वाइब्रेंट गुजरात 2017: वस्त्र क्षेत्र में 8,835 करोड़ रुपये के MOU साइन हुए


वाइब्रेंट गुजरात 2017 के दौरान वस्त्र क्षेत्र में 8,835 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये

गुजरात की वस्त्र गाथा अभी हाल ही में शुरू हुई है: श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी

गुजरात में वस्त्र शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं: केन्द्रीय वस्त्र मंत्री

केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी ने कहा कि गुजरात के निवासियों की उद्यमिता भावना और निवेश के प्रवाह के मद्देनजर गुजरात की वस्त्र गाथा अभी हाल ही में शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि भारत में वस्त्र उद्योग के सबसे बड़े केन्द्रों में गुजरात को भी शुमार किये जाने के नाते यह राज्य सभी तरह के वस्त्रों की प्राप्ति का एकल केन्द्र है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में वस्त्र शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। श्रीमती इरानी ने कहा कि वस्त्र संबंधी पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले गुजरात के 28 आईटीआई में चलाए जा रहे कपड़ा क्षेत्र संबंधी कौशल विकास कार्यक्रम 75 फीसदी प्लेसमेंट का आंकड़ा दर्ज कराने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात के दो प्रमुख संस्थान अर्थात निफ्ट और एनआईडी तथा विभिन्न इंजीनियरिंग कालेज वस्त्र प्रौद्योगिकी, वस्त्र प्रसंस्करण एवं वस्त्र इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डिग्री की पेशकश करते हैं। श्रीमती इरानी आज गुजरात के गांधीनगर में वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन के दौरान “मेक इन गुजरात” थीम पर आधारित संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं, जिसका विषय था “प्रवृतियां और वस्त्र संबंधी वैल्यू चेन पर असर डालने वाले नवाचार।”

वस्त्र मंत्री संगोष्ठी के दौरान वस्त्र क्षेत्र में 8,835 करोड़ रुपये के सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर की भी साक्षी रहीं। वस्त्र पार्कों, वस्त्र प्रसंस्करण, मशीनरी, कालीन विकास इत्यादि जैसे क्षेत्रों में इन एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये हैं। वस्त्र मंत्री ने कहा कि भारत में कुल कपास उत्पादन का 29 फीसदी गुजरात में ही उत्पादित होता है। उन्होंने कहा कि यह इस राज्य में निहित असीम संभावनाओं के प्रति वस्त्र उद्योग के ठोस विश्वास को दर्शाता है। श्रीमती इरानी ने गुजरात की वस्त्र संबंधी वैल्यू चेन के विकास के साथ-साथ तकनीकी वस्त्रों एवं अऩुसंधान के क्षेत्र में संभावनाओं की तलाश के लिए भी अपने मंत्रालय की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

गुजरात सरकार में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, कॉटेज उद्योग, मुद्रण तथा लेखन सामग्री मंत्री श्री जयेश रादादिया, भारत सरकार में वस्त्र आयुक्त डॉ. कविता गुप्ता, फिक्की की वस्त्र समिति के अध्यक्ष श्री शिशिर जयपुरिया, गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग में प्रधान सचिव श्रीमती सुनयना तोमर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अमूल की नई इकाईयों के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का गजब का भाषण


मंच पर विराजमान सभी महुनुभाव और बनासकांठा के मेरे प्यारे भाईयों और बहनों, 

आपको लगता होगा आपना नरेन्‍द्र भई हिन्‍दी में केम बोले छ, 

अरे देश को भी तो पता चलना चाहिए कि बनासकांठा का किसान कैसा काम करता है। मरूभूमि में भी जान भरने की ताकत अगर है, तो बनासकांठा के किसान में है, उत्‍तर गुजरात के किसान में है। जो अपना पसीना बहा करके जमीन में जान भर देता है। और इसलिए देश को पता चले कि इस बनासकांठा जिला, पाकिस्‍तान की सीमा पर, बिना पानी; बिना बरसात; रेगिस्‍तान जैसी जिंदगी गुजारता हुआ इंसान अपने पराक्रम से, पुरुषार्थ से अपने भाग्‍य को कैसे बदल सकता है, इसका ये जीता जागता उदाहरण ये जिले के नागरिक हैं; उनका पुरुषार्थ है, और उनकी सफलताएँ हैं। 

भाइयो, बहनों! मुझे बताया गया 25-27 साल के बाद कोई प्रधानमंत्री का बनासकांठा जिले में आने का हुआ है। भाइयो, बहनों में आपके बीच में प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, इस धरती की संतान के रूप में आया हूं। इस मिट्टी ने मुझे बड़ा किया है। और मैं आज विशेष रूप से आया हूं, श्रद्धेय गलबाभाई को; उनकी तपस्‍या को नमन करने के लिए आया हूं। लाखों पशुओं की तरफ से, लाखों परिवारों की तरफ से, बनासकांठा की बंजर भूमि की तरफ से मैं आज गलबाभाई की शताब्‍दी के समारोह की शुरुआत उनको शत् शत् नमन करता हूँ; इन सबकी तरफ से नमन करता हूं। 

आप कल्‍पना कीजिए, आज से 50 साल पहले जब गलबाभाई की उम्र 50 साल की थी, आठ छोटी छोटी दूध मंडली; उससे शुरू किया और आज किसानों के सहयोग से, पुरुषार्थ से, परिश्रम से, और उसमें भी बनासकांठा की, उत्‍तर गुजरात की मेरी माताओं, बहनों के पुरुषार्थ के कारण; जिन्‍होंने पशुपालन को परिवार की सेवा का हिस्‍सा बना दिया; उन्‍होंने श्‍वेत क्रांति ला दी। आज बनास डेयरी की भी स्‍वर्णिम जयंती का अवसर है। ऐसा सुयोग है कि एक तरफ इस महान आंदोलन के जनक, श्‍वेत क्रांति के जनक गलबा भाई की शताब्‍दी, और दूसरी तरफ उन्‍हीं के हाथों से बोया गया पौधा, आठ मंडली से शुरू हुआ पौधा, आज बनास डेयरी के रूप में वटवृक्ष बन गया है; उसकी स्‍वर्णिम जयंती का ये अवसर है। और इसलिए इस 50 वर्ष में जिन-जिन महानुभावों ने इस बनास डेयरी को चलाया, आगे बढ़ाया, इस ऊंचाई पर ले गए, अनेक चेयरमैन आए होंगे, अनेक व्‍यवस्‍थापक आए होंगे, अनेक कर्मचारी रहे होंगे, मैं आज इस 50 साल की यात्रा में जिन-जिन लोगों ने योगदान दिया है, उन सबका दृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, उनका साधुवाद करता हूं। 

भाइयो, बहनों! आप मुम्‍बई जाएँ, सूरत जाएँ, किसी और इलाके में जाएं तो कठिनाइयों में ही जिंदगी गुजारने के लिए गुजरात से कौन आया है, तो ज्‍यादातर पता चलता था कच्‍छ और बनासकांठा के लोग अपना गांव, अपना इलाका छोड़ करके रोजी-रोटी कमाने के लिए कहीं बाहर जाते थे, क्‍योंकि यहां कोई प्राकृतिक संसाधन नहीं थे। और भाइयो, बहनों हम पहले से कह रहे थे एक बार मां नर्मदा हमारी इस बनास की धरती को आ करके छू लेगी, मेरा किसान मिट्टी को सोना बना करके रख देगा। आज उसने बनास की इस सूखी धरती को, इस रेगिस्‍तान वाली धरती को सोने में तब्‍दील कर दिया है। 

मुझे बराबर याद है, मैं नया-नया मुख्‍यमंत्री बना था। कई सारे सवालिया निशान मेरे लिए लगाए जाते थे। ये मोदी! मुख्‍यमंत्री! क्‍या करेगा! ये तो कभी! गावं का सरपंच नहीं रहा! कभी चुनाव नहीं लड़ा! इसको क्‍या आएगा! बड़ी मजाक उड़ती थी। उस समय मेरा सबसे पहला सार्वजनिक कार्यक्रम डीसा में हुआ था, इसी धरती पर हुआ था; इसी मैदान में हुआ था। और वो था लोक कल्‍याण मेला। और उस दिन मैंने जो नजारा देखा था आज उससे अनेक गुना नजारा बड़ा मेरी आंखों के सामने देख रहा हूं। 

भाइयो, बहनों! मुझे बराबर याद है बनासकांठा के किसान मुझपे बहुत नाराज रहते थे, गुस्‍सा करते थे। कभी-कभी मेरे पुतले जलाते थे। और फिर मैं हिम्‍मत करके उनके बीच जाता था। और मैं उनको कहता था कि अगर बनासकांठा का भाग्‍य बदलना है तो हमें पानी बचाना पड़ेगा, बिजली के तार छोड़ने पड़ेंगे। किसान को बिजली नहीं पानी चाहिए; ये बात मैं उस समय बताता था; नाराजी मोलता था, लेकिन ये मेरा सौभाग्‍य है कि वो ही बनासकांठा, वही मेरे बनासकांठा के किसान, उन्‍होंने मेरी बात को सर आंखो पर चढ़ाया, और आज Drip Irrigation में टपर सिंचाई में (Sprinkler में), पूरे गुजरात में नम्‍बर एक पर ला करके खड़ा कर दिया। मैं उन सभी किसानों को, मैं आज उन सभी किसानों को सर झुका करके नमन करता हूं। उन्‍होंने न अपना भाग्‍य बदला ऐसा नहीं है, उन्‍होंने आने वाली अनेक अनेक पीढि़यों का भी भाग्‍य बदल दिया है। 

