#EarthDay (पृ़थ्‍वी मातृ दिवस) पर विशेष लेख : भारत की पहल


पृथ्वी मातृ को बचाने के लिए भारत की पहल 

पृ़थ्‍वी मातृ दिवस, 22 अप्रैल, 2017


संयुक्त राष्ट्र 22 अप्रैल को एक विशेष दिवस के रूप में पृथ्वी मातृ दिवस मनाता है। 1970 में 10000 लोगों के साथ प्रारंभ किये गये इस दिवस को आज 192 देशों के एक अरब लोग मनाते  हैं। इसका बुनियादी उद्देश्य पृथ्वी की रक्षा और भविष्य में पीढ़ियों के साथ अपने संसाधनों को साझा करने के लिए मनुष्यों को उनके दायित्व के बारे में जागरूक बनाना है।

2017 के विषय "पर्यावरण और जलवायु साक्षरता" का उद्देश्य पृथ्वी माँ की रक्षा के लिए आम लोगों में इस मुद्दे के प्रति जानकारी को और सशक्त बनाया और उन्हें प्रेरित करना है।

आईपीसीसी (जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय पैनल) के मुताबिक भारत जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के मामले में सबसे कमजोर है जो स्वास्थ्य, आर्थिक विकास और खाद्य सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

जलवायु परिवर्तन की इस चुनौती के समाधान के लिए भारत ने 'राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित अंशदान (आईएनडीसी): जलवायु न्याय की दिशा में कार्य करने' के उद्देश्य से एक व्यापक योजना विकसित की है। इस दस्तावेज़ में इस मुद्दे के समाधान के लिए समग्र रूप से अनुकूलता के घटक, शमन, वित्त, हरित प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण को शामिल किया गया है। इन लक्ष्‍यों के क्रियान्वयन के दौरान, विकासशील देशों के लिए स्थायी विकास और गरीबी उन्मूलन को प्राप्त करने के अधिकार के लिये न्यायोचित कार्बन उपयोग का भी आहवान किया गया है।

2030 तक 33 से 35 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई पहलों के माध्यम से अक्षय ऊर्जा हेतु 3500 मिलियन या 56 मिलियन अमरीकी डॉलर से 'राष्ट्रीय अनुकूलन कोष' के गठन से नीतियों की पहल की जायेगी।

इसका मुख्य केन्‍द्र बिन्‍दु वायु, स्वास्थ्य, जल और सतत कृषि की पुनः परिकल्‍पना के अतिरिक्त अभियान के साथ जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्यवाही (एनएपीसीसी) के अतंर्गत राष्ट्रीय अभियानों को फिर से प्रारंभ करना है।  

अनुकूलन रणनीति का उपयोग भूमि और जल संसाधन के स्थायी उपयोग के लिए किया जाता है। देश भर में मृदा स्वास्थ्य कार्ड के क्रियान्वयन, जलशोधन और जल कुशल सिंचाई कार्यक्रम के उपयोग से जोखिम रहित कृषि की दिशा का मार्ग प्रशस्त होगा। जलवायु परिवर्तन संबंधी आपदाओं से किसानों को बचाने की दिशा में फसलों का कृषि बीमा एक और महत्वपूर्ण पहल है।

2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 35 गीगावॉट (गीगा वाट) से 175  गीगावॉट तक बढ़ाने के द्वारा स्वच्छ और हरित ऊर्जा का निर्माण शमन रणनीतियों में शामिल है। सौर ऊर्जा में पांच गुना वृद्धि के साथ इसे 1000 गीगावॉट तक बढ़ाना के लक्ष्य के साथ राष्ट्रीय सौर मिशन के अतिरिक्त देश भर में बिजली पारेषण और वितरण की दक्षता बढ़ाने के लिए स्मार्ट पावर ग्रिड को भी विकसित करना है। 10 प्रतिशत ऊर्जा खपत को बचाने हेतु ऊर्जा की खपत को रोकने के लिए ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया गया है।

हालांकि ये जलवायु परिवर्तन के मुद्दे के समाधान की दिशा में सूक्ष्म स्तर की नीतियां हैं,  लेकिन भारत सरकार ने ऐसी सूक्ष्म परियोजनाओं की शुरुआत की है, जो न सिर्फ ऊर्जा बचाने के लिए महत्वपूर्ण हैं बल्कि सबसे गरीब समूहों के प्रत्यक्ष लाभ में भी योगदान कर रही हैं।

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत, उजाला योजना का शुभारंभ किया गया है जिसके अंर्तगत 22.66 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए हैं इससे न सिर्फ 11776 करोड़ रुपये की बचत होगी बल्कि यह प्रतिवर्ष कार्बन उत्सर्जन में भी 24 मीट्रिक टन की कमी लाएगी।

इसी प्रकार से, बीपीएल कार्ड रखने वाली महिलाओं को पेट्रोलियम मुक्त एलपीजी कनेक्शन दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पहले से ही 2 करोड़ घरों तक पहुंच चुकी है और इसे 2019 तक 8 करोड़ रूपए के परिव्यय के साथ 5 करोड़ घरों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

इसके उपयोग से ग्रामीण महिलाओं पर सीधे प्रभाव पड़ता है, इससे स्वच्छ ऊर्जा स्रोत तक न सिर्फ आसान पहुँच प्रदान करता है बल्कि उनके स्वास्थ्य में सुधार होता है और इसके साथ-साथ वन संसाधनों पर दबाव कम होने के अलावा कार्बन उत्सर्जन भी कम होता है।

स्वच्छ भारत मिशन की एक और रणनीति शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट से ऊर्जा पैदा करने की पहल भी है। इसी तरह देश भर में 816 सीवेज उपचार संयंत्रों में पुर्नचक्रण के माध्यम से अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग करके प्रतिदिन 23,277 मिलियन लीटर पानी को स्वच्छ बनाना एक और पहल है।

बंजर भूमि का पुनरुद्धार करके वन की गुणवत्ता को बढ़ाने तथा 5 मिलियन हेक्टेयर भूमि को वन क्षेत्र में बदलने के वार्षिक लक्ष्य के साथ हरित भारत मिशन एक और पहल है जिससे प्रतिवर्ष 100 मिलियन टन कार्बन को कम किया जाएगा।

पारंपरिक भारतीय संस्कृति ने मनुष्य और प्रकृति के बीच सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व की आवश्यकता पर जोर दिया है। "वसुदेव कुटंबकम" की अवधारणा के साथ पृथ्वी पर सभी जीव रूपों को एक परिवार माना जाता है और यह एक दूसरे पर निर्भरता की अवधारणा को मजबूत करता है। आधुनिक दुनिया में पृथ्वी मातृ दिवस के आगमन से पहले, वेद और उपनिषदों ने धरती को हमारी मां और मानव को बच्चों के रूप में माना है। जलवायु परिवर्तन के संकट के आगमन से पहले, हमारे पूर्वजों ने पर्यावरणीय स्थिरता की अवधारणा पर विचार किया और पृथ्वी को सुरक्षित बनाने के लिए भविष्य की पीढ़ियों तक इसे पहुँचाने का कार्य भी किया।

संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए उस वक्तव्य का स्मरण करना उचित होगा, जिसमें उन्होंने कहा कि, "हमें तकनीकी, नवीनता और वित्त पोषण के साथ सभी की पहुंच तक सस्ती, स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा हेतु एक वैश्विक सार्वजनिक साझेदारी बनानी चाहिए। हमें अपनी जीवन शैली में समान रूप से बदलावों को देखना चाहिए जिससे ऊर्जा पर हमारी निर्भरता कम की जा सके और हमारे उपभोग अधिक दीर्घकालीन हों। यह एक वैश्विक शिक्षा कार्यक्रम को प्रारंभ करने के समान ही महत्वपूर्ण है जो हमारी धरती मां के संरक्षण और इसकी रक्षा के लिए हमारी अगली पीढ़ी को तैयार करता है।"

इस प्रकार से, यह पर्यावरण और जलवायु साक्षरता के माध्यम से ही संभव है, जिसके परिणामस्वरूप जीवन शैली में परिवर्तन से वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन में कमी लाकर हम पृथ्वी माँ को बचा सकते हैं।

 - पांडुरंग हेगड़े

बाबा साहेब : एक विश्‍व मानव [126 वीं जयंती पर विशेष लेख]

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आज भारत बाबा साहेब भीमराव आबेडकर की 126वीं जयन्‍ती मना रहा है; 126 वर्ष पूर्व आज के ही दिन भीम राव का जन्‍म एक छोटे से गांव महू, जो वर्तमान में मध्‍यप्रदेश में है, के पूर्ववर्ती अस्‍पृश्‍य परिवार में हुआ था। 

वास्‍तव में बाबा साहेब आम्‍बेडकर के जीवन और कार्यों के बारे में व्‍यापक अनुसंधान, अध्‍ययन और लेखन हो चुका है। आज हम बाबा साहेब को स्‍वतंत्रता आंदोलन के महानतम नेताओं में से एक के रूप में देखते हैं, जो न केवल एक क्रांतिकारी राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में महान थे, बल्कि शैक्षिक दृष्टि से एक महान बुद्धिजीवी थे। बाबा साहेब नेताओं की उस श्रेणी से  संबद्ध थे, जिन्‍होंने ऐसे विशिष्‍ट कार्य किए, जिनके बारे में बहुत कुछ लिखा जा सकता है, बल्कि उन्‍होंने स्‍वयं भी उपयोगी विषयों पर व्‍यापक लेखन किया, जो भावी पीढि़यों के लिए पढ़ने  योग्‍य है।   

जाने माने समकालीन इतिहासकार रामचन्‍द्र गुहा ने अपनी पुस्‍तकों में से एक पुस्‍तक 'मेकर्स ऑफ मॉडर्न इंडिया' यानी 'आधुनिक भारत के निर्माता' में बाबा साहेब को आधुनिक भारत के निर्माताओं की अग्रणी पंक्ति में रखा है, जिनका जीवन एक समान रूप से असाधारण बुद्धिमता और राजनीतिक नेतृत्‍व की अभिव्‍यक्ति है। एक जान-माने अर्थशास्‍त्री, सामाजिक चिंतक और राज्‍य सभा सदस्‍य नरेन्‍द्र जाधव ने छह खंडों और दो संस्‍करणों, क्रमश: 'आम्‍बेडकर स्‍पीक्‍स' और 'आम्‍बेडकर राइट्स' में आम्‍बेडकर के भाषणों और लेखों को अलग-अलग संकलित एवं प्रकाशित किया है। जाधव ने आम्‍बेडकर को एक ''महान बुद्धिजीवी'' की संज्ञा दी है।  

बाबासाहेब बहु-आयामी व्‍यक्तित्‍व के धनी थे। अर्थशास्‍त्र, समाजशास्‍त्र, मानवविज्ञान और राजनीति जैसे अधिसंख्‍य विषयों में उनकी विद्वता ने उनमें एक स्‍पृहणीय भावना पैदा की, जिसके चलते वे किसी विषय में किसी से कम नहीं थे। इन दिनों अत्‍यन्‍त चर्चित विषय 'अधिक मूल्‍य के नोटों का विमुद्रीकरण' की परिकल्‍पना बाबा साहेब ने उस समय की थी, जब वे अर्थशास्‍त्र के विद्यार्थी थे। उनकी शाश्‍वत विरासत को किसी एक समुदाय, राजनीति, विचार या दर्शन तक सीमित करके देखना वास्‍तव में, उनके प्रति गंभीर अपकार है।     

भारतीय संविधान के निर्माता:

जिन पुरूषों और महिलाओं ने भारत के संविधान का प्रारूप तैयार किया वे अत्‍यन्‍त कल्‍पनाशील और दूरदर्शी थे। बाबा साहेब उस प्रारूप समिति के अध्‍यक्ष थे, जिसने विश्‍व के सर्वाधिक विविधता वाले राष्‍ट्र के लिए सबसे लंबे संविधान का निर्माण किया। यह संविधान दुनिया की आबादी के छठे हिस्‍से के वर्तमान और भविष्‍य को प्रभावित करता है। आप इस बात का सिर्फ अनुमान ही लगा सकते हैं कि आर्थिक और लोकतांत्रिक विकास का समावेशी मॉडल तैयार करने के लिए कितनी अनुकरणीय बुद्धिमता की आवश्‍यकता पड़ी होगी।   

बाबा साहेब एक प्रचंड शिक्षाविद के रूप में:

बाबा साहेब ने कहा था, '' पिछड़े वर्गों को यह अहसास हो गया है कि आखिरकार शिक्षा सबसे बड़ा भौतिक लाभ है, जिसके लिए वे संघर्ष कर सकते हैं। हम भौतिक लाभों की अनदेखी कर सकते हैं, लेकिन पूरी मात्रा में सर्वोच्‍च शिक्षा का लाभ उठाने के अधिकार और अवसर को नहीं भूला सकते। यह प्रश्‍न उन पिछड़े वर्गों की दृष्टि से अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है, जिन्‍होंने तत्‍काल यह महसूस किया है कि शिक्षा के बिना उनका वजूद सुरक्षित नहीं है।'' 

शिक्षा पर बल देने के मामले में बाबा साहेब कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अपने प्राचार्य जॉन डेवी से अत्‍यन्‍त प्रभावित थे। बाबा साहेब अपनी बौद्धिक सफलताओं का श्रेय अक्‍सर प्रोफेसर जॉन डेवी को प्रदान करते थे। प्रोफेसर जॉन डेवी एक अमरीकी दार्शनिक, मनो‍वैज्ञानिक और संभवत: एक सर्वोत्‍कृष्‍ट शिक्षा-सुधारक थे।   

बाबा साहेब औपचारिक शिक्षा विदेश में प्राप्‍त करने के जबरदस्‍त समर्थक्‍ थे। ऐसे समय में जबकि कानून की शिक्षा ब्रिटेन में प्राप्‍त करना अधिक लाभप्रद समझा जाता था, बाबासाहेब ने शाश्‍वत मानवीय मूल्‍यों के प्रति आस्‍था व्‍यक्‍त करते हुए कोलंबिया विश्‍वविद्यालय में जाने का निर्णय किया। उन्‍होंने अमरीकी रेलवे के अर्थशास्‍त्र से लेकर अमरीकी इतिहास तक विविध पाठ्यक्रमों का अध्‍ययन किया। 

धर्म के बारे में बाबासाहेब के विचार :  

डा. आम्‍बेकर ने मैन्‍माड रेलवे वर्कर्स सम्‍मेलन में 1938 में कहा था कि ''शिक्षा से अधिक महत्‍वपूर्ण चरित्र है। मुझे यह देख कर दुख होता है कि युवा धर्म के प्रति उदासीन हो रहे हैं। धर्म एक नशा नहीं है, जैसा कि कुछ लोगों का कहना है। मेरे भीतर जो अच्‍छाई है या मेरी शिक्षा से समाज को जो लाभ हो सकता है, मै उसे अपने भीतर की धार्मिक भावना के रूप में देखता हूं।'' हमें यह समझना चाहिए कि महीनों और वर्षों तक आत्‍ममंथन करने के बाद उन्‍होंने एक धर्म का चयन किया, जो उनके पैतृक धर्म के करीब था। दुनियाभर के धार्मिक प्रमुखों और वैचारिक नेताओं ने उनके समक्ष ऐसे आकर्षक प्रस्‍ताव पेश किए, जिन्‍हें ठुकराना वास्‍तव में कठिन था। उनके व्‍यक्तित्‍व के सांस्‍कृतिक और आध्‍यात्मिक पक्ष को समझना और विश्‍लेषित करना अत्‍यन्‍त कठिन है। एकता में उनकी अटूट आस्‍था थी, जिसका अनुमान उनके इस कथन से लगाया जा सकता है, ''जातीय रूप में सभी लोग विजातीय हैं। यह संस्‍कृति की एकता है, जो सजातीयता का आधार है। मैं इसे अनिवार्य समझते हुए कह सकता हूं कि कोई ऐसा देश नहीं है जो सांस्‍कृतिक एकता के संदर्भ में भारतीय प्रायद्वीप का विरोधी हो।'' 

रचनात्‍कम कूटनीतिज्ञ :

 भारत की विदेश नीति को आकार प्रदान करने में उनके योगदान की कूटनीतिक समुदाय द्वारा अक्‍सर अनदेखी की जाती है। भारत पर चीन के हमले से 11 वर्ष पहले बाबासाहेब ने भारत को पूर्व चेतावनी दी थी कि उसे चीन की बजाय पश्चिमी देशों को तरजीह देनी चाहिए और तत्‍कालीन नेतृत्‍व से कहा था कि संवैधानिक लोकतंत्र के स्‍तम्‍भ पर भारत के भविष्‍य को आकार प्रदान करे।

