ताज़ा समाचार (Fresh News)

वरुण गाँधी ने गयाजी में अपने पूर्वजो का पिंडदान किया

मोक्ष धाम गयाजी में भाजपा सांसद वरुण गांधी ने गुरुवार को अपने पूर्वजों का  विधिपूर्वक पिंडदान किया।

विष्णुपद क्षेत्र में उनके आगमन को लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। लगभग छह घंटे तक क्षेत्र की विभिन्न पिंडवेदियों पर जाकर वरुण ने पूर्वजों के नामित पिंड को अर्पित किया। बाद में उन्होंने गया में अपने पिता संजय गांधी की स्मृति में एक धर्मशाला बनवाने की घोषणा की।

विशेष विमान से वरुण गांधी प्रात : साढ़े आठ बजे बिहार के गया पहुंचे। विष्णुपद मंदिर में गुरुवार को निर्जला एकादशी को लेकर काफी भीड़भाड़ थी। मुख्य मंदिर से सटे बालाजी हनुमान मंदिर में पिंडदान की व्यवस्था की गई थी। 11 पुरोहितों के साथ मुख्य आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री के नेतृत्व में कर्मकांड कराया गया।

वरुण गांधी ने पितृदोष निवारण के लिए सर्वप्रथम नारायणबली श्राद्ध और त्रिपिंडी श्राद्ध किया, जिसे बाद में गया कूप में जाकर विसर्जित किया। तदोपरांत गया श्राद्ध का कर्म किया गया। बाद में गया तीर्थ के गयापाल पंडा महेश लाल हल द्वारा उन्हें सुफल दिया गया।

भ्रष्टाचार में लिप्त कमला बेनीवाल को हटाने हेतू राष्ट्रपति को ज्ञापन

भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष नितिन गडकरी के नेतृत्व में बुधवार को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील से मुलाकात की और भ्रष्टाचार में संलिप्तता के लिए गुजरात की राज्यपाल कमला बेनीवाल को हटाए जाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमन, सांसद बलबीर पुंज, भूपेंद्र यादव और अर्जुन मेघवाल तथा पार्टी सचिव किरीट सोमैया के अलावा गुजरात के कुछ नेता शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा और इस मुद्दे पर निष्क्रियता दिखाने के लिए राजस्थान सरकार से सवाल करने का भी आग्रह किया।

भाजपा ने 1,000 करोड़ रुपये के एक भूमि घोटाले का आरोप लगाया है और राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर कुछ कांग्रेसी नेताओं को जयपुर में विकसित भूखण्ड भेट करने का आरोप लगाया है। इन नेताओं में बेनीवाल को भी शामिल बताया गया है। बेनीवाल राजस्थान की मूल निवासी हैं, और राज्य में कांग्रेस की कई सरकारों में मंत्री रह चुकी हैं।

इस घोटाले का खुलासा जयपुर में को-ऑपरेटिव सोसायटीज के रजिस्ट्रार द्वारा एक आदेश पारित करने के बाद प्रकाश में आया है।

भाजपा के ज्ञापन में कहा गया है, "इस आदेश ने कुछ अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों को बेनकाब कर दिया है, जिन्होंने गलत तरीके से 1,000 करोड़ रुपये कीमत के सरकारी भूखण्ड हथिया लिए हैं। दुर्भाग्यवश आदेश में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उसमें गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल भी शामिल हैं।"

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद गडकरी ने संवाददाताओं से कहा, "बेनीवाल जबतक राज्यपाल के पद पर बरकरार हैं, राजस्थान सरकार उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज नहीं कर सकती। भाजपा ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वह कमला बेनीवाल को गुजरात के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने का निर्देश दें।"

ई का .. बिहार में गुटखा पर बैन लगा

बिहार में आज आधी रात से तम्बाखू युक्त गुटखे की बिक्री बंद कर दी जायेंगी. और इसकी  खरीद-बिक्री पर तीन लाख का जुर्माना व एक साल का कारावास दिया जाएगा.

