वाइब्रेंट गुजरात 2017: वस्त्र क्षेत्र में 8,835 करोड़ रुपये के MOU साइन हुए


वाइब्रेंट गुजरात 2017 के दौरान वस्त्र क्षेत्र में 8,835 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये

गुजरात की वस्त्र गाथा अभी हाल ही में शुरू हुई है: श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी

गुजरात में वस्त्र शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं: केन्द्रीय वस्त्र मंत्री

केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी ने कहा कि गुजरात के निवासियों की उद्यमिता भावना और निवेश के प्रवाह के मद्देनजर गुजरात की वस्त्र गाथा अभी हाल ही में शुरू हुई है। उन्होंने कहा कि भारत में वस्त्र उद्योग के सबसे बड़े केन्द्रों में गुजरात को भी शुमार किये जाने के नाते यह राज्य सभी तरह के वस्त्रों की प्राप्ति का एकल केन्द्र है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में वस्त्र शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। श्रीमती इरानी ने कहा कि वस्त्र संबंधी पाठ्यक्रमों की पेशकश करने वाले गुजरात के 28 आईटीआई में चलाए जा रहे कपड़ा क्षेत्र संबंधी कौशल विकास कार्यक्रम 75 फीसदी प्लेसमेंट का आंकड़ा दर्ज कराने में सफल रहा है। उन्होंने कहा कि गुजरात के दो प्रमुख संस्थान अर्थात निफ्ट और एनआईडी तथा विभिन्न इंजीनियरिंग कालेज वस्त्र प्रौद्योगिकी, वस्त्र प्रसंस्करण एवं वस्त्र इंजीनियरिंग के क्षेत्र में डिग्री की पेशकश करते हैं। श्रीमती इरानी आज गुजरात के गांधीनगर में वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक शिखर सम्मेलन के दौरान “मेक इन गुजरात” थीम पर आधारित संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं, जिसका विषय था “प्रवृतियां और वस्त्र संबंधी वैल्यू चेन पर असर डालने वाले नवाचार।”

वस्त्र मंत्री संगोष्ठी के दौरान वस्त्र क्षेत्र में 8,835 करोड़ रुपये के सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर की भी साक्षी रहीं। वस्त्र पार्कों, वस्त्र प्रसंस्करण, मशीनरी, कालीन विकास इत्यादि जैसे क्षेत्रों में इन एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये हैं। वस्त्र मंत्री ने कहा कि भारत में कुल कपास उत्पादन का 29 फीसदी गुजरात में ही उत्पादित होता है। उन्होंने कहा कि यह इस राज्य में निहित असीम संभावनाओं के प्रति वस्त्र उद्योग के ठोस विश्वास को दर्शाता है। श्रीमती इरानी ने गुजरात की वस्त्र संबंधी वैल्यू चेन के विकास के साथ-साथ तकनीकी वस्त्रों एवं अऩुसंधान के क्षेत्र में संभावनाओं की तलाश के लिए भी अपने मंत्रालय की ओर से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

गुजरात सरकार में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, कॉटेज उद्योग, मुद्रण तथा लेखन सामग्री मंत्री श्री जयेश रादादिया, भारत सरकार में वस्त्र आयुक्त डॉ. कविता गुप्ता, फिक्की की वस्त्र समिति के अध्यक्ष श्री शिशिर जयपुरिया, गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग में प्रधान सचिव श्रीमती सुनयना तोमर और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

‘जल क्रांति’ को ‘जन क्रांति’ बनाने की जरूरत: उमा भारती


जल मंथन-3 का किया शुभारंभ, जल को समवर्ती सूची में लाने के मुददे पर राज्यों से चर्चा

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने ‘जल क्रांति’ को ‘जन ‘क्रांति’ बनाने का आह्वान किया है। सुश्री भारती ने आज नई दिल्ली में ‘जल मंथन-3’ का उद्घाटन करने के बाद समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पानी बचाने की जिम्मेदारी अकेले सरकारी तंत्र की नही हो सकती बल्कि इस कार्य के लिए जन भागीदारी बहुत जरूरी है। साथ ही गैर सरकारी संगठनों के सहयोग की भी जरूरत है।

