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मोटापा घटाने के कुछ आसान से फार्मूले...

विश्व स्वास्थय संगठन (डब्लूएचओ) की ओर से जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक बढ़ते सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के साथ चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका, ब्राज़ील और मैक्सिको जैसे देशों में मोटापे के शिकार लोगों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है. जहां एक ओर जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा ज़रूरी पोषण से भी महरुम है वहीं मध्यवर्ग और उच्च वर्ग को मोटापे और डायबटीज़ यानी मधुमेह जैसी बीमारियों ने अपनी गिरफ़्त में ले लिया है. अंतरराष्ट्रीय मधुमेह परिसंघ के मुताबिक भारत में पांच करोड़ से ज़्यादा लोग मधुमेह से पीड़ित हैं.

जो लोग काफी मोटे होते है और अपना मोटापा समाप्त करना चाहते है तो उन्हे नींबू और नारंगी जैसे खट्टे फल ज्यादा मात्रा में खाने चाहिए या रोजाना इनका 1 गिलास रस पीना चाहिए। इससे मोटापा कम होता है और शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है। 
  • पुदीना रस एक चम्मच 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है। 
  • गाजर का रस मोटापा कम करने में उपयोगी है। करीब 300 ग्राम गाजर का रस दिन में किसी भी समय लें। 
  • प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गिलास घर पर बनी शुद्ध छाछ पीएं, स्वाद के अनुसार थोड़ा सा काला नमक व हींग-जीरा भी मिलाया जा सकता है।
  • प्रतिदिन सोते समय गुनगुने पानी से एक से दो चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन करें।
  • किसी जानकार के मार्गदर्शन में प्रतिदिन सुबह खुले प्राकृतिक स्थान पर जाकर आसन और प्राणायाम का अभ्यास करें। 
  • शराब और दूध निर्मित पदार्थ का उपयोग न करें।
  • अदरक को व नींबु को काटकर दोनों पानी में ऊबालें ठंडा कर पीएं।
  • रोज पोन किलो फल और सब्जी का उपयोग करें।
  • ज्यादा कर्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं का परहेज करें।शक्कर,आलू,और चावल में अधिक कार्बोहाईड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं।
  • केवल गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं सोयाबीन,चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
  • भोजन मे ज्यादा रेशे वाले पदार्थ शामिल करें। हरी सब्जियों ,फलों में अधिक रेशा होता है।
  • फलों को छिलके सहित खाएं। आलू का छिलका न निकालें।
  • चम्मच शहद आधा चम्मच नींबू का रस गरम जल में मिलाकर लेते रहने से शरीर की अतिरिक्त चर्बी नष्ट होती है। यह दिन में 3 बार लेना चाहिए।
  • पत्ता गोभी में चर्बी घटाने के गुण होते हैं। इससे शरीर का मेटाबोलिज्म ताकतवर बनता है।
  • पुदीना रस एक चम्मच 2 चम्मच शहद में मिलाकर लेते रहने से मोटापा कम होता है।
  • सुबह उठते ही 250 ग्राम टमाटर का रस 2-3 महीने तक पीने से शरीर की वसा में कमी होती है।
  • गाजर का रस मोटापा कम करने में उपयोगी है। करीब 300 ग्राम गाजर का रस दिन में किसी भी समय लें।
  • दिन भर में कम से कम 20 गिलास पानी पीएं।
  • कम कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का उपयोग करें।
  • नींबू, जामफल, अंगूर, सेवफल, खरबूज, जामुन, पपीता आम, संतरा, पाइनेपल, टमाटर, तरबूज, स्ट्राबेरी आदि को भोजन में शामिल करें।
  • पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकोली, प्याज, मूली , पालक, शलजम, सौंफ, लहसुन आदि का ज्यादा सेवन करें।
  • कम नमक,कम शकर आदि का उपयोग करें।
  • अधिक वसा युक्त भोजन पदार्थ से परहेज करें।
  • तली गली चीजें इस्तेमाल करने से चर्बी बढती है। वनस्पति घी हानिकारक है। 
  • रोज कुछ देर नार्मल वर्कआउट के अलावा पंद्रह मिनट योग मुद्रा करना है। जी हां जिन लोगों का मोटापा कम नहीं होता है। वे लोग यदि संतुलित भोजन के साथ ही नियमित वर्कआउट के साथ पंद्रह मिनट इस मुद्रा को भी दें तो निश्चित ही मोटापे में कमी आती है। 
  • 125 ग्राम पानी उबालकर ठ्ण्डा करें जब गुनगुना रह जाय तब उसमें 15 ग्राम नींबू का रस और 15ग्राम शह्द मिलाकर पीने से मोटापा दूर होता है और शरीर में जैसी भी चर्बी हो वह कम हो जाती है । यह पेट के रोग के लिये भी लाभदायक है ।प्रात: खाली पेट एक से दो माह इसका उपयोग अवश्य करें । 
  • अपने कंधों को बारी-बारी से पीछे से नीचे की ओर घुमाएं। यह एक साधारण मुद्रा है और पेट व कमर के पास की चर्बी को घटाने में मदद करता है। 
  • एब्स को ऊपर की ओर खींचना दर्दनाक हो सकता है। लेकिन ऎसा करने से अतिरिक्त चर्बी तेजी से बर्न होती है।  
  • राइट पोस्चर के बारे में हम हमेशा से सुनते आए हैं। लेकिन आमतौर पर लोग इसका पालन नहीं करते । राइट पोस्चर पर ध्यान दें, मोटापा खुद ब खुद घटने लगेगा। 
  • कोई सामान उठाने के लिए अपनी पीठ पर जोर न दें। हमेशा 90 डिग्री के एंगल के साथ झुकें। टखने को मोड़े नहीं। पेट की चर्बी कम करने का यह भी अच्छा उपाय है। 
  • अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रीशन में इस संबंध में एक रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोटापा घटाने के संबंध में किए गए एक दो वर्षीय अध्ययन में पाया गया कि दूध का नियमित सेवन करने वाले दूध से दूर रहने वाले लोगों की तुलना में मोटापा कम करने में अधिक कामयाब होते हैं।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस बाँट रही है पीपल के पौधे ( पढ़िए क्यों ?)

