कोर्ट ने सपा सरकार से पूछा: लखनऊ महोत्सव में भगवान् लखन क्यों नहीं ?

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अखिलेश यादव सरकार से एक ऐसे मामले पर जवाब देने को कहा है, जो उनके लिए मुसीबत बन सकता है।

धर्म के आधार पर लंबे समय से हो रही राजनीति कैसे लखनऊ महोत्सव से जाहिर हो रही है, इसका अंदाजा भी कोर्ट के इस सवाल से लगाया जा सकता है।

दरअसल, कोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का तरह से दर्ज याचिका को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ महोत्सव में इसाई और मुस्लिम संस्कृति की मौजूदगी, लेकिन हिंदू संस्कृति और खासकर भगवान लक्ष्मण की गैर-मौजूदगी पर सवाल उठा दिया है।

गौरतलब है कि लखनऊ का नाम भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण के नाम पर ही पड़ा था। हालांकि, अब तक के ज्यादातर लखनऊ महोत्सव से खुद लक्ष्मण ही गायब कर दिए जाते रहे।

इस याचिका में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकीलों ने कहा है कि लखनऊ महोत्सव में मुख्यतः मुस्लिम और ईसाई धर्म को प्राथमिकता दी जा रही है। 

वकीलों का तर्क यह भी है कि जिस तरह से इस महोत्सव का प्रचार-प्रसार हो रहा है उससे यही लग रहा है, इसमें हिंदू धर्म कहीं नहीं है। लखनऊ का नाम जिस लखन यानि लक्ष्मण के नाम पर पड़ा, उसी को सरकार ने नजरअंदाज कर दिया है।

ऐसे में जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा और जस्टिस रितुराज अवस्‍थी की बेंच ने 17 नवंबर तक प्रदेश सरकार को अपना पक्ष रखने को कहा है।

प्रदेश सरकार को इस तारीख तक अपने पक्ष में उन सभी प्रचार प्रसार की सामग्रियों को प्रस्तुत करना होगा। सरकार को इस बात को साबित करना होगा कि प्रचार में हिंदू धर्म को भी रखा गया है।

सपा के मुस्लिम चेहरे आजम खां एक बार भी मुजफ्फरनगर नहीं गए - कल्बे जव्वाद

शिया धर्म गुरु व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कल्बे जव्वाद ने उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी में वे मुसलमानों के चेहरा बताए जाते हैं, लेकिन मुजफ्फरनगर में दंगा पीड़ितों का हाल जानने तक नहीं गए। मुसलमानों ने बड़ी उम्मीद से सपा को चुना था, लेकिन दो साल बाद भी वह खरी नहीं उतर पाई है।

मंगलवार को यहां अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए कल्बे जव्वाद ने कहा कि अखिलेश यादव नौजवान हैं। उन्हें देखते हुए ही मुसलमानों ने विश्वास जताया था। मुजफ्फरनगर दंगे पर उनका कहना था कि वहां सपा के छुटभैया नेता व अधिकारियों ने स्थिति खराब की। अगर मुख्यमंत्री तत्काल जाकर जायजा लेते तो शायद हालात न बिगड़ते। सबसे बड़ा अफसोस यह रहा कि आजम खां एक बार भी मुजफ्फरनगर नहीं गए, जबकि सरकार उन्हें मुसलमानों का चेहरा बताती है।

आम आदमी पार्टी (आप) के बारे में उनका कहना था कि पार्टी की अभी शुरुआत है। भ्रष्टाचार से तंग आकर दिल्ली की जनता ने 'आप' पर भरोसा जताया है। देखना ये होगा कि यह पार्टी जनता के विश्वास को बनाए रखती है या अन्य पार्टियों की तरह हो जाती है।

लोकसभा चुनाव में किस पार्टी का समर्थन करेंगे? इस सवाल के जवाब में उनका कहना था कि जो कांग्रेस और भाजपा को हराएगा, उसे ही वोट दिया जाएगा। सपा के बारे में उनका कहना था कि दो साल में भी यह पार्टी मुसलमानों से किए वायदे पूरे करने में नाकाम रही है।

सपा सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-क्या हिंदू दंगों में पीड़ित नहीं हैं?

मुजफ्फरनगर दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूपी सरकार से पूछा कि सिर्फ मुसलमानों की बात क्यों हो रही है? क्या हिंदू दंगों में पीड़ित नहीं हैं? कोर्ट ने कहा कि दंगों में हिंदू-मुसलमान दोनों पक्ष के लोग पीड़ित हैं। सरकार को दोनों पक्षों से जुड़े पीड़ितों के पुनर्वास की बात करनी चाहिए। यूपी सरकार ने इस बारे में जारी पुराने नोटिफिकेशन को रद्द कर नया आदेश जारी करने का वादा किया।

दरअसल, कोर्ट ने यूपी सरकार की ओर से दिए गए दंगा पीड़ितों के पुनर्वास के ब्योरे पर नाराजगी जताई, इसमें केवल मुस्लिम पीड़ितों का जिक्र था। यह ब्योरा यूपी ने कोर्ट के नोटिस के जवाब में दिया था, जो दंगों की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की याचिका पर जारी किया गया था।

जाट सभा की ओर से दाखिल इस याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार मुजफ्फरनगर दंगा मामले में भेदभाव कर रही है। एक समुदाय विशेष के लोगों के खेत जलाए जा रहे हैं और सरकार कोई ऐक्शन नहीं ले रही है। इस कारण मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए।

कोर्ट की फटकार के बाद यूपी सरकार के वकील राजीव धवन ने माना कि इस तरह के नोटिफिकेशन पर विवाद होना तय था। साथ ही कहा कि मुस्लिम पीड़ितों का नाम केवल इसलिए शामिल किया गया, क्योंकि वे ही राहत शिविरों से वापस घर नहीं लौटना चाहते थे।

पुराना नोटिफिकेशन जिस तरह जारी हुआ, वह नहीं होना चाहिए था। हम 26 अक्टूबर को जारी इस नोटिफिकेशन को रद्द कर नया जारी करेंगे। किसी भी व्यक्ति को धर्म के आधार पर पुनर्वास से वंचित नहीं किया जाएगा।

यूपी सरकार ने कोर्ट से वादा किया कि नए नोटिफिकेशन में यह साफ तौर पर लिखा होगा कि संबंधित अधिकारी हर प्रभावित व्यक्ति का ध्यान रखेंगे और राहत के काम सभी तक एक समान तरीके से पहुंचेंगे।

पुलिस डाल रही दबाव : कोर्ट ने उन आरोपों को गंभीर बताया, जिनमें कहा गया है कि दो युवकों की मौत की जांच कर रहे पुलिस अफसर ने एक युवक के परिजनों पर शिकायत कमजोर करने का दबाव डाला था।

कोर्ट ने ऐसी ही एक अन्य याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दंगों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन सेल का अफसर उससे मन मुताबिक हलफनामा लेने के लिए दबाव डाल रहा है, जबकि दंगों में उसके बेटे और भाई की हत्या कर दी गई थी।

मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस का साथ देना जरूरी है - आज़म खां

उत्तरप्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां सोमवार की रात अलीगढ़ में एक निजी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए कांग्रेस का साथ देना मजबूरी नहीं, जरूरी है।