मुझे याद है, 2007 या 08 का वर्ष होगा, ऐसा ही एक किसानों के लिए कार्यक्रम मेरा था, तो मैं बनासकांठा में आया था। तो हमारे एक मित्र हैं, दिव्‍यांग हैं श्री गेना जी। गेना जी हमारे लाखनी तहसील से हैं। तो गेना जी चल तो पाते नहीं हैं, दिव्‍यांग हैं, लेकिन बड़े प्रगतिशील किसान हैं। वो इतना बड़ा दाड़म ले करके; अनार ले करके मुझे भेंट करने आए, नारियल से भी बड़ा था। मैं हैरान था, मैंने उनसे पूछा भाई ये कमाल कैसे किया है आपने? बोले साहब आज तो मेरे खेत में पूरे जिले के लोग देखने के लिए आते हैं, और आप देखना धीरे-धीरे दाड़म की खेती में बनासकांठा आगे निकल जाएगा। एक गांव के मेरे गेना जी सरकारी गोरिया के हैं ना गेनाजी! आए होंगे कहीं शायद बैठे होंगे। हमारे गेना जी कहीं बैठे होंगे। क्‍या कमाल करके रख दिया, भाइयो, बहनों बनासकांठा के किसान ने, प्रगतिशील किसान के रूप में अपनी छवि छोड़ी है और एक-दो किसान नहीं, एक आंदोलन खड़ा हुआ है। आज भी बनासकांठा ने प्रति हेक्‍टेयर आलू की पैदावार का जो रिकॉर्ड किया है उसका रिकॉर्ड को कोई तोड़ नहीं पाया। ये काम बनासकांठा ने कर दिखाया है। आज बनासकांठा Potatoes के लिए भी जाने लगा है। 

भाइयो, बहनों! किसान के लिए कुछ चीजें कैसी वरदान होती हैं। गलबाभाई ने जब डेयरी का काम शुरू किया, जहां पानी न हो रेगिस्‍तान हो, 10 साल में 7 साल अकाल रहता हो; जहां किसान ईश्‍वर की इच्‍छा पर ही जिंदगी गुजारता हो; उसके लिए तो आत्‍महत्‍या एक ही रास्‍ता बच जाता था। लेकिन इस जिले ने किसानों को पशुपालन की ओर मोड़ दिया, दुग्‍धपालन की ओर मोड़ दिया और पशुओं की सेवा करते-करते, दुग्‍ध क्रांति करते-करते अपने परिवार को चलाया, बच्‍चों को भी पढ़ाया और जीवन को आगे ले गए। 

भाइयो, बहनों! यही बनासकांठा, यही गुजरात, जिसने श्‍वेत क्रांति का नेतृत्‍व किया था; आज मुझे खुशी हुई कि बनास डेयरी ने श्‍वेत क्रांति के साथ-साथ Sweet क्रांति का भी बिगुल बताया है। जहां श्‍वेत क्रांति हुई वहां अब Sweet क्रांति भी होने वाली है। मधु क्रांति! शहद! बनास ने डेयरी के दूध की जैसी व्‍यवस्‍था की है किसानों को शहद के लिए मधुमक्‍खी पालन के लिए। ट्रेनिंग देना शुरू किया। आज उस Honey में से पहला packaging बना करके उन्‍होंने market में रखा हे। मेरा पूरा विश्‍वास है गुजरात में जो डेयरी का network है, और करीब-करीब सभी जिलों में डेयरी का network है, किसानों की समितियां बनी हुई हैं। दूध के साथ-साथ खेतों में अगर मधुमक्‍खी पालन भी किसान पकड़ लें तो जैसे दूध भरने जाते हैं, वैसे मधु भरने जाएंगे, मद भरने जाएंगे, शहद, honey ले जाएंगे, और डेयरी की गाडि़यों में दूध भी जाएगा, शहद भी जाएगा। Extra Profit, Extra Benefit, अतिरिक्‍त कमाई का एक नया रास्‍ता, गुजरात के भी डेयरी, सभी किसान, इस रास्‍ते पर चल करके एक श्‍वेत क्रांति के साथ-साथ Sweet क्रांति को भी ला सकते हैं ऐसा मेरा विश्‍वास है। दुनिया में शहद की मांग है, बहुत बड़ा market है। अगर हम शहद में भी आगे निकल जाएं, और जब नर्मदा का पानी आया है। नर्मदा के नजदीकी इलाकों में तो बहुत बड़ी मात्रा में इसका लाभ मिलता है। Fertilizer उपयोग करने के तरीके बदलने पड़ते हैं, लेकिन लाभ इतना बड़ा होता है और जैसा बनाकांठा के किसान का मन बदला है, ये भी बदल के रहेगा ऐसा मुझे विश्‍वास है। 

आज बनास डेयरी ने Amul Brand के साथ Cheese का Production का भी एक प्‍लांट शुरू किया। गुजरात में जितनी भी डेयरियां वो Cheese के काम से चली हुई हैं, आप हैरान होंगे दुनिया के कई देश हैं, वे Amul के Brand की Cheese मांगते हैं। जितनी पैदावार होती है तुरंत उठ जाती है, लोग, ग्राहक मिल जाते हैं। आज उसमें एक इजाफा बनास डेयरी के द्वारा हो रहा है, मैं उनको बधाई देता हूं। एक बहुत बड़ा initiative आज डेयरी ने लिया है, KanKrej की गायद्, इस नस्ल का मूल्‍य हम जानते हैं, वैज्ञानिक तरीकों ने भी गिर की गाय, KanKrej (कांक्रेच) की गाय, इसका महात्‍मय स्‍वीकार किया है। अब A2 Milk, जिस KanKrej की गाय के दूध की एक विशेषताएं हैं, विशेष तत्‍व हैं, उसको आज उन्‍होंने मार्केट में रखा है। जो Health Conscious लोग हैं, जहां बच्‍चों को कुपोषण की समस्‍या है, ऐसे बच्‍चों के लिए A2 Milk, KanKrej गाय का A2 Milk उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उपकारक होने वाला है, ऐसा एक भगीरथ काम भी आज यहां शुरू हुआ है। यहां KanKrej की नस्‍ल को बढ़ावा देना, उसमें सुधार करना, उसकी क्षमता में सुधार करना, उसकी per capita milk production बढ़ाना, उसके लिए भी वैज्ञानिक तरीके चल रहे हैं। 

मैं बनास में जब आया हूं तब मैं बनास डेयरी से चाहूंगा कि वो एक काम और भी करे, और कर सकते हैं। बनास हो, सांभर डेयरी हो, दुग्‍ध सागर डेयरी हो; ये तीनों मिल करके भी कर सकते हैं। दो चीजें हम ऐसी पैदा करते हैं, हमारे किसान; लेकिन हम सस्‍ते में बेच देते हैं। और जो हम castor की खेती करते हैं, दिवेला; एरेंडा। 80 percent खेती हमारे यहां होती है, उसका उत्‍पादन। उस पर इतनी value addition होती है, इतनी process होती है। सारी दुनिया के महत्‍वपूर्ण technology में space shuttle की technology में ये Castor के Oil से बनी हुई चीजें सबसे सफल रहती हैं। लेकिन हम जो हैं, अभी भी हमारा दिवेला, एरेंडा जो कहें; ऐसे का ऐसा बेच देते हैं। ये बनास, दुग्‍धसागर, सांभर एक research Centre बनाएं और हम, हमारे किसान जो यहां पर castor पैदा करते हैं, एरंडा पैदा करते हैं, दिवेला पैदा करते हैं, उसमें value addition कैसे करें और हमारा ये कीमती संपत्ति पानी के मोल से बाहर चली जाती है, उसे हम बचाएं। 

दूसरा है ईसबगोल। इसबगोल की ताकत बहुत बड़ी ताकत है। उसमें बहुत value addition हो सकता है। जब कुरियन जिंदा थे, तो श्रीमान कुरियन जी को मैंने कहा था कि आप ईसबगोल पर value addition पर काम कीजिए। उन्‍होंने प्रारंभ किया था, आइसक्रम बनाई थी ईसबगोल का। और आइसक्रीम का नाम दिया था ईसबकूल। आनंद में शुरूआत की थी उन्‍होंने उस समय। इतना बड़ा Global Market है ईसबगोल का। उसके संबंध में भी अगर वैज्ञानिक तरीके से हम काम करें तो बहुत बड़ा बदलाव ला सकते हैं, और हमें लाना चाहिए। 

भाइयो, बहनों इन दिनों पूरे देश में इस बात की चर्चा चल रही है नोटों का क्‍या होगा? आप मुझे बताइए, आठ तारीख के पहले 100 की नोट की कोई कीमत थी क्‍या? 50 के नोट की कोई कीमत थी क्‍या? 20 की नोट की कोई कीमत थी क्‍या? छोटे को कोई पूछता था क्‍या? हर कोई बड़ों को ही पूछता था। हजार, पांच सौ; हजार, पांच सौ; हजार, पांच सौ। आठ तारीख के बाद देश देखिए 100 का मूल्‍य कैसा बढ़ गया, कैसी ताकत बढ़ गई उसकी, जान आ गई जैसे। 

भाइयो, बहनों! जैसे आठ तारीख के पहले बड़ों-बड़ों की पूछ होती थी, हजार और पांच सौ की ही गिनती गिनी जाती थी, 20, 50, 100 को कोई पूछता नहीं था, छोटे की तरफ कोई देखता नहीं था। आठ तारीख के बाद बड़ों की ओर कोई देखने को तैयार नहीं है, सब छोटे के लिए तैयार हो गए हैं भाइयो। ये फर्क आया है और जैसे बड़ी नोट नहीं छोटी नोट की ताकत बढ़ी है; बड़े लोग नहीं, छोटे लोगों की ताकत बढ़ाने के लिए ये बहुत बड़ा फैसला मैंने किया है। देश का गरीब, देश का सामान्‍य मानवी, जैसे 100 रुपये की ताकत बढ़ गई, वैसे गरीब की ताकत बढ़ाने के लिए ये मैंने काम किया है। आप कल्‍पना कर सकते हैं भाइयो, आपने देखा होगा कुछ भी खरीद करने जाओ, कच्‍चा बिल कि पक्‍का बिल? बिल मांगोगे तो छोटा व्‍यापारी भी कहता है नहीं, नहीं बिल-विल लेना है तो दूसरी दुकान पर जाओ। कैश देना है तो ले आओ; ऐसा ही चला। मकान चाहिए, मकान वाला कहता है चैक में इतना, रोकड़े में इतना। अब वो गरीब आदमी रोकड़ा लायेगा कहां से? 

