गडकरी मानहानि मामले में दिग्गी के खिलाफ वारंट

दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ आज जमानती वारंट जारी किया है। भाजपा नेता नितिन गडकरी द्वारा दिग्विजय सिंह के खिलाफ दायर मानहानि मामले में कोर्ट में पेश न होने पर अदालत ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया है। मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट गोमती मनोचा ने नितिन गडकरी को भी अगली सुनवाई की तारीख 10 नवंबर को कोर्ट में पेश होने को कहा है। कोर्ट का कहना है कि अगर गडकरी उस दिन अदालत में पेश नहीं हुए तो उनकी याचिका खारिज कर दी जाएगी। गडकरी ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ यह याचिका 2012 में दर्ज कराई थी।

गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने नितिन गडकरी पर आरोप लगाया था कि उनके व्यापारिक संबंध अजय संचेती से हैं। सिंह के वकील ने आवेदन कर दिग्विजय सिंह को कोर्ट में सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने से छूट देने का अनुरोध किया था जिसका गडकरी के वकीलों ने विरोध किया।

उधर, गडकरी ने कोर्ट में दर्ज कराए अपने बयान में संचेती के साथ किसी तरह का व्यापारिक संबंध होने से इन्कार किया है साथ ही संचेती का कहना है कि दिग्विजय सिंह के आरोप बेबुनियाद व राजनिती से प्रेरित हैं। उधर, दिग्विजय सिंह ने कोर्ट के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया में ट्वीट करते हुए कहा है कि वह अब भी अपने बयान पर कायम हैं। उनका अब भी कहना है कि गडकरी व्यापारी राजनितिज्ञ हैं।

फिल्म हैदर- कश्मीर की आज़ादी की जंग या आतंकवादी बकवास?

मैं कोई नेता नहीं, कोई अभिनेता नहीं। मैं कोई कलाकार नहीं। ज्यादा कला नहीं जानता, फैशन नहीं जानता। कमरे में बैठ कर घरवालों के बीच गप्पें लड़ाने का, फिल्म देखने का, फिल्मों पर चटपटी बातें करने का कभी मौका नहीं मिला। मेरी एक ही पहचान है। दुश्मन की बन्दूक और इस देश के बीच जो दीवार खड़ी होती है, मैं उस दीवार की एक ईंट रहा हूँ। मैं एक फौजी हूँ।
नब्बे के दशक में कश्मीर में था। यही वक़्त था जब बर्फ से ढकी वादियाँ आग उगल रही थीं। हजारों मुजाहिदीन के जत्थे पाकिस्तान से तैयार होकर कश्मीर में आकर मिल रहे थे। मकसद था कश्मीर से कश्मीरी हिन्दू-सिखों और बाकी अल्पसंख्यक समुदाय का क़त्ल ए आम / नर संहार, उनका पलायन और अंत में कश्मीर को हिंदुस्तान से अलग करना। लश्कर ए तैय्यबा, हरकत उल मुजाहिदीन, हिज्ब उल मुजाहिदीन और ना जाने कितने आतंकवादी संगठन कश्मीर से लड़कों की भर्ती करते, उन्हें पाकिस्तान ट्रेनिंग के लिए भेजते और फिर वापस लाकर कश्मीर में खून बहाने के लिए खुला छोड़ देते।
और फिर अल्पसंख्यकों का क़त्ल ए आम, बलात्कार और पलायन शुरू हुआ। तीन से पांच लाख कश्मीरी हिन्दू सिख अपने अपने घर छोड़ कर कश्मीर वादी छोड़ने को मजबूर हुए। सैंकड़ों क़त्ल कर दिए गए। न जाने कितनी महिलाओं को क़त्ल करने से पहले नोच दिया गया, उनके सम्मान मिट्टी में मिलाये गए। दुधमुहे बच्चों से लेकर ३-४ साल तक के बच्चों के सर कुचले गए। पड़ोसी और दुश्मन में कोई फर्क नहीं बचा था, आम आदमी और आतंकवादी में फर्क करना मुश्किल था।
भारत- पाकिस्तान के क्रिकेट मैच होते थे। घाटी पाकिस्तान के झंडों से हरी हो जाती थी। कोई देशभक्त हिंदुस्तान के झंडे के साथ दिख नहीं सकता था। ये वक़्त था जब असली कश्मीरी कश्मीर से निकाले जा चुके थे और पाकिस्तानी मुजाहिदीन कश्मीर पर दावा ठोक रहे थे। और इस वक़्त भारत की सेना ने कश्मीर में लगी आग को अपने खून से बुझाया।
हकीकत में पूरी मानव जाति के इतिहास में भारत की सेना ने जितने मानव अधिकार उल्लंघन सहे उसके उदाहरण ज्यादा नहीं मिलेंगे। हमने अपने घर छोड़े। महीनों महीनों बन्दूक के साये में सोना, जागना, खाना, जीना और मरना। पत्थरों पर पत्थर बन कर कई दिन तक पड़े रहना ताकि सरहद पार से आने वाले आतंकवादियों को रोका जा सके।हममें से कुछ बम धमाकों में मारे जाते। लाश चिथड़े बनकर बिखर जाती और घर केवल खाली वर्दी भेजी जाती। मैंने अपना एक हाथ खोया। किसी ने आँखें किसी ने पैर और किसी ने सर। धमाके में मर जाना भी एक सुकून की बात थी। फौजी अगर मुजाहिदीन के हाथ लगते थे तो जिस्म के एक एक हिस्से को धीरे धीरे काट कर अलग किया जाता था। सब कुछ काट कर मरने के लिए छोड़ दिया जाता था।
कैप्टन सौरभ कालिया याद है? हिन्दुस्तान का फौजी था जो भारत माता के लिए टुकड़े टुकड़े कट कर मरा। जाहिर है किसी विशाल भारद्वाज या शाहिद कपूर जितना उसका नाम नहीं हो पाया। क्योंकि वो कोई फिल्म कलाकार नहीं था। उसके लिए कोई मोमबत्ती नहीं जली। कोई फिल्म नहीं बनी। उसे उसके पांच फौजी साथियों के साथ कश्मीर में पकड़ा गया। उन्हें सरहद पार ले जाया गया और फिर आतंकवादियों के मजहबी तौर तरीके से हलाल किया गया। उसके जिस्म को सिगरेट से दागा गया। कान के परदे गर्म सलाखों से फाड़े गए। आँखों को नोचकर बाहर निकालने से पहले सलाखों से फोड़ा गया। एक एक दांत और जिस्म की एक एक हड्डी को तोड़ा गया। सर फोड़ा, होंठ काटे, नाक काट कर फेंकी गयी, हाथ और पैर काट कर अलग किये गए। गुप्तांग काट कर अलग किया। बाकी के पांच हिन्दुस्तानी फौजियों के साथ भी यही हुआ। बाइस दिन तक यह सब करने के बाद आखिर में दया कर के इन्हें माथे में गोली मार दी गयी।
और इस तरह वो कातिल मुजाहिदीन गाज़ी कहलाये। कश्मीर की ‘आजादी’ के लिए लड़ने वाले इन हीरो गाजियों के लिए जन्नत की सबसे खूबसूरत हूरें इन्तजार करती हैं। गैर मजहबी बुतपरस्त को बेरहमी से क़त्ल करने पर जन्नत मिलेगी ऐसा मुजाहिदीन में मशहूर है। और अगर वो एक हिंदुस्तानी सिपाही है तो उससे बढ़कर क्या हो सकता है?
यह वो वक़्त था जब भारत की सेना ने इन गाज़ियों से कश्मीर, हिंदुस्तान और इंसानियत को बचाया। अपने हाथ, पैर, सर सब कुछ कटाकर बचाया। और यही वो वक़्त है जिस पर विशाल भारद्वाज, शाहिद कपूर और अलगाववादी जिहादी लेखक बशरत पीर ने अपनी फिल्म हैदर बनायी है।