1951 में लखनऊ विश्‍वविद्यालय में विद्यार्थियों की एक सभा को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा था कि ''सरकार की विदेश नीति भारत को सुदृढ़ बनाने में विफल रही है। भारत सयुक्‍त राष्‍ट्र  सुरक्षा परिषद में स्‍थायी सीट क्‍यों न हासिल करे। इस प्रधानमंत्री ने इसके लिए क्‍यों नहीं प्रयास किया। भारत को संसदीय लोकतंत्र और मार्क्‍सवादी तानाशाही के बीच एक का चयन करते हुए अंतिम निष्‍कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

चीन के संदर्भ में आम्‍बेडकर तिब्‍बत नीति से पूर्णतया असहमत थे। उन्‍होंने कहा था कि ''यदि माओ का पंचशील में कोई विश्‍वास है, तो उन्‍हें अपने देश में बौद्ध धर्मावलंबियों के साथ निश्‍चित रूप से पृथक व्‍यवहार करना चाहिए। राजनीति में पंचशील के लिए कोई स्‍थान नहीं है।''    

आम्‍बेडकर ने लीग आफ डेमाक्रेसीज को अवांछित बताया। उन्‍होंने कहा ''क्‍या आप संसदीय सरकार चाहते हैं?  यदि आप ऐसा चाहते हैं तो आपको उन देशों को मित्र बनाना चाहिए, जो संसदीय सरकार रखते हैं।''

वर्तमान सरकार ने बाबासाहेब की 126वीं जयंती के अवसर पर देश के विकास में अपेक्षित हितभागिता प्रदान करने के लिए दलितों के कल्‍याण के लिए अनेक वैधानिक उपायों की घोषणा की है, जो एक उपयुक्‍त कदम है। मुद्रा योजना और अजा एवं अजजा उद्यमियों के लिए राष्‍ट्रीय केन्‍द्र की स्‍थापना जैसे उपायों से दलित निश्चित रूप से उन क्षेत्रों में अपनी सुदृढ़ उपस्थित दर्ज कर सकेंगे, जो परम्‍परागत रूप में विभिन्‍न कारणों से उनकी पहुंच से बाहर रहे हैं।    

मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए नेहरू जी ने डॉ.आंबेडकर का किया था विरोध


रोहित वेमुला मामले में मीडिया और सभी वितंडावादियों का झूठ पकड़ा गया– तेलंगाना सरकर व पुलिस ने अदालत को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें साफ कहा गया है कि रोहित दलित नहीं था– तो अब, अपने झूठ पर पर्दा डालने, लेकिन इस मुद्दे को लगातार जिंदा रखने के लिए सारे वितंडावादी मिलकर रोहित के पूरे परिवार का धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं!

दलित के नाम पर बोले गए झूठ को सच ठहराना है, इसलिए आज अंबेडकर जयंती के दिन रोहित के पूरे परिवार को बौद्ध बनाया जा रहा है। प्रोपोगंडावादियों का लक्ष्य स्पष्ट है– दलित से झूठी सहानुभूति का मुद्दा तब तक जिंदा रखना है, जब तक यूपी चुनाव न हो जाए!

यह अच्छा है कि रोहित के परिवार को मुस्लिम-ईसाई नहीं बनाया गया और यही बाबा साहब की जीत है। मुस्लिम-ईसाई ने बहुत कोशिश की थी कि बाबा साहब उनका धर्म अपना लें, लेकिन बाबा साहब ने कहा भारत की कुरीतियों को भारतीय तरीके से ही दूर किया जा सकता है, विदेशी तरीकों से नहीं।

बौद्ध धर्म के पतन पर बाबा साहब के विचारों को दबा दिया गया है, जिसमें मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा बौद्ध धर्म को नष्ट करने का पूरा प्रमाण उन्होंने दिया है। आप सभी को बाबा साहब की पुस्तक- ‘दि डिक्लाइन एंड फाल आफ बुद्धिज्म’ जरूर पढना चाहिए। इसे सिर्फ इसलिए दबाया गया ताकि चुनावी गणित में दलित-मुस्लिम कांबिनेशन को साधा जा सके! पाकिस्तान निर्माण पर भी उनकी पुस्तक को पढा जाना चाहिए ताकि मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए देश के साथ हो रहा खिलवाड़ बंद हो!

बाबा साहब चाहते थे कि भारत विभाजन के वक्त आबादी का पूरी तरह से अदला-बदली हो और जिन मुसलमानों ने धर्म को आधार बनाकर अलग देश मांगा था, वो सभी पाकिस्तान चले जाएं, अन्यथा भविष्य में भी विभाजन की परिस्थिति बनी रहेगी और यह आज भी बनी हुई है, जो बाबा साहब की भविष्यवाणी को सही ठहरा रहा है!
 बाबा साहब के विचारों का विरोध करते हुए पं नेहरू ने कहा था, ‘हिंदू राष्ट्र का केवल एक ही मतलब है, आधुनिक सोच को पीछे छोड़ना, संकीर्ण होकर पुराने तरीके से सोचना और भारत का टुकड़ों में बंटना।’
नेहरू अपनी इसी सोच के चलते हिंदू कोड बिल लेकर आए, लेकिन जब बाबा साहब ने संविधान में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात कही तो मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए नेहरू ने इसका विरोध किया। तब उन्हें मुसलमानों की संकीर्णता और पिछड़ापन नहीं दिखा! साथ ही उन सभी मुस्लिम लीडर ने भी इसका विरोध किया, जो जुबान से धर्मनिरपेक्ष भारत की बात कर रहे थे, लेकिन इस्लामी शरिया के पैरोकार थे। वे अपने पोलिटिकल हित साधने के लिए भारत में रुके थे, न कि भारतप्रेम के लिए!

बाबा साहब ने नेहरू की इसी मुस्लिम परस्ती से तंग आकर संसद से इस्तीफा दे दिया। उनकी यदि चलती तो आज समान नागरिक संहिता इस देश में लागू होता, लेकिन फिर भी अनुच्छेद-44 में वह इसकी संभावना बनाए रखने में कामयाब रहे!

नोटबंदी अचल संपत्ति और आवास के लिए वरदान : विनोद बहल,वरिष्‍ठ पत्रकार


नोटबंदी के कदम से संपत्ति की कीमतें कम होंगी,  इससे 'सभी के लिए आवास' के सपने को साकार करने में मदद मिलेगी

                                                        
उच्च मूल्य के नोटों के चलन को बंद करने के कदम के जरिए काले धन के खिलाफ मोदी सरकार द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक अचल संपत्ति क्षेत्र को हिला कर रख देगी, क्‍योंकि इस क्षेत्र में मुख्‍यत: अघोषित पैसे से ही लेन-देन होते रहे हैं। इस ऐतिहासिक कदम से शुरू में इस सेक्टर को सुस्‍ती का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन काला धन बाहर निकालने एवं पारदर्शिता लाने के उद्देश्‍य से की गई यह बड़ी अहम पहल अचल संपत्ति क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित होगी।

रियल एस्टेट एक परिसंपत्ति वर्ग है जिसमें बड़े पैमाने पर काला धन लगाया जाता रहा है। आधिकारिक दर और बाजार दर में बड़ा अंतर होने के कारण संपत्ति के लेन-देन में भारी-भरकम नकदी का इस्‍तेमाल होता रहा है। वैसे तो बैंकों के जरिए मिलने वाले आवास ऋण की बदौलत प्राथमिक बाजार विशेषकर आवासीय क्षेत्र में नकद राशि का लेन-देन बेहद कम संख्‍या में होता है, लेकिन द्वितीयक बाजार में 30 फीसदी या उससे भी ज्‍यादा नकद राशि लगाई जाती रही है। महंगे लक्‍जरी मकानों के लिए होने वाले सौदों में भी नकदी का लेन-देन होता है। जहां तक जमीन का सवाल है, उससे संबंधित सौदों में 40 से लेकर 60 फीसदी तक की नकदी के इस्‍तेमाल की संभावना रहती है। अचल संपत्ति से जुड़े डेवलपर संपत्ति के मूल्‍य पर छूट की पेशकश करके नकद भुगतान को प्रोत्‍साहित करते हैं। काला धन रखने वाले निवेशक सटोरिया खरीदारी करते रहे हैं, जिससे कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ जाती हैं और इससे मुनाफावसूली को बढ़ावा मिलता है। विगत वर्षों के दौरान बदस्‍तूर जारी रहे इस चलन से मकानों की कीमतें इतनी ज्‍यादा बढ़ गईं कि वे आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गए।

हालांकि‍, नोटबंदी के जरिए सरकार द्वारा काले धन के खिलाफ उठाये गए इस अहम कदम से बेहिसाब पैसा रखने वाले सटोरिये बाजार प्रणाली से बाहर हो जाएंगे, जिसके परिणामस्‍वरूप संपत्ति की कीमतें नीचे आ जाएंगी। इससे पहले संपत्ति के लेन-देन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। विगत दो वर्षों के दौरान सरकार ने अचल संपत्ति एवं आवास क्षेत्र में अनेक सुधारों को लागू किया है, ताकि जहां एक ओर यह क्षेत्र और ज्‍यादा विश्‍वसनीय, पारदर्शी एवं निवेशक अनुकूल बन सके, वहीं दूसरी ओर मकानों की कीमतें आम आदमी के लिए किफायती हो सके। इस व्‍यापक उद्देश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए सरकार ने ‘वर्ष 2022 तक सभी के लिए आवास’ नामक अपना प्रमुख कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम के तहत सरकार ने छह करोड़ म‍कान बनाने का एक महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य रखा है और इस उद्देश्‍य की प्राप्ति के लिए सरकार किफायती एवं कम लागत वाले मकानों को बढ़ावा दे रही है क्‍योंकि सर्वाधिक किल्‍लत इसी सेगमेंट में है। सरकार ने किफायती मकानों को बढ़ावा देने के लिए राष्‍ट्रीय आवास बैंक को 4000 करोड़ रुपये का आवंटन किया और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों के लिए मकान एवं झुग्गी बस्तियों के पुनर्विकास को सीएसआर के दायरे में ला दिया। निर्मित क्षेत्र और पूंजीकरण संबंधी आवश्‍यकताओं के लिए छूट दी गई, ताकि एफडीआई तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो सके। दस लाख रुपये तक की कम लागत वाले मकानों के लिए छह फीसदी की रियायती ब्‍याज दर की शुरुआत की गई।

आसानी से सस्‍ता कर्ज न मिलना अचल संपत्ति क्षेत्र के लिए अभिशाप साबित हुआ है। इस क्षेत्र में वित्‍त पोषण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एफडीआई के नियम आसान कर दिए और वित्‍त पोषण के विभिन्‍न स्‍वरूपों में भेदभाव समाप्‍त कर दिया। इन  सुधारों के अलावा सरकार ने अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण ‘अचल संपत्ति नियमन अधिनियम’ का मार्ग प्रशस्‍त कर दिया, जो लंबे समय से अटका हुआ था। संपत्ति के लेन-देन को और पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिहाज से यह एक ऐतिहासिक विधान है। इससे संपत्ति, विशेषकर मकान के खरीदारों के हितों की रक्षा होगी, जो बेईमान डेवलपर्स के जाल में फसंते रहे हैं। इसके अलावा जीएसटी विधेयक के साथ–साथ एकल खिड़की मंजूरी वाली प्रस्‍तावित प्रणाली से कारोबार करने में सुगमता को बढ़ावा मिलेगा।

बेनामी संपत्ति अधिनियम के साथ-साथ सरकार के इस नोटबंदी कदम को इसी पृष्‍ठभूमि यानी सरकार की बहुआयामी नीति के रूप में देखा जाना चाहिए, जिससे त्‍वरित आर्थिक विकास के लिए संस्‍थागत एवं नियामक ढांचे का सृजन होगा। इन सभी कदमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और विदेशी निवेशकों के लिए अचल संपत्ति निवेश के लिहाज से एक आकर्षक परिसंपत्ति वर्ग में तब्दील हो सकेगी। इसका असर पहले से ही देखा जा रहा है क्‍योंकि वैश्विक पेंशन फंडों ने अचल संपत्ति एवं बुनियादी ढांचे में अरबों डॉलर के निवेश का वादा किया है।  

नोटबंदी का एक अन्‍य असर ब्‍याज दरों में और कटौती के रूप में देखा जा रहा है, जिनमें पिछले तकरीबन 18 महीनों में 1.5 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। नोटबंदी से बैंकिंग प्रणाली में तरलता को बढ़ावा मिला है और घटती महंगाई को ध्‍यान में रखते हुए बैंकर एवं वित्‍तीय विश्‍लेषक आरबीआई द्वारा दिसंबर में की जाने वाली नीतिगत समीक्षा के दौरान रेपो रेट में 0.25 फीसदी से लेकर 0.50 फीसदी तक की कटौती की उम्‍मीद कर रहे हैं, जिससे प्रभावी ब्‍याज दरें 9 फीसदी से नीचे आ जाएंगी।

नव वर्ष में हम वाजपेयी सरकार के युग में अग्रसर होने की उम्‍मीद कर सकते हैं, जब ब्‍याज दरें 7 से लेकर 8 फीसदी की रेंज में थीं। संपत्ति की कीमतों के नीचे आने और ब्‍याज दरों में कमी के रूप में नोटबंदी के इस दोहरे असर से मकान सस्‍ते होंगे और ‘सभी के लिए आवास’ का सपना साकार होगा। जब नोटबंदी के कारण उपजी आरंभिक अस्थिरता खत्‍म हो जाएगी तो अचल संपत्ति क्षेत्र सतत विकास की दिशा में अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता एवं सामर्थ्‍य के साथ और मजबूत होकर उभरेगा।

लेखक विनोद बहल दिल्‍ली में कार्यरत वरिष्‍ठ पत्रकार हैं और वह अचल संपत्ति एवं बुनियादी ढांचागत क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर प्रमुख समाचार पत्रों में नियमित रूप से लिखते रहे हैं।

इस लेख में व्‍यक्‍त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं।

Exposed: Why the New Rs.2,000 Notes are being Issued


Probable Reasons as to why the new Rs. 2,000 notes are being issued and actions already being taken before demonetization:

Great move by Narendra Modi for Demonetization of Old High Denomination Notes and I would support the Notification for a very big and bold move to reduce Black money and Corruption.

We would like to explain why Rs 2,000 notes been issued in place of Rs 1,000 notes.

Let us simply take 2 Scenarios to understand this!

Scenario A: If  Rs. 2000 Note are not issued but only New Rs. 1000 Notes are issued.

Let’s say, for example Mr. X has Rs. 1,00,000/- black money in 100 Old Notes of Rs. 1000 each.

Mr. X divides that Rs. 1,00,000/- into 10 Equal Bundles, each comprising of 10 Old Notes of Rs. 1000 each and puts each Stack on a Table.

On Day 1 , in the morning Mr. X would deposit the first Bundle i.e. 10 Old Notes of Rs. 1000 valued at Rs. 10,000 into the bank and on same Day 1 in the Evening he would withdraw 10 New Notes of Rs. 1000 again valued at Rs. 10,000 and put it in the Locker in his house.

Now the real Game starts.

On Day 2: Morning , Mr. X would deposit the second bundle of 10 Old Notes of Rs. 1000 valued at Rs. 10,000 kept on the Table. However in his books of accounts submitted to Income Tax Department, he will show that he has deposited the same 10 New Notes which was withdrawn on Day 1 : Evening (which is actually still lying in the Locker of House)

On Day 2: Evening, Mr. X would again withdraw 10 New Notes of Rs. 1000 valued at Rs. 10,000/- and keep the same in Locker. So at the end of Day 2, Mr. X has Rs. 80,000 on Table in Old Notes and Rs. 20,000/- in New Notes in Locker.

Now Day 3 will come in next week as there is a limit of Rs. 20000 per week.

The same exercise shall continue till Day 10 and by the end of Day 10, Mr. X shall have no Old Notes and Rs. 1,00,000 in 100 New 1000 Rupee Note in the Locker.

However, to the Income Tax Department, Mr. X has shown that he was having only Rs. 10,000/- as black money initially (i.e. one bundle of 10 Notes of Rs. 1000) and he has rotated the same Rs. 10,000/- by depositing it into Bank account in the morning and withdrawing it in the evening and again depositing the same on next day and so on.

Thus, Mr. X has paid tax only on initial Rs. 10,000 whereas he has managed to convert all his Black money of Rs. 1,00,000 into new Notes.