भाइयो, बहनों! इस प्रकार से नोटें छापते गए, छापते गए, छापते गए और देश, उसका अर्थतंत्र, ये नोटों के ढेर के नीचे ही दबने लग गया। भाइयो, बहनों मेरी लड़ाई है आतंकवाद के खिलाफ, आतं‍कवादियों को ताकत मिलती है जाली नोट से। और हम तो सीमा पार क्‍या हो रहा है, सब जानते हैं पड़ौस में ही रहते हैं। कैसी मुसीबतें हमें झेलनी पड़ी हैं, ये बनासकांठा पाटन जिले के लोग ज्‍यादा जानते हैं। 

भाइयो, बहनों! जाली नोट के कारोबारी, हिन्‍दुस्‍तान में जितना हो-हल्‍ला है ना उससे ज्‍यादा बाहर है, जाली नोटों के कारोबारियों में बाहर है। नक्‍सलवाद, सारे नौजवान surrender होकर वापस आने लगे हैं। हर किसी को लगता है अब मुख्‍य धारा में वापस आना चाहिए। आतंकवादियों को जहां से ताकत मिलती थी उन रास्‍तों को रोकने में सफल हुए हैं। ये जाली नोट का कारोबार, उसका मृत्‍युघंट, एक निर्णय से किया है भाइयो, बहनों। भ्रष्‍टाचार, कालाधन, ये भ्रष्‍टाचार और काले धन में पीड़ा किसको होती थी? किसी बेईमान को न भ्रष्‍टाचार से परेशानी थी, न काले धन से परेशानी थी। अरे एक भ्रष्‍टाचारी को दूसरे भ्रष्‍टाचारी को कुछ देना भी पड़ता था तो भी देने वाला भ्रष्‍टाचारी दुखी नहीं था। अगर दुखी कोई था तो इस देश का ईमानदार नागरिक दुखी था। परेशान था तो इस देश का ईमानदार नागरिक परेशान था। 70 साल तक इन ईमानदार लोगों को; 70 साल तक इन ईमानदार लोगों को आपने लूटा, आपने परेशान किया, उसको जीना मुश्किल कर दिया। आज मैं जब इमानदारों के साथ खड़ा हूं, तब ईमानदारों को भड़काया जा रहा है, और मुझे खुशी है मेरे देश के ईमानदार नागरिकों ने लाखों भड़काने के बावजूद भी सरकार के इस निर्णय का साथ दिया है। मैं सवा सौ करोड़ देशवासियों को शत् शत् नमन करता हूं कि इतने बड़े काम में उन्‍होंने मेरी मदद की। 

भाइयो, बहनों! आजकल बड़े बुद्धिमान लोग भाषण सुनाते हैं कि मोदीजी आपने इतना बड़ा निर्णय किया, लेकिन हमारे जीते जी तो कोई लाभ नहीं मिलेगा; मरने के बाद मिलेगा। भाइयो, बहनों हमारे देश में एक चारबाग ऋषि हो गए, ये चारबाग ऋषि कहते थे:- ’’ऋणम कृत्‍वा, घृत्‍तम पीवेत’’ वो कहते थे अरे! मृत्‍यु के बाद क्‍या होने वाला है? कौन जानता है, जो मौज करनी है अभी कर लो; जो खाना है खा लो, घी पीना है पी लो; आनंद से जी लो। इस चारबाग की Philosophy को कभी भी हिन्‍दुस्‍तान ने स्‍वीकार नहीं किया। हमारा तो देश ऐसा है, बूढ़ा गरीब मां बाप; पैसे बहुत कम हों तो बूढ़ा और बूढ़ी मां बात करते हैं कि ऐसा करो शाम को सब्‍जी बनाना बंद कर दो, थोड़े पैसे बच जाएंगे तो मरने के बाद बच्‍चों के काम आ जाएंगे। मेरा देश मरने के‍ बाद मेरा क्‍या होगा, ये कभी चिन्‍ता नहीं करता है; मेरा देश, मेरे बाद की पीढि़यों का भला क्‍या हो, ये सोचने वाला देश है। मेरा देश स्‍वार्थी लोगों का देश नहीं है। मेरे देश का चिन्‍तन सुख के लिए, खुद के सुख के‍ लिए जीने वाला नहीं है। मेरे देश का चिन्‍तन भावी पीढि़यों के सुख के‍ लिए चलने वाला है। ये नए चारबाग लोग जो पैदा हुए हैं ‘’ऋणम कृत्‍वा, घृत्‍तम पीवेत’’ ये जो बातें करने वाले लोग हैं, उनको पचास बार सोचना पड़ेगा। 

भाइयो, बहनों! आपने देखा होगा Parliament चल नहीं रही है, चलने दी नहीं जा रही है। हमारे देश के राष्‍ट्रपति, सार्वजनिक जीवन में इतना लम्‍बा अनुभव है; शासन चलाने वाले श्रेष्‍ठत्‍तम लोगों में से हमारे राष्‍ट्रपति जी रहे हैं। वो अलग राजनीतिक धारा में पले-बढ़े हैं। लेकिन देश की संसद में जो कुछ भी हो रहा था उससे इतने पीडि़त हो गए, इतने दुखी हो गए कि दो दिन पहले उनको सांसदों को सार्वजनिक रूप से टोकना पड़ा। विरोध पक्ष को नाम दे करके टोकना पड़ा। और मैं हैरान हूं, सरकार कहती है हम चर्चा चाहते हैं, सरकार कहती है कि प्रधानमंत्री बोलने के लिए तैयार हैं, सरकार कहती है प्रधानमंत्री आ करके कहने को तैयार हैं, लेकिन उनको मालूम है उनका झूठ टिक नहीं पाता है और इसलिए वो चर्चा से भागते रहे हैं, और इसलिए लोकसभा में मुझे नहीं बोलने दिया जाता; मैंने जनसभा में बोलने का रास्‍ता चु‍न लिया है भाइयो। और जिस दिन मौका मिलेगा लोकसभा में भी सवा सौ करोड़ देशवासियों की आवाज मैं जरूर पहुंचाने का प्रयास करूंगा मेरे भाइयो, बहनों। 

भाइयो, बहनों! मैं विरोधी दल के मित्रों से, आज महात्‍मा गांधी की इस धरती से, सरदार वल्‍लभभाई पटेल की इस धरती से सार्वजनिक रूप से आग्रह करना चाहता हूं। जब चुनाव होते हैं, जब चुनाव होते हैं हम सभी दल एक-दूसरे के खिलाफ बोलते हैं; आरोप प्रत्‍यारोपण करते हैं, अच्‍छी और बुरी नीतियों की चर्चा करते हैं, हर प्रकार से अपने विरोधियों पर जैसा मार कर सकते हैं करने की कोशिश करते हैं; सभी दल करते हैं। भारतीय जनता पार्टी भी करेगी, कांग्रेस भी करेगी, बाकी सब छोटे-मोटे दल भी; सब करते हैं। लेकिन सभी पार्टियां एक काम जरूर करती हैं, क्‍या? मतदाता सूची को ठीक करना, अधिकत्‍तम लोग मतदान करने आएं इसकी चिन्‍ता करना; मतदाताओं को कैसे बटन दबाना; वो सिखाना, सभी दल करते हैं। एक तरफ तो नीतियों का विरोध करते हैं, दूसरे को पराजित करने की ताकत लगाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ सब मतदाता सूची पर ध्‍यान देते हैं, Electronic Voting Machine पर ध्‍यान देते हैं, अधिक लोग मतदान करने आएं इस पर ध्‍यान देते हैं, क्‍यो? क्‍योंकि लोकशाही हम सबकी जिम्‍मेवारी है। 

मैं विरोध पक्ष के मित्रों से कहना चाहता हूं, आप ये तो नहीं कहने की हिम्‍मत कर रहे हो कि मोदी हजार और पांच सौ वाला नोट वापिस ले लो क्‍योंकि आपको पता है कि जनता का मिजाज बदला हुआ है। हां! कुछ लोगों ने कहा, अच्‍छा मोदी जी ये तो ठीक है लेकिन ऐसा करो एक हफ्ते के लिए रोक लो। क्‍यों भाई! ये हफ्ते में कौन सा जादू होने वाला था? ये एक हफ्ता रोकने का इरादा क्‍या था? लेकिन कोई दल ये नहीं कहता है कि निर्णय को Roll Back करो। सब दल कहते हैं, ठीक से लागू करो। मैं सभी दलों से कहना चाहता हूं कि जैसे चुनाव में हम एक-दूसरे का घोर विरोध करते हैं, लेकिन मतदान बढ़ाने के लिए मेहनत करते हैं, मतदाता सूची के लिए मेहनत करते हैं, Electronic Machine की training के लिए मेहनत करते हैं, आज समय की मांग है कि आप खुल करके मेरा विरोध करिए, मेरी आलोचना करिए, लेकिन लोगों को Banking सिखाने के लिए काम कीजिए, Electronic पद्धति से पैसे कैसे लिए जाते, दिए जाते ये सिखाइए। हम सब मिल करके देश को भाग्‍य बदलने का एक ऐसा उत्‍तम अवसर आया है, हम सब उसको काम करें। और आप भी फायदा उठाइए। 

मुझे खुशी होगी मेरे विरोधी दल के लोग जन-जन को इस काम में लगा करके अगर राजनीतिक फायदा उठाते हैं तो देश का भला हुआ इसका मुझे आनंद होगा भाइयो। अरे! राजनीति से ऊपर राष्‍ट्रनीति होती है, दल से बड़ा देश होता है; भाइयों बहनों गरीबों पर बातें करना अलग होती हैं; गरीबों के लिए नीतियां बना करके कठोरता से लागू करने के लिए समर्पण का भाव लगता है, और समर्पित भाव से आज ये सरकार आपकी सेवा में लगी है। 