कश्मीर की आज़ादी की जंग- सच्चाई या आतंकवादी बकवास?

कश्मीर की जमीनी हकीकत जानने वाला हर आदमी ये जानता है कि कश्मीर में कोई जंग आज़ादी की नहीं है। यह सिर्फ गैर मजहबी लोगों के खिलाफ नफरत, उनके क़त्ल ए आम और बलात्कार की लड़ाई है। क्योंकि पहला काम जो इस जंग के शुरू में किया गया वो था हजारों सालों से कश्मीर में बसने वाले, कश्मीर को बसाने वाले कश्मीरी हिन्दुओं को कश्मीर से बाहर निकालना। जिस को भी ‘कश्मीरियत’ की सच्चाई जाननी है वो दो दिन कश्मीर घाटी में बिता ले। गैर मजहबी लोगों से जिहादी नफरत का नाम इन्होंने कश्मीरियत रखा है। यह वही नफरत है जो अल क़ायदा और इस्लामिक स्टेट्स (ISIS) की गले काटने वाली वीडिओ में पायी जाती है।
कश्मीरी अलगाववादी और आतंकवादियों की जन्नत के रास्ते हिंदुस्तान की हार से गुजरते हैं। कभी जैश ए मोहम्मद के मौलाना मसूद अज़हर को सुनना। पता चलेगा ये कश्मीरियत और इसकी जंग क्या है। वह कहता है- जिहादी लश्कर हिंदुस्तान को फतह करेंगे ऐसा उसके पैगम्बर ने कहा है। जब तक हिंदुस्तान फतह नहीं होगा, जन्नत नहीं खुलेगी। मजहबी नफरत के इस जहर को कश्मीरियत बता कर कश्मीर की नस्लें बड़ी हुई हैं। मूर्ति पूजा (बुत परस्ती) करने वालों से लड़ो, उन्हें नेस्तो नाबूत करो, यही मजहब है, और मजहब ही कश्मीरियत है। जो इस मजहब में यकीन नहीं लाये, उसे क़त्ल करो। यह है कश्मीरियत जो जैश और लश्कर ने कश्मीरियों को पढ़ाई है।
भारत की सेना ने इस नफरत के जवाब में कभी आपा नहीं खोया। जान पर खेल कर कश्मीरियों की जान बचाई। पीठ पर औरतों, बच्चों, बूढ़ों और जवानों को लादकर बाढ़ से निकाला। फिर भी जवाब में अलगाववादियों की गोली खाई। पाकिस्तान ने सरहद पर गोलियां चलाईं, कश्मीर में ISIS के झंडे बुलंद हुए। जिस वक़्त फ़ौज को देश की सबसे ज्यादा जरुरत थी, उसी वक़्त इस देश ने उसकी पीठ में हैदर नाम का ख़ंजर घोंपा। इस फिल्म को ना सिर्फ प्रदर्शित किया, कुछ ने इसको कला का नमूना बताया। कुछ ने इसे कश्मीर की जमीनी हकीकत बताया। कुछ ने इसे मानवतावादी बताया। कुल मिलाकर फ़ौज पर पाकिस्तान, कश्मीरी आतंकवादी, ISIS और हिन्दुस्तान के अपने लोगों ने हमले किये। पर! मैं फौजी हूँ। जानता हूँ कि कोई फौजी हड़ताल नहीं करेगा। न ही कोई विरोध करेगा। वो नहीं पूछेगा कि वादी में ISIS के झंडे और मुल्क में हैदर का एक ही समय पर आना क्या महज इत्तेफ़ाक़ है? वो चुपचाप सब कुछ सुनेगा और अपनी छाती दुश्मन की गोली के आगे अड़ाए रखेगा।
मैं इन्तजार करता रहा कि कला के प्रदर्शन के नाम पर हुए इस भौंडे नंगे नाच हैदर को कोई रोकेगा, कोई सवाल करेगा। कोई तो होगा जो सौरभ कालिया के कटे हाथ, पैर, नाक, कान, गुप्तांग, फटे कान, नोच कर फोड़ी गयी आँख की आवाज बनेगा। कोई कश्मीर के असली पीड़ित हिन्दू-सिखों की आवाज बनेगा। जिहादी भेड़ियों के बीच रह कर इंसानियत को ज़िंदा रखने वाले फौजियों की आवाज बनेगा। पर मैं सोचता रहा। कोई नहीं आया।
मैं कला नहीं जानता। जिंदगी के मजे नहीं जानता। फैशन नहीं जानता। पर देश से प्यार क्या है, जानता हूँ। देश से गद्दारी क्या है, ये भी जानता हूँ। मुझे शब्दों से खेलना नहीं आता, पर मातृभूमि पर नजर डालने वाले की गर्दन तोड़ने की ट्रेनिंग है मेरी। शहीदों का अपमान करने वाले दुश्मन का हलक सुखाने की ताकत रखता हूँ। और अगर अंदर से भी देश पर हमले होंगे तो उनका जवाब भी लिख कर जरूर दूंगा।

हैदर- लघु विश्लेषण

मेरी नजर में हैदर देशद्रोह है। और देशद्रोह से पैसा कैसे कमाएँ, इसकी सीख है। अगर देशद्रोह में कोई कला प्रेमी कला देख सकता है तो असली खून से चित्र में लाली भरने वाले पागल चित्रकार, बच्चों से कुकर्म करने वाले, बलात्कार करने वाले सब कलाकार हैं क्योंकि वे सब कुछ हट के करते हैं।