उन्होंने कहा कि किसी हाल में किसी कातिल को हिंदुस्तान का बादशाह नहीं बनने देंगे। नगर विकास मंत्री आजम खां रामपुर से कार से सोमवार की रात करीब 11 बजे यहां पहुंचे और नौरंगाबाद में एक विवाह समारोह में शरीक हुए।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए आजम खां ने कहा कि कर्मचारी काम ही कहां करते हैं जो हड़ताल का अहसास हो। उन्होंने कहा कि पता ही नहीं चल रहा है कि प्रदेश में कर्मचारियों की हड़ताल चल रही है।

मुजफ्फरनगर में दंगा पीड़ितों से अभी तक न मिलने के सवाल पर आजम खां ने कहा कि इसका जबाव तो आरएसएस से पूछिए। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में जो हुआ, वह सब आरएसएस की ही देन है।

लोकसभा चुनावों में सपा की स्थिति पर उन्होंने कहा कि हम पूरा प्रदेश जीतेंगे। दरअसल, अब लगने लगा है कि फासिस्ट ताकतों का ग्राफ गिर रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग बीमारी का मजाक उड़ा रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबां में झांक लेना चाहिए। सही मानिए सपा में बापू का कोई हत्यारा नहीं है।

मंत्री ने कहा कि सपा सरकार में मिल जुलकर काम होता है। भाजपा में आरएसएस की तानाशाही चलती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी को रिजेक्ट कर हमारे मुलायम सिंह यादव को पीएम बनाइए। इस दौरान सपा के प्रदेश सचिव मुजाहिद किदवई मौजूद थे। 

विहिप पूरी तरह फर्जी संस्था है : नरेश अग्रवाल (सपा नेता)

अपने विवादित और ऊलजलूल बयानों के लिए मशहूर सपा के वरिष्ठ नेता नरेश अग्रवाल ने विहिप की संकल्प सभा पर हमला बोलते हुए संगठन को पूरी तरह फर्जी बता दिया है।

नरेश अग्रवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह संकल्प यात्रा सिर्फ सूबे का माहौल खराब करने व अशांति फैलाने के लिए की जा रही है।

अग्रवाल ने यहां तक कह डला कि ‌विश्व हिंदू परिषद का कोई जनाधार नहीं है। न तो प्रदेश सरकार ने इसे कोई मान्यता दी है और न ही देश के हिंदू इसे मानते हैं।

अग्रवाल ने संघ और भाजपा को भी लपेटते हुए कहा कि चुनाव के वक्त सांप्रदायिक ताकतें विहिप का इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने यह भी कहा ‌कि प्रदेश में अगर शांति व्यवस्‍था पर चोट पहुंचाई तो विहिप और भाजपा कार्यकर्ताओं पर रासुका भी लगाया जाएगा।

विहिप के प्रमुख अशोक स‌िंघल अयोध्या तो नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने बयान दिया है कि प्रदेश सरकार जान बूझ कर माहौल खराब करना चाह रही है। सिंघल ने कहा कि संकल्प सभा को शांतिपूर्वक करने का आह्वाहन किया गया था, न जाने इसमें राज्य सरकार को क्या दिक्कत हो रही है।

सिंघल ने सपा नेता आजम खां का नाम लिए बगैर कहा कि एक मंत्री के इशारे पर समाजवादी पार्टी इतना बवाल कर रही है। संकल्‍प सभा का मकसद प्रदेश में अशांति फैलाना एकदम भी नहीं है।

सपा सरकार कर रही विहिप की संकल्प सभा पर रोक लगाने की तैयारी

विश्व हिंदू परिषद और प्रदेश सरकार के बीच एक बार फिर टकराव की नौबत आ गयी है। चौरासी कोसी परिक्रमा के बाद सरकार 18 अक्टूबर को होने जा रही विहिप की संकल्प सभा पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। 

इसके लिए जिलों के डीएम और एसपी को जिम्मेदारी सौंपी गयी है और इस बात के संकेत दे दिए गये हैं कि संकल्प सभा नहीं होने दी जायेगी।

इस सिलसिले में अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था मुकुल गोयल ने बताया कि जिला प्रशासन इसे देख रहा है। अगर शांति-व्यवस्था के लिए इन सभाओं से दिक्कत हुई तो इसके आयोजन की अनुमति नहीं दी जायेगी। 

प्रदेश में चौरासी कोसी परिक्रमा और पंचकोसी परिक्रमा के बाद अब विश्व हिंदू परिषद राम मंदिर निर्माण के लिए हर जिले में संकल्प सभा को सफल बनाने के अभियान में पूरी तरह से जुटी है। विहिप प्रमुख अशोक सिंहल ने देशभर में एक लाख स्थानों पर संकल्प सभाओं का आयोजन करने का एलान किया है।

सपा के नेता शिवपाल के साथ घूमा दंगे का आरोपी मौलाना

मुजफ्फरनगर में भड़के सांप्रदायिक दंगे के नामजद आरोपियों पर एक तरफा कार्रवाई के आरोपों में कहीं न कहीं सच्चाई भी दिखाई देती है। खासकर सत्ता पक्ष से जुड़े आरोपियों की ओर से तो शायद पुलिस-प्रशासन ने आंख ही मूंद रखी है। जानसठ क्षेत्र में भड़की हिंसा में नामजद हुए आरोपियों में से एक मौलाना नजीर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। उन पर दंगा और हिंसा भड़काने का मुकदमा दर्ज है, लेकिन सूबे की सरकार इसकी साफ अनदेखी कर रही है। अभी हाल ही में मौलाना नजीर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से मिलने विशेष विमान से लखनऊ गए थे। अब शनिवार को जब उप्र सरकार के मंत्री शिवपाल यादव कवाल आए तो वहां भी मौलाना मंत्री के बगलगीर बने रहे। इतना ही नहीं, मंत्री की मौजूदगी में उन्होंने उत्तेजक बयान भी दे डाला।

कवाल में मौलाना नजीर ने शिवपाल के सामने कहा- 'जानसठ महाभारतकालीन इलाका है। यहां महादेव मंदिर पर हुई कौरव-पांडव की बैठक ने युद्ध टाल दिया था। जानसठ आने पर दोनों पक्षों को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। हमारी कौम शुरू से ही अमन पसंद रही है, लेकिन कोई हमारा गला काटने आएगा तो हम बख्शेंगे नहीं।'

मलिकपुरा की महिलाओं व पुरुषों ने शिवपाल से कहा, घटनाओं पर अंकुश लगाना है तो पहले अपनी पार्टी के नेताओं को काबू में करो।

आरोप लगाया कि २७ अगस्त से सात व आठ सितंबर की घटनाओं तक सपा के मंत्री आजम खां और कई क्षेत्रीय नेताओं ने अहम भूमिका निभाई थी। अगर समय रहते इन नेताओं पर काबू पा लिया होता तो दंगे की आग में न जलता। महिलाओं ने कहा कि सपा नेताओं पर लगाम नहीं लगी तो दंगे होते रहेंगे।

