मोदी ही हो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार - येदियुरप्पा

नरेन्द्र मोदी के प्रशासनिक कौशल की तारीफ करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने कहा कि बैठक में अन्य मसलों के साथ ही मोदी को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश करने पर विचार होना चाहिए।

सूत्रों से खबर मिली है कि गुरूवार देर शाम गडकरी व अरूण जेटली के साथ हुई बातचीत के बाद  येदियुरप्पा अब शुक्रवार सुबह ही मुम्बई रवाना होंगे।

भाजपा-आएसएस के बीच समन्वय भूमिका निभा रहे संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी भी कार्यकारिणी में पहुंचे और गडकरी से मिले। उन्होंने बंद कमरे में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की।

राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को बर्खास्त करो - भाजपा

बीजेपी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को तुरंत वापस बुलाने की मांग की है। कर्नाटक के मुद्दे पर एनडीए के नेता बीजेपी के सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में सोमवार शाम को प्रधानमंत्री से मिले।

आडवाणी ने बताया कि उन्होंने गर्वनर भारद्वाज को वापस बुलाने की मांग की। आडवाणी ने येदयुरप्पा का समर्थन किया और कहा कि भारद्वाज की कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश असंवैधानिक है।

उन्होंने कहा कि जब से भारद्वाज राज्यपाल बने हैं, वह संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा का अधिवेशन न बुलाने की राज्यपाल की बात असंवैधानिक है।

आडवाणी ने बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि कर्नाटक मामले पर संविधान विरुद्ध कोई काम नहीं किया जाएगा।

येदियुरप्पा सरकार से समर्थन वापस लेने वाले विधायक अयोग्य करार

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के लिए काफी दिनों बाद अच्छी खबर आई है। भ्रष्टाचार, भूमि घोटाले सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर जूझ रहे येदियुरप्पा को यह राहत कर्नाटक हाईकोर्ट ने दी है। कोर्ट ने सोमवार को उन पांच बागी निर्दलीय विधायकों को अयोग्य करार दिया, जिन्होंने पिछले साल अक्तूबर में येदियुरप्पा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। जिसके बाद असेंबली स्पीकर के. जी. बोपैया ने भाजपा के 11 विधायकों सहित उक्त पांचों को दलबदल कानून के तहत अयोग्य करार दिया था। बोपैया ने निर्दलीय विधायक पी. एम. नरेंद्र स्वामी, शिवराज एम. थंगाडागी, वेंकटरमनप्पा, डी. सुधाकर और गुलीहट्टा डी. शेखर को दलबदल कानून के तहत निलंबित किया था।

बरकरार रखा विधायकों को अयोग्य ठहराने का फैसला:

अध्यक्ष ने यह निर्णय सदन में भाजपा के विश्वास मत हासिल करने से एक दिन पूर्व लिया था। आदेश को चुनौती देते हुए पांचों विधायकों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना, न्यायमूर्ति शांतानागुदार और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर की तीन सदस्यीय पूर्ण पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। 11 भाजपा विधायकों के निलंबन को कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा सही ठहराए जाने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। न्यायमूर्ति शंतानागुदार ने कहा कि उनकी पीठ ने तीन मुद्दों पर विचार किया।


इनमे संबंधित निर्दलीय विधायकों के निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं द्वारा दाखिल याचिका के साथ विधायकों को निलंबित किए जाने का फैसला तथा इसके पीछे का मकसद भी शामिल है। पीठ की नजर में मतदाताओं द्वारा दायर की गई याचिका स्वीकार करने लायक थी तथा अध्यक्ष द्वारा निर्दलीय विधायकों को निलंबित करने का फैसला वैध था। सुनवाई के दौरान विधायकों की ओर से पेश वकील ने कहा कि ये विधायक कभी भी भाजपा में शामिल नहीं हुए थे। कोर्ट ने इस दलील के खिलाफ पर्याप्त सुबूत होने की बात कहते हुए इसे खारिज कर दिया।

क्या था मामला :

पांच निर्दलीय विधायकों को भाजपा के 11 विधायकों सहित सदन से निलंबित किया गया था। इन विधायकों ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को गत पांच अक्तूबर को पत्र लिखकर येदियुरप्पा से अपना समर्थन वापस ले लिया था। हालांकि भाजपा सरकार 106 मतों के साथ सदन में विश्वास मत जीत गई थी।

भाजपा ने हंसराज भारद्वाज को वापस बुलाने की मांग की

सोमवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वाराज की अगुआई में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ कर्नाटक के भाजपा सांसदों का एक दल राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा.