हैदर- विस्तृत विश्लेषण

1. यह पहली भारत विरोधी फिल्म है जो खुद भारतीयों ने भारत में बनाई है। यह फिल्म फ़ौज को अपराधी घोषित करती है और मैं इसके बनाने वालों को जयचंद घोषित करता हूँ।
2. फिल्म एक जिहादी लेखक बशरत पीर ने लिखी है। यह शख्स वैसे तो कश्मीरी अलगाववादी है पर रहता न्यूयॉर्क में है और वहीं से आज़ादी की लड़ाई लड़ता है। यह हिंदुस्तान में पला, बढ़ा, पढ़ा, काबिल बना। और फिर बाकी एहसान फरामोश जिहादियों की तरह इसने हिन्दुस्तान को ही गाली दी। हिंदुस्तान का पासपोर्ट इसके लिए एक मजबूरी से ज्यादा कुछ नहीं है। यहाँ पढ़ें – http://blogs.wsj.com/indiarealtime/2010/08/11/my-nationality-a-matter-of-dispute-basharat-peer/
अपनी फिल्म लिखने के लिए ऐसे इंसान को चुनना फिल्म बनाने वाले को जानने के लिए काफी है।
3. हीरो हैदर का पिता एक डॉक्टर है जो आतंकवादियों के एक गुट का सदस्य है। वो एक आतंकवादी का इलाज अपने घर पर करता है। हैदर की माँ और चाचा इस बात की खबर फ़ौज को करते हैं। फ़ौज डॉक्टर को गिरफ्तार करती है और बाकी आतंकवादियों को मार देती है। हीरो हैदर इसका बदला लेने की कसम लेता है। पूरी फिल्म में हिंदुस्तान या फ़ौज का साथ देने वाले विलेन के तौर पर पेश किये गए हैं। वहीं फ़ौज के दुश्मन हीरो घोषित किये गए हैं।
4. फिल्म के हिसाब से भारतीय फ़ौज जालिमों की फ़ौज है जो मासूम कश्मीरियों के गुप्तांग काटती है। एक दृश्य में यह जानते हुए भी कि वो शख्स बेक़सूर है, फौजियों ने उसका गुप्तांग काट दिया। इस झूठ को तो कला के नाम पर दिखा दिया पर असल में पाकिस्तानी आतंकवादियों/सैनिकों के द्वारा हाथ, पैर और गुप्तांग कटवाने वाले सौरभ कालिया के लिए कुछ नहीं।
5. एक और दृश्य में फ़ौज अलगाववादियों को जय हिन्द बोलने को कहती है। हीरो हैदर का पिता साफ़ इंकार करता है और सजा भुगतता है। और इस बात की खबर वो हैदर तक पहुंचाता है और साथ ही इसका बदला लेने के लिए कहता है।बस इस तरह हीरो हैदर का सफर शुरू होता है। हर वो इंसान जो भारत के साथ है, वो हीरो हैदर का दुश्मन है। पूरी फिल्म के अंत तक यही चलता है।
फिल्म बनाने वाले कला प्रेमी ने यह नहीं बताया कि जिस वक़्त की बात उसने दिखाई है ये वो वक़्त था जब हजारों आतंकवादियों ने सरहद पार से कश्मीर पर चढ़ाई की थी, चुपचाप आकर आबादी में मिलकर, छुपकर फ़ौज और अल्पसंख्यकों पर हमले किये थे। उस वक़्त एक आम हिंदुस्तानी से एक आतंकवादी को अलग करने का तरीका यही था कि जो जय हिन्द से नफरत करता है वो हिंदुस्तानी नहीं है। जय हिन्द से नफरत बशरत पीर की तो समझी जा सकती है पर विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर क्यों? जिसे जय हिन्द से नफरत है वो हिन्दुस्तान में क्यों है? हम जय हिन्द के लिए ही जीते मरते हैं। यही हमारा मन्त्र, कलमा और नारा है। जय हिन्द से नफरत करने वाले को क्यों सजा नहीं मिलनी चाहिए?
6. अंत में मारकाट के बाद हीरो हैदर पाकिस्तान की तरफ रुख करता है।
7. एक दृश्य में हीरो हैदर श्रीनगर के लाल चौक पर भाषण करता है की किस तरह भारत ने कश्मीरियों को धोखा दिया और कश्मीर को दबोच लिया। फिर वो आजादी के नारे बुलंद करता है। शर्म की बात ये है कि भारत विरोधी यह दृश्य फिल्म की खूबसूरती के तौर पर पेश हुआ है।
8. दुःख की बात है कि कश्मीरी औरतों के चरित्र को इस फिल्म में गन्दा करके दिखाया है। शौहर को गिरफ्तार करवाकर हैदर की माँ अपने देवर के साथ सोने लगती है। और जब शौहर की मौत की खबर पक्की हो जाती है तो देवर से निकाह कर लेती है। इसके अलावा उसके अपने बेटे हैदर के प्रति भाव भी घिनौने हैं जो बहुत घटिया चुम्बन दृश्यों से प्रकट होते हैं।
9. एक और कश्मीरी औरत जो कि हीरो हैदर की दोस्त है, उसकी अपने मजहब से नफरत दिखाई गयी है। वो साफ़ तौर पर क़ुरान को छूने से मना कर देती है और फिर हीरो हैदर के साथ सोने जाती है जबकि उसके बाप और भाई मना करते रह जाते हैं। असल में फिल्म में यह लड़की भारत से प्यार और हैदर से प्यार के बीच फंसी हुई है जो हीरो हैदर के लिए मुश्किल पैदा करती है।
10. पूरी फिल्म में यही दो औरतें हैं। इससे पता चलता है कि हिन्दुस्तान से नफरत के साथ साथ बशरत पीर इस्लाम और कश्मीरी औरत दोनों से नफरत करता है। उसका मिशन असल में पाकिस्तान का मिशन है और यही वजह है की हीरो हैदर अपनी हिफाजत के लिए पाकिस्तान चला जाता है। जो भी मुसलमान हिंदुस्तान से जरा सी हमदर्दी रखता है, वो इस फिल्म में विलेन है।
11. फिल्म में दो चरित्र हैं जो सलमान खान की नक़ल करते हैं। वो हैदर के दोस्त हैं पर पुलिस का साथ देने की वजह से वो हैदर के दुश्मन हो जाते हैं और हैदर उन्हें क़त्ल करता है।
12. हैदर के दोस्त का पिता एक कमजोर पुलिस वाला है जो अंदर से हिंदुस्तान को गलत मानता है पर कश्मीरी आज़ादी के लड़ाकों के खिलाफ काम करता है। वही अंत में हैदर को मारने का हुक्म देता है।
13. एक बाजारू शब्द “Chutzpah” बार बार इस्तेमाल हुआ है। एक दृश्य में इसे AFSPA (Armed Forces Special Powers Act) के साथ मिलाया गया है और बताया गया है कि क्यों इन दोनों में ज्यादा फर्क नहीं है। शर्म की बात ये है कि जिस AFSPA की वजह से यह फिल्म शूट हो सकी है, उसी को इन्होने गाली दी है।
14. ‘बिस्मिल’ नाम के एक गाने में शैतान की मूर्ति अनंतनाग के मार्तण्ड मंदिर में दिखाई गईं और हीरो हैदर मंदिर के अंदर शैतानी नाच करता है। एक समुदाय के पवित्र स्थल सूर्य मंदिर को शैतान से मिलाना, फिर गाना ख़त्म होने पर अपने चाचा को मारने की कोशिश कला के नाम पर फूहड़पन और नफरत के अलावा कुछ भी नहीं । कुछ हिन्दू संगठनों ने इतने पुराने मंदिर के इस अपमान पर विरोध जताया है।
15. फिल्म में हीरो हैदर अनंतनाग को इस्लामाबाद कहता है। हिन्दू-सिखों के सफाये के बाद अब कश्मीर की जगहों के असली नामों पर भी इन कलाकारों को दिक्कत है। कश्मीर, अनंतनाग, श्रीनगर, कौसरनाग और सब हिन्दू नाम अलगाववादियों को तीर जैसे चुभते हैं, ये हमें पता है। पर फिल्म में कला के नाम पर इस अलगाववाद को बढ़ावा देना क्या गद्दारी नहीं?