This Modus operandi is called Peak theory i.e. theory of rotation of same money which is accepted by most of the High Courts and Tribunals.  Revenue is also helpless to catch Mr. X because the above scenario can also occur in genuine cases where you withdraw money from bank to purchase something and then when you think that no good deal is available, you may again deposit the same money into your bank account and are not required to pay tax again.

honest-people-need-not-worry

Scenario B:  Now if New Rs. 2000 Rupee Note instead of Rs. 1000:

Mr. X deposits first bundle of 10 Old Notes lying on Table in the Bank on Day 1 : Morning and then he withdraws 5 New Notes of Rs. 2000 on Day 1: Evening and keeps it in locker.

Now on Day 2 : Morning when he goes to deposit second bundle of 10 Old Notes of Rs. 1000 each and wrongly shows the Income Tax Department that he has redeposit the same money which was withdrawn on Day 1:Evening – Bingo !!!

He is caught red handed !! Because the Bank slip on Day 2 submitted to bank shows deposition of 10 Notes of Rs. 1000 each whereas the Govt knows that Mr. X could never have withdrawn on Day 1 any note of Rs. 1000 because they were never Printed !!!!

Now Isn’t it really a Master Stroke by Mr. Narendra Modi, the beloved Prime Minister of our country ?!

The above example also gives you an explanation as to why the withdrawal limit is kept so low because the above modus operandi can still be done with Rs. 500 note however, the incentive would be less because Mr. X cannot withdraw more than Rs. 10000/- in a day and even if he withdraws Rs. 10,000/-, there is every possibility that Banks shall give Mr. X,  2000 Rupee note. So Mr. X cannot follow the above modus operandi.

Each and every condition in the Notification is seen to take care of the problems likely to be faced by Citizens and at the same time making sure that such Sophisticated theories are not resorted to by Black money hoarders.

Now, what actions which were already taken in progress before demonetization of Old High Denomination notes:

PM Modi had a full blue print for the development of our country right from Day 1 of his being elected.

Firstly they asked for all the bank account number in your Return of Income

Then they linked your PAN with Aadhar

They linked all the subsidies, pension and other benefits directly to your bank account through Direct Benefit Transfer Scheme.

Then they gave opportunity to all the common men to open an account with bank through Jan Dhan Yojna

They entered into revised treaty with most of the countries in which unaccounted money goes through HAWALA e.g. Mauritius and thus the route of Black Money coming from Mauritius which everyone knew is stopped.

They passed few strict laws to overcome the evil of black money such as Benami Transaction Act and Foreign Black Money Act

They levied Excise duty on Gold.

They also made TCS compulsory for Cash transactions above 2 lakhs.

They withdrew lakhs of pending income tax and service tax litigations where Common men had won at Appeal level and Department had gone further.

They also entered into information exchange agreement with such countries.

Then they gave last opportunity to all black money hoarders through Income Declaration Scheme, 2016

Now they have a Scheme for Dispute Resolution Panel again to reduce Litigation till December 2016.

They also given an option to Black money evaders to declare there unaccounted income in Income Declaration Scheme.

Now the masterstroke, that they have banned Rs. 500 &  Rs. 1000 denominations.

Not only the destination of this whole process is commendable but even the journey or the chronology of these events is interesting which explains the ultimate destination and who knows , may be the journey is still not over \

Conclusion:

So with the above explanation, it has already been cleared that this notification has been issued to eradicate black money from the economy. No doubt, with one single decision this will result in fighting against corruption, terrorism and enhancing digital payment (part of PM Modi vision of Digital India).




भारत को स्वच्छ भारत बनाने के लिए कालेधन पर जबरदस्त प्रहार


भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री का कदम विश्व में अर्थव्यवस्था को स्वच्छ बनाने का पहला बड़ा कदम

काले धन पर प्रहार से मुद्रा स्थिति पर लगाम लगेगी



प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को राष्ट्र को संबोधित किए जाने के दौरान की गई घोषणा के अनुसार 8 नवंबर की मध्य रात्रि से 500 रुपये और 1000 रुपये के करेंसी नोट के प्रचलन की समाप्ति को काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जबरदस्त प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। काला धन और भ्रष्टाचार अनेक दशकों से देश की अर्थव्यवस्था को दीमक की तरह खा रहे थे। सरकार के शीर्ष स्तर पर अनेक महीनों के सोच-विचार के बाद इन करेंसी नोटो को अमान्य करने की अचानक घोषणा से अंतरिम रूप से कुछ मुश्किलें आएंगी, लेकिन प्रधानमंत्री ने लोगों से ठीक ही कहा है कि भ्रष्टाचार और काले धन के दानव को परास्त करने के साथ-साथ जाली नोट के प्रचलन को रोकने के लिए प्रत्येक नागरिक को मूल्य चुकानी होगी। भ्रष्टाचार, काला धन और जाली नोट तथा आतंकवाद को वित्तीय सहायता समस्या की जड़ है।

श्री मोदी ने कहा, ‘देश के विकास के इतिहास में ऐसा समय आता है जब दृढ़ और निर्णायक कदम उठाने की आवश्यकता होती है। गलत तरीके से एकत्रित धन की जमाखोरी के विरुद्ध मोदी के कदम से काले धन को जमा करने वालों पर जबरदस्त प्रहार हुआ है और भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।’

एक ओर गलियों तथा सड़कों को स्वच्छ बनाने और शौचालय निर्माण के लिए स्वच्छ भारत का कार्यक्रम चलाया जा रहा है तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान अर्थव्यवस्था की सफाई के लिए दुनिया के किसी भी भाग में शुरू किया गया सबसे बड़ा अभियान है। काले धन और भ्रष्टाचार से ग्रसित प्रणाली की साफ-सफाई के आकार की कल्पना कीजिए। अनुमान के अनुसार 500 रुपये तथा 1000 रुपये मूल्य के 14 लाख करोड़ करेंसी नोट सर्कुलेशन में हैं यह नोट 31 दिसंबर, 2016 और अधिक से अधिक 31 मार्च, 2017 तक वापस ले लिए जाएंगे।

कुछ बैंकर्स महसूस करते हैं कि इस राशि का एक तिहाई हिस्सा बैंक में जमा नहीं कराया जा सकता, क्योंकि इतनी अधिक मात्रा में धनराशि जमा कराने से कुछ लोग दिक्कत में आ सकते हैं इसका अर्थ यह है कि देश को 4.33 लाख करोड़ रुपये मिलेंगे। यह भारतीय रिजर्व बैंक की घटी देनदारी के संदर्भ में देश को एक तरह की प्राप्ति है।

इस विशाल स्वच्छा अभियान से केन्द्र सरकार की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी और मुद्रा स्फीति के मोर्चे पर सकारात्मक लाभ मिलेगा। यह सामान्य जानकारी की बात है कि मुद्रा स्फीति को काला धन ईंधन प्रदान करता है। वास्तव में रियल स्टेट बाजार नकदी हिस्से पर फलता-फूलता है और इस पर रोक लगेगी। रियलिटी क्षेत्र को झटका लगेगा, लेकिन यह क्षेत्र नई वास्तविकता के अनुसार को अपने को समायोजित कर लेगा। इसलिए विश्लेषक यह सही कह रहे हैं कि काले धन पर प्रहार से मुद्रा स्फीति पर लागाम लगेगा और अंततः सामान्य लोगों को मदद मिलेगी। उन्हें कुछ परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। ऊंचे मूल्य के नोटों लोगों को अमान्य घोषित करने से लोक सेवाओं में भ्रष्टाचार पर प्रीमियम में भारी गिरावट आएगी। राष्ट्र को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने पिछले दो वर्षों में काले धन पर लगाम लगाने के लिए अनेक कदम उठाए। इन कदमों में विदेशी काला धन घोषित करने के लिए कानून, बैंकिंग सूचना साझा करने के लिए अनेक देशों के साथ समझौता, बेनामी कारोबार को नियंत्रित करने के लिए कठोर कानून और जुर्माना अदा करने के बाद काले धन की घोषणा के लिए योजना शामिल हैं। इन प्रयासों से 1.25 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए है। इसमें बैंकिंग प्रणाली में वापस नहीं आने वाली 4.33 लाख करोड़ रुपये को जोड़ा जाए तो कुल रकम 5.50 लाख करोड़ रुपए होती है। यह लाभ मध्यम से दीर्घ अवधि में देश को मिलेगा।

अंतरिम  व्यवस्था में सरकार के लिए एकमात्र चुनौती यह है कि वह यह सुनिश्चित करे कि सामान्य आदमी को काठनाई न हो और बैंकिंग प्रणाली लोगों में यह विश्वास भरे कि सामान्य घरों का धन पूरी तरह सुरक्षित है।

निर्णायक रूप से प्रधानमंत्री ने कहा, ‘ईमानदार नागरिक चाहते हैं कि भ्रष्टाचार, कालाधन, बेनामी संपत्ति, आतंकवाद और जाली नोटों के प्रचलन के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहे। सरकारी अधिकारियों द्वारा बिस्तर के नीचे करोड़ों रुपये के करेंसी नोट रखने और बोरियों में रकम भरने की खबरों से देश के किस ईमानदार नागरिक को तकलीफ नहीं होगी?’

प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा कि विश्व में तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था होन के बावजूद भ्रष्टाचार के सूचकांक में भारत का स्थान ऊंचा है। अनेक कदम उठाने के बावजूद भारत अभी भी भ्रष्टाचार के सूचकांक में 76वें पायदान पर है।

शेयर बाजारों से शुरूआती प्रतिक्रिया प्रतिकूल आई है। ऐसी अपेक्षा थी बाजार में नरमी ट्रम्प की विजय से भी जुड़ी है।

मोदी का यह जबरदस्त कदम भारत के स्वच्छ भारत बनाने में एक छलांग साबित होगा।



*प्रकाश चावला दिल्ली स्थित वरिष्ठ पत्रकार है और अधिकतर राजनीतिक-आर्थिक विषयों पर लिखते हैं।
लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं।

कार्पोरेट सामाजिक दायित्व और निरंतरता पर दिशा-निर्देश


पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक उपक्रम विभाग (डीपीई) द्वारा भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) की अवधारणा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के निरंतर प्रयासों के चलते इसे देश भर में तेजी से अपनाया गया है। डीपीई ने समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी कर और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबंधन के साथ नियमित बातचीत कर इसे लागू करने में सफलता प्राप्त की है। डीपीई ने अप्रैल, 2010 में सीएसआर पर पहले दिशा-निर्देश जारी कर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा अपने लाभ में से एक निर्धारित प्रतिशत को सीएसआर गतिविधियों के लिए रखने संबंधी दिशा-निर्देश बनाया था। इसके बाद डीपीई ने कंपनियों द्वारा स्वैच्छिक रूप से सीएसआर को जिम्मेदारी भरे व्यवसाय के रूप में अपनाने का प्रयास किया। सभी अंशधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद डीपीई ने सीएसआर और निरंतरता पर एक अप्रैल, 2013 से प्रभावी संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए। इसमें विश्व स्तर पर चल रहे सर्वोत्तम प्रयासों को जहां सम्मिलित किया गया, वहीं घरेलू सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं पर ध्यान केन्द्रित रखा गया। परिणामस्वरूप डीपीई दिशा-निर्देशों का प्रयोगकर्ताओं, अंशधारकों और सीएसआर विशेषज्ञों ने स्वागत किया, वहीं अतंर्राष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी प्रशंसा हुई और सार्वजनिक उपक्रम विभाग को अंतर्राष्ट्रीय श्रोताओं के सामने अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित भी किया गया।

कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्वों और निरंतरता पर सार्वजनिक उपक्रम विभाग के दिशा-निर्देशों में समावेशी विकास, पिछड़े क्षेत्रों का विकास, समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों की उन्नति, महिलाओं के सशक्तीकरण, पर्यावरणीय निरंतरता और पर्यावरण अनुकूल और ऊर्जा बचाने वाली तकनीक और निरंतरता विकास के सभी विस्तृत पहलू सम्मिलित हैं। डीपीई दिशा-निर्देशों के द्वारा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हालांकि इसका प्रभाव जानने के लिए कोई विस्तृत अध्ययन नहीं किया गया है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रबंधन द्वारा सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के तहत व्यवसाय करने, जिससे कि निरंतर विकास को बल मिले, संबंधी सुधार देखे गए हैं।

कंपनी विधेयक, 2013 में सीएसआर के विशेष प्रावधानों को सम्मिलित करने से डीपीई द्वारा इस संबंध में सभी अंशधारकों के साथ मिलकर इसका प्रचार करने और भारत जैसे विकासशील देश में इसका उचित क्रियान्वयन करने के प्रयासों का समर्थन हुआ है। कंपनी विधेयक-2013 में सभी कंपनियां जो लाभ के आधार पर आधारित मापदंडों को पूरा करती हो को सीएसआर गतिविधियों पर पिछले तीन साल के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत खर्च करना अनिवार्य किया गया है। भारत संभवतः ऐसा पहला देश है, जिसने कंपनियों द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व को अनिवार्य रूप से पूरा करने के लिए कानून बनाया है। सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम विभाग इस संबंध में अध्ययन कर सीएसआर के क्रियान्वयन को लागू करने और निरंतर विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कार्य कर रहा है। 

प्रेरणादायक: उसने बकरी बेचकर और पायल गिरवी रख बनवाया शौचालय

गत दिनों छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में 104 वर्षीय वृद्धा श्रीमती कुंवरबाई द्वारा बकरियां बेचकर शौचालय निर्माण करने और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कुंवरबाई के चरण स्पर्श करने के वाकये की देशभर में चर्चा रही। लेकिन, महानगरीय चमक-धमक से दूर, राजस्थान के डूंगरपुर जिले के एक आदिवासी परिवार ने लाज बचाने के लिए अपनी आजीविका के प्रमुख साधन बकरी को बेचकर तथा चांदी के आभूषण को गिरवी रखकर कुंवरबाई जैसा ही शौचालय निर्माण का दूसरा अनूठा उदाहरण पेश किया है।

गरीब परिवार की दास्तान:

कहानी है डूंगरपुर-रतनपुर-अहमदाबाद मार्ग पर सड़क किनारे एक टूटी-फूटी झोंपड़ी में रहने वाले श्री कांतिलाल रोत और उसके परिवार की। शहर की एक मिल में दिहाड़ी मजदूरी करने वाला श्री कांतिलाल रोत अपनी विधवा मां, स्वर्गीय छोटे भाई की पत्नी व बच्चों के साथ अपनी पत्नी-बच्चों वाले बड़े परिवार का पालन पोषण कर रहा था। गत दिनों स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर परिषद डूंगरपुर द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत काम कर रहे फिनिश सोसायटी के प्रतिनिधियों ने उससे संपर्क किया और परिवारजनों को शौचालय बनवाने के लिए समझाया। शहर से सटी बस्ती के कारण विधवा मां श्रीमती लाली रोत भी अपनी दोनों बहुओं और खुद के लिए शौचालय की आवश्यकता महसूस कर रही थी। उसे बताया गया कि नगरपरिषद द्वारा प्रोत्साहन राशि के रूप में केन्द्र सरकार की ओर से 4 हजार, राज्य सरकार के 4 हजार रुपये तथा नगरपरिषद की ओर से 4 हजार रुपये मिलाकर कुल 12 हजार रुपये दिए जाएंगे तो पूरा परिवार खुशी-खुशी शौचालय बनवाने के लिए तैयार हो गया।

प्रोत्साहन राशि के चार हजार की प्रथम किश्त मिलने के साथ ही पूरे परिवार ने खुद के हाथों गड्डा खोदना प्रारंभ किया। शेष राशि मिलने के बाद आवश्यक सामग्री खरीद कर उपर का ढांचा और पानी की टंकी भी बना ली परंतु अब उनके पास कारीगरों को चुकाने के लिए राशि खत्म हो चुकी थी। विधवा मां की जिद थी कि शौचालय तो बनेगा ही। उसकी सलाह पर श्री कांतिलाल ने अपने घर की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली सात बकरियों में से एक बकरी 5 हजार रुपये में बेच दी और कारीगरों को मजदूरी का भुगतान किया। अब शौचालय के दरवाजे और अन्य सामग्री के लिए और धनराशि की आवश्यकता हुई तो उसकी पत्नी श्रीमती गौरी ने अपनी शादी में पीहर से आई हुई चांदी की पायल को गिरवी रखने के लिए दे दिया। बस फिर क्या था, श्री कांतिलाल ने बाजार में पायल को गिरवी रखकर चार हजार रुपये लिए और अपने शौचालय को पूर्ण करवाया और अब पूरा परिवार इसी शौचालय का उपयोग करता है।