भाइयो, बहनों! मैंने पहले दिन से कहा है, ये निर्णय मामूली नहीं है मेरे भाइयो, बहनों! बहुत मुश्किल भरा निर्णय है, कठिन निर्णय है। और मैंने कहा था बहुत तकलीफ पड़ेगी; मैंने कहा था मुसीबत आएगी, और 50 दिन ये तकलीफ होगी ही होगी। और तकलीफ रोजमर्रा थोड़ी बढ़ती भी जाएगी, लेकिन 50 दिन के बाद मैंने हिसाब-किताब लगाया है, वो एकदम से धीरे-धीरे, धीरे-धीरे करके पहले जैसी स्थिति की तरफ आगे बढ़ेगा। 50 दिन तक ये कठिनाइयां रहने वाली हैं। 50 दिन के बाद आप ही देखेंगे कि धीरे-धीरे-धीरे आपकी आंखों के सामने परिस्थितियां सुधरती नजर आ जाएंगी। 

भाइयो, बहनों! देश भ्रष्‍टाचार से मुक्‍त करने का एक महत्‍वपूर्ण कदम है, और कुछ लोग आपने देखा होगा; इन दिनों सरकार बराबर पीछे लग गई है, बैंक वाले जेल में जा रहे हैं; बड़े-बड़े गठ्ठे ले करके भागे हुए लोग जेल जा रहे हैं; चारों तरफ! उनको लगा था कि ठीक है मोदी जी 1000, 500 के बंद कर देता है, हम पिछले दरवाजे से कुछ कर लेंगे, लेकिन उनको मालूम नहीं था, मोदी ने पिछले दरवाजे पर भी कैमरे लगाए हुए हैं। ये सब के सब पकड़े जाने वाले हैं, कोई बचने वाला नहीं यहां। दो महीना, तीन महीना, छह महीना, जिन्‍होंने भी आठ तारीख के बाद नए पाप किए हैं, वो तो‍ किसी हालत में बचने वाले नहीं हैं भाइयो, बहनों। उनको सजा भुगतनी पड़ेगी। सवा सौ करोड़ देशवासियों के सपनों को चूर-चूर करने का पाप जिन्‍होंने किया है वो बचने वाले नहीं हैं, ये मैं देशवासियों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं। 

भाइयो, बहनों! आपने मुसीबत झेली है, तकलीफ झेली है, अभी भी झेलनी है। आपका आशीर्वाद देश के लिए और जो लोग कहते हैं न ईमानदार लोग लाइन में खड़े हैं, ईमानदार अपने लिए नहीं खड़ा रहता है, वो देश के‍ लिए खड़ा रहता है भाइयो, बहनों; वो देश के लिए खड़ा रहता है। 

और इसलिए, दूसरा! आज जमाना बदल चुका है भाई। एक जमाना था हमारे दादा-दादी, उनसे सुनेंगे तो बताते थे कि हमारे जमाने में तो ‘’चांदी का गाढ़ाना पेड़ा जोड़ो रुपयो होतो एमके आपण ने’’ कि बैलगाड़ी के पहिए जितना बड़ा रुपया चांदी का हम देखते थे, उपयोग करते थे। भाइयो, बहनों! ये चांदी के रुपये से बदलते, बदलते, बदलते कितनी mettle बदल गई, तांबा आया, और आया, न जाने क्‍या क्‍या आया। और धीरे धीरे करके हम कागज में चले गए कि नहीं चले गए? अब याद आता है कि चांदी का रुपया होगा तभी रुपया माना जाएगा याद आता है क्‍या? अब वो रुपया कागज का भी हमारी जिंदगी का हिस्‍सा बन गया। कभी चांदी का रुपया हुआ करता था, धीरे-धीरे कागज का रुपया आ गया। 

भाइयो, बहनों! अब वक्‍त बदल चुका है, अब तो आपके मोबाइल फोन में ही आपका बैंक आ गया है। आपक बटुआ भी आपके मोबाइल फोन में है। आप चाय पीने जाएं, बटन दबाएं, चाय वाले को पैसा पहुंच जाएगा, receipt मिल जाएगी। बीच में लोग cheque देते थे, cheque फाड़ते थे, दो महीने के बाद पता चलता था कि cheque वापिस आया, बाद में केस कोर्ट में है; जो सबसे ज्‍यादा केस चलते हैं, वो cheque वापिस आने के चलते हैं। आप नौजवानों का धन्‍यवाद आपने बहुत बड़ा काम उठाया है, मैं आपको बधाई देता हूं और बनासकंठा जिले को आप ई, ई-बटुआ से जोड़ दीजिए भाइयो। लोगों को E-Mobile Banking से जोड़ने में सफल होंगे मुझे विश्‍वास है। 

भाइयो, बहनों! हम जानते हैं, कि आप वो कागज के नोटों का भी जमाना पूरा होने जा रहा है। अब तो आपके मोबाइल फोन में आपकी बैंक है। एक बार बैंक में जमा हो गया, आपको बैंक में कतार में खड़े रहने की जरूरत नहीं है, आपको एटीएम के बाहर लाइन लगाने की जरूरत नहीं है, आपको टाइम बरबाद करने की जरूरत नहीं है। अखबार में advertisement आता है, TV पर advertisement आता है। आप अपने मोबाइल फोन से, अगर आपके पैसे बैंक में पड़े हैं; तो आप अपने पैसों का जो खरीदना, खरीद सकते हैं। cheque तो bounce होता था, इसमें तो जैसे ही पैसे दोगे, तो सामने receipt आज जाता है, पैसा मिल गया या पैसा पहुंच गया। कोई बाउंस-वाउंस होता ही नहीं, वहीं पर पता चल जाता है कि रुपया गया कि नहीं गया। 

भाइयो, बहनों! हिन्‍दुस्‍तान दुनिया में तेज गति से आगे जाना चाहता है। ये नोटों के बंडलों के ढेर, ये नोटों के पहाड़, हमारे अर्थतंत्र को दबोच रहे हैं। काले धन और भ्रष्‍टाचारियों को वो काम आ रहे हैं। गरीब की ताकत कम हो रही है, जैसे हजार के नोट की कीमत थी, सौ की नहीं थी; अमीर की थी, गरीब की नहीं थी; आज गरीब की भी ताकत बढ़ गई है, सौ के नोट की भी ताकत बढ़ गई है। और अगर आपने ई-बटुआ पढ़ लिया, बैंकों की कतारें खत्‍म करके बैंक को ही अपने मोबाइल में ले गए, आपको बैंक की कतार में जाने की जरूरत नहीं; बैंक आपके मोबाइल की कतार में खड़ी हो जाएगी। मैं आपसे आग्रह करता हूं, मैं देशवासियों से आग्रह करता हूं, मैं मीडिया के मित्रों से विशेष प्रार्थना करता चाहता हूं; मोदी की आलोचना करना आपका हक है, आज जरूर कीजिए। कतार में जो खड़े रहे हैं उनको तकलीफ हो रही है, वो आप दिखाते हैं; मुझे कोई शिकायत नहीं है, लेकिन साथ-साथ आप ये भी सिखाइए कि अब कतार में खड़े रहने की जरूरत नहीं है, बैंक आपके मोबाइल फोन की कतार में खड़ा हो जाएगा। बैंक वाला आएगा कि मुझे आपके यहां रख लो, वो दिन आ सकते हैं, Technology उपलब्‍ध है, व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध है, 

भाइयो, बहनों! अब देश भ्रष्‍टाचार सहन नहीं करेगा। अब देश जाली नोट सहन नहीं करेगा। अब देश काला धन सहन नहीं करेगा। गरीबों को लूटने का खेल, मध्‍यम वर्ग को शोषण करने का खेल अब नहीं चलेगा और इसलिए मुझे आपके आशीर्वाद चाहिए। खड़े रह करके दोनों हाथ से तालियां बजा करके मुझे आशीर्वाद दीजिए, मेरे गुजरात के भाइयो, बहनों। मेरे डीसा के भाइयो, बहनों आशीर्वाद दीजिए। पूरे ताकत से आशीर्वाद दीजिए। 

भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 

ये लड़ाई, ये लड़ाई भारत का भाग्‍य बदलने की है, ये लड़ाई भ्रष्‍टाचार को खत्‍म करने की है, ये लड़ाई काले धन का खात्‍मा बुलाने के लिए है, ये लड़ाई जाली नोटों से देश को मुक्‍त कराने की है, और उसमें इस बनास की धरती ने मुझे आशीर्वाद दिए, मैं आप सबका बहुत-बहुत आभारी हूं। आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। फिर से बोलिए भारत माता की, जय, पूरी ताकत से बोलिए, पूरा देश सुन रहा है 

भारत माता की, जय 
भारत माता की, जय 

बहुत, बहुत धन्‍यवाद। 

लव जिहाद से बचने के लिए इस बार गुजरात में शेरी गरबा


नवरात्र शुरू होने के साथ ही गुजरात में गरबे की धूम भी शुरू हो चुकी है। यहां के गोधरा शहर में इस बार गरबा आयोजकों ने जो बैनर लगाए हैं, उनमें कुछ संदेश लिखे गए हैं। एक संदेश है, ‘मेरी बेटी मेरी आंखों के सामने।’ आयोजकों का कहना है कि ये बैनर बहन-बेटियों को मुस्लिम युवा और लव जिहाद से बचाने के लिए लगाए गए हैं। आरएसएस और भाजपा से जुड़े संगठनों ने गोधरा के लोगों से शेरी गरबा (मोहल्ला गरबा) आयोजित करने की अपील की है।

शेरी गरबा को मोहल्लों में किया जाने वाला गरबा भी कहा जा सकता है। इसमें कम लोग शिरकत करते हैं। गरबों को बड़े ब्रांड या कंपनियां स्पॉन्सर करती हैं। लेकिन ये गरबे छोटे स्तर पर मोहल्ले वाले या कोई संगठन ही ऑर्गनाइज करता है।

साल 2002 में गुजरात के दंगे गोधरा में ट्रेन की कुछ बोगियां जलाए जाने के बाद ही भड़के थे। हिंदू संगठनों द्वारा शेरी गरबा पर जोर दिए जाने का कारण है है कि, किसी दूसरे समुदाय के लोग इसमें नहीं आ सकें। चूंकि ये गरबा मोहल्लों में और मोहल्ले वालों द्वारा ही आयोजित किए जाते हैं, इसलिए इसमें आने वाले एक-दूसरे को बेहतर रूप से पहचानते होंगे। यहां दूसरे समुदाय के लोगों की पहचान आसानी से की जा सकेगी।

विहिंप के पूर्व सदस्य और अब पंचमहल जिले में भाजपा मेंबर आशीष भट्ट के अनुसार, “नवरात्र के दौरान पवित्रता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है। पिछले साल हमने बड़े गरबा महोत्सव से मुस्लिमों को दूर रखने की कोशिश की थी, ताकि लव जिहाद जैसे मामले न हों। लेकिन बड़े गरबा कार्यक्रमों में स्पॉन्सर्स और दूसरे लोग जुड़े होते हैं, इसलिए कई बार गलत लोग टिकट लेकर अंदर आ जाते हैं।” आशीष आगे बताते हैं, “अपनी मां, बहन और बेटियों को सुरक्षित रखने के लिए हमने इस बार परंपरागत गरबे की योजना बनार्इ है । कुल 39 शेरी गरबे किए जाएंगे।”

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के युवावस्था के कुछ दुर्लभ चित्र


आप सभी पाठकों के सामने आज प्रस्तुत हैं हमारे देश के नए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के कुछ दुर्लभ चित्र, जिनमे वे युवा साधु के रूप में हिमालय क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे. जैसा कि श्री कृष्ण जी ने कहा है कि राज ऋषियों और संत सवरूप राजाओं के लिए श्री भगवतगीता का सही अर्थ तभी सार्थक होता है जबकि वे समाज को अपने आध्यत्मिक ज्ञान के द्वारा मार्गदर्शन दें.