यह है अखिलेश यादव सरकार का दोगलापन । जिस अखिलेश सरकार ने भाजपा के हिंदू विधायकों पर दंगा भडकाने के नाम पर रासुका लगाकर उन्हें जेल भेज दिया है, उसी अखिलेश सरकार ने दंगा फैलाने वाले मौलाना को सरकारी मेहमान बनाकर शांति कायम रखने के लिए सहयोग मांगा है । अब सभी हिंदूओं को हिंदूद्रोही अखिलेश सरकार के खिलाफ वैध मार्ग से विरोध करना चाहिए । यह स्थिती बदलने के लिए सभी हिंदूओं को संगठित होकर शीघ्रातीशीघ्र ‘हिंदूराष्ट्र’ की स्थापना करनी चाहिए ।

धर्मनिरपेक्ष होना बहुत कठिन: अखिलेश यादव

मुजफ्फरनगर के दंगे में नामजद एक मौलाना से मुलाकात के आरोपों पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि सांप्रदायिक होना आसान और धर्मनिरपेक्ष होना कठिन है। फिर भी वह धर्मनिरपेक्षता की राह पर चलते रहेंगे। दंगों की जांच में निर्दोष के साथ अन्याय नहीं होगा, मगर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने ये बातें अबू तैय्यब मियां की जिंदगी पर आधारित पुस्तक के विमोचन के मौके पर कहीं।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता के लिए उनकी पार्टी मुलायम सिंह यादव के रास्ते पर हमेशा चलती रहेगी। कहा कि मुजफ्फरनगर के दंगे रोकने के लिए हर संभव कदम उठाये गये। आप पर दंगे में आरोपित एक मौलाना से मुलाकात के आरोप हैं? इस सवाल को थोड़ा टालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। चाहे कोई भी हों। आयोग और पुलिस की विशेष टीम जांच कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री ने निर्दोष मुसलमानों को हिरासत में नहीं लेने की मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखी है, यूपी सरकार का रुख? इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार पहले से ही इस दिशा में चौकन्नी है। निर्दोष मुस्लिम युवकों को छोड़ने की वजह से ही उस पर कई आरोप लग रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, मुलायम सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उर्दू अनुवादकों को सरकारी नौकरी दी। मौजूदा सरकार भी उर्दू को बढ़ावा देने और इसे रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। हमारी बेटी उसका कल योजना चल रही है। अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में नए आइटीआइ, पॉलीटेक्निक और डिग्री कालेजों की स्थापना हो रही है।

इससे पहले उन्होंने मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली द्वारा मौलाना अबू तय्यब की जिंदगी पर लिखी किताब 'हजरत मौलाना अहमद मियां फरंगी महली कुछ यादें कुछ बातें' का विमोचन किया। कहा कि मौलाना ने पूरी जिंदगी हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम किया। सपा प्रमुख का फरंगी महल से रिश्ता पुराना है। इस मौके पर अपर महाधिवक्ता जफरयाब जिलानी, पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काजमी, दारुल उलूम नदवा के प्राचार्य मौलाना सइदुर्रहमान आजमी नदवी, मौलाना सैयद फखरुद्दीन अशरफ ने भी विचार रखे। मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने अब तैयब की जिंदगी पर रोशनी डाली।

मुजफ्फरनगर में हिंदू अब भी न्याय की प्रतीक्षा में : साध्वी डा. प्राची

मुजफ्फरनगर (उत्तरप्रदेश) में समाजवादी पार्टी का प्रशासन मंत्री आजम खान के हाथ का खिलौना बन गया है। हिंदू लडकियों पर होने वाले अत्याचारों के परिवादों की लिखाई नहीं होती । भाजपा नेता द्वारा विरोध करने का प्रयास करने पर उन्हें भी प्रशासन द्वारा दुखद अनुभव आए । 

अत: इससे सारे हिंदुओं में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो गई है तथा प्रशासन उनकी समस्याओं की ओर दुर्लक्ष कर रहा है, विश्व हिंदू परिषद की साध्वी डा. प्राची ने प्रसिद्धि हेतु दिए पत्रक में ऐसे खेद व्यक्त किए हैं तथा मुजफ्फरनगर में हाल ही में हुए दंगे में हिंदुओं की बडी मात्रा में हानि हुई है । उस कारण सहस्रों लोग बेघर हो गए, किंतु प्रशासन के कुछ भी न करने से हिंदू न्याय की प्रतीक्षा में हैं । उन पीडित हिंदुओंके साथ न्याय किया जाए, साध्वी डा.प्राचीने ऐसी मांग भी की है ।

साध्वी डा. प्राची आगे कहती हैं, एक हिंदू लडकी को छेडे जानेपर उसके विरुद्ध प्रशासन ने कोई भी कार्यवाही नहीं की । अत: कुछ शांत जिलों में भी दंगे हुए । शामली नाम के गांवमें ४ धर्मांधों ने एक हिंदू लडकी के साथ बलात्कार किया; किंतु उसके विरुद्ध अपराध प्रविष्ट नहीं किया गया । परिणामस्वरूप हिंदुओं में क्रोध उत्पन्न हुआ तथा उस लडकी को न्याय प्राप्त कराने हेतु भाजपा के एक नेता आगे आए; किंतु प्रशासन ने उनके विरोध में अनुचित वर्तन किया ।

इन सारी घटनाओं की पार्श्वभूमि पर शामली गांव में शांतिपूर्ण वातावरणमें महापंचायत आयोजित की गई । वहां पीडित लडकी को न्याय दिलाने की मांग की गर्ई; किंतु प्रशासन ने उधर दुर्लक्ष ही किया । मुजफ्फरनगर में हिंदुओें ने न्याय प्राप्त होने की मांग की तथा प्रशासन के सामने अपना दुख व्यक्त किया । इसके पश्चात जब हिंदू घर लौट रहे थे, तब धर्मांधों ने हिंदुओं पर आक्रमण किया तथा हिंदुओं की हत्या की । इतना सब होने पर भी प्रशासन ने मौन धारण कर रखा है । हिंदू न्याय की प्रतीक्षा में हैं ।

मुजफ्फरनगर पर सबसे बड़ा खुलासा, जानें क्यों और कैसे भड़का दंगा !