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा कराने का ऐलान किया, तो कांग्रेस इसका कड़ा विरोध कर रही है. 

कांग्रेस का नारा है कि सरकारी खर्चे पर तीर्थयात्रा से बेहतर है घर में ही पीपल की परिक्रमा कर ली जाए. अपनी इसी मुहिम के तहत कांग्रेस राज्य भर में पीपल बांट रही है.

भोपाल में कांग्रेस दफ्तर के अहाते में पूजा-पाठ के बीच पीपल का पेड़ लगाया जा रहा है. इसका मकसद जनता को यह बताना है कि पीपल की परिक्रमा करने से चारों धाम की यात्रा का फल मिलता है.

दरअसल, कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुजुर्गो की पंचायत में उनको सरकारी खर्चे पर तीर्थ यात्रा कराने का वादा किया था. राज्य सरकार ने इसके लिए योजना भी तैयार कर ली है. कांग्रेस ने शिवराज की इस तीर्थयात्रा योजना का तोड़ पीपल को बनाया है.

कांग्रेस के नेता शिवराज सिंह चौहान की योजना का विरोध करने के लिए भागवत पुराण के एक प्रसंग की दुहाई भी दे रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि जब राज्य में पाप बढ़ता है तो राजा तीर्थयात्रा कराता है. बुजुर्गों को इस प्रसंग का जिक्र करते हुए पत्र और कलावा भेजा जा रहा है. साथ ही गांव-गांव में पीपल के पौधे भी बांटे जा रहे हैं.

