राफेल डील: कैग रिपोर्ट के बाद बोले जेटली, गुमराह करनेवालों को जनता सजा देगी

राफेल डील पर जारी सियासी घमासान के बीच आज नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट राज्यसभा में पेश की गई। इस रिपोर्ट के मुताबिक यूपीए के मुकाबले NDA के शासनकाल में 2.86% सस्ती डील फाइनल की गई है। CAG रिपोर्ट के मुताबिक 126 विमानों की तुलना में भारत ने 36 राफेल कॉन्ट्रैक्ट में 17.08% पैसे बचाए हैं। आपको बता दें कि मोदी सरकार के समय में 2016 में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा हुआ। इससे पहले UPA के समय में 126 राफेल का सौदा हुआ था पर कई शर्तों पर आम राय नहीं बन सकी थी।

रिपोर्ट में 2007 और 2015 की मूल्य बोलियों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है। इसमें लिखा है, 'आईएनटी द्वारा गणना किए गए संरेखित मूल्य 'यू 1' मिलियन यूरो था जबकि लेखापरीक्षा द्वारा आंकलित की गई संरेखित कीमत 'सीवी' मिलियन यूरो थी जो आईएनटी संरेखित लागत से लगभग 1.23 प्रतिशत कम थी। यह वह मूल्या था जिस पर 2015 में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने चाहिए थे यदि 2007 और 2015 की कीमतों को बराबर माना जाता। लेकिन इसके जगह 2016 में 'यू' मिलियन यूरो के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे जो लेखापरीक्षा के संरेखित कीमत से 2.86 प्रतिशत कम थी।' 


हालांकि कांग्रेस ने CAG रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं। 141 पेज की यह रिपोर्ट रखे जाने के बाद राज्यसभा में हंगामा शुरू हो गया जिसके कारण सभापति को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, लोकसभा में भी TDP और TMC सदस्यों के हंगामे के कारण सुबह कामकाज नहीं हो सका और कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

राफेल डील को लेकर कांग्रेस के सांसदों ने राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान सांसदों ने 'चौकीदार चोर है' के नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सोनिया गांधी और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह भी मौजूद थे। 

सीएजी रिपोर्ट राज्यसभा में पेश किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट कर लिखा, 'सत्यमेव जयते-सत्य की जीत हमेशा होती है। राफेल पर CAG रिपोर्ट से यह कथन एक बार फिर सच साबित हुआ है।' एक अन्य ट्वीट में जेटली ने कहा, 'CAG रिपोर्ट से महाझूठबंधन के झूठ उजागर हो गए हैं।' 

जेटली ने कहा कि रिपोर्ट ने कांग्रेस पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे बड़े झूठों का भंडाफोड़ दिया। जिसे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार फैला रहे थे। उन्होंने कहा कि अब डील से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट है, सीएजी भी संतुष्ट है, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल नहीं उठना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, 'मामले को यहीं खत्म नहीं होना चाहिए, लोगों को उन्हें जरूर सजा देनी चाहिए जिन्होंने उन्हें गुमराह किया।' 

जेटली ने दशकों पुराने सेंट कीट्स के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस दोबारा वैसा ही करना चाहती है। उन्होंने कहा, '1989 में राजीव गांधी की सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त थी। इसको छिपाने के लिए उन्होंने वी पी सिंह के खिलाफ सेंट कीट्स का मामला उछाला। अब जब मोदी सरकार की इमेज साफ है तो वह फिर ऐसी ही कोशिश कर रहे हैं।' 

रक्षा मंत्रालय के 3 अफसरों के जिस डिसेंट नोट पर विवाद हुआ था उसका जिक्र करते हुए जेटली ने कहा, 'संवैधानिक प्रोसेस में सभी को अपने विचार बताने का अधिकार है। लेकिन आखिरी फैसला सरकार को ही लेना होता है।' जेटली ने आगे कहा, 'अधिकारी ने पहले नोट पर साइन करके वह चीजें बताई जिसपर वह राजी नहीं थे। इसके बाद नई डील की टर्म्स पर उन्होंने ही साइन किए हैं। इसका मतलब साफ है कि नोट लिखनेवाले ने डील का समर्थन किया है।' 

राफेल डील पर मीडिया के सामने बोलने से पहले जेटली ने ट्वीट करके कांग्रेस पर हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि कैग रिपोर्ट ने सत्यमेव जयते के कथन को सच साबित किया है। उन्होंने आगे लिखा कि ऐसा नहीं हो सकता कि सुप्रीम कोर्ट गलत हो, कैग गलत हो और सिर्फ 'राजवंश' ही सही हो। इसके बाद उन्होंने लिखा, 'लोकतंत्र में लगातार झूठ बोलनेवालों कैसे सजा दी जाती है? महागठबंधन के झूठ कैग रिपोर्ट से उजागर आ गए हैं।' 

इससे पहले एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से राहुल गांधी ने राफेल मुद्दे को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने 'द हिंदू' अखबार की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पीएम का बेटर प्राइसिंग और जेट की जल्द डिलिवरी का दावा खारिज हो गया है। आपको बता दें कि बुधवार को अंग्रेजी अखबार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि NDA सरकार के समय में हुई राफेल डील UPA के समय के ऑफर से बेहतर नहीं है। 

वहीं, बुधवार सुबह में कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान के मूल्यों, सिद्धांतों और प्रावधानों पर मोदी सरकार की ओर से लगातार हमले किए जा रहे हैं। 

कराधान कानून (द्वितीय संशोधन) विधेयक लोकसभा में पेश,पढ़िए क्या बदला


कराधान कानून (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 लोकसभा में पेश, ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, 2016 (पीएमजीकेवाई) के लिए कराधान और निवेश व्‍यवस्‍था’ नामक योजना विधेयक में प्रस्तावित 

करों की चोरी के कारण राष्ट्र महत्वपूर्ण संसाधनों से वंचित हो जाता है, जिनका उपयोग सरकार गरीबी उन्मूलन और विकास कार्यक्रमों को शुरू करने में कर सकती है। काले धन पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को वापस ले लिया है। 