वहां उन्होंने राष्ट्रपति से मिलने के बाद उन्हें ज्ञापन सौंपा और कर्नाटक के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को वापस बुलाने की मांग की. भाजपा नेताओं ने राष्ट्रपति से राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के खिलाफ शिकायत की.

वहीं बैंगलोर की अदालत मे येदयुरप्पा और उनके परिवार के खिलाफ तीन मामले दर्ज किये गये हैं.

दूसरी तरफ मुख्यमंत्री येदयुरप्पा ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज को खुली चुनौती दी है और परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा.

येदयुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोपों में अपने खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति देने के राज्यपाल हंसराज भारद्वाज के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर आज हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं.

मुख्यमंत्री के करीबी सूत्रों ने बताया कि कई वकीलों और विधि विशेषज्ञों ने रविवार को करीब 93 दस्तावेजों का अवलोकन किया जिसके आधार पर राज्यपाल ने गत 21 जनवरी को येदयुरप्पा के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति दी.

सूत्रों ने बताया कि येदियुरप्पा का प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ राम जेठमलानी भी मार्गदर्शन कर रहे हैं. उनके कोर्ट में मुख्यमंत्री की ओर से पेश होने की भी उम्मीद है.अधिवक्ता सिरजिन बाशा और के एन बलराज ने शहर की एक अदालत में दो फौजदारी याचिकाएं दायर की थीं.

इन्हीं दो वकीलों की याचिकाओं पर राज्यपाल ने येदयुरप्पा के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति दी थी.सूत्रों ने हालांकि यह नहीं कहा कि क्या येदयुरप्पा इन शिकायतों पर कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए भी प्रार्थना करेंगे. राज्यपाल के अनुमति देने से येदयुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अभियोग का सामना करने वाले पहले मुख्यमंत्री होंगे.राज्य मंत्रिमंडल के 19 जनवरी के प्रस्ताव को खारिज करते हुए भारद्वाज ने येदियुरप्पा के खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति दे दी थी.

राज्यपाल के इस कदम को भाजपा ने संवैधानिक तौर पर ‘अनुचित’ और ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया था.येदयुरप्पा ने अपने इस्तीफे की संभावना से इंकार किया था. वह अपनी सरकार पर मंडरा रहे राजनैतिक संकट और इस हालात से निपटने के लिए भावी रणनीति पर पार्टी के शीर्ष नेताओं से विचार-विमर्श करने के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं.

दोनों अधिवक्ता सोमवार को अतिरिक्त नगर दीवानी न्यायाधीश सी बी हिप्परागी के समक्ष येदयुरप्पा के खिलाफ 12 अतिरिक्त आरोपों को लेकर चार और शिकायतें दायर कर सकते हैं.मालूम हो कि भूमि हथियाने और उसे सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने सम्बंधी दो मामलों में मुख्यमंत्री के खिलाफ सोमवार को न्यायाधीश सी बी हिप्परागी की विशेष अदालत में सुनवाई होगी.

इन आरोपों में येदयुरप्पा के अलावा उनके दो बेटों सिमोगा से सांसद बी वाई राघवेंद्र और बीवाई विजेंद्र, दामाद आर एन सोहन कुमार, पूर्व भाजपा मंत्री एस एन कृष्णानैया सेट्टी और 'दावलगिरी प्रोपर्टी डेवलेपर्स लिमिटेड' के मालिक सहित अन्य करीबी सहयोगियों के नाम शामिल हैं.येदियुरप्पा ने वरिष्ठ नेताओं से ली सलाहबी एस येदयुरप्पा ने रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की.