राज्य सरकार ने विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर सूबे में तंबाकूयुक्त पान मसाले (गुटखा) की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया. अब अगर कोई भी व्यक्ति इसकी खरीद-बिक्री करते पाया गया, तो उसे तीन लाख का जुर्माना व एक साल का कारावास हो सकता है.

खाद्य सुरक्षा आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के सचिव संजय कुमार ने बुधवार की दोपहर इसकी अधिसूचना जारी कर दी. फिलहाल यह प्रतिबंध एक साल के लिए लगाया गया है. केरल और मध्य प्रदेश के बाद तंबाकूयुक्त पान मसाले पर प्रतिबंध लगानेवाला बिहार तीसरा राज्य बन गया है.

श्री कुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड (प्रोहिबीशन एंड रिस्ट्रिक्शंस ऑन सेल्स) रेगुलेशन, 2011 के तहत प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है. इसके तहत खाद्य सुरक्षा आयुक्त को यह अधिकार है कि वह ऐसे उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा सके.

तंबाकू युक्त पान मसाला खाद्य के अंतर्गत आते हैं. ऐसे उत्पादों से युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य को सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है. तंबाकूयुक्त पान मसाले की बिक्री से सरकार को होनेवाले राजस्व की हानि से संबंधित सवाल पर उन्होंने कहा कि हर चीज को राजस्व से जोड़ कर देखना ठीक नहीं है.

राजस्व से अधिक युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य को सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिकता है. खाद्य सुरक्षा आयुक्त को जन स्वास्थ्य को देखते हुए सूबे में एक वर्ष तक प्रतिबंध लगाने का अधिकार है. इससे पहले अप्रैल में मध्यप्रदेश में व इसी माह केरल में इस पर प्रतिबंध लगाया गया था.

मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है. महावीर कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ जीतेंद्र सिंह ने बताया कि बिहार में कुल कैंसर रोगियों की संख्या दो लाख है. इनमें एक लाख 10 हजार महिला कैंसर रोगी हैं, जबकि 90 हजार पुरुष.

सूबे में वर्तमान में 40-45 हजार मुंह के कैंसर के रोगी हैं. वहीं, कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ आरके गोस्वामी ने बताया कि सूबे में कैंसर रोगियों का वास्तविक आधिकारिक आंकड़ा नहीं है. एक अनुमान के अनुसार बिहार में मुंह के कैंसर रोगियों की संख्या 80 हजार होगी. मुंह के कैंसर मरीज के इलाज में औसतन 60-70 हजार रुपये खर्च होता है.

डॉ दिवाकर तेजस्वी ने बताया कि तंबाकू के उपयोग का स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है. मुंह व दांत सीधे प्रभावित होते हैं. साथ ही आंख, कान, फेफड़ा, मस्तिष्क व हृदय इससे गहरे रूप से प्रभावित होते हैं. कैंसर की रोकथाम के लिए तंबाकू नियंत्रण जरूरी है.’

* 90 फीसदी उत्पाद यूपी से सप्लाइ होता है, कानपुर है प्रमुख आपूर्ति केंद्र
* बिहार में 2500 करोड़ रुपये के तंबाकू उत्पादों की होती है बिक्री
* मध्य प्रदेश व केरल के बाद गुटखे पर प्रतिबंध लगाने वाला बिहार तीसरा राज्य
* फूड सेफ्टी एक्ट के तहत कार्रवाई, तंबाकू पर प्रतिबंध नहीं

भारत में जल्द लागू हो रही है मुफ्त रोमिंग सुविधा

31 मई 2012 को हुई कैबिनेट की बैठक में नई टेलीकॉम नीति पर मुहर लग गई। इस नीति पर मुहर लगने से 930 मिलियन मोबाइल ग्राहकों को फायदा होगा। नई नीति के तहत मोबाइल उपभोक्ता के दूसरे राज्य में जाने पर अपना ऑपरेटर चेंज करा सकेंगे लेकिन उनका नंबर वही रहेगा। 