इस बात को लेकर चिंता जताई गई है कि काले धन को छिपाने के मकसद से आयकर अधिनियम, 1961 (अधिनियम) के कुछ मौजूदा प्रावधानों का संभवतः इस्तेमाल किया जा सकता है। अधिनियम के प्रावधानों में संशोधन के लिए कराधान कानून (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 को संसद में पेश कर दिया गया है, ताकि कर अदायगी में चूक करने वाले करदाताओं पर अपेक्षाकृत उच्च दर से टैक्‍स लगाने के साथ-साथ कठोर दंड का प्रावधान भी सुनिश्चित किया जा सके। 

‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, 2016 (पीएमजीकेवाई) के लिए कराधान और निवेश व्‍यवस्‍था’ नामक एक वैकल्पिक योजना को इस विधेयक में प्रस्तावित किया गया है। इस व्यवस्था के तहत घोषणा करने वालों को अपनी अघोषित आय के 30 प्रतिशत की दर से कर का भुगतान करना होगा और अपनी अघोषित आय के 10 प्रतिशत की दर से पेनाल्‍टी देनी होगी। इसके अलावा 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण उपकर' के नाम से एक अधिभार (सरचार्ज) भी कुल टैक्स राशि के 33 प्रतिशत की दर से लगाने का प्रस्‍ताव है। टैक्स, सरचार्ज और पेनाल्‍टी (कुल मिलाकर लगभग 50 प्रतिशत) के अतिरिक्त घोषणा करने वालों को अपनी अघोषित आय के 25 प्रतिशत को एक जमा योजना में जमा कराना होगा, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण जमा योजना, 2016’ के तहत अधिसूचित किया जाएगा। इस राशि को सिंचाई, आवास, शौचालयों, बुनियादी ढांचागत सुविधाओं, प्राथमिक शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य, आजीविका, इत्‍यादि से जुड़ी योजनाओं में उपयोग किया जाना प्रस्तावित है, ताकि न्याय और समानता को सुनिश्चित किया जा सके। 

विश्व मंदी के बाद भी देश में 2015-16 में 7.65% विकास दर बरकरार :जेटली


वैश्विक स्‍तर पर विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत वर्ष 2015-16 में 7.65 फीसदी की ऊंची आर्थिक विकास दर को बरकरार रखने में कामयाब रहा: वित्‍त मंत्री

सरकार दूरगामी ढांचागत सुधारों के जरिये ‘बदलाव के लिए सुधार’ की अवधारणा को अपना रही है: अरुण जेटली
केंद्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि वैसे तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र अब भी विश्‍व का विकास इंजन बना हुआ है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस क्षेत्र की विकास दर पिछले साल के अनुमानित 5.9 फीसदी से घटकर वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में 5.7 फीसदी रह जाएगी। श्री जेटली ने कहा कि वैश्विक स्‍तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत वर्ष 2015-16 में 7.65 फीसदी की ऊंची आर्थिक विकास दर हासिल करने में कामयाब रहा, जबकि पिछले साल यह 7.2 फीसदी आंकी गई थी। इस क्षेत्र के निर्धनतम देशों में विकास एवं गरीबी उन्‍मूलन में भागीदार बनने की भारतीय प्रतिबद्धता को दोहराते हुए वित्‍त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के एडीएफ-12 के तहत अपना अंशदान बढ़ाकर 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है। वित्‍त मंत्री कल जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित एशियाई विकास बैंक की 49वीं वार्षिक आम बैठक के कारोबारी सत्र को संबोधित कर रहे थे।

भारत में विकास की मिसाल को रेखांकित करते हुए वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि सरकार दूरगामी ढांचागत सुधारों के जरिये ‘बदलाव के लिए सुधार’ की अवधारणा को अपना रही है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने निवेश माहौल को बेहतर करने एवं कारोबार में और ज्‍यादा सुगमता सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि बु‍नियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए राष्‍ट्रीय बुनियादी ढांचा निवेश कोष (एनआईआईएफ) बनाया गया है। इसी तरह नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया, स्‍टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी अनेक योजनाएं क्रियान्‍वित की जा रही हैं। वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि भारत के व्‍यापक वित्‍तीय समावेश कार्यक्रम के परिणामस्‍वरूप बगैर बैंकिंग सुविधा वाले व्‍यक्तियों के 200 मिलियन से भी ज्‍यादा बैंक खातों को खोलना संभव हो पाया है।

एडीबी की भूमिका का उल्‍लेख करते हुए वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र जिस तरह से वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच अपना मार्ग प्रशस्‍त कर रहा है, ठीक उसी तरह से समय पर मूल्‍यवान योगदान करने संबंधी एडीबी की क्षमता पर गौर किया जा रहा है। वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने विशेष जोर देते हुए कहा कि एडीबी को अभिनव परियोजनाओं के लिए अपनी ओर से सहायता देते हुए परिवर्तन का वाहक बनने की जरूरत है, जो संभवत: स्‍थानीय प्रयासों के जरिये संभव नहीं है। उन्‍होंने कहा कि एडीबी के रेजीडेंट मिशनों का सशक्तिकरण और निर्णय लेने में प्रत्यायोजन एवं विकेन्‍द्रीकरण कुछ सुधार संबंधी अनिवार्यता हैं। वित्‍त मंत्री ने सुधारों पर निरंतर जोर देने की बात को रेखांकित किया ताकि एडीबी को एक बेहतर और बड़े एमडीबी में तब्‍दील किया जा सके।

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आम बजट के लिए वित्तमंत्री को बधाई दी


केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को आम बजट 2016-17 पर बधाई दी। अपने बयान श्री सिंह ने कहा कि 'मैं केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को 2016-17 के उत्तम आम बजट पेश करने पर बधाई देता हूं। यह बजट पूर्ण रूप से किसानों, गरीबों और सुधार के पक्ष में है। इस बजट में सरकार की प्राथमिकता की रूपरेखा के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्वप्न नजर आता है।' 

