संघ का अगला मिशन : एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान

एक कुआं, एक मंदिर और एक श्मशान.. अगले तीन सालों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी रणनीति बना ली है. संघ की यह रणनीति हिंदुओं के बीच जातिगत भेदभाव को खत्म करने के लिए है. इसके साथ ही संघ ने अपनी रणनीति में नॉर्थ ईस्ट को केंद्र में रखा है.

संघ ने रणनीति में दक्षिण भारत में अपने विस्तार और क्षेत्रीय भाषाओं को तरजीह देने के साथ विदेशी भाषाओं के विरोध को भी महत्ता दी है. नागपुर में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में ये सभी मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे.

इस सभा में संघ के 1,400 प्रतिनिधियों ने भगवा एजेंडे को आगे ले जाने मुद्दे पर चर्चा की. रविवार को खत्म हुई तीन दिवसीय बैठक में संघ ने दर्जनों राज्यों में कराए जातिगत सर्वे को भी सामने रखा.

आरएसएस के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कार्यकर्ताओं से जातिगत भेदभाव और इसको रोकने के उपायों पर प्रजेंटेशन बनाने को कहा है. कार्यकर्ताओं से आने वाले महीनों में सभी राज्यों में जनजागरण समितियों के जरिए अभियान चलाने को कहा गया है.

संघ के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'पिछले महीने संघ ने एक बैठक बुलाकर सभी संतों और मठों के प्रमुखों को छुआछूत और जातिगत भेदभाव रोकने को कहा है.' इसके अलावा आरएसएस ने उत्तराखंड के आदिवासियों को मुख्यधारा में लाने के लिए अभियान चलाया था.

दूसरी ओर एक सदस्य ने कहा कि आरएसएस नेताओं को बुद्धिस्ट दीक्षा भूमि पर सिर नवाते देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म के कार्यक्रमों में शिरकत करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है. आरएसएस के जनरल सेक्रेटरी सुरेश 'भैयाजी' जोशी ने कहा, 'यह दिखाता है कि समुदाय के लोगों में एक होने की भावना बढ़ी है.'

गौरतलब है कि इस बार आरएसएस की प्रतिनिधि सभा का प्रतीक चिन्ह नागालैंड की रानी गायदीनलियू थी, रानी ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ाई लड़ी और ईसाई धर्म में आदिवासियों के कन्वर्जन का विरोध किया. जाहिर यह नॉर्थ ईस्ट के बारे में आरएसएस के एजेंडे की प्राथमिकता को दर्शाता है.

उमर अब्दुल्ला के बयान पर मोहन भगवत का जोरदार हमला

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल को यह कहने के लिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर जोरदार हमला बोला कि जम्मू-कश्मीर चार मुद्दों पर भारतीय गणराज्य में ‘शामिल हुआ था और उसका विलय नहीं हुआ था.’

मोहन भागवत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हो चुका है और इसमें अब कोई परिवर्तन संभव नहीं है. भागवत ने कहा, ‘जम्मू-कश्मीर का विलय बाकी भारत से किसी राज्यारोहण संधि के चलते नहीं हुआ. कश्मीर प्राचीन काल से ही हमारा रहा है. विलय अपरिवर्तनीय और अटल है.’ उन्होंने यह बात रविवार शाम जम्‍मू के परेड ग्राउंड में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कही.

उन्होंने उमर का नाम लिये बिना उनके उस बयान की आलोचना की, जो उन्होंने यूरोपीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक में दिया था.

गौरतलब है कि उमर अब्‍दुल्‍ला ने हाल में आयोजित बैठक में कहा था, ‘जबकि बाकी सभी रियासत भारतीय गणराज्य में शामिल हुई और बाद में उनका विलय हो गया, जम्मू-कश्मीर केवल भारतीय गणराज्य में शामिल हुआ था और उसका विलय नहीं हुआ था. इसी के चलते हमारा एक विशेष दर्जा है, हमारा राज्य का अलग ध्वज है और संविधान है.’