साथ ही मोबाइल उपभोक्ता बिना रोमिंग चार्ज के देश भर में यात्रा कर सकेंगे। मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के तहत मोबाइल उपभोक्ता एक सर्किल में ही अपना ऑपरेटर चेंज कर सकता है। अगर वह एक राज्य से दूरसे राज्य में जाता है तो उसे एमएनपी का फायदा नहीं मिलता लेकिन नई नीति के तहत मोबाइल उपभोक्ता के एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर भी एमएनपी का फायदा उठा सकेंगे।

एनडीए के भारत बंद को अन्ना ने भी समर्थन दिया

पेट्रोल की कीमतों में साढ़े सात रुपये की ऐतिहासिक बढ़ोतरी के विरोध में एनडीए ने गुरुवार को भारत बंद का ऐलान किया है। बंद को कई राजनीतिक पार्टियों ने भी समर्थन दिया है। राजनीतिक पार्टियों के अलावा समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी इस बंद को अपना समर्थन दिया हैं। राजनीतिक पार्टियों के इस बंद और जनता का गुस्सा देखते हुए सभी राज्यों में सुरक्षा के इंतजाम चाक-चौबंद कर दिए गए हैं।

मुंबई और महाराष्ट्र में शिवसेना ने बंद का समर्थन किया है। शिवसेना नेता पहले ही साफ कर चुके है कि जनता भड़क चुकी है और आंदोलन तीव्र हो सकता है। लिहाजा महाराष्ट्र सरकार ने इस बंद को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। अगर आंदोलन हिंसा पर उतर आए तो उसपर तुरंत कार्रवाई करने के लिए राज्य पुलिस ने रैपिड एक्शन फोर्स (आरपीएफ) और एसआरपी की कंपनियों को अलर्ट पर रखा है।

महंगाई की मार झेल रही जनता पेट्रोल के बढ़े दामों से भड़की हुई है, लेकिन ट्रेड यूनियनों ने इसमें शामिल न होने का फैसला लिया है। मुंबई में रोजमर्रा के काम पर जाने वाले लोगों को परेशानी न हो इसलिए रिक्शा और टैक्सी यूनियनों ने बंद को समर्थन न करने का फैसला किया है।

बंद के दौरान काग्रेस करा सकती है प्रदेश में हिंसा - प्रभात झा

मध्य प्रदेश भाजपा ने आशंका जताई है कि पेट्रोल मूल्य वृद्धि के खिलाफ राजग के भारत बंद के आह्वान के दौरान गुरूवार को राज्य में कांग्रेस हिंसा की घटनाएं करा सकती हैं। 

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा ने बुधवार को कहा कि उन्हें पुख्ता सूचना मिली है कि कांग्रेस भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर आदि प्रमुख शहरों में हिंसा फैलाने की साजिश रच रही है। कांग्रेस कार्यकर्ता विहिप, बजरंग दल और शिवसेना को बदनाम करने के लिए उनकी तरह जयश्री राम की टोपियां डालकर उपद्रव मचा सकते हैं। झा ने सूचना के स्त्रोत का खुलासा करने से मना कर दिया।

उन्होंने प्रदेश सरकार को इससे अवगत करा दिया है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं को भी आगाह किया है कि वे कांग्रेस के ऎसे उपद्रवियों की पहचान कर पुलिस के हवाले कर दें। 

झा ने कहा कि इसी तरह आवश्यक सेवाओं, परीक्षाएं, अस्पताल, पहले से तय सामाजिक कार्यक्रम को भी बंद से मुक्त रखा गया है। यदि किसी मरीज को कोई तकलीफ है तो वह सीधे भाजपा कार्यालय भी फोन लगा सकता है। उसकी मदद की जाएगी।

साथ ही झा ने पार्टी के सभी जिलाध्यक्ष को निर्देश दिए कि 31 मई को गेहूं खरीदी की अंतिम तारीख होने से किसानों के ट्रैक्टर ट्रॉली व गेहूं के वाहनों को नहीं रोका जाए। 