दंगों पर आज तक का सबसे बड़ा खुलासा | सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन | सुलगते मुजफ्फरनगर का सबसे बड़ा और सबसे गहरा राज | आज तक पर दंगों की हर परत की पोल मुलायम सिंह और अखिलेश के अफसरों ने खोली |
सियासत के स्याह होते रंगों में एक जलता हुआ शहर, जिसकी आंच १५ दिन बाद लखनऊ पहुंची तो अखिलेश मुजफ्फरनगर पहुंचे और १७ दिन बाद आंच दिल्ली दरबार पहुंची तो प्रधानमंत्री इस शहर पहुंचे | शहर की फिजा बता रही है कि दंगे की आंच में अब राजनीतिक रोटियां सेकी जा रही हैं |
इस दंगे में अब तक चालीस से ज्यादा मौतें हुई और चालीस हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गये | पहली बार यहां लोग अपने ही गांव और अपने ही कस्बों में रिफ्यूजी हो गये | कई सवाल हैं जिनके जवाब आज तक ने खोजने की कोशिश की | क्या इन दंगों को सरकार रोक सकती थी? क्या बेगुनाहों को मरने से बचाया जा सकता था? क्या पुलिस के हाथ बंधे थे? क्या दंगाइयों पर गोली चालने से डर गई थी पुलिस?
जानसठ तहसील का खुलासा
मुजफ्फरनगर का कवाल गांव, जानसठ तहसील में आता है | यही वो गांव है जहां से २७ अगस्त को दंगे दो समुदाए के बीच नफरत की चिंगारी भड़की और फिर उसे नेता हवा देते चले गए | ये वही कवाल गांव है जहां पिछले ६६ साल से हिंदू और मुसलमान भाई-चारे और मुहब्बत के साथ रहते चले आ रहे थे | लेकिन अब वहां की धरती नफरत के लहू से लाल हो गई है | आज तक ने जानसठ तहसील के सर्किट हाउस में स्टिंग ऑपरेशन किया, फिर जो खुलासा हुआ, जानकर आप भी दंग रह जाएंगे |
मुजफ्फरनगर की जानसठ तहसील के कवाल गांव में २७ अगस्त को एक लड़की से छेड़छाड़ को लेकर दोनों समुदाय ऐसे भिड़े कि घंटेभर में मोहल्ले में तीन लाशें गिर गईं और अमन चैन तार-तार हो गया |
इलाके के एसडीएम आर सी त्रिपाठी और सर्किल अफसर जे |आर जोशी दोनों कर्फ्यू में डूबे शहर का गश्त करके लौटे थे | २७ अगस्त को जे |आर जोशी ने दंगा करने वाले 8 लोगों को मौके से हिरासत में लिया था और थाने लाए थे | जोशी का कहना है ये दंगाई दोहरी हत्याओं के मुख्य संदिग्ध थे, लेकिन उस रात ऊपर से दबाव आया और दंगाइयों को थाने से छोड़ना पड़ा |
आज तक - एसडीएम साहब क्या (दंगाइयों के घरों की) तलाशी हुई थी, या तलाशी अवॉइड की गई?
सीओ - नहीं ... नहीं .. बिल्कुल पूरी तलाशी हुई ...
एसडीएम - तलाशी हुई, पकड़े गए.... अभियुक्त पकड़े गए ....
सीओ - ऑफ द रिकॉर्ड पूरी बात हम बताएं, उस दिन जैसे ही घटना (हत्याएं) हुईं उसके बाद तलाशी हुई, उस दिन हमने १२ आदमी जितने वहां आस-पास के जो भी थे, एक-एक आदमी को पकड़ा .... कोई अवैध असलाह नहीं मिला ये अलग बात है ....
आज तक - एक्टचुअल मुलज़िम (पकड़े थे आपने) ....
सीओ- बिल्कुल उन्हीं में थे .... और उसके बावजूद उनको ना ले जाकर उनकी एफआईआर इस ढंग से करा दी .... जिसकी वजह से सब (छूट गए) .... इसके बाद SSP, DM का ट्रांसफर हो गया .... उन्होंने अपनी मौजूदगी में सर्च कराया था |
इन दोनों अधिकारियों का कहना था, मुलज़िम पकड़े जाने के राजनीतिक दबाव में फर्जी एफआईआर कराई गई और असली मुलज़िम छोड़ दिए गए |
आज तक - अच्छा ....पकड़ लिया था (असली मुलज़िमों को)
सीओ - पकड़ लिया था .... एफआईआर में नाम देखा तो मात्र एक आदमी का नाम देखा | हमारे सामने मजबूरी थी....
एसडीएम - Tainted एफआईआर हुई थी ....
आज तक- फिर छोड़ दिया ....
सीओ - उन्होंने कह दिया ठीक है कि (इनके नाम) नहीं है एफआईआर में, उनको बैठाने की डिटेन करने की जरूरत क्या है |
आज तक - तो जो ७ - ८ आदमी पकड़े गए थे ....यानी लाए गए थे थाने वहां से ....
सीओ - नहीं ....थाने लाए थे ....बातचीत की उसने....उसमें उन्होंने कहा कि हम वहां नहीं थे ....हम फलानी जगह थे ....लेकिन थे सब वहीं (घटना स्थल पर)
आज तक- बाद में सबको छोड़ दिया
३ - ३ लाशें गांव में बिछा दी गईं और मौके से संदिग्ध पकड़े गए, लेकिन दबाव में छोड़ दिया गया, सच तो ये है कि कुछ घरों की तलाशी लेने पर एसएसपी मंजीत सैनी और डीएम सुरेंद्र सिंह का तबादला कर दिया | बाद में नए डीएम ने आकर जांच की दिशा, कहीं और मोड़ दी |
आज तक - ये घटना (हत्याओं की) कब हुई थी, संदिग्धों को कितने बजे गिरफ्तार किया गया
सीओ - घटना २ बजे की थी ...
आज तक - नहीं ...गिरफ्तारी कितने बजे की थी
सीओ - चार ...साढ़े चार बजे के आसपास...जैसे ही Deadbody वहां से उठाई गईं थीं |
आज तक - और उन संदिग्धों को छोड़ा कैसे गया ....
सीओ - लेट नाइट छोड़ दिया गया था | (ऊपर से) आदेश आ गए थे .....
आज तक - डीएम के ट्रांसफर के बाद ....
कवाल में कानून का मज़ाक उड़ाया गया | तलाशी लेने पर डीएम का ट्रांसफर किया गया, फर्जी एफआईआर लिखी गई, पकड़े गए आरोपी छोड़े गए, और बाद मे दंगा भड़क गया | अब आगे की दास्तान-
आज तक - जितने Accused को आपने पकड़ा था, क्या वो वास्तव में (सदिंग्ध) थे
सीओ - देखो .... ऐसा है कि .... कैसे कह दें.... देखने वाले जब eyewitness कह रहे हैं कि मौके पर थे .....
एसडीएम - they were prime suspects (वो मुख्य संदिग्ध थे)
आज तक - prime suspects ....वही major mistake हुई और वो मैजेस दूसरी community में चला गया |
एसडीएम- ये तो मतलब दुर्भाग्य है पूरे देश का, इस सिस्टम का, जैसे की कोई घटना होती है, ये ***** नेता तुरंत आकर बैठ जाते हैं ....