हिन्दू भाव को भूलने से देश का विघटन हुआ - मोहन भागवत


संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि ‍हिन्दू भाव को भूलने से देश का विघटन हुआ। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है, जब-जब हमने इस भाव को भुलाया समाज में विपदा आई, धर्म संस्थान नष्ट हुए और हमने जमीन भी खोई।

इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एकत्रीकरण में संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था, उसके प्रति जीवन ‍जीने का प्रयास, मातृभूमि के प्रति अव्यभिचारी भक्ति, इन भावों को मिलकर जो भाव बनता है, उसे कहते हैं हिन्दू भाव। यह दुनिया में हिन्दुत्व भाव के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि हिन्दू भाव को भूलने से ही देश की अवनति हुई। इस भाव को भूलने के ‍कारण ही मुट्‍ठी भर बर्बर आक्रामणकारियों ने आकर हमारे गुणवान देश पर आक्रमण किया। हिन्दुओं में हिन्दुत्व को जगाना होगा। हिन्दुत्व के आधार पर समाज को जोड़ना होगा। उसे बल, नीति और वैभव संपन्न बनाना होगा।

भागवत ने कहा कि संघ किसी का विरोध नहीं करता। सार्वजनिक रूप से संघ का विरोध करने वालों के मन में भी संघ अच्छा है। उन्होंने कहा कि नेता, नारा, सरकार, पार्टी, सरकार, अवतार की प्रार्थना करने से काम नहीं होगा। हमें अपने लिए खुद काम करना पड़ेगा। राष्ट्र क्षेत्र के सभी क्षेत्र में स्वयंसेवक गए हैं और अच्छा कार्य किया है। संघ समाज, देश, दुनिया के विकास के लिए कार्य करता है।

भागवत ने कहा कि अपना समाज तो विविधताओं से भरा हुआ समाज है। भाषा अनेक हैं। खान-पान रीति-रिवाज अनेक हैं। देवी-देवता अनेक हैं और बढ़ते चले जा रहे हैं। नए-नए सृजित होते हैं, स्वीकृत हो जाते हैं। प्रांत अनेक हैं। ऊपर से देखने से लगता नहीं कि यह एक देश है, इतनी विवि‍धता है।

इसको जोड़ने का सूत्र क्या है? इसको जोड़ने का एक ही सूत्र हैं कि इन विविधताओं का सम्मान करते हुए एक-दूसरे के विकास में सहभागी बनें। भारत के प्राचीन काल से यह होता आ रहा है। हमारी संस्कृति ने हमें सिखाया कि विविधता में ही एकता है।

उन्होंने कहा कि एक से ही विविध बने हैं। विविधता के मूल में एकता देखो, तुम एकता देख लोगे तो तुम पूर्ण हो जाओगे। भागवत ने कहा कि खुद समर्थ बनो और निर्बलों की सहायता करो, खुद दोनों हाथों से कमाओ और फिर हजारों हाथों से जरूरतमंदों में उसे वितरित भी करो।

उन्होंने कहा कि संघ का काम पैसे से नहीं रुकता। समाज का काम करते हैं तो धन भी समाज ही देता है। संघ संपूर्ण समाज को संगठित करके चलता है। समाज को दोषहीन और व्यंग्यहीन बनाना होगा तभी भारत एक बार फिर विश्वगुरु बनेगा।

जेठमलानी और भागवत भी चाहते हैं कि मोदी ही बने प्रधानमंत्री


जानेमाने वकील और सांसद राम जेठमलानी ने एक बार फिर पीएम पद की दावेदारी के लिए मोदी के नाम को हवा दी है। बीजेपी से राज्यसभा सासंद और देश के जानेमाने वकील राम जेठमलानी ने कहा है कि आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) के मुखिया मोहन राव भागवत भी चाहते हैं कि 2014 आम चुनाव के लिए बीजेपी प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को घोषित करे।