16. इस फिल्म के बनाने वाले कश्मीर मुद्दे के बड़े मुरीद बने हुए हैं। जैसे कश्मीर का मुद्दा इनके जीने मरने का सवाल है। पर पता नहीं क्यों, हीरो हैदर की कहानी भारत के कश्मीर में शुरू होकर भारत के कश्मीर में ही ख़त्म हो जाती है जैसे कि कश्मीर केवल भारत के पास है! क्या पाकिस्तान वाला कश्मीर और चीन वाला कश्मीर कश्मीर नहीं है? अगर है तो वहाँ जमीन पर क्या हालात हैं? क्या विशाल भरद्वाज अपने कैमरे लेकर पाकिस्तान या चीन के कश्मीर में घुस सकते हैं और फिर वहां की फ़ौज के बारे में वो सब दिखा सकते हैं जो हिंदुस्तानी फ़ौज के बारे में दिखा दिया? यहीं से इस हैदर के बनाने वाले के घटिया इरादे जाहिर होते हैं। जिस भारतीय सेना ने इन साँपों को शूट करने की इजाज़त दी, इन्होने उसे ही डस लिया। जिन हाथों ने दूध पिलाया, इन साँपों ने उन्हें ही डसा। और जिन्होंने इन्हे घुसने भी नहीं देना उनके लिए एक शब्द भी इस फिल्म में नहीं कहा।
17. पूरी फिल्म में आतंकवादियों के इंसानियत के चेहरे दिखाए हैं, उन पर होने वाले फ़ौज के अत्याचार दिखाए हैं पर १९८९ में घाटी में ३-५ लाख हिन्दू सिखों का कत्ल ए आम, बलात्कार और पलायन एक बार भी नहीं दिखाया। उनके बारे में एक भी बार बात नहीं हुई। आतंकवादियों और अलगाववादियों के जिहादी जज्बात खुले आम बढाए गए हैं पर असली पीड़ित अल्पसंख्यक हिन्दू-सिख समुदाय की पीड़ा एक दृश्य में भी नहीं। क्या यही मिशन पाकिस्तान का भी नहीं?
हैदर के बनाने वालों को फ़ौज से दिक्कत है। क्योंकि फ़ौज ने कश्मीरियों से पूछताछ की, उन्हें दबाया और उन पर अत्याचार किये। बहुत अच्छा! अब ये भी बता देते कि फ़ौज क्या करती? लाखों अलगाववादी घाटी की सड़कों पर जब अल्पसंख्यकों के सर कुचल रहे थे, औरतों को नोच रहे थे, बच्चों को गोली मार रहे थे, आतंकवादियों को घरों में छुपा रहे थे, हिंदुस्तान को गाली दे रहे थे, तब फ़ौज क्या करती? कश्मीर पाकिस्तान के हवाले कर देती या अल्पसंख्यकों को इन जिहादी भेड़ियों के सामने अकेला छोड़ कर वापस आ जाती? जय हिन्द नहीं बोलने वालों की आरती उतारती? अलगाववादियों और आतंकियों के मानवाधिकार पर विधवा आलाप करने वालों! लाखों कश्मीरी हिन्दू-सिखों के अधिकारों और जीवन की रक्षा कौन करता? भारत माता के सम्मान की रक्षा कौन करता? तिरंगे की रक्षा कौन करता?
सीधे शब्दों में इस फिल्म का मकसद है हर उस शख्स के लिए नफरत पैदा करना
– जो देशभक्त मुसलमान है
– जो देशभक्त महिला है
– जो देशभक्त हिन्दू है
– जो देशभक्त फौजी है
– जो देशभक्त कश्मीरी है
निष्कर्ष
फिल्म पर रोक लगाने की मेरी मांग नहीं। रोक लगाकर किसी की आवाज बंद करने के जमाने अब जा चुके हैं। हाँ, इस फिल्म का इस्तेमाल देश को यह बताने में किया जा सकता है कि जब सैनिकों को मरने के लिए सीमा पर छोड़ दिया जाता है और कोई उनकी आवाज उठाने के लिए देश में नहीं होता तो फिर देशद्रोह का कैसा नंगा नाच घर घर में होता है। देशद्रोह को फूहड़पन, अवैध संबंधों और मजहब के मसाले में मिलाकर कैसे बेचा जा सकता है। कैसे आतंकवादियों के शुभ चिंतक फिल्म निर्माता सच्चे कश्मीरी, मुसलमान, हिन्दू और हिन्दुस्तान का मखौल उड़ा सकते हैं और फिर जमीनी हकीकत से बेखबर मासूम देशवासी कैसे इस घिनौने षड्यंत्र को कला मानकर ताली बजा सकते हैं। यह फिल्म यह भी स्पष्ट करती है कि बशरत पीर जैसे देशद्रोही और अलगाववादियों की पहुँच हिन्दी फिल्म उद्योग में कितनी गहरी है और उनके कौन कौन से दोस्त हमारे बीच हैं।
प्रिय भारत के लोगों! मैं नहीं जानता कि अल्पसंख्यकों और फौजियों के गले, हाथ, पैर और गुप्तांग काटने वालों के लिए विशाल भारद्वाज और शाहिद कपूर के मन में हमदर्दी क्यों है। पर मैं जानता हूँ कि जमीन पर ऐसे लोगों से कैसे बात की जाती है। जो भारत माता को गाली दे, झंडे फाड़े, फौजियों को क़त्ल करे, उनके लिए हमारी बंदूकें और छुरे तैयार रहने चाहियें। कातिलों को हिन्द की ताकत का एहसास रहना चाहिए। किसी फौजी के सर काटने से पहले उन्हें पता होना चाहिए कि जवाब में सर उनका भी जरूर कटेगा। अभी अभी पाकिस्तान की तरफ से हुई बमबारी का सुरक्षा बलों ने जो मुँहतोड़ जवाब दिया वैसा ही देश के अंदर बैठे आतंकवादियों को देना होगा।
रही बात कश्मीर की आजादी की, नेहरू के १९४८ के जनमत संग्रह के वादे की, ये सब अब कोई वजूद नहीं रखते। इस देश का बंटवारा अपने आप में एक भयानक गलती थी। माँ और मातृभूमि का बंटवारा नहीं होता, इतना भी जिसे नहीं पता उसके शब्दों की क्या कीमत है? इस देश की भौगोलिक सीमाएँ खुद प्रकृति ने बाँधी हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी और अटक से कटक तक यह एक ही है। यही वो धरती है जिस पर मानवता ने सबसे पहले सभ्यता का स्वाद चखा और जो सबसे पुराने समय से लेकर आज तक भी मानव सभ्यता का केंद्र बिंदु है। इस धरती का और कोई विभाजन हमें स्वीकार नहीं। जिसे इस धरती से, इसकी सभ्यता से और इसके लोगों से नफरत हो, वो इसे छोड़ कर जा सकता है। पर अब ये धरती कहीं नहीं जायेगी।
कश्मीर भारत का हिस्सा था, है और रहेगा। ‘आजादी की लड़ाई’ का ढकोसला कुछ भी नहीं बस हिन्दुस्तान पर ISIS और मजहबी आतंकवादियों के कब्जे की लड़ाई है। पूरी दुनिया में इनकी आजादी की लड़ाई दुनिया देख रही है। अब समय है कि सब मानव शक्तियां इन को अपने पैरों तले रौंद डालें। और इनके कला प्रेमी साथियों को इनकी औकात का अंदाजा कराएं।
अंत में यही कहूँगा कि हैदर नाम की खुराफात देखने के बजाय आप वो पैसे भारतीय सेना या प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करा सकते हैं ताकि बाढ़ पीड़ितों की मदद हो सके। अग्निवीर बनो, इसे बढ़ाओ और देश की सेवा करो। जो सब कुछ छोड़ कर मरने के लिए सीमा पर चले जाते हैं, जो अपने अधिकार के लिए भी बोल नहीं सकते, उनकी आवाज बनो।जो धमाकों में चिथड़े बनकर हवा में मिल जाते हैं, जिनकी लाश भी नहीं मिलती, जिनके एक एक जिस्म के टुकड़े भारत माँ के लिए कट कर गिरे, उनके अधिकार के लिए लड़ो।
जो भी कुछ यहाँ लिखा गया है वो सब भारतीय सेना को समर्पित है जिसके कारण कश्मीर आज भी हिन्दुस्तान में है और सदा रहेगा।
जय हिन्द। वन्दे मातरम।
From : hindujagruti.org