जल को बचाने के लिए नवाचारों का जिक्र करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि उनका मंत्रालय जल के प्रयोग एवं गंगा संरक्षण पर नया कानून लाने पर विचार कर रहा है। जल को समवर्ती सूची का विषय बनाये जाने पर उऩ्होंने कहा,-‘‘राज्यसभा और लोकसभा में जल को समवर्ती सूची में लाने की मांग उठी है। इस विषय पर राज्यों के साथ बातचीत कर रहे हैं। क्या संविधान की मर्यादाओं के अंतर्गत इस का कोई निदान निकाला जा सकता है? इस पर विचार चल रहा है।’’

केन - बेतवा परियोजना में आ रही बाधाओं एवं उनके समाधान का जिक्र करते हुए केद्रीय मंत्री ने कहा ‘‘केन- बेतवा परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। लेकिन एआईबीपी के तहत इसकी फंडिंग का अनुपात 60-40 निर्धारित हो गया है। हमारी जददोजहद है कि यह अनुपात या तो 100 प्रतिशत हो या 90-10 प्रतिशत हो।’’ उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस परियोजना पर 2017 के प्रारंभ में ही काम शुरू हो जायेगा एवं इसे सात साल के अंदर पूरा कर लिया जायेगा।

महानदी-गोदावरी नदी जोड़ो परियोजना पर हो रही राजनीति का जिक्र करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि मानस-संकोष-तीस्ता-गंगा-महानदी-गोदावरी देश की नदी जोडो परियोजनाओं का ‘मदर लिंक’ है। उन्होंने कहा-‘‘इस पर जो विरोध है वह राजनीतिक है। तर्क और बुनियादी आधार के बजाय यह भावनाओं पर आधारित विरोध है। इस परियोजना से ओडिशा, बिहार एवं बंगाल की सुखाड़ तथा बाढ़ की समस्याओं का समाधान होगा।’’

केंद्रीय मंत्री ने ‘पार-तापी नर्मदा’ एवं ‘दमनगंगा पिंजल’ नदी जोड़ो परियेाजनाओं से होने वाले लाभों का जिक्र करते हुए कहा  कि ‘दमनगंगा पिंजल’ मुम्बई के लिए 2060 तक पीने के पानी की व्यवस्था करेगी और ‘पार-तापी नर्मदा’ महाराष्ट्र और गुजरात के उन आदिवासियों की प्यास बुझाएगी जो वर्षों से पानी की समस्या से जूझ रहे हैं।

गंगा संरक्षण पर हुए कार्यों की चर्चा करते हुए सुश्री भारती ने कहा कि इस पर तेजी से कार्य चल रहा है और जो गंगा विश्व की दस सबसे प्रदूषित नदियों में शामिल होती थी वह आऩे वाले समय में निश्चित ही दुनिया की 10 स्वच्छ नदियों में शामिल होगी। जल संसाधन प्रबंधन के विभिन्न विषयों की चर्चा करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि ‘जल उपभोक्ता संगठन’ कई राज्यों में ठीक से काम नहीं कर रहे हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री श्री विजय गोयल ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण समय की मांग है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि जल के जो प्राकृतिक संसाधन हमें अतीत में मिले हैं वह भविष्य में भी उपलब्ध हों। केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने दूषित जल प्रबंधन पर और अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उऩ्होंने कहा कि हमारे देश में बड़ी संख्या में जल का दुरूपयोग हो रहा है यदि इसका समुचित प्रबंधन कर लिया जाए तो इस बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा को बचाया जा सकता है। मंत्रालय के सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने कहा कि हमें जल के प्रयोग की  जिम्मेदारी तय करनी होगी ताकि इसका दुरूपयोग रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इसके लिए जल संरक्षण के महत्व को समझने की संस्कृति विकसित करनी होगी।  

