राजगीर में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का उद्घाटन



संस्कृति मंत्रालय तथा डीम्ड यूनिवर्सिटी नव नालंदा महावीर द्वारा आयोजित तीन दिवसीय “अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन” का उद्घाटन हुआ। बिहार के राजगीर इंटरनेशनल बौद्धिस्ट कांफ्रेंस में बौद्ध धर्म गुरू दलाई लामा तथा संस्कृति तथा पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री एन के सिन्हा और नव नालंदा महावीर डीम्ड यूनिवर्सिटी के उप कुलपति श्री एम एल श्रीवास्तव भी मौजूद थे। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षुओं द्वारा मंगला पथ का मंत्रोच्चारण भी किया गया।

अपने उद्घाटन संबोधन के दौरान दलाई लामा ने कहा कि सभी धार्मिक पंरपराओं की सच्चाई एक है जो कभी बदल नहीं सकती। इससे देश के साथ-साथ विश्व को भी प्यार और करुणा के माध्यम से शांति प्राप्त करने में मदद मिलेगी जो बौद्ध धर्म का प्रमुख सूत्र है। उन्होंने कहा कि हमें न केवल बुद्ध और उनकी शिक्षाओं के बारे में पढ़ना चाहिए बल्कि इसका अपने जीवन में प्रयोग और अनुभव भी लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंसा की तरह करुणा भी मानव का एक बुनियादी स्वभाव है। उन्होंने भावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि हमारे अंदर जो नकारात्मक भावनाएं पैदा होती हैं उससे हम पीडित और बीमार हो जाते हैं। इसलिए हमें विपश्यना योग के माध्यम से मन को शुद्ध करना चाहिए।


डॉ. महेश शर्मा ने अपने भाषण में कहा कि नालंदा की पवित्र भूमि पर आने पर उन्हें अत्यधिक प्रसन्नता हुई है। उऩ्होंने कहा कि बुद्ध से संबंधित इस तरह के अधिकांश पवित्र स्थान उत्तर प्रदेश या बिहार में स्थित हैं। उन्होंने विश्व के सभी कोनों से आए हुए मेहमानों का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन सही मायने में भविष्य के लिए कुछ संदेश जरूर देगा।

संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री एन के सिन्हा ने धार्मिक गुरू तथा मंत्री महोदय और विश्व के 35 देशों से आए हुए प्रतिनिधियों का स्वागत किया। 

पटना में गंगा नदी पर चार लेन वाले महात्‍मा गांधी सेतु के पुनर्निर्माण को मंजूरी


प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज बिहार के पटना में एनएच-19 पर गंगा नदी के उपर 5.575 किलोमीटर लम्‍बे चार लेन वाले महात्‍मा गांधी सेतु के पुनर्निर्माण संबंधी परियोजना को मंजूरी दे दी। नये निर्माण के लिए पुल के इस क्षतिग्रस्‍त ढांचे को ढहाया जाएगा और उसके बाद स्‍टील ट्रस के साथ इसकी री-डैकिंग की जाएगी। यह परियोजना इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) मोड में होगी। इस पर 1742.01 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। 

यह परियोजना पटना-हाजीपुर क्षेत्र को कवर करते हुए उत्‍तर और दक्षिण बिहार को जोड़ेगी। यह परियोजना यातायात, विशेषकर उत्‍तर और दक्षिण बिहार के बीच चलने वाले भारी यातायात के समय और लागत में कमी लाने के अलावा राज्‍य में बुनियादी ढांचे में सुधार की प्रक्रिया में तेजी लाएगी। महात्‍मा गांधी सेतु के पुनर्निर्माण से राज्‍य के इस क्षेत्र की सामाजिक आर्थिक स्थिति के उत्‍थान में भी मदद मिलेगी। 

पृष्‍ठभूमि :

