन्न होने जैसा संभ्रम उत्पन्न कर अध्यादेश कार्यान्वित कर यह अधिनियम महाराष्ट्र  के माथे पर थोप दिया । अध्यादेश की प्रस्तावना में भोंदू लोगों द्वारा होने वाले शोषण का प्रमाण भयानक होने की बात बताई गई है । वास्तव में अध्यादेश पारित होने से आज तक केवल १६ परिवाद प्रविष्ट हुए  हैं । इस अधिनियमानुसार प्रविष्ट अपराध अप्रतिभू सम्मत होने वाले तथा अदखलपात्र हैं । ऐसी स्थिति में ७ परिवादों पर अपराध भी प्रविष्ट न होना, इस अध्यादेश की असफलता है । 

हिंदूराष्ट्र स्थापना हेतु बेंगलुरू में हिंदू अधिवेशन का आयोजन

हिंदू जनजागृति समिति की ओर से १ दिसंबर को बनशंकरी, बेंगलुरू के संत श्री आसाराम जी आश्रम में हिंदू अधिवेशन का आयोजन किया गया था।

इस अधिवेशन में धर्माचार्य, अधिवक्ता तथा धार्मिक नेताओं के साथ १५० से अधिक हिंदू संगठनों के पदाधिकारी उपास्थित थे । अधिवेशन का उद्घाटन कुड्ली मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विद्याभिनव सरस्वती स्वामी जी, अधिवक्ता श्री. अमृतेश, प.पू. आसाराम बापू आश्रम के कर्नाटक प्रांत प्रचारक श्री. रविकुमार जी, हिंदू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य समन्वयक श्री. मोहन गौडा ने दीपप्रज्वलन कर किया ।

अधिवेशनमें श्री रामसेना, हिंदू महासभा, इस्कॉन, भारत जागृत मोर्चा जैसे अनेक हिंदुत्ववादी संगठनोंने सहभाग लिया था । 

तिरुपति में इस्लामिक विश्वविद्यालय का हिन्दू संगठनों द्वारा कड़ा विरोध

हिंदू जनजागृति समिति की श्रीमती उमा रविचंद्रन ने यह भय व्यक्त किया है कि तिरुपति में निर्माण किए जाने वाले इस्लामिक विश्वविद्यालय के पीछे हिंदू संस्कृति, मंदिर तथा तीर्थक्षेत्र नष्ट करनेका षडयंत्र है । बाबर ने अयोध्या में रामजन्म भूमि पर मस्जिद निर्माण की, औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ तथा मथुरा के श्रीकृष्ण मंदिर के पास मस्जिद निर्माण की । 

यदि हम इस्लामिक विश्वविद्याल का विरोध नहीं करेंगे, तो तिरूपति के मंदिर भी एक दिन मस्जिद हो जायेगी । हिंदू जनजागृति समिति द्वारा २० अक्तूबर को अरणी में इस्लामिक विश्वविद्याल के विरोध में प्रदर्शन किया गया, उस समय श्रीमती उमा रविचंद्रन् ऐसा कह रही थीं । 

इस प्रदर्शनमें शिवसेना, हिंदू मुन्नानी (हिंदुओंके लिए अग्रेसर), भाजपा, रा.स्व. संघ, विहिंप इन संगठनोंके ७५ से अधिक कार्यकर्ता सम्मिलित हुए थे ।

श्री जनार्दन स्वामी के गाए श्री व्यंकटेश्वर के भक्ति गीत से इस प्रदशर्न का प्रारंभ हुआ । स्वामी उनके १० भक्तों के साथ प्रदर्शनमें सम्मिलित हुए थे ।


तामिलनाडु के सन न्यूज, तंती टीवी, कलाइंगर टीवी, जया टीवी, पॉलीमेर, मक्कल टीवी, जेमिनी न्यूज आदि समाचार प्रणाल द्वारा इस प्रदर्शन का समाचार संकलन किया गया । साथ ही दिनकरन्, दिनाथंसी, दिनामलर, तामिलमुरासू आदि समाचार पत्रों ने भी समाचार संकलन किया ।

हिंदू मुन्नानी संगठन के कार्यकर्ताओं ने समिति के कार्यकर्ताओं से इस्लामिक विश्वविद्यालय के छायाचित्र लिए । उन्होंने बताया कि तिरूवन्नामलाई में वे इसी प्रकार के प्रदर्शन का आयोजन करने वाले हैं ।

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