डिजिटल पेमेन्ट प्रोत्साहन योजना से अब आप भी पा सकतें हैं पुरस्कार


पिछले ढाई वर्ष में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। एक हजार और पाँच सौ रूपये के नोट को बंद करने संबंधित निर्णय भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1000 और 500 के नोट के ढेर ने देश के अंर्थतंत्र में अनेक बुराइयों को आश्रय दिया। भविष्य में भी देश फिर से एक बार भ्रष्टाचार एवं काले धन का शिकार न हो, इसलिए भविष्यलक्षी स्थाई योजनाओं को लागू करना बहुत ही आवश्यक है।

आज तकनीक (technology) के  माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग , ई-वॉलेट, डेबिट कार्ड के ज़रिए डिजिटल बिज़नेस ट्रांसज़ेक्शन संभव है। ऐसे कई वैकल्पिक साधनों के ज़रिए डिजिटल से डिजी-धन (digi-dhan) की  दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी। अफ्रीका में केन्या  जैसे विकासशील देश न  ऐसा करके दिखाया है। भारत जैसा देश जिसकी 65% जनसंख्या 35 वर्ष की आयु से कम है, भारत जो पूरी दुनिया में आईटी कौशल के लिए जाना जाता है, भारत जिसके करोड़ों-करोड़ अनपढ़ और गरीब व्यक्ति ईवीएम से वोट देते हैं, ऐसी क्षमता वाले देश के नागरिक निश्चित ही मौजूदा अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलने में सक्षम हैं। जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। 

इस सपने को पूरा करने के लिए, ई-पेमेंट (e-payment) को बढ़ावा देना, ई-वॉलेट (e-wallet) और मोबाइल बैंकिग के प्रचलन को बढ़ाना, डिजिटल (digital ) से समाज को डिजी-धन (digi-dhan) की ओर ले जाना अपरिहार्य हो गया है। 1000 और 500 रू. के नोटों के विमुद्रीकरण के पश्चात डिजिटल पेमेन्ट्स में काफी वृद्धि हुई है। यह आवश्यक है कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का प्रचलन समाज के हर वर्ग में फैले। अतः नीति आयोग स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) से अनुरोध किया जाए कि वह डिजीटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शीघ्र लागू करें। उल्लेखनीय है कि NPCI एक गैर-लाभकारी कम्पनी है जो भारत को कैशलेस समाज की ओर ले जाने के लिए प्रयासरत है।

प्रोत्साहन योजना के मुख्य बिन्दु:

वो उपभोक्ता (Consumers) और विक्रेता (Merchants) जो इलेक्टॉनिक पेमेंट (Electronic Payment) का उपयोग करते हैं, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

इस योजना में दो तरह की प्रोत्साहन धनराशि की व्यवस्था है-
  • प्रत्येक सप्ताह भाग्यशाली विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए जाने की रूपरेखा बनाई जाएगी।
  • हर तीन माह में उपभोक्ताओं में से कुछ को एक बड़ा पुरस्कार दिया जाएगा।
  • योजना में यह ध्यान रखा जाएगा कि गरीबों,निम्न-मध्यम वर्ग तथा छोटे व्यापारियों को प्राथमिकता मिले
  • इस योजना में निम्न प्रकार के डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) अनुमन्य होगें- USSD, AEPS, UPI और RuPay Card
  • विक्रेताओं के लिए उनके द्वारा स्थापित POS मशीन पर किये गये  ट्रांज़ेक्शंस (Transactions) इस योजना हेतु मान्य होगीं।
  • योजना की रुपरेखा शीध्र ही देश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी किन्तु यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे जितने लोग डिजिटल पेमेन्ट प्रणाली का उपयोग कर रहे है वे इस योजना के लाभ उठाने के हक़दार होंगे
  • वर्तमान में दो प्रकार के सुझाव चल रहे हैं कि प्रोत्साहन योजना 6 महीने चलाई जाए अथवा एक वर्ष तक चलाई जाए।
  • राज्य सरकारों, उनके उपक्रमों, जिलों, महानगर निगमों एवं पंचायतों में भी जहां कैशलेस ट्रांज़ेक्शंस (Cashless Transactions को प्रोत्साहित करने हेतू उल्लेखनीय कार्य किया गया हो, उन्हें भी पुरस्कृत किया जाएगा।

भारत और स्विटजरलैंड के बीच बैंक खातों की जानकारी के लिए #AEOI हुआ


भारत और स्विटजरलैंड के बीच सूचना के स्‍वत:आदान-प्रदान(एईओआई) के क्रियान्‍वयन संबंधी 
‘संयुक्‍त घोषणा’ पर हस्‍ताक्षर हुए

विदेशी खातों में जमा काले धन की बुराई को समाप्‍त करना वर्तमान सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। इस लक्ष्‍य को आगे बढ़ाने के लिए भारत की ओर से प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड(सीबीडीटी) के अध्‍यक्ष श्री सुशील चंद्रा और स्विटजरलैंड की ओर से भारत में स्विस दूतावास के डेप्‍यूटी चीफ ऑफ मिशन श्री गिल्‍स रोड्यूट ने सूचना के स्‍वत:आदान-प्रदान(एईओआई) के क्रियान्‍वयन संबंधी ‘संयुक्‍त घोषणा’ पर हस्‍ताक्षर किए।

इसके परिणामस्‍वरूप अब स्विटजरलैंड में 2018 से खोले गए भारतीय नागरिकों के खातों की वित्‍तीय लेन-देन की सूचना सितंबर, 2019 और इसके बाद भारत को स्‍वत: ही मिलना संभव हो जाएगा।

अपने कालेधन के लिए दूसरों के बैंक खाते का दुर्पयोग करने पर होगी कड़ी कार्यवाही



अपने काले धन को नए नोटों में परिवर्तित करने के लिए अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों का उपयोग करने वाले कर चोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी 

इस उद्देश्‍य के लिए अपने बैंक खातों के दुरुपयोग की अनु‍मति देने वाले लोगों पर उकसाने के लिए आयकर अधिनियम के तहत मुकदमा चल सकता है,सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे काले धन को परिवर्तित करने वालों के लालच में न आएं और इस तरीके से काले धन को सफेद करने के अपराध में भागीदार न बनें तथा इसे समाप्‍त करने में सरकार से जुड़कर उसकी मदद करें