 
इन अधिकारियों का मानना था कि दोहरी हत्याओं के मामले में कुछ घरों की तलाशी ली गई जिसपर कुछ रसूखदार नेता डीएम और एसएसपी से नाराज़ हो गए और दोनों का तबादला कर दिया गया | इस कार्रवाई से, इलाके में सांप्रदायिक तनाव भड़का | अगर डीएम और एसएसपी का उस रात तबादला ना होता तो अपराध की घटना सांप्रदायिक दंगे में ना तब्दील होती | लेकिन इससे बड़ा खुलासा किया फुगाना थाने के सैकेंड अफसर ने, जिनके सामने अल्पसंख्यकों के गांव के गांव राख कर दिए गए |
७ सितंबर की शाम महापंचायत में शामिल कुछ किसानों पर हमले के बाद अगली सुबह शाहपुर और बुढ़ाना तहसीलों में दंगे ने एक नया रंग लिया था | ७ सितंबर की प्रतिक्रिया में यहां गांव-गांव में हिंसा का ऐसा नंगा नाच हुआ जो इन कस्बों में १९४७ के दंगों में भी देखने को नहीं मिला | ८ सिंतबर की हिंसा का सबसे ज़्यादा कहर फुगाना इलाके में मचा |
आज तक - आपके यहां कितनी casuality हैं |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- १६ हैं करीब .....नहीं आपके क्षेत्र में कितनी casuality हैं ...हमारे क्षेत्र में १६ हैं ......
आज तक - तो क्या ......पुलिस फोर्स एकदम नहीं पहुंच पायी मौके पर ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन पुलिस थोड़ी सी थी
आज तक - कम थी पुलिस ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- हां ......
आज तक - जब दंगा शुरु हुआ (उस वक्त वहां पर आपके कितने लोग थे)
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- उस समय जनपथ की क्या स्थिति थी, हम नहीं जानते, जब हमारे थाना क्षेत्र में काम शुरू हुआ तो दूसरे थाना क्षेत्र में भी काम शुरू हो गया | अब हमें ये नहीं पता कि दूसरे थाना क्षेत्र में या जनपद में क्या हो रहा है | जब अधिकारियों को इस बात का पता चला, तो अधिकारियों अपनी योजना, अपनी व्यवस्था करने में लगे | हमारा उनसे संपर्कि नहीं हो पाया | अब संपर्क करने के लिए कारण है, कि एक हाथ से गोली चला रहे हैं और दूसरे हाथ से मोबाइल (फोन) कर रहे है, तो मुसीबत की स्थिति है ......
आज तक - बिल्कुल ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर -  देखो practical है सब practical है ......
आज तक- कितनी देर तक (आपका अधिकारियों) से संपर्क नहीं हुआ होगा......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- अरे भई हम घंटे भर पर जूझते रहे ......फंसे रहे ......हमारी जान लगी रही | मोबाइल निकालते ......ok करते और फिर जेब में रखते ......ऐसी स्थिति थी हमारी |
आज तक - जब आप लोग (मौके पर) लगे हुए थे, तो असलाह की कमी थी
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- देखो असलाह ......तो मैं बता रहा हूं, असलाह तो कुछ है नहीं ...... असलाह जो हमारे पास है, असलाह जो हमारे हैं ही नहीं ......और जो हैं वो चलता ही नहीं ...... भाई जो चल गया तो बढ़िया हमारी जान ऊपर वाले की कृपा है | तो चल भाई वो भी मन हो ......नहीं चला तो नहीं ......मैं आपको वो facts बता रहा हूं जो कोई नहीं बताएगा |
आज तक - मेन रोल मेरे ख्याल से आज़म xxxxx का है, कि उन्होंने pressurise किया |
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर- बिल्कुल ठीक है ......बिल्कुल ठीक है ......
आज तक - आप कुछ नहीं करेंगे ......जो हो रहा है होने दो ......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - हां ......यहीं हुआ ......
आज तक - political है ये ......रोटियां सेंक रहे हैं......
आर एस भगौर, सैकेंड अफसर - सब रोटियां सेंक रहे हैं ......
ज़ाहिर तौर पर सैकेंड अफसर जानते हैं कि दंगो में किसका क्या किरदार रहा है, लेकिन इस अफसर से भी बड़ा खुलासा पुलिस और प्रशासन के कुछ और अधिकारियों ने किया | जिस पर आप दंग रह जाएंगे |

