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विश्व मंदी के बाद भी देश में 2015-16 में 7.65% विकास दर बरकरार :जेटली
सरकार दूरगामी ढांचागत सुधारों के जरिये ‘बदलाव के लिए सुधार’ की अवधारणा को अपना रही है: अरुण जेटली
केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि वैसे तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र अब भी विश्व का विकास इंजन बना हुआ है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस क्षेत्र की विकास दर पिछले साल के अनुमानित 5.9 फीसदी से घटकर वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में 5.7 फीसदी रह जाएगी। श्री जेटली ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत वर्ष 2015-16 में 7.65 फीसदी की ऊंची आर्थिक विकास दर हासिल करने में कामयाब रहा, जबकि पिछले साल यह 7.2 फीसदी आंकी गई थी। इस क्षेत्र के निर्धनतम देशों में विकास एवं गरीबी उन्मूलन में भागीदार बनने की भारतीय प्रतिबद्धता को दोहराते हुए वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के एडीएफ-12 के तहत अपना अंशदान बढ़ाकर 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है। वित्त मंत्री कल जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित एशियाई विकास बैंक की 49वीं वार्षिक आम बैठक के कारोबारी सत्र को संबोधित कर रहे थे।
भारत में विकास की मिसाल को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि सरकार दूरगामी ढांचागत सुधारों के जरिये ‘बदलाव के लिए सुधार’ की अवधारणा को अपना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने निवेश माहौल को बेहतर करने एवं कारोबार में और ज्यादा सुगमता सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। वित्त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा निवेश कोष (एनआईआईएफ) बनाया गया है। इसी तरह नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी अनेक योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। वित्त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि भारत के व्यापक वित्तीय समावेश कार्यक्रम के परिणामस्वरूप बगैर बैंकिंग सुविधा वाले व्यक्तियों के 200 मिलियन से भी ज्यादा बैंक खातों को खोलना संभव हो पाया है।
एडीबी की भूमिका का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र जिस तरह से वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच अपना मार्ग प्रशस्त कर रहा है, ठीक उसी तरह से समय पर मूल्यवान योगदान करने संबंधी एडीबी की क्षमता पर गौर किया जा रहा है। वित्त मंत्री श्री जेटली ने विशेष जोर देते हुए कहा कि एडीबी को अभिनव परियोजनाओं के लिए अपनी ओर से सहायता देते हुए परिवर्तन का वाहक बनने की जरूरत है, जो संभवत: स्थानीय प्रयासों के जरिये संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि एडीबी के रेजीडेंट मिशनों का सशक्तिकरण और निर्णय लेने में प्रत्यायोजन एवं विकेन्द्रीकरण कुछ सुधार संबंधी अनिवार्यता हैं। वित्त मंत्री ने सुधारों पर निरंतर जोर देने की बात को रेखांकित किया ताकि एडीबी को एक बेहतर और बड़े एमडीबी में तब्दील किया जा सके।
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पार्टी में कोई अनबन या मतभेद नहीं - भाजपा
रेड्डी बंधुओं के मुद्दे पर सुषमा स्वराज के बयान से उपजे विवाद को देखते हुए भाजपा ने रविवार को कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी में कोई अनबन नहीं है।सुषमा और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच कथित मतभेद के बारे में पूछने पर भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने कहा, 'पार्टी में कोई अनबन या मतभेद भी नहीं है।'भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने शनिवार को बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि कर्नाटक में मंत्रियों के चुनाव पर मीडिया में चल रहा विवाद बिल्कुल अनावश्यक है।भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येद्दयुरप्पा ने विवादास्पद रेड्डी बंधुओं को प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल करने की अपनी जिम्मेदारी लेने का दावा किया।
जबकि लोकसभा में भाजपा की नेता सुषमा स्वराज इस प्रकरण से खुद को अलग कर रखा है।माना जाता है कि सुषमा रेड्डी बंधुओं की करीबी हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने कहा कि खनन उद्योगपति जनार्दन रेड्डी और करुणाकर रेड्डी को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला अरुण जेटली, येद्दयुरप्पा, एम. वेंकैया नायडु और अनंत कुमार का था।
उनकी इस टिप्पणी से भाजपा की दूसरी पीढ़ी के नेताओं में मतभेद बढ़ गए थे। जिसके बाद राजनाथ सिंह और येद्दयुरप्पा को रेड्डी बंधुओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने की जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
सांप्रदायिक हिंसा पर नए बिल के अनुसार दंगों के लिए हमेशा हिन्दू जिम्मेदार
भारतीय जनता पार्टी ने सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा के खिलाफ लाए जाने वाले बिल की कड़ी आलोचना की है. बीजेपी का कहना है कि यह बिल राज्यों के संघीय अधिकारों के खिलाफ है जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.बीजेपी के मुताबिक सांप्रदायिक हिंसा और लक्षित हिंसा के लिए इस बिल में बहुसंख्यक समुदाय को ही जिम्मेदार माना गया है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने अंदेशा जताया कि इस बिल को सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने तैयार किया है. "ऐसा लगता है कि इस बिल का मसौदा उन लोगों ने तैयार किया है जिन्होंने गुजरात दंगों से सीखा है कि कैसे वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाए, भले ही दंगों के लिए वे जिम्मेदार न हों.
