हिंदूराष्ट्र स्थापना हेतु बेंगलुरू में हिंदू अधिवेशन का आयोजन

हिंदू जनजागृति समिति की ओर से १ दिसंबर को बनशंकरी, बेंगलुरू के संत श्री आसाराम जी आश्रम में हिंदू अधिवेशन का आयोजन किया गया था।

इस अधिवेशन में धर्माचार्य, अधिवक्ता तथा धार्मिक नेताओं के साथ १५० से अधिक हिंदू संगठनों के पदाधिकारी उपास्थित थे । अधिवेशन का उद्घाटन कुड्ली मठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विद्याभिनव सरस्वती स्वामी जी, अधिवक्ता श्री. अमृतेश, प.पू. आसाराम बापू आश्रम के कर्नाटक प्रांत प्रचारक श्री. रविकुमार जी, हिंदू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य समन्वयक श्री. मोहन गौडा ने दीपप्रज्वलन कर किया ।

अधिवेशनमें श्री रामसेना, हिंदू महासभा, इस्कॉन, भारत जागृत मोर्चा जैसे अनेक हिंदुत्ववादी संगठनोंने सहभाग लिया था । 

बेंगलुरु के कांग्रेस पाषर्द को चार साल की कठोर कैद


लोकायुक्त की विशेष अदालत ने आज एक कांग्रेस पाषर्द को भ्रष्टाचार के एक मामले में चार साल के कठोर कारावास की सजा सुनायी। 

लोकायुक्त अदालत के विशेष न्यायाधीश एन के सुधीन्द्र राव ने पाषर्द गोविंद राज को एक व्यक्ति उदय कुमार से एक इमारत में चौथी मंजिल के निर्माण के लिये दो लाख रूपये की रिश्वत लेने का दोषी ठहराते हुए यह सजा दी। 

मोदी ही हो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार - येदियुरप्पा

नरेन्द्र मोदी के प्रशासनिक कौशल की तारीफ करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने कहा कि बैठक में अन्य मसलों के साथ ही मोदी को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने पर विचार होना चाहिए।

सूत्रों से खबर मिली है कि गुरूवार देर शाम गडकरी व अरूण जेटली के साथ हुई बातचीत के बाद  येदियुरप्पा अब शुक्रवार सुबह ही मुम्बई रवाना होंगे।

भाजपा-आएसएस के बीच समन्वय भूमिका निभा रहे संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी भी कार्यकारिणी में पहुंचे और गडकरी से मिले। उन्होंने बंद कमरे में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की।

Muslims opposing Israel consulate in Bangalore

Various Muslim groups, political and nonn-political alike, have opposed the Central Government’s move to allow opening of Israel’s consulate office in Bangalore and said the increasing cooperation between New Delhi and Tel Aviv “makes India’s stand on Palestine imbroglio a farce.

The Social Democratic Party of India, (SDPI), has taken umbrage over the decision of the Congress-led UPA Government granting Israel permission to open a Consulate in Bangalore following India's External Affairs Minister S.M. Krishna’s visit to that country.

“It is pertinent to note that increasing cooperation between New Delhi and Tel Aviv makes India’s stand on Palestine imbroglio a farce,” said SDPI on Friday.SDPI national president Mr. E. Aboobacker and general secretary Mr. A. Sayeed in a joint statement have condemned the Union Government’s move, and said: “India seeking to forge a joint strategy with Israel to deal with the scourge of terrorism is a big joke as the latter over nine decades has been massacring unarmed Palestinians, including women and children, with impunity.

The duo substantiated their point by recalling Mahatma Gandhi’s statement in 1946 wherein he had said: "But in my opinion, they (the Jews) have erred grievously in seeking to impose themselves on Palestine with the aid of America and Britain and now with the aid of naked terrorism. Why should they depend on American money or British arms for forcing themselves on an unwelcome land? Why should they resort to terrorism to make good their forcible landing in Palestine?"Mr. Aboobacker said Israel’s ever increasing presence in India has proved to be a bane for the countrymen. In many of the communal conflagrations, especially the aftermath of Babri Masjid demolition, along with and number of bomb blasts in the country, apprehensions have been expressed in many quarters about Israel’s involvement in fermenting trouble.