इस एक दिवसीय सम्‍मेलन में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, नदी घाटी प्रबंधन, नदी संरक्षण और पारिस्थितिकी, बाढ़ प्रबंधन जल प्रयोग कुशलता और सहभागिता सिंचाई प्रबंधन जैसे विषयों पर व्‍यापक विचार-विमर्श हुआ। सम्‍मेलन में मंत्रालय की नीतियों को लोगों के प्रति ज्‍यादा मित्रवत बनाने और राज्‍यों की आवश्‍यकताओं के प्रति ज्‍यादा उत्तरदायी बनाने पर ध्‍यान दिया गया। 

इस सम्‍मेलन में राज्यों एवं संघ शासित प्रदेशों के सिंचाई/जल संसाधन मंत्री, जल प्रबंधन क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ, गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और केंद्र एवं राज्य सरकारों के सभी संबंधित विभागों के वरिष्‍ठ अधिकारियों समेत करीब 700 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उल्‍लेखनीय है कि जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने जल संसाधन विकास और प्रबंधन में जुड़े विभिन्‍न पक्षों के बीच व्‍यापक विचार विमर्श की आवश्‍यकता पर समय-समय पर बल दिया है ताकि जल संसाधन विकास को पर्यावरण, वन्‍य जीवों और विभिन्‍न सामाजिक एवं सांस्‍कृतिक पद्धतियों के साथ बेहतर ढ़ंग से जोड़ा जा सके। जल मंथन कार्यक्रमों का आयोजन इसी उद्देश्‍य से किया जाता है।  नवंबर 2014 और फरवरी 2016 में आयोजित पहले दो जल मंथन कार्यक्रम बहुत सफल रहे हैं।

सरकार ने तुरंत प्रभाव से #IOA का निलंबन रद्द किया


सरकार ने आईओए के निलंबन को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है। यह फैसला आईओए द्वारा सुधारात्मक कार्रवाई के मद्देनजर लिया गया है। गौरतलब है कि आईओए ने श्री अभय सिंह चौटला और श्री सुरेश कलमाडी को आईओए का आजीवन अध्यक्ष बनाने का निर्णय किया था। लेकिन केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा आपत्ति जताई जाने के बाद आईओए ने अपना यह फैसला पलट दिया। 

आईओए द्वारा यह फैसला वापस लिए जाने के बाद राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), युवा एवं खेल मामलों के मंत्रालय ने तुरंत प्रभाव से आईओए के निलंबन को रद्द करने का फैसला किया है। 

लेफ्टिनेंट जनरल सरत चंद ने उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला


लेफ्टिनेंट जनरल सरत चंद ने उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला और अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि दी। उप सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने से पहले जनरल ऑफिसर दक्षिण-पश्चिम कमांड की कमान संभाल रहे थे। 

जनरल ऑफिसर को गढ़वाल राइफल्स में जून, 1979 में कमीशन किया गया था। अपने 38 वर्षों के करियर में वह कई चुनौतिपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वह सक्रिय रूप से कमांड के हर स्तर पर नेतृत्व कर चुके हैं।

वह लद्दाख के कारगिल सेक्टर में कंपनी की कमांड संभालने के अलावा श्रीलंका में आईपीकेएफ के हिस्से के तौर पर ऑपरेशन पवन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। ऑपरेशन राइनो और ऑपरेशन फालकॉन में उन्होंने बटालियन को कमांड किया। कई अहम नियुक्तियों में भी वह शामिल रहे हैं। जनरल ऑफिसर सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन (यूएनओएसओएम-II) में भी अपनी सेवा दे चुके हैं।

जनरल ऑफिसर उप सेना प्रमुख के तौर पर सेना मुख्यालय में जनरल स्टाफ ब्रांच का नेतृत्व करेंगे और कर्तव्यों के निर्वहन में सेना प्रमुख की सहायता करेंगे।