एवं परंपरा प्राप्तं
इमं राजऋषियों विदुह 

- भगवत गीता 4.2

"Through the spiritual chain of Parampara the saintly kings understood the spiritual knowledge of Yoga, union with the divine"

आइये हम सब प्रार्थना करें कि भारत के इतिहास में पहली बार एक राजऋषि इस देश का प्रधानमंत्री बन रहा है, वह इस देश और समाज को धर्म के आधार पर चलाने में सफल हो ....





मोदी जी NCC के कैडेट के रूप में :


14 वर्षीय नरेन्द्र  मोदी जी ने बी. एन हाई स्कूल, वडनगर गुजरात में एक नाटक में भाग लेकर प्रभावशाली अभिनय का परिचय दिया था


अब कुछ और चित्र मोदी जी युवावस्था के, जब वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में कार्य करते थे ..






रेडियो स्टेशन पर वार्ता के दौरान :

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मोदी को लेकर भयभीत नहीं मुस्लिम : सैयद अरशद मदनी

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर मुस्लिस संगठन जमीयत उलेमा़-ए़-हिन्द का कहना है कि वो मोदी के प्रधानमंत्री बनने से मुस्लिमों की सुरक्षा को लेकर बिलकुल चिंतित नहीं है।

जमीयत उलेमा़ ए़ हिन्द के अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने कहा कि हम किसी मोदी को लेकर भयभीत नहीं हैं। उनसे सवाल किया गया था कि क्या गुजरात दंगों के परिप्रेक्ष्य में मोदी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर मुस्लिमों के मन में किसी तरह का भय है।

उल्लेखनीय है कि गुजरात में 2002 के दंगों में भूमिका के सिलसिले में एक एसआईटी द्वारा उनका नाम नहीं लिए जाने के बाद अहमदाबाद की एक अदालत ने मोदी को क्लीन चिट मिल चुकी है।

मदनी ने कहा कि हिन्दू और मुस्लिम दोनों मूल रूप से इसी देश के हैं और वे सदियों से शांतिपूर्वक रहते आ रहे हैं। झगड़े से किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। हर किसी को प्रेम एवं स्नेह से रहना चाहिए।

जमीयत उलेमा़ ए़ हिन्द 28 फरवरी को नगांवा जिले के अमोनी में एक धार्मिक सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। इसमें मदीना मुनव्वरा मस्जिद के मुख्य इमाम अब्दुल मोहसिन अल़कासिम भी शामिल होंगे।


मोदी ने गुजरात में शानदार काम किए हैं - नारायण मूर्ति

अमर्त्य सेन के साथ कन्नड़ साहित्यकार प्रफेसर अनंतमूर्ति ने कुछ दिन पहले कहा था कि वे नरेंद्र मोदी को बतौर पीएम नहीं देखना चाहते हैं पर इंफोसिस के फाउंडर नारायण मूर्ति ने कहा है कि मैं इन दोनों की राय से सहमत नहीं हूं। मूर्ति ने एक न्यूज़ चैनल से इंटरव्यू में कहा कि वह मोदी के विकास मॉडल पर अमर्त्य सेन की आलोचना से भी इत्तेफाक नहीं रखते।

उन्होंने कहा कि मैं गुजरात इटरप्राइजेज इंस्टिट्यूट का अध्यक्ष हूं और वहां के विकास के बारे में जानता हूं। नरेंद्र मोदी से कई बार मिल चुका हूं। मूर्ति ने कहा कि मोदी ने गुजरात में शानदार काम किए हैं। खास कर सड़क और पावर के क्षेत्र में उन्होंने बहुत काम किए हैं। गुजरात देश में कई राज्यों से बेहतर काम कर रहा है। ऐसे में नरेंद्र मोदी को क्यों नहीं क्रेडिट देना चाहिए। मूर्ति से पूछा गया कि क्या वह अमर्त्य सेन और प्रोफेसर अनंतमूर्ति के उस मत से सहमत हैं कि वे नरेंद्र मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनते नहीं देखना नहीं चाहते। इस पर मूर्ति ने कहा कि हमें उस पर जाना चाहिए कि देश के विकास के लिए कौन अच्छा हो सकता है।

2002 में गुजरात में हुए दंगों के बारे में उन्होंने कहा कि हमें इससे आगे बढ़ने की जरूरत है। देश में दंगे हर दिन होते हैं और हर जगह हुए हैं। हम वहीं अटके नहीं रह सकते। मोदी को लंबे समय से गुजरात की जनता बहुमत दे रही है। गलतियां किसी से भी हो सकती हैं। ऐसे में महत्वपूर्ण बात यह है कि जो देश को विकास की पटरी पर ले जा सकता है उसे आगे आने में कोई दिक्कत नहीं है। मूर्ति से पूछा कि क्या वह अपने पूर्व कॉलीग नंदन निलेकणि को यदि कांग्रेस आगे करती है तो सपोर्ट करेंगे। मूर्ति ने कहा कि उनके पास शानदार विजन हैं। मैंने उनकी किताब पढ़ी है और उसमें भी उनका शानदार विजन सामने आता है। ऐसे लोगों को आगे करना चाहिए।

नारायण मूर्ति ने कहा कि आज की तारीख में देश को हाई क्वॉलिटी और मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। फिलहाल हम कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। गरीबी और बेरोजगारी इनमें से प्रमुख समस्याएं हैं। हमें अजेंडा के साथ काम करना होगा। जीडीपी ग्रोथ और बिजनस ग्रोथ पर प्रमुखता से ध्यान देना होगा। मूर्ति ने कहा कि इस देश को विकास की पटरी पर लाने के लिए बहुत जरूरी है हाई क्वॉलिटी नेतृत्व को सत्ता मिले। जब उनसे पूछा गया कि लिडरशिप में आइडिया अहम है या व्यक्ति। इस पर नारायण मूर्ति ने कहा कि हम दोनों को पूरी तरह से अलग नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि एक अच्छा कम्यूनिकेटर ही मजबूत नेता हो सकता है। हम इतिहास में उन मजबूत नेताओं को देख सकते हैं जो कि शानदार कम्यूनिकेटर भी थे। महात्मा गांधी, जॉज वॉशिंगटन, अब्राहम लिंकन से विंस्टन चर्चिल तक लोगों से कम्यूनिकेट करते थे।

हमारे नेताओं को भी चाहिए कि वह लोगों तक पहुंचें। संवाद करें क्योंकि यह उनकी प्राइमरी जॉब है। उन्हें लोगों के भरोसे को जगाने की जरूरत है। जब मूर्ति से पूछा गया आप राहुल और मोदी में किसे बेहतर मानते हैं। इस पर मूर्ति ने कहा कि मैं राजनीतिक नहीं हूं और कौन बेहतर है इस पर मेरी टिप्पणी की कोई जरूरत नहीं है। मैं कोई फैसला नहीं दे सकता कि राहुल बेहतर हैं या मोदी। लेकिन हमें वैसे नेता को मौका देना चाहिए जो देश का विजन तय करने की क्षमता रखता है। जो लोगों से कम्यूनिकेट करता है। जो जीडीपी ग्रोथ रेट 9 पर्सेंट से ज्यादा ले जाने की कपैसिटी और विजन रखता है। यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह तो हमारे नेता की न्यूनतम क्वॉलिटी होनी चाहिए।

आसाराम बापू के महिला आश्रम पर बेबुनियाद और असत्य आरोप - गुजरात महिला आयोग

आसाराम जी द्वारा स्थापित किए गए महिला आश्रमपर किए गए गंभीर आरोपों की पूछताछ के लिए १२ अक्टूबर २०१३ को, गुजरात महिला आयोग का एक पथक बिना कोई पूर्व सूचना दिए आश्रम पहुंच गया । इस पथक ने आश्रम में रहने वाली साधिकाओं से सामूहिक एवं व्यक्तिगत पूछताछ की । तीन घंटों की पूछताछ के उपरांत गुजरात महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती लीला अन्कोलिया ने बताया, ‘हमने प्रत्येक साधिका की एकांत में व्यक्तिगत पूछताछ की । किसी पर कोई दबाब है, ऐसा प्रतीत नहीं हुआ । किसी भी साधिका के साथ कभी कोई कुकर्म नहीं हुआ है । साधिकाओं के साथ हुई सर्व तथाकथित घटनाएं असत्य हैं । मीडिया में जिस प्रकारके स्वच्छंद, अपमानजनक और लज्जाजनक समाचार प्रसारित हो रहे हैं, वे यदि सत्य होते तो ३६ वर्षोंतक इतनी भारी संख्या में महिला आश्रम में नहीं होतीं ।’