शौचालय के लिए बकरी बेचने और पायल गिरवी रखने वाला आदिवासी परिवार

सभापति गुप्ता पहुंचे गौरी के घर:

इधर, अपने घर में शौचालय बनाने के लिए बकरी बेचने और पायल को गिरवी रखने वाले आदिवासी परिवार के समर्पण की सूचना नगर परिषद के सभापति श्री के.के.गुप्ता के पास पहुंची तो वह तत्काल ही गौरी के घर पहुंचे और पूरे वाकये की जानकारी लेते हुए गिरवी रखी गौरी की पायल को छुड़वाने के लिए अपनी तरफ से नकद चार हजार रुपये, अंतिम किश्त के चार हजार रुपये का चेक दिया और साथ ही, पूरे परिवार के इस समर्पण के लिए परिवार के मुखिया श्री कांतिलाल, उसकी पत्नी श्रीमती गौरी और विधवा मां श्रीमती लाली रोत का माल्यार्पण से अभिनंदन किया।


आदिवासी परिवार को पुरस्कार राशि देते नगर परिषद सभापति के.के.गुप्ता और आयुक्त


सभापति श्री गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश की मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे के संकल्‍पों को सार्थक करने के लिए डूंगरपुर नगर परिषद प्रतिबद्ध है और नगर परिषद को राजस्थान में पहली ओडीएफ बनाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य जारी है। परिषद के आयुक्त श्री दिलीप गुप्ता ने इस मौके पर जानकारी दी कि परिषद द्वारा 30 जून तक 16 वार्डों को खुले में शौचमुक्त कर दिया जाएगा। प्रताप जयंती होने पर उनके त्याग और समर्पण को प्रोत्साहित करने के लिए उन्‍हें प्रताप की प्रतिमा भी भेंट की।


आदिवासी परिवार को प्रताप की प्रतिमा भेंट करते नगर परिषद के सभापति श्री के.के.गुप्ता और आयुक्त

इस मौके पर शौचालय निर्माण के विषय पर विधवा श्रीमती लाली का कहना था कि बहुओं की लाज बचाने के लिए वो बकरी और चांदी की पायल तो क्या अपना घर भी गिरवी रखना पड़े तो रख देती। श्रीमती लाली और श्रीमती गौरी के इस समर्पण पर न सिर्फ परिवार अपितु आस-पड़ोस के लोग भी बड़े खुश दिखे। इस दौरान फिनिश सोसायटी के श्री निहाल अहसन और नगरपरिषद के कार्मिक भी मौजूद थे।

लेखक - गोपेंद्र नाथ भट्ट


विशेष लेख: योगी अरविंद की ‘हिन्दूराष्ट्र’ की संकल्पना


अंंतरराष्ट्रीयवाद निराधार नहीं है, अपितु वह सनातन धर्म से भारित है !

योगी अरविंद की संकल्पना में भारत में तथाकथित धर्मनिरपेक्षता, मतपेटी की राजनीति एवं भारतीय संस्कृति के परित्याग के लिए स्थान नहीं था । तात्त्विकदृष्टि से योगी अरविंद अंतरराष्ट्रीयवाद के समर्थक थे; परंतु उनकी दृष्टि से अंतरराष्ट्रीयवाद खोखले विश्वबंधुत्व का नहीं, अपितु सनातन धर्म के अनुसार था ।

सनातन धर्म ही राष्ट्रवाद है !

योगी अरविंद ने अपने एक भाषण में ‘हिन्दूराष्ट्र’ एवं सनातन धर्म का दृढ संबंध स्पष्ट करते हुए कहा है कि ‘हिन्दूराष्ट्र’ सनातन धर्म के साथ ही स्थापित हुआ है एवं ‘हिन्दूराष्ट्र’ सनातन धर्म के मार्ग पर अग्रसर होकर ही उत्कर्ष प्राप्त करेगा । जब सनातन धर्म की अवनति होगी, तब ‘हिन्दू राष्ट्र’ की भी अवनति अटल है । यदि सनातन धर्म नष्ट होने की संभावना है, तो ‘हिन्दू राष्ट्र’ भी नष्ट होगा । सनातन धर्म ही राष्ट्रवाद है । नैतिक दृष्टि एवं परंपरा से भारतीय राष्ट्रवाद हिन्दू ही है; क्योंकि यह भूमि एवं उसमें रहनेवाली जनता भूमि की ऐतिहासिक श्रेष्ठता, संस्कृति एवं अभेद्य पौरुष पर ही टिकी है, तभी तो इस भूमि में इस्लाम धर्म, उसकी संस्कृति एवं परंपरा को समा लेने की क्षमता है ।

कांग्रेस समान मुसलमानों की चापलूसी कर हिन्दू-मुसलमान एकता होना असंभव !

हिन्दू-मुसलमान एकता के विषय में योगी अरविंद कहते हैं कि भारत में हुए इस्लाम के उदय के लिए मुंह टेढा करने में कोई अर्थ नहीं है । आरंभ में इस्लाम की पूरी शक्ति, ऊर्जा एवं कृत्य भारत में इस्लामी राष्ट्र स्थापित करने हेतु ही थी । तब भी यदि मुसलमान प्रामाणिकता से स्वदेशी को स्वीकार करेंगे, तो उनके साथ मित्रता रखना संभव है; परंतु यह इस पर निर्भर करता है कि राजनीतिक पटल पर मुसलमानों के साथ एकता बनाए रखने के प्रयास के समय वे भाईचारे के नाते आलिंगन देंगे अथवा शत्रुभाव से लडाई करेंगे । केवल राजनीतिक सुविधा के रूप में अथवा कांग्रेस समान चापलूसी कर हिन्दू-मुसलमान एकता होना असंभव है । मन से ही एकत्रित आने पर यदि उसमें कोई अडचनें आर्इं, तो मूल कारणों का संशोधन कर उस पर समाधान ढूंढना पडेगा । तभी हिन्दू-मुसलमान एकता संभव है । हिन्दू-मुसलमान एकता के लिए हिन्दुओं को अपनी दुर्बलता छिपाने, स्वार्थ हेतु भाई-भाई कहना अथवा उनकी मिथ्या प्रशंसा करना योगी अरविंद को स्वीकार नहीं है । योगी ने कहा कि इस दृष्टि से राष्ट्रवादियों को प्रयास करने चाहिए ।

वन्दे मातरम् धार्मिक नहीं, अपितु राष्ट्रीय गीत है !

जिस समय वन्दे मातरम् गीत को ‘राष्ट्रगीत’ का स्तर देने का विरोध हुआ, उस समय योगी अरविंद के कुछ शिष्यों ने उन्हें कहा कि समाज में कांग्रेस के कुछ लोग वन्दे मातरम् गीत में से देवी-देवताओं के संदर्भवाले कुछ भाग हटाने की मांग कर रहे हैं । क्योंकि ‘दुर्गा’ शब्द समान कुछ शब्द मुसलमानों को स्वीकार नहीं हैं । इस पर योगी अरविंद ने कहा कि वन्दे मातरम् कोई धार्मिक गीत नहीं, अपितु वह एक राष्ट्रीय गीत है एवं उसमें ‘दुर्गा’, यह भारतमाता का रूप है । यह मुसलमानों को अस्वीकार क्यों होना चाहिए ? इस गीत में काव्यस्वरूप दुर्गा की प्रतिमा का वर्णन किया गया है । भारतीयता की संकल्पना में हिन्दू देवी-देवताओं का उल्लेख होना अपरिहार्य है ।

अगस्‍ता घोटाले में पत्रकारों को भी मिले 45 करोड़,राजदीप बरखा खतरे में


हेलीकॉप्‍टर घोटाले में भारतीय पत्रकारों को मैनेज करने के लिए अगस्‍ता वेस्‍टलैंड ने खर्च किए 45 करोड़ रुपए, राजदीप-बरखा संदेह के घेरे में!

कांग्रेस पार्टी के चहेते पत्रकारों में से एक राजदीप सरदेसाई कल अपने टीवी चैनल ‘आजतक’ में बेहद बेचैन थे! बेचैनी में वह न केवल अपनी सीट छोड़ कर बार-बार इधर से उधर चक्‍कर काट रहे थे, बल्कि स्‍वयं में कुछ बड़बड़ा भी रहे थे! बार-बार एक के बाद एक फोन करने से लेकर घड़ी पर उनकी टकटकी से पता चल रहा था कि वह बेहद तनाव में है! ‘आजतक’ के पत्रकार समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर क्‍या वजह है कि राजदीप सरदेसाई इतने उद्विग्‍न नजर आ रहे हैं?

रात AajTak के ’10तक’ शो के लिए वरिष्‍ठ संपादक पुण्‍य प्रसून वाजपेयी उपलब्‍ध नहीं थे। वह बंगाल में चुनाव करवेज में लगे हुए हैं। राजदीप ने कहा कि वह आज ’10तक’ करेंगे। राजदीप ने डॉ सुब्रहमण्यिन स्‍वामी को फोन किया। डॉ स्‍वामी ने उसी दिन बुधवार को राज्‍यसभा में अगस्‍ता वेस्‍टलैंड पर कांग्रेस अध्‍यक्षा सोनिया गांधी का नाम लेकर तहलका मचा दिया था।

पिछले दो साल में हो या फिर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार हो- कांग्रेस के धुर विरोधी भाजपा की इन दोनों सरकारों में भी किसी सांसद या मंत्री ने संसद के अंदर कांग्रेस के गांधी परिवार पर कोई आरोप नहीं लगाया था! यह पहली बार था जब भाजपा के एक सांसद ने संसद के अंदर ‘पवित्र गांधी परिवार’ की मुखिया सोनिया गांधी का नाम अगस्‍ता वेस्‍टलैंड हेलीकॉप्‍टर घोटाले में लिया था। दशकों से चला आ रहा पार्टियों के बीच का अनकहा एथिक्‍स टूट चुका था!

परिणाम भी दिखा, पहली बार सोनिया गांधी और उनके राजनैतिक सलाहकार अहमद पटेल को सड़क पर उतर कर मीडिया के समक्ष अपनी निर्दोषिता की गुहार लगानी पड़ी। अन्‍यथा यूपीए के 10 साल में एक भी बड़ा पत्रकार इन दोनों में से किसी का साक्षात्‍कार नहीं ले सका था! टाइम बदल रहा है!

इसे राजदीप ने भी महसूस किया, जब डॉ. सुब्रहमनियन स्‍वामी ने उनसे कहा कि वह उनके टीवी शो में तभी आएंगे जब वह केवल वन-टू-वन सवाल करेंगे! वह कांग्रेसी प्रवक्‍ताओं के कुतर्कों का जवाब नहीं देंगे। राजदीप ने डॉ स्‍वामी को बुलाने के लिए हामी भर दी, लेकिन उनके शो में स्‍वामी के अपोजिट कांग्रेसी वकील अभिषेक मनुसिंघवी को ले आए। राजदीप ने अपनी बातें डॉ. स्‍वामी के मुंह में डालकर यह कहने की कोशिश की कि डॉ स्‍वामी के पास कोई सबूत नहीं है! सोनिया गांधी के खिलाफ और वह केवल सनसनी पैदा कर रहे हैं! राजदीप ने इस मामले में अभिषेक मनु सिंघवी को भी बीच में लाना चाहा, लेकिन स्‍वामी ने साफ कहा कि वह वन-टू-वन के करार को तोड़ रहे हैं! और यह भी कि वह बातों को घुमाने में माहिर हैं, लेकिन अपनी बात मेरे मुंह में डालकर कहलवाने की कोशिश न करें!

डॉ. स्‍वामी ने कहा कि उनके पास सोनिया गांधी द्वारा घूस लेने का पूरा सबूत है और वह इसे समय आने पर जांच एजेंसी को देंगे। उन्‍होंने यह भी कहा कि ED की अब तक के जांच से वह संतुष्‍ट हैं। राजदीप ने जब कहा कि आप सबूत दिखाइए तो डॉ स्‍वामी ने कहा, आपको क्‍यों दिखाऊं? मैं यह संबंधित एजेंसी को दूंगा। और आज तक आप लोग हमेशा यही कहते रहे हो कि स्‍वामी के पास सबूत नहीं है, लेकिन हर केस में अदालत में मेरे द्वारा प्रस्‍तुत सबूत से आपलोग चुप हो जाते हो! स्‍वामी ने कहा कि चूंकि आपने वन-टू-वन के करार को तोड़ा है, इसलिए मैं जा रहा हूं और वह चले गए।

शो खत्‍म करने के तुरंत बाद राजदीप टीवी टुडे के स्‍टूडियो से बाहर भागे और डॉ स्‍वामी को फोन किया। उस वक्‍त भी उनके चेहरे का डर साफ देखा जा रहा था! अगले दिन यानी आज गुरुवार को राज्‍यसभा में डॉ. स्‍वामी ने जब अगस्‍ता वेस्‍टलैंड घोटाले में भारतीय पत्रकारों की संलिप्‍तता से जुड़े मुद्दे को उठाना चाहा तो कांग्रेस भड़क गई और उन्‍हें मुद्दे को उठाने नहीं दिया! इससे पहले डॉ. स्‍वामी ने एक न्‍यूज लिंक ट्वीट किया था। उस लिंक को पढ़ने और राज्‍यसभा में उनके उठाए जाने वाले सवाल की कड़ी को जोड़कर देखने पर राजदीप सरदेसाई के उस डर का पता चल गया, जो अगस्‍ता वेस्‍टलैंड मामले के सामने आने के बाद से उनके और उनके पूर्व सहयोगी और एनडीटीवी की पत्रकार व 2जी घोटाले में मशहूर पावर ब्रोकर के रूप में सामने आ चुकी बरखा दत्‍त के चेहरे पर लगातार देखा जा रहा है!

राजदीप सरदेसाई व बरखा के चेहरे के भय को लेकर मैं कोई मनगढ़ंत बातें नहीं लिख रहा हूं, बल्कि जो भी लिखा है, वह आजतक एवं एनडीटीवी के अंदर मौजूद पत्रकार साथियों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही लिखा गया है!

हां तो डॉ. स्‍वामी के उस ट्वीट पर सबूतों के साथ भेजे एक उस pgurus.com के लिंक का मैं थोड़ा हिंदी अनुवाद कर देता हूं और मूल लिंक नीचे पाठकों के लिए दे देता हूं ताकि वह पूरा सबूत देख सकें और अंग्रेजी में पूरी रिपोर्ट पढ़ सकें।

भारतीय पत्रकारों को मैनेज करने पर अगस्‍ता ने खर्च किए 45 करोड़ रुपए!

वीवीआईपी हेलीकॉप्‍टर घोटाले में दुबई में बैठे जिस बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल का नाम बार-बार आ रहा है, उसे AgustaWestland की मूल कंपनी Finmeccanica ने भारतीय पत्रकारों को मैनेज करने के लिए साल 2010 से 2012 के बीच करीब 6 मिलियन यूरो (करीब 45 करोड़) रुपए दिए! दस्‍तावेजों से यह जाहिर होता है कि Finmeccanica ने मिशेल की दुबई स्थित कंपनी Global Services FZE के साथ करार किया। आपको ज्ञात होना चाहिए कि अगस्‍ता वेस्‍टलैंड का डील वर्ष 2009 में फाइनल हुआ था और डील के फाइनल होते ही इसमें ली गई घूस आदि की खबर को दबाए रखने के अर्थात मीडिया मैनेजमेंट के लिए सन् 2010 में Finmeccanica ने मिशेल की कंपनी Global Services FZE से करार किया।

मिशेल की कंपनी को Finmeccanica ने मीडिया मैनेजमेंट के लिए 2 लाख 75 हजार यूरो प्रति महीने के हिसाब से अगले 22 महीने तक पेड किया। क्रिश्चियन मिशेल दिल्‍ली के The Claridges होटल से अपनी गतिविधियों को संचालित करता था और वहीं रहता था। उसका काम पत्रकारों व नौकरशाहों को पैसे खिलाकर मैनेज करना था ताकि हो चुके इस डील में आगे किसी भी तरह का अवरोध उत्‍पन्‍न न हो।

भारत की पूरी पत्रकारिता के गंदा चेहरे का सबसे बड़ा सबूत यही है कि 2010 से 2012 के बीच अगस्‍ता वेस्‍टलैंड को लेकर हुए डील पर न एक भी लाइन किसी अखबार में लिखा गया और न ही एक भी खबर न्‍यूज चैनलों में ही कोई खबर चला! अगस्‍ता पर पहली खबर का प्रकाशन व प्रसारण 2013 में उस वक्‍त शुरू हुआ जब इटली की जांच एजेंसी ने Finmeccanica के प्रमुख ओरसी को घूस देने के मामले में गिरफ्तार किया। अर्थात जब भारतीय मीडिया के लिए यह मजबूरी हो गई तभी इस मामले में खबर का प्रकाशन व प्रसारण हुआ! अन्‍यथा उससे पहले मिशेल के 6 मिलियन यूरे के कमाल से भारतीय पत्रकारों का कलम और कैमरा दोनों बंद रहा!

