हिन्दू संगठनों ने आजम खां को दिखाए काले झंडे

वीरा चैरिटेबिल सोसायटी के क्रीड़ा समारोह में शामिल होने आ रहे नगर विकास मंत्री आजम खां को हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कुटिया कालोनी पर काले झंडे दिखाए। प्रशासन की तमाम घेराबंदी को धता बताकर कार्यकर्ताओं ने कवाल कांड को लेकर आजम का विरोध जताया।

रविवार को मंत्री आजम खां कार से बिजनौर पहुंचे। नूरपुर रोड से रिंग रोड होते हुए उन्हें नेहरू स्टेडियम में आना था। नगीना एवं नजीबाबाद चक्कर रोड के बीच कुटिया कालोनी पर पहले से ही खड़े हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने कवाल कांड के विरोध में आजम खां के काफिले को काले झंडे दिखाए। हालांकि डीएम और एसपी समेत अन्य अधिकारी पहले से ही सूचना मिल जाने पर इनकी तलाश में जुटे हुए थे, लेकिन काफी चौकसी के बावजूद हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता अपने मकसद में कामयाब हो गए। 

भाजपा विधायक कुंवर भारतेंद्र सिंह के प्रतिनिधि संजीव कुमार के अनुसार काले झंडे दिखाने वालों में नरेंद्र महलका, मनोज चौधरी, जितेंद्र राजपूत, उदित कुमार, बलराज सिंह, राजीव सिंह, संजीव कुमार, ललित कुमार, कामेंद्र, अमित, लोकेंद्र, मिथुन, सुभाष सिंह व अंकुर आदि शामिल थे।

मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस का साथ देना जरूरी है - आज़म खां

उत्तरप्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां सोमवार की रात अलीगढ़ में एक निजी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस का साथ देना मजबूरी नहीं, जरूरी है।

उन्होंने कहा कि किसी हाल में किसी कातिल को हिंदुस्तान का बादशाह नहीं बनने देंगे। नगर विकास मंत्री आजम खां रामपुर से कार से सोमवार की रात करीब 11 बजे यहां पहुंचे और नौरंगाबाद में एक विवाह समारोह में शरीक हुए।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए आजम खां ने कहा कि कर्मचारी काम ही कहां करते हैं जो हड़ताल का अहसास हो। उन्होंने कहा कि पता ही नहीं चल रहा है कि प्रदेश में कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है।

मुजफ्फरनगर में दंगा पीड़ितों से अभी तक न मिलने के सवाल पर आजम खां ने कहा कि इसका जबाव तो आरएसएस से पूछिए। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में जो हुआ, वह सब आरएसएस की ही देन है।

लोकसभा चुनावों में सपा की स्थिति पर उन्होंने कहा कि हम पूरा प्रदेश जीतेंगे। दरअसल, अब लगने लगा है कि फासिस्ट ताकतों का ग्राफ गिर रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग बीमारी का मजाक उड़ा रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबां में झांक लेना चाहिए। सही मानिए सपा में बापू का कोई हत्यारा नहीं है।

मंत्री ने कहा कि सपा सरकार में मिल जुलकर काम होता है। भाजपा में आरएसएस की तानाशाही चलती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी को रिजेक्ट कर हमारे मुलायम सिंह यादव को पीएम बनाइए। इस दौरान सपा के प्रदेश सचिव मुजाहिद किदवई मौजूद थे। 

मुजफ्फरनगर में हिंदू अब भी न्याय की प्रतीक्षा में : साध्वी डा. प्राची

मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश) में समाजवादी पार्टी का प्रशासन मंत्री आजम खान के हाथ का खिलौना बन गया है। हिंदू लडकियों पर होने वाले अत्याचारों के परिवादों की लिखाई नहीं होती । भाजपा नेता द्वारा विरोध करने का प्रयास करने पर उन्हें भी प्रशासन द्वारा दुखद अनुभव आए । 

अत: इससे सारे हिंदुओं में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई है तथा प्रशासन उनकी समस्याओं की ओर दुर्लक्ष कर रहा है, विश्व हिंदू परिषद की साध्वी डा. प्राची ने प्रसिद्धि हेतु दिए पत्रक में ऐसे खेद व्यक्त किए हैं तथा मुजफ्फरनगर में हाल ही में हुए दंगे में हिंदुओं की बडी मात्रा में हानि हुई है । उस कारण सहस्रों लोग बेघर हो गए, किंतु प्रशासन के कुछ भी न करने से हिंदू न्याय की प्रतीक्षा में हैं । उन पीडित हिंदुओंके साथ न्याय किया जाए, साध्वी डा.प्राचीने ऐसी मांग भी की है ।

