माओवादियों के खिलाफ अभियान में मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं हो - चिदंबरम

केन्द्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने पुलिस बलों से आज कहा कि वे माओवादियों के खिलाफ अभियान के दौरान मानवाधिकारों का पूरा ध्यान रखें.

श्री चिदंबरम ने यहां आठ माओवाद प्रभावित राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वाम उग्रवादियों से असरदार ढंग से निपटना जरूरी है 1 लेकिन ऐसा करते समय इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं हो.

बैठक में छत्तीसगढ . झारखंड . बिहार . उडीसा . पश्चिम बंगाल . महाराष्ट्र . आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश के शीर्षस्थ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हुए. इसमें माओवाद प्रभावित राज्यों में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा करने के अलावा नक्सलियों को खिलाफ अभियान को ज्यादा प्रभावी बनाने के उपायों पर भी विचार विमर्श किया गया.

सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक में केन्द्रीय और राज्य पुलिस बलों के बीच तालमेल बढाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. साथ ही माओवाद प्रभावित जिलों में चलाए जा रहे विकास कार्यक्रमों की समीक्षा और उनकी रफ्तार बढाने के उपायों पर चर्चा की गई.

बैठक में राज्यों से कहा गया कि वे माओवाद प्रभावित इलाकों में सडक बनाने के काम में तेजी लाएं. इससे सुरक्षा बलों को माओवादियों तक पहुंचने और उनके खिलाफ अभियान चलाने में सहूलियत होगी 1

स्वामी अग्निवेश पर रखी जायेगी निगरानी

छत्तीसगढ़ की सरकार ने सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर निगरानी रखने के आदेश जारी किए हैं.राज्य के ख़ुफ़िया विभाग से कहा गया है कि वह अग्निवेश की हर गतिविधि पर नज़र रखें. इस आशय का आदेश राज्य के गृह मंत्री ननकीराम कँवर ने जारी किया है.

बीबीसी से एक साक्षात्कार में छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ने आरोप लगाया है कि बिनायक सेन के साथ-साथ स्वामी अग्निवेश भी माओवादियों के शहरी नेटवर्क का हिस्सा हैं.

उन्होंने कहा कि डॉक्टर बिनायक सेन सान्याल नक्सलियों के शहरी नेटवर्क के लिए काम कर रहे थे और उन्हें लगता है कि अग्निवेश भी शहरी नेटवर्क में हैं.कँवर का कहना था कि उन्होंने "व्यक्तिगत रूप से" पुलिस विभाग से स्वामी अग्निवेश पर निगरानी रखने का लिखित आदेश दिया है.

इतना ही नहीं गृहमंत्री का कहना है कि उन संगठनों पर भी नज़र रखी जा रही है जो अपने काय्रक्रमों में स्वामी अग्निवेश को आमंत्रित करते हैं.छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री ननकीराम कँवर का कहना है कि सीडी में अग्निवेश को "भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) को लाल सलाम" का नारा लगाते हुए दिखाया गया है.

कँवर कहते हैं, "आप सीडी देखेंगे तब समझ में आएगा. वह नारे लगा रहे हैं भारत की सेना वापस जाओ." कँवर का कहना है कि सरकार मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डालना नहीं चाहती है.उन्होंने कहा, "विभाग के लोग और मुख्यमंत्री भी कहते हैं कि मधुमक्खी के छत्ते में हाथ मत डालो.

लेकिन हाथ तो डालना ही है माओवादियों के शहरी नेटवर्क में. अब साधू के वेश में तो मुश्किल है ना."गृह मंत्री का कहना है कि अब आम लोग भी अग्निवेश के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.कँवर आगे कहते हैं, "विभाग को मैंने व्यक्तिगत रूप से बोल दिया है कि उन पर निगरानी रखे, जितने संगठनों में वह जाते हैं उन संगठनों के क्रियाकलापों पर भी नज़र रखें."

उन्होंने बताया कि निगरानी का मतलब ये कि वे किस तरह के लोगों से मिलते हैं, किस तरह उनको बहकाते हैं और किस तरह के लोगों के साथ काम करते हैं

अब अरुंधती ने माओवादियों को देशभक्त बताया

अरुंधती रॉय ने माओवादियों का यह कहकर महिमामंडन किया है कि माओवादी 'एक तरह के देशभक्त' हैं। उन्होंने पीएम मनमोहन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम पर आरोप लगाया कि वे कॉर्पोरेट कंपनियों को आदिवासियों की जमीन के इस्तेमाल की अनुमति देकर संविधान और पेसा (पंचायत एक्सटेंशन ऑफ शेडयूल एरिया) का उल्लंघन कर रहे हैं।

अरुंधती ने कहा- वे (माओवादी) एक तरह के देशभक्त हैं, लेकिन उनकी देशभक्ति बेहद उलझी हुई है। इसीलिए वे फिलहाल इस देश को टूटने से बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक और सवाल के जवाब में उन्होंने हालांकि कहा कि मैं नहीं समझती कि समस्याओं का हल करने के लिए माओवादी क्रांति एकमात्र हल है।

उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में रविवार को बुकर अवॉर्ड विनर अरुंधती रॉय को एक बैठक में शामिल होने से रोक रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के 11 सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि मानवाधिकार समूहों और जनजातीय संगठनों के बुलावे पर रॉय भुवनेश्वर आई हैं। पुलिस उपायुक्त एच. के. लाल ने कि हमने एबीवीपी के 11 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के संबंध में रॉय की टिप्पणी को लेकर एबीवीपी कार्यकर्ता उनका विरोध कर रहे थे। बाद में वह कार्यक्रम में शामिल हुईं।

नक्सलियों द्वारा रखे गये बम को निष्क्रिय करते वक्त एक जवान शहीद

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की भारत यात्रा के विरोध में 24 घंटे के राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान करने वाले नक्सलियों ने बिहार के औरंगाबाद, गया और मुजफ्फरपुर जिलों में विभिन्न स्थानों पर धमाके किए। उनके द्वारा लगाए गए एक बम को निष्क्रिय करने के प्रयास में सोमवार को गया में बीएमपी का एक जवान शहीद हो गया और 5 अन्य लोग घायल हो गये।

पुलिस महानिदेशक नीलमणि ने बताया कि पूर्ण बंद लागू कराने के लिए नक्सलियों ने कल रात जिले के प्रखंड कार्यालय को धमाके से उड़ा दिया और चार ट्रकों को आग लगा दी। जिले के अमास पुलिस थाना क्षेत्र के पास 100 से अधिक नक्सलियों ने ट्रकों के ड्राइवरों और सहायकों को भगा दिया और उनके वाहनों को पेट्रोल और मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा दी।

गया जिले में ओबामा की भारत यात्रा के बहिष्कार के पोस्टर भी बरामद किये गये हैं। उग्रवादियों ने यहां बांके बाजार में एक प्रखंड कार्यालय को धमाके से उड़ा दिया।

गया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अमित लोढ़ा ने कहा कि प्रखंड कार्यालय में नक्सलियों द्वारा रखे गये बम को निष्क्रिय करते वक्त उसमें धमाका हो गया जिससे बीएमपी के एक जवान की मृत्यु हो गयी। दो महिलाओं सहित पांच लोग घायल हो गये। घायलों को गया के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जाती है।

प्रचंड ने सांसदों को खरीदने के लिए चीन की सरकार से 50 करोड़ रुपये मांगे

बीजेपी प्रवक्ता तरुण विजय का कहना है, "ऐसी खबरें हैं कि माओवादी नेता प्रचंड के दोस्तों ने सांसदों को खरीदने के लिए चीन की सरकार से 50 करोड़ रुपये मांगे हैं."

तरुण विजय ने कहा, "अगर ये खबर सही है तो बीजेपी उसकी निंदा करती है. हम सरकार से मांग करते हैं कि वो परिस्थितियों पर निगाह रखे और किसी हाल में चीन को नेपाल के घरेलू मामलों में दखलंदाजी से रोके."

बीजेपी का मानना है कि नेपाल कठिन समय से गुजर रहा है और ऐसे हालात में चीन का नेपाल के मामलों में दखल देना भविष्य के साथ साथ भारत की सुरक्षा के लिए भी खतरा है. बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि नेपाली जनता की लोकतांत्रिक इच्छाओं का सम्मान हर हाल में होना चाहिए.

बीजेपी की चिंता का जिक्र करते हुए तरुण विजय ने गिलगित के मामले का भी हवाला दिया. उन्होने कहा, "चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत के हिस्से पर पाकिस्तान के अवैध कब्जे को पहले पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया और फिर वेबसाइट से ये पेज हटा दिया गया. इन सब बातों से भारत की सुरक्षा चिंता बढ़ी है." बीजेपी का कहना है कि नेपाल में अगर चीन किसी को सत्ता हथियाने में मदद करता है तो इससे भारत की सुरक्षा पर खतरा बढ़ेगा.

नेपाली मीडिया में एक राजनीतिक पार्टी के नेता की चीन के अधिकारियों से की गई बातचीत लीक हो गई है जिसमें वह चीन से 50 करोड़ रुपये की मांग कर रहा है. राजनीतिक व्यक्ति ने ये पैसे कथित रूप से सांसदों को खरीदने के लिए मांगे हैं. नेपाल में प्रधानमंत्री पद के चुनाव के लिए पांच दौर का मतदान होने के बाद भी किसी को चुना नहीं जा सका है. देश में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता है.