सरकार ने पहले इस आशय की घोषणा की थी कि कारीगरों, कामगारों,गृहणियों इत्‍यादि द्वारा बैंकों में जमा की जाने वाली छोटी राशियों पर आयकर विभाग वर्तमान आयकर छूट सीमा के 2.5 लाख रुपये रहने के तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए कोई भी सवाल नहीं करेगा। इस बीच, ऐसी जानकारियां मिली हैं कि कुछ लोग अपने काले धन को नये नोटों में बदलने के लिए अन्‍य व्‍यक्तियों के बैंक खातों का उपयोग कर रहे हैं, जिसके लिए उन खाताधारकों को इनाम भी दिया जा रहा है जो अपने खातों के इस्‍तेमाल की अनुमति देने पर सहमत हो जाते हैं। इस तरह की गतिविधि जन धन खातों में भी होने की सूचना मिली है।

यह स्‍पष्‍ट किया गया है कि यदि यह बात साबित हो जाती है कि किसी बैंक खाते में जमा की गई राशि खाताधारक के बज़ाय किसी और व्‍यक्ति की है तो इस तरह की कर चोरी पर आयकर के साथ-साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यही नहीं, जो व्‍यक्ति इस उद्देश्‍य के लिए अपने खाते के दुरुपयोग की अनुमति देगा उस पर उकसाने के लिए आयकर अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है।

हालांकि, अपनी ही नकद बचत राशि को बैंक खाते में जमा करने वाले वास्‍तविक व्‍यक्तियों से कोई भी सवाल नहीं पूछा जायेगा।



नोटबंदी : किसानों,छोटे कारोबारियों और कर्मचारियों के लिए केंद्र की नयी योजनायें


500 रूपये तथा 1000 रूपये के प्रचलन को निरस्‍त किये जाने के बाद केन्‍द्र सरकार ने किसानों, छोटे कारोबारियों, केन्‍द्र सरकार के ग्रुप-सी के कर्मचारियों और रक्षा तथा अर्धसैनिक बलों, रेलवे, केन्‍द्रीय सार्वजनिक प्रतिष्‍ठानों के समकक्ष स्‍तर के कर्मचारियों की सहायता के लिए अनेक कदम उठाये है। 

18 नवम्‍बर, 2016 से पूरे देश में बैंकों से 500 रूपये तथा 1000 रूपये के नोटों को बदलने की सीमा 4500 रूपये से घटाकर 2000 रूपये करने का निर्णय लिया गया।


500 रूपये तथा 1000 रूपये के नोटों के लीगल टेंडर स्‍वरूप निरस्‍त किये जाने के बाद भारत सरकार को विभिन्‍न सुझाव प्राप्‍त हुए। राज्‍य सरकारों से भी सुझाव मिले। सरकार ने विभिन्‍न सुझावों पर विचार किया है तथा योजना संचालन के कुछ पहलुओं पर निम्‍नलिखित निर्णय लिया है। 

  1. हम रबी फसल की शुरूआत में है। किसानों को खेती के लिए तरह-तरह की आवश्‍यकताएं होती है। सरकार बैंकिंग और डिजिटल प्रणाली के माध्‍यम से भुगतान को प्रोत्‍साहित करना चाहती है। यह महसूस किया गया कि किसानों को उनकी खेती की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए उनके पास कुछ धन उपलब्‍ध होना चाहिए। इसलिये यह निर्णय लिया गया है कि किसानों को उनके केवाईसी अनुपालन वाले खातों से प्रति सप्‍ताह 25 हजार रूपये निकालने की अनुमति होगी। नकद निकासी सामान्‍य ऋण सीमा और शर्तों के साथ बंधी होगी। यह सुविधा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर भी मिलेगी।
  2. किसान अभी अपनी खरीफ सीज़न के उत्‍पाद एपीएमसी बाजारों/मंडियों में बेच रहे हैं, जो किसान चैक/आरटीजीएस के माध्‍यम से अपने खातों में भुगतान प्राप्‍त कर रहे है, उन्‍हें प्रति सप्‍ताह 25 हजार रूपये नकद निकालने की अनुमति होगी। इन खातों के लिए केवाईसी अनुपालन आवश्‍यक है। इस सुविधा से किसान अपनी खेती की आवश्‍यकता पूरी कर सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्र में तरलता काफी बढ़ेगी
  3. एपीएमसी बाजारों/मंडियों से पंजीकृत कारोबारियों को कारोबार के लिए प्रति सप्‍ताह केवाईसी अनुपालन वाले खातों से 50 हजार रूपये प्रति सप्‍ताह निकालने की अनुमति होगी। इस सुविधा से कारोबारी वेतन दे सकेंगे और मंडियों में सहज रूप से सामान उतारने चढ़ाने तथा अन्‍य गतिविधियां होगी। 
  4. फसल बीमा प्रीमियम के भुगतान के लिए राज्‍य अपनी स्‍थानीय आवश्‍यकताओं और परिस्थितियों के आधार पर समय सीमा तय करते है। परिणामस्‍वरूप, भुगतान की अंतिम अवधि विभिन्‍न तिथियों को पूरी होती है। अब फसल बीमा प्रीमियम भुगतान की अंतिम अवधि 15 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
  5. चेक और डिजिटल माध्‍यमों से शादी-विवाह के खर्चों को पूरा करने में प्रोत्‍साहन देते हुए शादी विवाह वाले परिवारों को अपने बैंक खातों से 2,50,000 रूपये नकद निकालने की अनुमति देने का फैसला किया गया है। इन खातों के लिए केवाईसी अनुपालन आवश्‍यक है। यह राशि माता-पिता या विवाह सूत्र में बंधने वाले व्‍यक्ति ही निकाल सकते हैं। इनमें से केवल एक को राशि निकालने की अनुमति होगी। 2,50,000 रूपये की सीमा लड़के और लड़की दोनों के परिवारों के लिए अलग-अलग लागू होगी। ऐसी राशि निकालने वाले व्‍यक्ति को अपने ‘पैन’ का ब्‍यौरा देना होगा। राशि निकालने वाले व्‍यक्ति को यह स्‍वत: घोषित करना होगा कि उसके परिवार का केवल एक व्‍यक्ति ही राशि निकाल रहा है। आशा की जाती है कि लोग यह सुनिश्चित करने में सहयोग देगे कि दिशानिर्देशों का पालन हो रहा है। सुविधा का किसी तरह के दुरूपयोग के मामले में स्‍वघोषणा तथा अन्‍य ब्‍यौरों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। 
  6. वर्तमान में काउंटर से 500 रूपये और 1000 रूपये के नोट बदलने की सीमा प्रति व्‍यक्ति 4500 रूपये है। यह सूचना मिली है कि एक ही व्‍यक्ति बार-बार काउंटर पर जाकर नोट बदल रहे है और इस सुविधा का लाभ स्‍वयं उठा रहे हैं और नोट बदलने से अन्‍य लोगों को वंचित कर रहे हैं। यह सूचना भी मिली है कि कुछ संगठित समूह अपने काले धन को सफेद बनाने के खेल में लगे है। यह आशा की जाती है कि लोग अपने पुराने नोट बैंकों में जमा करवायेंगे। लोगों की सुविधा के लिए काउंटर से 500 रूपये और 1000 रूपये के नोट बदलने की अधिकतम सीमा 4500 रूपये से 2000 रूपये करने का फैसला लिया गया है। यह सुविधा केवल एक व्‍यक्ति को मिलेगी। 4500 रूपये से नोट बदलने की अधिकतम सीमा घटाकर 2000 रूपये करने का निर्णय 18 नवम्‍बर, 2016 से लागू होगा। 
  7. केन्‍द्र सरकार के ग्रुप-सी के कर्मचारियों तथा रक्षा और अर्धसैनिक बलों, रेलवे तथा केन्‍द्रीय सार्वजनिक प्रतिष्‍ठानों के समकक्ष स्‍तर के कर्मचारियों को 10,000 रूपये नकद तक वेतन अग्रिम निकालने का विकल्‍प होगा। यह राशि नवम्‍बर, 2016 के वेतन में समायोजित की जाएगी। आशा की जाती है कि इस निर्णय से बैंकों पर दवाब कम होगा। 