गाय हमारी माता, काटने वाले को हिंदुस्तान में रहने का हक नहीं: अजीज कुरैशी

उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी ने अपने बयान से एक बार फिर सनसनी पैदा कर दी है। कुरैशी ने शुक्रवार को कहा कि गाय काटने वालों को हिंदुस्तान में रहने का कोई हक नहीं है।

कुरैशी ने एक कार्यक्रम में कहा कि गाय हमारी माता है और लोग उससे जुड़े हुए हैं। अगर कोई गाय को मारता है तो, हमें उसे समाज से बहिष्कृत करते हुए उसका बॉयकॉट करना चाहिए। कुरैशी ने आगे कहा कि जो गाय को मारता है वह हिंदुस्तानी नहीं हो सकता है। ऐसे शख्स को भारत में भी रहने का कोई अधिकार नहीं है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे राज्यपाल की निजी राय बताया, लेकिन वह इस पर कुरैशी का बचाव करते भी दिखे। रावत ने कहा कि जहां तक कानून का सवाल है तो गौहत्या पर पाबंदी है। इसके लिए सजा का प्रावधान भी है।

गौरतलब है कि कुरैशी अपने बयानों को लेकर जब-तब कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं।राज्यपाल ने 3 अप्रैल 2013 को अखिल भारतीय कुरैशी महासभा देहरादून में गोवध करने पर मुंह काला कर सरेआम बिरादरी से निकालने सम्बन्धी प्रस्ताव भी पारित करा दिया। 

उत्तराखंड का गवर्नर नियुक्त किए जाने के वक्त कुरैशी के एक बेबाक बयान पर भी तब खूब बवाल हुआ था।कुरैशी ने तब कहा था, 'मैं हमेशा गांधी-नेहरू परिवार के प्रति वफादार रहा, मेरी नियुक्ति यह साबित करती है कि मुझे मेरी वफादारी का इनाम मिला। सिर्फ सोनिया गांधी के आशीर्वाद की वजह से मैं उत्तराखंड का गवर्नर बन सका।'

गृह मंत्रालय साइबर अपराध से बचाव लिए अपनी रणनीति को मजबूत करेगा - राजनाथ सिंह

केन्‍द्रीय गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद में कहा कि गृह मंत्रालय साइबर अपराध से निपटने के लिए उन सभी जरूरी कदमों को उठाने पर विचार कर रहा है, जिससे इस तरह के अपराधों पर लगाम लगाई जा सके। उन्‍होंने कहा कि मंत्रालय जल्‍द ही साइबर अपराध से निपटने की रणनीति को मजबूत बनाएगा। श्री सिंह भारतीय पुलिस सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों की 66वीं पासिंग आउट परेड में मुख्‍य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। यह कार्यक्रम हैदराबाद के सरदार वल्‍लभभाई पटेल राष्‍ट्रीय पुलिस अकादमी में आयोजित था। 

गृह मंत्री ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि साइबर अपराधी आपके शहर का है या देश का है, यह काम संसार में कहीं से भी संभव है और किसी को भी कहीं पर भी और किसी भी समय निशाना बना सकता है। भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्‍लभभाई पटेल के व्‍यक्तित्‍व की चर्चा करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सरदार पटेल ने ‘’अकेले ही अपने दम पर भारत की 562 देशी रियासतों को अधिकतम साहस और न्‍यूनतम हिंसा का उदाहरण प्रस्‍तुत करते हुए भारतीय गणराज्‍य में विलय करा दिया था। ‘’मुख्‍य तौर पर जूनागढ़ और हैदराबाद रियासतों का भारत में विलय स्‍वतंत्रता के उपरांत इतिहास में प्ररेणादायक उदाहरण हैं। यही वह कारण हैं जिसे देखते हुए हमारी सरकार ने इस दिन को ‘राष्‍ट्रीय एकता दिवस’ के रूप में मनाने का निश्‍चय किया है। 