साध्वी डा. प्राची आगे कहती हैं, एक हिंदू लडकी को छेडे जानेपर उसके विरुद्ध प्रशासन ने कोई भी कार्यवाही नहीं की । अत: कुछ शांत जिलों में भी दंगे हुए । शामली नाम के गांवमें ४ धर्मांधों ने एक हिंदू लडकी के साथ बलात्कार किया; किंतु उसके विरुद्ध अपराध प्रविष्ट नहीं किया गया । परिणामस्वरूप हिंदुओं में क्रोध उत्पन्न हुआ तथा उस लडकी को न्याय प्राप्त कराने हेतु भाजपा के एक नेता आगे आए; किंतु प्रशासन ने उनके विरोध में अनुचित वर्तन किया ।

इन सारी घटनाओं की पार्श्वभूमि पर शामली गांव में शांतिपूर्ण वातावरणमें महापंचायत आयोजित की गई । वहां पीडित लडकी को न्याय दिलाने की मांग की गर्ई; किंतु प्रशासन ने उधर दुर्लक्ष ही किया । मुजफ्फरनगर में हिंदुओें ने न्याय प्राप्त होने की मांग की तथा प्रशासन के सामने अपना दुख व्यक्त किया । इसके पश्चात जब हिंदू घर लौट रहे थे, तब धर्मांधों ने हिंदुओं पर आक्रमण किया तथा हिंदुओं की हत्या की । इतना सब होने पर भी प्रशासन ने मौन धारण कर रखा है । हिंदू न्याय की प्रतीक्षा में हैं ।

तुष्टीकरण की नीति अपनाकर हिंदुओं पर कुठाराघात कर रही सपा सरकार : वेदांती

बुधवार को परशुरामपुर क्षेत्र के मखौड़ा धाम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा श्रीराम जानकी मंदिर पर पूजन अर्चन के बाद विशाल भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती सहित लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया तथा देश में राम राज्य की स्थापना करने का संकल्प लिया।

भंडारा यज्ञ में प्रतिभाग करने आए श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए वेदांती ने कहा कि प्रदेश सरकार एक विशेष वर्ग तथा आजम खां को खुश करने के लिए तुष्टीकरण की नीति अपनाकर हिंदुओं की आस्था व श्रद्धा पर कुठाराघात कर रही है। मुजफ्फरनगर दंगा, चौरासी कोसी परिक्रमा पर रोक तथा राम लला के दर्शन करने में बाधा डालना सरकार की कुत्सित मानसिकता का परिचायक है। श्रावस्ती व पैकोलिया में गो वंशियों की हुई हत्या के आरोपियों पर नकेल न कसा जाना निंदनीय है।

बुधवार को इस स्थान पर पूर्व सांसद व रामजन्म भूमि न्यास के सदस्य पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती, आचार्य अखिलेश दास, भगवती दास शरण, शिव किशोरी शरण, महंथ रामदास, वरूण दास, राघवेन्द्र दास बृजराज शुक्ला, अनंत कृष्ण पांडे, गिरीश, संतोष शुक्ल पूर्व सांसद श्रीराम चौहान, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रेमसागर तिवारी, यशकांत सिंह, अजय सिंह, पुष्कर मिश्र, चेयरमैन अशोक गुप्ता, अखंड प्रताप, महेश शुक्ला, अखिलेश पांडे बाबा, विनयशंकर मिश्र, दिनेश मिश्र, विनोद गुप्ता, पप्पू जायसवाल, सीताराम मौर्य आदि ने भाग लिया।

मुजफ्फरनगर पर सबसे बड़ा खुलासा, जानें क्यों और कैसे भड़का दंगा !