 
मुजफ्फरनगर का मीरापुर थाना क्षेत्र, सच्चाई आपको डरा देगी, सहमा देगी, इस थाने के हल्के में दंगाइयों ने मौत का जो खेल खेला, वो वाकई ख़ौफनाक भी है और दर्दनाक भी |
२७ अगस्त से शुरू हुए दंगे ८ सितंबर तक मुजफ्फरनगर को दहलाते रहे, लेकिन प्रशासन से लेकर सरकार तक, दंगाइयों पर काबू पाने में नाकाम रही | जाहिर तौर पर दंगों की आड़ में नेता अपना अपना फायदा देख रहे थे | मीरापुर थाने के एसएचओ अनिरुद्ध कुमार गौतम के हल्के में भी दंगाइयों ने सड़कों पर मासूमों के मौत के घाट उतारा | और हैरतअंगेज़ बात ये है कि दंगाइयों पर कार्रवाई करने से पुलिस कतराती रही | गौतम मानते हैं कि डीएम एसपी को एक साथ हटाने की वजह से जिला प्रशासन नेतृत्वविहीन हो गया था | गौतम का कहना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ नेता डीएम एसपी को कई दिनों से एसपी को हटाने का दबाव बना रहे थे, और उन्हें आखिरकार मौका मिल गया |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ......आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर घटना के चंद घंटों के अंदर ......उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी .....डीएम की......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां डेढ़ साल ......दो साल .....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती  भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ......
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - सब political stunt ......
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ...
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ......जब कांवड़ चल रही थी तबसे ......political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ......
आज तक - क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ......कि हमारे काम नहीं कर रहे है ......right or wrong ...... यही कारण है और क्या है ......
दरअसल २७ अगस्त को कवाल गांव की घटना छेड़छाड़ से शुरू हुई और दो गुटों के बीच झगड़े में तब्दील हो गई | ये सच है कि इस घटना में हत्या हुई, लेकिन ये भी सच है कि हत्या होने के बावजूद घटना ने कोई सांप्रदायिक रंग नहीं लिया | दिक्कत तब शुरु हुई जब डीएम और एसएसपी ने घर घर तलाशी लेनी शुरू की |
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे....गांव घेर लिया था पूरा ..
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ....पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
आज तक - ये तो अच्छा काम था ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
लेकिन दंगों की आड़ में ट्रांसफर, पोस्टिंग और सस्पेंशन का ही खेल नहीं हो रहा है, असली खेल तो वोट का था, और इसपर भी खुलासा किया उन लोगों ने जो मौका-ए-वारदात पर मौजूद थे |
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- पहले वाले डीएम और एसएसपी हमारे थे, दोनों मिलकर (घटना) को मैनेज कर सकते थे ....आपने (सरकार) रात में चंद घंटों के अंदर ....घटना के चंद घंटों के अंदर ....उन्हें हटाया |
आज तक - उसकी इंस्पेक्टर साहब क्या वजह थी, उनकी क्या dealing सही नहीं थी ...डीएम की....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- डीएम की dealing बहुत बढ़िया था, दो साल कैसे निकाल जाते यहां | डेढ़ साल ....दो साल ....कैसे निकल गया यहां ....अगर dealing बढ़िया ना होती | भाई इसी शासन नेउसे पोस्ट किया था डीएम | अगर इसकी dealing से लोग संतुष्ट ना होते तो डेढ़ पौने दो साल कैसे कट जाते |
आज तक - उस रात क्या वजह रही ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- सब political stunt ....
आज तक - मतलब उनको हटाना ग़लत फैसला था ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ- भाई ये लोग उनको (DM/SSP) हटाने के लिए एक महीने से प्रयासरत थे ....जब कांवड़ चल रही थी तबसे .... political लोग समाजवादी पार्टी के, दोनों अधिकारियों को हटवाने के लिए लगे हुए थे ....
आज तक- क्यों ....
अनिरुद्ध कुमार गौतम, एसएचओ - भाई उनको लग रहा होगा ....कि हमारे काम नहीं कर रहे है ....right or wrong.यही कारण है और क्या है ....
आज तक - सुनने में ये आया है कि डीएम साहब ने जो जो दंगाई थे ....बवाली जो बवाल मचा रहे थे पकड़ लिए थे गांव घेर लिया था पूरा ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - पूरा गांव घेरके ...पुलिस सर्च कराई थी एसएसपी और डीएम ने ....पकड़ लिए थे रात में ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - और उसमें क्या कर सकते हैं ये हमारे से ऊपर की बात है ....
आज तक - वोट बैंक की राजनीति है, बहुत बुरी है....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा- हां ....
आज तक - दो दिन ....चार दिन रुक करके हटाते तो शांत हो जाता मामला ....
समरपाल सिंह, इंस्पेक्टर, भोपा - हां ....ये नौबत नहीं आती ....
आज तक का खुफिया कैमरा जहां-जहां पहुंचा, अखिलेश के अफसरों ने हमें भी चौंका दिया | और वही सच्चाई अब हम देश के सामने रख रहे हैं | बात मुजफ्फरनगर की बुढ़ाना कोतवाली की | यहां के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह ने दंगों का सच बताया तो एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना ने भी दंगों पर सियासी खोल को उघाड़ डाला |
ये हैं मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली के इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह | दंगे के सभी दिनों में ये इलाके में रात और दिन गश्त करते रहे | ज़ाहिर तौर पर इनपर भी हर तरह का राजनीतिक दबाव रहा |
किसको पकड़ना है, और किसको छोड़ना है, शायद ये फैसला यूपी में कोतवाल नहीं करते | इंस्पेक्टर ऋषिपाल का मानना है कि पहली बार शहर की जगह दंगे देहात में ज़्यादा फैले | अगर पर्याप्त संख्या में पुलिस फोर्स देहात के थानों में मुहैया कराई गई होती, जो कमज़ोर तबके के इतने लोग मारे ना गए होते | देर से पुलिस बल भेजे जाने के कारण गांव में हिंसा बिना रोक टोक चलती रही |
आज तक - (८ सितंबर को दंगा) सुबह ७ बजे से शुरु हो गया था
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- सुबह ७ बजे से कई गांव में ....
आज तक - अच्छा....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- वही तो मैंने बताया ....
आज तक - फोर्स पहुंची नहीं थी ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - ३ - ४ जगह ....एक गांव में पहुंचकर control करा ....
आज तक - अच्छा ....सुबह सुबह फोर्स होगी नहीं थाने में....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- न हीं ....थाने में ....
आज तक - देर तक गश्त में थे ....
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना- नहीं थाने में मेरे पास २० सिपाही है, ३ - ४ दारोगा हैं, तो मैं कोशिश करूंगा कि पहले एक गांव में हिंसा हो गई तो मैं 4 सिपाही से हिंसा नहीं रुकवाउंगा |
मैं सोचता हूं कि पूरी फोर्स को लेकर हिंसा रोक दूं ....लेकिन जबतक यहां हिंसा रोकता, तबतक दूसरी जगह हिंसा शुरु हो गई | दूसरी जगह पहुंते ...तीसरी जगह हो गई |
आज तक - 
फोर्स कम थी ...
ऋषिपाल, इंस्पेक्टर, बुढ़ाना - फोर्स इतनी नहीं थी कि हर गांव में लगा दी जाती....
मुजफ्फरनगर की पुलिस अधीक्षक यानी एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना के हाथों में दंगाग्रस्त कई थानों की कमान थी | कल्पना सक्सेना का मानना है कि दंगों पर कहीं ना कहीं सियासी रंग चढ़ा है |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम- देखिए कई तरीके की बातें हुईं, बहुत सी बाते हैं ....इस समय हम लोग बहुत प्रेशर में हैं ....वर्क बहुत सारा है करने को ....फुर्सत से बात करेंगे किसी दिन....
आज तक - लेकिन मैडम उसका जवाब दीजिए हमें आप | मतलब मर्डर को ऐसा सांप्रदायिक रंग क्यों दे दिया गया |
कल्पना सक्सेना, एसपी क्राइम - देखिए मैं क्या कहूं....बहुत गहराई से बताऊं ....इसमें बहुत कुछ political है, और यहां ऐसा चल रहा है कि मुस्लिम को कुछ लग रहा है | हिंदुओं को लग रहा है कि मुस्लिम appeasement (तुष्टीकरण) बहुत हो रहा है ....
आज तक के ऑपरेशन दंगा में वो सच सामने आया, जिससे मुजफ्फरनगर सुलग उठा था | हिंसा भले ही सुनियोजित ना हो, लेकिन हिंसा भड़काने में साज़िश और सियासत का घालमेल ज़रूर था |

स्त्रोत : आज तक 

राबर्ट वाड्रा भी कॉमनवेल्थ गेम घोटाले में शामिल - आज़म खान


सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की भूमिका की जांच कॉमनवेल्थ गेम घोटाले में भी होना चाहिये, यह कहना है सपा के वरिष्ठ नेता आज़म खान का। आज़म का साफ कहना है कि वाड्रा को महज़ इसलिये बचाया जा रहा है क्योंकि वह कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद हैं, तो साथ में उन्होनें केन्द्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को भी निशानें पर लिया।

हरियाणा में जमीन घोटाले में नाम आने के बाद राबर्ट वाड्रा के लिए एक और मुसीबत सामने आ रही है। यूपी के वरिष्ठ मंत्री आजम खान ने कहा है कि कॉमनवेल्थ खेलों में भी राबर्ट वाड्रा की भूमिका की जांच होनी चाहिए।

यूपी के वरिष्ठ मंत्री आजम खान ने कहा है कि सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट ने विकलांगों से छल किया है। आजम खान ने कहा उनके ट्रस्ट को लेकर जो बातें सामने आ रही हैं उनसे यही लगता है। आजम ने कहा सलमान खुर्शीद के ट्रस्ट की जांच बीएसपी सरकार के समय से चल रही है, जो इस सरकार में भी जारी है।

साफ है सलमान खुर्शीद और राबर्ट वाड्रा की मुश्किलें खत्म होनें का नाम नही ले रही है। दोनों पर हर रोज़ रोज नये आरोप लगाये जा रहे हैं लेकिन आज़म खां का राबर्ट वाड्रा पर लगाया गया आरोप और भी संगीन है। पहले ही हरियाणा में ज़मीन घोटाले में नाम आनें के बाद अब आज़म नें कामनवेल्थ खेलों में राबर्ट वाड्रा की भूमिका की जांच कह कर वाड्रा की मुसीबतों को और बढ़ा दिया है।

आजम खान ने रेलवे कर्मचारियों से जमकर मारपीट की


उत्तरप्रदेश सरकार में दिग्गज मंत्री आजम खान ने कुछ रेलवे कर्मचारियों से जमकर मारपीट की। इतना ही नहीं उन्होंने इन कर्मचारियों को मुर्गा भी बना दिया। 

मंगलवार की रात जब हावड़ा एक्सप्रेस रामपुर पहुंची, तो मंत्री अपने समर्थकों के साथ एसी डिब्बे में चढ़ गए। मंत्रीजी ने एसी कोच के अटेंडेंट निर्मल मुर्मु को दबंग अंदाज में बुलाया और बिस्तर साफ न होने की बात कहते हुए डांटा।

अटेंडेंट ने जब उन्हें बताया कि उनके पास ऐसे ही बिस्तर हैं तो आजम खां ने थप्पड़ जड़ दिए। बाद में मंत्री के समर्थकों ने बाकी अटेंडेंट्स को भी बुलाकर उन्हें मुर्गा बना दिया। मुर्गा बने हुए अटेंडेंट्स को मंत्री समर्थक तब तक पीटते रहे जब तक उन्होंने माफी नहीं मांग ली। 