30 दिसंबर के बाद सरकार ऐसे पहचान लेगी कालेधन वालों को


काले धन के खिलाफ सबसे बड़ी मुहिम चलाने से पहले सरकार के सामने इस चीज पर नजर रखने की चुनौती थी कि ब्लैक मनी जमा वाले इसे व्हाइट में तबदील न कर पांए। इस मुश्किल को हल किया भारत कि उस एजेंसी ने जो ऐसे हर ट्रांजेक्शन पर नजर रखती है। देश की 'फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट', ही वो ऐजेंसी है जो देश में ही नहीं, विदेशों से होने वाले काले धन के लेन देन का भी पूरा ब्यौरा रखती है।

2004 में बनाई की गई फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट का असली काम होता है देश की दूसरी एजेंसियों से तालमेल बनाकर ब्लैक मनी पर कड़ी नजर रखना। नोटबंदी के फैसले से पहले इसी यूनिट ने बैंकों पर नजर रखने के लिए एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। एजेंसी ने सबसे पहले 'फिनेक्स' (एफआईएनईएक्स) नाम के अपने सर्वर को अपग्रेड किया। सर्वर की कई बार डेटा टेस्टिंग की गई, जिसके बाद इसे देश के सभी बैंकों से जोड़ा गया ताकि हर एक लेन-देन पर नजर रखी जा सके।

देश का हर बैंक इस यूनिट और उसके सिस्टम से जुड़ा हुआ है और आपके खाते की हर एंट्री इस फिनेक्स में भी दर्ज होती है। यही कारण है कि नए नोट बदलने और बैंकों में रुपये जमा कराने की 50 दिन की मियाद खत्म होने के बाद, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के इसी सर्वर के सहारे सरकार उन लोगों पर शिकंजा कसेगी जिन्होंने अपने काले धन को सफेद किया है। 30 दिसंबर के बाद सरकार की जांच एजेंसियों के साथ, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट, फिनेक्स सर्वर में दर्ज आंकड़ों का आंकलन करेगी। इसके बाद इनकम टैक्स और काले धन के खिलाफ कार्रवाई करने वाली दूसरी एजेंसियां अपनी कार्रवाई शुरू करेंगी।

भारत को स्वच्छ भारत बनाने के लिए कालेधन पर जबरदस्त प्रहार


भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री का कदम विश्व में अर्थव्यवस्था को स्वच्छ बनाने का पहला बड़ा कदम

काले धन पर प्रहार से मुद्रा स्थिति पर लगाम लगेगी



प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को राष्ट्र को संबोधित किए जाने के दौरान की गई घोषणा के अनुसार 8 नवंबर की मध्य रात्रि से 500 रुपये और 1000 रुपये के करेंसी नोट के प्रचलन की समाप्ति को काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जबरदस्त प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। काला धन और भ्रष्टाचार अनेक दशकों से देश की अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह खा रहे थे। सरकार के शीर्ष स्तर पर अनेक महीनों के सोच-विचार के बाद इन करेंसी नोटो को अमान्य करने की अचानक घोषणा से अंतरिम रूप से कुछ मुश्किलें आएंगी, लेकिन प्रधानमंत्री ने लोगों से ठीक ही कहा है कि भ्रष्टाचार और काले धन के दानव को परास्त करने के साथ-साथ जाली नोट के प्रचलन को रोकने के लिए प्रत्येक नागरिक को मूल्य चुकानी होगी। भ्रष्टाचार, काला धन और जाली नोट तथा आतंकवाद को वित्तीय सहायता समस्या की जड़ है।

श्री मोदी ने कहा, ‘देश के विकास के इतिहास में ऐसा समय आता है जब दृढ़ और निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता होती है। गलत तरीके से एकत्रित धन की जमाखोरी के विरुद्ध मोदी के कदम से काले धन को जमा करने वालों पर जबरदस्त प्रहार हुआ है और भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।’