दंगों पर आज तक का सबसे बड़ा खुलासा | सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन | सुलगते मुजफ्फरनगर का सबसे बड़ा और सबसे गहरा राज | आज तक पर दंगों की हर परत की पोल मुलायम सिंह और अखिलेश के अफसरों ने खोली |
सियासत के स्याह होते रंगों में एक जलता हुआ शहर, जिसकी आंच १५ दिन बाद लखनऊ पहुंची तो अखिलेश मुजफ्फरनगर पहुंचे और १७ दिन बाद आंच दिल्ली दरबार पहुंची तो प्रधानमंत्री इस शहर पहुंचे | शहर की फिजा बता रही है कि दंगे की आंच में अब राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं |
इस दंगे में अब तक चालीस से ज्यादा मौतें हुई और चालीस हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गये | पहली बार यहां लोग अपने ही गांव और अपने ही कस्बों में रिफ्यूजी हो गये | कई सवाल हैं जिनके जवाब आज तक ने खोजने की कोशिश की | क्या इन दंगों को सरकार रोक सकती थी? क्या बेगुनाहों को मरने से बचाया जा सकता था? क्या पुलिस के हाथ बंधे थे? क्या दंगाइयों पर गोली चालने से डर गई थी पुलिस?
जानसठ तहसील का खुलासा
मुजफ्फरनगर का कवाल गांव, जानसठ तहसील में आता है | यही वो गांव है जहां से २७ अगस्त को दंगे दो समुदाए के बीच नफरत की चिंगारी भड़की और फिर उसे नेता हवा देते चले गए | ये वही कवाल गांव है जहां पिछले ६६ साल से हिंदू और मुसलमान भाई-चारे और मुहब्बत के साथ रहते चले आ रहे थे | लेकिन अब वहां की धरती नफरत के लहू से लाल हो गई है | आज तक ने जानसठ तहसील के सर्किट हाउस में स्टिंग ऑपरेशन किया, फिर जो खुलासा हुआ, जानकर आप भी दंग रह जाएंगे |
मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील के कवाल गांव में २७ अगस्त को एक लड़की से छेड़छाड़ को लेकर दोनों समुदाय ऐसे भिड़े कि घंटेभर में मोहल्ले में तीन लाशें गिर गईं और अमन चैन तार-तार हो गया |
इलाके के एसडीएम आर सी त्रिपाठी और सर्किल अफसर जे |आर जोशी दोनों कर्फ्यू में डूबे शहर का गश्त करके लौटे थे | २७ अगस्त को जे |आर जोशी ने दंगा करने वाले 8 लोगों को मौके से हिरासत में लिया था और थाने लाए थे | जोशी का कहना है ये दंगाई दोहरी हत्याओं के मुख्य संदिग्ध थे, लेकिन उस रात ऊपर से दबाव आया और दंगाइयों को थाने से छोड़ना पड़ा |
आज तक - एसडीएम साहब क्या (दंगाइयों के घरों की) तलाशी हुई थी, या तलाशी अवॉइड की गई?
सीओ - नहीं ... नहीं .. बिल्कुल पूरी तलाशी हुई ...
एसडीएम - तलाशी हुई, पकड़े गए.... अभियुक्त पकड़े गए ....
सीओ - ऑफ द रिकॉर्ड पूरी बात हम बताएं, उस दिन जैसे ही घटना (हत्याएं) हुईं उसके बाद तलाशी हुई, उस दिन हमने १२ आदमी जितने वहां आस-पास के जो भी थे, एक-एक आदमी को पकड़ा .... कोई अवैध असलाह नहीं मिला ये अलग बात है ....