हावड़ा एक्सप्रेस के कोच अटेंडेंट ने मंत्री पर मारपीट का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की है।

विश्व हिंदू परिषद ने यूपी की सपा सरकार बर्खास्त करने की मांग की


विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपते हुए सपा सरकार को बर्खास्त करने की मांग की।

विश्व हिंदू परिषद के जिला सचिव अशोक लवानिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा हिंदुओं पर किये जा रहे अत्याचार के विरोध में राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन उप जिलाधिकारी पी डी गुप्ता को सौंपा। 

इसमें कहा है कि सपा सरकार द्वारा किये जा रहे उत्पीड़न को लेकर हिंदुओं में काफी रोष व्याप्त है। प्रतिनिधिमंडल में अरविंद शर्मा, अनुज पचौरी, आयुष्मान शर्मा, मनीष पचौरी, रामलखन दीक्षित, रामप्रकाश वर्मा, भोला, राजवीर, सुशील शर्मा, रामनिवास चौहान आदि थे।

मुल्ला मुलायम भाजपा एजेंट : राशिद अल्वी, कांग्रेस प्रवक्ता

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव बीजेपी के एजेंट हैं. बीजेपी के इशारों पर नाचते हैं मुलायम सिंह. ये आरोप लगाया है कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने. अल्वी बुधवार को मुरादाबाद में कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने गए थे.

कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने मुरादाबाद की एक सभा में कहा, ' समाजवादी पार्टी का बहुत बोलबाला मुसलमानों के अंदर बहुत रहा. मुल्ला मुलायम सिंह कहलाते थे. मैं पिछले दस साल से ये बात कहता था. मुझे नहीं मालूम कि मेरी बात आपको अच्छी लगेगी कि बुरी लगेगी. लेकिन पिछले दस साल से ये बात कह रहा हूं कि देश के अन्दर अगर भारतीय जनता पार्टी का कोई सबसे बड़ा एजेंट कोई है तो वो मुलायम सिंह यादव है. अगर भारतीय जनता पार्टी के इशारों पर इस देश में कोई नाचता है तो वो मुलायम सिंह यादव नाचता है. क्या तारीख के किसी पन्ने में आपने पढ़ा कि दो अलग-अलग मूवमेंट चलाने वाले लोग एक साथ खड़े हो गए.

अपनी बातों को और साफ करते हुए राशिद अल्वी ने मुलायम के उस दौर को याद किया जब उन्होंने कल्याण सिंह से हाथ मिलाया था. अल्‍वी ने कहा, 'बाबरी मस्जिद की लड़ाई लड़ने वाले समाजवादी पार्टी के नेता राम मंदिर की लड़ाई लड़ने वाले कल्याण सिंह जी एक साथ एक झंडे के नीचे सिर्फ सियासी फायदा लेने के लिए आए और उत्तर प्रदेश के अकलियतों को ये बात समझ नहीं आई, मैंने तब भी कहा था की ये सिर्फ इन लोगों की सियासत है.

राशिद अल्वी मुरादाबाद में कांग्रेस पार्टी से मेयर पद के उम्मीदवार डॉक्टर मोहम्मद सादिक के लिए चुनाव प्रचार में आए थे. ऐसे में हो सकता है स्थानीय चुनाव में पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए वो एसपी सुप्रीमो पर बरस पड़े. लेकिन, क्या मुलायम पर वार करते वक्त कांग्रेस के ओजस्वी प्रवक्ता ये भूल गए कि राष्ट्रपति चुनाव में मुलायम इस वक्त कांग्रेस के संकटमोचक बने हुए हैं. कहीं ऐसा तो नहीं दिग्गी राजा की राह पर चल पड़े हैं राशिद अल्वी भी.


Congress is not clear hearted on Muslim Reservation-Azam Khan

The ruling Samajwadi Party in Uttar Pradesh has blamed the Congress for failing to get reservation for Muslims, and said the latter was never serious about improving the lot of the minorities.

State Urban Development Minister Mohammed Azam Khan Wednesday said the Congress always considered the Muslim community as a mere vote bank that had to be "pampered" before the elections.

Khan's remarks came against the backdrop of the Supreme Court rejecting the Congress-led central government's plea for suspending the Andhra Pradesh High Court verdict quashing a 4.5 percent sub-quota for religious minorities in central educational institutions.

Alleging that the Congress was not "clear hearted" about the Muslim reservation, Khan said the matter would not have stuck like this if the Congress had presented the facts correctly before courts.

Recalling how the Congress raked up the issue of 4.5 percent Muslim sub-quota within the 27 percent reservation for the Other Backward Classes in government jobs during the Uttar Pradesh assembly elections, Khan said all the "drama" was just to get Muslim votes.

The Samajwadi Party leader also said his party was committed to ensuring Muslim reservation and that a committee of legal luminaries, religious leaders and other dignitaries would be constituted to formulate the policy in this regard.

जयाप्रदा के भाजपा में शामिल होने की घोषणा जल्द ही

एजेंडा 2014 पर भाजपा की तैयारियां शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कुछ सीटें गंवाने के बाद अभी से लोकसभा चुनाव के लिए जिताऊ उम्मीदवार ढूंढे़ जाने लगे हैं। भाजपा में अब जयाप्रदा को शामिल करने की राह लगभग तैयार है। सही वक्त पर इसकी घोषणा हो सकती है।

हाल के विस चुनाव नतीजे ने भाजपा को सचेत कर दिया है। यूपी विस चुनाव में बसपा छोड़कर आए बाबू सिंह कुशवाहा भले ही पार्टी को लाभ न पहुंचा पाएं हो, लोकसभा में ऐसे उम्मीदवार की तलाश होगी जो अपनी सीट पर मजबूत दावेदार साबित हो।

इस क्रम में पिछले दो बार से खो रही रामपुर सीट पर उम्मीदवार तय माना जा रहा है। तकनीकी कारणों से सपा में मौजूद होते हुए भी दूर खड़ी जयाप्रदा को ही भाजपा वहां से अपना दावेदार बना सकती है। बताते हैं कि पार्टी में इसका निर्णय ले लिया गया है। 

जयाप्रदा की नितिन गडकरी से मुलाकात हो चुकी है और रामपुर से सांसद रह चुके मुख्तार अब्बास नकवी की भी सहमति ले ली गई है। सपा के मजबूत नेता आजम खां के विरोध के बावजूद जयाप्रदा ने रामपुर फतह किया था। उनकी जीत में राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई थी।

जाहिर है कि वह भाजपा उम्मीदवार होंगी तो अमर अपने प्रभाव का भी इस्तेमाल जरूर करेंगे। वह तकनीकी रूप से सपा की सदस्य हैं। यह और बात है कि पिछले एक डेढ़ साल में उन्होंने पार्टी व्हिप का पालन नहीं किया है। लिहाजा सही वक्त आने पर ही वह भाजपा में शामिल होंगी।

बुखारी को चढ़ा बुखार कहा -अपना हक्क छीन ले मुसलमान

दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने मुसलमानों से कहा कि वे अपना हक छीनने को तैयार रहें। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सपा सरकार ने मुसलमानों को उनका हक देने का वादा किया है। छह माह बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। वह सिविल लाइन स्थित होटल में मीडिया से बात कर रहे थे।