एक ओर गलियों तथा सड़कों को स्वच्छ बनाने और शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत का कार्यक्रम चलाया जा रहा है तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान अर्थव्यवस्था की सफाई के लिए दुनिया के किसी भी भाग में शुरू किया गया सबसे बड़ा अभियान है। काले धन और भ्रष्टाचार से ग्रसित प्रणाली की साफ-सफाई के आकार की कल्पना कीजिए। अनुमान के अनुसार 500 रुपये तथा 1000 रुपये मूल्य के 14 लाख करोड़ करेंसी नोट सर्कुलेशन में हैं यह नोट 31 दिसंबर, 2016 और अधिक से अधिक 31 मार्च, 2017 तक वापस ले लिए जाएंगे।

कुछ बैंकर्स महसूस करते हैं कि इस राशि का एक तिहाई हिस्सा बैंक में जमा नहीं कराया जा सकता, क्योंकि इतनी अधिक मात्रा में धनराशि जमा कराने से कुछ लोग दिक्कत में आ सकते हैं इसका अर्थ यह है कि देश को 4.33 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। यह भारतीय रिजर्व बैंक की घटी देनदारी के संदर्भ में देश को एक तरह की प्राप्ति है।

इस विशाल स्वच्छा अभियान से केन्द्र सरकार की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी और मुद्रा स्फीति के मोर्चे पर सकारात्मक लाभ मिलेगा। यह सामान्य जानकारी की बात है कि मुद्रा स्फीति को काला धन ईंधन प्रदान करता है। वास्तव में रियल स्टेट बाजार नकदी हिस्से पर फलता-फूलता है और इस पर रोक लगेगी। रियलिटी क्षेत्र को झटका लगेगा, लेकिन यह क्षेत्र नई वास्तविकता के अनुसार को अपने को समायोजित कर लेगा। इसलिए विश्लेषक यह सही कह रहे हैं कि काले धन पर प्रहार से मुद्रा स्फीति पर लागाम लगेगा और अंततः सामान्य लोगों को मदद मिलेगी। उन्हें कुछ परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। ऊंचे मूल्य के नोटों लोगों को अमान्य घोषित करने से लोक सेवाओं में भ्रष्टाचार पर प्रीमियम में भारी गिरावट आएगी। राष्ट्र को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने पिछले दो वर्षों में काले धन पर लगाम लगाने के लिए अनेक कदम उठाए। इन कदमों में विदेशी काला धन घोषित करने के लिए कानून, बैंकिंग सूचना साझा करने के लिए अनेक देशों के साथ समझौता, बेनामी कारोबार को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून और जुर्माना अदा करने के बाद काले धन की घोषणा के लिए योजना शामिल हैं। इन प्रयासों से 1.25 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए है। इसमें बैंकिंग प्रणाली में वापस नहीं आने वाली 4.33 लाख करोड़ रुपये को जोड़ा जाए तो कुल रकम 5.50 लाख करोड़ रुपए होती है। यह लाभ मध्यम से दीर्घ अवधि में देश को मिलेगा।

अंतरिम  व्यवस्था में सरकार के लिए एकमात्र चुनौती यह है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सामान्य आदमी को काठनाई न हो और बैंकिंग प्रणाली लोगों में यह विश्वास भरे कि सामान्य घरों का धन पूरी तरह सुरक्षित है।

निर्णायक रूप से प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ईमानदार नागरिक चाहते हैं कि भ्रष्टाचार, कालाधन, बेनामी संपत्ति, आतंकवाद और जाली नोटों के प्रचलन के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहे। सरकारी अधिकारियों द्वारा बिस्तर के नीचे करोड़ों रुपये के करेंसी नोट रखने और बोरियों में रकम भरने की खबरों से देश के किस ईमानदार नागरिक को तकलीफ नहीं होगी?’

प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा कि विश्व में तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था होन के बावजूद भ्रष्टाचार के सूचकांक में भारत का स्थान ऊंचा है। अनेक कदम उठाने के बावजूद भारत अभी भी भ्रष्टाचार के सूचकांक में 76वें पायदान पर है।

शेयर बाजारों से शुरूआती प्रतिक्रिया प्रतिकूल आई है। ऐसी अपेक्षा थी बाजार में नरमी ट्रम्प की विजय से भी जुड़ी है।

मोदी का यह जबरदस्त कदम भारत के स्वच्छ भारत बनाने में एक छलांग साबित होगा।



*प्रकाश चावला दिल्ली स्थित वरिष्ठ पत्रकार है और अधिकतर राजनीतिक-आर्थिक विषयों पर लिखते हैं।
लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं।

सरकार द्वारा कालेधन पर रोक लगाने हेतु अभूतपूर्व कदम उठाये गए


सरकार द्वारा भारत और विदेशों में कालेधन की समस्‍या पर रोक लगाने के लिए विभिन्‍न कदम उठाये गये हैं। इस संबंध में प्रमुख निर्णय और कार्यवाही निम्‍नलिखित हैं:

1     कालेधन पर रोक लगाने के लिए उठाये गये प्रमुख कदम:

(1)    कड़े दंड वाले प्रावधानों के साथ एक नया काला धन अधिनियम लागू किया गया।
(2)    29 मई, 2014 को जारी अधिसूचना के तहत उच्‍चतम न्‍यायालय के न्‍यायाधीश एम. बी. शाह की अध्‍यक्षता में विशेष जांच दल का गठन किया गया। विशेष जांच दल के कई सिफारिशों पर कार्यवाही की गई ।
(3)    घरेलू कालेधन के लिए एक नई आय घोषणा योजना की शुरूआत की गई।
(4)    कठोर कार्यवाही करने के परिणामस्‍वरूप लगभग 50,000 करोड़ रूपये के अप्रत्‍यक्ष कर चोरी को पकड़ा गया। इसके साथ ही 21,000 करोड़ रूपये की अघोषित आय का भी पता चला। गत दो वर्षों में तस्‍करी गतिविधियों में जब्‍त किये गये सामान की राशि बढ़कर 3963 करोड़ रूपये पहुंच गई। यह गत दो वर्षों के मुकाबले 32 प्रतिशत अधिक है।
(5)    गत दो वर्षों के 1169 मामलों के मुकाबले 1466 मामलों में कानूनी कार्रवाई की शुरूआत की गई। इसमें 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 