अगर यह आम बजट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सालाना परीक्षा है तो मैं यह अवश्य कहूंगा कि श्री मोदी इस परीक्षा में पूर्ण रूप से सफल हुए हैं। बजट 2016-17 से सरकार को आर्थिक नीव को मजबूत करने और बुनियादी सुविधाओं के जाल को बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इस वर्ष सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को आय सुरक्षा प्रदान करना होगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बीस हजार करोड़ के आवंटन के साथ संयोजित सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाये जाने पर बल दिया जायेगा जिससे भारत में कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा। 

किसानों को कृषि संबंधी ऋण देने के लिए उच्चतम लक्ष्य 9 लाख करोड़ रखा गया है और मनरेगा के लिए 38500 करोड़ रुपये का आवंटन किया जायेगा जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना निधि को बढ़ाकर 19000 करोड़ किया जायेगा जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की ओर बड़ा कदम है। 

इस वर्ष बुनियादी ढांचे का विकास बजट की पहली प्राथमिकताओं में रहेगा जिसमें 55 हजार करोड़ को राजमार्गों के विकास के लिए रखा जायेगा। इस बार की एनडीए सरकार रेलवे में बड़ी राशि निवेश करने के साथ बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में पहले की तुलना में 2.2 लाख करोड़ का इजाफा करेगी। 

बजट में बीपीएल परिवारों को एक लाख से ज्यादा का स्वास्थ्य बीमा दिया की बात कही गई है जो यह दर्शाती है कि वर्तमान सरकार गरीब और जरुरतमंदों की चिंता करती है। रेलवे में पूंजी व्‍यय को जोड़ देने से राजग सरकार द्वारा बुनयादी सेक्‍टर में किया जाने वाला निवेश बढ़कर 2.2 लाख करोड़ हो जाएगा। 

बजट में यह ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को 2.87 करोड़ का वित्तीय सहायता दिये जाने की बात कही गई है जो कि लंबे समय तक पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी। 

बजट में कई ऐसे प्रावधानों को शामिल किया गया है जो निर्माण क्षेत्र को बढ़ाने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करायेगा। यह बजट निश्चित रूप से हर मोर्चे पर लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरा है और अर्थव्यवस्था पर भविष्य में कई तरह के सकरात्मक प्रभाव देखे जा सकेंगे। 

प्रधानमंत्री जन-धन योजना में 440 मिलियन बचत खाते खुले : वित्‍त मंत्री


केंद्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरूण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई) के अंतर्गत सरकार की पहल को देखते हुए वर्ष 2015-16 के दौरान कई बैंक बचत जमा खाते (बीएसडीए) खोले गये हैं। उन्‍होंने कहा कि सितम्‍बर 2015 को समाप्‍त हुई अवधि के दौरान 440 मिलियन बीएसडीए हो गये जबकि मार्च, 2015 को समाप्‍त हुए वर्ष में 398 मिलियन बीएसडीए थे। वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों में संचालन सुधारों के रूप में बैंक बोर्ड ब्‍यूरो की स्‍थापना की गई है, जो बैंक की प्रगति और विकास के लिए उचित कार्यप्रणाली तैयार करने के लिए पूर्णकालिक निदेशकों और गैर कार्यकारी अध्‍यक्षों की नियुक्ति के लिए नियुक्ति बोर्ड का स्‍थान लेगा। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने महत्‍वपूर्ण निष्‍पादन मानदंडों के साथ सरकारी बैंकों के लिए वार्षिक लक्ष्‍य के लिए प्रयोजन ब्‍यौरा तैयार करने की पहले की प्रक्रियाओं को बैंक विशिष्‍टता से बदल कर लक्ष्‍य आधारित बना दिया है ताकि बैंक के साथ संपर्क की आवश्‍यकता को दूर किया या कम से कम किया जा सके। वित्‍त मंत्री ने आज यहां पर बैंक और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व विचार-विमर्श बैठक के दौरान शुरूआत में यह टिप्‍पणी की। 

बैठक के दौरान बैंक और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों ने भी कई सुझाव दिये। प्रमुख सुझावों में आयकर अधिनियम के अंतर्गत 2.5 लाख तक की बचत के लिए कर छूट की सीमा को बढ़ाना, डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिये कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्‍साहन, वृद्धि को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र निवेश जब तक नहीं बढ़ता है तब तक सरकारी व्‍यय बढ़ाने पर ध्‍यान केंद्रित करना शामिल है। अन्‍य सुझावों में अधिकतर सरकारी नियंत्रण रखते हुए सरकारी क्षेत्र के गैर जीवन बीमा उपक्रमों को सूचीबद्ध करना, पीएफएम के लिए व्‍यावसायिक रूप से व्‍यावहारिक प्रोत्‍साहन के साथ एनपीएस क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने की परिकल्‍पना के साथ पीएफआरडीए नियामक तैयार करना शामिल हैं। सरकारी केपेक्‍स आधारित व्‍यय, बैंकों को अपनी बुनियादी ढांचा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑफशोर आईएनआर बान्‍ड जारी करने की अनुमति और घरेलू इंफ्रा बॉन्‍ड्स दिशानिर्देशों के साथ इन बॉन्‍डों के नियामक सममूल्‍य के सुझाव भी दिये गये। 

अन्‍य सिफारिशों में कृषि क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश, प्रौद्योगिकी समर्थित और व्‍यापक वित्‍तीय समावेशन के साथ नई फसल बीमा योजना शुरू करना और सरकार के बॉयोमैट्रिक सत्‍यापन पहल शामिल है। 

बैंकों और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों से उपरोक्‍त बजट पूर्व विचार-विमर्श में वित्‍त मंत्री श्री अरूण जेटली के साथ वित्‍त राज्‍य मंत्री श्री जयंत सिन्‍हा, वित्‍त सचिव श्री आर पी वटल, डीईए सचिव श्री शक्तिकांत दास, राजस्‍व सचिव डॉ. हसमुख अढि़या, वित्‍तीय सेवाएं सचिव सुश्री अंजुली चिब दुग्‍गल, मुख्‍य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डॉ. अरविंद सुब्रह्मण्‍यम भी उपस्थित थे। 