मशहूर वामपंथी अखबार ‘द हिंदू’ ने 26 अप्रैल 2016 को क्रिश्चियन मिशेल जेम्‍स द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व कांग्रेस नेताओं को लिखे पत्र का प्रकाशन किया, जिसमें केवल जेम्‍स नाम से हस्‍ताक्षर किया गया है। उल्‍लेखनीय है कि ‘द हिंदू’ ही वह अखबार है, जिसने मिशेल के पत्र को आधार बनाकर यह झूठ भी प्रकाशिता किया कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली के प्रधानमंत्री के बीच यह करार हुआ है कि भारतीय मछुवारों के हत्‍यारे इटली के मरीन को भारत छोड़ देता, जिसके बदले में इटली गांधी परिवार व कांग्रेस नेताओं को फंसाने के लिए सबूत देगा!

गुलामनबी आजाद ने बुधवार को इसी अखबार को कोट करते हुए यह झूठ बोला, लेकिन सदन के नेता अरुण जेटली ने साफ कहा कि भारतीय व इटली के प्रधानमंत्री के बीच कहीं कोई बैठक या बातचीत ही नहीं हुई और यह केवल मनगढंत कहानी है!

सदन के नेता के स्‍पष्‍टीकरण के बाद गुलामनबी या फिर ‘द हिंदू’ को सबूत पेश करना चाहिए था, लेकिन चूंकि झूठ बोलकर में सोनिया गांधी के प्रति सहानुभूति पैदा करने की कोशिश की गई थी, इसलिए न कांग्रेस और न ही ‘द हिंदू’ ही जेटली द्वारा संसद में किए गए दावे को झुठला सकी!

हां, तो ‘द हिंदू’ ने मिशेल जेम्‍स को कोट करते हुए यह खबर प्रकाशित किया कि उसकी कंपनी और अगस्‍ता वेस्‍टलैंड के बीच किसी तरह का समझौता नहीं हुआ और इस बारे में जो भी बातें कहीं गई है, उसका कोई आधार नहीं है। यहां दिए गए मूल खबर के लिंक को ओपन कर मिशेल व अगस्‍ता की मूल कंपनी के बीच हुए करार की कॉपी पाठक देख सकते हैं।

खबर कहती है कि ‘द हिंदू’ सहित बरखा दत्‍ता व राजदीप सरदेसाई बिचौलिए मिशेल द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को लिखे जिस पत्र का बार-बार जिक्र कर रहे हैं, वह पत्र आखिर उन्‍हें कहां से मिला? प्रधानमंत्री कार्यालय ने तो यह उपलब्‍ध कराया नहीं होगा तो क्‍या बिचौलिए मिशेल से इन पत्रकारों को यह पत्र मिला? और यदि हां तो यह साबित करता है कि मिशेल ने मीडिया मैनेजमेंट के लिए जो 45 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, उसमें ‘द हिंदू’ राजदीप सरदेसाई, बरखा दत्‍ता आदि साझीदार हैं!

इसलिए यह जांच का विषय है कि आखिर बिचौलिए मिशेल द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र की कापी इन पत्रकारों के पास कहां से पहुंची? और जब मिशेल और अगस्‍ता के बीच करार का दस्‍तावेज मौजूद है तो मिशेल के उस झूठे पत्र का ये पत्रकार बार-बार नाम क्‍यों ले रहे हैं? बड़ा सवाल यही है कि एक बिचौलिए के झूठे पत्र और बयान को यह पत्रकार बार-बार क्‍यों उछाल रहे हैं? इन्‍हें हथियारों की दलाली करने वाले एक व्‍यक्ति पर इतना भरोसा क्‍यों है? यह यह 6 मिलियन यूरो की खाई हुई दलाली का असर है?

ऐसा नहीं है कि यह केवल कयासबाजी है। मूल खबर के अनुसार, पत्रकार Raju Santhanam से Enforcement Directorate(ED) ने मोदी सरकार आने के बाद 2015 में पूछताछ की है, जिसमें उसने यह स्‍वीकार किया है कि उसने मिशेल जेम्‍स से लाभ प्राप्‍त किया है। ईडी राजू को गवाह के तौर पर पेश करने की तैयारी कर रही है। कहीं यही कारण तो नहीं है कि राजदीप सरदेसाई और बरखा दत्‍त जैसे पत्रकारों के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही हैं?

जांच में यह भी पता चला है हथियार डीलर अभिषेक वर्मा ने मिशेल जेम्‍स के लिए पत्रकारों को मैनेज किया था। अभिषेक वर्मा वर्तमान में जेल में है। अभिषेक वर्मा मशहूर साहित्‍यकार व पत्रकार श्रीकांत वर्मा का बेटा है। श्रीकांत वर्मा दो बार कांग्रेस से राज्‍यसभा के सदस्‍य रह चुके हैं। यही नहीं, हिंदी के साहित्‍यकार श्रीकांत वर्मा 70 के दशक में राजीव गांधी व सोनिया गांधी को हिंदी सिखाने वाले शिक्षक रह चुके हैं और गांधी परिवार के बेहद करीब रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय ने 2015 में स्थापित किये नए कीर्तिमान,पढ़िए विशेष लेख


मौजूदा और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के माध्यम से परिचालन (ऑपरेशनल) तैयारियों के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2015 में रक्षा मंत्रालय का ध्यान हथियारों एवं उपकरणों की कमी को पूरा करने के लिए मेक इन इंडिया पहल के जरिए आधारभूत ढांचे का विकास और अपेक्षित क्षमता विकसित करने पर ही केंद्रित रहा।

इस वर्ष पूर्व सैनिकों के कल्याण में प्रगति और प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल को पूरा करने की दिशा में रक्षा क्षेत्र में तेजी से डिजिटलीकरण देखने को मिला। इस वर्ष रक्षा कूटनीति के एक हिस्से के तौर पर भारत ने अपने पड़ोसियों और सुदूर पूर्वी देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता, नौसैन्य पोतों के दौरे और द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय युद्ध अभ्यास कर संपर्क स्थापित किया। हालांकि, अपने रक्षा ढांचे को मजबूत और ठोस बनाने के लिए मेक इन इंडिया की अवधारणा में स्पष्ट रूप से अधिग्रहण योजना का बोलबाला है। क्षमता निर्माण के साथ-साथ सशस्त्र बलों की आक्रामक क्षमताओं में तेजी लाने के लिए, अधिग्रहण के मामलों में रक्षा मंत्रालय की सर्वोच्च संस्था रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने वर्ष 2015 के दौरान दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के विभिन्न महत्वपूर्ण और ऊंचे रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी।

एफडीआई सीमा में बढ़ोत्तरी:

तीव्र स्वदेशीकरण के लिए सरकार ने अगस्त 2014 में अनुमोदन के जरिए रक्षा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा 26 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत कर दी। 49 प्रतिशत से अधिक के विदेशी निवेश के प्रस्ताव पर मामले के आधार पर विचार किया जा सकता है।
  • औद्योगिक लाइसेंसिंग के लिए रक्षा उत्पादों की सूची को छोटा और अधिसूचित किया गया है।
  • रक्षा वस्तुओं के निर्यात को तेजी से मंजूरी के लिए सरकार ने एक रक्षा निर्यात नीति को अधिसूचित किया है।
  • डीआरडीओ और रक्षा उत्पादन विभाग के जरिए उद्योग के साथ सहभागिता को सघन बनाया गया है।


भारतीय सेना

आधुनिकीकरण एवं उपकरण

  • सेना घातक, चुस्त, बहुमुखी और नेटवर्क युक्त बनने के लिए निरंतर उन्नत हो रही है ताकि वह संघर्ष के सभी क्षेत्रों में कार्य करने में सक्षम हो। इस कवायद का मकसद सेना को 21वीं सदी के युद्धों की जटिलताओं और अनिश्चित चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार और सक्षम बनाना है। हालांकि आधुनिकीकरण के साथ-साथ सेना के दृष्टिकोण में मार्गदर्शन के कारक बने हुए हैं - ‘सभी समकालीन और उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए क्षमता निर्माण और सेना की परिचालन प्रभावशीलता सुनिश्चित करना।’
  • क्षमता विकास की खोज में सेना इस तथ्य के प्रति सजग है कि कोई भी देश तब तक महत्वपूर्ण शक्ति बनने की अपनी आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकता जब तक कि वह अपनी सैन्य क्षमता की जरूरतों को स्वदेश में ही पूरा नहीं करने लायक नहीं हो जाता। तदनुसार, मेक इन इंडिया को देखते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रमुख खरीद स्वदेशी स्रोतों से ही की जाएं।
  • तोपखाने के आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने सेना के 2,900 करोड़ रुपये मूल्य की 145 बीएई एम777 अल्ट्रा-लाइट-हॉवित्जर तोपों की खरीद के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह सौदा विदेशी सैन्य बिक्री के तहत हुआ है लेकिन इसमें पुर्जों, रखरखाव और गोला-बारूद भारतीय प्रणाली के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा।
  • आकाश हथियार प्रणाली को भारतीय सेना में 05 मई, 2015 को शामिल किया गया। यह भारत में ही विकसित कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली सुपरसोनिक प्रणाली है। यह विमान, हेलीकॉप्टर और यूएवी जैसे कई हवाई खतरों को 25 किलोमीटर की दूरी और 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर ही घेरने में सक्षम है। यह प्रणाली एक साथ कई लक्ष्य साधने में सक्षम है और जमीन पर सेना की भेद्य ठिकानों को कम दूरी का मिसाइल कवर उपलब्ध कराती है। देश की यह अत्याधुनिक हथियार प्रणाली प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया पहल की एक चमकदार अभिव्यक्ति है। 
  • भारतीय सेना के स्वदेशीकरण के प्रयासों के तहत सेना ने दस सार्वजनिक और निजी भारतीय कंपनियों को प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया पहल के तहत ‘भविष्य के इंफैंट्री कांबेट व्हीकल’ (एफआईसीवी) परियोजना के लिए ईओएल जारी किया है।
  • एक महत्वपूर्ण ‘मेक’ परियोजना सामरिक संचार प्रणाली (टीसीएस) है। इसका मकसद युद्ध के मैदान में डटी सेना को एक नेटवर्क केंद्रित वातावरण के जरिए सूचनाएं पहुंचाना है। इसके अलावा युद्धक्षेत्र प्रबंधन प्रणाली (बीएमएस) भी है। यह सैन्य कमांडरों को सामरिक तौर पर स्थित की अपडेट जानकारी, भू-स्थानिक डेटा और लड़ाई के दौरान फार्मेशन स्तर पर आंतरिक सूचनाएं पहुंचाती है।
  • मौजूदा ‘स्वदेशी खरीदो’ खरीद प्रस्ताव में अत्याधुनिक लाइट हेलीकाप्टर, मध्यम दूरी सी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, पिनाका मल्टी बैरल राकेट प्रणाली, इंफैंट्री कांबेट वाहन बीएमपी 2/2के, एमबीटी अर्जुन टैंक, मॉड्यूलर ब्रिज प्रणाली, बालिस्टिक हैलमैट एव बुलेट प्रूफ जैकेट शामिल है।
  • मौजूदा ‘खरीदो एवं स्वदेशी बनाओ’ खरीद प्रस्ताव में तोपखाने के लिए माउंटेड गन सिस्टम (एमजीएस), सेना की हवाई सुरक्षा में तैनात एल/70 और जेडयू-23 बंदूकों के बदले एयर डिफेंस गन, मैकेनाइज्ड बलों के लिए हल्के बख्तरबंद बहुउद्देशीय वाहन (एलएएम-वी) और टी-90 टैंकों के लिए माइन प्लग शामिल हैं।
  • सरकार ने 1947 में आजादी के बाद हुए युद्धों में शहादत देने वाले रक्षाकर्मियों के सम्मान में एक राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाने का फैसला किया है। इंडिया गेट के पास बनने वाले इस स्मारक के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा एक युद्ध संग्रहालय भी बनाया जाएगा। सारी परियोजना पांच साल के भीतर पूरी होगी।
  • गुड़गांव के पास बिनोला में भारतीय राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (आईएनडीयू) के निर्माण का काम तेज गति से चल रहा है। इसके 2018 से शुरू हो जाने की उम्मीद है।


सेना की आधुनिकीकरण की पहल:

  • प्रधानमंत्री की डिजिटल इंडिया पहल के तहत सैन्य कर्मियों की भर्ती प्रक्रिया और संचार नेटवर्क को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। आर्मी रिकॉर्ड ऑफिसर्स प्रॉसेस ऑटोमिशन (एआरपीएएन) 2.0 नाम की एक विशेष सॉफ्टवेयर प्रणाली हाल ही में लांच की गई है। इसके जरिए 12 लाख से ज्यादा जूनियर कमीशन अधिकारी (जेसीओ) और सैनिक अपने सर्विस रिकॉर्ड और रोजगार संबंधी जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे।
  • पहली जुलाई, 2015 से सेना में भर्ती को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। अधिकारियों, जेसीओ और अन्य रैंकों के चयन के लिए भर्ती महानिदेशालय ने  www.joinindianarmy.nic.in  नाम से एक नई वेबासइट लांच की है। इसके जरिए भारत में कहीं से भी कोई भी अभ्यर्थी सेना में कैरियर से संबंधित सूचनाएं प्राप्त कर सकता है और अपनी पसंद के आधार पर ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।
  • 16 अक्टूबर 2015 को रक्षा मंत्री ने भारतीय सेना के निजी क्लाउड का भी उद्घाटन किया। यह भारतीय सेना के डेटा सेंटर की बुनियादी सुविधाओं की शुरुआत है। इसमें एक केंद्रीय डेटा सेंटर, दिल्ली के पास एक डेटा केंद्र और महत्वपूर्ण डेटा की नकल के लिए आपदा रिकवरी साइट भी है। इसके अलावा एक डिजी-लॉकर भी है, जो सेना की सभी इकाइयों के लिए एक सुरक्षित और एक्सक्लूसिव भंडारण स्थान (स्टोरेज स्पेस) प्रदान करता है। इस समर्पित डेटा नेटवर्क को वॉटरमार्किंग और डिजिटल हस्ताक्षर जैसी सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ शुरू किया गया है। यह साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है क्योंकि यह सीडी/डीवीडी और अलग से लगाए जा सकने वाले उपकरणों पर डेटा की सॉफ्ट कॉपी ले जाने के चलन पर नियंत्रण करता है।


सीमा पर स्थिति:

  • सेना की परिचालन तैयारियों में सुधार और तेजी से सीमा पर घुसपैठ की घटनाओं में कमी देखने को मिली है। वर्ष 2012 में नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की 264 वारदात हुईं। वर्ष 2014 में यह संख्या घटकर 221 हो गई। इस साल 30 सितंबर तक घुसपैठ के 92 प्रयास हुए हैं और सुरक्षा बलों ने 37 आतंकवादियों को मार गिराया है। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन पर भी भारतीय सेना ने नियंत्रण किया है। वर्ष 2014 के मुकाबले इसमें कमी देखने को मिली है। इसी तरह भारत और चीन के बीच लगातार हो रही सीमा वार्ताओं से उत्तरी सीमा पर घुसपैठ की घटनाओं में कमी आई है।


संयुक्त युद्ध अभ्यास

ऑपरेशन ‘हैंड इन हैंड’

  • 12 से 22 अक्टूबर, 2015 के बीच चीन के कनमिंग में भारतीय और चीनी सेना ने बटालियन स्तर का संयुक्त अभ्यास किया। ऑपरेशन ‘हैंड इन हैंड’ में आतंकवाद से मुकाबले और ‘आपदा राहत एवं मानवीय सहायता’ का अभ्यास किया गया। इसमें हिस्सा ले रहे दोनों ओर के सैनिकों को संयुक्त प्रशिक्षण दिया गया और उन्होंने मिश्रित समूहों में एक-दूसरे से व्यक्तिगत कौशल (बॉक्सिंग, शुरूआती पर्वतारोहण और शूटिंग), विस्तृत युद्ध कौशल (बाधा पार करना, सघन शारीरिक प्रशिक्षण, विध्वंस करना और प्रतिरोधक गोलीबारी) और विशेष तौर पर आतंकवाद से मुकाबले की स्थिति में ईकाई/उप ईकाई रणनीति सीखी। भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के उद्देश्य से 21-22 अक्टूबर को एक संयुक्त अभ्यास किया गया।