नोटबंदी से आतंक को मिलने वाले धन,हवाला और मानव तस्‍करी में कमी: प्रसाद



केंद्रीय विधि, न्‍याय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकार के 8 नवंबर  के विमुद्रीकरण के फैसले से आतंक, धन पोषण, हवाला कारोबार, सुपारी हत्‍या और मानव तस्‍करी विशेषकर नेपाल तथा पूर्वोत्‍तर की युवतियों की यौन शोषण के लिए जैसी तस्‍करी की घटनाओं में कमी आई है।

उन्‍होंने कहा कि सरकार टैक्‍स आधार को व्‍यापक बनाने के लिए कदम उठाने से नहीं हिचकिचाएगी। उन्‍होंने कहा कि टैक्‍स आधार बढ़ाए बिना विकास संभव नहीं है। उन्‍होंने कहा कि अरुण जेटली के पास विकास कार्यों के लिए सिर्फ पांच लाख करोड़ रुपए हैं। यह बढ़ना चाहिए।

नई दिल्‍ली में प्रेस क्‍लब ऑफ इंडिया, इंडियन वोमेन प्रेस कोर और सुप्रीम कोर्ट लायर्स कॉंफ्रेंस द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए श्री प्रसाद ने कहा कि एकता और अखंडता की दृष्‍टि से पहले से अधिक मजबूत नया भारत उभर रहा है। यह भारत जाति, पंथ और धर्म की सीमा को पार करते हुए उभर रहा है।

भारत के भूतपूर्व प्रधान न्‍यायामूर्ति एम.एन. वेंकटचेलैया ने मौलिक कर्तव्‍यों और आर्थिक तथा न्‍यायिक सुधारों पर संगोष्‍ठी की अध्‍यक्षता की। उन्‍होंने बेहतर भारत बनाने के लिए युवाओं की शिक्षा पर बल दिया।  

श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि सरकारें आती-जाती रहती हैं। हमारी सरकार परिवर्तनकारी सरकार है और टैक्‍नोलॉजी उपकरण सुशासन में सक्रिय रूप में भूमिका निभा रहे हैं। आज 110 करोड़ आधार कार्ड और 104 करोड़ मोबाइल कनेक्‍शन हैं। डिजिटल गवर्नर का अर्थ तेजी से कार्य संपादित करना है और आज ग्रमीण क्षेत्रों में गरीब और अशिक्षित लोग भी नए विश्‍वास के साथ टैक्‍नोलॉजी अपना रहे हैं। उन्‍होंने राजस्‍थान में अलवर के स्‍कूल में गणित शिक्षक इमरान खान का उदाहरण दिया। इमरान खान के मोबाइल एप से 40 लाख बच्‍चों को फायदा हुआ। श्रीप्रसाद ने तेलंगना की बीड़ी कर्मी सतामा देवी द्वारा दुबई में अपने पोते से बातचीत करने के लिए स्‍काइप के उपयोग के बारे में सीखने का भी उदाहरण दिया।

श्री प्रसादने कहा कि वर्तमान सरकार में ऐसे नेता हैं जो आपातकाल के दिनों में छात्र गतिविधियों में शामिल रहे हैं। उन्‍होंने कहा है कि सरकार न्‍यायापालिका की स्‍वतंत्रता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्‍होंने अवसंरचना तथा न्‍यायिक नियुक्‍तियों से जुड़े विषयों को स्‍वीकार करते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में 1999 के बाद उच्‍च न्‍यायापालिका में सबसे अधिक 126 नियुक्‍तियां हुई हैं। उन्‍होंने बताया कि उच्‍च न्‍यायालय के 131 न्‍यायाधीशों की पुष्‍टि की गई है।

सेमिनार में वरिष्‍ठ कांग्रेस नेता डॉ. कर्ण सिंह, लोक सभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्‍यप, पूर्व मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त एस.वाई. कुरैशी, बीएसएफ के पूर्व प्रमुख प्रकाश सिंह, पूर्व राज्‍यपाल ए.आर. कोहली, आईडब्‍ल्‍यूपीसी अध्‍यक्ष सुष्‍मा रामचंद्रन, अधिवक्‍ता अशोक अरोड़ा तथा पीसीआई के महासचिव विनय कुमार भी उपस्‍थित थे।