विभिन्‍न बैंकों और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों में आरबीआई के डिप्‍टी गवर्नर श्री उर्जित पटेल, भारतीय स्‍टेट बैंक के अध्‍यक्ष सुश्री अरूंधति भट्टाचार्य, बैंक ऑफ बडौदा के कार्यकारी निदेशक श्री बी बी जोशी, जनग्रह के श्री भारत सोंदूर, जीवन बीमा निगम के अध्‍यक्ष श्री एस के रॉय, आईआईएफसीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री एस बी नायर, आईडीबीआई बैंक के सीएमडी श्री किशोर खरात, नाबॉर्ड के अध्‍यक्ष श्री एच के भनवाला, इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन (आईबीए) के अध्‍यक्ष श्री अश्विनी कुमार, एक्सिस बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी सुश्री शिखा शर्मा, सिटी बैंक के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री प्रमीत झवेरी, एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक श्री आदित्‍य पुरी, यस बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री राणा कपूर, आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक श्री एस एन कनन, शेयर माइक्रोफीन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री एम उदई कुमार, एल एंड टी फाइनेंस होल्डिंग्‍स के मुख्‍य प्रबंध निदेशक श्री वाई एम देवोस्‍थाली, भारतीय दलित वाणिज्‍य और उद्योग परिसंघ के श्री मिलिंद काम्‍बले, बेसिक्‍स–माइक्रोफाइनेंस लाइवलीहुड इंस्टिट्यूट के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी श्री विजय महाजन और भारतीय म्‍युचुअल फंड एसोसिएशन के चीफ एक्जिक्‍यूटिव श्री सीवीआर राजेन्‍द्रन शामिल थे। 

सोनिया गाँधी का चुनावों को सांप्रदायिकरण करने का असफल प्रयास : अरुण जेटली

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआइपी हेलीकाप्टर सौदे के सम्बन्ध में 'द इंडियन एक्सप्रेस' का खुलासा 1980 के दशक के अंत में जो कुछ हुआ उसकी पुनरावृत्ति लगता है. मार्टिन आइबो की डायरी जब्त कर ली गई थी. वह बोफोर्स तोप बनाने वाली कंपनी के प्रमुख थे. अनेक खुलासो के बीच, डायरी में 'क्यू' को संरक्षण देने का संकेत दिया गया है. पैनी नजर रखने वाली सभी जानते हैं कि 'क्यू' कौन हो सकता है. 1993 में स्विस अधिकारियों ने बैंक खातो का विवरण दिया था, जिनमे बोफोर्स तोप सौदे की दलाली दी गई थी. इन खातों में से एक लाभार्थी, जिसके खाते में पर्याप्त धनराशी जमा की गई वह जाना पहचाना 'क्यू' था. 'क्यू' को भारत से भागने की इजाजत दी गई और बाकी इतिहास बन गया.

वीवीआइपी हेलीकाप्टर के सौदे में दलाली दी गई. रक्षात्मक यूपीए की सरकार ने सौदा रद्द कर दिया.  इंडियन एक्सप्रेस ने पहले उदहारण में बताया है. भारत सरकार में फैंसला लेने में भूमिका किसने निभाई. यहाँ तक कि इतालवी बिचौलिए यह समझ चुके थे कि भारत में महत्वपूर्ण फैंसले श्रीमती सोनिया गाँधी द्वारा प्रभावित होते हैं. प्रधानमंत्री ज्यादा से ज्यादा उनके अनेक सलाहकारों में से एक हैं. बिचौलिए बहुत चालाक लोग हैं. वे निष्कर्षों पर आने से पहले अपना होम वर्क करते हैं. बही खातो में जो संक्षिप्त नाम है वह मुझे मार्टिन आइबो की डायरी की याद दिलाते हैं.

श्रीमती सोनिया गाँधी को वास्तव में परेशान होना चाहिए. भारत सरकार को भारत के जनता और बाहर के लोग किस तरह से देख रहे हैं ? क्या यह सोना खोदने वालों की सरकार है? क्या वे जिस यूपीए का नेतृत्व कर रहीं हैं उसने भारत को चोरी करने की बीमारी करने की तरफ धकेल दिया है? क्या वे जिस सरकार को नियंत्रित कर रहीं हैं वह पांचवी मशीन हैं ? सरकार के वास्तव में काफी भ्रष्ट छवि है. आर्धिक मोर्चे के रूप में उसका कामकाज निराशाजनक है. 2012-13 के आंकड़ो ने विकास दर को 4.5 प्रतिशत पर ला दिया है. अगर श्री चितम्बरम के शब्दों में कहा जाए तो यूपीए -2 की आर्थिक उपलब्धियों को डाक टिकट के पीछे लिखा जा सकता है. हाल के चुनाव परिणाम सत्तारुड गठबंधन की निराशाजनक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं. जिस नेता को उन्होंने 2014 के आम चुनावों के लिए पेश किया है, वह कोई असर दिखाने में नाकाम रहें हैं.

इन प्रतिकूल परस्थितियों का सामना कर रहीं यूपीए की अध्यक्ष अब हताश होकर इस तरह की बयानबाज़ी कर रहीं हैं. 'जहर की खेती' का उनका बयान विकास के एजेंडे से भटकाने के लिए चुनाव का सांप्रदायिकरण करने के इरादे से किया गया है. उनकी हताशा समझ में आती है. यह अलग बात है कि चुनाव को सांप्रदायिक करने के मुद्दे पर केन्द्रित करने की उनकी कोशिश का कोई नतीजा नहीं निकले ..