आज तक - एक्टचुअल मुलज़िम (पकड़े थे आपने) ....
सीओ- बिल्कुल उन्हीं में थे .... और उसके बावजूद उनको ना ले जाकर उनकी एफआईआर इस ढंग से करा दी .... जिसकी वजह से सब (छूट गए) .... इसके बाद SSP, DM का ट्रांसफर हो गया .... उन्होंने अपनी मौजूदगी में सर्च कराया था |
इन दोनों अधिकारियों का कहना था, मुलज़िम पकड़े जाने के राजनीतिक दबाव में फर्जी एफआईआर कराई गई और असली मुलज़िम छोड़ दिए गए |
आज तक - अच्छा ....पकड़ लिया था (असली मुलज़िमों को)
सीओ - पकड़ लिया था .... एफआईआर में नाम देखा तो मात्र एक आदमी का नाम देखा | हमारे सामने मजबूरी थी....
एसडीएम - Tainted एफआईआर हुई थी ....
आज तक- फिर छोड़ दिया ....
सीओ - उन्होंने कह दिया ठीक है कि (इनके नाम) नहीं है एफआईआर में, उनको बैठाने की डिटेन करने की जरूरत क्या है |
आज तक - तो जो ७ - ८ आदमी पकड़े गए थे ....यानी लाए गए थे थाने वहां से ....
सीओ - नहीं ....थाने लाए थे ....बातचीत की उसने....उसमें उन्होंने कहा कि हम वहां नहीं थे ....हम फलानी जगह थे ....लेकिन थे सब वहीं (घटना स्थल पर)
आज तक- बाद में सबको छोड़ दिया
३ - ३ लाशें गांव में बिछा दी गईं और मौके से संदिग्ध पकड़े गए, लेकिन दबाव में छोड़ दिया गया, सच तो ये है कि कुछ घरों की तलाशी लेने पर एसएसपी मंजीत सैनी और डीएम सुरेंद्र सिंह का तबादला कर दिया | बाद में नए डीएम ने आकर जांच की दिशा, कहीं और मोड़ दी |
आज तक - ये घटना (हत्याओं की) कब हुई थी, संदिग्धों को कितने बजे गिरफ्तार किया गया
सीओ - घटना २ बजे की थी ...
आज तक - नहीं ...गिरफ्तारी कितने बजे की थी
सीओ - चार ...साढ़े चार बजे के आसपास...जैसे ही Deadbody वहां से उठाई गईं थीं |
आज तक - और उन संदिग्धों को छोड़ा कैसे गया ....
सीओ - लेट नाइट छोड़ दिया गया था | (ऊपर से) आदेश आ गए थे .....
आज तक - डीएम के ट्रांसफर के बाद ....
कवाल में कानून का मज़ाक उड़ाया गया | तलाशी लेने पर डीएम का ट्रांसफर किया गया, फर्जी एफआईआर लिखी गई, पकड़े गए आरोपी छोड़े गए, और बाद मे दंगा भड़क गया | अब आगे की दास्तान-
आज तक - जितने Accused को आपने पकड़ा था, क्या वो वास्तव में (सदिंग्ध) थे
सीओ - देखो .... ऐसा है कि .... कैसे कह दें.... देखने वाले जब eyewitness कह रहे हैं कि मौके पर थे .....
एसडीएम - they were prime suspects (वो मुख्य संदिग्ध थे)
आज तक - prime suspects ....वही major mistake हुई और वो मैजेस दूसरी community में चला गया |
एसडीएम- ये तो मतलब दुर्भाग्य है पूरे देश का, इस सिस्टम का, जैसे की कोई घटना होती है, ये ***** नेता तुरंत आकर बैठ जाते हैं ....