करूणानिधि ने एक बार फिर थूक कर चाटा

पेट्रोल की कीमतों में एक मुश्त 7.30 रूपए की बढ़ोतरी को लेकर केन्द्र की यूपीए सरकार से समर्थन वापसी की धमकी देने वाले डीएमके प्रमुख एम करूणानिधि अपने बयान से पलट गए हैं। करूणानिधि ने कहा कि उन्होंने कभी सरकार से समर्थन वापसी की धमकी नहीं दी। करूणानिधि ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि पार्टी सरकार से बाहर हो जाएगी। 

हमने सिर्फ पूर्व की बात की थी जब केन्द्र ने हमारी बात नहीं सुनी और हमने समर्थन वापस ले लिया था। मीडिया ने तोड़ मरोड़कर बयान को पेश किया है। हमने कभी यह शर्त नहीं रखी कि सरकार पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी के फैसले को वापस नहीं लेगी तो समर्थन वापस ले लेंगे। अगर हमने समर्थन वापस ले लिया तो सरकार कमजोर हो जाएगी। हमारी कोई ऎसी इच्छा नहीं है। मैं सुन रहा हूं कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह लोगों के कल्याण के लिए काम करना चाहते हैं। वे आम आदमी की समस्याओं के बारे में सोचते हैं। 

पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ चेन्नई में आयोजित रैली के दौरान करूणानिधि ने कहा कि अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। सरकार हमें मजबूर न करें। करूणानिधि ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी गठबंधन सरकारों का हिस्सा रही है। भाजपा और वीपी सिंह की सरकार को डीएमके ने सहयोग दिया था। हम यूपीए सरकार के हिस्से हैं लेकिन हम आम लोगों के खिलाफ नीतियों का विरोध करने से नहीं हिचकेंगे। 

जहां तक संभव होगा हम सरकार से अलग होने की कोशिश करेंगे। हालांकि अभी यह संभव नहीं हैं। हमें उम्मीद है कि केन्द्र और राज्य सरकार उस हद तक जाने के लिए मजबूर नहीं करेगी। करूणानिधि ने कहा कि केन्द्र और तमिलनाडु सरकार को स्वेच्छा से लोगों को राहत देने के लिए टैक्स कम करने चाहिए ताकि आम आदमी पर कोई बोझ न पड़े।

शर्मनाक : गौ मांस निर्यात में भारत एक नंबर पर

भारत में बड़ी तादाद में लोग गाय को पवित्र मानते हैं। लेकिन आप यह जानकर हैरान हो सकते हैं कि 2012 में भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा गोमांस निर्यात करने वाला देश बन जाएगा।
 
यूएसडीए की विदेशी कृषि सेवा के आंकड़े के मुताबिक इस साल के अंत तक भारत ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए 15 लाख मीट्रिक टन गोमांस का निर्यात करेगा। जानकारों के मुताबिक भारत से गोमांस के निर्यात के आंकड़े में तीन सालों में जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। तीन साल पहले भारत ने 6.5 लाख मीट्रिक टन से भी कम गोमांस का निर्यात किया था।
 
भारत में वैसे तो गाय और दूध देने वाली भैंसों के काटने और उनके मांस की बिक्री पर प्रतिबंध है। यूएसडीए के मुताबिक भारत में बैल और भैंसे के मांस का बड़े पैमाने पर निर्यात हो रहा है। यूएसडीए बैल और भैंसे के मांस को भी गोमांस की श्रेणी में रखता है जो मध्य पूर्व, उत्तर अफ्रीका और दक्षिण पूर्वी एशिया में बड़ी संख्या में मांसाहारी लोगों की जरूरतें पूरी करता है।

गंगा रक्षा आंदोलन के स्वामी सानंद गुपचुप तरीके से श्रीनगर पहुचें

पुलिस और खुफिया एजेंसियों को धता बताते हुए गंगा पर बन रहें बांधों का विरोध करने वाले स्वामी सानंद गुपचुप तरीके से श्रीनगर पहुंच गए। फिलहाल वह लक्ष्यमोली में हैं। वह सोमवार से ही दिल्ली के एम्स अस्पताल से गायब हो गए थे। उनके गायब होने की सूचना के बाद उन्हें तलाशने में पुलिस और प्रशासन के पसीने छूट गए थे।