2     वित्‍त अधिनियम-2015 के द्वारा काला धन शोधन अधिनियम-2002 में संशोधन:
·         कालाधन शोधन अधिनियम के अंतर्गत अपराध से आय की परिभाषा में संशोधन किया गया जिससे देश के बाहर स्थित संपत्ति जिसे जब्‍त करना संभव न हो के लिए भारत में समान संपत्ति की कुर्की या अधिकरण को संभव किया जा सके।
·         कालाधन शोधन अधिनियम में धारा (8) को जोड़ा गया ताकि विशेष न्‍यायालय के निर्देश पर कालाधन शोधन के अपराध के परिणामस्‍वरूप हानि उठाने वाले दावेदार को जब्‍त संपत्ति फिर से लौटाई जा सके।
·         सीमा शुल्‍क अधिनियम की धारा 132 जिसमें सीमा शुल्‍क से जुड़े झूठे घोषणाओं या दस्‍तावेजों से जुड़े अपराधों को विधेयक अपराध बनाया गया। व्‍यापार पर आधारित कालेधन शोधन पर रोक लगाई जा सके।
·         कालाधन (अघोषित विदेश आय और संपत्ति) और अधिरोपण कर अधिनियम 2015 की धारा 51 के अंतर्गत किसी कर दंड या ब्‍याज से इच्‍छानुसार बचने के अपराध को पीएमएलए के अंतर्गत अधिसूचीबद्ध अपराध बनाया गया। 

3  पीएमएलए के अंतर्गत हाल ही में की गई अधिसूचनाएं:

    डीएनएफबी सेक्‍टर में जोखिम राहत के लिए राजस्‍व विभाग द्वारा उठाये गये कदम निम्‍नलिखित हैं- 
  
·         पीएमएलए की उपधारा 2 (1) (एसए) (6) के अंतर्गत निर्धारित व्‍यापार या व्‍यवसाय करने वाले को 15.4.2015 को बीमा आढ़ती अधिसूचित किया गया।
·         पीएमएलए की उपधारा 2 (1) (एसए) (2) के अंतर्गत निर्धारित व्‍यापार या व्‍यवसाय करने वाले को 17.4.2015 को पंजीयक या उपपंजीयक अधिसूचित किया गया। 

4  विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 में वित्‍त अधिनियम 2015 के द्वारा संशोधन किये गये संशोधनों के अंतर्गत फेमा की धारा-4 के उल्‍लंघन के परिणामस्‍वरूप किसी व्‍यक्ति के विदेशी मुद्रा विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति अर्जित करने की स्थिति में भारत में समान राशि को जब्‍त करने और अधिग्रहण करने के संशोधन किया गया हैं।

इसे पढ़ना जरुरी है : क्या कहती है काले धन पर SIT की तीसरी रिपोर्ट ?


शेल कंपनियों और हितधारी स्वामित्व के विषय में विशेष जांच दल (एसआईटी) की तीसरी रिपोर्ट में कहा गया है :-  

“शेल कंपनियों और हितधारी स्वामित्व (तीसरी एसआईटी रिपोर्ट में उल्लेख पृष्ठ 73-76)

“भारत और विदेशों में काले धन की रोकथाम के उपाय” पर सीबीटीडी के अध्यक्ष के नेतृत्व में गठित समिति ने 2012 में जो रिपोर्ट दी थी, उसमें कहा गया था : -

“3.4  काले धन के स्रोत का पहला तरीका यह है कि रसीदें नहीं बनायी जातीं और खर्चों को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया जाता है। रसीदें न तैयार करने के दायरे में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियां आती हैं, जिन्हें सामान्य रूप से बिक्री रसीदों, वास्तविक उत्पादन, आवश्यक रकम की तुलना में वसूली आदि को नियमानुसार तर्क संगत बनाना आवश्यक होता है।

3.6   बहरहाल, रसीदों को दबा देने से हर बार आय में हेरफेर करना संभव नहीं होता, इसलिए करदाता खर्चा बढ़ा-चढ़ा कर दिखाते हैं और इसके लिए बिल बनाने वाले व्यक्तियों से फर्जी रसीदें बनवा लेते हैं। रसीद बनाने वाले मामूली कमीशन पर फर्जी रसीदें बना देते हैं। ऐसे व्यक्तियों के पास साधनों की कमी होती है और जांच होने पर वे अपना व्यापार समेट कर दूसरे स्थान पर चले जाते हैं। ऐसे लोगों का अता-पता न होने के कारण बकाया आयकर धनराशि बढ़ती जाती है।

3.7   इसी तरह ‘एंट्री ऑपरेटर्स’ का एक वर्ग ऐसा है जो नकद स्वीकार करके उसकी जगह चैक/ डिमांड ड्राफ्ट जारी करता है। यह रकम कर्ज/ अग्रिम/ शेयर पूंजी के रूप में जारी की जाती है और इस तरह मामूली कमीशन पर काले धन को बड़ी मात्रा में सफेद किया जाता है। एंट्री ऑपरेटर्स एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते जाते रहते हैं, इसलिए आयकर अधिनियम के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। अपीलीय कर संस्थान भी इनकी आय पर मामूली आयकर लगाते हैं। इस तरह की फर्जी रसीदों पर कर लगाने के अलावा और कोई प्रभावशाली उपाय नहीं है।”

काले धन को सफेद बनाने के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया जाता है। जांच के दौरान इस संबंध में कई बड़े मामलों का खुलासा हुआ है।

इस खतरे से निपटने के लिए दोहरी रणनीति का इस्तेमाल करना होगा –

i. शेल कंपनियों की पहचान : इसके लिए कानून लागू करने वाली विभिन्न एजेंसियों को सतर्कता से जांच करनी होगी और नियमित रूप से इनके कारोबार के बारे में आंकड़े जमा करने होंगे।

ii. शेल कंपनियां बनाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ रोकथाम करने के लिए कानूनी कार्रवाइयां करनी होंगी।