 
इन अधिकारियों का मानना था कि दोहरी हत्याओं के मामले में कुछ घरों की तलाशी ली गई जिसपर कुछ रसूखदार नेता डीएम और एसएसपी से नाराज़ हो गए और दोनों का तबादला कर दिया गया | इस कार्रवाई से, इलाके में सांप्रदायिक तनाव भड़का | अगर डीएम और एसएसपी का उस रात तबादला ना होता तो अपराध की घटना सांप्रदायिक दंगे में ना तब्दील होती | लेकिन इससे बड़ा खुलासा किया फुगाना थाने के सैकेंड अफसर ने, जिनके सामने अल्पसंख्यकों के गांव के गांव राख कर दिए गए |
७ सितंबर की शाम महापंचायत में शामिल कुछ किसानों पर हमले के बाद अगली सुबह शाहपुर और बुढ़ाना तहसीलों में दंगे ने एक नया रंग लिया था | ७ सितंबर की प्रतिक्रिया में यहां गांव-गांव में हिंसा का ऐसा नंगा नाच हुआ जो इन कस्बों में १९४७ के दंगों में भी देखने को नहीं मिला | ८ सिंतबर की हिंसा का सबसे ज़्यादा कहर फुगाना इलाके में मचा |
आज तक - आपके यहां कितनी casuality हैं |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- १६ हैं करीब .....नहीं आपके क्षेत्र में कितनी casuality हैं ...हमारे क्षेत्र में १६ हैं ......
आज तक - तो क्या ......पुलिस फोर्स एकदम नहीं पहुंच पायी मौके पर ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस थोड़ी सी थी
आज तक - कम थी पुलिस ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- हां ......
आज तक - जब दंगा शुरु हुआ (उस वक्त वहां पर आपके कितने लोग थे)
आर एस भगौरसैकेंड अफसर- उस समय जनपथ की क्या स्थिति थी, हम नहीं जानते, जब हमारे थाना क्षेत्र में काम शुरू हुआ तो दूसरे थाना क्षेत्र में भी काम शुरू हो गया | अब हमें ये नहीं पता कि दूसरे थाना क्षेत्र में या जनपद में क्या हो रहा है | जब अधिकारियों को इस बात का पता चला, तो अधिकारियों अपनी योजना, अपनी व्यवस्था करने में लगे | हमारा उनसे संपर्कि नहीं हो पाया | अब संपर्क करने के लिए कारण है, कि एक हाथ से गोली चला रहे हैं और दूसरे हाथ से मोबाइल (फोन) कर रहे है, तो मुसीबत की स्थिति है ......
आज तक - बिल्कुल ......
आर एस भगौरसैकेंड अफसर -  देखो practical है सब practical है ......
आज तक- कितनी देर तक (आपका अधिकारियों) से संपर्क नहीं हुआ होगा......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- अरे भई हम घंटे भर पर जूझते रहे ......फंसे रहे ......हमारी जान लगी रही | मोबाइल निकालते ......ok करते और फिर जेब में रखते ......ऐसी स्थिति थी हमारी |
आज तक - जब आप लोग (मौके पर) लगे हुए थे, तो असलाह की कमी थी
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- देखो असलाह ......तो मैं बता रहा हूं, असलाह तो कुछ है नहीं ...... असलाह जो हमारे पास है, असलाह जो हमारे हैं ही नहीं ......और जो हैं वो चलता ही नहीं ...... भाई जो चल गया तो बढ़िया हमारी जान ऊपर वाले की कृपा है | तो चल भाई वो भी मन हो ......नहीं चला तो नहीं ......मैं आपको वो facts बता रहा हूं जो कोई नहीं बताएगा |
आज तक - मेन रोल मेरे ख्याल से आज़म xxxxx का है, कि उन्होंने pressurise किया |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- बिल्कुल ठीक है ......बिल्कुल ठीक है ......
आज तक - आप कुछ नहीं करेंगे ......जो हो रहा है होने दो ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - हां ......यहीं हुआ ......
आज तक - political है ये ......रोटियां सेंक रहे हैं......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - सब रोटियां सेंक रहे हैं ......
ज़ाहिर तौर पर सैकेंड अफसर जानते हैं कि दंगो में किसका क्या किरदार रहा है, लेकिन इस अफसर से भी बड़ा खुलासा पुलिस और प्रशासन के कुछ और अधिकारियों ने किया | जिस पर आप दंग रह जाएंगे |