This came true as soon after the Congress Government led by Prime Minister PV Narsimha Rao established diplomatic relations with Israel in 1992-1993 Indian people were soaked in blood in the post Babri Masjid demolition riots.He said following 26/11 terrorist attack in Mumbai in some sections of the Press it was alleged that it was the handy work of saffron forces with the help of Mossad, the national intelligence agency of Israel. After a number of saffron terrorism escapades led to media revelation about the Hindutv outfit Abhinav Bharat’s sinister plan to create complete chaos and lawlessness in the country and then overthrow the elected Government of India which was also with the help of Mossad. The aim was thereby to establish a Hindu Rashtra.

It is well-known that the Mossad is responsible for intelligence collection and covert operations which are suspected to include targeted killings and paramilitary activities beyond Israel's borders, he pointed out.However, they clarified that the SDPI is not against Jews or Israel, but, certainly against the policy of Israel which while playing havoc against the helpless Palestinian people is a constant threat to the Arab world in the Middle East.Meanwhile, Indian Union Muslim League took strong exception to the statements made by Foreign Minister S.M. Krishna during his recent visit to Israel. League’s chief Prof. Basir Ahmed Khan said that Mr. Krishna described Israel and India as natural allies and said that both the countries were facing international terrorism.

“This is travesty of justice because what Israel was facing is an struggle of Palestinians to free their own country from the illegal occupation of Israel; this cannot be equated with terrorism,” said Dr. Khan. The League leader expressed his indignation at the timing of the Israel visit by Foreign Minister because at this time mosque are being burnt and Israeli forces are torturing the Palestinian youth. He also expressed concern over the foreign policy of UPA govt.Popular Front of India has also condemned UPA Government for signing a pact with Israel to forge anti-terror activity.

“It amounts to mere mockery because Israel is by itself a fountain head of terrorism globally. Unfortunately, our government is acting as a tool to implement the aggressive policies of USA and its close ally Israel. Also Popular Front views the India-Israel joint decision to open Israel’s consulate in Bangalore, as a threat to our national interests. It will be a catalyst to the communal and terrorist agenda of the Hindutva fascist outfits, particularly in Karnataka state which is already in their grip,” E. M. Abdul Rahiman, Chairman, PFI said in a statement.

लोकसभा चुनाव में 40 लाख तक खर्च कर सकेंगे प्रत्याशी - मोइली

केंद्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने रविवार को कहा कि अगले तीन-चार महीनों में चुनाव प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान प्रत्याशी 25 लाख की जगह 40 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे। विधानसभा चुनाव में भी खर्च सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 16 लाख की जाएगी।

'चुनाव सुधार पर छठे क्षेत्रीय परामर्श' में मोइली ने यहां कहा कि चुनाव प्रणाली में सुधार वक्त की जरूरत है। इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर परामर्श के बाद तीन से चार महीनों में चुनाव प्रणाली में सुधार लाया जाएगा। मोइली ने बताया कि संविधान के अनुपालन की समीक्षा करने वाले राष्ट्रीय आयोग की चुनाव खर्च संबंधी सिफारिशों को एक सप्ताह में स्वीकृति दे दी जाएगी। उन्होंने कहा, यदि हम धन-बल, माफिया की मौजूदगी और अपराधियों के बल प्रयोग को रोकने का औजार ढूंढ लेते हैं तो बाकी सभी चीजें ठीक हो जाएंगी।

हमें अपराधियों को चुनाव प्रणाली से दूर करने की जरूरत है जिनका अंतिम उद्देश्य राजनीतिक दलों को वित्तीय मदद देकर राष्ट्रीय सत्ता पर कब्जा करना होता है। मोइली ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव सुधार के लिए लाए गए प्रस्तावों में लोगों की आवाज की झलक मिलनी चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार के सभी मामलों का राज्य और केंद्र स्तर पर छह महीने के अंदर निपटारा सुनिश्चित कर आपराधिक न्याय प्रणाली की शुद्धता पर भी जोर दिया।