कंपनी इटली की होने के कारण हेलिकाप्टर सौदा घोटाले में जांच नहीं हुई - भाजपा

इतालवी अगस्टा वेस्टलैंड हेलिकाप्टर सौदा घोटाले को दूसरा बोफर्स घोटाला बताते हुए भाजपा ने सरकार से सवाल किया कि उसने एक साल तक इसकी जांच क्या इसलिए नहीं कराई कि यह कंपनी इटली की है। उसने कहा कि वह इस मामले को संसद और संसद के बाहर जोरदार ढंग से उठाएगी।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने यहां कहा कि यह बोफोर्स जैसा मामला है। जब रिश्वत देने वाले को पकड़ लिया गया, लेकिन रिश्वत पाने वाले की पहचान नहीं की गई। भारत सरकार कब तक रिश्वत लेने वालों को बचाएगी। भाजपा इस मामले को संसद में उठाएगी और सरकार से यह बताने की मांग करेगी कि रिश्वत लेने वाले कौन हैं और कौन उन्हें बचा रहा है।

पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी सवाल किया कि हेलिकाप्टर सौदा घोटाले में भारत में जांच क्यों नहीं हो रही है, जबकि इटली में इस मामले की जांच को रही है? क्या ऐसा इसलिए है कि कंपनी इटली की है?

प्रसाद ने कहा कि मैं इस घोटाले में दूसरा बोफोर्स घोटाला बनते देख रहा हूं। सरकार यह नहीं बता पाई कि इस मामले की जानकारी होने के बावजूद वह एक साल से चुप्पी क्यों साधे रही?

उन्होंने कहा कि इस सौदे से कई सवाल खड़े हुए हैं। इटली के एक श्रीमान ओत्तावियो क्वात्रोच्चि हैं जो बोफोर्स घोटाले में शामिल थे। उन्हें बचाने की कई कोशिशें की गई। यह हेलिकाप्टर कंपनी भी इटली की है। क्या यह एक कारण है कि पिछले एक साल से इस मामले की जांच नहीं करवाने का? उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि 3, 500 करोड़ रूपए के इस सौदे में हुए घोटाले की इटली में जांच हो रही है, लेकिन भारत में नहीं।

इस हैलिकाप्टर की भविष्य की आपूर्ति पर तुरंत रोक लगाने की मांग करते हुए उन्होंने इस पूरे सौदे की समीक्षा करने की मांग की।

प्रसाद ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी से पूछना चाहता हूं कि इतने सारे घोटाले के साथ वे किस तरह का भारत बनाना चाहते हैं? भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उसकी ओर से एक साल पहले ही यह मामला उठाया गया था लेकिन तब सरकार ने सीबीआई से जांच करने को क्यों नहीं कहा।

इस मामले में संसद को गलत जानकारी देने का रक्षा मंत्री ए के एंटनी पर आरोप लगाते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा इस महीने से शुरू हो संसद के बजट सत्र में सरकार की ओर से इस कथित गलतबयानी का स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी यह स्पष्टीकरण देना चाहिए कि सरकार के हर विभाग में भ्रष्टाचार क्यों है। दूरसंचार, कोयला या रक्षा हो हर विभाग में लूट है।

पूर्व वायुसेना प्रमुख एस पी त्यागी के इस खुलासे पर कि सौदे में विवादास्पद बदलाव राजग शासन के समय हुए, प्रसाद ने कहा कि त्यागी की टिप्पणी को घाव पर नमक के रूप में लेना चाहिए। उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। कहा जा रहा है कि इसमें उनके रिश्तेदार शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि राजग शासन के दौरान कोई हेलिकाप्टर नहीं खरीदा गया और कोई रिश्वत नहीं ली गई।

हेलिकाप्टर घोटाले की सीबीआई से जांच कराने के सरकार के आदेश पर जेटली ने कहा, ‘‘सबने देखा है कि इस जांच एजेंसी को कितनी गंभीरता से काम करने दिया जाता है। वह जांच में चीजों को उजागर करने की बजाय ,छिपाती ज्यादा है ।’’

सेवानिवृति के बाद मिलने वाले पद की लालसा में जज सुनाते है गलत फैसले - जेटली


न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के गठन की मांग और न्यायिक सुधारों की वकालत करते हुए बीजेपी ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की न्यायाधिकरणों में नियुक्ति के प्रचलन से न्यायपालिका पर असर पड़ रहा है.

बीजेपी के विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अधिवक्ता अधिवेशन को संबोधित करते हुए बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि पार्टी के एजेंडा में न्यायिक सुधार प्राथमिकता में हैं और सेवानिवृत्ति के दो साल की अवधि के बाद ही जजों की नियुक्ति न्यायाधिकरणों में की जानी चाहिए.

उधर, पार्टी नेता अरुण जेटली ने सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की न्यायाधिकरणों में नियुक्ति के प्रचलन से न्यायपालिका पर असर पड़ने की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘न्यायपालिका में निष्पक्षता को बनाये रखने के लिए न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे वेतन के बराबर पेंशन देने और सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायपालिका पर असर पड़ रहा है.’

जेटली ने कहा, ‘सेवानिवृति की उम्र होने के बावजूद न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करने के इच्छुक नहीं होते हैं.’

पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई का दुरुपयोग किये जाने का आरोप लगाते हुए मांग की कि सीबीआई की कार्यशैली की जांच होनी चाहिए.

जेटली ने परमाणु करार के मामले में संप्रग-1 सरकार द्वारा सपा के सहयोग से विश्वास मत साबित किये जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सीबीआई सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी नहीं होती, तो आज संप्रग सरकार नहीं होती. उन्होंने कहा कि सपा, बसपा जैसे दल केंद्र सरकार का कितना भी विरोध करें लेकिन बाद में वे मिल जाते हैं क्योंकि उनपर सीबीआई की तलवार लटकी होती है.

गडकरी ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि सीबीआई के अलावा सरकार विपक्षी दलों को ब्लैकमेल करने के लिए न्यायापालिका का भी दुरुपयोग कर रही है.’ उन्होंने गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में भाजपा नेताओं के खिलाफ सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया.

गडकरी ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को पहचानने की चेतावनी देते हुए कहा, ‘हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.’ उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि बीजेपी विपक्षी दल से ‘सुशासन’ वाली पार्टी बने.

जेटली ने देश में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन होना चाहिए जिसमें न्यायाधीश हों, सरकार के प्रतिनिधि हों और समाज के प्रतिनिधि हों और यह आयोग नियुक्ति तथा न्यायपालिका संबंधी शिकायतों की सुनवाई करे.

