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दिसंबर 2016 तक सभी लाईट हाउस सिर्फ सौर ऊर्जा से परिचालित होंगे


प्रकाशस्तंभ और प्रकाशपोत महानिदेशालय (डीजीएलएल), जो शिपिंग मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक अधीनस्थ संगठन है। वर्तमान में यह 193 प्रकाशस्तंभों का रखरखाव कर रहा है जो देश के समुद्रीय तट क्षेत्र में आवागमन करने वाले नाविकों को समुद्रीय नेविगेशन में सहायता उपलब्ध कराता है।

अधिकांश प्रकाशस्तंभ ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों जैसे बिजली और डीजल जेनरेटर से परिचालित थे जिसमें जीवाश्म ईंधन की भारी खपत होने के कारण भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन हो रहा था। जिससे ग्रीनहाउस प्रभाव बढ़ने के साथ-साथ वायु प्रदूषण में भी बढ़ोतरी हो रही थी। 1 मेगा वाट ऑवर (एमडब्ल्यूएच) विद्युत अगर जीवाश्म ईंधन से पैदा की जाती है तो इससे लगभग 900 किलो कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता है। 

कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम करने के लिए डीजीएलएल ने पारंपरिक ऊर्जा का स्रोत बदलने का निर्णय लिया और नवीकरण ऊर्जा के रूप में सौर ऊर्जा के उपयोग से अपने प्रकाशस्तंभों का काम शुरू कर दिया। 

आज की तारीख तक 176 प्रकाशस्तंभों को पूरी तरह सौर ऊर्जा पर चलाया जा रहा है। निदेशालय ने 31/12/2016 तक सभी प्रकाशस्तंभों को पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलाने का लक्ष्य अर्जित करने की योजना बनाई है। सभी प्रकाशस्तंभों के सौर ऊर्जा से परिचालित होने पर लगभग 1.5 (एमडब्ल्यूएच) ऊर्जा का सृजन होगा। जिससे प्रतिदिन 6000 किलोग्राम ग्रीन हाउस गैसों का कम उत्सर्जन होगा। 

सौर ऊर्जा कृत होने से डीजीएलएल के अधीन प्रकाशस्तंभ हरित ऊर्जा से परिचालित होंगे। यह सरकार के पर्यावरण संरक्षण के लिए हरित ऊर्जा के अधिकतम उपयोग के प्रयास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

इसके अलावा प्रकाशस्तंभ विश्वसनीय, लचीला और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली से परिचालित होने पर ग्लोबल वार्मिंग के उत्सर्जन में कमी आएगी।

भारत में अल्पसंख्यक सबसे ज्यादा सुरक्षित और मजबूतः मुख्तार अब्बास नकवी



लोकतांत्रिक भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों का मुद्दा दुनिया के लिए सीखः प्रो. पीटर रोनाल्ड डिसूजा 

एक तरफ दुनिया बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक संबंध में नैतिक, वैधानिक और सामाजिक संदर्भों पर संघर्ष कर रही है वहीं भारत पिछले 70 वर्षों से इस विषय से जुड़ा हुआ है और उसने एक मूल्यवान वैश्विक बौद्धिक संसाधन विकसित किया है। लोकतांत्रिक भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों का मुद्दा दुनिया के लिए एक सीख है। आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा आयोजित ‘भारत में अल्पसंख्यक अधिकार और लोकतंत्र’ पर 9वें वार्षिक व्याख्यान 2016-17 देते हुए दिल्ली विश्वविद्याल के प्रो. पीटर रोनाल्ड डिसूजा ने यह व्यक्त किया।

प्रो. डिसूजा ने कहा कि इस बहस से अल्पसंख्यक अधिकारों पर तीन प्रमुख विचार सामने आते हैं। पहला, यह कि सांस्कृतिक और धार्मिक बहुलता राष्ट्र के लिए संपदा होते हैं न कि खतरा। विभाजन के बाद यह विचार सामने आया कि देश को मजबूती के साथ एकीकृत किया जाए। दूसरा, सांस्कृतिक स्वायत्ता को अनुमति दी जानी चाहिए। इसके तहत व्यक्ति अपने सांस्कृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करके अपने व्यक्तित्व को विकसित कर सकता है और तीसरा यह कि इस विश्वास को संवैधानिक बनाया जाए और उसे केवल वैधानिक स्थिति तक न सीमित रखा जाए।

प्रो. डिसूजा ने कहा कि एक साथ रहना साक्षेप और साकारात्मक होता है। उन्हें नियमित रूप से दुरुस्त करना चाहिए। यह हमारे लोकतंत्र की देन है कि यहां अल्पसंख्यक मामलों के संबंध में संस्थान कारगर तरीके से काम करते है। उन्होंन कहा कि हम लोग अल्पसंख्यक अधिकारों के प्रति ईमानदारी के साथ प्रतिबद्ध है और हमें बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक संबंधों को न केवल दुरुस्त करना चाहिए, बल्कि अल्पसंख्यकों के बीच मौजूद अल्पसंख्यक वर्ग पर भी ध्यान देना चाहिए।