हंसराज भारद्वाज ने लोकतन्त्र की सरेआम हत्या की - येदियुरप्पा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने राज्यपाल एच आर भारद्वाज की उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मामला चलाने की अनुमति देने कोसरेआम लोकतन्त्र की हत्याकरार दिया.इस बीच कर्नाटक में सत्ताधारी भाजपा ने राज्यपाल के मुख्यमंत्री के खिलाफ सुनवायी शुरू करने की प्रदान की गई अनुमति के विरोध में शनिवार को पूरे राज्य में बंद का आह्वान किया है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के एस ईश्वरप्पा ने यहां कहा कि भाजपा ने राज्यपाल के इस कदम के खिलाफ शनिवार को पूरे राज्य में बंद का आह्वान करने का फैसला किया है.येदियुरप्पा ने राज्यपाल द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला चलाने की एक मंच के दो वकीलों को अनुमति प्रदान किये जाने के तत्काल बाद जारी बयान में कहा कि यह और कुछ नहीं बल्कि लोकतंत्र और न्याय की सरेआम हत्या है.

उन्होंने राज्यपाल पर आरोप लगाया कि वह अपने कार्यालय का उपयोग अपनी राजनीतिक उद्देश्य पूरा करने के लिए कर रहे हैं. उन्होंने साथ ही विपक्ष पर भी आरोप लगाया कि वह जो जनादेश से प्राप्त नहीं कर सके उसे वह राज्यपाल के कार्यालय और राजभवन के जरिये प्राप्त करना चाहता है.

उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल ने मामला चलाने की अनुमति किसी भी प्रारंभिक जांच अथवा निजी शिकायत से संबंधित मामले में मुझे कोई मौका दिये बगैर ही दी है.

एस बंगारप्पा फिर छोड़ रहें हैं कांग्रेस

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस बंगारप्पा कांग्रेस को दुबारा अलविदा कर जनता दल :सेक्युलर: में शामिल हो सकते है।

बंगारप्पा ने जद :एस: के एच डी कुमारस्वामी और अन्य नेताओं के साथ संक्षिप्त मुलाकात के बाद संवाददाताओं को बताया ‘‘ कुमारस्वामी ने मुझे जनता दल सेक्युलर में शामिल होने का आमंत्रण दिया है।

मैं इस बारे में तीन से चार दिन के बीच निर्णय लूंगा।’’ मिल रही सूचनाओं के आधार पर पार्टी की सोराबा इकाई में पदाधिकारी को नियुक्त किये जाने के उनके सलाह को नजरअंदाज किये जाने के बाद से वह नाराज चल रहे है।

बंगारप्पा चाहते थे कि पार्टी की शोराबा इकाई में उनके बड़े बेटे कुमार बंगारप्पा की जगह दूसरे बेटे मधु को प्राथमिकता दी जाये।

बंगारप्पा और उनके बड़े बेटे के बीच आपसी संबंध बहुत अच्छे नहीं है। हलांकि पार्टी की शिमोगा जिले की इकाई में नेताओं का बहुमत कुमार बंगारप्पा को प्राथमिकता देने के पक्ष में है।

जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप में एक ईसाई गिरफ्तार

जबरन धर्मांतरण कराने के आरोप में आज केरल के 26 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने बताया कि विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यकर्ता की शिकायत पर उलसूर उपसंभाग पुलिस ने जानसन नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया और उसके पास से प्रचार सामग्री बरामद की।

छवि सुधारने की कोशिश में येदयुरप्पा- बेटे-बेटी को घर छोड़ देने को कहा

अपनी कुर्सी बचाने के बाद छवि सुधारने की कोशिश में कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदयुरप्पा ने अपने बेटे और बेटी से कहा कि तुरंत मुख्यमंत्री आवास छोड़ दें।

मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े एक ऑफिसर ने कहा, ' मुख्यमंत्री ने अपने बेटे बीवाई विजेंद्र और बेटी उमा देवी से बुधवार कहा कि उनका रेसकोर्स स्थित आधिकारिक आवास छोड़कर चले जाएं। दोनों ने तुरंत उनकी बात मान ली। '