वर्ष १९७६ में महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए एवं कल्याण के लिए आसाराम जी बापूने महिला उत्कर्ष आश्रम की स्थापना की । गत ३६ वर्षों में इस आश्रम में लाखों महिला साधना करने के लिए और सत्संग का लाभ लेने के लिए आकर गर्इं । वर्तमान में २५० से अधिक महिला निवास कर रही हैं । इनमें से अनेक महिला डॉक्टर, अभियंता, लेखपाल, पदव्युत्तर और पदवीधारक हैं । आश्रम में रहकर शांतिपूर्ण जीवनयापन करने का निर्णय उन्होंने स्वयं ही लिया है । वे सतत समाजसेवा कार्य कर रहीं हैं । यहां रहकर वे स्वयं को संपूर्ण सुरक्षित और पहले के जीवन से भी अधिक उन्नत, स्वतंत्र एवं सुदृढ अनुभव कर रही हैं । 

यहां किसी भी महिला के साथ कभी कोई अभद्र व्यवहार, लैंगिक शोषण अथवा गर्भपात नहीं किया गया है । यहां पर वास्तव्य की हुई सैकडों महिलाएं इस बात की साक्षि हैं । महिला आश्रम की ओर से ‘महिला उत्कर्ष आश्रम’द्वारा ‘गर्भपात रोको’, मुहिम चलाई जाती है । इस मुहिम में आश्रम की साधिका गांव-गांव जाकर महिलाओं को गर्भपात के दुष्परिणाम समझाकर बताती हैं और उन्हें सतर्क करती हैं । आसाराम जी बापू अपने सत्संगों में अनेक वर्षों से बता रहे हैं कि गर्भपात एक ऐसा महापाप है, जिसके लिए कोई प्रायश्चित नहीं है ।

सोहराबुद्दीन एक आतंकवादी था, धर्मात्मा नहीं ... (एक बार जरुर पढ़े)


सोहराबुद्दीन को एक दिन इसी तरह मरना था। पुलिस उसे नहीं उड़ाती, तो कोई महात्मा या धर्मात्मा किस्म का सामान्य व्यक्ति उसे गोली से भूनने को मजबूर हो जाता। राजस्थान में विपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया के मामले में सबसे ज्यादा गौर करने लायक बात यह है कि सीबीआई नामक सरकारी तोता आखिर किसके लिए उनको अपराधी साबित करने पर तुला हुआ है। एक दुर्दांत और कमीने किस्म का कुख्यात, अपराधी सोहराबुद्दीन शेख। तो एक तरफ राजनीति में मानवीय  मूल्यों, आदर्श एवं नैतिकता की सर्वश्रेष्ठ मिसाल गुलाब चंद कटारिया। दोनों में कोई तुलना ही नहीं। हमारी कांग्रेस के नेता अकसर अपने भाषणों में मुसलमानों के अपराध को कम साबित करने की कोशिश में अकसर कहते रहते हैं कि अपराधी का कोई धरम नहीं होता। लेकिन होता है। नहीं होता, तो गुलाब चंद कटारिया जैसे निष्पाप, निष्कलंक और निरपराध व्यक्ति को फांसने से पहले सोहराबुद्दीन जैसे दुर्दांत अपराधी के पाप भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

देश भर में इस तरह का माहौल बन गया है जैसे, सोहराबुद्दीन कोई आपकी हमारी तरह सामान्य आदमी था। देश की सरकार ने भले ही छुपाया है, पर आइए, अपन बताते हैं। सोहराबुदीन शेख हमारे देश के बहुत सारे कांग्रेसी नेताओं की याददाश्त में बहुत ही मासूम और एक छोटे मोटे चोर के रूप में दर्ज है। 26 नवंबर 2005 को गुजरात और राजस्थान पुलिस के एक जॉइंट ऑपरेशन में सोहराबुद्दीन को गोलियों से उड़ा दिया गया। उसने राजस्थान और गुजरात के मार्बल व्यवसायियों से बहुत बड़ी बड़ी फिरौती वसूली का धंधा जोर शोर से शुरू कर दिया था। असल में सोहराबुदीन एक आतंकवादी था और जिसके खिलाफ खतरनाक हथियारों की तस्करी व रखने के केस चल रहे थे। उसके अलावा विभिन्न आतंकवादी गतिविधियां चलाने तथा क़त्ल करने तथा करवाने के भी मुक़दमे थे। उस पर कुल 56 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा गुजरात के सीएम को मारने की साजिश भी रच रहा था।

सोहराबुदीन मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के एक गाँव का रहने वाला था। वहां वो एक ट्रक ड्राईवर था। इस दौरान वह छोटा दाऊद और बाबू पठान नाम के दो दूसरे ड्राइवरों के संपर्क में आया। ये दोनों अंडरवर्ल्ड डान दाऊद इब्राहीम के लिए हथियारों की तस्करी करते थे। उनके साथ सोहराबुद्दीन ने भी हथियारों की तस्करी शुरू कर दी। और तस्करी का पैमाना इतना बड़ा था कि सोहराबुद्दीन ने अपने गांव में हथियारों का गोदाम बना डाला। उसके इस गोदाम से पुलिस छापे के दौरान दो एके – 56 राइफलें और कुल 24 एके – 47 रायफलें बरामद हुई। मुठभेड़ के बाद सोहराबुद्दीन के कपड़ों से मिले दो सिम कार्ड पाकिस्तान के कराची निकले। दोनों की कॉल डिटेल साबित करती है कि सोहराबुद्दीन उन दोनों का इस्तेमाल काफी लंबे समय से कर रहा था। इस सिम कार्ड के जरिए सोहराबुद्दीन पाकिस्तान में दाऊद के करीबियों एवं लश्कर के लोगों से बात किया करता था। कॉल डीटेल्स से साबित होता है कि पुलिस से जिस मुठभंड़ में सोहराबुद्दीन मारा गया, उससे कुछ वक्त पहले ही उसकी कई बार कराची बात हुई थी। देश में हुए विभिन्न विस्फोटो तथा आतंकवादी हमलों में इसका हाथ था। 14 फरवरी 1998 को हुए कोयम्बटूर ब्लास्ट में विस्फोटक पहुंचाने में सोहराबुद्दीन की भूमिका जांच में साबित भी हो चुकी है।

पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद जब सोहराबुदीन की लाश उसके गांव पहुंची तो लोगों ने भारत विरोधी नारे लगाये, और पाकिस्तान की भरपूर जय जय कार हुई। लोगों ने सोहराबुद्दीन की लाश का एक जेहादी की तरह स्वागत किया। यही नहीं, हथियारों की स्मगलिंग के दौरान सोहराबुद्दीन ने जो बहुत सारे तोप-तमंचे अपने गांव वालों को तोहफे में दिए थे, उनसे लोगों ने गोलियां भी चलाई। सोहराबुद्दीन की यह असलियत सरकार के साए में छुप गई है। सरकारी तोता हमारे निष्कलंक राजनेताओं को लपेटने की कोशिश में कितनी भी साजिशें रचे। पर, सबसे पहले यह भी जान लेना जरूरी है कि सोहराबुद्दीन शेख कोई धर्मात्मा नहीं था। सोहराबुद्दीन जैसे कमीनों के लिए आदर्श पुरुषों को फंसाने से कोई मतलब नहीं निकलेगा। सोहराबुद्दीन को तो एक दिन इसी तरह मरना था।

निरंजन परिहार

भाजपा के विकास के एजेंडे के कारण मोदी को मिला मुस्लिम वोट: वस्तानवी


गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित तारीफ के कारण दारूल उलूम देवबंद के कुलपति (मोहतमिम) पद से हटाए गए मौलाना गुलाम वस्तानवी ने कहा है कि विधानसभा चुनाव में मोदी के विकास का एजेंडा काम आया और  इसी कारण मुसलमानों ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मुसलमानों ने इस बार गुजरात में भाजपा के पक्ष में मतदान किया तो उसकी वजहें हैं। एक बड़ी वजह विकास का एजेंडा भी है। मोदी ने इस बार विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाया और इसी वजह से मुसलमानों ने भी भाजपा को वोट दिया। सभी विकास चाहते हैं।’’

महाराष्ट्र और गुजरात में कई शिक्षण संस्थान चला रहे मौलाना वस्तानवी ने कहा, ‘‘मीडिया में मुसलमानों के भाजपा के पक्ष में मतदान करने की खबरें आई हैं। करीब 20 सीटें भाजपा ने जीती हैं जहां मुसलमानों की संख्या अच्छीखासी है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘2002 का दंगा और इस बार चुनाव ‘डिफरेंट केस’ हैं।

स्थानीय निकाय के चुनावों में भाजपा की ओर से 100 से अधिक मुसलमानों को टिकट दिए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘नगर निकाय के चुनावों में भाजपा ने 100 से अधिक मुसलमानों को टिकट दिया था। इसका असर भी हुआ। इन लोगों ने भाजपा को जिताने की जरूर कोशिश की होगी।’’

आगे भी मुस्लिम मतदाता और अधिक संख्या में भाजपा को वोट देते रहेंगे ..