पटना में गंगा नदी के ऊपर चार लेन वाले महात्‍मा गांधी सेतु का निर्माण 1980 के दशक में बिहार की राज्‍य सरकार ने किया था। बदहाल हालत में पहुंच चुका यह पुल उत्‍तर और दक्षिण बिहार के बीच बहुत ही महत्‍वपूर्ण कड़ी है और कई आर्थिक, साथ ही साथ सामाजिक, राजनीतिक गतिविधियों का मार्ग भी है। नेपाल और भूटान का कारोबार भी इसी संपर्क के माध्‍यम से होता है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय पिछले 15 वर्षों से इस पुल के पुनर्निर्माण के प्रयास कर रहा है, लेकिन उसके प्रयास सफल नहीं हो सके हैं। राष्‍ट्रीय और अंतरराष्‍ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा काफी अध्‍ययन किए जाने बाद अब यह तय किया गया कि इस पुल की मौजूदा संरचना को ढहाया जाए और उसके बाद स्‍टील ट्रस के साथ इसकी री-डैकिंग की जाए। तदनुसार, पटना में महात्‍मा गांधी सेतु की संरचना के पुनर्निर्माण के लिए विस्‍तृत प्राक्‍कलन तैयार किया गया। 

#HFCL बरौनी को पुरुत्थान के लिए 1916.14 करोड़ और 56 एकड़ भूमि


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रीमंडल ने हिंदुस्तान फर्टीलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HFCL) के वित्तिय नवीनीकरण को मंजूरी दे दी है। मंत्रीमंडल ने इसे भारत सरकार की तरफ से दिए गए 1916.14 करोड़ रुपये (31.01.2015 तक) के ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज (31.03.2015 तक ब्याज की राशि थी 7163.35 करोड़ रुपये) को छोड़ने (माफ करने) को मंजूरी दी है। मंत्रीमंडल ने एचएफसीएल पर बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के बकाया के निपटारे के लिए बरौनी ईकाई की एश डाइक की 56 एकड़ जमीन को स्थानांतरित करने को भी मंजूरी दे दी है। 

मंत्रीमंडल की मंजूरी से एचएफसीएल को बीआईएफआर के पंजीकरण से अलग होने में मदद मिलेगी और यह इसके लिए सकारात्मक होगा। इससे एचएफसीएल के तेजी से पुनरुत्थान का रास्ता साफ होगा। यह ईकाई अभी निष्क्रिय पड़ी हुई है और जनवरी 1999 से इसका संचालन बंद है। यहां यह बताना जरूरी होगा कि देश के पूर्वी हिस्से में केवल नामरूप (असम) में दो छोटी ईकाइयों को छोड़ दें तो, यूरिया उत्पादन की कोई भी ईकाई नहीं है। 

देश में यूरिया की वार्षिक खपत 320 एलएमटी है जिसमें 245 एलएमटी का उत्पादन देश में होता है जबकि बाकी आयात किया जाता है। बरौनी में नई ईकाई के लगने से बिहार, पश्चिम बंगाल व झारखंड में यूरिया की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकेगा। इससे पश्चिमी व मध्य क्षेत्रों से यूरिया ढोकर लाने के लिए रेलवे व सड़क यातायात पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा और इससे सरकारी सब्सिडी में भी बचत होगी। इस यूनिट से 400 प्रत्यक्ष और 1200 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। 

बरौनी ईकाई, गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा बिछायी जा रही जगदीशपुर-हल्दिया गैस पाइपलाइन के लिए भी मुख्य ईकाई के तौर पर होगी जो कि पूर्वी भारत में विकास व आर्थिक उन्नति व ढांचागत विकास के लिए काफी अहम है। 

बिहार की नई आबकारी नीति पर पेट्रोलियम मंत्रालय की पहल


 1. बिहार सरकार ने अभी हाल में अपनी नई आबकारी नीति की घोषणा की है जिसमें बिहार में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है। बिहार सरकार ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से यह पता लगाने का अनुरोध किया था कि कि क्या तेल कंपनियां बिहार में डिस्टिलरियों द्वारा उत्पादित पूरे इथेनाल को उठाने में सक्षम होंगी।