गौरतलब है कि येदयुरप्पा के बेटे विजेंद्र, बेटी उमा और उनके पति सोहन कुमार उनके आदिकारिक आवास में ही उनके साथ रहते थे और बड़े बेटे सांसद बीवाई राघवेंद्र अक्सर उनसे मिलने आते थे।

येदयुरप्पा पर सरकारी जमीन डीनोटिफाई करके अपने बेटों और दामाद को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा जिसके बाद उनकी कुर्सी जाते-जाते बची। इसके बाद ही येदयुरप्पा ने इन्हें अपने आधिकारिक आवास से हटने को कहा।

माना जा रहा है कि आलाकमान ने उनसे अपने रिश्तेदारों से दूरी बरतने को कहा है और येदयुरप्पा ने आलाकमान से वादा किया है कि वह स्वार्थी तत्वों और अपने रिश्तेदारों को प्रशासन से दूर रखते हुए स्वच्छ शासन सुनिश्चित करेंगे।

Raja Tried to Freeze CAG Report Before His Way Out

A Raja the Telecom Minister had made an effort to freeze the report of the national auditor on the 2G spectrum scam just days before the same was tabled in Parliament. The report, which accused Raja of flouting almost every rule in the book, ignoring advice from the prime minister down and indulging in blatant favouritism while awarding mobile licences to mostly undeserving companies causing a loss of nearly Rs1,77,000 crore to the government, was tabled in Parliament on November 16.

Raja resigned on November 13 following the political storm after opposition parties and media had accessed the contents of Comptroller and Auditor General (CAG) final report even before it was tabled in Parliament. According to the reports on November 10 the telecom ministry had shot off a letter to the Prime Minister's Office stating that that the national auditor had no powers or duty to challenge policy decisions, while also adding that the law ministry had endorsed this position.

Prior to all these in September, it sought to stonewall queries from the auditor of India's state-run institutions, using the same opinion from the law ministry that said policy decisions cannot be second-guessed by auditors. The department had then told CAG that it would not respond to further queries on the award of frequency spectrum to a new set of telecom operators in 2008 because these were policy decisions.

The telecom department also told the Prime Minister's Office that it could not send detailed replies to queries raised by CAG since all files related to the 2G spectrum allocation had been confiscated by the Central Bureau of Investigation (CBI). DoT in this communication to the PMO also added that the national auditor had questioned the validity of many of the mobile permits issued by Raja in 2008. It also told the PMO that if it was established that the information furnished by the applications were incorrect, the government had the power to cancel the licences. The auditor said that these six companies had disclosed 'incomplete information and submitted fictitious documents and used fraudulent means' for obtaining them.

येदियुरप्‍पा के रिश्तेदारों ने लौटाईं विवादास्पद जमीन

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के रिश्तेदारों ने भले ही विवादास्पद जमीन सरकार को वापस कर दी गई हो, लेकिन इससे सीएम को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी ने इस मुद्दे को काफी गंभीरता से लिया है। पार्टी कोर ग्रुप की आज दिल्ली में रात को बैठक है, जिसमें येदियुरप्पा के भविष्य पर चर्चा होगी।

पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता कर्नाटक के मुख्यमंत्री पर कार्रवाई के पक्ष में हैं, जिससे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चल रहे हंगामे के बीच वे सरकार पर दबाव बढ़ा सकें। इसी बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार पर आरोप लगाया है कि वे उनके खिलाफ षडयंत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विवादों में परिवार को घसीटना ठीक नहीं है। बीजेपी पिछले ६ दिनों से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रही है और इसीलिए कुछ पार्टी नेताओं का मानना है कि येदियुरप्पा पर कार्रवाई की जाना चाहिए, ताकि वे कांग्रेस पर दबाव बना सकें।

सीएम के रिश्तेदारों ने लौटाई जमीन

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे और बेटी ने शुक्रवार को सरकार द्वारा आवंटित विवादास्पद जमीन लौटा दी है। मुख्यमंत्री के पुत्र और सांसद बीवाई राघवेंद्र ने शुक्रवार को बंगलुरु विकास प्राधिकरण को एक पत्र लिखकर आरएमवाई एक्सटेंशन कॉलोनी में आवंटित ५० गुना ८० का प्लॉट वापस लौटा दिया है। इसी तरह उनकी बेटी उमा देवी ने उनके नाम आवंटित दो एकड़ का औद्योगिक प्लॉट भी वापस करने के लिए उद्योग विभाग को लिखा है। उनके परिवार के बाकी सदस्य भी उन्हें आवंटित जमीनें लौटा रहे हैं।

सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश

कर्नाटक सरकार ने हाल ही में इस पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच के दायरे में पिछले १० सालों में हुए भूमि आवंटन के मामले लाए जाएंगे। जांच के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्रियों एसएम कृष्णा, धर्म सिंह और एचडी कुमारस्वामी के कार्यकाल के कथित घोटाले भी शामिल हैं। कर्नाटक में विपक्षी दल जनता दल(सेक्युलर) ने मुख्यमंत्री के जमीन घोटालों को लेकर लोकायुक्त को शिकायत दर्ज कराई है।

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के एक विधायक ने त्यागपत्र दिया

कर्नाटक में विपक्षी कांग्रेस पार्टी के एक विधायक ने विधानसभा से आज त्यागपत्र दे दिया जिस पर पार्टी के शीर्ष नेता सत्ताधारी भाजपा पर विधायक को अपने पक्ष में करने आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री बी एस येद्दयुरप्पा के आवास के सामने धरने पर बैठ गए।


पुलिस
ने हालांकि ने पूर्व उप मुख्यमंत्री सिद्धरमैयाह और प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष आर वी देशपांडेय सहित कुछ विधायकों सहित पार्टी के 70 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर यह धरना समाप्त करा दिया।

कांग्रेसी नेता एक पांच सितारा होटल में बैठक कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें पार्टी विधायक एस वी रामचंद्र के त्यागपत्र की सूचना मिली। सूचना मिलते ही नेताओं ने बैइक समाप्त करके मुख्यमंत्री के आवास के बाहर पहुंचे और धरना शुरू कर दिया।

बेंगलुरु से विधायक रामचंद्र ने अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष के जी बोपैया को सौंपा। हालांकि जब विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय ने कांग्रेस के स्पष्टीकरण के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया तब सिद्धरमैया और देशपांडेय के नेतृत्व में नेताओं ने धरना शुरू कर दिया।

कर्नाटक की भाजपा सरकार को राहत के संकेत

कर्नाटक में भाजपा के 11 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे पर उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ आज एक राय पर नहीं पहुंच सकी और अब 20 अक्तूबर को तीसरे न्यायाधीश इसकी सुनवाई करेंगे।

इसके साथ ही पीठ ने पांच निर्दलीय विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे को एक खंड पीठ को सौंप दिया जो दो नवंबर को इसकी सुनवाई करेगी।

मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर ने विधानसभाध्यक्ष के जी बोपैया द्वारा 11 भाजपा विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को कायम रखा वहीं पीठ के दूसरे न्यायाधीश एन कुमार ने विधानसभाध्यक्ष के आदेश को दरकिनार कर दिया।

न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि 11 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मुद्दे की सुनवाई 20 अक्तूबर को तीसरे न्यायाधीश करेंगे।

पांच निर्दलीय विधायकों के मामले में पीठ ने कहा, ‘‘ हमारा मानना है कि इसे किसी अन्य पीठ को सौंपा जाना चाहिए। हम इसे किसी अन्य पीठ को सौंपेंगे।

कर्नाटक में भाजपा की सरकार ने भ्रष्टाचार और संस्थागत रूढ़ीवाद को बढ़ावा दिया - मनीष तिवारी

कर्नाटक में बीएस येद्दियुरप्पा सरकार द्वारा विधानसभा में दूसरी बार बहुमत साबित करने पर कांग्रेस ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि अयोग्य ठहराए गए विधायकों के मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर सब कुछ निर्भर है।

पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर ही सब कुछ निर्भर करता है। कोर्ट 18 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। तिवारी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में भाजपा की सरकार ने भ्रष्टाचार और संस्थागत रूढ़ीवाद को बढ़ावा दिया है।

गौरतलब है कि येद्दियुरप्पा सरकार ने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार विधानसभा में बहुमत साबित किया है। इससे पहले सोमवार को उसने ध्वनिमत से विश्वास मत जीता था।