उन्होंने अपने ऊपर दर्ज मामलों का सामना करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर उनसे सलाह ली. कथित भ्रष्टाचार के आरोपों पर दो वकीलों ने उन पर आपराधिक मामले दाखिल कराए हैं.पार्टी सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पहुंचने के बाद येदयुरप्पा ने राज्यपाल हंसराज भारद्वाज द्वारा उनके खिलाफ अभियोग चलाने की अनुमति को चुनौती देने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से राजनीतिक और कानूनी रणनीति पर चर्चा की.

येदयुरप्पा सोमवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी से भी मुलाकात करने वाले हैं. गडकरी अपनी पांच दिनों की चीन यात्रा से रविवार रात यहां पहुंचेंगे.नई दिल्ली रवाना होने से पहले येदयुरप्पा ने बेंगलुरू में पत्रकारों से कहा, 'राज्य में लोकतांत्रित रूप से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने के लिए मैं पार्टी के शीर्ष नेताओं से अनुरोध करता हूं कि वह राज्यपाल को वापस बुलाने की राष्ट्रपति से मांग करें.

'मुख्यमंत्री ने शनिवार को अपने पद से हटने से इंकार किया और जोर देकर कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है इसके लिए वह अंत तक संघर्ष करेंगे और अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करेंगे.बेंगलुरू में एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल हंसराज भारद्वाज द्वारा कार्रवाई की मंजूरी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री राज्य में राजनीतिक हालात की जानकारी देने और उठाए जाने वाले अगले कदम के सम्बंध में पार्टी नेतृत्व से मशविरा करने के लिए रविवार दोपहर बाद दिल्ली रवाना हुए.

हंसराज भारद्वाज ने लोकतन्त्र की सरेआम हत्या की - येदियुरप्पा

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने राज्यपाल एच आर भारद्वाज की उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मामला चलाने की अनुमति देने कोसरेआम लोकतन्त्र की हत्याकरार दिया.इस बीच कर्नाटक में सत्ताधारी भाजपा ने राज्यपाल के मुख्यमंत्री के खिलाफ सुनवायी शुरू करने की प्रदान की गई अनुमति के विरोध में शनिवार को पूरे राज्य में बंद का आह्वान किया है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के एस ईश्वरप्पा ने यहां कहा कि भाजपा ने राज्यपाल के इस कदम के खिलाफ शनिवार को पूरे राज्य में बंद का आह्वान करने का फैसला किया है.येदियुरप्पा ने राज्यपाल द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला चलाने की एक मंच के दो वकीलों को अनुमति प्रदान किये जाने के तत्काल बाद जारी बयान में कहा कि यह और कुछ नहीं बल्कि लोकतंत्र और न्याय की सरेआम हत्या है.

उन्होंने राज्यपाल पर आरोप लगाया कि वह अपने कार्यालय का उपयोग अपनी राजनीतिक उद्देश्य पूरा करने के लिए कर रहे हैं. उन्होंने साथ ही विपक्ष पर भी आरोप लगाया कि वह जो जनादेश से प्राप्त नहीं कर सके उसे वह राज्यपाल के कार्यालय और राजभवन के जरिये प्राप्त करना चाहता है.

उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्यपाल ने मामला चलाने की अनुमति किसी भी प्रारंभिक जांच अथवा निजी शिकायत से संबंधित मामले में मुझे कोई मौका दिये बगैर ही दी है.