2. केंद्र सरकार बिहार राज्य में, विशेष रूप से कृषि क्षेत्र के लिए, विकास कार्यों को शुरू करने की इच्छुक है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के साथ विचार-विमर्श करके बिहार सरकार के प्रस्ताव पर गौर किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन ओएमसी ने यह सूचित किया है कि शीरे से बिहार में लगभग 6 करोड़ लीटर इथेनाल का उत्पादन किया जा सकता है। बिहार सरकार की मदद के लिए तेल विपणन कंपनियां ईबीपी के लिए इस इथेनाल का उपयोग करने का प्रयास करेंगी। इस पहल से चीनी मिलों और डिस्टिलरियों के माध्यम से राज्य के किसानों को लगभग 300 करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। इससे राज्य में शीरे का उचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा।

3. यह सरकार बायो-इथेनाल और बायोडीजल जैसे ऊर्जा के वैकल्पिक नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संबंधी मुद्दों से निबटने और किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इस दिशा में एक कदम के रूप में केंद्र सरकार पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनाल ब्लेंडिंग के तात्कालिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 21 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में इथेनाल ब्लेंडिड पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम चला रही है। घरेलू उद्योग की मदद करने के लिए सरकार ने घरेलू स्रोतों से ही इथेनाल प्राप्त करने का निर्णय भी लिया है।

4. विगत में, केवल 30 प्रतिशत ब्लेंडिंग की जरूरत को पूरा करने के लिए इथेनाल की पर्याप्त आपूर्ति थी। चीनी वर्ष 2013-14 के दौरान ईबीपी कार्यक्रम के लिए केवल 38 करोड़ लीटर इथेनाल की ही आपूर्ति की जा सकी। इस कार्यक्रम को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने दिसंबर 2014 में इथेनाल के खरीद मूल्य बढ़ाए और इथेनाल उत्पादन के लिए लिग्नोसैल्यूलोज विधि सहित वैकल्पिक मार्ग खोले। तेल विपणन कंपनियों ने आपूर्तिकर्ताओं के लाभ के लिए खरीद प्रक्रिया में ढील दी।

5. इन सभी प्रयासों से चीनी वर्ष 2015 के दौरान इथेनाल की आपूर्ति बढ़कर दोगुनी हो गई तथा पेट्रोल में मिश्रण के लिए 67.42 करोड़ लीटर इथेनाल की आपूर्ति की गई। इस वर्ष ओएमसी ने 10 प्रतिशत ब्लेंडिंग लक्ष्य को पूरा करने के लिए 266 करोड़ लीटर इथेनाल की खरीदारी के लिए निविदा निकाली हैं। चीनी उद्योग से प्राप्त प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है और उद्योग में चालू चीनी वर्ष के लिए 135 करोड़ लीटर से भी अधिक का प्रस्ताव किया है।

6. विशेष रूप से बिहार राज्य के लिए अन्य योजनाओं में आईओसीएल बरौनी रिफाइनरी की क्षमता 6 एमएमटीपीए बढ़ाकर 9 एमएमटीपीए करना, बीएस-6 गुणवत्ता उत्पादों के उत्पादन के लिए इस रिफाइनरी का उन्नयन करना, अन्य मूल्य संवर्धित विकल्पों/ विशेष उत्पादनों का उत्पादन करने के लिए इस रिफाइनरी का एकीकरण तथा बेगूसराय बिहार में पेट्रोकैमिकल परिसर की स्थापना करना शामिल हैं।

'उदय’ योजना से जुड़ा बिहार, 9,000 करोड़ रुपये का होगा फायदा


भारत सरकार, बिहार राज्य और बिहार की डिस्कॉम कंपनियों (नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रब्यूशन कंपनी लिमिटेड और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रब्यूशन कंपनी लिमिटेड) ने डिस्कॉम्स के परिचालन और वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आज यहां उदय-‘उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना’ के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल की गरिमामयी मौजूदगी में हुआ। 