हंसराज भारद्वाज के मुंह पर फिर तमाचा - येदियुरप्पा सरकार ने फिर साबित किया बहुमत

कर्नाटक में बी . एस . येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने विधानसभा में हुए शक्तिपरीक्षण में विश्वासमत हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने विश्वासमत का प्रस्ताव सदन में पेश किया जिसके पक्ष में 106 विधायकों ने अपना मत दिया जबकि 100 विधायकों ने इसके खिलाफ मत दिया।

येदियुरप्पा और बीजेपी के लिए सदन में दूसरी बार विश्वास मत हासिल करना मुश्किल नहीं रहा क्योंकि 224 सदस्यीय विधानसभा में 16 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद से प्रभावी सदस्य संख्या घटकर 208 ही रह गई थी।

इससे पहले कर्नाटक विधानसभा सत्र स्थगित करने की विपक्षी दल कांग्रेस की मांग को भी खारिज कर दिया गया। कांग्रेस के नेता एस. सिद्धारमैया ने मांग की थी कि प्रस्ताव को हाई कोर्ट का फैसला आने तक टाल दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट को अयोग्य ठहराए गए 16 विधायकों की याचिका पर फैसला सुनाना है। स्पीकर के. जी. बोपैया ने कहा कि, यह सत्र राज्यपाल के निर्देश पर विश्वासमत के लिए विशेष तौर पर बुलाया गया है और इसे स्थगित नहीं किया जा सकता।

येदियुरप्पा सरकार आज दोबारा विश्वास मत रखेगी पर फैसला सोमवार को ही

कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार आज दोबारा विश्वास मत रखेगी। आज फैसला जो भी हो, लेकिन सरकार के भाग्य का अंतिम फैसला सोमवार को ही हो सकेगा, जब हाईकोर्ट अयोग्य घोषित विधायकों की याचिका पर सुनवाई करेगा।

विधानसभा में आज कड़ी सुरक्षा की गई है ताकि सोमवार का घटनाक्रम नहीं दोहराया जाए। मुख्यमंत्री ने सोमवार को जबर्दस्त हंगामे के बीच पहला विश्वास मत हासिल किया था। कांग्रेस, जनता दल (सेक्युलर) और 16 अयोग्य घोषित विधायकों ने उस दिन विधानसभा में जबर्दस्त हंगामा किया था। मार्शलों पर हमले हुए, और कई बाहरी तत्व सदन में घुस गए। राज्यपाल के सुझाव पर आज फिर बीजेपी सरकार विश्वास मत हासिल करने जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11.30 बजे शुरु होगी।

आज की परिस्थिति में यदि कुछ असामान्य नहीं हुआ तो सरकार के बचने के आसार हैं। फिलहाल आंकड़े सरकार के पक्ष में हैं। कुल मिलाकर बीजेपी के पक्ष में 108 विधायक बताए जा रहे हैं, जिसमें स्पीकर शामिल नहीं हैं। मतदान में यदि बराबर मत पड़ सकते हैं तो स्पीकर भी वोट कर सकते हैं। विपक्ष के पास 100 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है।

पहले विश्वास मत के पूर्व रविवार को विधानसभा अध्यक्ष केजी बोपय्या ने 11 बीजेपी और 5 निर्दलियों सहित 16 विधायकों को सदन की कार्यवाही से अयोग्य घोषित कर दिया था। उन्होंने यह कार्रवाई दल बदल कानून का तहत की। इन विधायकों ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका पेश की।

मंगलवार को अपील पर सुनवाई हुई और अगली सुनवाई आने वाले सोमवार को है। इसी बीच बुधवार को पांच निर्दलीय विधायकों ने फिर एक याचिका हाईकोर्ट में लगाकर मामले की तत्काल सुनवाई की अपील की। हाईकोर्ट ने हालांकि इन विधायकों को कोई राहत नहीं दी, लेकिन साफ कर दिया है कि गुरुवार को सदन की कार्यवाही का अंतिम निर्णय, सोमवार को होने वाली सुनवा के बाद ही होगा।