उधर, बीजेपी का कहना है कि राज्य सरकार की तीर्थयात्रा की योजना से कांग्रेस घबरा गई है. यही वजह है कि जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे नाटक किए जा रहे हैं.

भारत की दुर्दशा के लिए गांधी परिवार ही दोषी - ग्लेन लेविन

आर्थिक रैटिंग तय करने वाली संस्था मूडी ने भारत के मौजूदा आर्थिक हालात के लिए गांधी परिवार को दोषी ठहराया है। मूडी के वरिष्ठ विश्लेषक ग्लेन लेविन का कहना है कि सरकार की वास्तविक ताकत गांधी परिवार है। और इसी वजह से सरकार कोई भी फैसला नहीं ले पा रही है। कई अहम बिल पारित नहीं हो पा रहे हैं। 

हालिया विधानसभा चुनाव के बाद गांधी परिवार ने आर्थिक सुधारों के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का मौका खो दिया। उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव में हार के लिए भी गांधी परिवार को दोषी ठहराया गया है। ग्लेन ने कहा कि कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान पिछड़े इलाकों का दौरा करने में अनगिनत पैसा लगाया लेकिन अवसर खो बैठे। मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को जोरदार पटखनी दी। इससे कांग्रेस की बोलती बंद हो गई।

सवाल यह है कि कब तब हम इस गाँधी परिवार को सरकार बनाते रहने का मौका देते रहेंगे ?

भारत में दवाइयों के दामों में भारी गिरावट के संकेत

रोजमर्रा और जीवनरक्षक दवाइयों के दामों में भारी गिरावट के संकेत मिले है.इतना ही नहीं कुछ दवाइयों के दामों का निर्धारण खुले बाजार के हवाले करने का प्रस्ताव है. इससे महंगी दवाइयों के दामों में कम से कम 5 फीसद गिरावट आएगी. दवा मूल्यों के निर्धारण पर दवा उत्पादकों के एकाधिकार को समाप्त करने के लिए सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों का एक समूह गठित किया था. इसकी बैठक बृहस्पतिवार को है.

कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में गठित इस समूह की बैठक पर पूरे दवा उद्योग जगत की नजर है. दवाइयों के मूल्य नियंतण्रएवं सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराने के सरकारी एजेंडे को ध्यान में रखते हुए तमाम विशेषज्ञों की राय मांगी गई थी.

इसमें कई क्षेत्रों के वैज्ञानिक व अनुसंधानकर्ता भी शामिल थे जिन्होंने अंग्रेजी दवाइयों के बुनियादी तत्वों व रसायनों का जिक्र करते हुए कहा था कि जो तत्व दवाइयों में मिलाए जाते है उनका मूल्य इतना ज्यादा नहीं होता है जितना पैसा मरीजों से वसूला जाता है. दवा उद्योग जगत पर स्वास्थ्य मंत्रालय का कोई अंकुश नहीं है जबकि दवाइयों की खरीद-फरोख्त में सबसे बड़ा माध्यम अस्पताल और डाक्टर हैं. दवा उद्योग जगत पर रसायन और उर्वरक मंत्रालय का नियंतण्रहै.

यह पहला मौका है जब दवाइयों के मूल्य निर्धारण को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय को तवज्जो दी गई है और उसी की सिफारिशों के आधार पर मंत्रियों के समूह की बैठक का एजेंडा तैयार किया गया है. वैसे तो जीवनरक्षक एवं रोजमर्रा की सूची में 15 सौ से अधिक दवाइयों के नाम हैं मगर इनमें सर्वाधिक मांग एवं खपत वाली 348 ऐसी दवाइयों की पहचान की गई है जिनके मूल्यों को नियंत्रिश्वत करने का प्रस्ताव है.

ऐसा करने से इन दवाइयों के दामों में 50 फीसद से ज्यादा की गिरावट आ जाएगी. यह भी पता चला है कि तंबाकू लॉबी की ही तरह अंग्रेजी दवा उद्योग जगत भी सरकार पर दबाव बनाने में लगा हुआ है.