प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि बदलते समय के अनुसार पुलिस की भूमिका भी बदलती जा रही है। उन्‍होंने कहा, देश के लिए सबसे पारदर्शी प्रतिनिधि पुलिस ही है, जो बदलते समाज का सशक्‍त माध्‍यम हैं। ‘’थाना न्‍याय का मंदिर बने और हमारे पुलिस के जवान को समाज में शांति और विश्‍वास का वातावरण पैदा करने के लिए प्रयोगात्‍मक होना चाहिए।

समाज में बढ़ते अपराध और उसके क्षेत्र में हो रहे विस्‍तार को देखते हुए पुलिस को अत्‍याधुनिक प्रशिक्षण देना और पुलिस संगठन को मजबूत करना समय की जरूरत है। श्री सिंह ने बताया कि सरकार धर्मवीर आयोग 1978 की रिपोर्ट को लागू करने को लेकर आवश्‍यक कदम उठाएगी। 

पास आउट परेड में शामिल 143 प्रशिक्षु अधिकारियों में 28 महिलाएं हैं। एनपीए में 15 अधिकारी ऐसे भी हैं जो मित्र देशों के हैं। मध्‍य प्रदेश कैडर के श्री अभिषेक तिवारी ने सभी क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री बेटन के साथ गृह मंत्री रिवॉल्‍वर पुरस्‍कार जीते। 

श्री राजनाथ सिंह ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि आपकी वर्दी का गौरव यही है कि इसे देखकर देश के लोगों में विश्‍वास और संतुष्टि का अहसास हो। 

हिंदू महासभा के बयान पर हरियाणा भाजपा का कड़ा रुख

हरियाणा की नई सत्ता संभालने वाली बीजेपी सरकार ने लड़कियों के जींस व टॉप पहनने व मोबाइल न रखने के मुद्दे पर हिंदू महासभा को झटका दे दिया है। उन्होंने कड़ा स्टैंड लेते हुए महासभा के बयान को नकारा है। हालांकि, इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कोई भी बयान देने से इनकार कर दिया है। 

प्रदेश सरकार में मुख्यमंत्री के बाद दूसरे पॉवरफुल मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि एक सभ्य समाज किसी भी संगठन को समाज पर कुछ भी थोपने की इजाजत नहीं देता। बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि देश में समाज के विकास के लिए सामाजिक संगठन हैं, लेकिन किसी को भी यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कौन क्या पहने और क्या नहीं रखे। 

उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था राज्य सरकार का काम है और राज्य में इसे किसी को तोड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। प्रदेश के सीनियर कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश धनकड़ ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए कहा कि हरियाणा में हिंदू महासभा का अस्तित्व ही नहीं है। इसलिए मीडिया को इसे तव्जजो ही नहीं देनी चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि खाप में कई बुद्धिमान लोग हैं और वे नई सोच के समर्थक हैं। 

इधर, प्रदेश की नई सरकार के इस मुद्दे पर अपनाए गए तेवर के बीच हिंदू महासभा ने 2 नवंबर को अपनी कार्यकारिणी की बैठक हिसार में बुला ली है। हिंदू महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मपाल सिवाच ने कहा कि हमारे द्वारा चलाई गई मुहिम प्रदेश भर से भारी समर्थन मिल रहा हैं। 

अगर हिंदू महासभा की मुहिम सफल हुई तो रेप व छेड़छाड़ की घटनाओं में कमी आएगी। सिवाच के अनुसार हिंदू महासभा द्वारा लिए गए फैसले को बुजुर्गों और महिलाओं से सराहना मिली है। उन्होंने छात्र व छात्राओं के अभिभावकों से भी इस मिशन में सहयोग मांगा।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी 627 खाताधारको की लिस्ट

केंद्र सरकार ने स्विस बैंक में अकाउंट रखने वाले 627 भारतीयों के नाम सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिए हैं। नामों के साथ इन लोगों के खिलाफ अब तक हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि लिस्ट में एचएसबीसी बैंक की जिनीवा ब्रांच में खाता रखने वाले भारतीयों के नाम हैं, जो भारत सरकार को फ्रांस की सरकार की ओर मिले थे।

इससे पहले सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को तीन नाम बताए थे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार विदेशी बैंकों के खाताधारकों की सूची सौंपने को राजी हो गई थी। केंद्र की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सभी खाताधारकों के नाम 27 जून को एसआईटी को दे दिए गए थे, उसे सुप्रीम कोर्ट को भी सौंप दिया जाएगा।

अटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत की कार्यवाही की जानकारी देते हुए कहा, 'सरकार ने एचएसबीसी के सारे अकाउंट की लिस्ट सौंप दी है। इसमें 627 या 628 नाम हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद लिफाफे को नहीं खोलने का फैसला किया और इसे एसआईटी के पास आज ही भेजने का निर्देश दिया।' उन्होंने कहा कि इस लिस्ट में करीब आधे नाम भारतीय नागरिकों के हैं, जबकि आधे प्रवासी भारतीय हैं।

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के सामने हमने दूसरे देशों से हुईं संधियों का जिक्र किया, इस पर निर्देश दिया गया कि सरकार अपनी समस्या एसआईटी के सामने रखे। अटर्नी जनरल ने कहा कि हमने कोर्ट को कल भी और आज भी बताया कि एसाईटी को सरकार 27 जून को यह लिस्ट सौंप चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह 30 नवंबर तक पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। 

सरकार ने बुधवार को कोर्ट को तीन सीलबंद लिफाफे सौंपे हैं। इनमें से पहले लिफाफे में दूसरे देशों के साथ हुई संधि के कागजात हैं। दूसरे लिफाफे में विदेशी खाताधारकों के नाम हैं, जबकि तीसरे लिफाफे में जांच की स्टेटस रिपोर्ट है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इसमें साल 2006 तक की एंट्री है। इसकी वजह यह है कि स्विस अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि ये इनपुट्स चोरी की जानकारी के आधार पर हासिल किए गए हैं।

एचएसबीसी से यह लिस्ट उसके किसी पूर्व कर्मचारी ने साल 2006 चुरा ली थी और भारत को यह फ्रांस से साल 2011 में मिली। इस लिस्ट में चार तरह की सूचनाएं हैं- नाम, पता, अकाउंट नंबर और खाते में जमा राशि। नाम और अड्रेस के मिलान के बाद 136 लोगों या प्रतिष्ठानों ने अकाउंट होने की बात मान ली है।

हालांकि, इनमें से कई का कहना है कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी लेकिन वे टैक्स और जुर्माना चुकाने को तैयार हैं। 418 में से 12 अड्रेस कोलकाता के हैं, लेकिन छह ने ही माना है कि उनका अकाउंट है। खाताधारकों की लिस्ट में सबसे ज्यादा रकम वाला अकाउंट 1.8 करोड़ डॉलर वाला है, जो देश के दो नामी उद्योगपतियों के नाम से है। इस लिस्ट में सबसे ज्यादा नाम मेहता और पटेल सरनेम के साथ हैं। 