जेटली ने अन्य देशों में मुकदमों की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि वहां अदालतों में जाने से पहले मामलों को सुलझाने का प्रचलन है लेकिन भारत में अनावश्यक तौर पर वाद बनाये जाते हैं. उन्होंने कानून के पेशे से जुड़े लोगों को निरंतर प्रशिक्षण दिये जाने की भी हिमायत की.

जेटली ने न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका द्वारा अपनी अपनी सीमाओं में काम करने की वकालत करते हुए कहा कि सभी संस्थाओं को सक्रियता के साथ संयम बरतना चाहिए. उन्होंने छत्तीसगढ़ में माओवादियों से लड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) पर उच्चतम न्यायालय द्वारा पाबंदी लगाये जाने के संदर्भ में कहा कि ‘जम्मू कश्मीर और पंजाब में आतंकवाद से लड़ाई न्यायाधीशों ने नहीं पुलिस और सेना ने लड़ी थी.’ जेटली ने खुदरा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर केंद्र सरकार के फैसले पर भी विरोध दोहराया.

जेटली के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि संकेतों में कलंक लगाने के बजाए उन्हें कुछ चीजों को साफ-साफ दृढ़ता से कहना चाहिए अगर वे इन्हें सच जानते हैं.

पूर्व कानूनी मंत्री होने के नाते जेटली को मालूम होना चाहिए कि कुछ संवैघानिक संस्थाओं के प्रमुख केवल पदस्थ और सेवानिवृत्त न्यायाधीश ही हो सकते हैं.

संसद में कारपोरेट लॉबी का खेल बंद कराया जेटली ने

संसद में कारपोरेट लॉबी की उंगलियों पर सांसद कैसे नाच रहे हैं, इसकी बृहस्पतिवार को उस समय पोल खुल गयी जब राज्यसभा के नेता विरोधी दल अरुण जेटली सदन में जाने को तैयार नहीं हुए.

भाजपा के अंदर भी दो धड़े हो गए जिसमें एक विधेयक के समर्थन में था तो दूसरा धड़ा कारपोरेट की उस लॉबी के साथ था जो विधेयक को रोकना चाहती थी.

पार्टी सांसदों के काफी मान मनौव्वल के बाद जब सदन में जेटली पंहुचे तो कड़ा रुख अपनाया. तब कहीं जाकर कॉपीराइट संशोधन विधेयक राज्यसभा में सरकार को लाना पड़ा. भाजपा के अंदर कॉपीराइट संशोधन विधेयक को लेकर सांसदों की एक लॉवी पक्ष में नहीं थी पर अरुण जेटली के दवाब में भाजपा ने उसका समर्थन किया.

कॉपीराइट संशोधन विधेयक को लंबे समय से लाने की कवायद राज्यसभा सदस्य जावेद अख्तर कर रहे थे. कॉपीराइट विधेयक के लाने से संगीत घरानों की कारपोरेट लॉबी को बड़ा नुकसान था.

इसलिए बड़ी कंपनिया इस विधेयक को रोकने में लग गई. कांग्रेस और भाजपा दोनों के बीच संगीत से जुड़ी बड़ी कंपनियां सक्रिय हुई और विधेयक को सदन में न रखा जाए उसके लिए पूरी तैयारी हुई. कारपोरेट लॉबी के कारण भाजपा में भी दो धड़े हो गए. एक तो कॉपीराइट के समर्थन में दूसरा विधेयक के विरोध में.

जेटली इस बात से काफी आहत थे कि कारपोरेट लॉबी के इशारे पर विधेयक को नहीं रोकने की कोशिश हो रही है. लेखकों, साहित्यकारों और गीतकारों का भी अपना दर्द है. कॉपीराइट संशोधन विधेयक न लाया जाए इसके लिए भाजपा की ओर से कई सांसद सक्रिय रहे और सदन में हंगामा किया जिससे कि यह लटक जाए.

इस बीच सदन में जेटली मौजूद नहीं थे. भाजपा के कई सांसद जेटली के पास आए कि सदन में चलें क्योंकि पार्टी के ही कुछ लोग कारपोरेट लॉबी के इशारे पर विधेयक को लटकाने के लिए हंगामा कर रहे हैं. हालांकि वह गुट काफी हद तक सफल भी रहा और सदन को 10 मिनट के लिए रोकना पड़ा.

खुद जावेद अख्तर भी अरुण जेटली को मनाने के लिए आए कि चलें और पार्टी के लोगों को समझाएं. बाद में जब फिर सदन शुरू हुआ तो जेटली सदन में काफी मानमनौव्वल के बाद पंहुचे और भाजपा और सरकार के अंदर कारपोरेट लॉबी के खेल को समेटा और फिर संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू करायी जा सकी.

अलगाववादियों के दबाव पर सरकार घटा रही अमरनाथ यात्रा की अवधि-भाजपा

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने पिछले कुछ सालों से वार्षिक अमरनाथ यात्रा की अवधि घटाये जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार से इस बारे में जवाब मांगा और तीर्थयात्रा को पूरी अवधि तक निकाले जाने की अनुमति देने की मांग की। जेटली ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि पवित्र गुफा मंदिर के लिए निकाली जाने वाली वार्षिक अमरनाथ तीर्थयात्रा में पिछले कुछ सालों से एक ओर यात्रियों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहीं इस यात्रा की अवधि लगातार घटती जा रही है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल आठ लाख लोगों ने अमरनाथ यात्रा में हिस्सा लिया था। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से कश्मीर के लोगों को भी लाभ मिलता है क्‍योंकि या़त्रा के लिए सभी सेवाएं वे ही मुहैया कराते हैं। उन्होंने कहा कि विचित्र बात है कि अलगाववादियों के एक वर्ग के कारण इस यात्रा की अवधि घटाई जा रही है। इस अवधि को घटाने के पीछे सुरक्षा का कारण बताया जाता है। जेटली ने कहा कि 1950 के दशक में यह यात्रा चार माह चलती थी। 2010 में यह घट कर महज 54 दिन, 2011 में 44 दिन ही रह गई।