नोटबंदी का लाभ: खुदरा महंगाई दर दिसंबर, 2016 में 3.41% रही


उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई दर दिसंबर, 2016 में 3.41 फीसदी रही 

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर दिसंबर, 2016 में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 3.83 फीसदी आंकी गई 

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर दिसंबर, 2016 में शहरी क्षेत्रों के लिए 2.90 फीसदी रही


सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने दिसंबर, 2016 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े जारी किए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर 3.83 फीसदी (अनंतिम) रही, जो दिसंबर, 2015 में 6.32 फीसदी थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीपीआई आधारित महंगाई दर दिसंबर, 2016 में 2.90 फीसदी (अनंतिम) आंकी गयी, जो दिसंबर 2015 में 4.73 फीसदी थी। ये दरें नवंबर, 2016 में क्रमशः 4.13 तथा 3.13 फीसदी (अंतिम) थीं।

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने दिसंबर, 2016 के लिए उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर के आंकड़े भी जारी किए। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर 2.06 फीसदी (अनंतिम) रही, जो दिसंबर, 2015 में 6.41 फीसदी थी। इसी तरह शहरी क्षेत्रों के लिए सीएफपीआई आधारित महंगाई दर दिसंबर, 2016 में 0.15 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई, जो दिसंबर, 2015 में 6.31 फीसदी थी। ये दरें नवंबर, 2016 में क्रमशः 2.79 तथा 0.75 फीसदी (अंतिम) थीं।

अगर शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित महंगाई दर दिसंबर, 2016 में 3.41 फीसदी (अनंतिम) आंकी गई है, जो दिसंबर, 2015 में 5.61 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीपीआई पर आधारित महंगाई दर नवंबर, 2016 में 3.63 फीसदी (अंतिम) थी। इसी तरह यदि शहरी एवं ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों पर समग्र रूप से गौर करें तो उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) पर आधारित महंगाई दर दिसंबर, 2016 में 1.37 फीसदी (अनंतिम) रही है, जो दिसंबर, 2015 में 6.40 फीसदी (अंतिम) थी। वहीं, सीएफपीआई पर आधारित महंगाई दर नवंबर, 2016 में 2.03 फीसदी (अंतिम) थी। 

नवंबर, 2016 में औद्योगिक विकास दर 5.7% ज्यादा रही


नवंबर, 2016 में औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी) 175.8 अंक रहा, जो नवंबर, 2015 के मुकाबले 5.7 फीसदी ज्‍यादा है। इसका मतलब यही है कि नवंबर, 2016 में औद्योगिक विकास दर 5.7 फीसदी रही। वहीं, दूसरी ओर अप्रैल-नवंबर, 2016 में औद्योगिक विकास दर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 0.4 फीसदी आंकी गई है। 

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्‍वयन मंत्रालय के केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा नवंबर, 2016 के लिए जारी किये गये औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक के त्‍वरित आकलन (आधार वर्ष : 2004-05) से उपर्युक्‍त जानकारी मिली है। 15 स्रोत एजेंसियों से प्राप्‍त आंकड़ों के आधार पर आईआईपी का आकलन किया जाता है। औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी), केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उर्वरक विभाग भी इन एजेंसियों में शामिल हैं।

नवंबर, 2016 में खनन, विनिर्माण (मैन्‍युफैक्‍चरिंग) एवं बिजली क्षेत्रों की उत्‍पादन वृद्धि दर नवंबर, 2015 के मुकाबले क्रमश: 3.9 फीसदी, 5.5 फीसदी तथा 8.9 फीसदी रही। वहीं, अप्रैल-नवंबर 2016 में इन तीनों क्षेत्रों यानी सेक्‍टरों की उत्‍पादन वृद्धि दर क्रमश: 0.3, (-) 0.3 तथा 5.0 फीसदी आंकी गई है।