यह लॉबी चाहती है कि दवाइयों के मूल्य निर्धारण पर उसके एकाधिकार को न समाप्त किया जाए. मगर सरकार का मानना है कि जब ‘जन स्वास्थ्य औषधि योजना’ के तहत सरकारी क्षेत्र की दवा उत्पादक कंपनियां सस्ते मूल्य की दवाइयों का उत्पादन कर सकती हैं तो फिर निजी क्षेत्र की कंपनियों को परहेज क्यों है.

इस योजना के तहत जो दवाइयां बहुत कम मूल्य पर मिल जाती है वही दवाइयां ब्रांडेड कंपनियों में बहुत ही महंगी हैं. मंत्री समूह को यह जानकारी भी दी गई है कि हाल के वर्षो में योग एवं आयुव्रेद के क्षेत्र में आई क्रांति के चलते देशी दवाइयों की मांग बढ़ गई है और वे सस्ती भी हैं.

इसी तरह होम्योपैथी के विशेषज्ञों ने एक रिपोर्ट दी है जिसमें कहा गया था कि जिन रोगों के निवारण की दोनों पद्धतियों में दवाइयां है उनमें एलोपैथी के मुकाबले होम्योपैथी दवाइयां काफी सस्ती और सटीक हैं.

इन विशेषज्ञों ने होम्योपैथी और ऐलोपैथी दवाइयों के मूल्यों की तुलनात्मक रिपोर्ट भी दी है.

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को परिचय पत्र जारी होंगे

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए अलग से परिचय पत्र जारी किया जाएगा। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हिंदुओं से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान पाक प्रशासन ने इस बात का भरोसा दिया कि अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए जल्द ही अलग से कंप्यूटराइज राष्ट्रीय पहचान पत्र (सीएनआईसी) जारी किए जाएंगे। इसमें वे विवाहित महिलाएं भी शामिल होंगी, जो कार्ड पाने के लिए परेशानियों का सामना कर रही हैं।

रजिस्टर्ड हिंदू विवाह के लिए कोई कानून नहीं:

आश्वासन के बाद, मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने परिचय पत्र प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रही महिलाओं के मामले का निपटारा किया। मालूम हो कि कोर्ट ने खुद ही मामले को संज्ञान में लिया था। दरअसल पाकिस्तान में रजिस्टर्ड हिंदू विवाह कि लिए कोई कानून नहीं है। इस लिए वहां की महिलाएं अपने विवाह का सबूत नहीं दे पाती हैं और उन्हें पहचान पत्र से भी वंचित कर दिया जाता है।

पहचान पत्र जारी करने के नियमों में बदलाव पर विचार:

परिचय पत्र जारी करने वाले नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (एनएडीआरए) के लीगल डायरेक्टर ने कोर्ट को बताया कि इस मसले पर एनएडीआरए की जल्द ही एक बैठक होगी, जिसमें हिंदुओं को कंप्यूटराइज राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने के सरकारी नियम में बदलाव के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इस मामले में 30 मार्च को आखिरी सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि एनएडीआरए द्वारा एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि विवाहित हिंदू महिलाओं द्वारा विवाह का एक हलफनामा दाखिल किए जाने के बाद उन्हें सीएनआईसी जारी किया जाए।

हिंदुओं के अधिकारों की हो सके रक्षा:

हालांकि अदालत ने यह माना था कि इस तरह के सर्कुलर हिंदुओं को पूरी कानूनी सहायता नहीं दे सकते। इसके लिए या तो कानून में बदलाव किया जाना चाहिए या फिर एनएडीआरए के चेयरमैन द्वारा कुछ ऐसे नियम बनाए जाने चाहिए, जो हिंदू नागरिकों को आई कार्ड जारी करना सुनिश्चित कर सकें। सोमवार की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एनएडीआरए के चेयरमैन से कहा कि वह नियमों में कुछ ऐसे संशोधन करे, जिससे हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा हो सके। साथ ही कोर्ट ने एनएडीआरए चेयरमैन को यह आदेश दिया कि इस संशोधन की कॉपी रजिस्ट्रार के पास जमा की जाए। साथ ही पीठ ने यह भी कहा था कि लोगों की जागरूकता के लिए इस संशोधन संबंधित प्रस्ताव को अखबारों में प्रकाशित कराया जाना चाहिए।