ड्राफ्ट बिल मान कर चलता है कि सांप्रदायिक हिंसा के लिए हमेशा बहुसंख्यक समुदाय जिम्मेदार होता है और अल्पसंख्यक समुदाय इसकी शुरुआत नहीं करता."जेटली ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस बिल में बहुसंख्यकों के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदाय के अपराधों को अपराध नहीं माना गया है.
किसी के साथ यौन दुर्व्यवहार का मामला इस बिल के मुताबिक तभी दंडनीय होगा, अगर वह किसी अल्पसंख्यक के खिलाफ किया गया हो. वह कहते हैं, "संगठित और लक्षित हिंसा, नफरत और दुष्प्रचार, अपराध करने वाले जेटली ने उठाए सवालव्यक्ति की वित्तीय मदद तभी अपराध माने जाएंगे अगर उन्हें किसी अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ किया गया हो.
बहुसंख्यक समुदाय का व्यक्ति खुद को पीड़ित नहीं बता सकता."जेटली ने जोर देकर कहा कि सांप्रदायिक हिंसा कानून और व्यवस्था की दिक्कत है और इसमें कार्रवाई का दायरा राज्य सरकार ही तय करती है. वह मानते हैं, "केंद्र और राज्य में ताकत के विभाजन के बाद केंद्र सरकार के पास राज्य में कानून व्यवस्था में सीधे दखल देने का अधिकार नहीं है."
जेटली ने आशंका जताई कि अगर इस तरह का कानून लागू होता है तो केंद्र राज्य सरकार का अधिकार छीन लेगा.सांप्रदायिक सदभाव और न्याय के लिए गठित होने वाली सात सदस्यीय समिति पर भी जेटली ने सवाल उठाए. "इन सात सदस्यों में से चार सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से होंगे. इनमें चेयरमैन और वाइस चेयरमैन शामिल हैं. ऐसी ही संस्था राज्य में बनाए जाने का प्रस्ताव है. इस तरह संस्था की सदस्यता धार्मिक और जातीय आधार पर तय होगी."
उमर की कूटनीति :गणतंत्र दिवस समारोह में आने का न्यौता दिया
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार रात अपना कुटनीतिक कदम उठाते हुए, भाजपा के नेता अरुण जेटली को फोन कर पार्टी नेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह में आने का न्यौता दिया है.उमर के इस कदम से पहले श्रीनगर की ओर से कूच कर रही भाजपा की तिरंगा यात्रा को पंजाब-जम्मू सीमा पर रोक दिया गया. मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भाजपा नेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत करने के लिए श्रीनगर या जम्मू आने का निमंत्रण दिया है.
उन्होंने कहा, ‘भाजपा नेताओं के गणतंत्र दिवस समारोह में आने पर उनका स्वागत किया जाएगा.’