जेठमलानी ने एक न्यूज चैनल के साथ बातचीत में कहा कि उनकी इस बारे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन राव भागवत से भी बातचीत हुई है और वह भी चाहते हैं कि मोदी को ही प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी की तरफ से उम्मीदवार होना चाहिए।

हालांकि इस मुद्दे पर आरएसएस ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। आरएसएस ने जेठमलानी के इस दावे पर कहा है कि यह जेठमलानी के अपने विचार है और इस बारे में भागवतजी ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है।

आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने अपने बयान में कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ बीजेपी के मामले में कभी दखल नहीं देता। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी की तरफ से कौन उम्मीदवार हो यह निर्णय पार्टी को स्वयं करना है।

चंद दिन पहले राम जेठमलानी ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी को पत्र लिखकर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की मांग की थी। उन्होंने इस बारे में गडकरी को खत भी लिखा और कहा कि बीजेपी में प्रधानमंत्री पद के लिए उनसे बेहतर कोई उम्मीदवार नहीं और पार्टी में इसपर चर्चा होनी चाहिए।

अखाड़ों का विघटन हिंदूवादी ताकतों को कमजोर कर रहा है - संघ


अखाड़ा परिषद में एकजुटता के लिए आरएसएस सक्रिय हो गया है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हरिद्वार में अखाड़ों के दोनों धड़ों के महंतों के साथ लंबी मंत्रणा की। प्रयाग कुंभ से पहले संघ अखाड़ों में एका के प्रयास में है क्योंकि उसका मानना है कि अखाड़ों का विघटन हिंदूवादी ताकतों को कमजोर कर रहा है। 

हरिद्वार कुंभ के बाद से ही अखाड़ा परिषद में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। वैरागी की तीन अणियों सहित संन्यासियों के जूना, अग्नि व आह्वान अखाड़े महंत ज्ञानदास के साथ हैं। महंत बलवंत सिंह की अध्यक्षता वाली अखाड़ा परिषद में बाकी संन्यासी अखाड़े, उदासीन व निर्मल संप्रदाय के अखाड़े शामिल हैं।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नीतीश सरकार को मोदी से बेहतर कहने के मामले में कहा कि आधारहीन बातों पर चर्चा करना बेमानी है। उन्होंने दोहराया कि फिलहाल उनका चुप रहना ही ठीक है। नीतीश सरकार पर उनके बयान को लेकर संघ की सफाई पर उनका कहना था कि 'जिसे जो कहना था, उसने कहा, मुझे जब कहने को कहा जाएगा, मैं तब कहूंगा'। भागवत  परमार्थ आश्रम में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।

शनिवार को अचानक हरिद्वार पहुंचे संघ प्रमुख मोहन भागवत रविवार को कई धर्माचार्यों से मिले। उन्होंने पूर्व गृहराज्य मंत्री और परमार्थ आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती से उनके आश्रम में मुलाकात की। स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने बताया कि चर्चा में संगठन को लेकर खास तौर पर विचार-विमर्श हुआ। भागवत ने सुबह शांतिकुंज पहुंचकर गायत्री परिवार के प्रमुख प्रणव पंड्या और शैल जीजी से मुलाकात की।

हिंदू विचारधारा वाला व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बने -बाल ठाकरे

संघ प्रमुख मोहन भागवत के बाद शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने भी अगले लोकसभा चुनाव में हिंदुत्वादी प्रधानमंत्री का समर्थन किया है। उनका यह समर्थन राजग के सहयोगी जदयू को नागवार गुजर सकता है। संप्रग की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी प्रणब मुखर्जी का समर्थन करने वाले ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखा है कि हिंदू विचारधारा को मानने वाला व्यक्ति ही देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए।

हाल ही में जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2014 के आम चुनाव में राजग की ओर से प्रधानमंत्री पद के लिए धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति की वकालत की थी। उनके इस बयान को नरेंद्र मोदी के विरोध के तौर पर लिया गया था। इसके बाद नीतीश को संघ और भाजपा की कड़ी प्रतिक्रिया झेलनी पड़ी थी। शिवसेना प्रमुख ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष शब्द गाली बन चुका है।