उन्होंने कहा कि इस साल इसे घटा कर 39 दिन करने की बात है। जेटली ने कहा कि आतंकवादियों ने इस तीर्थ यात्रा पर हमला किया था और कुछ लोगों की जान गई थी। लेकिन अब राज्य में आतंकवाद का खतरा उतना अधिक नहीं है। सुरक्षा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है इसलिए सरकार को यात्रा को उसकी पूरी अवधि में निकालने की कोशिश करनी चाहिए।

जेटली ने मांग की कि सरकार को इस मामले में बयान देना चाहिए। भाजपा के ही एम वेंकैया नायडू ने सदन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी के बैठे होने की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि यह लाखों लोगों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। प्रधानमंत्री को इस मामले में जवाब देना चाहिए। इस पर भाजपा के सदस्यों ने अपने स्थानों पर खड़े हो कर इस बात की मांग शुरू कर दी कि सरकार को जवाब देना चाहिए। सदस्यों को शांत कराते हुए पीठासीन अध्यक्ष पी जे कुरियन ने कहा कि वह आसन से सरकार को जवाब देने का निर्देश नहीं दे सकते।

पार्टी में कोई अनबन या मतभेद नहीं - भाजपा

रेड्डी बंधुओं के मुद्दे पर सुषमा स्वराज के बयान से उपजे विवाद को देखते हुए भाजपा ने रविवार को कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी में कोई अनबन नहीं है।सुषमा और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बीच कथित मतभेद के बारे में पूछने पर भाजपा की प्रवक्ता निर्मला सीतारमन ने कहा, 'पार्टी में कोई अनबन या मतभेद भी नहीं है।'

भाजपा
अध्यक्ष नितिन गडकरी ने शनिवार को बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि कर्नाटक में मंत्रियों के चुनाव पर मीडिया में चल रहा विवाद बिल्कुल अनावश्यक है।भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी. एस. येद्दयुरप्पा ने विवादास्पद रेड्डी बंधुओं को प्रदेश मंत्रिमंडल में शामिल करने की अपनी जिम्मेदारी लेने का दावा किया।

जबकि
लोकसभा में भाजपा की नेता सुषमा स्वराज इस प्रकरण से खुद को अलग कर रखा है।माना जाता है कि सुषमा रेड्डी बंधुओं की करीबी हैं। पिछले हफ्ते उन्होंने कहा कि खनन उद्योगपति जनार्दन रेड्डी और करुणाकर रेड्डी को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला अरुण जेटली, येद्दयुरप्पा, एम. वेंकैया नायडु और अनंत कुमार का था।

उनकी
इस टिप्पणी से भाजपा की दूसरी पीढ़ी के नेताओं में मतभेद बढ़ गए थे। जिसके बाद राजनाथ सिंह और येद्दयुरप्पा को रेड्डी बंधुओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने की जिम्मेदारी लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सांप्रदायिक हिंसा पर नए बिल के अनुसार दंगों के लिए हमेशा हिन्दू जिम्मेदार

भारतीय जनता पार्टी ने सांप्रदायिक और लक्षित हिंसा के खिलाफ लाए जाने वाले बिल की कड़ी आलोचना की है. बीजेपी का कहना है कि यह बिल राज्यों के संघीय अधिकारों के खिलाफ है जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.

बीजेपी
के मुताबिक सांप्रदायिक हिंसा और लक्षित हिंसा के लिए इस बिल में बहुसंख्यक समुदाय को ही जिम्मेदार माना गया है. राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने अंदेशा जताया कि इस बिल को सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद ने तैयार किया है. "ऐसा लगता है कि इस बिल का मसौदा उन लोगों ने तैयार किया है जिन्होंने गुजरात दंगों से सीखा है कि कैसे वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जाए, भले ही दंगों के लिए वे जिम्मेदार न हों.

ड्राफ्ट
बिल मान कर चलता है कि सांप्रदायिक हिंसा के लिए हमेशा बहुसंख्यक समुदाय जिम्मेदार होता है और अल्पसंख्यक समुदाय इसकी शुरुआत नहीं करता."जेटली ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस बिल में बहुसंख्यकों के खिलाफ अल्पसंख्यक समुदाय के अपराधों को अपराध नहीं माना गया है.

किसी
के साथ यौन दुर्व्यवहार का मामला इस बिल के मुताबिक तभी दंडनीय होगा, अगर वह किसी अल्पसंख्यक के खिलाफ किया गया हो. वह कहते हैं, "संगठित और लक्षित हिंसा, नफरत और दुष्प्रचार, अपराध करने वाले जेटली ने उठाए सवालव्यक्ति की वित्तीय मदद तभी अपराध माने जाएंगे अगर उन्हें किसी अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति के खिलाफ किया गया हो.

बहुसंख्यक
समुदाय का व्यक्ति खुद को पीड़ित नहीं बता सकता."जेटली ने जोर देकर कहा कि सांप्रदायिक हिंसा कानून और व्यवस्था की दिक्कत है और इसमें कार्रवाई का दायरा राज्य सरकार ही तय करती है. वह मानते हैं, "केंद्र और राज्य में ताकत के विभाजन के बाद केंद्र सरकार के पास राज्य में कानून व्यवस्था में सीधे दखल देने का अधिकार नहीं है."

जेटली
ने आशंका जताई कि अगर इस तरह का कानून लागू होता है तो केंद्र राज्य सरकार का अधिकार छीन लेगा.सांप्रदायिक सदभाव और न्याय के लिए गठित होने वाली सात सदस्यीय समिति पर भी जेटली ने सवाल उठाए. "इन सात सदस्यों में से चार सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से होंगे. इनमें चेयरमैन और वाइस चेयरमैन शामिल हैं. ऐसी ही संस्था राज्य में बनाए जाने का प्रस्ताव है. इस तरह संस्था की सदस्यता धार्मिक और जातीय आधार पर तय होगी."