गंगा रक्षा आंदोलन को आगे बढ़ाने वाले स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद सोमवार से ही दिल्ली के एम्स अस्पताल से लापता थे। उन्हें पुलिस ने जोशीमठ जाते समय गिरफ्तार कर दिल्ली भेजा था। बताया जा रहा है कि दिल्ली एम्स से वे रात दो बजे निकले थे, तबसे उनका उनका कोई पता नहीं चल पा रहा था। उनके परिजनों व करीबियों को भी इस बात की जानकारी नहीं थी कि वे कहां हैं। दिल्ली पुलिस ने भी इस संबंध में किसी जानकारी से इन्कार किया है।

सोमवार को वे गंगा और अन्य नदियों के पानी के वैज्ञानिक परीक्षण कि लिए जोशीमठ रवाना हुए थे। लेकिन उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर दिल्ली के एम्स भेजा था। मंगलवार को पूरे दिन पुलिस उनकी लोकेशन तलाशने में जुटी रही, लेकिन उनका पता नहीं चला।

उनके सहयोगी अर्जुन यादव और साथ यात्रा पर जा रहे पवित्र सिंह, दोनों के फोन भी बंद मिले। पुलिस को सुबह 11 बजे के करीब उनकी आखिरी लोकेशन दिल्ली में मिली थी। जोशीमठ जाने की जिद ठाने स्वामी सानंद के इस तरह गायब होने से उत्तराखंड पुलिस के लिए मुसीबत पैदा हो गई है।

एम्स प्रवक्ता डॉक्टर वाईके गुप्ता का कहना है कि हमें जानकारी मिली है कि वे सोमवार रात लगभग ढाई बजे मेडिकल एडवाइस के बिना ही अस्पताल से चले गए। इस बारे में स्वामी सानंद के गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी स्वामी सानंद को लेकर चिंता व्यक्त की थी। दिल्ली पुलिस के एडिशनल डीसीपी पीएस कुशवाहा का कहना है कि पुलिस को स्वामी सांनद के एम्स में भर्ती होने की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी।

उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि स्वामी सांनद के जोशीमठ जाने पर वहां की शांति व्यवस्था के साथ-साथ उनकी जान को भी खतरा है। पुलिस को अब इस बात की चिंता है कि अगर स्वामी सानंद जोशीमठ या अलकनंदा घाटी पहुंच गए तो क्या होगा? क्योंकि स्वामी सानंद श्रीनगर परियोजना का काम न रोके जाने पर अलकनंदा नदी में कूद कर जान देने की बात कह चुके हैं। इन बातों के मद्देनजर स्वामी सानंद की खोज में गुप्तचर एजेंसियों सहित पुलिस की कई टीमें लगा दी गई हैं।

देश का हर क्रिकेटर बीसीसीआई के प्रति जवाबदेह नहीं - कपिल देव

भारत के लिए पहला विश्वकप जीतने वाली टीम के कप्तान कपिलदेव ने कहा है कि देश का हर क्रिकेटर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रति जवाबदेह नहीं है और बोर्ड उसकी नीतियों से हटकर चलने वाले क्रिकेटर से कोई सवाल नहीं पूछ सकता है।

बीसीसीआई ने हाल में जिन खिलाडियों को एकमुश्त भुगतान के लिए चुना था, उनमें कपिलदेव को शामिल नहीं किया गया था1 माना जा रहा है कि कपिलदेव को अब अपना अस्तित्व खो चुकी बागी इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) से जुडने का नुकसान उठाना पड़ा है।

कपिलदेव ने एक अखबार में अपने स्तंभ में लिखा 'बोर्ड को यह समझना चाहिए उसके द्वारा अनुबंधित पूर्व या मौजूदा क्रिकेटर या उससे वेतन पाने वाले लोग जैसे चयनकर्ता और कोच ही उसके प्रति जवाबदेह हैं। देश का हर क्रिकेटर बोर्ड के प्रति जवाबदेह नहीं है। 