तुझसे नाराज़ नहीं चिदंबरम हैरान हूँ मैं - मनमोहन सिंह

ममता बनर्जी केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम को लगातार झूठा साबित करती रही है और माओवादियों के लिए उनके दिल में अपार प्रेम हैं और इससे भी ज्यादा विचित्र बात यह है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चिदंबरम की बजाय ममता बनर्जी का साथ देने में लगे हैं। इसी सप्ताह ममता बनर्जी से मिलने के लिए प्रधानमंत्री ने अपने दो बड़े कार्यक्रम टाले जिसमें एक राजनयिक रात्रिभोज भी था।

ममता बनर्जी देर तक प्रधानमंत्री के साथ रही और उन्होंने माओवादियो से निपटने की गृह मंत्रालय की शैली की आलोचना की। खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की राय यही है। माओवादियों से वे बार बार हर संभव मौके पर अपील कर रहे हैं कि वे बातचीत के लिए सामने आए और हिंसा का रास्ता छोड़ दे। प्रधानमंत्री तो यहां तक कह चुके हैं कि माओवादी हमारे अपने ही आदमी है और उनसे उनके दुख के कारण पूछे जा सकते हैं।

उधर चिदंबरम प्रधानमंत्री की इस परम नरम मुद्रा से काफी दुखी है। उन्होंने बार बार ऐलान किया है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट के जरिए उन्होंने माओवादियों से आर पार की लड़ाई का जब ऐलान कर ही दिया है तो माओवादियों के प्रति इतना प्यार दिखा कर प्रधानमंत्री आखिर साबित क्या करना चाहते हैं?
मगर प्रधानमंत्री की नाराजगी चिदंबरम के साथ माओवाद को ले कर ही नहीं है, वे भगवा आतंकवाद के नाम पर दिए गए चिदंबरम के बयान से भी काफी आहत है। आज तक जब इस देश में आतंकवाद को मुस्लिम या इस्लामी नहीं कहा गया तो फिर भगवा या हिंदू आतंकवाद शब्द कहां से आ गया और उसे खुद गृह मंत्री ने मान्यता क्यों दे दी? यूपीए सरकार के खिलाफ भाजपा का यह अब एक सबसे नया हथियार है और यह हथियार चिदंबरम की मेहरबानी से मिला है।

दरअसल प्रधानमंत्री ममता बनर्जी से मिलने के बाद चिदंबरम को बुलाते समय इतनी नाराजगी में थे कि चिदंबरम ने खुद प्रणब मुखर्जी और एके एंटनी से अनुरोध किया कि वे भी इस बैठक में आए। प्रधानमंत्री पहले ही इन दोनों का बुला चुके थे। चिदंबरम ने ममता बनर्जी की शिकायत को नाजायज बताया जिसमें ममता ने कहा था कि माओवादियों के खिलाफ जो केंद्रीय अर्धसैनिक बल आए हैं उनका फायदा वामपंथी उठा रहे हैं। वैसे भी ममता बनर्जी लालगढ़ की अपनी चर्चित रैली में माओवादियों के नेता आजाद की मौत को ले कर इसे फर्जी मुठभेड़ कह चुकी है और इसकी जांच की मांग भी कर चुकी है।

इस बात की संभावना कम है कि चिदंबरम को हटाया जाएगा या उनकी जगह कोई नया गृह मंत्री ला कर उन्हें किसी दूसरे विभाग में भेजा जाएगा लेकिन उन पर निगरानी करने के लिए बहुत सारे उपाय सोचे गए हैं और इन उपायों के पीछे प्रधानमंत्री ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से अपने तर्कों के आधार पर अनुमति भी ले ली है।

लालगढ़ के बयान पर संसद में भी घिरीं ममता

लालगढ़ में माओवादियों के समर्थन में दिए बयान को लेकर रेल मंत्री ममता बनर्जी को सड़क से लेकर संसद तक विपक्ष के जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है. संसद में विपक्षी दलों ने ममता के मंत्री होने तक पर सवाल उठा दिया.

गुरूवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में बनर्जी को समूचे विपक्ष ने जमकर घेरा. वामदलों ने तो इसे कैबिनेट मंत्री के तौर पर ममता को मिले अधिकारों के हनन का मामला तक बता दिया. पिछले सोमवार को ममता ने अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल के नक्सली हिंसा से प्रभावित लालगढ़ में तृणमूल कांग्रेस की रैली में माओवादियों की तरफदारी में भाषण दिया था.

उन्होंने हाल ही में पुलिस मुठभेड़ का शिकार बने शीर्ष माओवादी नेता आजाद की मौत को हत्या बताया था. ममता ने कहा, "जिस तरह आजाद को मारा गया, वह सही नहीं था और इसकी जांच होनी चाहिए." बुधवार को ममता ने अपने बयान से पीछे नहीं हटने की भी बात कह डाली. गौरतलब है कि माओवादियों का प्रवक्ता आजाद 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश के आदिलाबाद जिले में सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया था.

ममता के बयान का विरोध करते हुए सीपीएम नेता और राज्यसभा सदस्य सीताराम येचुरी ने उन पर माओवादियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार का एक मंत्री कैसे खुलकर उन माओवादियों का साथ दे सकता है जिन्हें खुद प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है.


येचुरी ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रेल मंत्री ने सरकारी एजेंसियों को हत्यारा बताया है. उन्होंने कहा कि ममता ने अपने भाषण में माओवादियों के साथ जुड़ने पर गर्व होने की बात भी कही थी जो कि निहायत शर्मनाक है.

बीजेपी के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी सदन में ममता की निंदा की. उन्होंने कहा कि एक केन्द्रीय मंत्री का सरकार के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर बयान देना गंभीर बात है.

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