विवाहित महिलाओं के लिए बड़ी राहत:

इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा पाक हिंदू महिलाओं को मिलेगा। क्योंकि वहां हिंदू विवाह का पंजीकरण किए जाने की व्यवस्था नहीं है। इसके लिए कोई कानून हीं है। यही कारण है कि वहां की महिलाएं अपने विवाह का कोई सबूत नहीं दे पाती हैं।

प्रेम सरी माई के मामले से जागी कोर्ट:

- वर्ष 2009 में पाक की शीर्ष अदालत ने एक अखबार में छपे आर्टिकल के बाद इस मामले को अपने हाथ में लिया था। इस लेख में बताया गया था कि किस प्रकार से पाक नागरिक प्रेम सरी माई को एक धार्मिक अनुष्ठान के लिए भारत जाने के लिए पासपोर्ट बनवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

- प्रेम सरी माई के पास उनकी नागरिकता से संबंधित कोई पहचाना पत्र नहीं था। पाकिस्तान में हिंदू विवाह के लिए कोई नियम नहीं होने के कारण उनको और उनके पति को परेशानियों से जूझना पड़ा।

- लेख में बताया गया था कि प्रेम सरी माई को अपना पासपोर्ट पाने के लिए काफी बड़ी रकम घूस के रूप में देनी पड़ी थी। प्रेम सरी ने जब एनएडीआरए में पासपोर्ट के लिए प्रार्थनापत्र जारी किया तो वह आश्चर्य चकित रह गईं क्योंकि प्रशासन ने उन्हें विवाहित महिला माना ही नहीं। साथ ही उन पर अपने पति के साथ अवैध संबंध रखने के भी आरोप लगे।

पंजाब में सड़ते गेहूं की बोरियां और भूख से मरती जनता..

लोगों के पास खाने को अनाज नहीं है और पंजाब में खुले में रखा गेहूं सड़ रहा है. पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर जिले की बंगा तहसील में गेहूं की डेढ़ लाख से ज्यादा बोरियां खुले में पड़ी हैं. बारिश में भीगने से इसमें से काफी सारा गेहूं सड़ गया है. यह हाल उस देश का है जहां की 37 फीसदी से ज्यादा आबादी को दो जून की रोटी भी बड़ी मुश्किल से मुहैया हो पाती है.

जिस बारिश से खेतों में फसलें लहलहाती हैं उसी बारिश से यहां देश का गेहूं सड़ रह है और बदबू मार रहा है. लेकिन सड़ते गेहूं की बदबू भी पंजाब मार्कफेड विभाग के अधिकारियों की नींद नहीं तोड़ पाई है. 

पंजाब मार्कफेड के अधिकारियों के मुताबिक, 'साल 2009-10 वित्तीय वर्ष में गेहूं की करीब 2.34 लाख बोरियां इस जगह रखी गई थीं. बाद में एफसीआई यानी भारतीय खाद्य निगम ने गेहूं की 64,000 बोरियां खरीद लीं. लेकिन एफसीआई ने बाकी के अनाज को मापदंडों पर पूरा न पाने की वजह से खरीदने से इंकार कर दिया और तब से गेहूं की ये बोरिया यहां पड़ी हैं.' 

बारिश से बचाने के लिए बोरियों को ढकने की कोशिश भी हुई. लेकिन बारिश हुई और अनाज भीग गया. 