नीतीश कुमार खुद को हिंदू कहते हुए डरतें हैं - मोहन भागवत

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की पीएम पद की संभावित दावेदारी को लेकर बिहार के सीएम नीतीश की टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को नागवार गुजरी है। अब संघ सीधे मोदी के बचाव में उतर आया है। 

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नीतीश को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि देश का प्रधानमंत्री हिन्दुत्ववादी ही होना चाहिए। उन्होंने नीतीश के पीएम पद के लिए दिए गए सुझावों के बारे में उल्टे सवाल दागा कि क्या अब नीतीश बताएंगे कि पीएम कौन हो?, क्या अब तक के पीएम सेक्यूलर नहीं थे?। 

उन्होंने नीतीश को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्हें खुद को हिंदू कहते हुए डर लगता है। संघ प्रमुख के इस बयान के बाद एक बार फिर साफ हो गया है कि भाजपा में मोदी पावरफुल नेता के तौर पर कायम है, संघ की नजर में वे पीएम पद के लिए पहली पसंद हो सकते हैं। 

संघ के बयान के बाद जेडीयू की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। जेडीयू नेता शिवानंद तिवारी ने कहा कि गुजरात में गोधरा की हिंसा हम भूले नहीं है। गठबंधन रहे या न रहे, सरकार भले चली जाए कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन धर्मनिरपेक्षता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 2009 का चुनाव हम गुजरात हिंसा के कारण ही हारे। धर्मनिरपेक्षता नीतीश का नहीं बल्कि देश का सवाल है। मोदी की सरकार हट गई होती तो एनडीए जीत जाता।

संघ प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि सेक्यूलर और गैर सेक्यूलर को लेकर देश में लगातार भ्रांतिया फैलाई जाती रही है। नीतीश ने इसी को लेकर फिर बहस छेड दी है। क्या संघ नरेन्द्र मोदी साथ है सवाल के जवाब में राम माधव ने कहा कि संघ संचालक का बयान सभी स्वयंसेवकों के लिए है। इसका कोई भी अपने-अपने हिसाब से मतलब निकाल सकता है। उधर, जेडीयू के बयान के बाद भाजपा नेता बलबीर पुंज ने कहा कि नीतीश को यह नहीं भूलना चाहिए कि गुजरात हिंसा के बाद वे केन्द्र में गठबंधन सरकार में मंत्री थे। तब उन्होंने यह सब क्यों नहीं कहा, मंत्री क्यों बन गए।

मालूम हो कि नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी राजनीति और तल्ख बयानों ने मंगलवार को भाजपा गठबंधन के भीतर भूचाल ला दिया। जदयू की राज्य कार्यकारिणी की बैठक के बाद अब अंग्रेजी दैनिक को दिए साक्षात्कार में यह कहकर नीतीश ने भाजपा के अंदरूनी कश्मकश को गर्मी दे दी कि आगामी आम चुनाव में भाजपा को धर्मनिरपेक्ष छवि वाले नेता को प्रधानमंत्री पद का उमीदवार घोषित करना चाहिए। 

नीतीश ने यह भी कहा कि वे प्रधानमंत्री पद की रेस में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री बनने के बारे में सपने में भी नहीं सोचते। नीतीश कुमार के इस बयान के साथ आम चुनाव से बहुत पहले ही भाजपा गठबंधन में नेतृत्व को लेकर घमासान तेज हो गया है। संकेत इस बात के हैं कि प्रधानमंत्री पद के उमीदवार के लिए चर्चित नरेन्द्र मोदी की बढ़त कम करने वाले भाजपाइयों और दूसरे नेताओं के समर्थन पाकर ही नीतीश कुमार इस कदर कड़े तेवर दिखा रहे हैं।