देश की वितरण कंपनियां कर्ज के भारी बोझ से जूझ रही हैं। 30 सितंबर, 2015 तक देश की डिस्कॉम्स पर कुल 4.3 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इन कंपनियों को कर्ज के बोझ से राहत देने और इनके प्रदर्शन में सुधार करने के लिए भारत सरकार ने 20 नवंबर, 2015 को उदय योजना शुरू की थी। इससे पहले इससे संबंधित पक्षों मुख्य रूप से राज्य सरकारों, डिस्कॉम्स, ऋणदाताओं आदि के बीच लंबा विचार-विमर्श हुआ था। उदय का उद्देश्य टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय स्थायित्व और परिचालन क्षमताओं में सुधार के द्वारा कर्ज में डूबी वितरण कंपनियों के लिए एक स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। 

इस प्रकार बिहार राज्य के बिजली क्षेत्र के हालात में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उदय योजना को स्वीकार करने वाला छठा राज्य बन गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड पहले ही डिस्कॉम्स के परिचालन और वित्तीय सुधार के लिए उदय के अंतर्गत एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। समझौता ज्ञापन पर बिहार के हस्ताक्षर करने के साथ ही डिस्कॉम्स के लगभग 33 फीसदी कर्ज का पुनर्गठन कर दिया जाएगा, जो लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए है। गुजरात ने भी राज्य की डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति पर विचार करते हुए परिचालन में सुधार के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिए। 

बिहार सरकार ने उदय के अंतर्गत एमओयू पर हस्ताक्षर करके डिस्कॉम्स की वित्‍तीय सेहत में सुधार लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है और डिस्कॉम्स के कर्ज को अपने ऊपर लेने पर सहमति जाहिर की है। जैसा कि योजना में उल्‍लेख है बिहार सरकार डिस्कॉम के 2,332 करोड़ रुपए के कर्ज को अपने ऊपर लेगी, जो डिस्कॉम के 30.03.2015 तक के कुल 3,110 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज का 75 फीसदी है। योजना में बाकी 778 करोड़ रुपए के कर्ज का पुनर्मूल्यांकन (री-प्राइस) या राज्य गारंटेड डिस्कॉम बॉन्ड के रूप में जारी करने की व्यवस्था है। ऐसा मौजूदा औसत ब्याज दर की तुलना में 3 फीसदी कम कूपन दर पर होगा। 

उदय में न सिर्फ डिस्कॉम की वित्तीय सेहत में सुधार पर जोर दिया गया है, बल्कि उनकी परिचालन क्षमताओं में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। डिस्कॉम्स के टिकाऊ विकास के क्रम में बिहार राज्य और डिस्कॉम्स अनिवार्य फीडर और डिस्कॉम ट्रांसफार्मर मीटरिंग, उपभोक्ता इंडेक्सिंग और नुकसान की जीआईएस मैपिंग, ट्रांसफार्मर अपग्रेड करना या बदलाव, मीटर आदि बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से परिचालन क्षमता में सुधार करेंगे। इससे बिजली की आपूर्ति की लागत और वास्तविक कीमत के अंतर को खत्म किया जाएगा, साथ ही पारेषण हानि और एटीएंडसी हानियों में भी कमी लाई जाएगी। एटीएंडसी हानियों और पारेषण हानियों में कमी से क्रमशः 15 प्रतिशत और 4 प्रतिशत अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है, जो लगभग 6,650 करोड़ रुपये के बराबर होगा। 

वित्तीय और परिचालन क्षमताओं में सुधार के साथ डिस्कॉम्स की रेटिंग में सुधार होगा, जिससे भविष्य की निवेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता फंड जुटाने में मदद मिलेगी। इससे डिस्कॉम्स की ब्याज लागत के रूप में लगभग 80 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। 