उमर की कूटनीति :गणतंत्र दिवस समारोह में आने का न्यौता दिया

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार रात अपना कुटनीतिक कदम उठाते हुए, भाजपा के नेता अरुण जेटली को फोन कर पार्टी नेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह में आने का न्यौता दिया है.

उमर के इस कदम से पहले श्रीनगर की ओर से कूच कर रही भाजपा की तिरंगा यात्रा को पंजाब-जम्मू सीमा पर रोक दिया गया. मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भाजपा नेताओं को गणतंत्र दिवस समारोह में शिरकत करने के लिए श्रीनगर या जम्मू आने का निमंत्रण दिया है.

उन्होंने कहा, ‘भाजपा नेताओं के गणतंत्र दिवस समारोह में आने पर उनका स्वागत किया जाएगा.’

भाजपा के दवाब पर झुकी सरकार, गिलानी पर दर्ज होगा मुकदमा

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अलगावादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी और कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए दिल्ली पुलिस को हरी झंडी दे दी है। गिलानी ने इस सप्ताह की शुरुआत में एक सेमिनार में कथित तौर पर 'नफरत फैलाने वाला भाषण' दिया था।

मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि विधि विभाग से मिले परामर्श में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया गिलानी और अन्य के खिलाफ ऐसे वक्तव्य देने का मामला दर्ज किया जा सकता है, जो लोगों के बीच फूट डालने की कोशिश की तरह हो। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली पुलिस से कहा गया है कि वह गिलानी के खिलाफ मामला दर्ज करे और पुलिस संभवत: जल्दी ही मामला दर्ज कर ले। वहीं जम्मू-कश्मीर के तीनों वार्ताकारों का बहिष्कार करने की अपील करने वाले गिलानी रविवार को कश्मीर लौट गए। नई दिल्ली में गिलानी के भाषण के बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई थी।

भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा था कि ऐसा भाषण अस्वीकार्य है। क्योंकि किसी को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ऐसा अधिकार नहीं है, जो देश को तोड़ने वाली हो। उन्होंने कहा था कि यह देश के खिलाफ एक अपराध है। वहीं भाजपा नेता के आरोपों पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि गिलानी ने जो भाषण दिया है, दिल्ली पुलिस उसमें कानून के मुताबिक कार्रवाई करेगी। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा पता चलता है कि कानून का उल्लंघन हुआ है, तो दिल्ली पुलिस कानूनन कार्रवाई करेगी।

स्वतंत्रता के नाम पर देशद्रोह का प्रसार करने की छूट नहीं दी जा सकती : भाजपा

कश्मीर कीआज़ादीके विषय पर कल राष्ट्रीय राजधानी में हुई विचार गोष्ठी की कड़ी आलोचना करते हुए भाजपा ने आज कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसी हरकतें अस्वीकार्य हैं और केन्द्र आंख मूंदने की बजाय दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करे।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने कहा, ‘‘सरकार की नाक के नीचे दिल्ली में कल अलगाववादी समूहों का एकत्र होकर देशद्रोह का प्रसार करने से राष्ट्र सकते में है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश से अलग होने के अधिकार को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।’’ उन्होंने कहा संविधान में दिए भाषण की स्वतंत्रता के अधिकार को देश के खिलाफ प्रयोग नहीं किया जा सकता है।

ऐसा करने वालो के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए संप्रग सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह देशद्रोह का प्रसार करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई करके उन्हें दंडित करे।

यहां कल ‘‘आज़ादी--एकमात्र रास्ता’’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में अलगाववादी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी सहित कई अलगाववादियों के अलावा नक्सलवाद और खालिस्तान के समर्थक मौजूद थे।

आयोग के हवाले हो सासंदो की वेतन वृद्धि - आडवाणी

अमूमन सभी राजनीतिक दल के सांसदों का दबाव देखते हुए केंद्र सरकार भले ही इस बार वेतन बढ़ोतरी का फैसला संसदीय समिति की सलाह पर कर रही हो, लेकिन भविष्य में खुद को इस विवाद से दूर रखने की कवायद भी शीर्ष स्तर पर शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष और प्रमुख विपक्षी दल इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि आगे से सांसदों के वेतन-भत्ते बढ़ाने का फैसला कोई आयोग या अधिकारप्राप्त समूह करे तो बेहतर होगा। भारतीय जनता पार्टी की ओर से खुद शीर्ष नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस तरह की पहल की है।

सूत्रों के मुताबिक आडवाणी ने गृह मंत्री पी चिदंबरम से बातचीत के दौरान अपने इस मत से अवगत करा दिया था कि भविष्य में वेतन बढ़ाने का फैसला एक आयोग बनाकर उसके सुपुर्द कर दिया जाए, जिसे कानूनी अधिकार हासिल हो। उन्होंने अपनी राय से लोकसभा में सदन के नेता और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को अवगत कराया है। भाजपा नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली ने भी इसी तरह का मत जाहिर करते हुए स्पष्ट किया है कि सांसदों को आम कर्मचारियों की तरह अपने वेतन के लिए हो-हल्ला मचाना ठीक नहीं है। लिहाजा बेहतर होगा कि इस प्रक्रिया को सूचकांक से जोड़ दिया जाए।

वहीं कांग्रेस की ओर से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई मंत्री भी खुद से वेतन बढ़ाने का फैसला करने की मुखालफत कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय सूचना-प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी, पी चिदंबरम समेत कुछ मंत्री इस बात की पैरवी कर रहे हैं कि सांसदों के वेतन के बारे में खुद ही कोई फैसला करना ठीक नहीं है। कैबिनेट में मतभेद के चलते ही एक बैठक में वेतन बढ़ोतरी का फैसला नहीं हो पाया था। सूत्रों का कहना है कि सरकार के भीतर इस बात पर मंथन हो रहा है कि कोई ऐसा रास्ता तलाशा जाए जिससे खुद को तोहमत से बचाया जा सके। सूत्रों के मुताबिक वेतन बढ़ाने संबंधी विधेयक संसद में पेश करते समय सरकार भविष्य में इस तरह के फैसले की प्रक्रिया के बारे में भी ठोस फैसले की घोषणा कर सकती है।

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