भारत माता को देवी और उनके हर पुत्र को भाई मानकर राष्ट्र सेवा करें - भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा बाहर से देखकर संघ को समझ पाना बहुत मुश्किल है। यह संगठन स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को आदर्श मानकर परिस्थितियों का डटकर सामना करने में विश्वास करता है।

उन्होंने स्वयंसेवकों को भारत माता को देवी और उनके हर पुत्र को भाई मानते हुए राष्ट्र सेवा करने की नसीहत दी।वह रविवार को यहां अवध प्रांत से जुड़े 22 जिलों के स्वयंसेवकों की सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों के बूते चलता है। उनकी संख्या ही हमारा प्राण है। इसी संख्या बल से हमारा आत्मबल बढ़ता है और हमारी वाणी का प्रभाव पड़ता है।भागवत ने कहा कि संघ के लिए शाखा ही सब कुछ है। शाखा में एक भी सदस्य की अनुपस्थिति का पूरे संघ पर प्रभाव पड़ता है। भागवत ने कहा कि जब परिवेश ठीक रहेगा तभी देश का विकास होगा।

हमारे संतों-महापुरुषों ने परिवेश को ठीक करने के लिए ही जीवन समर्पित कर दिया। इसी कारण वे हमारे आदर्श बने हैं।उन्होंने स्वामी विवेकानंद की अयोध्या यात्रा जिक्र करते हुए बंदरों से उनके संघर्ष व डटकर खड़े होने पर बंदरों के भागने के प्रसंग का उल्लेख किया। कहा कि डटकर खड़े होने अथवा परिस्थितियों का सामने करने से ही विजयश्री मिलती है। भारत माता को देवी व उनके प्रत्येक पुत्र को अपना भाई मानकर कर्म करने की आवश्यकता है। इस कार्य में यदि तरुणाई भी जुट जाय तो देश की तकदीर बदल जाएगी।

सर संघचालक ने कहा कि हमें हिंदू होने का अभिमान करना चाहिए। देश में स्वार्थ के आधार पर राजनीति हो रही है और जातिवाद का जहर घोला जा रहा है। इन परिस्थितियों से उबरते हुए हमें योग्य भारत का निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि संकट के समय आपकी सुसुप्त शक्तियां जाग्रत हो जाती हैं।

यदि हम इसी को हमेशा जाग्रत रखें तो हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने इतिहास-संस्कृति से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहिए।इस अवसर पर विहिप के संरक्षक अशोक सिंघल, सह संघचालक देवेंद्र प्रताप, प्रांत संघ चालक धीरज अग्रवाल भी मौजूद रहे। संचालन अनिल मिश्र ने किया।

छात्रों को सैन्य शिक्षा दी जाए - मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आतंरिक सुरक्षा के लिए 'बढ़ते खतरे' के मद्देनजर छात्रों को सैन्य शिक्षा दिए जाने की जरूरत पर बल दिया है।

भागवत ने कहा कि आजादी के 64 साल बाद भी भारत को चीन और पाकिस्तान से खतरा है। आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरे बढ़ने के मद्देनजर हमें छात्रों को सैन्य शिक्षा दिए जाने को शीर्ष प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि भारत को मजबूत राष्ट्र बनाया जा सके।

भागवत भोंसला मिलिटरी स्कूल के अमृत महोत्सव को संबोधित कर रहे थे।

भारत विश्व को नई राह दिखाएगा - मोहन भागवत

पाकिस्तान ने हमें मोस्ट फेवरेट नेशन का दर्जा दिया है, लेकिन उसका आचरण ठीक उसके विपरीत है। आज देश में घुसपैठ, नकली नोट, उग्रवाद, मादक पदार्थो की तस्करी आदि की समस्या है। पूरा देश इसको लेकर चिंतित है। इससे निजाद पाने की राह हिन्दुत्व दिखाएगा। पटना के राजेन्द्र नगर में प्रात: शाखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने उक्त बातें कहीं।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व को नई राह दिखाएगा। हिन्दू विचार कहता है कि एकता का संचार करो। इसके लिए त्याग, संयम, धर्म को अपनाना होगा। भागवत ने कहा कि धर्म का अर्थ कई बार गलत अर्थो में लिया जाता है। शाखा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सीपी ठाकुर, युवा एवं कला संस्कृति मंत्री सुखदा पांडे, भाजपा विधायक उषा विद्यार्थी सहित सैकड़ों स्वयंसेवक मौजूद थे।