इस संबंध में निम्न सिफारिशें की गई हैं:

i. शेल कंपनियों की पहचान : कंपनी मंत्रालय के अधीन गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को सक्रिय और नियमित रूप से रेड फ्लैग संकेतकों के लिए एमसीए 21 डाटाबेस की निगरानी करनी होगी। ये रेड फ्लैग संकेतक सामान्य डीआईएन नम्बरों पर आधारित हो सकते हैं, जिनके तहत कई कंपनियों, समान पते वाली कंपनियों, समान टेलीफोन नम्बरों, केवल मोबाईल नम्बरों के इस्तेमाल, आयकर रिटर्न में अचानक और अस्वाभाविक कारोबार का ब्यौरा शामिल है। ये संकेतक सजीव होते हैं और एसएफआईओ कार्यालय, सीबीडीटी, ईडी और एफआईयू जैसी कानून लागू करने वाली एजेंसियों के अनुभवों और उनके साथ सलाह करके तैयार कर सकता है।

ii. कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ ऐसी अधिक जोखिम वाली कंपनियों के बारे में सूचनाओं को साझा करना : आंकड़ों के जरिये इस तरह की कंपनियों की पहचान कर लेने के बाद उनकी गहन निगरानी के लिए सीबीडीटी और एफआईयू के साथ सूचनाओं को साझा किया जाना चाहिए।

iii. सीबीडीटी द्वारा जांच/ मूल्यांकन हो जाने के बाद मामले को एसएफआईओ को भेज दिया जाए ताकि भारतीय दंड विधान की संबंधित धाराओं के अंतर्गत धोखाधड़ी का मामला चलाया जा सके। मनीलांड्रिंग के मामलों के लिए पीएमएलए के तहत कार्रवाई करने के संबंध में एसएफआईओ मामलों को प्रवर्तन निदेशालय को भेज दे।  

iv. कई मामलों में देखा गया है कि शेल कंपनियां बनाने के लिए उक्त कंपनियों के शेयरधारक और निदेशक मालिकों के ड्राइवर, रसोइये या अन्य कर्मचारी होते हैं, ताकि काले धन की सफाई हो सके। कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 89 (1) और 89 (2) के तहत व्यक्तियों को घोषित करना पड़ता है कि वे उक्त कंपनियों में हितधारक हैं या नहीं। धारा 89 (4) के तहत केंद्र सरकार को अधिकार है कि वह कंपनी में हित और हितधारी स्वामित्व की घोषणा के लिए आवश्यक नियम बनाए। कंपनी मामलों के मंत्रालय को इस संबंध में तुरंत नियम बनाने चाहिए।”

एसआईटी ने कारपोरेट मामलों के मंत्रालय से निम्न आंकड़ें उपलब्ध कराने का आग्रह किया है:

        i.    एक से अधिक कंपनी में निदेशक पद पर आसीन व्यक्तियों के नाम
       ii.    एक ही कार्यालय के पते वाली कंपनियां

कारपोरेट मामलों के मंत्रालय ने आंकड़े उपलब्ध करा दिये हैं। इनका ब्यौरा इस प्रकार है:

 i. 20 से अधिक कंपनियों में निदेशक पद पर 2627 व्यक्ति आसीन हैं, जो कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 165 का उल्लंघन है। उल्लेखनीय है कि यह पूर्व के कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 275 का भी उल्लंघन है। इस मामले में कुल 77,696 कंपनियां लिप्त हैं।

ii. एक ही पते पर संचालित होने वाली कम से कम 20 कंपनियां कुल 345 पतों का इस्तेमाल कर रही हैं। कुल 13,581 कंपनियां ऐसी हैं जो कम से कम 19 कंपनियों के साथ अपने पते साझा कर रही हैं। चूंकि एक ही पते के इस्तेमाल से कंपनियों को रोकने के लिये कोई नियत कानून नहीं है, इसलिए एसआईटी को अधिक सतर्कता से काम लेना होगा। इसके लिए उसे सीबीडीटी, सीबीईसी, ईडी और एफआईयू जैसी गुप्तचर और कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ मिलकर उक्त कंपनियों की गतिविधियों की निगरानी करनी होगी।

एसआईटी ने कंपनी मामलों के मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह कंपनी अधिनियम के तहत ऐसे कंपनियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करे। एसआईटी ने सीबीडीटी, सीबीईसी और प्रवर्तन निदेशालय से भी आग्रह किया है कि वे उक्त कंपनियों के आंकड़ों के बारे में सतर्कता से काम करें।  

तो यह है काला धन वापिस लाने का मोदी का आइडिया

नरेंद्र मोदी सरकार ने विदेशी बैंकों में जमा काला धन वापस लाने के चुनावी वादे को पूरा करने के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की घोषणा की है. सरकार ने 627 लोगों के नामों की सूची सुप्रीम कोर्ट में सौंपी है, जिनके खाते कथित रूप से जेनेवा के एचएसबीसी बैंक में हैं और एसआईटी—जिसमें प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी), राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) और सीबीआई जैसी एजेंसियों के अधिकारी हैं—ने यह डर पैदा कर दिया है कि वह उन कठोर कानूनों को वापस ला सकती है जो निवेश और व्यापार की राह में रोड़ा बनते रहे हैं.

एसआईटी ने प्रवर्तन निदेशालय के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें 1999 के विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) में संशोधन की पेशकश की गई है, ताकि निदेशालय विदेश में काला धन रखने वाले व्यक्ति की उतनी ही कीमत की संपत्ति भारत में जब्त कर सके. प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि इससे काला धन जमा करने वाले संभावित लोगों में खौफ पैदा होगा. एसआईटी के एक अन्य प्रस्ताव में उन देशों से आने वाले एफडीआई के प्रावधानों को सख्त बनाने को कहा गया है, जो टैक्स चोरी के लिए सुरक्षित माने जाते हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि काला धन एफडीआई के रूप में देश में आ रहा है. लेकिन इससे जायज निवेशकों के मन में डर हो सकता है और निवेश धीमा हो सकता है.