उन्होंने कहा आप किसी खिलाड़ी से उसका अधिकार नहीं छीन सकते हो जो कि उसे देश के लिए खेलने के लिए दिया जा रहा हो। अगर आप स्वर्गीय नवाब पटौदी, सुनील गावस्कर या रवि शास्त्री की तरह बोर्ड से पैसे ले रहे हों तो यह उसका अधिकार है कि वह आपसे सवाल जवाब करे लेकिन दिलीप वेंगसरकर बोर्ड के प्रति जवाबदेह नहीं हैं क्योंकि उन्हें बोर्ड से कोई पैसा नहीं मिल रहा है।

बागी आईसीएल से जुडने का जिक्र करते हुए कपिल ने कहा कि वह खेल को बढ़ावा देने के लिए इस लीग से जुडे थे। उन्होंने कहा अगर वे मेरे खेल को मान्यता नहीं देना चाहते हैं तो उन्हें धन्यवाद कहकर आगे बढ जाऊंगा। मैं आईसीएल से इसलिए जुडा था क्योंकि अगर कोई मुझे कोई काम देता है तो मैं उसे करना पसंद करूंगा। खासकर जब यह खेल को बढ़ावा देने से जुडा मामला हो। 

उन्होंने कहा बोर्ड जो कर रहा है और मैंने जो किया उसमें एक बात समान है और वह है खेल को बढावा देना। अगर ऐसा करके मैंने किसी का दिल दु:खाया है तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं। मैं यही कह सकता हूं कि मेरा मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था लेकिन अगर इसे इस तरह लिया गया तो यह अच्छी बात नहीं है। 

बीसीसीआई ने कपिलदेव के साथ-साथ 1983 में विश्वकप जीतने वाली टीम के उनके सहयोगी कीर्ति आजाद को भी एकमुश्त भुगतान पाने वाले खिलाड़ियों की सूची में जगह नहीं दी। कीर्ति ने आईपीएल से जुड़े विवादों को संसद में जोरशोर से उठाया था। कपिल ने कहा कि बोर्ड को कीर्ति से बात करनी चाहिए थी और उनका पक्ष सुनकर मामले को सुलझाना चाहिए था।

कपिल ने कहा कीर्ति भारतीय टीम के खिलाड़ी रहे और अब संसद सदस्य हैं। बीसीसीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि वह संसद में उसकी आवाज बनें। यह बोर्ड की ड्यूटी थी कि वह इस बात को जानने की कोशिश करता कि कीर्ति ने आईपीएल के खिलाफ आवाज क्यों उठाई। मुझे कीर्ति, अजहर, सिद्धू और सचिन जैसे क्रिकेटरों के संसद में जाने पर गर्व है। बोर्ड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये खिलाड़ी देश की नीतियां बनाने वाली संसद में उसका पक्ष रखें।

पेट्रोल कीमतों में वृद्धि गलत - ए के एंटनी

पेट्रोल की कीमतों में की गई ऐतिहासिक बढ़ोतरी पर चौतरफा विरोध के बीच सरकार के भीतर असहमति के सुर सुनाई देने लगे हैं। रक्षा मंत्री एके एंटनी ने तो साफ तौर पर कह दिया है कि यह फैसला गलत था। निर्णय लेने से पहले सरकारी तेल कंपनियों को इसका औचित्य दिखाना चाहिए था।

2 जून को होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का समर्थन करने मंगलवार को केरल पहुंचे एंटनी ने यह जरूर कहा कि डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाने पर सरकार नहीं सोच रही है। रक्षा मंत्री इस दौरान मा‌र्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी [माकपा] पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा, केरल में पार्टी का एक धड़ा दुर्भाग्यवश अभी भी स्टालिन [सोवियत तानाशाह] को रोल मॉडल मानता है। उसके विचारों का अनुसरण करता है। जबकि पूरी दुनिया उसे नकार चुकी है।