 
मुजफ्फरनगर का मीरापुर थाना क्षेत्र, सच्चाई आपको डरा देगी, सहमा देगी, इस थाने के हल्के में दंगाइयों ने मौत का जो खेल खेला, वो वाकई ख़ौफनाक भी है और दर्दनाक भी |
२७ अगस्त से शुरू हुए दंगे ८ सितंबर तक मुजफ्फरनगर को दहलाते रहे, लेकिन प्रशासन से लेकर सरकार तक, दंगाइयों पर काबू पाने में नाकाम रही | जाहिर तौर पर दंगों की आड़ में नेता अपना अपना फायदा देख रहे थे | मीरापुर थाने के एसएचओ अनिरुद्ध कुमार गौतम के हल्के में भी दंगाइयों ने सड़कों पर मासूमों के मौत के घाट उतारा | और हैरतअंगेज़ बात ये है कि दंगाइयों पर कार्रवाई करने से पुलिस कतराती रही | गौतम मानते हैं कि डीएम एसपी को एक साथ हटाने की वजह से जिला प्रशासन नेतृत्वविहीन हो गया था | गौतम का कहना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेता डीएम एसपी को कई दिनों से एसपी को हटाने का दबाव बना रहे थे, और उन्हें आखिरकार मौका मिल गया |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ......आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर घटना के चंद घंटों के अंदर ......उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी .....डीएम की......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां डेढ़ साल ......दो साल .....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती  भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - सब political stunt ......
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ...
अनिरुद्ध कुमार गौतमएसएचओ - भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ......जब कांवड़ चल रही थी तबसे ......political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ......
आज तक - क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ......कि हमारे काम नहीं कर रहे है ......right or wrong ...... यही कारण है और क्या है ......
दरअसल २७ अगस्त को कवाल गांव की घटना छेड़छाड़ से शुरू हुई और दो गुटों के बीच झगड़े में तब्दील हो गई | ये सच है कि इस घटना में हत्या हुई, लेकिन ये भी सच है कि हत्या होने के बावजूद घटना ने कोई सांप्रदायिक रंग नहीं लिया | दिक्कत तब शुरु हुई जब डीएम और एसएसपी ने घर घर तलाशी लेनी शुरू की |
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे....गांव घेर लिया था पूरा ..
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ....पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
आज तक - ये तो अच्छा काम था ....
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
लेकिन दंगों की आड़ में ट्रांसफर, पोस्टिंग और सस्पेंशन का ही खेल नहीं हो रहा है, असली खेल तो वोट का था, और इसपर भी खुलासा किया उन लोगों ने जो मौका-ए-वारदात पर मौजूद थे |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ....आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर ....घटना के चंद घंटों के अंदर ....उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी ...डीएम की....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां | डेढ़ साल ....दो साल ....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती | भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- सब political stunt ....
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ....जब कांवड़ चल रही थी तबसे .... political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ....
आज तक- क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ....कि हमारे काम नहीं कर रहे है ....right or wrong.यही कारण है और क्या है ....
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे गांव घेर लिया था पूरा ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ...पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंहइंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
आज तक का खुफिया कैमरा जहां-जहां पहुंचा, अखिलेश के अफसरों ने हमें भी चौंका दिया | और वही सच्चाई अब हम देश के सामने रख रहे हैं | बात मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना कोतवाली की | यहां के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह ने दंगों का सच बताया तो एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना ने भी दंगों पर सियासी खोल को उघाड़ डाला |
ये हैं मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह | दंगे के सभी दिनों में ये इलाके में रात और दिन गश्त करते रहे | ज़ाहिर तौर पर इनपर भी हर तरह का राजनीतिक दबाव रहा |
किसको पकड़ना है, और किसको छोड़ना है, शायद ये फैसला यूपी में कोतवाल नहीं करते | इंस्पेक्टर ऋषिपाल का मानना है कि पहली बार शहर की जगह दंगे देहात में ज़्यादा फैले | अगर पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स देहात के थानों में मुहैया कराई गई होती, जो कमज़ोर तबके के इतने लोग मारे ना गए होते | देर से पुलिस बल भेजे जाने के कारण गांव में हिंसा बिना रोक टोक चलती रही |
आज तक - (८ सितंबर को दंगा) सुबह ७ बजे से शुरु हो गया था
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- सुबह ७ बजे से कई गांव में ....
आज तक - अच्छा....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- वही तो मैंने बताया ....
आज तक - फोर्स पहुंची नहीं थी ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - ३ - ४ जगह ....एक गांव में पहुंचकर control करा ....
आज तक - अच्छा ....सुबह सुबह फोर्स होगी नहीं थाने में....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- न हीं ....थाने में ....
आज तक - देर तक गश्त में थे ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- नहीं थाने में मेरे पास २० सिपाही है, ३ - ४ दारोगा हैं, तो मैं कोशिश करूंगा कि पहले एक गांव में हिंसा हो गई तो मैं 4 सिपाही से हिंसा नहीं रुकवाउंगा |
मैं सोचता हूं कि पूरी फोर्स को लेकर हिंसा रोक दूं ....लेकिन जबतक यहां हिंसा रोकता, तबतक दूसरी जगह हिंसा शुरु हो गई | दूसरी जगह पहुंते ...तीसरी जगह हो गई |
आज तक - 
फोर्स कम थी ...
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - फोर्स इतनी नहीं थी कि हर गांव में लगा दी जाती....
मुजफ्फरनगर की पुलिस अधीक्षक यानी एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना के हाथों में दंगाग्रस्त कई थानों की कमान थी | कल्पना सक्सेना का मानना है कि दंगों पर कहीं ना कहीं सियासी रंग चढ़ा है |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम- देखिए कई तरीके की बातें हुईं, बहुत सी बाते हैं ....इस समय हम लोग बहुत प्रेशर में हैं ....वर्क बहुत सारा है करने को ....फुर्सत से बात करेंगे किसी दिन....
आज तक - लेकिन मैडम उसका जवाब दीजिए हमें आप | मतलब मर्डर को ऐसा सांप्रदायिक रंग क्यों दे दिया गया |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम - देखिए मैं क्या कहूं....बहुत गहराई से बताऊं ....इसमें बहुत कुछ political है, और यहां ऐसा चल रहा है कि मुस्लिम को कुछ लग रहा है | हिंदुओं को लग रहा है कि मुस्लिम appeasement (तुष्टीकरण) बहुत हो रहा है ....
आज तक के ऑपरेशन दंगा में वो सच सामने आया, जिससे मुजफ्फरनगर सुलग उठा था | हिंसा भले ही सुनियोजित ना हो, लेकिन हिंसा भड़काने में साज़िश और सियासत का घालमेल ज़रूर था |