छवि सुधारने की कोशिश में येदयुरप्पा- बेटे-बेटी को घर छोड़ देने को कहा

अपनी कुर्सी बचाने के बाद छवि सुधारने की कोशिश में कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदयुरप्पा ने अपने बेटे और बेटी से कहा कि तुरंत मुख्यमंत्री आवास छोड़ दें।

मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े एक ऑफिसर ने कहा, ' मुख्यमंत्री ने अपने बेटे बीवाई विजेंद्र और बेटी उमा देवी से बुधवार कहा कि उनका रेसकोर्स स्थित आधिकारिक आवास छोड़कर चले जाएं। दोनों ने तुरंत उनकी बात मान ली। '

गौरतलब है कि येदयुरप्पा के बेटे विजेंद्र, बेटी उमा और उनके पति सोहन कुमार उनके आदिकारिक आवास में ही उनके साथ रहते थे और बड़े बेटे सांसद बीवाई राघवेंद्र अक्सर उनसे मिलने आते थे।

येदयुरप्पा पर सरकारी जमीन डीनोटिफाई करके अपने बेटों और दामाद को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा जिसके बाद उनकी कुर्सी जाते-जाते बची। इसके बाद ही येदयुरप्पा ने इन्हें अपने आधिकारिक आवास से हटने को कहा।

माना जा रहा है कि आलाकमान ने उनसे अपने रिश्तेदारों से दूरी बरतने को कहा है और येदयुरप्पा ने आलाकमान से वादा किया है कि वह स्वार्थी तत्वों और अपने रिश्तेदारों को प्रशासन से दूर रखते हुए स्वच्छ शासन सुनिश्चित करेंगे।

भाजपा आलाकमान के निर्णय का पालन करूँगा - येदियुरप्पा

अड़ियल रुख अपनाने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने आज कहा कि वह भाजपा आलाकमान के निर्णय का पालन करेंगे।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने आज सुबह संवाददाताओं से कहा, ‘‘ मेरे बारे में हमारे राष्ट्रीय नेता जो भी निर्णय करेंगे, मैं उस आदेश का पालन करूंगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज मैं सभी राष्ट्रीय नेताओं से मिलूंगा और मैं उन्हें कर्नाटक की स्थिति से अवगत कराउंगा। हम एक महीने के भीतर जिला पंचायत चुनाव का सामना करने वाले हैं।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह पद छोड़ेंगे, येदियुरप्पा ने कहा, ‘‘ मैंने कोई गलती नहीं की है। मैं केंद्रीय नेताओं से भेंट करूंगा। वे जो कुछ भी कहेंगे, मैं उसका पालन करूंगा। अभी तक किसी ने भी मुझसे इस्तीफा देने को नहीं कहा है।’’

मुझे किसी ने इस्तीफा देने के लिए कहा ही नहीं - येदियुरप्पा

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से बातचीत के लिए आज यहां पंहुचने पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा ने कहा कि उन्हें किसी ने इस्तीफा देने के लिए कहा ही नहीं।

उन्होंने यहां संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘मुझसे किसी ने इस्तीफा ही नहीं मांगा।’’ उनसे पूछा गया था कि क्या पार्टी नेतृत्व की इच्छा के अनुरूप वह इस्तीफा देने जा रहे हैं।

येदियुरप्पा ने कहा कि पहले वह कर्नाटक से अपनी पार्टी के सांसदों से मिलेंगे और उसके बाद पार्टी नेतृत्व से।

अपने परिवार के लोगों को भूमि आवंटन में बरती गई अनियमतिओं के आरोप पर उन्होंने कहा कि इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं।

येदियुरप्पा कर्नाटक के पुट्टापार्थी से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ विशेष विमान से यहां आए हैं। दिल्ली बुलाए जाने की भाजपा आलाकमान के कल के आदेश की उन्होंने अनदेखी कर दी थी।

बताया जाता है कि येदियुरप्पा इस्तीफा देने की आलाकमान की हिदायत पर अभी भी अपने पत्ते खोलने से बचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने शीर्ष नेतृत्व से कहा है कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने से दक्षिण भारत के किसी राज्य में भाजपा की अपने बूते बनी पहली सरकार को नुकसान हो सकता है।

अपना नाम नहीं देने के आग्रह पर पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने हालांकि इस आशंका से इंकार किया कि येदियुरप्पा कर्नाटक की भाजपा सरकार को अस्थिर करने की ताकत रखते हैं।