इस अवसर पर अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य मंत्री श्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि विश्व के किसी भी लोकतंत्र की तुलना में अल्पसंख्यक भारत में अधिक सुरक्षित और मजबूत है। उन्होंने कहा कि राजग सरकार के लगभग 2.6 वर्षों के कार्यकाल के दौरान हम लोगों ने अल्पसंख्यकों के बीच सामानता का भाव पैदा करने के लिए बहुत परिश्रम किया है।

श्री नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यकों को भी समान रूप से "प्रधानमंत्री जनधन योजना," उज्ज्वला योजना "," दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना", छात्रों को छात्रवृत्तियां, रोजगार उन्मुख, कौशल विकास योजना जैसी योजनाओं के लिए स्वास्थ्य केन्द्रों और शैक्षिक संस्थानों का समान रूप से लाभ मिल रहा है। इसके अलावा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की अनेक कल्याणकारी योजनाएं "प्रधानमंत्री के नए 15 सूत्री कार्यक्रम", "नई मंज़िल", "नई रोशनी" "सीखो और कमाओ", "उस्ताद", "प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति" तथा मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, स्टॉर्ट अप इंडिया जैसी योजनाओँ से भी अल्पसंख्यक समान रूप से लाभान्वित हुए हैं।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना 1978 में सरकार की दिनांक 12 जनवरी, 1978 की अधिसूचना के माध्यम से की गयी थी। बाद में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अधिनियमन के द्वारा एक स्वायत्त आयोग, जिसे बेहतर रूप से एमसीएम के रूप में जाना जाता है, की स्थापना 17 मई, 1993 को हुई और इसके पहले अध्यक्ष ने जुलाई, 1993 में पदभार संभाला।

जुलाई, 1993 में वैधानिक आयोग की स्थापना के उपलक्ष्य में एनसीएम ने 2008 में एक व्याख्यान श्रृंखला शुरू की। पहला एनसीएम व्याख्यान भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए एम अहमदी ने 2008 में दिया गया था।

जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने दूसरा एनसीएम व्याख्यान "भारत के संविधान में अल्पसंख्यक" विषय पर वर्ष 2009 में दिया था। वर्ष 2010 में भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, ने समृद्ध, शांतिपूर्ण, समावेशी और प्रसन्न समाज के विकास पर तीसरा एनसीएम व्याख्यान दिया था।

चौथा एनसीएम व्याख्यान वर्ष 2011 में महामहिम दलाई लामा ने "विविध समाजों में करुणा" विषय पर दिया था।

डॉ शशि थरूर ने पांचवां एनसीएम व्याख्यान वर्ष 2012 में "कौन भारतीय है; अल्पसंख्यकों का एक राष्ट्र’’ विषय पर दिया था।

छठा वार्षिक व्याख्यान बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने 'भारत के विचार' विषय पर वर्ष 2013 में दिया था।

सातवां वार्षिक व्याख्यान श्री फली नरीमन ने वर्ष 2014 में "अल्पसंख्यक चौराहे पर, न्यायिक घोषणाओं पर टिप्पणियाँ" विषय पर दिया था।

आठवां वार्षिक व्याख्यान वित्त और कॉरपोरेट मामलों के मंत्री श्री अरुण जेटली ने '' अल्पसंख्यकों के आर्थिक सशक्तिकरण विषय पर दिया था।

देशविरोधी होने का आरोप लगाकर बीकानेर में केजरीवाल पर फेंकी गई स्याही


राजस्थान के बीकानेर में मु्ख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर स्याही फेंकी गई। स्याही फेंकने वाला छात्र है और उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। स्याही से हमला करने वाले की पहचान दिनेश ओझा के रूप में हुई है।

वहीं स्याही फेंके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है- 'भगवान भला करे'। पुलिस का कहना है कि आरोपी छात्र अखिल भारतीय विद्यार्थी संगठन (ABVP) से जुड़ा है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर राजस्थान के बीकानेर में स्याही से हमले की घटना तब हुई, जब वह यहां आम आदमी पार्टी के एक स्थानीय नेता की शोक सभा में शामिल होने गए थे।

चश्मदीद की मानें तो मुख्यमंत्री करीब 10 बजे शंकर सेवादार के घर जा रहे थे। दिनेश ओझा नाम के छात्र नेता ने केजरीवाल पर देश विरोधी होने का आरोप लगाते हुए उनके ऊपर स्याही फेंक दी। पुलिस के मुताबिक, ओझा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ा है और उसे हिरासत में ले लिया गया है।