शाही इमाम ने कहा कि हक भीख में मांगने से नहीं मिलता, इसे छीनना पड़ता है। यह तय करना होगा कि हक हासिल करना है। इसके लिए एकजुट होकर कोशिश करें। वह साथ देने को तैयार हैं। छह माह बाद देखा जाएगा कि यूपी सरकार ने मुसलमानों से जो वादे किए थे, उन पर कितना अमल हुआ है।

उन्होंने कहा कि पहले एक मुस्लिम को विधान परिषद की सीट दी जा रही थी, लेकिन उनके हस्तक्षेप के बाद दो सीटें मिलीं। शाही इमाम ने अपने दामाद को एमएलसी बनाए जाने पर भी सफाई दी। बोले, मैने दामाद के लिए सीट नहीं मांगी, लेकिन इस मुद्दे पर गुमराह करने की कोशिश की गई। कैबिनेट मंत्री आजम खां और जौहर यूनिवर्सिटी पर टिप्पणी करने से उन्होंने साफ इंकार कर दिया।

मुलायम सिंह अचानक पड़े बीमार, रातोरात हुआ ऑपरेशन

उत्‍तर प्रदेश के पूर्व मुख्‍यमंत्री व समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष मुलायम सिंह यादव की बुधवार देर रात अचानक तबियत बिगड़ गई। अचानक उन्‍हें पेशाब (यूरीन) आना बंद हो गया और पेट में तीव्र दर्द उठा।

उन्‍हें तुरंत संजय गांधी पोस्‍टग्रेजुएट इंस्‍टीट्यूट (एसजीपीजीआई) ले जाया गया, जहां रात में छोटा सा ऑपरेशन करना पड़ा।सपा अध्‍यक्ष की रात करीब ग्‍यारह बजे अचानक तबियत बिगड़ गई। उनके घर वाले तुरंत उन्‍हें रायबरेली रोड स्थित एसजीपीजीआई ले गये।

वहां
यूरोलॉजी स्‍पेशियलिस्‍ट डा. राकेश कपूर व उनकी चार सदस्‍यीय टीम ने उन्‍हें तत्‍काल भर्ती कर लिया और रात के करीब एक बजे उनका ऑपरेशन करना पड़ा। टीम के एक डॉक्‍टर ने बताया कि ऑपरेशन माइनर था, घबराने वाली बात नहीं है।

रात
भर इंटेन्सिव केयर में रखने के बाद गुरुवार की सुबह मुलायम सिंह को वॉर्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्‍टर ने बताया कि संभवत: उन्‍हें शाम तक डिस्‍चार्ज कर दिया जायेगा। हालांकि मुलायम सिंह को देखने के लिए अस्‍पताल में समाजवादी कार्यकर्ताओं का तांता लगना शुरू हो गया है।

नोट फॉर वोट मामले में अमर सिंह के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल

अमर सिंह पूर्व में समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं लेकिन अब उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली है. उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं.यह मामला 2008 का है जब बीजेपी के कुछ सांसद संसद में वोटिंग के दौरान सूटकेसों में पैसा भरकर ले गए थे और उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें सरकार के हक में वोट देने के लिए पैसा दिया गया गया था.

इन
सांसदों में से एक अशोक अर्गल के ख़िलाफ़ मामला चलेगा जबकि बाकी दोनों सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोड़ा पर पहले ही घूस लेने का मामला चल रहा है.भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के तत्कालीन सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी पर भी आरोप है कि उन्होंने इस पूरे अभियान की योजना बनाई ताकि यूपीए सरकार की रिश्वत देने की मंशा का पर्दाफाश किया जा सके.

कुलकर्णी
पर भी आपराधिक मामला चल सकता है जिसमें रिश्वत का प्रस्ताव देने का आरोप लगाया जा सकता है.सन् 2008 में परमाणु सौदे के मुद्दे पर वोटिंग हुई थी. यूपीए सरकार को वोटिंग में बहुमत मिला लेकिन रिश्वत देकर वोट खरीदने का मामला बहुत विवादित रहा.बीजेपी का कहना है कि यूपीए ने तीन भाजपा सांसदों अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोड़ा को रिश्वत की पेशकश की गई थी और वो यही पैसा लेकर संसद में पहुंचे थे ताकि वो अपनी बात संसद के सामने रख सकें.

इस
मामले में एक टीवी चैनल की निष्पक्षता भी संदेह के घेरे में आई थी जिसके साथ मिलकर रिश्वत के लेन देन की प्रक्रिया का एक स्टिंग आपरेशन भी किया गया था.बाद में बीजेपी सांसद कुलस्ते और भगोड़ा पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया और आरोपपत्र दायर किया गया जबकि पुलिस ने अर्गल के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दायर करने के लिए लोकसभा स्पीकर से अनुमति मांगी है क्योंकि अर्गल अभी भी सांसद हैं

कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी की हवाला कारोबारियों से सांठगांठ

काले धन, टैक्स चोरी और हवाला कारोबार के मामले में अब कांग्रेसी नेता के नाम सामने आने लगे हैं। अरबों रुपये के टैक्स चोरी और मनी लॉन्डरिंग के मामले में हसन अली खान के साथ आरोपी काशीनाथ तपूरिया ने एक निजी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रेणुका चौधरी पर हवाला कारोबारियों से सांठगांठ का आरोप लगाया है।

तपूरिया ने इस मामले में जिन नेताओं का नाम लिया है उनमें सुरेश कलमाड़ी, समाजवादी पार्टी की पूर्व सदस्य और रामपुर से सांसद जया प्रदा, सुब्बीरामी रेड्डी, पूर्व सांसद एएस चौधरी और आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री विजय भास्कर रेड्डी शामिल हैं। विजय भास्कर रेड्डी अब जीवित नहीं हैं।

रेणुका चौधरी ने कोलकाता के कारोबारी काशीनाथ तपूरिया के खिलाफ मुकदमे की धमकी दी है।इस बारे में ईडी की पूछताछ में तपूरिया ने खुलासा किया है कि हसन अली ने उसे बताया था कि वह अपने एक दोस्त जगदीश टाइटलर के जरिए रेणुका चौधरी से मिला था। टाइटलर ही अली को रेणुका चौधरी के पास ले गया था।

काशीनाथ तपूरिया ने रेणुका चौधरी का नाम प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के साथ हुई पूछताछ के दौरान तब लिया जब उनसे हवाला कारोबारी अब्बास नकवी के बारे में पूछा गया। तपूरिया ने ईडी को बताया कि अब्बास नकवी एक बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर है जिसके जरिए उसने एक हीरा खरीदा था। हीरे की कीमत 1.20 करोड़ रुपये के करीब है। लेकिन इसे हसन अली खान ने ले लिया।

जब
तपूरिया से पूछा गया कि हसन अली खान ने हीरा क्यों ले लिया तो तपूरिया ने जवाब दिया कि हसन ने कहा कि वह रेणुका चौधरी को यह हीरा देना चाहते थे। तपूरिया का कहना है कि खान ने उनसे कहा था कि रेणुका चौधरी उनकी करीबी दोस्त हैं।

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