आचार संहिता उल्लंघन पर केशुभाई को निर्वाचन आयोग ने नोटिस दिया


निर्वाचन आयोग ने आज पूर्व मुख्यमंत्री एवं गुजरात परिवर्तन पार्टी प्रमुख केशुभाई पटेल को चुनाव संबंधी आचार संहिता के उल्लंघन के लिए नोटिस भेजा है। आयोग ने उन्हें सरकारी वाहन से पोलिंग बूथ जाने के कारण यह नोटिस भेजा है।

केशुभाई विसावदार से हेलिकॉप्टर के जरिए आज राजकोट पहुंचे और यहां से सीधे सरस्वती शिशु मंदिर स्थित पोलिंग बूथ जाकर मतदान किया।

आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘पोलिंग बूथ जाने के लिए सरकारी वाहन का इस्तेमाल करना चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन है, इसलिए निर्वाचन आयोग ने केशुभाई को नोटिस जारी किया।’’

उधर अपना मत देने के बाद केशुभाई ने कहा कि, ‘‘राज्य में बदलाव की हवा बह रही है और जीपीपी पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कुछ सत्ता के लोभी नेता गलत बयान देकर लोगों को बहका रहे हैं, लेकिन राज्य के लोग बदलाव चाहते हैं और जीपीपी बदलाव की अगुआई करेगी।’’

जिन मतदान केंद्रों पर मतदान हो रहा है उनमें सौराष्ट्र के सात जिलों की 48 सीटें, दक्षिण गुजरात के सात जिलों की 35 सीटें और अहमदाबाद की चार सीटें शामिल हैं।   

प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर नगर में दोपहर एक बजे तक 50 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया जबकि भावनगर ग्रामीण क्षेत्र में भारी मतदान दर्ज किया गया जहां से विपक्ष के नेता शक्तिसिंह गोहिल राज्य के मत्स्य पालन मंत्री पुर्षोत्तम सोलंकी के खिलाफ खड़े हैं। 

इसके साथ ही नवसारी :48.20 प्रतिशत:, जलालपुर :45.95: और मणवादर :47: में भारी मतदान हुआ। 
केशुभाई पटेल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आर सी फालदू, वित्त मंत्री वजुभाई वाला और कांग्रेस अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया ने अपना वोट सुबह ही डाल दिया था। 

इस चरण में 87 सीटों पर कुल 846 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। इसमें से कांग्रेस 84 और गुजरात परिवर्तन पार्टी ने 83 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये हैं।

‘सुल्तान’ कहे जाने पर मोदी ने अहमद पटेल को दिया करारा जबाब


गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल द्वारा उन्हें ‘सुल्तान’ कहे जाने के एक दिन बाद पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस ही राजवंश है जो सुल्तान पैदा करता है.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव पटेल ने जम्बूसर में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ‘‘मोदी छह करोड लोगों के सुल्तान की तरह गुजरात में शासन करना चाहते हैं. लोगों को इस सुल्तान को रोकना होगा.’’

मोदी ने इस हमले पर पलटवार करते हुए कहा, ‘‘उन्होंने (पटेल ने) मोदी को सुल्तान कहा, लेकिन कांग्रेस राजवंश है जो सुल्तान पैदा करता है और आपने नई दिल्ली में पूरी जिंदगी इन सुल्तानों की सेवा करते हुए गुजार दी. इस तरह आप किसी दूसरे शब्द के बारे में सोच भी नहीं सकते.’’

मोदी ने कहा, ‘‘हम यहां लोगों के समर्थन के बूते हैं और अहमद मियां यदि आपको लोकतंत्र की समझ है तो सुल्तान शब्द की बात ही नहीं होती.’’ 

गुजरात चुनाव खुद सोनिया गांधी की ही दशा और दिशा बदल देगा - मोदी


चुनावी सभा के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतदाताओं से कांग्रेस को सबक सिखाने का आह्वान करते हुए कहा कि यह चुनाव खुद सोनिया गांधी की ही दशा और दिशा बदल देगा। दरअसल कांग्रेस गुजरात विधानसभा चुनाव राज्य की दशा एवं दिशा बदल देने के वादे के साथ लड़ रही है।

वडोदरा जिले के बोदेली में एक विशाल जनसभा में मोदी ने कहा कि सोनिया गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी दिशा और दशा बदलने का जाप कर रही है लेकिन गुजरात की जनता सोनिया गांधी को ही दिशा एवं दशा बदलने के लिए बाध्य कर देगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का बोदेली को नया तहसील बनाने पर अभिनंदन किया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष पर प्रहार करते हुए मोदी ने कहा कि इस बार सोनिया गांधी ने दिशा बदल ली और अपनी पार्टी का अभियान शुरू करने के लिए राजकोट गयीं क्योंकि साल 2007 में कांग्रेस उम्मीदवार छोटा उदयपुर में हार गया था जहां से सोनिया गांधी ने चुनाव अभियान शुरू किया था। उन्होंने कहा कि इस बार कांग्रेस को राजकोट में मुंह की खानी पड़ेगी।

मोदी ने कहा कि अबतक तो वह केवल कांग्रेस शासन में किए गए नुकसान को ठीक कर रहे थे और अब जनवरी, 2013 से उत्कृष्ट और श्रेष्ठ गुजरात के लिए सफर शुरू होगा। उन्होंने जनता से वादा किया कि चुनाव के बाद कुछ और नये तहसील एवं जिले बनाये जाएंगे।

गुजरात के गरबा उत्सव मे सनी लियोनी को अनुमति नहीं


सिनेमाई परदे पर जिस्म-2 के जरिए प्रवेश करने वाली कनाडाई पोर्न फिल्मों की नायिका सनी लियोनी को लेकर खबरे आ रही थी कि वो गुजरात में गरबे के उत्सव मे शामिल होंगी।लेकिन अब खबरे आ रही है कि सनी इस समारोह में शामिल नहीं होंगी। सनी की मौजूदगी से विवाद के मद्देनजर यह बदलाव किया गया है। रविवार को दक्षिण गुजरात के बारडोली में लगे सनी लियोन के पोस्टर पर कालिख पोत दी गई।

सनी  लियोनी को एनआरआई के गांव के रूप में पहचाने जाने वाले ऎना गांव के गरबा आयोजक मंडल ने आमंत्रित किया गया था। सनी  लियोनी को 20 अक्टूबर को गरबे के लिए आमंत्रित किया गया था। गरबा आयोजक किरण पटेल ने कहा कि दो दिन पहले सनी लियोनी के अनिवार्य कारणों से न आने के संकेत मिले हैं। इसलिए उनके स्थान पर दूसरी सेलिब्रिटी को आमंत्रित किया गया है।

गुजरात में इस बार भी कांग्रेस को मुंह की खानी पडेगी - मोदी


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजकोट भाषण को ‘‘ फीका ’’ बताते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पलटवार की आशंका से राज्य में संभलकर पांव रख रही है.

मोदी ने यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ सोनियाजी के भाषण में कुछ नहीं था. इसमें कोई तथ्य नहीं था और जब मीडिया को भाषण में कुछ भी दिलचस्प बात नहीं मिली तो उन्होंने उनकी बडी बडी तस्वीरें प्रकाशित कर दीं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ वे (कांग्रेस) भयभीत हैं और सावधानी के साथ बोल रहे हैं. उन्हें भय है कि अगर वे कुछ गलत बोलेंगे तो राज्य के लोग उनके खिलाफ हो सकते हैं जिससे पार्टी का राज्य में सफाया हो सकता है.’’

सोनिया गांधी ने कल राजकोट में एक विशाल रैली को संबोधित कर राज्य में पार्टी के चुनाव अभियान की शुरुआत की थी. रैली में उन्होंने मोदी सरकार के प्रदर्शन को लेकर जमकर सवाल खडे किए लेकिन उन्होंने अपनी विदेश यात्रा पर हुए व्यय को लेकर लगे आरोपों का कोई जिक्र नहीं किया. मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 2009 के चुनावों के पहले आम लोगों से जो वायदे किए थे, उसे पूरा नहीं किया. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस गुजरात के बारे में गलत सूचना देकर राज्य की छवि खराब कर रही है.

मोदी ने सभा में मौजूद लोगों से सवाल किया, ‘‘ कांग्रेस ने 2009 के चुनावों के पहले वायदा किया था कि सत्ता में आने के 100 दिनों के अंदर महंगाई पर काबू पा लिया जाएगा. क्या वे ऐसा कर पाए?’’ इस पर जवाब मिला, ‘‘ नहीं.’’ मोदी ने फिर सवाल किया कि क्या यह धोखाधडी नहीं है. इस पर एक बार फिर भीड ने जवाब दिया, ‘‘ हां.’’

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि राज्य में पिछले चुनावों की तरह इस बार भी कांग्रेस को मुंह की खानी पडेगी. 2007 के विधानसभा चुनावों में सोनिया गांधी ने चुनाव अभियान की शुरुआत आदिवासी क्षेत्र छोटा उदेपुर से की थी. लेकिन कांग्रेस उस क्षेत्र में हार गयी थी. मोदी ने इस बार कांग्रेस ने राजकोट से चुनाव प्रचार शुरु किया है और 2007 की तरह इस बार भी वे वहां से हार जाएंगे.

'इनोसेंस ऑफ मुस्लिम्स' के नाम पर दंगा फैलाने के लिए बिल से बाहर निकले जेहादी


Within days after dates for Gujarat elections have been declared , terror elements in Gujarat started their terror agenda to incite riots once again in Gujarat.

A Rally to condemn so called Anti Islam movie produced by someone somewhere in the world was the reason for Hundreds of Jihadis to pour into the streets of Ahemedabad.

A City wide bandh was called on Wednesday by a woman Zarinakhan Pathan. The bandh call were rejected by Muslim leaders and organisations. Mufti Shabbir Ahmed of Jama Masjid, members of organizations like Jamat-e-Islami, Jamiet-e-Ulaima Hind and Muslim legislators and municipal councilors had appealed that the community not follow the call of bandh.     

At first Jihadi elements clashed with Jumma Masjid Imam’s followers and later they took into the streets of Ahmedabad. Jihadis torched a Police station. Jihadis locked women officers inside police station near Tran Darwaja and set the police station to fire. They also burnt the Khas bazar chowki. Many vehicles parked outside police post were also torched.

Senior cops - joint commissioner of police Ajay Tomar and deputy commissioner of police Himanshu Shukla along with assistant commissioner of police Nirlipt Rai with 1,000 police jawans rushed to the spot.Immediately afterwards the city cops started a combing operation to hunt down those responsible for the violence.When the police were busy in crowd control near Teen Darwaja, another group of violent protestors attacked a government vehicle near Relief Cinema and set it ablaze.