नवंबर, 2016 में बुनियादी वस्‍तुओं (बेसिक गुड्स), पूंजीगत सामान एवं मध्‍यवर्ती वस्‍तुओं की उत्‍पादन वृद्धि दर नवंबर, 2015 की तुलना में क्रमश: 4.7 फीसदी, 15.0 फीसदी तथा 2.7 फीसदी रही। जहां तक टिकाऊ उपभोक्‍ता सामान का सवाल है, इनकी उत्‍पादन वृद्धि दर नवंबर, 2016 में 9.8 फीसदी रही है। इसी तरह गैर-टिकाऊ उपभोक्‍ता सामान की उत्‍पादन वृद्धि दर नवंबर, 2016 में 2.9 फीसदी रही। कुल मिलाकर उपभोक्‍ता वस्‍तुओं की उत्‍पादन वृद्धि दर नवंबर, 2016 के दौरान 5.6 फीसदी आंकी गई है।

इस दौरान उच्‍च धनात्‍मक उत्‍पादन वृद्धि दर दर्ज करने वाली कुछ महत्‍वपूर्ण वस्‍तुओं में केबल, रबर इंसुलेटेड (185.0%), ‘ट्रैक्टर (पूर्ण)’ (95.0%), ‘मोबाइल फोन एवं सहायक सामान सहित टेलीफोन उपकरण (42.8%), ‘यात्री कार’ (29.5%), ‘एविएशन टर्बाइन फ्यूल’ (28.3%), ‘मोल्डिंग मशीनरी सहित प्लास्टिक मशीनरी’ (24.1%) और ‘चीनी’ (21.2%) शामिल हैं।

इस दौरान उच्‍च ऋणात्‍मक उत्‍पादन वृद्धि दर दर्ज करने वाली कुछ महत्‍वपूर्ण वस्‍तुओं में ‘एचआर शीट्स’ [(-) 49.7%), ‘केरोसीन’ [(-) 35.7%], ‘गुड़’ [(-) 26.2%], ‘रत्न एवं जेवरात’ [(-) 25.4%], ‘पॉलीप्रोपिलीन (सह-बहुलक सहित)’ [(-) 23.1%] और ‘चीनी मशीनरी’ [(-) 20.4%] शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने #IOA की मान्यता रद्द की

सरकार ने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को दी गई मान्‍यता को निलंबित कर दिया है। यह मान्‍यता तब तक निलंबित रहेगी जबतक आईओए आजीवन अध्‍यक्ष के रूप में श्री सुरेश कलमाडी और श्री अभय चौटाला की नियुक्ति का निर्णय बदलता नहीं है। निलंबन के बाद, राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (एनओसी) के रूप में आईओए के विशेषाधिकार समाप्‍त हो जाएंगे। आईओए को सभी सरकारी सहायता, वित्तीय या अन्य सहायता भी बंद कर दी जाएगी।
 27 दिसम्‍बर, 2016 को आईओए की आम सभा बैठक में श्री सुरेश कलमाड़ी और श्री अभय चौटाला दोनों को आजीवन अध्‍यक्ष नियुक्‍त करने से संबंधित एक प्रस्ताव पारित करने के बाद सरकार ने 28 दिसंबर को आईओए को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया। आईओए को इस कारण बताओं नोटिस का जवाब आज शाम 5बजे तक देना आवश्‍यक था। अपनी प्रतिक्रिया में, आईओए ने कारण बताओ नोटिस का जवाब देने के लिए 15 जनवरी, 2017 तक के अतिरिक्‍त समय की मांग करते हुए कहा कि आईओए के अध्‍यक्ष देश से बाहर हैं और इस मामले में उनसे परामर्श करने की जरूरत है।

सरकार आईओए की ओर से मिली प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं है क्योंकि उसने विशेषकर श्री सुरेश कलमाड़ी और श्री अभय चौटाला की गैर-पात्रता के संबंध में कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। सरकार का मानना है कि आईओए का जवाब कुछ और नहीं, बल्कि अतिरिक्त समय प्राप्त करने की एक चाल है। यह मूल खेल संस्था आईओए की ओर से सुशासन के मानकों का एक गंभीर उल्लंघन है, अतः इस दिशा में तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने की जरूरत है क्योंकि यह राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और जनता की भावनाओं का विषय है।