अन्ना संघ के कार्यक्रम में आकर स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग दे चुके हैं - भागवत

एक तरफ़ अन्ना हजारे संघ से रिश्तों को नकारते हैं, तो दूसरी तरफ़ संघ अन्ना से ग़हरे संबंध की बात करता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आज कोलकाता में एक बार फिर दावा किया है कि केवल संघ से अन्ना के पुराने संबंध हैं, बल्कि वे संघ के कार्यक्रम में आकर स्वयंसेवकों को ट्रेनिंग भी दे चुके हैं।

भागवत
ने कहा कि संघ के कहने पर ही अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू किया है। यह बात और है कि संघ ने इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग नहीं लिया और न ही अन्ना ने इसके लिए औपचारिक समर्थन मांगा है।

भागवत
ने कहा कि इसके बावजूद संघ अप्रत्यक्ष तौर पर अन्ना के आंदोलन का समर्थन कर रहा है। भागवत ने यह भी कहा कि अन्ना हजारे से उनकी मुलाक़ात जून महीने में ही होनी थी, लेकिन दोनों ही कहीं और व्यस्त हो गए और यह मुलाक़ात नहीं हो पाई।

संघ में कट्टरपंथियों के लिए कोई जगह नहीं - भागवत

बम धमाकों में संगठन के कार्यकर्ताओं पर झूठे आरोप लगने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि कहा है कि संघ में कट्टरपंथियों के लिए कोई जगह नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस मूल मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए आतंकवाद को संघ से जोड़ रही है। इसलिए उन्होंने हिंदू आतंकवाद जैसा शब्द गढ़ा है।

सूरत में एक रैली में भागवत ने कहा कि संघ ने हमेशा ही उन कार्यकर्ताओं को संगठन छोड़ने के लिए कहा है जिनके विचार कट्टर रहे हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि कट्टर विचारों वाले कुछ लोगों ने खुद ही संघ का साथ छोड़ दिया था और कुछ को हमने संगठन से अलग कर दिया।

भागवत ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के मुद्दे से देशवासियों का ध्यान हटाने के लिए संघ के खिलाफ साजिश रच रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को हाल में चुनावों में मिली असफलता हजम नहीं हो रही है और वह अपनी असफलताओं को छुपाने की कोशिश कर रही है। भागवत ने कहा, ‘ उसका वोटबैंक ख़त्म हो रहा है। कांग्रेस चुनावों में हार रही है और अपनी हताशा में लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। ’

हिंदु कभी आतंकवादी बन ही नहीं सकते - भागवत

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आज आरोप लगाया कि हिंदुओं के खिलाफ आतंकवाद का आरोप लगने का कारण, केंद्र सरकार के अपने ही किए धरे की वजह से उत्पन्न असुरक्षा की स्थिति है और यही कारण है कि हिंदुओं को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

बालेवाड़ी में आरएसएस के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे भागवत ने कहा कि हिंदु कभी आतंकवादी बन ही नहीं सकते। उन्होंने कहा ‘‘अपने ही किए धरे के कारण सरकार अस्थिर हुई है और इसीलिए हिंदुओं को आतंकवाद का आरोप लगा कर बलि का बकरा बनाया जा रहा है।’’ भागवत ने कहा कि सरकार अपने ही लोगों को और देश को ऐसे आरोपों से बदनाम कर रही है।

उन्होंने संघ की तुलना पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा से किए जाने के प्रयासों की भी आलोचना की।