इसके साथ ही राज्य सरकार और डिस्कॉम्स द्वारा डिस्कॉम्स की परिचालन क्षमताओं में सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे, और बिजली की आपूर्ति की लागत में कमी आएगी, केंद्र सरकार भी राज्य में बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचे में सुधार और बिजली की लागत में कमी लाने के लिए डिस्कॉम्स और राज्य सरकार को रियायतें देगी। डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस, पावर सेक्टर डेवलपमेंट फंड या एमओपी और एमएनआरई की अन्य योजनाओं, जैसी केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से पहले ही राज्य में बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कोष उपलब्ध कराया जा रहा है और अगर राज्य/डिस्कॉम्स योजना के लक्ष्यों को हासिल करने में कामयाब रहते हैं तो आगे इन योजनाओं के अंतर्गत अतिरिक्त धनराशि या प्राथमिकता वाला वित्‍तपोषण भी दिया जाएगा। राज्य को अधिसूचित कीमतों पर अतिरिक्त कोयला देकर और ज्यादा क्षमता के इस्तेमाल, एनटीपीसी और अन्य सीपीएसयू से सस्ती बिजली के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा। कोयले की अदला-बदली (स्वैपिंग), कोयले के सही इस्तेमाल, कोयला ग्रेड स्लिपेज में सुधार, धुले कोयले की 100 फीसदी उपलब्धता से बिजली की लागत में और कमी लाने में मदद मिलेगी। राज्य को कोयला सुधारों से लगभग 1,086 करोड़ रुपये का फायदा होगा। 

उदय में पीएटी (परफॉर्म, अचीव, ट्रेड) के माध्यम कम बिजली की खपत वाले एलईडी बल्बों, कृषि पंपों, पंखों और एयर कंडीशनरों और कुशल औद्योगिक उपकरणों की मांग बढ़ाई जाएगी, जिससे पीक लोड, फ्लैटन लोड कर्व घटाने में सहायता मिलने से बिहार में बिजली की खपत में कमी लाने में मदद मिलेगी। इससे लगभग 720 करोड़ रुपये का फायदा होने का अनुमान है। एमओयू पर हस्ताक्षर से आखिरकार बिहार की जनता को फायदा होगा। डिस्कॉम्स से बिजली की ज्यादा मांग का मतलब उत्पादन इकाइयों का ज्यादा पीएलएफ होगा और इस प्रकार प्रति यूनिट बिजली की लागत कम होगी, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को होगा। डिस्कॉम्स एटीएंडसी हानियों में कमी के साथ क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बढ़ा सकेंगी। इस योजना से बिहार के लगभग 1,152 गांवों और 160.60 लाख परिवारों को बिजली उपलब्ध कराना आसान हो जाएगा, जो अभी तक बिजली से वंचित हैं। बिजली से वंचित गांवों या घरों को 24*7 बिजली की उपब्धता होने से अर्थव्यवस्था व उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार की संभावनाएं पैदा होंगी और बिहार भारत के अग्रणी औद्योगिक राज्य के तौर पर विकसित होगा। 

इस प्रकार उदय योजना में भागीदारी से राज्य को ब्याज लागत, एटीएंडसी और पारेषण हानियों में कमी, ऊर्जा कुशलता, कोयला सुधारों आदि से लगभग 9,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा। 

उदय डिस्कॉम्स की वित्तीय आत्‍मनिर्भरता और परिचालन सेहत में सुधार की दिशा में किया जा रहा प्रयास है, जिससे ये शत-प्रतिशत ग्रामीण बिजलीकरण और सभी को 24X7 बिजली उपलब्ध कराने के माध्‍यम से किफायती दरों पर पर्याप्‍त बिजली की आपूर्ति करने में सक्षम होगीं। 

बिहार चुनाव में राजनीतिक दलों को यूँ मिला है रेडियो और टीवी पर समय


बिहार विधान सभा के लिए आम चुनाव -2015- राजनीतिक दलों को प्रसारण/टेलेकास्ट के समय आबंटन के संबंध में
जन साधारण की सूचना के लिए विधान सभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों को प्रसारण /टेलेकास्ट समय आबंटन के संबंध में निर्वाचन आयोग द्वारा 18 सितंबर , 2015 को जारी सूचना आदेश संख्या 437/टीए-एलए 2015 की प्रति संलग्न है।