यहां पर बता दें कि इसी साल जनवरी महीने में एक महिला ने दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में केजरीवाल पर स्याही फेंक दी थी। इसके चलते दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस पर अरविंद केजरीवाल की सुरक्षा में कमी रखने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था।

पीओके में की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर केजरीवाल द्वारा केंद्र सरकार से सबूत मांगने से नाराज एक महिला ने मंगलवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन पर जूती फेंकी। घटना उस वक्त हुई, जब जैन आयकर विभाग के कार्यालय से बाहर आ रहे थे। हालांकि, जूती मंत्री को नहीं लगी।

आरोपी महिला आम आदमी सेना की कार्यकर्ता बताई गई हैं। जूती फेंकने वाली महिला का नाम भावना अरोड़ा है। इससे पूर्व भी वह छत्रसाल स्टेडियम में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर स्याही फेंकने की घटना के बाद मीडिया की सुर्खियां बटोर चुकी हैं।

औद्योगिक हितों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं राष्ट्रीय हित: पीयूष गोयल



इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज महासंघ (एफआईएमआई) की 50वीं वार्षिक आम बैठक के दौरान एक विशिष्ट सभा को संबोधित केंद्रीय ऊर्जा, कोयला, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा तथा खान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल ने कहा है, "देश में जिम्मेदार खनन का माहौल तैयार करने के लिए हितधारकों के नेटवर्क को एकजुट करने वाले नेटवर्क का निर्माण करना जरूरी है।"।

सभा को संबोधित करते हुए मंत्री महोदय कहा कि देश की खनन बिरादरी को खनिज संपदा के क्षेत्र में सुधार लाने लेने के लिए सभी हितधारकों के साथ सामूहिक प्रयास करना करना होगा और पारदर्शिता तथा ईमानदारी बरतनी होगी जिसका फायदा सभी को होगा। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सामूहिक प्रयासों पर बल देते हुए कहा यदि भ्रष्टाचार पर लगाम लगती है तो खनन क्षेत्र निकट भविष्य में देश के सकल घरेलू उत्पाद में एफआईएमआई द्वारा लक्षित 9 फीसद का योगदान देगा।

श्री गोयल ने खनन क्षेत्र में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की जरूरत पर बल दिया जिससे सभी प्रतिभागियों को समान अवसर प्राप्त हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि देश में दुर्लभ घरेलू खनिज संसाधनों के न्यायसंगत आवंटन, उनके वैज्ञानिक अन्वेषण और इष्टतम उपयोग को सुनिश्चित करना होगा। मंत्री मोहदय ने उम्मीद जताई की इस तरह के दृष्टिकोण का पालन करके भारत प्रचुर मात्रा में खनिज संपदा के उपयोग कर आत्मनिर्भर बन जाएगा और इससे आयात और कीमती विदेशी मुद्रा भंडार में बचत होगी।

इस समारोह के दौरान कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे, जिनमें खान सचिव श्री बलविंदर कुमार, एफआईएमआई के अध्यक्ष श्री एच नूर अहमद और खनन उद्योग के अन्य सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान खान सचिव ने इस क्षेत्र में भविष्य में आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के लिए मंत्रालय द्वारा की जा रही कार्रवाईयों के बारे में भी जानकारी दी।

कलाकारों की देश के सामने कोई औकात नहीं,असली हीरो जवान: नाना पाटेकर


भारत में हुए उड़ी हमले के बाद से पाकिस्तानी कलाकारों के बॉलीवुड में बैन करने को लेकर बहस जारी है। बॉलीवुड में एक हिस्सा जहां ये मानता हैं कि पाक कलाकारों को बैन करना सही नहीं है वहीं कुछ लोग ऐसे में भी में जो इसे सही मानते हैं। जब नाना पाटेकर से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तानी कलाकार और बाकी सब बाद में, पहले मेरा देश।

उन्होंने कहा कि देश के अलावा मैं किसी को नहीं जानता और ना जानना चाहूंगा। असली हीरो हमारे जवान हैं। कलाकार देश के सामने खटमल की तरह हैं, हमारी कोई कीमत नहीं है। नाना पाटेकर ने सलमान का नाम लिए बिना उनके उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तानी कलाकार कोई आतंकी तो नहीं हैं।

बोले नाना पाटेकर, देश के सामने कलाकार खटमल की तरह नाना पाटेकर ने कहा कि पाकिस्तानी कलाकार और बाकी सब बाद में, पहले मेरा देश। 

उन्होंने कहा कि हम जो बोलते हैं उस पर ध्यान मत दो, इतनी अहमियत मत देना किसी को। और जो पटर-पटर बोलते हैं न, उनकी उतनी औकात नहीं है उतनी अहमियत की। जवानों से बड़ा हीरो कोई नहीं हो सकता। हम एक्टर तो बहुत मामूली लोग हैं। हमारे असल हीरो हमारे जवान हैं।

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