विविधताओं के बावजूद हम एक हैं और यही हिंदुत्व है - भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि संघ देश और समाज की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है और अनेकता में एकता में विश्वास रखता है।

कांग्रेस द्वारा संघ की आलोचना की ओर संकेत करते हुए भागवत ने कहा, ‘‘ हम अनेकता में एकता में विश्वास करते हैं। जाति, संस्कृति, धर्म और क्षेत्र की विविधताओं के बावजूद हम एक हैं और यही हिंदुत्व है । यहां तक कि जिनके पास सोचने समझने की क्षमता नहीं है, चाहे अनचाहे वे भी इस विचारधारा का पालन करते हैं। ’’ भागवत अखिल भारतीय विद्यार्थी पार्टी :एबीवीपी: के विकास के लिए देश में काम करने वाले आरएसएस पदाधिकारी पदमनाभ आचार्य के 80 वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित मुंबई में भाजपा कार्यालय पर जमा भीड़ को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम पर आंतरिक और बाहरी तौर पर प्रहार किया गया है। उनके लिए कठिन समय है, जो इन समस्याओं के बारे में सोचते हैं। हम हमेशा से निदान के बारे में सोचते हैं और अपनी विचारधारा के बारे में प्रतिबद्ध हैं। ’’ भागवत ने कहा है कि आरएसएस कार्यकर्ता किसी अपेक्षा के बिना अनवरत काम करते हैं ।

हिंदू संगठनों को बदनाम करने के विरोध में संघ पहली बार सड़कों पर

देश में हिंदू विरोधी अभियान चलाने और हिंदू संगठनों को बदनाम करने की साजिश के विरोध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस ) के कार्यकर्ता और नेता देशभर में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। अजमेर विस्फोट में संगठन के प्रचारक इंद्रेश कुमार पर आरोप लगाए जाने को साजिश करार देते हुए संघ पहली बार खुद किसी मुद्दे पर सड़कों पर उतरा है।

लखनऊ में धरने का नेतृत्व सर संघचालक मोहन राव भागवत खुद कर रहे हैं, जबकि हैदराबाद में भैयाजी जोशी और भोपाल में के. एस. सुदर्शन विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। लखनऊ में धरने के बाद राज्यपाल को ज्ञापन भी दिया जाएगा। इसके अलावा देश भर में जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन हो रहा है।

संघ का मानना है कि केंद्र सरकार सुनियोजित साजिश के तहत उसे आतंकवाद से जोड़ कर बदनाम कर रही है। केंद्र सरकार को मालूम है कि संघ को बदनाम कर हिंदूवादी आंदोलन को कमजोर किया जा सकता है। यही वजह है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें भी केंद्र सरकार का साथ दे रही हैं।

दिल्ली में यह विरोध प्रदर्शन जंतर-मंतर समेत पांच स्थानों पर आयोजित किया गया, जहां संघ के वरिष्ठ नेता सुरेश सोनी, राम माधव और वीएचपी नेता अशोक सिंघल समेत बीजेपी के कई नेता शामिल हो रहे हैं।

संघ प्रचारक राम माधव ने से कहा कि आतंकवाद और हिंदुत्व विपरीत धारा है और कभी भी इन्हें एक दूसरे से नहीं जोड़ा जा सकता है। यह भारत में हिंदुओं को कमजोर करने का बड़ा दुष्प्रचार है।
सूत्रों ने बताया कि बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी आज लोकसभा में भी इस मुद्दे को उठाएंगे।