यदि कोर्ट स्पीकर के आदेश को बनाए रखता है, तो सरकार बची रहेगी, लेकिन यदि अदालत ने फैसले को पलट दिया, तो सरकार को फिर से विश्वास मत हासिल करना पड़ सकता है।

कड़ी सुरक्षा है विधानसभा में

विधानसभा में आज करीब 149 मार्शल ड्यूटी पर रहेंगे। किसी भी बाहरी व्यक्ति को सदन में घुसने नहीं दिया जाएगा। आज सांसद और पूर्व विधायकों को भी आने की इजाजत नहीं है। आमतौर पर सदन की कार्यवाही दर्शक दीर्घा, वीआईपी दीर्घा से देखी जा सकती है, लेकिन आज किसी को भी यहां आने की इजाजत नहीं होगी। खासतौर पर अयोग्य घोषित विधायक तो विधानसभा के आसपास भी नहीं फटक सकेंगे।

नियमों के मुताबिक ध्वनिमत से पारित किया गया विश्वास मत - जी बोपैय्या

कर्नाटक के विधानसभा अध्यक्ष के जी बोपैय्या ने ध्वनिमत से विश्वास मत के पारित होने को सही ठहराते हुए कहा कि किसी ने भी मत विभाजन की मांग नहीं की। बोपैय्य ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि जब प्रस्ताव ध्वनिमत के लिए पेश किया गया तो विधानसभा के किसी भी सदस्य ने मत विभाजन की मांग नहीं की।

उन्होंने कहा कि किसी ने भी [मत विभाजन की] मांग नहीं की इसलिए मत विभाजन का सवाल कहां उठता है। नियमों के मुताबिक प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित किया गया। उन्होंने कहा कि वहां समय सीमा थी क्योंकि यही प्रस्ताव एकमात्र विषय था जिसे आज ही पूरा करना था। बोपैय्या सदन में पुलिसकर्मियों के प्रवेश को भी जायज करार देते दिखे। उन्होंने कहा कि जब हालात काबू में हों तो व्यवस्था बहाल करने के लिए ऐसा [पुलिस को सदन में बुलाना] किया जा सकता है।

यह पूछे जाने पर कि वह किस तरह पांच निर्दलीय सदस्यों को अयोग्य करार दे सकते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने वाले निर्दलीय अयोग्य करार दिए जाने योग्य हैं। बोपैय्या ने कहा कि कार्यकाल की समाप्ति तक निर्दलीय सदस्यों को निर्दलीय ही रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्दलीय सदस्यों की ओर से मुहैया कराए गए दस्तावेजों के मुताबिक वे एक खास राजनीतिक दल में शामिल हुए हैं।

भाजपा ने निर्दलियों सहित अपने सभी बिधायको को व्हिप जारी किया

कर्नाटक में सत्ताधारी भाजपा पांच निर्दलीय समेत अपने सभी 116 विधायकों को व्हिप जारी किया है पार्टी के मुख्य सचेतक डीएन जीवराज ने कहा कि व्हिप शुक्रवार दोपहर से प्रभावी हो चुका है

व्हिप का उल्लंघन नहीं किया जा सकता। उन्होंने निर्दलियों को भी व्हिप जारी करने की प्रक्रिया को यह कहते हुए न्यायसंगत ठहराया कि ऐसा पहले भी किया जा चुका है। उन्होंने इन निर्दलियों को सह-सदस्य की भी संज्ञा दी। सरकार इन निर्दलियों के समर्थन से बनी थी, लेकिन अब इन्होंने समर्थन वापस ले लिया।

225 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 117 सदस्य हैं, जिनमें अध्यक्ष के जी बोपय्या भी शामिल है।