मोदी ने जूही चावला को पोरबंदर से भाजपा की टिकट दी

मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बार विधानसभा चुनाव में पोरबंदर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अर्जुन मोढ़वाडिया के सामने अभिनेत्री जूही चावला को चुनाव मैदान में उतार रहें हैं। जूही चावला के पति और जाने-माने उद्योगपति जय मेहता पोरबंदर के रहने वाले हैं। 

जानकारों के अनुसार जूही चावला का नाम पोरबंदर शहर की मतदाता सूची में दर्ज करा दिया गया है, लेकिन मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने को स्थानीय भाजपा नेताओं या कार्यकर्ताओं को भी अनजान रखा गया। प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष अर्जुन मोढवाडिया ने भी पोरबंदर में जूही चावला के मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की बात की पुष्टि की है। 

जूही चावला को चुनाव लड़ने के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी अभिनेत्री एवं राज्यसभा सांसद हेमामालिनी एवं स्मृति इरानी को सौंपी गई है। मुंबई में मतदाता सूची से जूही चावला का नाम कटा दिया गया और इसे पोरबंदर कलक्टर कार्यालय में पेश कर मतदाता सूची में जूही चावला का नाम दर्ज करा दिया है। उधर, कांग्रेस भी अपनी पार्टी की सेलिब्रिटी की सूची तैयार करने में जुट गई है।

कांग्रेस मुस्लिमों के वोटों पर निर्भर रहने वाली पार्टी - वाघेला

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के प्रदेश अध्यक्ष शंकर सिंह वाघेला ने अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए कांगेस का सच बताने वाला बयान दे दिया है। अल्पसंख्यकों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए वाघेला ने कहा कि गुजरात में कांग्रेस पार्टी मुस्लिमों के वोटों पर निर्भर रहने वाली पार्टी है। वाघेला के इस सच से कांग्रेस पार्टी असहज महसूस कर रही है। पार्टी की ओर से कोई भी नेता इस मसले पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। 

अल्पसंख्यकों को संबोधित करते हुए वाघेला ने कहा कि गुजरात में कांग्रेस पार्टी मुस्लिम वोटरों पर निर्भर रहने वाली पार्टी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के मुस्लिम हितों की बात करने पर लोग हमारा मजाक बनाते हैं। विपक्षी दल भाजपा उन्हें शंकर सिंह वाघेला के बजाय शंकरउल्लाह कह कर संबोधित करते हैं।

वाघेला ने मुसलमानों से अपील करते हुए कहा कि गुजरात में अब तक कांग्रेस को 10 से 15 फीसदी मुस्लिम वोट मिलते आए हैं। इस कारण पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा है। मुसलमान भाई आप आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 10 या 20 फीसदी के बजाय 90 फीसदी वोट दें, ताकि पार्टी सत्ता में आने पर आपको आपका उचित हक दिला पाए। उन्होंने मुस्लिमों से कहा कि अगर वे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट नहीं देंगे तो उन्हें दोबारा से नरेंद्र मोदी की तानाशाही में रहना पड़ेगा। 

बाघेला के इस बयान पर जहां कांग्रेस के अन्य नेता कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। वहीं विपक्षी पार्टी भाजपा उनके इस बयान को सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाली बता रही है। गुजरात भाजपा महासचिव विजय रुमाणी ने कहा कि वाघेला के इस बयान से कांग्रेस पार्टी का असली चेहरा सबके सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि वाघेला इस तरह का बयान देकर राज्य की एकता को तोड़ने का काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुसलमानों ने कांग्रेस पार्टी को पूरी तरीके से नकार दिया था। इस तरह के बयान के बाद अब गुजरात के मुसलमान भी उन्हें नकार देंगे।

भ्रष्टाचार में लिप्त कमला बेनीवाल को हटाने हेतू राष्ट्रपति को ज्ञापन

भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष नितिन गडकरी के नेतृत्व में बुधवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मुलाकात की और भ्रष्टाचार में संलिप्तता के लिए गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल को हटाए जाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन, सांसद बलबीर पुंज, भूपेंद्र यादव और अर्जुन मेघवाल तथा पार्टी सचिव किरीट सोमैया के अलावा गुजरात के कुछ नेता शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा और इस मुद्दे पर निष्क्रियता दिखाने के लिए राजस्थान सरकार से सवाल करने का भी आग्रह किया।

भाजपा ने 1,000 करोड़ रुपये के एक भूमि घोटाले का आरोप लगाया है और राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर कुछ कांग्रेसी नेताओं को जयपुर में विकसित भूखण्ड भेट करने का आरोप लगाया है। इन नेताओं में बेनीवाल को भी शामिल बताया गया है। बेनीवाल राजस्थान की मूल निवासी हैं, और राज्य में कांग्रेस की कई सरकारों में मंत्री रह चुकी हैं।

इस घोटाले का खुलासा जयपुर में को-ऑपरेटिव सोसायटीज के रजिस्ट्रार द्वारा एक आदेश पारित करने के बाद प्रकाश में आया है।

भाजपा के ज्ञापन में कहा गया है, "इस आदेश ने कुछ अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों को बेनकाब कर दिया है, जिन्होंने गलत तरीके से 1,000 करोड़ रुपये कीमत के सरकारी भूखण्ड हथिया लिए हैं। दुर्भाग्यवश आदेश में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उसमें गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल भी शामिल हैं।"

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद गडकरी ने संवाददाताओं से कहा, "बेनीवाल जबतक राज्यपाल के पद पर बरकरार हैं, राजस्थान सरकार उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं कर सकती। भाजपा ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वह कमला बेनीवाल को गुजरात के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने का निर्देश दें।"

मोदी ने दंगों पर लगाम कसने के लिए हरसंभव कदम उठाए थे-एसआईटी

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने कहा है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2002 में गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों पर लगाम कसने के लिए हरसंभव कदम उठाए थे। एसआईटी ने दंगों के चार साल बाद एक दंगा पीड़ित द्वारा मोदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के मकसद पर भी सवाल खड़ा किया।

जाकिया जाफरी की शिकायत पर निचली अदालत में पेश अपनी रिपोर्ट में एसआईटी ने कहा कि दंगों के दौरान मारे गये कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की विधवा जाकिया द्वारा लगाया गया कोई आरोप विचारणीय नहीं है। घटना के चार साल बाद शिकायत दर्ज कराने के मकसद पर भी एसआईटी ने सवाल खड़ा किया। 

मोदी पर 27 फरवरी 2002 को एक बैठक में शीर्ष पुलिस अधिकारियों को हिंदुओं को गोधरा कांड के मद्देनजर अपना गुस्सा जाहिर करने देने के लिए कहने संबंधी आरोपों पर एसआईटी ने कहा कि इस तरह के आरोपों को लगाने का कोई आधार नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एसआईटी ने यह भी कहा कि अगर इस तरह के आरोपों को दलीलों के लिहाज से मान भी लिया जाए तो कोई अपराध नहीं बनता। एसआईटी की रिपोर्ट न्यायमित्र राजू रामचंद्रन की रिपोर्ट के विरोधाभासी है। रामचंद्रन ने कहा था कि अलग-अलग समूहों के बीच शत्रुता फैलाने के मामले में मोदी पर मुकदमा चलाया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील रामचंद्रन ने निलंबित आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की गवाही पर रिपोर्ट केंद्रित की थी। भट्ट ने शीर्ष अदालत में दाखिल हलफनामे में आरोप लगाया था कि मोदी ने शीर्ष पुलिस अधिकारियों को दंगाइयों पर नरमी बरतने का निर्देश दिया था।

एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, ‘मोदी ने कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठकें कीं और हालात को संभालने के लिए सबकुछ किया गया।’ रिपोर्ट के अनुसार सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए समय पर सेना को बुलाया गया। एसआईटी ने कहा, ‘मोदी हालात पर लगाम लगाने, दंगा पीड़ितों के लिए राहत शिविर बनाने और स्थिति को शांतिपूर्ण एवं सामान्य करने के लिहाज से कदम उठाने में व्यस्त रहे।’

मुख्यमंत्री पर गैरकानूनी आदेश देने के आरोप के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पुलिस अधिकारियों आरबी श्रीकुमार और संजीव भट्ट ने मुख्यमंत्री द्वारा कथित गैरकानूनी निर्देशों पर जो कहा है उसके संबंध में कोई आधार नजर नहीं आता।’ रिपोर्ट के अनुसार, ‘अगर दलीलों के लिए इन आरोपों को मान भी लें तो किसी कमरे की चार दीवारों में महज कथित शब्दों का बयान कोई अपराध नहीं तय करता।’

एसआईटी ने कहा, ‘विस्तृत जांच और शामिल लोगों के संतोषप्रद स्पष्टीकरण के मद्देनजर नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं बनता।’ रामचंद्रन की रिपोर्ट के संबंध में सीबीआई के पूर्व निदेशक आरके राघवन की अध्यक्षता वाली एसआईटी ने कहा कि न्यायमित्र ने केवल भट्ट के बयानों पर किसी नतीजे पर पहुंचकर ‘भूल की’ है।

झूठे निकले कांग्रेस समर्थक पत्रकार के आरोप, भाजपा विधायकों को क्लीन चिट्

पॉर्नगेट मामले में फंसी गुजरात सरकार को शुक्रवार को बड़ी राहत मिली। गुजरात विधानसभा में आईपैड पर अश्लील तस्वीरें देखने के आरोपी बीजेपी के 2 विधायकों को फॉरेंसिक साइंस लैबरेटरी (एफएसएस) ने क्लीन चिट दे दी है।

एफएसएल ने आईपैड की जांच रिपोर्ट बंद लिफाफे में शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष गणपत वासव को सौंपी। वासव ने रिपोर्ट के निष्कर्ष को विधानसभा में पढ़कर सुनाया। इसके मुताबिक, आईपैड में कोई अश्लील विडियो या तस्वीर नहीं थी।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में विधायक शंकर चौधरी तथा जेठा भरवाड़ पर अश्लील तस्वीरें देखने का आरोप गलत साबित हुआ है।

उन्होंने कहा कि वह एफएसएल रिपोर्ट सदन की विशेषाधिकार समिति को सौंप रहे हैं। समिति पूरे मामले की जांच कर रही है।

एफएसएल की रिपोर्ट के मुताबिक आईपैड में विधायक के मेल, कुछ रिपोर्ट, 4,000 तस्वीरें तथा 11 विडियो क्लिप हैं, लेकिन इसमें कोई भी तस्वीर या विडियो अश्लील नहीं है।

सदन में 21 मार्च को हो-हल्ला के तुरंत बाद आईपैड विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया गया था। अध्यक्ष ने मामले को लेकर पिछले 3 दिन से सभा की कार्यवाही बाधित किए जाने को लेकर विपक्षी कांग्रेस की निंदा की।

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