सरकारी तेल कंपनियों ने बीते हफ्ते कच्चे तेल [क्रूड] और रुपये की गिरावट को कारण बताकर पेट्रोल के दामों में साढ़े सात रुपये की बढ़ोतरी की थी। सरकार पर इस मूल्यवृद्धि को वापस लेने का दबाव बढ़ रहा है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी इसके असर को कम करने के लिए राज्यों से गुहार लगाने की तैयारी कर रहे हैं। इस सिलसिले में वह राज्य के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखने का संकेत दे चुके हैं। पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी तेल कंपनियों के फैसले के समर्थन में खड़े हुए हैं। उन्होंने इस मूल्यवृद्धि को जायज ठहराया है।

राहुल गांधी का तथाकथित जादू पूरी तरह खत्म

कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी का तथाकथित करिश्मा खत्म हो चुका है। भारतीय युवा कांग्रेस की हालत को देखकर यही पता चल रहा है । राहुल गांधी की लाख कोशिशों के बावजूद युवा कांग्रेस को उतने नए सदस्य नहीं मिल रहे हैं जितने की उम्मीद की जा रही थी। गुजरात में नए सदस्यों की संख्या में एक तिहाई की गिरावट आई है। गौरतलब है कि गुजरात में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। 

झारखण्ड और तमिलनाडु में भी सदस्यों की संख्या काफी कम हुई है। राहुल गांधी ने पांच साल पहले युवा कांग्रेस की कमान संभाली थी। उन्होंने आंतरिक लोकतंत्र और राजनीतिक चरित्र में बदलाव की बातें कर काफी उम्मीदें जगाई थी लेकिन शायद उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। गुजरात में हालिया सदस्यता अभियान में सिर्फ 2.5 लाख सदस्य ही जोड़े जा सके जबकि 2010 में युवा कांग्रेस से 10 लाख सदस्य जुड़े थे। 

इसी तरह झारखण्ड में 2010 में युवा कांग्रेस से करीब 3.5 लाख नए सदस्य जुड़े थे। हाल ही में सदस्यता अभियान में सिर्फ 30 से 40 हजार नए सदस्य ही जोड़े जा सके। तमिलनाडु में 2010 में युवा कांग्रेस को 14 लाख नए सदस्य मिले थे लेकिन 23 अप्रेल से 23 मई तक राज्य में चलाए गए सदस्यता अभियान के दौरान सिर्फ 1.5 लाख सदस्य ही मिले। ये आंकड़े हुगली में 31 मई को होने वाली युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से ऎन पहले आए हैं।

संदेह के दायरे से दूर रहें प्रधानमंत्री - राजीव प्रताव रूडी

कोयला ब्लॉक आवंटन में आरोप साबित होने पर सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने संबंधी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान पर भाजपा ने कहा है कि शीर्ष पदों पर रहने वालों को संदेह के दायरे से दूर रहना चाहिए.

दूसरी ओर, टीम अन्ना ने अपने आरोपों पर प्रधानमंत्री से बिंदुवार जवाब देने को कहा है और इसे पूरी तरह से खारिज नहीं करने को कहा है.

भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताव रूडी ने कहा, ‘शीर्ष पदों पर रहने वालों को संदेह के दायरे से दूर होना चाहिए और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से भी हम यही अपेक्षा करते हैं.

राजीव प्रताव रूडी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि आखिरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुछ तो कहा.

टीम अन्ना के सदस्य प्रशांत भूषण ने कहा कि प्रधानमंत्री को आरोपों पर बिंदुवार जवाब देना चाहिए. एक और टीम अन्ना सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये आरोप सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नहीं लगाए हैं, बल्कि यह कैग रिपोर्ट का हिस्सा है.




यूपीए ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना की - आडवाणी

देश की प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ने के संबंध में विशेष समिति गठित करने के उच्चतम न्यायालय के आदेश के तीन महीने बाद भी ऐसा नहीं किए जाने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि इसके लिए संप्रग सरकार के विरूद्ध अदालत अवमानना की याचिका दायर की जानी चाहिए.