लड़कियों के पहनावे पर राज हसीना चौधरी ने किया हिन्दू महासभा का समर्थन

हिंदू महासभा द्वारा लड़कियों के जींस टॉप और भड़कीले कपड़े पहनने पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का समाज सेविका राज हसीना चौधरी ने भी समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि हसीना ने कहा कि महिलाओं और युवतियों को हिंदू संस्कृति के मुताबिक ही अपना पहनावा रखना चाहिए। उन्होंने बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि यह हमारे लिए शर्मनाक बात है। इस पर अंकुश लगाने के लिए हमें भी कुछ जिम्मेवारी निभानी चाहिए। 

उन्होंने कहा कि देश में लगातार दुष्कर्म की अप्रिय घटनाएं बढ़ रहीं है इस पर अंकुश नहीं लगा तो आने वाले समय में यह देश की सबसे बड़ी समस्या बन जाएगी।

एक ही गोत्र में विवाह पर प्रतिबन्ध पर खाप करेगी खट्टर से मुलाकात

हिंदू विवाह अधिनियम में बदलाव की मांग को लेकर प्रदेश की कई खापों के प्रतिनिधि जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करेंगे। खाप प्रतिनिधि गांव के गांव और एक ही गोत्र में विवाह पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की मांग करेंगे।

जींद में चुनावी रैली के दौरान मोदी द्वारा खापों के महत्व को स्वीकारने तथा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लड़कियों के ड्रेस कोड के मामले में खापों का समर्थन करने पर खाप प्रतिनिधियों ने आभार भी व्यक्त किया है।

सर्वखाप पंचायत के संयोजक कुलदीप ढांडा, सेवानिवृत्त लैफ्टिनैंट जनरल एवं खाप पंचायत के समन्वयक डीपी वत्स तथा कथूरा बारहा खाप के प्रधान भलेराम नरवाल ने संयुक्त रूप से जारी बयान में कहा कि खाप पंचायतों ने हमेशा ही सामाजिक कार्यों को बढ़ावा दिया है।

उन्होंने कहा कि आज नैतिक मूल्यों के पतन के कारण एक ही गोत्र में शादी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इससे गांव में तनाव बढने के साथ-साथ कई प्रकार के शारीरिक विकार भी पैदा होने का अंदेशा बना रहता है। इसलिए खाप पंचायत के प्रतिनिधि हिंदू विवाह अधिनियम में बदलाव करवाने की मांग को लेकर जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करेंगे।

भारत हिन्दूराष्ट्र, वन्देमातरम राष्ट्रगान घोषित हो: आचार्य धर्मेन्द्र

आचार्य धर्मेंद्र का कहना है कि प्रचंड बहुमत से सरकार बनी है, इसलिए संविधान में संशोधन करने में कतई विलंब नहीं करना चाहिए। गो हत्या बंद हो, धारा 370 समाप्त करने के साथ ही वंदेमातरम को राष्ट्रगान घोषित किया जाना चाहिए। भारत आज भी इंडिया है, इसे सर्वकल्याणकारी हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए। आचार्य ने कहा कि एक दिन झाडू लेकर सफाई करने से सफाई नहीं होती है। वास्तव में सफाई करना है तो नौटंकी बंद करनी होगी।

उन्हाेंने कहा कि 65 वर्ष बाद भी अंग्रेजी को कंधों पर ढो रहे हैं, वर्तमान पीढ़ी अंग्रेजी पर ही जी रही है। उन्हें देश की परंपरा, सभ्यता का ज्ञान तक नहीं है। पढ़ाई में भी साहित्यकार, कवियों व स्वतंत्रता दिलाने के लिए संघर्ष करने वालों को ही गायब कर दिया गया है।

ग्राम देवपहरी में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने जाने के पूर्व आचार्य धर्मेंद्र 'नईदुनिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज तक आजादी नहीं मिली है और आजादी के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। क्रांतिकारियों का लंबा सिलसिला है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेज के विरोध में मंगल पांडे थे, वहीं 13 वर्ष में विवाह करने के बाद 16 वर्ष में रानी लक्ष्मी बाई ने झांसी नहीं देेने का विरोध किया। सिर्फ 16 वर्ष में रानी परिपक्व कैसे हुई, यहां तो वरिष्ठ नेताओं को मनोहर जोशी को किनारा कर दिया गया। जब ये लोग सांसद चुने जा सकते हैं, तो क्या मंत्री नहीं बन सकते हैं। 65 वर्ष के बाद भी अंग्रेजी को कंधों पर ढो रहे हैं। वर्तमान पीढ़ी पर अंग्रेजी थोपी जा रही है, उन्हें पैसा कमाने की मशीन बना दिया गया। सिर्फ करियर की चिंता करते हुए दबाव बनाया जा रहा है।

आचार्य ने कहा कि प्रचंंड बहुमत से सरकार बन चुकी है, इसलिए संविधान में संशोधन करने में कतई विलंब नहीं करना चाहिए। सोच विचार की आवश्यकता नहीं है। देश को सर्वकल्याणकारी हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। डॉ. हेडगेवार ने भी यही नारा दिया था, फिर इसका विरोध क्यों हो रहा है। यहां वंदेमातरम करना सांप्रदायिकता कर विवाद खड़ा किया जा रहा है। भारत को जवान राष्ट्र कहा जाता है तो इसे हिंदू राष्ट्र बनाना चाहिए। संघ प्रार्थना को भाजपा का राजनीतिक एजेंडा होना चाहिए। विश्व में शांति तब तक नहीं होगी, जब तक संसार के नक्शे में बांग्लादेश व पाक होगा। खुलेआम अराजक तत्व घूम रहे हैं और उन्हें प्रमुखता से स्थान दिया जा रहा है।

एक प्रश्न के उत्तर में आचार्य ने कहा कि अन्य देश हमारे पैटर्न को स्वीकार करें, न की उनका पैटर्न या मॉडल देश में लागू करना चाहिए। चीन ने कभी भी किसी को पूंजी लगाने नहीं बुलाया, जबकि भारत चीन के कचरे से पटा हुआ है। नई पीढ़ी को भारतीय स्वाद चख कर मक्खन, रोटी व छाछ की मार्केटिंग करनी चाहिए, बल्कि दूसरों का अनुशरण नहीं करना चाहिए।