येदियुरप्पा ने खुद यहां आने से पहले उच्च शिक्षा मंत्री वी एस आचार्य सहित अपने कुछ विश्वसनीय लोगों को दिल्ली भेजा। आचार्य ने पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं से मिलने के बाद दावा किया कि येदियुरप्पा के भविष्य के बारे में पार्टी ने अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं किया है।

येदियुरप्‍पा के रिश्तेदारों ने लौटाईं विवादास्पद जमीन

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के रिश्तेदारों ने भले ही विवादास्पद जमीन सरकार को वापस कर दी गई हो, लेकिन इससे सीएम को राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। पार्टी ने इस मुद्दे को काफी गंभीरता से लिया है। पार्टी कोर ग्रुप की आज दिल्ली में रात को बैठक है, जिसमें येदियुरप्पा के भविष्य पर चर्चा होगी।

पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता कर्नाटक के मुख्यमंत्री पर कार्रवाई के पक्ष में हैं, जिससे भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चल रहे हंगामे के बीच वे सरकार पर दबाव बढ़ा सकें। इसी बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अनंत कुमार पर आरोप लगाया है कि वे उनके खिलाफ षडयंत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विवादों में परिवार को घसीटना ठीक नहीं है। बीजेपी पिछले ६ दिनों से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रही है और इसीलिए कुछ पार्टी नेताओं का मानना है कि येदियुरप्पा पर कार्रवाई की जाना चाहिए, ताकि वे कांग्रेस पर दबाव बना सकें।

सीएम के रिश्तेदारों ने लौटाई जमीन

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे और बेटी ने शुक्रवार को सरकार द्वारा आवंटित विवादास्पद जमीन लौटा दी है। मुख्यमंत्री के पुत्र और सांसद बीवाई राघवेंद्र ने शुक्रवार को बंगलुरु विकास प्राधिकरण को एक पत्र लिखकर आरएमवाई एक्सटेंशन कॉलोनी में आवंटित ५० गुना ८० का प्लॉट वापस लौटा दिया है। इसी तरह उनकी बेटी उमा देवी ने उनके नाम आवंटित दो एकड़ का औद्योगिक प्लॉट भी वापस करने के लिए उद्योग विभाग को लिखा है। उनके परिवार के बाकी सदस्य भी उन्हें आवंटित जमीनें लौटा रहे हैं।

सरकार ने दिए न्यायिक जांच के आदेश

कर्नाटक सरकार ने हाल ही में इस पूरे मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इस जांच के दायरे में पिछले १० सालों में हुए भूमि आवंटन के मामले लाए जाएंगे। जांच के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्रियों एसएम कृष्णा, धर्म सिंह और एचडी कुमारस्वामी के कार्यकाल के कथित घोटाले भी शामिल हैं। कर्नाटक में विपक्षी दल जनता दल(सेक्युलर) ने मुख्यमंत्री के जमीन घोटालों को लेकर लोकायुक्त को शिकायत दर्ज कराई है।

भूमि आवंटन मामले में येदियुरप्पा को दिल्ली बुलाया गया

भाजपा नेतृत्व ने आज शहरी भूमि आवंटन मामले में उठे विवाद के मद्देनजर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा को विचार-विमर्श के लिए दिल्ली बुलाने का फैसला किया।

पार्टी की कोर समिति की बैठक पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर हुई। बैठक में मुख्यमंत्री के खिलाफ बगावत समेत अन्य कई मुद्दों पर बातचीत हुई।

कहा जा रहा है कि नेतृत्व का मानना था कि कर्नाटक में ऐसे समय में पार्टी को राजनीतिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है, जब पार्टी भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ अभियान छेड़े हुए है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि नेता इस स्थिति से निपटने के लिए समाधान तलाश रहे हैं। सभी का मानना है कि प्रदेश की राजनीति को देखते हुए मुख्यमंत्री को हटाना सही विकल्प नहीं होगा।