पढ़िए २०१६ साल के आखिरी ‘मन की बात में मोदी जी ने क्या कहा


मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। आप सभी को क्रिसमस की अनेक-अनेक शुभकामनायें। आज का दिन सेवा, त्याग और करुणा को अपने जीवन में महत्व देने का अवसर है। ईसा मसीह ने कहा “गरीबों को हमारा उपकार नहीं, हमारा स्वीकार चाहिये”। Saint Luke के Gospel में लिखा है “जीसस ने न केवल गरीबों की सेवा की है, बल्कि गरीबों के द्वारा की गयी सेवा की भी सराहना की है” और यही तो असली empowerment है। इससे जुड़ी एक कहानी भी बहुत प्रचलित है। उस कहानी में बताया गया है कि जीसस एक temple treasury के पास खड़े थे। कई अमीर लोग आए, ढेर सारे दान दिए। उसके बाद एक ग़रीब विधवा आई और उसने दो तांबे के सिक्के डाले। एक तरह से देखा जाए दो तांबे के सिक्के, कुछ मायने नहीं रखते। वहाँ खड़े भक्तों के मन में, कौतुहल होना बड़ा स्वाभाविक था, तब जीसस ने कहा, कि उस विधवा महिला ने सबसे ज्यादा दान किया है, क्योंकि औरों ने बहुत कुछ दिया, लेकिन इस विधवा ने तो अपना सब कुछ दे दिया है। 

आज 25 दिसम्बर, महामना मदन मोहन मालवीय जी की भी जयन्ती है। भारतीय जनमानस में संकल्प और आत्मविश्वास जगाने वाले मालवीय जी ने आधुनिक शिक्षा को एक नई दिशा दी। उनकी जयन्ती पर भाव-भीनी श्रद्धांजलि। अभी दो दिन पहले, मालवीय जी की तपोभूमि बनारस में मुझे कई सारे विकास के कार्यों का शुभारम्भ करने का अवसर मिला। मैंने वाराणसी में, BHU में, महामना मदन मोहन मालवीय Cancer Centre का भी शिलान्यास किया है। इस पूरे क्षेत्र में निर्माण हो रहा है एक Cancer Centre. न सिर्फ़ पूर्वी उत्तर-प्रदेश, लेकिन, झारखण्ड-बिहार तक के लोगों के लिये एक बहुत बड़ा वरदान होगा। 

आज, भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का भी जन्मदिन है। ये देश अटल जी के योगदान को कभी नहीं भुला सकता। उनके नेतृत्व में हमने परमाणु शक्ति में भी, देश का सिर ऊपर किया। पार्टी नेता हो, संसद सदस्य हो, मंत्री हो या प्रधानमंत्री, अटल जी ने प्रत्येक भूमिका में, एक आदर्श को प्रतिष्ठित किया। अटल जी के जन्मदिन पर मैं उनको प्रणाम करता हूँ और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिये ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ। एक कार्यकर्ता के नाते अटल जी के साथ कार्य करने का सौभाग्य मिला। अनेक स्मृतियाँ आँखों के सामने उभर करके आती हैं। आज सुबह-सुबह जब मैंने tweet किया तो एक पुराना video भी मैंने share किया है। एक छोटे कार्यकर्ता के रूप में अटल जी का स्नेह-वर्षा का सौभाग्य कैसा मिलता था, उस video को देख करके ही पता चलेगा। 