 अभ्यास इंद्र-2015

  • 08 से 18 नवंबर, 2015 के बीच महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारत और रूस के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास इंद्र-2015 किया गया। इस अभ्यास के अंतिम चरण में दोनों देशों के संयुक्त समूहों ने संयुक्त राष्ट्र के तहत एक तीसरे देश की सरकार को उसके अर्ध-शहरी इलाके में सशस्त्र आतंकवादियों से लड़ने में सहयोग किया।


युद्ध अभ्यास-2015

  • अमेरिका के ज्वाइंट बेस लेविस मैकॉर्ड में 09 से 23 सितंबर, 2015 के बीच भारत और अमेरिका ने संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास-2015’ में हिस्सा लिया। इस युद्ध अभ्यास में एक इंफेंट्री सब-यूनिट को भारतीय सेना के मुख्यालय साथ लाया गया और संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान ऐसी ही सहभागिता अमेरिकी सेना की भी रही। इस अभ्यास से संयुक्त राष्ट्र के अधीन दोनों देशों के सैनिकों को शहरी क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के दौरान अपने अनुभवों को साझा करने का आदर्श अवसर मिला।


1965 भारत-पाक युद्ध स्वर्ण जयंती समारोह

  • सेना के संयुक्त प्रयास से 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की स्वर्ण जयंती के अवसर पर कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इसका आयोजन राष्ट्र के सामूहिक संकल्प और सशस्त्र बलों की वीरता एवं बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से किया गया था। स्मृति कार्यक्रमों की शुरुआत 28 अगस्त 2015 से हुई। इन समारोहों का मुख्य आकर्षण इंडिया गेट लॉन में लगी प्रदर्शनी ‘शौर्यांजलि’ रही। इसे शुरुआत में 15 से 20 सितंबर तक प्रदर्शित करने की योजना थी लेकिन जनता द्वारा मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया को देखते हुए प्रदर्शनी को 27 सितंबर तक के लिए बढ़ा दिया गया। इस प्रदर्शनी में युद्ध के मुख्य दृश्यों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया गया साथ ही युद्ध के दौरान विभिन्न सेनाओं की भूमिका और सेवाओं को भी प्रदर्शित किया गया।
  • 20 सितंबर 2015 को इंडिया गेट के लॉन में 1965 के भारत-पाक युद्ध की स्वर्णिम जयंती के अवसर पर एक आनंदोत्सव (कार्निवाल) ‘इंद्रधनुष’ भी आयोजित किया गया। इसमें भारत की विजय का जश्न मनाया गया और सभी के साथ इस कामयाबी का आनंद लिया गया। कार्निवाल के दौरान सेना की विभिन्न रेजीमेंटों ने मार्शल आर्ट जैसी कला का प्रदर्शन किया।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 22 सितंबर को अमर जवान ज्योति पर जाकर शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की और सेवानिवृत्त योद्धाओं (वॉर वेटरर्न्स) से बातचीत की। 1965 की भारत-पाक युद्ध से जुड़े समारोहों के तहत राष्ट्रपति ने भी इसी दिन राष्ट्रपति भवन में सेवानिवृत्त योद्धाओं से चाय पर मुलाकात की। जनता की मांग पर युद्ध प्रदर्शनी 27 सितंबर तक जारी रही।

प्रथम विश्व युद्ध का शताब्दी समारोह

  • भारतीय सेना ने प्रथम विश्व युद्ध में लड़ने वाले 15 लाख भारतीय सैनिकों की याद में नई दिल्ली में 10 मार्च से 14 मार्च के बीच प्रथम विश्व युद्ध का शताब्दी समारोह आयोजित किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारत के 74000 से अधिक सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। संयोग से 10 मार्च 1915 को ब्रिटेन ने फ्रांस के आर्तोइस क्षेत्र पर आक्रमण किया था। इस युद्ध को न्यूवे चैपल के युद्ध के नाम से जाना जाता है। इसमें भारतीय कॉर्प्स की गढ़वाल बिग्रेड और मेरठ डिवीजन ने हिस्सा लिया था। वर्ष 2014 से 2018 तक की अवधि को प्रथम विश्व युद्ध की सौवीं बरसी के रूप में मनाया जा रहा है।

 भारतीय नौसेना

  • अपनी समुद्री क्षमता को बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी क्षमता को मजबूत करने का फैसला किया है। इसके लिए डीएसी ने प्रोजेक्ट 75 (आई) के तहत छह और पारंपरिक पनडुब्बियों के अधिग्रहण के अनुरोध प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की लागत 80,000 करोड़ रुपये के लगभग है। इस कार्यक्रम के तहत विदेशी सहयोग से भारत में छह पारंपरिक पनडुब्बियों के निर्माण की योजना है।
  • नौसेना की आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए सरकार ने 12 माइन काउंटर मेशर्ज वेसल्स (एमसीएमवी) की खरीद का फैसला किया है। इसके लिए आवश्यकता की समझौता (एओएन) जारी कर दिया गया है और विदेश में टीओटी के साथ मामले की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए गोवा शिपयार्ड लिमिटेड को नामजद किया गया है।
  • सरकार ने नौसेना में 16 मल्टी-रोल हेलीकाप्टर (एमआरएच) शामिल करने का फैसला किया है। यह हवाई पनडुब्बी रोधी युद्ध (एयर एंटी-सबमरीन वारफेयर) क्षमता में बने अंतर को काफी हद तक पूरा करेगा। इस पहल के अलावा 28 कामोव हेलीकाप्टरों की बड़ी मरम्मत/मिड लाइफ अपग्रेडेशन (एमआर/एमएलयू)  को आगे बढ़ाया गया है।
  • 15बी गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोत परियोजना के पहले पोत आईएनएस विशाखापत्तनम का 20 अप्रैल 2015 को मझगांव डाक लिमिटेड, मुंबई में जलावतरण कर दिया गया।
  • नौ मई 2015 को समुद्री राज्य गुजरात की मुख्यमंत्री द्वारा पोरबंदर में भारतीय नौसेना के नवीनतम प्रतिष्ठान सरदार पटेल को कमीशन किया गया।
  • प्रोजेक्ट-28 के तहत पनडुब्बी रोधी जंगी पोतों की श्रृंखला के चौथे युद्धपोत आईएनएस कवरत्ती का 19 मई 2015 को रक्षा राज्य मंत्री ने जीआरएसई में जलावतरण किया। प्रोजेक्ट-28 के तहत निर्मित इन चार स्वदेशी पोतों को नई दिल्ली में नौसेना डिजाइन निदेशालय द्वारा डिजाइन किया गया है। यह नौसेना के डिजाइनरों की बहुप्रशंसित विरासत का गवाह है।
  • तटीय रक्षा क्षमता को विस्तार देते हुए नौसेना उपप्रमुख ने 30 जून 2015 को तीन फॉलो-ऑन वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट्स आईएनएस तारमुगली. आईएनएस तिलांचांग और आईएनएस तिहायु का गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड में एक समारोह में जलावतरण किया।
  • कारवार 'प्रोजेक्ट सागर बर्ड' के पहले चरण का काम समय पर प्रारंभ और पूरा हुआ। इस कार्यक्रम के तहत रक्षा मंत्री ने नौ सितंबर 2015 को आईएनएस वर्जकोश को कमीशन किया। यह कर्नाटक के कारवार में भारतीय नौसेना का नवीनतम प्रतिष्ठान है।
  • मेक इन इंडिया पहल ते तहत 29 सितंबर 2015 को तीन इंटरमीडिएट सपोर्ट वेसल (आईएसवी) टी-48, टी-49 और टी-50 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया। 14 आईएसवी मेसर्स एसएचएम शिपकेयर, ठाणे द्वारा स्वदेश में तैयार किए गए हैं। वहीं चार का निर्माण मेसर्स एडीएसबी और पांच का निर्माण मेसर्स रोडमैन पॉलीशिप ने किया है।
  • मुंबई के नेवी डॉकयार्ड में 30 सितंबर 2015 को रक्षा मंत्री ने स्वदेश में ही डिजाइन और निर्मित प्रोजेक्ट 15 ए (कोलकाता श्रेणी) के स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर आईएनएस कोच्चि को नौसेना में कमीशन किया। इस पोत को ‘नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्स’ बताया जा रहा है क्योंकि यह अत्याधुनिक डिजिटल नेटवर्क से लैस है।
  • एआईएसडीएन सूचना का प्रमुख मार्ग है जिस पर सभी सेंसरों और हथियारों का डेटा ले लाया जाता है। सीएमएस का प्रयोग स्वदेशी डेटा-लिंक प्रणाली का उपयोग करने वाले अन्य प्लेटफार्मों से जानकारी को एकीकृत करने और समुद्री क्षेत्र में चौकसी प्रदान करने के लिए किया जाता है। मिश्रित विद्युत आपूर्ति प्रबंधन को एपीएमएस और रिमोट कंट्रोल का प्रय़ोग करके पूरा किया जाता है और मशीनरी की निगरानी एसीएस के माध्यम से की जाती है।
  • स्कॉर्पियन क्लास पनडुब्बी आईएनएस, 'कालवरी' के पहले जहाज पंटून से अलग होने के साथ मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएल) ने एक और मील का स्थापित किया और  28 नवंबर 2015 को नौसेना डॉकयार्ड से इसे रवाना किया गया। तत्पश्चात्  29 अक्टूबर 2015 को आईएनएस 'कालवारी' को वापस मझगांव डॉक लिमिटेड शिपबिल्डर्स में लाया गया।
  • तमिलनाडु के वायु स्टेशन राजाली अराकोणम में भारतीय नौसेना में लंबी दूरी के समुद्री टोही के आठ बोईंग पी-8I शामिल करने के साथ साथ पनडुब्बी रोधी युद्ध विमान शामिल किये गये। (पहला विमान मई 2013 और अंतिम 2015 के मध्य में शामिल हुआ) रक्षा मंत्री ने 13 नवंबर 2015 को औपचारिक रूप से स्क्वाड्रन राष्ट्र को समर्पित किया। पी-8I एयरक्राफ्ट बोइंग 737-800 (एनजी) एयरफ्रेम पर आधारित है जो अमेरिकी नौसेना के पी-8 ए पोजीडॉन का भारतीय नौसेना संस्करण है। समुद्री टोही, पनडुब्बी विरोधी कार्रवाइयों और इलेक्ट्रॉनिक खुफिया मिशन के लिए एयरक्राफ्ट विदेशी और स्वदेशी, दोनों सेंसरों से सुसज्जित है।
  • 2015 का कमांडरों का संयुक्त सम्मेलन एक परिचालन माहौल में आईएनएस विक्रमादित्य पर आयोजित किया गया। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दिशा-निर्देश पर किया गया था। सम्मेलन के दौरान लगभग 30 जहाजों, 05 पनडुब्बियों और 60 विमानों द्वारा शक्ति प्रदर्शन किया गया।


आगे का मार्ग:

20 जुलाई, 2015 को भारतीय नौसेना स्‍वदेशीकरण योजना (आईएनआईपी): 2015-30, की रिलीज के साथ भारतीय नौसेना ने अपने क्षेत्रीय मित्रों और भागीदारों की क्षमता को बढ़ाने तथा समुद्री पड़ोसियों के सुरक्षा प्रदाताओं के लिए एक बिल्‍डर की नौसेना के रूप में खुद को स्‍थापित करने हेतु अपनी संस्‍था का एक नोटिस दिया। इसके अलावा, यह सर्वविदित है कि भारतीय अनुसंधान और विकास तथा विनिर्माण में गंभीर खामियों हैं। जैसे आईएनआईपी के 5 संचालक (1) सैन्‍य विज्ञान प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्‍वसनीय अनुसंधान और विकास की कमी, (2) अनुसंधान और विनिर्माण क्षेत्र के बीच अपर्याप्‍त एककीकरण, (3) उपयोगकर्ताओं डिजाइनरों और निर्माताओं के बीच एकीकृत दृष्‍टिकोण का अभाव, (4) अर्थव्‍यवस्‍थाओं में दृष्‍टिकोण कमी के कारण वाणिज्‍यिक अन-उपलब्‍धता और (5) प्रौद्योगिकी रहित व्‍यवस्‍थाओं का प्रभाव स्‍पष्‍ट रूप से नौसेना की रणनीति में दिखाई देता है।  


संयुक्त अभ्यास

भारत-फ्रांस नौसेना अभ्यास वरूण- 2015

  • भारत-फ्रांस नौसेना अभ्यास (वरूण) का 14वां संस्करण 23 अप्रैल से 02 मई 2015 तक अपतटीय गोवा में संचालित किया गया, जिसमें बंदरगाह और समुद्री चरण दोनों शामिल थे। फ्रांसीसी नौसेना का प्रतिनिधित्व विमान वाहक चार्ल्स डी गॉल, दो विध्वंसक शेवेलियार पॉल और जीन डे वाइन्ने, पुन: आपूर्ति टैंकर मीयूज और एक समद्री पेट्रोल विमान एटलांटिक 2 ने किया। विमान वाहक चार्ल्स डी गॉले के माध्यम से अपने युद्धक विमान रफाल एम, युद्धक विमान सुपर इटेनडार्ड, ई2सी हॉक एडब्ल्यूएसीएस और हेलिकॉप्टर्स डॉफिन और एलाउट्टे 3 को ले जाया गया। भारतीय पक्ष की ओर से विमान वाहक आईएनएस विराट, विध्वंसक आईएनएस मुंबई, स्ट्रेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश, निर्देशित मिसाईल फ्रिगेट आईएनएस गोमती, पुन: आपूर्ति टैंकर आईएनएस टीपक, पनडुब्बी आईएनएस शंकुल और लंबी दूरी के समुद्री टोही पी-8 के साथ त्वरित गति से हमला करने की क्षमता में सक्षम कुछ विमान और सीकिंग 42 बी और चेतक हेलिकॉप्टरों ने भाग लिया।


सिमबैक्स- 2015

पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर, रीयर एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह की कमान के अंतर्गत भारतीय नौसेना का पूर्वी दस्ता दक्षिणी हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में तैनाती के लिए संचालन में था। इस तैनाती के एक अंग के तहत, स्वदेश में निर्मित निर्देशित मिसाइल फ्रिगेट, आईएनएस सतपुड़ा और नवीनतम और स्वदेश में निर्मिति पनडुब्बी-रोधी युद्धक जलपोत 18 मई, 2015 को सिंगापुर पहुँचे। इन युद्धपोतों ने आईएमडीईएक्स-15 में भाग लिया और इसके पश्चात 23 से 26 मई, 2015 को सिंगापुर नौसेना के साथ द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास सिमबैक्स-15 में में भागीदारी की।

ऑसिनडेक्स अभ्यास- 2015 

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच उद्घाटन द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ऑसिनडेक्स-15 का संचालन 11 से 19 सितम्बर, 2015 के बीच भारत के पूर्वी अपतटीय समुद्री क्षेत्र में किया गया। इस अभ्यास का संयुक्त रूप से उद्घाटन विशाखापत्तनम में आईएनएस शिवालिक पर रॉयल ऑस्ट्रेलियन नौसेना (आरएएन) के नौसेना प्रमुख की क्षमता रीयर एडमिरल जोनाथन मीड और पूर्वी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर, रीयर एडमिरल अजेंद्र बहादुर सिंह द्वारा किया गया। अभ्यास का शुभारंभ पेशेवर वार्तालापों के साथ व्यवहारिक प्रदर्शनों और बंदरगाह चरण के साथ हुआ। इसके बाद समुद्री अभ्यास के तहत बेड़े के युद्धाभ्यास, बंदूकों से निशानेबाजी के साथ-साथ समन्वित पनडुब्बी अभ्यासों के प्रदर्शन शामिल किये गये। तत्पश्चात अभ्यास में क्षेत्रीय, संयुक्त और सम्मिलित अभियान जैसे मानवीय सहायता और आपदा राहत को संचालित करने के संदर्भ में दोनों नौसेनाओं की क्षमता में वृद्धि की गई।