बैठक के बाद पार्टी नेता अरुण जेटली ने संवाददाताओं को बताया कि बैठक में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और दूसरे अहम नेताओं को आने वाले एक-दो दिन में दिल्ली बुलाने का फैसला किया गया है, ताकि पूरे मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व से बात हो सके।

इसके पहले पार्टी सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री को आज रात आने का समन जारी किया गया है, लेकिन बेंगलूर से आई कई खबरों के मुताबिक येदियुरप्पा ने दिल्ली जाने का अपना कार्यक्रम निरस्त कर दिया है।

बैठक में कर्नाटक से सांसद अनंत कुमार भी मौजूद थे।

कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के एक विधायक ने त्यागपत्र दिया

कर्नाटक में विपक्षी कांग्रेस पार्टी के एक विधायक ने विधानसभा से आज त्यागपत्र दे दिया जिस पर पार्टी के शीर्ष नेता सत्ताधारी भाजपा पर विधायक को अपने पक्ष में करने आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री बी एस येद्दयुरप्पा के आवास के सामने धरने पर बैठ गए।


पुलिस
ने हालांकि ने पूर्व उप मुख्यमंत्री सिद्धरमैयाह और प्रदेश कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष आर वी देशपांडेय सहित कुछ विधायकों सहित पार्टी के 70 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर यह धरना समाप्त करा दिया।

कांग्रेसी नेता एक पांच सितारा होटल में बैठक कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें पार्टी विधायक एस वी रामचंद्र के त्यागपत्र की सूचना मिली। सूचना मिलते ही नेताओं ने बैइक समाप्त करके मुख्यमंत्री के आवास के बाहर पहुंचे और धरना शुरू कर दिया।

बेंगलुरु से विधायक रामचंद्र ने अपना त्यागपत्र विधानसभा अध्यक्ष के जी बोपैया को सौंपा। हालांकि जब विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय ने कांग्रेस के स्पष्टीकरण के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया तब सिद्धरमैया और देशपांडेय के नेतृत्व में नेताओं ने धरना शुरू कर दिया।

हंसराज भारद्वाज के मुंह पर फिर तमाचा - येदियुरप्पा सरकार ने फिर साबित किया बहुमत

कर्नाटक में बी . एस . येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने विधानसभा में हुए शक्तिपरीक्षण में विश्वासमत हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने विश्वासमत का प्रस्ताव सदन में पेश किया जिसके पक्ष में 106 विधायकों ने अपना मत दिया जबकि 100 विधायकों ने इसके खिलाफ मत दिया।

येदियुरप्पा और बीजेपी के लिए सदन में दूसरी बार विश्वास मत हासिल करना मुश्किल नहीं रहा क्योंकि 224 सदस्यीय विधानसभा में 16 बागी विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद से प्रभावी सदस्य संख्या घटकर 208 ही रह गई थी।

इससे पहले कर्नाटक विधानसभा सत्र स्थगित करने की विपक्षी दल कांग्रेस की मांग को भी खारिज कर दिया गया। कांग्रेस के नेता एस. सिद्धारमैया ने मांग की थी कि प्रस्ताव को हाई कोर्ट का फैसला आने तक टाल दिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट को अयोग्य ठहराए गए 16 विधायकों की याचिका पर फैसला सुनाना है। स्पीकर के. जी. बोपैया ने कहा कि, यह सत्र राज्यपाल के निर्देश पर विश्वासमत के लिए विशेष तौर पर बुलाया गया है और इसे स्थगित नहीं किया जा सकता।

येदियुरप्पा सरकार आज दोबारा विश्वास मत रखेगी पर फैसला सोमवार को ही

कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार आज दोबारा विश्वास मत रखेगी। आज फैसला जो भी हो, लेकिन सरकार के भाग्य का अंतिम फैसला सोमवार को ही हो सकेगा, जब हाईकोर्ट अयोग्य घोषित विधायकों की याचिका पर सुनवाई करेगा।