आडवाणी ने कहा, ‘शीर्ष अदालत का यह ऐतिहासिक फैसला आए तीन माह बीत चुके हैं. इसके बावजूद विशेष समिति गठित करने के उसके आदेश का पालन नहीं हुआ. अदालत की इस सलाह को नहीं मानने के लिए संप्रग सरकार के विरूद्ध अवमानना याचिका दायर करनी चाहिए.’

राजग के कार्यकारी अध्यक्ष ने अपने ताज़ा ब्लॉग में वाजपेयी सरकार की तीन बड़ी उपलब्धियों में देश की नदियों को आपस में जोड़ने की दिशा में पहल करने को प्रमुख बताया है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने और शांति स्थापित करने की पहल तथा देश भर में राजमार्गो तथा ग्रामीण सड़कों का जाल बिछाना राजग सरकार को दो अन्य बड़ी उपलब्धियां हैं.

आडवाणी ने कहा कि देश को सूखे और बाढ़ से निजात दिलाने के लिए राजग सरकार ने शिवसेना नेता सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में कार्यबल बनाया था.

उन्होंने कहा कि हाल ही में उनसे मुलाकात करने वाले प्रभु ने उन्हें बताया कि इस अति महत्वाकांक्षी योजना को मूर्त रूप देने की दिशा में आगे बढ़ते हुए वह 5000 से अधिक बैठकें कर चुके थे.

उनके अनुसार प्रभु ने उन्हें यह भी बताया कि उनके विशेषज्ञों के समूह को पूरा विश्वास था कि देश की नदियों को जोड़ने में होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए वे कम से कम पांच लाख 60 हजार करोड रूपए जुटाने में सफल होंगे.


Court Verdict will No Impact on State Quota for Muslims

The AP High Court quashing the 4.5 per cent reservation for minorities within the 27 per cent quota of the OBC has triggered apprehensions in the Muslims community about the status of the 4 per cent reservation extended to it by the state government. 

Wajid Ali Kamil, a senior advocate, said that the high court verdict would have no impact whatsoever on the reservation extended to the Muslims by the state government. "The two issues are different. One is related to the Centre and the other to the state. Therefore, there is no question of any setback and the direction to the central government will not affect the status of reservation in the state." 

Mohd Shafeequzaman, special chief secretary to the state government and director general of MCRIHRD, who has dealt with the subject in the past, agreed with Kamil. "The HC verdict does not appear to affect the state allotted quota since the issue is pending before the Supreme Courtfor the last about two years," he said. 

Academic-activist Syed Najiullah said that the Supreme Court is seized of the matter. "Since a lot of parties have impleaded in the case, the community need not be worried at this point of time," he said. 

The Supreme Court in 2010, in an interim order, stayed the judgment of AP High Court which had quashed the state order providing 4 per cent reservation to the socially and economically backward Muslims. The state government had extended benefits to 15 groups within the community. 

The state government had filed a Special Leave Petition in the apex court on 26 February 2010 against the high court judgement. After hearing the state government arguments, the then SCChief Justice K G Balakrishnan also referred the case to a five-judge constitutional bench. 

Since 2004, the AP government has been trying to provide reservations to the Muslim community, but its attempts have proved futile __ the HC quashed a government order of 2004, and another one in 2005.

Muslims Welcome Elimination of Haj Subsidy by SC

The Supreme Court direction to the Central government, for the gradual elimination of Haj subsidy within a period of 10 years should be welcomed by all Muslims with earnestness. Among the five pillars of Islam, Haj and Zakat are obligatory only for the rich Muslims. Therefore, there is no justification in the government’s giving of sops to the Haj pilgrims in the form of subsidy. 

However, the government should seriously contemplate upon implementing the suggestions made by Rajinder Sachar Committee and Ranganath Misra Commission – to bring a large majority of the Muslim community which is languishing with socio-economic backwardness into the national mainstream. 

The Muslims in the country have great expectations from the Supreme Court too. They expect the apex court to take cognisance of survey indices reflecting the Muslims’ backwardness – and give directions to the ruling class, for effecting suitable constitutional amendments in the Parliament for providing reservation for the community in the educational and employment spheres, as has been done to SC/ST and OBC communities.

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