मालाबार अभ्यास- 2015

मालाबार अभ्यास के 19वें सत्र का संचालन बंगाल की खाड़ी में 14 से 19 अक्टूबर, 2015 को किया गया। भारतीय नौसेना और अमरीकी नौसेना के साथ इस अभ्यास में जापान मेरीटाईम सैल्फ डिफेन्स फोर्सेस (जेएमएसडीएफ) ने भी भाग लिया। मालबार- 15 के अंतर्गत व्यापक स्तर के पेशेवर वार्तालाप और समुद्री चरण के दौरान संचालनगत गतिविधियों की विविध श्रेणियों को शामिल किया गया। भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व एक स्वदेश में निर्मित युद्धकपोत आईएनएस शिवालिक, आईएनएस रणविजय, आईएनएस बेतवा और बेड़े को सहायता पहुँचाने वाला एक युद्धपोत आईएनएस शक्ति और एक पनडुब्बी आईएनएस सिंधुध्वज ने किया। इसके अलावा, एलआरएम पेट्रोल विमान पी81 और कुछ अभिन्न रोटरी विंग हेलिकॉप्टर्स ने भी इस त्रिपक्षीय अभ्यास में भाग लिया। अमरीकी नौसेना का प्रतिनिधित्व अमरीकी नौसेना के जापान के योकोसुका में तैनात 7वें बेड़े की कैरियर टास्क फोर्स (सीटीएफ) 70 के युद्धपोतों के द्वारा किया गया। निमित्ज़ श्रेणी के एक वायुयान वाहक यूएसएस थियोडोर रॉसवैल्ट, टाईकॉनडेरोगा श्रेणी के क्रूजर यूएसएस नॉरमेडी और फ्रीडम श्रेणी के लिट्टोरल युद्धक पोत यूएसएस फोर्ट वर्थ ने भी सीटीएफ में भाग लिया। परमाणु क्षमता से सम्पन्न पनडुब्बी यूएसएस सिटी ऑफ कॉरपस के अतिरिक्त, चिरिटी, एफ18 विमान और लंबी दूरी के समुद्री पेट्रोल विमान पी8ए ने भी इस अभ्यास में भाग लिया। जेएमएसडीएफ को अभिन्न हेलिकॉप्टर एसएच 60के साथ एक मिसाइल विध्वंसक जेएस फ्यूजुकी के द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस त्रिपक्षीय अभ्यास ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण नौसेनाओं के बीच नौसेना सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आईएनडीआरए-नौसेना-2015

भारत-रूसी द्विपक्षीय अभ्यास आईएनडीआरए नौसेना 2015 का आंठवा संस्करण 7 से 12 दिसम्बर, 2015 के बीच बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम के अपतटीय समुद्री क्षेत्र में संचालित किया गया। इस अभ्यास के दायरे में बंदरगाह चरण के दौरान व्यापक स्तर की पेशेवर वार्ताएं और समुद्र में संचालन गतिविधियों के विविध आयाम शामिल थे। अभ्यास के दौरान, भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व स्वदेश में निर्मित एक युद्धकपोत- आईएनएस सहयाद्री, एक निर्देशित मिसाइल विध्वंसक-आईएनएस रणविजय और बेड़े की सहायता के लिए एक सहायक पोत-आईएनएस शक्ति के साथ-साथ एक पनडुब्बी आईएनएस सिंधुवीर, लंबी दूरी के समुद्री पेट्रोल वायुयान पी81, डॉर्नियर कम दूरी के पेट्रोल वायुयान, हॉक अत्याधुनिक जैट प्रशिक्षक और अन्य अभिन्न रोटेरी विंग हेलिकॉप्टरों के द्वारा किया गया।  द रशियन फैडरेशन नौसेना का प्रतिनिधित्व प्रशांत बेड़े के चार युद्धपोतों के द्वारा किया गया। इस अभ्यास से आपसी विश्वास और आपसी संचालन को भविष्य में और मज़बूत बनाने के साथ-साथ दोनों नौसेनाओं के बीच सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों को साझा करने में भी मदद मिली।

भारतीय वायुसेना

  • भारतीय नौसेना (आईएएफ) अपनी दीर्घकालीन अवधि की परिप्रेक्ष्य योजना के अनुसार अपनी कार्यप्रणालियों को आधुनिक बना रही है। वायुसेना का मुख्य ध्यान रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ स्वदेशी विनिर्माण और विकास को प्रोत्साहन देते हुए ‘’मेक इन इंडिया’’ पर है। आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में क्षमता संवर्द्धन के अंग के तहत मौजूदा हथियार प्लेटफॉर्मो और सहायक प्रणाली के उन्नयन के साथ-साथ नवीन प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।
  • वर्तमान में जारी आधुनिकीकरण योजनाओं के समूचे विस्तार में युद्धक विमान, परिवहन विमान, हेलिकॉप्टर, युद्धक सहायता परिसम्मपत्ति और वायु रक्षा नेटवर्क के साथ-साथ भारतीय वायु सेना की क्षमताओं में वृद्धि शामिल है। निर्बाध अभियानों के लिए समूचे युद्ध क्षेत्र की दृश्यता में वृद्धि को सुनिश्चित करते हुए नेट केन्द्रित, साइबर सुरक्षा इस क्षमता संवर्द्धन के अंग हैं। परिचालन क्षमता को अधिकतम करने के लिए, भारतीय वायुसेना अत्याधुनिक और कुशल संचालन एवं तकनीकी बुनियादी ढांचे का भी निर्माण कर रही है।


अभियान

  अधिग्रहण और उन्‍नयन

एलसीए –हल्‍के लड़ाकू विमान तेजस को वैमानिकी विकास एजेंसी बेंगलुरू द्वारा डिजाईन विकसित किया गया है। एलसीए की प्रारंभिक परिचालन मंजूरी (आईओसी) को 2013 में हासिल किया गया था। आईओसी विन्‍यास में विमानों के उत्‍पादन की पहली श्रृंखला जनवरी, 2015 में भारतीय वायु सेना को सौंपी गई थी।

मिराज-2000 में सुधार  

मिराज-2000 विमान में रडार, हवाई जहाज, इलैक्‍ट्रॉनिक शूट, हथियार, एक आधुनिक कोकपिट की अग्रिम मानकों के सुधार के लिए भारतीय वायु सेना को अनुबंधित किया गया। इस बहुयामी लड़ाकू विमान में आधुनिक संचालन प्रणालियों का विकास किया गया। एक मिराज-2000 को इसकी परिचालन क्षमता का परीक्षण, गति विशेषता की जांच के लिए यमुना एक्‍सप्रेसवे पर उतारा गया।

मिग-29 में सुधार

बेस मरम्‍मत डिपो में मिग-29 विमान की श्रृंखला में उन्‍नयन का कार्य वर्तमान में चल रहा है।

राफेल विमान

भारत सरकार ने भारत और फ्रांसीसी सरकार के मध्‍य अंतर सरकारी समझौते के माध्‍यम से 36 राफेल विमान खरीदने का फैसला किया है। 

सी-17 ग्‍लोब मास्‍टर - ।।।

जून, 2011 में संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका के साथ 10 सी-17 विमानों की आपूर्ति के लिए एक अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए गए जिन्‍हें सितंबर, 2013 में भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया। इसी वर्ष के भीतर सभी विमान भारत के सुपुर्द कर दिए गए जो वायु सेना में परिचालन कर रहे हैं।

एएन-32 में सुधार

एएन-32 का बेड़ा 1984 से 1991 के बीच भारतीय सेना में शुरू किया गया। टोटल टैक्‍निकल लाईफ एक्‍सटेंशन (टीटीएलई)/री-एक्‍यूपमेंट परियोजना पर वर्तमान में कीव, यूक्रेन में काम चल रहा है। और सर्वोत्‍तम बेस रिपेयर डिपो (बीआरडी) कानपुर में है। यह परियोजना विमानों की अवधि में 15 साल का इजाफा करने के साथ इसके परिचालन क्षमता और सुरक्षा में भी विस्‍तार करेगी।

अटैक हेलिकॉप्‍टर

सितंबर, 2015 में 64 ई अपाचे हमलावर हेलिकॉप्‍टरों की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए गए। इन हेलिकॉप्‍टरों की डिलीवरी जुलाई, 2019 से प्रारंभ हो जाएगी। लड़ाकू विमानों का प्रयोग एनटी टैंक गाइडेड मिशाईल, बगावत विरोधी अभियानों दुश्‍मन के हवाई हमलों, मानव रहित वाहन, निराकरण संचालन और बचाव अभियानों के लिए किया जाएगा। अटैक हेलिकॉप्‍टर सुरक्षात्‍मक अद्वितीय क्षमता प्रदान करते हैं, यह क्षमता उत्‍तरी सीमाओं की उंची चोटियों वाले पहाड़ियों के लिए जरूरी है।

हेवी लिफ्ट हेलिकॉप्‍टर (एचएलएच)

सितंबर, 2015 में चिनूक सीएच 47 एफ (आई) हेवी लिफ्ट हेलिकॉप्‍टर (एचएलएच) की खरीद के लिए एक अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए गए थे। हेलिकॉप्‍टरों की डिलीवरी चरणबद्ध तरीके से शुरू होगी। सशस्‍त्र बलों में आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत मिशन शुरू करने और सामरिक और रणनीतिक एयर लिफ्ट मिशन के लिए एचएलएच की आवश्‍यकता जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचों के निर्माण के लिए एचएलएच बहुत ही आवश्‍यक है। इस हेलिकॉप्‍टर के माध्‍यम से भारी समान और निर्माण उपकरणों को पहुंचाया जा सकता है।   

पिलाटस इंडस्क्शनः भारत सरकार और स्विस कंपनी के बीच 24 मई, 2012 में हुए बीटीए खरीद समझौते के क्रम में एम/एस पिलाटस एयरक्राफ्ट लिमिटेड ने अक्टूबर 2015 में आईएएफ को सभी बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट (बीटीए)- पीसी-7  एमके 2 की डिलिवरी पूरी की। इन एयरक्राफ्ट को फिलहाल एबी-इनीशियो पायलट ट्रेनिंग में इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि आगे इन एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल स्टेज-2 फ्लाइंग ट्रेनिंग में भी किए जाने की योजना है। अपनी तरह के इस अनूठे एयरक्राफ्ट से नए नियुक्त पायलटों को युद्ध के दौरान उड़ान के वास्ते तैयार करने में मदद मिल रही है।

माइक्रोलाइटः माइक्रोलाइट्स की आपूर्ति के लिए अक्टूबर 2015 में पीपीस्ट्रेल, स्लोवेनिया के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इनकी डिलिवरी अक्टूबर 2016 से शुरू होगी और अक्टूबर 2020 तक पूरी हो जाएगी। इसे आईएएफ में उड़ान क्षेत्रों में बर्ड संबंधी गतिविधियों के निगरानी के माध्यम से सुरक्षा बढ़ाने और बर्ड्स पर नियंत्रण के उपायों को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल किया जाएगा।

एयर डिफेंस नेटवर्क

एयर डिफेंस रडारः भारत आसमान में मौजूदा एयर डिफेंस रडार व्यवस्था को मजबूत देने, कई नए सेंसर्स को आईएएफ में शामिल किया जा रहा है। हाल में इस दिशा में की गईं पहल निम्नलिखित हैं:

एमपीआरः इजरायल से लिए गए मध्यम क्षमता के रडारों को शामिल किया गया है। इन रडारों ने 80 के दशक की तकनीक की जगह ली है।

एलएलटीआरः सीमा पर निचले स्तर के रडार की कमी को दूर करने के लिए नए लो लेवल ट्रांसपोर्टेबिल रडारों (एलएलटीआर) को आईएफ में शामिल किया जा रहा है, जिन्हें फ्रांस की एम/एस थेल्स से तकनीक के हस्तांतरण के साथ लिया गया है। एम/एस बीईएल अपनी तरह के इन अनूठे रडारों का सीमित संख्या में भारत में उत्पादन करेगी। ये रडार गतिशील हैं और जरूरत के मुताबिक इन्हें कहीं भी तैनात किया जा सकता है।

एलएलएलडब्ल्यूआरः लो लेवल लाइट वेट रडार्स (एलएलएलडब्ल्यूआर) को हमारी मोबाइल ऑब्जर्वेशन फ्लाइट्स (एमओएफ) को इलेक्ट्रॉनिक आई उपलब्ध कराने के वास्ते शामिल किया जा रहा है। ये रडार निचले स्तर की एरियल चुनौतियों को स्कैन करता है और पूर्व चेतावनी जारी करता है।

मिसाइल सिस्टम्स

आकाश मिसाइल सिस्टमः आईएएफ अपनी इनवेंट्री में आकाश मिसाइल सिस्टम (एएमएस) को शामिल करने की प्रक्रिया में है। इसके लिए 10 जुलाई 2015 को एयर फोर्स स्टेशन ग्वालियर में एक औपचारिक समारोह का आयोजन हुआ था।

हारपूनः हारपून एंटी-शिप ऑपरेशन मिसाइलों और उससे जुड़े उपकरणों की खरीद के लिए अगस्त 2010 में समझौता हुआ था। इन हथियारों की ढुलाई और डिलिवरी के लिए एयरक्रू को प्रशिक्षण देने का काम पूरा हो गया है। इन हथियारों के शामिल होने से समुद्र में बढ़ती चुनौतियों का सामना करने में आईएएफ को मदद मिलेगी और समुद्र में भारतीय नौसेना में उसके परिचालन को ज्यादा समर्थन दिया जा सकेगा।
एमआईसीए एयर टू एयर मिसाइलः अपग्रेड किए गए मिराज-2000 एयरक्राफ्ट के लिए हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल एमआईसीए की डिलिवरी शुरू हो गई है और इन मिसाइलों की डिलिवरी से मिराज-2000 की एक सक्षम प्लेटफॉर्म के रूप में क्षमताएं बढ़ेंगी।

एसपीआईसीई-2000 बमः आईएएफ ने फोर्टीफाइड (fortified) और भूमिगत कमांड सेंटर्स के खिलाफ इस्तेमाल के वास्ते ज्यादा सटीक और पहुंच वाले प्रिसीसन गाइडेड बम खरीदे हैं। इस हथियार का परीक्षण किया जा चुका है और इसकी क्षमताओंकी आईएफ की फायरिंग रेंज में भी पुष्टि हुई है।

इंडीजिनस पिचोरा कॉम्बैट सिमुलेटर (आईपीसीएस)

पिचोरा मिसाइल सिस्टम आईएएफ के एयर डिफेंस सेटअप के लिहाज से एक बेहद अहम तत्व है। इस सिस्टम को राष्ट्रीय महत्व की संपत्तियों की रक्षा के वास्ते 1974 से 1989 के दौरान रूस से खरीदा गया था। इसे मिसाइल कॉम्बैट क्रू को प्रशिक्षण देने के वास्ते सिमुलेटर के साथ उपलब्ध कराया गय है। पिचोरा सिस्टम, ओईएम द्वारा तय सीमा से ज्यादा अवधि तक अस्तित्व में है। हालांकि नए सिस्टम को शामिल किए जाने में देरी के चलते इस सिस्टम को अभी बरकरार रखा गया है। कम विश्वसनीय प्रदर्शन और ओईएम से प्रोडक्ट सपोर्ट में कमी के कारण पिचोरा सिस्टम को ज्यादा समय तक इस्तेमाल करना चुनौतीपूर्ण है।

  • ज्यादा अवधि तक इस्तेमाल के क्रम में आईएएफ ने कॉम्बैट क्रू के प्रशिक्षण के लिए पिचोरा कॉम्बैट सिमुलेटर का स्वदेशी क्लास रूम वर्जन तैयार किया गया है। सिमुलेटर को 2.3 लाख रुपए की लागत से स्वदेशी स्तर पर तैयार किया गया है, जबकि वेंडर ने इसके लिए 55 लाख रुपये की लागत क्वोट की थी। भारत के प्रधानमंत्री ने 8 अक्टूबर 2015 को सिमुलेटर के स्वदेशीकरण के वास्ते उत्कृष्टता प्रमाण पत्र दिया था।

मीटरोलॉजी

प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया ‘सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस’ पुरस्कारः मौसम की मौजूदा जानकारी का महत्व और इस्तेमाल उसकी मुद्रा और ऑपरेटर्स और नीति निर्धारकों को रियल टाइम आधार पर उसकी उपलब्धता में निहित होता है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए मौसम विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल –मौसम ऑनलाइन (एमओएल) की योजना बनाई और उसे लागू किया। इसका एक मात्र उद्देश्य मौसम की सही भविष्यवाणी करना है, जिससे कमांडरों और ऑपरेटरों को हवाई परिचालन की योजना बनाने और उन्हें लागू करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ने 8 अक्टूबर, 2015 को 83वें वायु सेना दिवस के मौके पर हुए एक समाहोर में मौसम विभाग के निदेशक को एक सर्टिफिकेट फॉर एक्सीलेंस इन इनोवेशन भी प्रदान किया था।