विधानसभा में आज कड़ी सुरक्षा की गई है ताकि सोमवार का घटनाक्रम नहीं दोहराया जाए। मुख्यमंत्री ने सोमवार को जबर्दस्त हंगामे के बीच पहला विश्वास मत हासिल किया था। कांग्रेस, जनता दल (सेक्युलर) और 16 अयोग्य घोषित विधायकों ने उस दिन विधानसभा में जबर्दस्त हंगामा किया था। मार्शलों पर हमले हुए, और कई बाहरी तत्व सदन में घुस गए। राज्यपाल के सुझाव पर आज फिर बीजेपी सरकार विश्वास मत हासिल करने जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11.30 बजे शुरु होगी।

आज की परिस्थिति में यदि कुछ असामान्य नहीं हुआ तो सरकार के बचने के आसार हैं। फिलहाल आंकड़े सरकार के पक्ष में हैं। कुल मिलाकर बीजेपी के पक्ष में 108 विधायक बताए जा रहे हैं, जिसमें स्पीकर शामिल नहीं हैं। मतदान में यदि बराबर मत पड़ सकते हैं तो स्पीकर भी वोट कर सकते हैं। विपक्ष के पास 100 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है।

पहले विश्वास मत के पूर्व रविवार को विधानसभा अध्यक्ष केजी बोपय्या ने 11 बीजेपी और 5 निर्दलियों सहित 16 विधायकों को सदन की कार्यवाही से अयोग्य घोषित कर दिया था। उन्होंने यह कार्रवाई दल बदल कानून का तहत की। इन विधायकों ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका पेश की।

मंगलवार को अपील पर सुनवाई हुई और अगली सुनवाई आने वाले सोमवार को है। इसी बीच बुधवार को पांच निर्दलीय विधायकों ने फिर एक याचिका हाईकोर्ट में लगाकर मामले की तत्काल सुनवाई की अपील की। हाईकोर्ट ने हालांकि इन विधायकों को कोई राहत नहीं दी, लेकिन साफ कर दिया है कि गुरुवार को सदन की कार्यवाही का अंतिम निर्णय, सोमवार को होने वाली सुनवा के बाद ही होगा।

यदि कोर्ट स्पीकर के आदेश को बनाए रखता है, तो सरकार बची रहेगी, लेकिन यदि अदालत ने फैसले को पलट दिया, तो सरकार को फिर से विश्वास मत हासिल करना पड़ सकता है।

कड़ी सुरक्षा है विधानसभा में

विधानसभा में आज करीब 149 मार्शल ड्यूटी पर रहेंगे। किसी भी बाहरी व्यक्ति को सदन में घुसने नहीं दिया जाएगा। आज सांसद और पूर्व विधायकों को भी आने की इजाजत नहीं है। आमतौर पर सदन की कार्यवाही दर्शक दीर्घा, वीआईपी दीर्घा से देखी जा सकती है, लेकिन आज किसी को भी यहां आने की इजाजत नहीं होगी। खासतौर पर अयोग्य घोषित विधायक तो विधानसभा के आसपास भी नहीं फटक सकेंगे।

कर्नाटक की येदियुरप्पा सरकार के मंत्रिमण्डल में फेरबदल

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा ने अपने मंत्रिमण्डल के कल होने वाले विस्तार तथा फेरबदल का मंच तैयार करते हुए आज तीन मंत्रियों को हटा दिया।

बहुप्रतीक्षित फेरबदल के तहत येदियुरप्पा अपने मंत्रिमण्डल में छह मंत्रियों को शामिल करेंगे।

पद से हटाए जाने पर आत्महत्या की चेतावनी देने वाले खेल मंत्री गूलीहट्टी शेखर, प्रौढ़ शिक्षा मंत्री शिवानागौड़ नायक तथा उच्च शिक्षा मंत्री अरविन्द लिम्बावली को येदियुरप्पा ने अपनी भाजपा सरकार के मंत्रिमण्डल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व से सलाह मशविरे के बाद येदियुरप्पा ने राज्यपाल एच. आर. भारद्वाज से तीन मंत्रियों को हटाने की सिफारिश की जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया।

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