राम जन्मभूमि के मुद्दे का समाधान संवैधानिक दायरे में ही - भागवत

संघ प्रमुख मोहन राव भागवत ने दो टूक कहा है कि यदि कोर्ट का फैसला पक्ष में नहीं आया तो संघ अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट ले जाएगा। स्थित महिला प्रेस क्लब में संघ प्रमुख ने मंदिर मुद्दे को आस्था का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि कोर्ट का फैसला अगर उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो इस मुद्दे पर संघ कानूनी और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ेगा। कोर्ट के फैसले के बाद तनाव बढ़ने की आशंका को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि संघ हिंसा और उग्रता में यकीन नहीं करता। उन्होंने लोगों से अपील की कि कोर्ट का फैसला चाहे जो हो, वे शांत रहें और कानून के दायरे में समाधान तलाशें। भागवत ने कहा कि यदि देश के मुस्लिम, मंदिर निर्माण में सहयोग दें और देश में सद्भाव बढ़ेगा।

आस्था के मुद्दे पर यदि सभी गौर करें तो टकराव नहीं होगा और सभी टकराव टालने की कोशिश करेंगे। ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द के प्रयोग पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि हिंदुत्व में आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं है। जिहाद या माओवाद की तरह हिंसा के लिए हिंदुत्व में विचारधारा नहीं है। इस्लाम जिहाद का समर्थन करता है और माओवाद भी कहता है कि सत्ता बंदूक की नली से मिलती है, लेकिन इस तरह की बात हिंदुत्व नहीं करता है।


अयोध्या मसले पर आने वाले हाईकोर्ट के फैसले से पहले, पूर्व गृहमंत्री बूटा सिंह ने कहा है कि 1989 में विश्व हिंदू परिषद के साथ बतौर गृहमंत्री किया गया उनका समझौता अभी भी लागू हो सकता है और पार्टी चाहे तो वह इस मसले पर मध्यस्थता को तैयार हैं। तत्कालीन राजीव गांधी सरकार में गृहमंत्री रहे बूटा ने 27 सितंबर 1989 को विहिप के साथ करार किया था जिसके तहत अयोध्या में गैर विवादित भूमि पर शिलान्यास की अनुमति दी गई थी।

करार के तहत केंद्र सरकार ने देशभर में रामशिला पूजा से जुड़े कार्यक्रम को मंजूरी दे दी थी बशर्ते राम मंदिर के लिए शिलान्यास गैर विवादित भूमि पर हो।बूटा ने कहा,‘मैने खुद शिलान्यास को मंजूरी दी थी। इससे पहले बाबरी एक्शन कमेटी और विहिप के नेताओं के साथ एनडी तिवारी के घर बैठक भी की गई। केंद्र सरकार का मानना था कि कोर्ट के फैसले को सभी पक्ष मानें। इसी संबंध में मैने विहिप के साथ समझौता भी किया, लेकिन बाद में उसने इसकी अवहेलना कर दी। इस बात को 21 साल बीत गए हैं, लेकिन वह समझौता अभी भी लागू हो सकता है। केंद्र सरकार और सोनियाजी चाहें तो मैं इस मामले पर सेवायें देने को तैयार हूं।

सहमति से बने या फिर संघर्ष से, राम मंदिर बनेगा जरूर: भागवत

राम मंदिर निर्माण के अपने प्रण को दुहराते हुये राष्टीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने कहा है कि यह तय है कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा, चाहे वह सहमति से बने या फिर संघर्ष से.

आरएसएस अध्यक्ष मोहन भागवत ने कल रात एक फंक्शन के दौरान कहा कि राम मंदिर करोडों हिन्दुओं के विश्वास का मामला है. इसलिए हम ये पक्का आश्वासन देते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बनेगा चाहे वह सहमति से बने या फिर संघर्ष से.

उन्होंने कहा कि आजादी के समय से ही लोगों का रूझान और मांग रहा है कि अयोध्या में राम मंदिर बने. साथ ही उन्होंने कहा कि सभी ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाण ये बताते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर ही था.

भागवत हनुमान चालिसा पाठ के साथ श्री हनुमान शक्ति जागरण समिति के एक लोक जागरूकता प्रोग्राम का उद्घाटन कर रहे थे. इस तरह का पाठ विदर्भ क्षेत्र के लगभग 20 शहरों में किया गया.

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