पंजाब मार्कफेड के अधिकारियों से जब इस बारे में सवाल किए गए तो उन्होंने अनाज के भंडारण की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने महकमे को कई बार चिट्ठी लिखकर अनाज के बारे में जानकारी दी थी लेकिन कोई जवाब नहीं आया. 

गौरतलब है कि साल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि सही भंडारण नहीं होने की वजह से सड़ते अनाज को क्यों नहीं गरीबों में बांट दिया जाता. तब सड़ते अनाज के मामले ने काफी तूल पकड़ा था, लेकिन पंजाब में सड़ते गेहूं की बोरियां इस बात का सबूत हैं कि हालात अब भी नहीं बदले हैं.

सोनिया गाँधी ने भगाया था क्वात्रोच्चि को भारत से (पढ़िए पूरा सच )

स्वीडन के पूर्व पुलिस प्रमुख स्टेन लिंडस्ट्रोम ने दावा किया है कि बोफोर्स तोप दलाली मामले के आरोपी इतालवी व्यापारी ओत्तावियो क्वात्रोच्चि को बचाने में पूर्व प्रधानमंत्री ने अहम भूमिका निभाई थी 

काफी समय तक राजीव गांधी का नाम भी इस मामले के अभियुक्तों की सूची में शामिल रहा लेकिन उनकी मौत के बाद नाम फाइल से हटा दिया गया। सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गयी लेकिन सरकारें बदलने पर सीबीआई की जांच की दिशा भी लगातार बदलती रही। एक दौर था, जब जोगिन्दर सिंह सीबीआई चीफ थे तो एजेंसी स्वीडन से महत्वपूर्ण दस्तावेज लाने में सफल हो गयी थी। जोगिन्दर सिंह ने तब दावा किया था कि केस सुलझा लिया गया है। बस, देरी है तो क्वात्रोक्की को प्रत्यर्पण कर भारत लाकर अदालत में पेश करने की। उनके हटने के बाद सीबीआई की चाल ही बदल गयी। इस बीच कई ऐसे दांवपेंच खेले गये कि क्वात्रोक्की को राहत मिलती गयी। दिल्ली की एक अदालत ने हिंदुजा बंधुओं को रिहा किया तो सीबीआई ने लंदन की अदालत से कह दिया कि क्वात्रोक्की के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं हैं। अदालत ने क्वात्रोक्की के सील खातों को खोलने के आदेश जारी कर दिये। नतीजतन क्वात्रोक्की ने रातों-रात उन खातों से पैसा निकाल लिया।

इटालियन व्यवसायी ओट्टावियो क्वात्रोची, जिसका नाम बोफोर्स घोटाले में का़फी उछला, के गांधी परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध थे और उनके घर में बेरोकटोक आना-जाना था. यह नया खुलासा आईबी के एक अफसर नरेश चंद्र गोसांई और क्वात्रोची के ड्राइवर शशिधरण ने सीबीआई के सामने किया. गोसांई स्वर्गीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एसपीजी सुरक्षा में था और बाद में 1987 से 1989 के बीच सोनिया गांधी का पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर भी रहा था. खुलासे के मुताबिक़, राजीव गांधी के कार्यकाल में क्वात्रोची और उसकी पत्नी मारिया का प्रधानमंत्री आवास में बेरोकटोक आना-जाना था. 1993 में भारत से भागने के पहले तक गांधी परिवार के घर पर क्वात्रोची की आवाजाही बनी रही. शशिधरण का बयान क्वात्रोची की कार की लॉगबुक पर आधारित है, जो कि स्नैम प्रोगेत्ती नाम की इटालियन कंपनी द्वारा रखी जाती थी और जिसका रीजनल डायरेक्टर क्वात्रोची था.