संयुक्त योजना और परिचालन

भारत-अमेरिका संयुक्त अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’, भारत-ब्रिटेन संयुक्त अभ्यास ‘अजेय वैरियर’, भारत-चीन संयुक्त अभ्यास ‘हाथ में हाथ’, भारत-थाईलैंड संयुक्त प्रशिक्षण ‘अभ्यास मैत्री’, भारत-मालदीव संयुक्त प्रशिक्षण ‘अभ्यास एकुवेरियन’ संयुक्त अभ्यास रहे, जो भारतीय सेना अपनी वायुसेना संपत्तियों के साथ इस साल पहले ही मित्र देशों के साथ कर चुकी है।

  आईएएफ और सिविल अथॉरिटीज के बीच सहयोग
  मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) परिचालन

ओपी राहतः भारत सरकार को युद्ध के चलते यमन जैसे देशों से लगभग 4,000 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को निकालने की जरूरत महसूस हुई।  एमईए, आईएएफ, भारतीय नौसेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयास से भारतीय नागरिकों को कई स्थानों से निकाला गया। जहां भारतीय नौसेना के जहाज यमन के बंदरगाह शहर डिजीबाउटी से नागरिकों को लेकर आए और वायु सेना नागरिकों को साना से डिजीबाउटी तक लेकर आई, वहीं आईएएफ ने भारतीय नागरिकों को डिजीबाउटी से कोच्चि और मुंबई लाने के लिए अपने तीन सी-17 एयरक्राफ्ट लगा दिए थे। आईएएफ के एयरक्राफ्टों ने नागरिकों को लाने के लिए कुल 11 ट्रिप कीं, जिनके माध्यम से 2,096 भारतीय नागरिकों को निकालने में कामयाबी मिली।

ओपी मैत्रीः 25 अप्रैल, 2015 को नेपाल में एक भूकंप आया। इसके बाद भारत ने विदेशी धरती पर सबसे बड़ा आपदा राहत परिचालन शुरू किया और भारत सरकार को सहयोग व राहत उपलब्ध कराई। कुल 1,636 सॉर्टीज (sorties), लगभग 836 घंटों की उड़ान के जरिये हवाई माध्यम से 780 हताहतों (126 विदेशी नागरिकों सहित) को निकाला गया और कई भूकंप प्रभावित क्षेत्रों से 5,188 कर्मचारी निकाले गए।

  • हेलिकॉप्टरः कुल 24 हेलिकॉप्टर उतार दिए गए, जिसमें 741 घंटों में 1,572 सॉर्टीज की गईं। इनके माध्यम के 5,188 पीड़ितों, 780 शवों को निकाला गया। राहत एवं पुनर्वास के कामों में 1,488 सैनिक लगाए गए और 733 टन वजन एयरलिफ्ट किया गया।
  • म्यामांर में बाढ़ राहत परिचालनः 6-7 अगस्त 2015 को एमओडी द्वारा लगाए गए आईएएफ के सी-17 और सी-130जे एयरक्राफ्ट ने दिल्ली से म्यामांर के कलय और मंडालय तक लगभग 104 टन राहत सामग्री एयरलिफ्ट की। सी-17 और सी-130 जे एयरक्राफ्ट मंडालय और कलय तक क्रमशः 48 टन और 10 टन वजन लेकर गए। इसके अलावा गुवाहाटी से 46 टन वजन ले जाने के लिए एक अन्य सी-17 एयरक्राफ्ट को इस्तेमाल किया गया था; जिसे बाद में तीन शटल्स में सी-130 जे एयरक्राफ्ट के माध्यम से कलय को ले जाया गया।

 अन्य देशों के साथ रक्षा सहयोग

अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग के तहत आईएएफ एयर स्टाफ वार्ताओं, पेशेवरों की यात्राओं, खेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से कई मित्र देशों के साथ जुड़ी रही है।

इंद्रधनुष-4: भारत-ब्रिटेन द्विपक्षीय सहयोग के तहत अभ्यास इंद्रधनुष-4 आरएएफ बेस, ब्रिज नॉर्टन और हनिंगटन में 21-30 जुलाई 2015 के बीच संपन्न हुआ। इस अभ्यास में आईएएफके 190 कर्मचारियों ने भाग लिया। इसमें आईएएफ के सुखोई-30एमकेआई, सी-130जे, सी-17, आईएल-78 एयरक्राफ्टों और गरुड़ ने हिस्सा लिया।

संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण (जेएमटी)-15

सिंगापुर एयर फोर्स के साथ एक संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण (जेएमटी-15) 2-22 नवंबर 2015 के बीच एएफ स्टेशन कलईकुंडा में हुआ था। आरएसएएफ ने इसमें अपने 6 एक्स एफ-16 सी/डी एयरक्राफ्ट उतार दिए। द्विपक्षीय अभ्यास दो सप्ताह के लिए 23 नवंबर 2015 तक सुखोई-30 एमकेआई के साथ संपन्न हुआ।

महिलाओं का सशक्तिकरण और कल्याण

बड़े नीतिगत फैसले

सरकार ने आईएएफ की सभी शाखाओं और इकाइयों के लिए योग्य बनाकर महिलाओं को शामिल किए जाने को मंजूरी दे दी। महिलाओं को पुरुषों के समान क्यूआर के रूप में चुना गया। इसके अलावा लिंगभेद को खत्म करते हुए परमानेंट कमीशन देने के वास्ते महिलाओं और पुरुषों दोनों शॉर्ट सर्विस कमीशन पर एक समान क्यूआर लागू कर दिया गया। 15 नवंबर 2015 तक आईएएफ में 348 महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन मिल गया था।

डीआरडीओ

  • 2015 में टैक्टिकल वीपन सिस्टम के क्षेत्र में डीआरडीओ ने मल्टी टारगे, मल्टी डायरेक्शनल क्षमता वाले मीडियम रेंज के एयर डिफेंस सिस्टम आकाश मिसाइल का उत्पादन शुरू किया और उसे शामिल किया।
  • हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र सु-30 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के साथ टारगेट पर मार करने में सक्षम है। मिग-29, सु-30 और भारत के अपने तेजस एयरक्राफ्ट में लगाने के लिए डिजाइन की गई अस्त्र कई सफल परीक्षणों से गुजर चुकी है।
  • सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को जमीन, हवा, समुद्र और उप-समुद्री प्लेटफॉर्म से लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो एक अहम वीपन सिस्टम है। नौसेना के 10 जहाजों में इस अचूक हथियार ब्रह्मोस को तैनात किया गया है और सेना की दो रेजीमेंट के पास यह मिसाइल है। पानी के भीतर से लॉन्च किए जाने वाले वर्जन का सफल परीक्षण हो चुका है। हाल में ब्रह्मोस का भारतीय नौसेना के नए नवेले डिस्ट्रॉयर आईएनएस कोच्चि से सफल परीक्षण किया गया था।
  • हेलिना, एक टैंक रोधी गाइडेड मिसाइल को डायरेक्ट और टॉप अटैक मोड के साथ हल्के उन्नत हेलिकॉप्टर एएलएच में लगाने के लिए डिजाइन किया गया है। भविष्य के हथियारों को पराजित करने के लिए डिजाइन की गई यह मिसाइल अभी परीक्षण के दौर से गुजर रही है।
  • भारत का पहला हल्का मल्टी-रोड सुपरसोनिक कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस चौथी पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट है और यह एयरक्राफ्ट 2,500 से ज्यादा टेकऑफ और लैंडिंग कर चुका है। भारतीय वायुसेना के एक फायर पावर डिमॉन्सट्रेशन ‘आयरन फर्स्ट’ में भी इसका प्रदर्शन किया गया था।
  • एलसीए तेजस को 29 दिसंबर 2013 को शुरुआती परिचालनगत मंजूरी मिली थी और यह अंतिम मंजूरी की ओर बढ़ रहा है। एलसीए तेजस को शुरुआती परिचालनगत मंजूरी मिलने से उत्साहित एलसीए नेवी ने अप्रैल 2012 की अपनी पहली उड़ान के बाद अपनी उड़ानों का परीक्षण शुरू कर दिया है।
  • डीआरडीओ की तकनीक क्षमता स्वदेशी वीपन लोकेटिंग रडार (डब्ल्यूएलआर) के विकास, उत्पादन और उसके स्वीकार के जाने के बाद खासी बढ़ गई है।
  • स्वातिः स्वाति एक उच्च स्तर का गतिशील रडार सिस्टम है, जो एक फेंस डिटेक्शन मोड के साथ परिचालन करती है और शेल्स, मोर्टार और रॉकेटों का तेजी से डिटेक्शन सुनिश्चित करता है।
  • एक विश्वसनीय इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम्स (आईईडब्ल्यूएस) को स्थापित करने के क्रम में डीआरडीओ ने हिमशक्ति के विकास में एक बड़ी सफलता हासिल की। शामिल करने से पहले किसी भी ईडब्ल्यू सिस्टम के लिए फील्ड इवैल्युएशन एंड ट्रायल्स को पहली बार वास्तविक तैनाती क्षेत्र में कराया गया।
  • फायर पावर बढ़ाने के लिए लंबी रेंज वाले पिनाका एमके-2 का विकास किया गया और फिलहाल इसका परीक्षण चल रहा है।
  • एनएसटीएल, विशाखापट्टनम में हाइड्रोडायनामिक परीक्षण इकाई सी कीपिंग एंड मैनोवरिंग बेसिन की स्थापना की गई है और रक्षा मंत्री ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। इस इकाई को नए डिजाइन किए गए जहाजों के प्रदर्शन के अनुमान के लिए मॉडल परीक्षण करने में इस्तेमाल किया जाएगा, साथ ही यहां पर विभिन्न परिस्थितियों में उनके प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।
  • मरीचः यह एक स्वदेशी तौर पर विकसित टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम है, जो किसी टॉरपीडो हमले से किसी नेवल प्लेटफॉर्म को बचाने के लिए भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है।
  • टॉरपीडो लॉन्च करने और रिकवरी के वास्ते डीआरडीओ द्वारा विकसित किए गए आईएनएस अस्त्रआधारिणी भारतीय नौसेना ने तैनात कर दिया है। जहाज को एक यूनीक टैकामारन हुल फॉर्म में डिजाइन किया गया है, जिससे उसकी बिजली जरूरत में खासी कमी आ जाती है। यह कई तरह के टॉरपीडो को लॉन्च कर सकता है और उनका पता लगा सकता है।
  • ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को बढ़ावा देने के क्रम में डीआरडीओ ने स्वदेशी उत्पादन में लगे निजी और सरकारी उद्योगों के लिए तकनीक हस्तांतरण (टीओटी) और रक्षा तकनीक को समाज के वास्ते इस्तेमाल के व्यवसायीकरण के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं। डीआरडीओ ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत 57 उद्योगों को 75 लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स फॉर ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (एलएटीओटी) जारी किए हैं।

  भारतीय तटरक्षक बल

  • वर्ष के दौरान भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों और क्राफ्ट्स ने 618.370    करोड़ रुपए का  तस्करी का सामना जब्त किया
  • 15 दिसंबर 2015 तक दो तस्करी के जहाज और 15 नौका जब्त की गईं और भारतीय जल क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करने पर 156 नाविकों को गिरफ्तार किया गया।
  • वर्ष के दौरान 179 सर्च एंड रिसक्यू (एसएआर) मिशन चलाए गए और समुद्री इलाकों में फंसे 3,756 लोगों की जान बचाई गई।

नया आगमन (इंडक्शन)/तैनाती

  • छह स्वदेश निर्मित ऑफशोर पेट्रोल वीजल्स (ओपीवी) की कड़ी में पहला आईसीजीएस ‘समर्थ’ को रक्षा मंत्री ने गोवा में 10 नवंबर, 2015 को तैनाती दी। सबसे ज्यादा उन्नत तकनीक, नैविगेशन और संचार उपकरण, सेंसरों और मशीनरी से युक्त यह ओपीवी 105 मीटर लंबा है और उसे गोवा शिपयार्ड ने बनाया है। गोवा में बेस्ड आईसीजीएस समर्थ को मुख्य रूप से इकोनॉमिक जोन की निगरानी के लिए तैनात किया गया है और उसकी अन्य जिम्मेदारियों में वेस्टर्न सीबोर्ड से भारतके सामुद्रिक हितों की रक्षा करना है।
  • इस साल 8 फास्ट पेट्रोल वीसल्स (एफपीवी) की भी तैनाती हुई, जिनके नाम आईसीजीएस अमेया, अमोघ, अनघ, अंकित, अनमोल, अपूर्वा, अरिंजय और रानी दुर्गावती था।
  • इसके अलावा वर्ष 2015 के दौरान तटरक्षक बलों में 12 इंटरसेप्टर बोट्स और एक पॉल्युशन कंट्रोल वीसल (पीसीवी) आईसीजीएस ‘समुद्र पावक’ को भी शामिल किया गया।


  पूर्व सैनिक कल्याण

  • सरकार ने सैन्य बलों के लिए बहुप्रतीक्षित ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना की घोषणा 7 नवंबर 2015 को की। ओआरओपी समान रैंक वाले और समान वर्षों की सेवाएं देने वाले रक्षा सेवा के कर्मचारियों की पेंशन की असमानता खत्म होने की उम्मीद है, जिससे सरकार पर सालाना 8,000 करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। 14 दिसंबर 2015 को सरकार ने ओआरओपी योजना के कार्यान्वयन पर गौर करने के लिए जस्टिस नरसिम्हा रेड्डी की अगुआई में एक न्यायिक समिति को नियुक्त किया था।
  • 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों की घोषणा से कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में भारी बढ़ोत्तरी होगी। पहली बार आयोग ने ज्यादा जोखिम वाले कार्यो में लगे नौसेना और वायु सेना के सभी कर्मचारियों की मिलिट्री सर्विस पे (एमएसपी) और विशेष भत्तों में भारी बढ़त्तरी दी है।
  • इमप्लॉईज कॉन्ट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) को और विस्तार देते हुए इसे देश के विभिन्न हिस्सों के पॉलीक्लीनिक्स और रेफरल अस्पतालों तक कर दिया गया है।


 नेपाल भूकंप के पीड़ितों तक संपर्क कायम करना

नेपाल के लिए राष्ट्र के राहत प्रयासों के तहत भारतीय सेना ने 25 अप्रैल 2015 से ऑपरेशन ‘मैत्री’ लॉन्च किया था। इंजीनियर टास्क फोर्सेज ने बारपाक, बसंतपुर/भक्तपुर और जोरबाती से बचाव और पुनर्वास कार्यों की शुरुआत की थी। भारतीय सेना के पायलटों ने मुश्किलों में फंसे लोगों को निकाला, राहत सामग्री पहुंचाई और नेपाल की सेना को राहत कार्य के लिए दुर्गम क्षेत्रों में पहुंचने में मदद की। सेना और वायु सेना हेलिकॉप्टरों ने प्रभावित क्षेत्रों में 1,650 सॉर्टीज कीं, 994 लोगों को बचाया, 1,726 सैनिक लगाए और 747 टन सामग्री की आपूर्ति की।

भारतीय सेना के फील्ड हॉस्पिटल्स ने नेपाल में 4,690 लोगों को उपचार और दवाएं मुहैया कराईं, जिनमें 300 से ज्यादा सर्जरी भी शामिल हैं।

चेन्नई बाढ़

चेन्नई में भारी बारिश के चलते आई भयानक बाढ़ की स्थिति में राज्य सरकार की मदद के लिए भारतीय सेना 1 दिसंबर, 2015 की दोपहर को आगे आई। चेन्नई गैरिसन इनफैंट्री बटालियन और सेना की इंजीनियर एलीमेंट्स के सैनिकों ने मिलकर दो बचाव और राहत दल बनाए और तामबरम, मुदीचुर, मनीपक्कम, गुदुवांचेरो और उरापक्कम क्षेत्रो में 1 दिसंबर 2015 की शाम से ऑपरेशन शुरू कर दिया। इस दौरान मुश्किल हालात में फंसे 20,000 से ज्यादा लोगों को निकाला गया। सेना ने राज्य सरकार और कुछ एनजीओ द्वारा उपलब्ध कराए गए 1.25 लाख से ज्यादा राहत पैकेज बांटे।

इस संयुक्त ऑपरेशन ‘मदद’ में भारतीय वायुसेना और नौसेना ने भी खासा योगदान किया और मुश्किल में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में मदद की। साथ ही लोगों के बीच राहत सामग्री बांटने में भी मदद की।

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