कर्नाटक में भाजपा सरकार को अब कोई खतरा नहीं

कर्नाटक में भाजपा सरकार पर बरकरार संकट के खत्म होने के आसार नजर रहे हैं। जिन 19 विधायकों के बागी तेवरों के कारण यह संकट पैदा हुआ था उन्हें गुरुवार को पार्टी पटरी पर लाने में कामयाब हो गई लगती है। बागी विधायकों की मुहिम का नेतृत्व करने वाले राज्य के आबकारी मंत्री एमपी रेणुकाचार्य मंत्री ने यू टर्न ले लिया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को अपना नेता बताया है। साथ ही यह भी घोषणा कर दी है कि अगले सप्ताह विधानसभा में विश्वास मत पर होने वाली वोटिंग के दौरान सरकार को कोई खतरा नहीं है। माना जा रहा है कि बागी नेताओं को रजामंद करने की कोशिशों और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से दलबदल कानून के तहत नोटिस थमाने की धमकी के कारण रेणुकाचार्य को अपना स्टैंड बदलना पड़ा है।

रेणुकाचार्य ने गोवा के एक होटल से एक कन्नड़ टीवी चैनल से बातचीत में कहा ‘येदियुरप्पा हमारे नेता हैं। सरकार स्थिर है। हम कल बेंगलुरू वापस जा रहे हैं।’ गौरतलब है कि गोवा के जिस होटल से रेणुकाचार्य ने फोन पर बात की, उस होटल में उनके साथ 14 बागी विधायक भी ठहरे हैं।

इससे पहले सरकार बचाने के लिए जूझ रहे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने गुरुवार को दो और मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। हटाए गए मंत्री आनंद असनोतिकर और बालचंद्र जराकिहोली हैं, जो विद्रोही विधायकों का नेतृत्व कर रहे थे। इससे पहले भी चार मंत्री बर्खास्त किए गए हैं। केरल के कन्नूर की धार्मिक यात्रा पर रवाना होने से पूर्व येदियुरप्पा ने संवाददाताओं को मंत्रियों की बर्खास्तगी की जानकारी दी। उन्होंने दूसरे विधायकों को भी विद्रोही गतिविधियों से बाज आने की चेतावनी दी है। वे कन्नूर में श्री राजराजेश्वरी मंदिर में अपनी सरकार बचाने के लिए विशेष पूजा करने जा रहे हैं।

इस बीच राजनीतिक गहमा गहमी बढ़ गई है। जोड़तोड़ के डर से कांग्रेस और जनता दल एस ने अपने-अपने विधायकों को गोपनीय और सुरक्षित जगहों पर भेज दिया है। कर्नाटक में 7 मंत्रियों सहित 19 विधायकों ने राज्यपाल को पत्र सौंप कर येदियुरप्पा सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। इसके बाद राज्यपाल एचआर भारद्वाज ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के निर्देश दिए हैं

सोफिया मदनी को मिली अपने पति अब्दुल नासिर मदनी से मिलने की अनुमति

कोच्चि की एक अदालत ने वर्ष 2005 में एक बस को आग लगाने के मामले में आरोपी सोफिया मदनी की जमानत शर्तों में आज ढील देते हुए उसे अपने पति और पीडीपी नेता अब्दुल नासिर मदनी से मिलने की अनुमति दे दी जो फिलहाल बेंगलूर जेल में बंद है।

एनआईए अदालत के न्यायाधीश एस. विजयकुमार ने इस संबंध में सोफिया की याचिका पर उसे दो सप्ताह की ढील दी और निर्देश दिया कि वह अपने बेंगलूर जाने और वहां ठहरने की जानकारी एनआईए को दे।

सूफिया की जमानत शर्तों के अनुसार वह अदालत की अनुमति के बिना एर्णाकुलम जिले से बाहर नहीं जा सकती थी। इससे पहले अदालत ने उसे तीन बार मदनी से मिलने के लिए कोल्लम जाने की इजाजत दी थी। हालांकि पहली बार उसे राज्य से बाहर जाने की इजाजत दी जा रही है।

कर्नाटक पुलिस ने सोफिया के पति अब्दुल नासिर मदनी को 2008 के बेंगलूर बम विस्फोट मामलों में पिछले महीने गिरफ्तार किया था, जिसमें एक महिला की मौत हो गयी थी और 20 लोग घायल हो गये।

सोफिया नौ सितंबर 2005 को केरल के कालामसेरी में तमिलनाडु राज्य परिवहन की एक बस में आग लगाने के मामले में दसवीं आरोपी है। वह कोयंबटूर बम विस्फोट मामले में मदनी की हिरासत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए कथित तौर पर आग लगाने में शामिल थी।

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