गोसांई के मुताबिक़, प्रधानमंत्री आवास पर निजी गाड़ियों के आने पर सख्त रोक है. बस क्वात्रोची और उसकी पत्नी के लिए ही कोई नियम-क़ानून नहीं था. गोसांई कहते हैं कि प्रधानमंत्री आवास के अंदर जाने के लिए पास बनवाना ज़रूरी होता है, लेकिन क्वात्रोची और उसके परिवार के सदस्यों के लिए पहले से ही हमेशा एक पास तैयार रहता था, ताकि वे कभी भी आ-जा सकें. प्रधानमंत्री आवास पर तैनात होने वाले सारे एसपीजी अधिकारी क्वात्रोची और उसके परिवारजनों को पहचानते थे, जिसकी वजह से उनकी पहचान की जांच नहीं होती थी.

2007 में रेड कार्नर नोटिस के बल पर ही क्वात्रोक्की को अर्जेन्टिना पुलिस ने गिरफ्तार किया। वह बीस-पच्चीस दिन तक पुलिस की हिरासत में रहा। सीबीआई ने काफी समय बाद इसका खुलासा किया। सीबीआई ने उसके प्रत्यर्पण के लिए वहां की कोर्ट में काफी देर से अर्जी दाखिल की। तकनीकी आधार पर उस अर्जी को खारिज कर दिया गया, लेकिन सीबीआई ने उसके खिलाफ वहां की ऊंची अदालत में जाना मुनासिब नहीं समझा। नतीजतन क्वात्रोक्की जमानत पर रिहा होकर अपने देश इटली चला गया। पिछले बारह साल से वहइंटरपोल के रेड कार्नर नोटिस की सूची में है। सीबीआई अगर उसका नाम इस सूची से हटाने की अपील करने जा रही है तो इसका सीधा सा मतलब यही है कि कानून मंत्रालय, अटार्नी जनरल और सीबीआई क्वात्रोक्की को बोफोर्स मामले में दलाली खाने के मामले में क्लीन चिट देने जा रही है।

गांधी परिवार से क्वात्रोची की निकटता बोफोर्स कांड में उसका नाम आने के बाद भी बनी रही. शशिधरण के बयान के अनुसार, 1985 में क्वात्रोची और मारिया क्वात्रोची राजीव और सोनिया के घर दिन में दो-तीन बार आते थे. शशिधरण क्वात्रोची की डीआईए 6253 नंबर की मर्सिडीज चलाता था. शशि कहता है कि जब कभी भी सोनिया गांधी के माता-पिता भारत आते थे, तब वह उन्हें क्वात्रोची के घर ले जाता था. वे दिन भर वहीं रहते थे और मारिया क्वात्रोची उन्हें खरीदारी के लिए घुमाने ले जाती थी. वे साल में 4 या 5 बार भारत आते थे. शशिधरण की कार लॉगबुक के रिकॉर्ड के अनुसार, क्वात्रोची 1989 से 1993 के बीच सोनिया और राजीव से 41 बार मिला.

ग़ौरतलब है कि क्वात्रोची और सोनिया गांधी, 1991 में राजीव गांधी की मृत्यु के बाद भी एक-दूसरे से पहले की ही तरह मिलते रहे. शशि कहता है कि मई 1991 के बाद क्वात्रोची 21 बार दस जनपथ गया. जब क्वात्रोची भारत छोड़ रहा था, तब शशि ड्राईवर ने खुद 29 जुलाई 1993 को उसे एयरपोर्ट तक पहुंचाया था. उस वक्त क्वात्रोची के पास एक ब्रीफकेस के अलावा कुछ नहीं था और उसने शशि से कहा कि वह एक जरूरी मीटिंग के लिए जा रहा है. यह अजीब बात थी, क्योंकि आमतौर पर जब भी क्वात्रोची को कार चाहिए होती थी तो वह पहले शशि को बता देता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ.

इन सारे खुलासों पर भारत सरकार खामोश है और सोनिया गांधी भी, जबकि सीबीआई को दिए गए बयान पर सरकार की प्रतिक्रिया आनी चाहिए और सोनिया गांधी की भी.