भाजपा के दवाब पर झुकी सरकार, गिलानी पर दर्ज होगा मुकदमा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अलगावादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी और कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए दिल्ली पुलिस को हरी झंडी दे दी है। गिलानी ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक सेमिनार में कथित तौर पर 'नफरत फैलाने वाला भाषण' दिया था।मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि विधि विभाग से मिले परामर्श में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया गिलानी और अन्य के खिलाफ ऐसे वक्तव्य देने का मामला दर्ज किया जा सकता है, जो लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश की तरह हो। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस से कहा गया है कि वह गिलानी के खिलाफ मामला दर्ज करे और पुलिस संभवत: जल्दी ही मामला दर्ज कर ले। वहीं जम्मू-कश्मीर के तीनों वार्ताकारों का बहिष्कार करने की अपील करने वाले गिलानी रविवार को कश्मीर लौट गए। नई दिल्ली में गिलानी के भाषण के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी।
भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा था कि ऐसा भाषण अस्वीकार्य है। क्योंकि किसी को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ऐसा अधिकार नहीं है, जो देश को तोड़ने वाली हो। उन्होंने कहा था कि यह देश के खिलाफ एक अपराध है। वहीं भाजपा नेता के आरोपों पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि गिलानी ने जो भाषण दिया है, दिल्ली पुलिस उसमें कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा पता चलता है कि कानून का उल्लंघन हुआ है, तो दिल्ली पुलिस कानूनन कार्रवाई करेगी।
स्वतंत्रता के नाम पर देशद्रोह का प्रसार करने की छूट नहीं दी जा सकती : भाजपा
कश्मीर की ‘आज़ादी’ के विषय पर कल राष्ट्रीय राजधानी में हुई विचार गोष्ठी की कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा ने आज कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी हरकतें अस्वीकार्य हैं और केन्द्र आंख मूंदने की बजाय दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे।राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा, ‘‘सरकार की नाक के नीचे दिल्ली में कल अलगाववादी समूहों का एकत्र होकर देशद्रोह का प्रसार करने से राष्ट्र सकते में है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश से अलग होने के अधिकार को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा संविधान में दिए भाषण की स्वतंत्रता के अधिकार को देश के खिलाफ प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
ऐसा करने वालो के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए संप्रग सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह देशद्रोह का प्रसार करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई करके उन्हें दंडित करे।
यहां कल ‘‘आज़ादी--एकमात्र रास्ता’’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में अलगाववादी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी सहित कई अलगाववादियों के अलावा नक्सलवाद और खालिस्तान के समर्थक मौजूद थे।
आयोग के हवाले हो सासंदो की वेतन वृद्धि - आडवाणी
अमूमन सभी राजनीतिक दल के सांसदों का दबाव देखते हुए केंद्र सरकार भले ही इस बार वेतन बढ़ोतरी का फैसला संसदीय समिति की सलाह पर कर रही हो, लेकिन भविष्य में खुद को इस विवाद से दूर रखने की कवायद भी शीर्ष स्तर पर शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और प्रमुख विपक्षी दल इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि आगे से सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने का फैसला कोई आयोग या अधिकारप्राप्त समूह करे तो बेहतर होगा। भारतीय जनता पार्टी की ओर से खुद शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस तरह की पहल की है।
सूत्रों के मुताबिक आडवाणी ने गृह मंत्री पी चिदंबरम से बातचीत के दौरान अपने इस मत से अवगत करा दिया था कि भविष्य में वेतन बढ़ाने का फैसला एक आयोग बनाकर उसके सुपुर्द कर दिया जाए, जिसे कानूनी अधिकार हासिल हो। उन्होंने अपनी राय से लोकसभा में सदन के नेता और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को अवगत कराया है। भाजपा नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने भी इसी तरह का मत जाहिर करते हुए स्पष्ट किया है कि सांसदों को आम कर्मचारियों की तरह अपने वेतन के लिए हो-हल्ला मचाना ठीक नहीं है। लिहाजा बेहतर होगा कि इस प्रक्रिया को सूचकांक से जोड़ दिया जाए।
वहीं कांग्रेस की ओर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई मंत्री भी खुद से वेतन बढ़ाने का फैसला करने की मुखालफत कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, पी चिदंबरम समेत कुछ मंत्री इस बात की पैरवी कर रहे हैं कि सांसदों के वेतन के बारे में खुद ही कोई फैसला करना ठीक नहीं है। कैबिनेट में मतभेद के चलते ही एक बैठक में वेतन बढ़ोतरी का फैसला नहीं हो पाया था। सूत्रों का कहना है कि सरकार के भीतर इस बात पर मंथन हो रहा है कि कोई ऐसा रास्ता तलाशा जाए जिससे खुद को तोहमत से बचाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक वेतन बढ़ाने संबंधी विधेयक संसद में पेश करते समय सरकार भविष्य में इस तरह के फैसले की प्रक्रिया के बारे में भी ठोस फैसले की घोषणा कर सकती है।