एसआईटी का मानना है कि आयकर विभाग को स्विट्जरलैंड, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों के साथ दोहरा कराधान निषेध संधि (डीटीएए) करनी चाहिए और ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे उनके बैंकों में काला धन जमा करने वालों के नाम मांगे जा सकें और उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सके. एसआईटी ने जर्मनी का अनुकरण करने का सुझाव भी दिया है. जर्मनी ने स्विट्जरलैंड से कहा है कि वह अपने बैंकों में जर्मनी के व्यक्तियों की जमा रकम की 20 फीसदी राशि काटकर जर्मन सरकार के खाते में जमा कर दे और इसके लिए खातेदारों के नामों का खुलासा करने की कोई जरूरत नहीं है.

इस बात का डर है कि इन प्रस्तावों से कॉर्पोरेट इंडिया और बाकी दुनिया के सामने मोदी सरकार की कारोबार को बढ़ावा देने वाली छवि को धक्का लगेगा. मसलन, विदेशी बैंकों में खाता रखने वालों के नामों का खुलासा करना उस देश के साथ डीटीएए के गोपनीय शर्त का उल्लंघन होगा. सरकार को डर है कि डीटीएए की शर्तों के उल्लंघन से वे देश पीछे हट जाएंगे, जो भारत के साथ संधि करने जा रहे हैं. ऐसे देशों में अमेरिका शामिल है. अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट से कह चुके हैं, ''जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, उनके नामों को उजागर करने पर विदेशी सरकारों के सूत्र जानकारी देना बंद कर देंगे.’’ जाहिर है, सरकार काले धन पर चुनावी वादे को अमल में लाने की कोशिश में है, तो दूसरी ओर वह अर्थव्यवस्था में सुधारों और विकास के एजेंडे को भी आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी 627 खाताधारको की लिस्ट

केंद्र सरकार ने स्विस बैंक में अकाउंट रखने वाले 627 भारतीयों के नाम सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिए हैं। नामों के साथ इन लोगों के खिलाफ अब तक हुई जांच की स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि लिस्ट में एचएसबीसी बैंक की जिनीवा ब्रांच में खाता रखने वाले भारतीयों के नाम हैं, जो भारत सरकार को फ्रांस की सरकार की ओर मिले थे।

इससे पहले सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को तीन नाम बताए थे। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार विदेशी बैंकों के खाताधारकों की सूची सौंपने को राजी हो गई थी। केंद्र की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि सभी खाताधारकों के नाम 27 जून को एसआईटी को दे दिए गए थे, उसे सुप्रीम कोर्ट को भी सौंप दिया जाएगा।

अटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने अदालत की कार्यवाही की जानकारी देते हुए कहा, 'सरकार ने एचएसबीसी के सारे अकाउंट की लिस्ट सौंप दी है। इसमें 627 या 628 नाम हैं। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद लिफाफे को नहीं खोलने का फैसला किया और इसे एसआईटी के पास आज ही भेजने का निर्देश दिया।' उन्होंने कहा कि इस लिस्ट में करीब आधे नाम भारतीय नागरिकों के हैं, जबकि आधे प्रवासी भारतीय हैं।

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के सामने हमने दूसरे देशों से हुईं संधियों का जिक्र किया, इस पर निर्देश दिया गया कि सरकार अपनी समस्या एसआईटी के सामने रखे। अटर्नी जनरल ने कहा कि हमने कोर्ट को कल भी और आज भी बताया कि एसाईटी को सरकार 27 जून को यह लिस्ट सौंप चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी को निर्देश दिया कि वह 30 नवंबर तक पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। 

सरकार ने बुधवार को कोर्ट को तीन सीलबंद लिफाफे सौंपे हैं। इनमें से पहले लिफाफे में दूसरे देशों के साथ हुई संधि के कागजात हैं। दूसरे लिफाफे में विदेशी खाताधारकों के नाम हैं, जबकि तीसरे लिफाफे में जांच की स्टेटस रिपोर्ट है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इसमें साल 2006 तक की एंट्री है। इसकी वजह यह है कि स्विस अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि ये इनपुट्स चोरी की जानकारी के आधार पर हासिल किए गए हैं।

एचएसबीसी से यह लिस्ट उसके किसी पूर्व कर्मचारी ने साल 2006 चुरा ली थी और भारत को यह फ्रांस से साल 2011 में मिली। इस लिस्ट में चार तरह की सूचनाएं हैं- नाम, पता, अकाउंट नंबर और खाते में जमा राशि। नाम और अड्रेस के मिलान के बाद 136 लोगों या प्रतिष्ठानों ने अकाउंट होने की बात मान ली है।

हालांकि, इनमें से कई का कहना है कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं थी लेकिन वे टैक्स और जुर्माना चुकाने को तैयार हैं। 418 में से 12 अड्रेस कोलकाता के हैं, लेकिन छह ने ही माना है कि उनका अकाउंट है। खाताधारकों की लिस्ट में सबसे ज्यादा रकम वाला अकाउंट 1.8 करोड़ डॉलर वाला है, जो देश के दो नामी उद्योगपतियों के नाम से है। इस लिस्ट में सबसे ज्यादा नाम मेहता और पटेल सरनेम के साथ हैं। 

काला धन: मोदी सरकार ने तीन खाताधारियों का खुलासा किया

काला धन मामले में कुछ कार्रवाई की उम्मीद जगी है. केंद्र सरकार ने विदेशी बैंकों में धन रखने वाले तीन कारोबारियों के नाम सोमवार को बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के सामने रख दिए. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ये नाम हैं, डाबर के पूर्व डायरेक्टर प्रदीप बर्मन, राजकोट के कारोबारी पंकज चमनलाल लोढ़िया और गोवा के खनन किंग राधा टिम्ब्लू. केंद्र सरकार ने कोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल करके ये नाम बताए. इन तीनों के खिलाफ विदेशी बैंकों में गोपनीय तरीके से पैसे रखने के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है.