                  भारत निर्वाचन आयोग
             निर्वाचन सदन, अशोक रोड , नई दिल्ली-110001  
 संख्या 437/टीए-एलए 2015/ सूचना            तिथिः 18 सितंबर, 2015
लोक सभा आम चुनाव 1998 के अवसर पर 16 जनवरी , 1998 को आयोग के आदेश से मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सरकारी धन पोषण से सरकार के  स्वामित्व वाले टेलीविजन तथा रेडियो के निःशुल्क उपयोग करने का नया कार्यक्रम प्रारंभ हुआ । इस योजना का विस्तार 1998 के बाद राज्य विधान सभा के सभी आम चुनावों तथा 1999 , 2004 , 2009 तथा 2014 के लोक सभा आम चुनावों में किया गया ।
चुनाव तथा अन्य संबंधित कानून(संशोधन) अधिनियम , 2003 के माध्यम से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम , 1951 में संशोधन तथा उसके उपरांत अधिसूचित नियमों के साथ मीडिया पर मान्यता प्राप्त दलों द्वारा चुनाव प्रचार अभियान के लिए उचित समय की साझेदारी को वैधानिक आधार दिया गया है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम , 1951 के अनच्छेद 39 ए के नीचे वर्णित धारा (ए) का उपयोग करते हुए केंद्रीय सरकार ने  पूर्ण रूप से  नियंत्रित या ठोस रूप से धन पोषित प्रसारण मीडिया को इस उद्देश्य के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया के रूप में अधिसूचित किया है। इसलिए आयोग ने  बिहार विधान सभा आम चुनाव के लिए इलेक्ट्रानिक मीडिया पर उचित समय देने के लिए इस योजना का विस्तार किया है।
प्रसारण समय तथा टेलेकास्ट समय सुविधा बिहार से संबंधित केवल राष्ट्रीय पार्टियों तथा राज्य स्तर की मान्यता प्राप्त दलों को उपलब्ध होगी।
 योजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैः  

1.       यह सुविधा आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के क्षेत्रीय केंद्रों और बिहार मुख्यालयों में उपलब्ध होगी और इसे बिहार के अंदर अन्य स्टेशन  रिले करेंगे।
 टेलेकास्ट/ प्रसारण के लिए आबंटित समयः
2.       प्रत्येक राष्ट्रीय दल तथा मान्यता प्राप्त राज्य पार्टी(बिहार के संबंध में मान्यता प्राप्त)  को  दूरदर्शन नेटवर्क के क्षेत्रीय केंद्रों तथा बिहार राज्य में आकाशवाणी के नेटवर्क पर समान रूप से 45 मिनट का आधार समय दिया जाएगा।
3.      बिहार राज्य के पिछले विधान सभा चुनाव में प्रदर्शन के आधार पर राजनीतिक दलों को अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया गया है।
4.      एकल प्रसारण सत्र में  किसी भी दल को 15 मिनट से अधिक समय नहीं दिया जाएगा।

 टेलेकास्ट/ प्रसारण का समयः 
5.       प्रसारण और टेलेकास्ट की अवधि बिहार राज्य में नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि और मतदान से दो दिन पहले (प्रत्येक चरण में) के बीच की होगी।
6.      प्रसार भारती निगम आयोग के साथ परामर्श करके प्रसारण और टेलेकास्ट की वास्तविक तिथि और समय का निर्णय लेगा। यह दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के ट्रांसमिशन उपलब्धता को संचालित करने वाली तकनीकी अवरोधों  के अधीन होगा।
अग्रिम रूप से प्रतिलिपियों को सौंपनाः
7.       टेलेकास्ट तथा प्रसारण के लिए आयोग द्वारा निर्धारित दिशा निर्देशों का कड़ाई से  पालन किया जाएगा । पार्टियों को अग्रिम रूप से प्रतिलिपि और रिकार्डिंग प्रस्तुत करना होगा। राजनीतिक दल अपने खर्च पर प्रसार भारती निगम या दूरदर्शन/आकाशवाणी द्वारा निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करने वाले स्टूडियो में रिकार्डिंग करा सकते हैं।  अग्रिम अनुरोध पर राजनीतिक दल विकल्प के रूप में दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के स्टूडियो में भी रिकार्डिंग कर सकते हैं।  ऐसे मामलों में रिकार्डिंग राज्य की राजधानी में और अग्रिम रूप से दूरदर्शन और आकाशवाणी द्वारा इंगित समय में होगी।
पैनल संवाद तथा बहस  
8.       राजनीतिक दलों द्वारा प्रसारण के अतिरिक्त प्रसार भारती निगम दूरदर्शन/आकाशवाणी  के  केंद्र / स्टेशन पर अधिकतम दो पैनल संवाद या बहस आयोजित करेगा। ऐसे कार्यक्रम के लिए प्रत्येक योग्य दल अपना एक प्रतिनिधि नामांकित कर सकते हैं।
9.      भारत निर्वाचन आयोग प्रसार भारती निगम के साथ परामर्श करके एसे पैनल संवादों और बहस के लिए समन्वय करने वालों के नामों को मंजूरी देगा। 