स्त्रोत : आज तक 

राबर्ट वाड्रा भी कॉमनवेल्थ गेम घोटाले में शामिल - आज़म खान


सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की भूमिका की जांच कॉमनवेल्थ गेम घोटाले में भी होना चाहिये, यह कहना है सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान का। आज़म का साफ कहना है कि वाड्रा को महज़ इसलिये बचाया जा रहा है क्योंकि वह कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद हैं, तो साथ में उन्होनें केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को भी निशानें पर लिया।

हरियाणा में जमीन घोटाले में नाम आने के बाद राबर्ट वाड्रा के लिए एक और मुसीबत सामने आ रही है। यूपी के वरिष्ठ मंत्री आजम खान ने कहा है कि कॉमनवेल्थ खेलों में भी राबर्ट वाड्रा की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

यूपी के वरिष्ठ मंत्री आजम खान ने कहा है कि सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट ने विकलांगों से छल किया है। आजम खान ने कहा उनके ट्रस्ट को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं उनसे यही लगता है। आजम ने कहा सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट की जांच बीएसपी सरकार के समय से चल रही है, जो इस सरकार में भी जारी है।

साफ है सलमान खुर्शीद और राबर्ट वाड्रा की मुश्किलें खत्म होनें का नाम नही ले रही है। दोनों पर हर रोज़ रोज नये आरोप लगाये जा रहे हैं लेकिन आज़म खां का राबर्ट वाड्रा पर लगाया गया आरोप और भी संगीन है। पहले ही हरियाणा में ज़मीन घोटाले में नाम आनें के बाद अब आज़म नें कामनवेल्थ खेलों में राबर्ट वाड्रा की भूमिका की जांच कह कर वाड्रा की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है।

आजम खान ने रेलवे कर्मचारियों से जमकर मारपीट की


उत्तरप्रदेश सरकार में दिग्गज मंत्री आजम खान ने कुछ रेलवे कर्मचारियों से जमकर मारपीट की। इतना ही नहीं उन्होंने इन कर्मचारियों को मुर्गा भी बना दिया। 

मंगलवार की रात जब हावड़ा एक्सप्रेस रामपुर पहुंची, तो मंत्री अपने समर्थकों के साथ एसी डिब्बे में चढ़ गए। मंत्रीजी ने एसी कोच के अटेंडेंट निर्मल मुर्मु को दबंग अंदाज में बुलाया और बिस्तर साफ न होने की बात कहते हुए डांटा।

अटेंडेंट ने जब उन्हें बताया कि उनके पास ऐसे ही बिस्तर हैं तो आजम खां ने थप्पड़ जड़ दिए। बाद में मंत्री के समर्थकों ने बाकी अटेंडेंट्स को भी बुलाकर उन्हें मुर्गा बना दिया। मुर्गा बने हुए अटेंडेंट्स को मंत्री समर्थक तब तक पीटते रहे जब तक उन्होंने माफी नहीं मांग ली। 

हावड़ा एक्सप्रेस के कोच अटेंडेंट ने मंत्री पर मारपीट का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की है।

Congress is not clear hearted on Muslim Reservation-Azam Khan

The ruling Samajwadi Party in Uttar Pradesh has blamed the Congress for failing to get reservation for Muslims, and said the latter was never serious about improving the lot of the minorities.

State Urban Development Minister Mohammed Azam Khan Wednesday said the Congress always considered the Muslim community as a mere vote bank that had to be "pampered" before the elections.

Khan's remarks came against the backdrop of the Supreme Court rejecting the Congress-led central government's plea for suspending the Andhra Pradesh High Court verdict quashing a 4.5 percent sub-quota for religious minorities in central educational institutions.

Alleging that the Congress was not "clear hearted" about the Muslim reservation, Khan said the matter would not have stuck like this if the Congress had presented the facts correctly before courts.

Recalling how the Congress raked up the issue of 4.5 percent Muslim sub-quota within the 27 percent reservation for the Other Backward Classes in government jobs during the Uttar Pradesh assembly elections, Khan said all the "drama" was just to get Muslim votes.

The Samajwadi Party leader also said his party was committed to ensuring Muslim reservation and that a committee of legal luminaries, religious leaders and other dignitaries would be constituted to formulate the policy in this regard.