खबर पर 'डाबर' की प्रतिक्रिया भी सामने आई है. कंपनी ने कहा है कि यह बैंक खाता उस वक्त खोला गया था जब प्रदीप बर्मन एनआरआई थी और उन्हें यह खाता खोलने की कानूनी इजाजत थी. डाबर ने दावा किया है कि खाता खोलने के संबंध में सारे कानूनी पक्षों का ध्यान रखा गया है और उचित टैक्स भी चुकाया गया है. कंपनी ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विदेश में अकाउंट रखने वाले हर शख्स को एक ही नजर से देखा जा रहा है. कंपनी ने कहा है कि फिलहाल प्रदीप बर्मन का डाबर से कोई संबंध नहीं है और डाबर इंडिया लिमिटेड में कोई पद उनके पास नहीं है.

सूत्र बता रहे हैं विदेशी बैंकों में खाताधारकों में जिन नेताओं के नाम हैं , उनके मामलों में अभी सबूत जुटाए जा रहे हैं. इस बारे में पुख्ता जांच के बाद कोर्ट के समक्ष उन नामों का खुलासा भी किया जा सकता है. अभी जो तीन नाम सामने आ रहे हैं उन्हें यह साबित करना होगा कि विदेशी बैंकों में उन्होंने जो पैसा रखा है, वह काला धन नहीं है और इस मामले में आरबीआई के दिशानिर्देशों की अवहेलना नहीं की गई है.

तीन नाम सामने आने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर काउंटर अटैक किया है. कांग्रेस ने कहा है कि इससे अरुण जेटली का वह दावा झूठा साबित होता है जिसमें वह कह रहे थे कि नाम सामने आने के बाद कांग्रेस शरमा जाएगी . वहीं पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा है कि अगर बीजेपी, नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत में साहस हैं तो सभी कालाधन धारकों के नाम सार्वजनिक करें. 

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि जिन विदेशी बैंकों के अकाउंट्स की जांच इनकम टैक्स लॉ के तहत शुरू नहीं की गई है उन नामों का खुलासा नहीं होगा. सरकार को लगता है कि ब्लैक मनी मामले में अवैधता की जांच शुरू किए बिना नामों का खुलासा करना निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा जिसमें आरबीआई के नियमों के मुताबिक किसी भी भारतीय को यह हक है कि वह हर साल विदेशी बैंक में वैध तरीके से 1 लाख 25 हजार डॉलर जमा कर सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील राम जेठमलानी की याचिका पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह बेईमानी से विदेशी बैंकों में जमा किए गए भारतीय पैसों को वापस लाने के लिए उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करे. कोर्ट के आदेश पर तब की यूपीए सरकार ने जेठमलानी से उन भारतीयों नामों का खुलासा किया था जिनके अकाउंट लिचटेंस्टाइन बैंक में थे और जर्मन सरकार ने दोहरे कराधान बचाव समझौते के तहत सूचना मुहैया कराई थी .

इस मामले में नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पहले हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि जर्मनी की आपत्तियों के कारण वह उन भारतीयों के नामों खुलासा तब तक नहीं कर सकती है जब तक कि उनके खिलाफ वित्तीय कानून के तहत अनियमितता की जांच शुरू नहीं हो जाती. इससे पहले नामों का खुलासा करने से द्विपक्षीय समझौते की शर्तों का उल्लंघन होगा. इसमें कहा गया है कि भारत सरकार, अमेरिका समेत दूसरे देशों से कुछ महत्वपूर्ण दोहरे कराधान बचाव समझौते में लगी है. कोर्ट को बताया गया है कि इन संधियों के माध्यम से ही विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के ब्लैक मनी से जुड़ी सूचनाओं के स्रोत तक पहुंचा जा सकता है.

सरकार ने कोर्ट से कहा था कि यदि हम समझौतों के करारों का उल्लंघन करते हैं तो विदेशी बैंकों में भारतीयों द्वारा छुपाकर रखे गए पैसों से जुड़े डेटा दूसरे देश साझा करने से इनकार कर देंगे. केंद्र सरकार ने इस हलफनामे के जरिए कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वह उन भारतीयों के नामों का खुलासा करने के लिए तैयार है जिनके विदेशी बैंक खातों की जांच की सिफारिश की गई है. जेठमलानी ने सरकार के इस स्टैंड पर कड़ी आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था कि सरकार सब कुछ रहस्य बनाकर रखना चाहती है. उन्होंने दोहरे कराधान बचाव समझौते के बारे में कहा था कि यह सब कुछ छुपाने की चाल है . सरकार के इस फैसले की कांग्रेस ने भी निंदा की थी.

Vishwa Bandhu Gupta exposing Sonia Gandhi Corruption and Black money

बोफोर्स दलाली का पैसा सीधे इटली की बैंक में जमा हुआ - मेनका गाँधी

उत्तर प्रदेश की आंवला लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी सांसद मेनका गांधी ने आरोप लगाया है कि स्विस बैंक में जमा आधे से ज्यादा धन कांग्रेस नेताओं का है यही वजह है कि विदेशी बैंक में संचालित बैंक खातों की जांच कराने से कांग्रेस कतरा रही है और इस काले धन को बचाने में कांग्रेस ने पूरी ताकत लगा रखी है।

मेनका गांधी ने ये भी कहा कि बोफोर्स तोव घोटाले में दलाली का धन भी विदेशी बैंकों में जमा किया गया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुत्रवधू एवं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की देवरानी मेनका गांधी का यह बयान राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर सकता है। मेनका ने कहा कि बोफोर्स दलाली का पैसा सीधे इटली की बैंक में जमा हुआ क्योंकि बोफोर्स की दलाली करने वाला मुखिया इन्हीं के गांव का था।

सांसद मेनका गांधी ने कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह की भाषा और भाषण को सड़क छाप बताया और कहा कि देश में तो कोई यह भाषा पसंद नहीं करता है जाहिर है कि यह भाषा किसी विदेशी के इशारे पर इस्तेमाल हो रही है।

एक
सवाल के जवाब में कांग्रेसी युवराज राहुल गांधी की लम्बी उम्र की कामना करते हुए मेनका ने कहा कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं तो बनें। इस देश में प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी योग्यता की जरूरत नहीं है, मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इसका उदाहरण हैं।

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