टेलेकास्ट/ प्रसारण में दिशा-निर्देशों का पालनः  
10.   दूरदर्शन/आकाशवाणी पर टेलेकास्ट/ प्रसारण में निम्नलिखित बातों की अनुमति नहीं होगी।
·        अन्य देशों की आलोचना
·        धर्मों या समुदायों पर हमला
·        कोई भी अभद्र या मानहानि जनक बात
·        हिंसा को उकसाना
·        कोई भी बात जिससे न्यायालय की अवमानना न हो
·        राष्ट्रपति तथा न्यायपालिका की ईमानदारी पर टिप्पणी
·        राष्ट्र की एकता, संप्रभुता तथा अखण्डता को प्रभावित करने वाली कोई बात
·        किसी व्यक्ति का नाम लेकर आलोचना करना
राजनीतिक दलों के लिए टाइम बाउचर
11.  टाइम बाउचर पांच मिनट वर्ग में उपलब्ध होंगे और एक बाउचर में एक से दो मिनट का आवंटित समय होगा। राजनीतिक दल इसे अपनी सुविधा के अनुसार मिलाने के लिए स्वतंत्र हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों को समय का आवंटन इस प्रकार होगाः-

 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के नाम
राष्ट्रीय/क्षेत्रीय पार्टी का नाम
कुल आवंटित समय मिनट में
बाउचर कितने बार जारी हुए


प्रसारण
टेलीकास्ट
प्रसारण
टेलीकास्ट
बिहार

















TOTAL
बीजेपी
137
137
27 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (2मिनट)
27 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (2मिनट)
बीएसपी
63
63
12 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (3मिनट)
12 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (3मिनट)
सीपीआई
55
55
11 (5 मिनट प्रत्येक)
11 (5 मिनट प्रत्येक)
सीपीआई (एम)
49
49
9 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (4मिनट)
9 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (4मिनट)
आईएनसी
92
92
18 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (2मिनट)
18 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (2मिनट)
एनसीपी
55
55
11 (5 प्रत्येक)
11 (5 प्रत्येक)
जेडी (यू)
171
171
34 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (1मिनट)
34 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (1मिनट)
एलजेपी
83
83
16 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (3मिनट)
16 (5 मिनट प्रत्येक) + 1 (3मिनट)
आरजेडी
150
150
30 (5 मिनट प्रत्येक)
30 (5 मिनट प्रत्येक)
आरएलएसपी
45
45
9 (5  मिनट प्रत्येक)
9 (5  मिनट प्रत्येक)

900
900
            

राजनीतिक पार्टियों की सूची

क्रम सं.
संक्षिप्त नाम
स्थिति
पार्टी के नाम
1
बीजेपी
राष्ट्रीय पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
2
बीएसपी
राष्ट्रीय पार्टी
बहुजन समाज पार्टी
3
सीपीआई
राष्ट्रीय पार्टी
भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी
4
सीपीआई (एम)
राष्ट्रीय पार्टी
भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (मार्कसवादी)
5
आईएनसी
राष्ट्रीय पार्टी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
6
एनसीपी
राष्ट्रीय पार्टी
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
7
जेडी (यू)
राज्य पार्टी
जनता दल (यूनाइटेड)
8
एलजेपी
राज्य पार्टी
लोक जन शक्ति पार्टी
9
आरजेडी
राज्य पार्टी
राष्ट्रीय जनता दल
10
आरएलएसपी
 राज्य पार्टी
राष्ट्रीय लोक समता पार्टी

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