आजम खां पर देशद्रोह का मुकदमा होगा

बदायूं की अदालत ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां के कश्मीर पर दिये गये विवादास्पद बयान को गंभीरता से लेते उनपर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये हैं

जिला अदालत ने सदर कोतवाली पुलिस को तीन दिन के अंदर धारा 124 :क: के तहत मुकदमा दर्ज कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिये हंै ।

तीन जनवरी को बजरंग दल के संयोजक उज्जवल गुप्ता ने अदालत में एक प्रार्थना पत्र दाखिल किया था जिसमें उन्होंने सपा नेता आजम खां के कश्मीर पर दिये गये बयान को राष्ट्रद्रोह का कृत्य बताया था।

सीजीएम पवन प्रताप सिंह ने दोनो पक्षों को सुनने के बाद कोतवाली पुलिस को तीन के अंदर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश पारित किये है।

गौरतलब है कि आजम खां ने 21 दिसम्बर 2010 को बदायूं मे मीडिया से रुबरु होते हुए कहा था, ‘‘मुसलमान को प्रधानमंत्री बनाने की बात कहने वाली यूपीए सरकार में सिर्फ एक मुस्लिम कैबिनेट मंत्री गुलाम नबी आजाद हैं , जो उस कश्मीर के रहने वाले है जिसका भूगोल अभी तक तय नही है कि वह भारत का हिस्सा है या पाकिस्तान का ।’

काग्रेस की सरकार में एक ही मुस्लिम मंत्री वो भी हिंदुस्तान से नहीं कश्मीर से - आज़म खान

हाल ही में दोबारा सपा में शामिल हुए आजम खां का जम्मू-कश्मीर पर दिया बयान कश्मीर के नेताओं को भी बेहद नागवार गुजरा है। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज ने तो आजम को याद दिलाया है कि वे जिसे 'कश्मीर' राज्य बता रहे हैं, वह दरअसल 'जम्मू-कश्मीर' है।

सपा नेता ने कश्मीर के संदर्भ में दिए अपने बयान के सिलसिले में जिस तरह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद के नाम का इस्तेमाल किया है, उससे वे भी आहत हैं। हालांकि इस बारे में पूछने पर आजाद ने सिर्फ इतना ही कहा कि इस पर राज्य के नेताओं ने पहले ही प्रतिक्रिया दे दी है।

आजम के बयान को सरासर गलत बताते हुए सोज ने कहा, 'वह यह भूल रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर हिंदुस्तान का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा।' उन्होंने कहा कि आजम का यह कहना भी पूरी तरह से गलत है कि कांग्रेस मुसलमानों पर यकीन नहीं करती। यह कहना भी तथ्यात्मक रूप से सरासर गलत है कि केंद्र में सिर्फ एक मुसलमान मंत्री है। सिर्फ जम्मू-कश्मीर से ही दो केंद्रीय मंत्री इस सरकार में मौजूद हैं।

उल्लेखनीय है कि आजम खां ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा था कि कांग्रेस ने इस सरकार में सिर्फ एक मुसलमान गुलाम नबी आजाद को ही मंत्री बनाया है, वो भी हिंदुस्तान से न होकर कश्मीर से हैं।

आजम खां निष्कासन रद्द फिर सपा में

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सपा से निकाले गए पूर्व महासचिव आजम खां का निष्कासन आज रद्द कर दिया।

पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने यहां बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने आजम को पत्र लिखकर उनका निष्कासन रद्द किये जाने की सूचना दी है।

उन्होंने बताया कि आजम को लिखे पत्र में कहा गया है कि पार्टी के मुखिया मुलायम ने उनका निष्कासन रद्द करते हुए उनसे अपेक्षा की है कि वह पहले की ही तरह पार्टी की सेवा करते रहेंगे और उनके जैसे वरिष्ठ तथा अनुभवी नेता के सहयोग से सपा और मजबूत होगी।

लोकसभा चुनाव में पूर्व भाजपा नेता कल्याण सिंह को साथ लेने के विरोध में आजम की पार्टी नेतृत्व से ठन गई थी और उन चुनावों के बाद पार्टी ने उन्हें निकाल दिया था।

उल्लेखनीय है कि सपा में आजम की नाराजगी का कारण रहे अमर सिंह और कल्याण सिंह से पार्टी अपना नाता तोड़ चुकी है जिसके बाद से पार्टी में आजम की वापसी की सम्भावना के बारे में कयास लगने लगे थे।

सपा के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे आजम कभी मुलायम के बेहद करीबी सहयोगी थे और राज्य में पार्टी संगठन तथा सपा सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।

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