आचार्य धर्मेंद्र ने कहा कि जिस्म नुमाइश बढ़ते जा रहा है। पहले अभिनेत्री मीना कुमारी, मधुबाला, वैजयंती माला पूरे शरीर में कपड़ा पहनकर फिल्मों में आती थीं, लेकिन आज विज्ञापन में अर्द्धनग्न पोस्टर दिखाए जा रहे हैं, अभिनेत्रियां जिस्म नुमाइश से परहेज नहीं कर रही हैं। इस पर दंडनीय अपराध होना चाहिए। वर्तमान पीढ़ी पर इसका काफी गलत असर पड़ रहा है। इस पर रोक लगाया जाना चाहिए।

आचार्य ने कहा कि एक दिन झाडू लेकर सफाई करने से सफाई नहीं होती है। वास्तव में सफाई करना है तो नौटंकी बंद करनी होगी। पूरे देश कचरा हो गया। मन मस्तिष्क की सफाई करनी जरूरी है और इसके साथ ही सफाई होगी। सिर्फ साफ सफाई करने से लक्ष्मी नहीं आती और न ही अपूज्य लोगों की पूजा करने होता है। गोबर से लीपे गए आंगन, गोमाता की पूजा जहां होगी, वहां लक्ष्मी का आगमन होगा।

आचार्य धर्मेंद्र ने कहा कि छत्तीसगढ़ सबसे बढ़िया तब होगा, जब प्रदेश सरकार खैरात एवं मुफ्त में बांटना बंद करेगी। श्रम व शक्ति से लोगों को कमाना होगा और विकास करना होगा। प्रदेश में नक्सली समस्या का अंत तभी है, जब मिलिट्री कैंप के हवाले नक्सल क्षेत्र कर दिया जाए और मीडिया पर पाबंदी लगा दे। तभी नक्सली मुक्त ही नहीं बल्कि कश्मीर को भी मुक्त किया जा सकता है।

काला धन: मोदी सरकार ने तीन खाताधारियों का खुलासा किया

काला धन मामले में कुछ कार्रवाई की उम्मीद जगी है. केंद्र सरकार ने विदेशी बैंकों में धन रखने वाले तीन कारोबारियों के नाम सोमवार को बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के सामने रख दिए. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये नाम हैं, डाबर के पूर्व डायरेक्टर प्रदीप बर्मन, राजकोट के कारोबारी पंकज चमनलाल लोढ़िया और गोवा के खनन किंग राधा टिम्ब्लू. केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करके ये नाम बताए. इन तीनों के खिलाफ विदेशी बैंकों में गोपनीय तरीके से पैसे रखने के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

खबर पर 'डाबर' की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. कंपनी ने कहा है कि यह बैंक खाता उस वक्त खोला गया था जब प्रदीप बर्मन एनआरआई थी और उन्हें यह खाता खोलने की कानूनी इजाजत थी. डाबर ने दावा किया है कि खाता खोलने के संबंध में सारे कानूनी पक्षों का ध्यान रखा गया है और उचित टैक्स भी चुकाया गया है. कंपनी ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विदेश में अकाउंट रखने वाले हर शख्स को एक ही नजर से देखा जा रहा है. कंपनी ने कहा है कि फिलहाल प्रदीप बर्मन का डाबर से कोई संबंध नहीं है और डाबर इंडिया लिमिटेड में कोई पद उनके पास नहीं है.

सूत्र बता रहे हैं विदेशी बैंकों में खाताधारकों में जिन नेताओं के नाम हैं , उनके मामलों में अभी सबूत जुटाए जा रहे हैं. इस बारे में पुख्ता जांच के बाद कोर्ट के समक्ष उन नामों का खुलासा भी किया जा सकता है. अभी जो तीन नाम सामने आ रहे हैं उन्हें यह साबित करना होगा कि विदेशी बैंकों में उन्होंने जो पैसा रखा है, वह काला धन नहीं है और इस मामले में आरबीआई के दिशानिर्देशों की अवहेलना नहीं की गई है.

तीन नाम सामने आने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर काउंटर अटैक किया है. कांग्रेस ने कहा है कि इससे अरुण जेटली का वह दावा झूठा साबित होता है जिसमें वह कह रहे थे कि नाम सामने आने के बाद कांग्रेस शरमा जाएगी . वहीं पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अगर बीजेपी, नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत में साहस हैं तो सभी कालाधन धारकों के नाम सार्वजनिक करें. 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि जिन विदेशी बैंकों के अकाउंट्स की जांच इनकम टैक्स लॉ के तहत शुरू नहीं की गई है उन नामों का खुलासा नहीं होगा. सरकार को लगता है कि ब्लैक मनी मामले में अवैधता की जांच शुरू किए बिना नामों का खुलासा करना निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा जिसमें आरबीआई के नियमों के मुताबिक किसी भी भारतीय को यह हक है कि वह हर साल विदेशी बैंक में वैध तरीके से 1 लाख 25 हजार डॉलर जमा कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील राम जेठमलानी की याचिका पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह बेईमानी से विदेशी बैंकों में जमा किए गए भारतीय पैसों को वापस लाने के लिए उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करे. कोर्ट के आदेश पर तब की यूपीए सरकार ने जेठमलानी से उन भारतीयों नामों का खुलासा किया था जिनके अकाउंट लिचटेंस्टाइन बैंक में थे और जर्मन सरकार ने दोहरे कराधान बचाव समझौते के तहत सूचना मुहैया कराई थी .

इस मामले में नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पहले हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि जर्मनी की आपत्तियों के कारण वह उन भारतीयों के नामों खुलासा तब तक नहीं कर सकती है जब तक कि उनके खिलाफ वित्तीय कानून के तहत अनियमितता की जांच शुरू नहीं हो जाती. इससे पहले नामों का खुलासा करने से द्विपक्षीय समझौते की शर्तों का उल्लंघन होगा. इसमें कहा गया है कि भारत सरकार, अमेरिका समेत दूसरे देशों से कुछ महत्वपूर्ण दोहरे कराधान बचाव समझौते में लगी है. कोर्ट को बताया गया है कि इन संधियों के माध्यम से ही विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के ब्लैक मनी से जुड़ी सूचनाओं के स्रोत तक पहुंचा जा सकता है.

सरकार ने कोर्ट से कहा था कि यदि हम समझौतों के करारों का उल्लंघन करते हैं तो विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा छुपाकर रखे गए पैसों से जुड़े डेटा दूसरे देश साझा करने से इनकार कर देंगे. केंद्र सरकार ने इस हलफनामे के जरिए कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वह उन भारतीयों के नामों का खुलासा करने के लिए तैयार है जिनके विदेशी बैंक खातों की जांच की सिफारिश की गई है. जेठमलानी ने सरकार के इस स्टैंड पर कड़ी आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था कि सरकार सब कुछ रहस्य बनाकर रखना चाहती है. उन्होंने दोहरे कराधान बचाव समझौते के बारे में कहा था कि यह सब कुछ छुपाने की चाल है . सरकार के इस फैसले की कांग्रेस ने भी निंदा की थी.

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