कांग्रेस कोमा में और सरकार आईसीयू में - सलमान खुर्शीद

सलमान खुर्शीद ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मंत्री पद से इस्तीफा देने और पार्टी संगठन में जाने की इच्छा जताई है। खुर्शीद ने कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में कांग्रेस और सरकार की हालत पर गंभीर चिंता जताई है।  खुर्शीद ने कांग्रेस अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है कि कांग्रेस कोमा में है और सरकार आईसीयू में हैं। खुर्शीद इस वक्त कानून मंत्री है। 

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की बुरी हार के बाद कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने कहा था कि बड़े नेताओं को जिम्मेदारी लेनी होगी। खुर्शीद की पत्नी विधानसभा चुनाव में हार गई थी। खुर्शीद ने विधानसभा चुनाव के पहले मुस्लिमों को 9 फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था और चुनाव आयोग ने उनको नोटिस भी जारी किया था।

सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगे - मार्कन्डेय काटजू

भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कन्डेय काटजू ने अक्सर एक मनमाना और गैर जिम्मेदार रुख अख्तियार करने के कारण सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के लिए सोमवार को सरकार से एक कमेटी गठित करने के लिए कहा।

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल को लिखे अपने पत्र में काटजू ने कहा कि तत्काल एक पैनल का गठन किया जाय जो सोशल मीडिया को विनियमित कर सके और इस समिति के सिफारिशों के आधार पर उपयुक्त विधान शुरू किया जाय।

उन्होंने कहा कि जब तक यह नहीं किया जाता है तब तक व्यक्ति विशेष या समाज को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

इससे पहले काटजू ने सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी को पत्र लिखा था। सोनी ने कहा था कि पीसीआई प्रमुख ने जो मामला उठाया है वह सिब्बल के मंत्रालय के अंतर्गत आता है वह इससे जुड़े मुद्दे को देखता है।

हिंदुओं को ही निशाना पर क्यों रखा जाता है? - उमा भारती


भाजपा नेता उमा भारती ने निर्मल बाबा पर लगाए गए आरोपों के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हमेशा ही धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मामलों में हिंदुओं को ही निशाना पर क्यों रखा जाता है।
उमा का मानना है कि धार्मिक गतिविधियों के मामले में आजा कल हिंदुओं को निशाना बनाने का चलन चल गया है। हालंकि उन्होंने निर्मल बाबा के बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया।

भाजपा ने तोड़ी चुप्पी :इस्तीफ़ा देने का कारण स्पष्ट करें सिंघवी

भाजपा ने सोमवार को कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी से यह स्पष्ट करने को कहा कि उन्होंने विधि एवं न्याय मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष पद से क्यों इस्तीफा दिया।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि यह एक गंभीर विषय है, जिसके बारे में भाजपा ने अभी तक कोई वक्तब्य नहीं दिया था। अब जबकि उन्होंने संसद की समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है, इसलिए वह ऐसा करने का कारण बताएं।

गौरतलब है कि अभिषेक मनु सिंघवी ने विधि एवं न्याय मंत्रालय पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष पद से और कांग्रेस प्रवक्ता के पद से आज इस्तीफा दे दिया। सिंघवी का इस्तीफा उनसे जुड़ी एक सीडी सामने आने और कल संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू होने से पहले आया है।

यह खबर सामने आने के बाद सिंधवी को पिछले सप्ताह कांग्रेस ब्रीफिंग से हटा दिया गया था। सिंघवी ने हालांकि  सीडी को दुर्भावनापूर्ण और आधारहीन करार दिया है। सिंघवी विधि एवं न्याय मंत्रालय पर उस संसदीय समिति के अध्यक्ष थे जो लोकपाल विधेयक पर विचार कर रही है।

गौरमतलब है कि सीडी के सारे अंश सोशल मीडिया पर आज भी आसानी से उपलब्ध है और उनमे सिंघवी की आवाज और उनका वीडियों साफ़ देखा जा सकता है ..

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