आज क्रिसमस के दिन, सौगात के रूप में, देशवासियों को दो योजनाओं का लाभ मिलने जा रहा है। एक प्रकार से दो नवतर योजनाओं का आरम्भ हो रहा है। पूरे देश में, गाँव हो या शहर हो, पढ़े लिखे हो या अनपढ़ हो, cashless क्या है! Cashless कारोबार कैसे चल सकता है! बिना cash खरीदारी कैसे की जा सकती है! चारों तरफ़ एक जिज्ञासा का माहौल बना है। हर कोई एक-दूसरे से सीखना-समझना चाहता है। इस बात को बढ़ावा देने के लिये, mobile banking को ताक़त मिले इसलिये, e-payment की आदत लगे इसलिये, भारत सरकार ने, ग्राहकों के लिये और छोटे व्यापारियों के लिये ‘प्रोत्साहक योजना’ का आज से प्रारंभ हो रहा है। ग्राहकों को प्रोत्साहन करने के लिये योजना है - ‘lucky ग्राहक योजना’ और व्यापारियों को प्रोत्साहन करने के लिये योजना है - ‘Digi धन व्यापार योजना’। आज 

25 दिसम्बर को क्रिसमस की सौगात के रूप में, पंद्रह हज़ार लोगों को draw system से ईनाम मिलेगा और पंद्रह हज़ार के हर-एक के खाते में एक-एक हज़ार रूपये का ईनाम जाएगा और ये सिर्फ़ आज एक दिन के लिये नहीं है, ये योजना आज से शुरू हो करके 100 दिन तक चलने वाली है। हर दिन, पंद्रह हज़ार लोगों को एक-एक हज़ार रूपये का ईनाम मिलने वाला है। 100 दिन में, लाखों परिवारों तक, करोड़ों रुपयों की सौगात पहुँचने वाली है, लेकिन, ये ईनाम के हक़दार आप तब बनेंगे जब आप mobile banking, e-banking, RuPay Card, UPI, USSD ये जितने digital भुगतान के तरीक़े हैं उनका उपयोग करोगे, उसी के आधार पर draw निकलेगा। इसके साथ-साथ ऐसे ग्राहकों के लिये सप्ताह में एक दिन बड़ा draw होगा जिसमें ईनाम भी लाखों में होंगे और तीन महीने के बाद, 14 अप्रैल डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर की जन्म जयन्ती है उस दिन एक bumper draw होगा जिसमें करोड़ों के ईनाम होंगे। ‘Digi धन व्यापार योजना’ प्रमुख रूप से व्यापारियों के लिये है। व्यापारी स्वयं इस योजना से जुडें और अपना कारोबार भी cashless बनाने के लिए ग्राहकों को भी जोड़ें। ऐसे व्यापारियों को भी अलग़ से ईनाम दिये जाएँगे और ये ईनाम हज़ारों की तादात में हैं। व्यापारियों का अपना व्यापार भी चलेगा और ऊपर से ईनाम का अवसर भी मिलेगा। ये योजना, समाज के सभी वर्गों, खास करके ग़रीब एवं निम्न मध्यम-वर्ग, उनको केंद्र में रख करके बनायी गई है और इसलिये जो 50 रूपये से ऊपर खरीदते हैं और तीन हज़ार से कम पैसों की खरीदी करते हैं, उन्हीं को इसका लाभ मिलेगा। तीन हज़ार रुपये से ज़्यादा खरीदी करने वाले को इस ईनाम का लाभ नहीं मिलेगा। ग़रीब से ग़रीब लोग भी USSD का इस्तेमाल कर feature फोन, साधारण फोन के माध्यम से भी सामान खरीद भी सकते हैं, सामान बेच भी सकते हैं और पैसों का भुगतान भी कर सकते हैं और वे सब इस ईनाम योजना के लाभार्थी भी बन सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग AEPS के माध्यम से खरीद-बिक्री कर सकते हैं और वे भी ईनाम जीत सकते हैं। कइयों को आश्चर्य होगा, भारत में आज लगभग 30 करोड़ RuPay Card हैं, जिसमें से 20 करोड़ ग़रीब परिवार जो जन-धन खाता वाले लोग हैं, उनके पास है। ये 30 करोड़ लोग तो तुरंत इस ईनामी योजना का हिस्सा बन सकते हैं। मुझे विश्वास है कि देशवासी इस व्यवस्था में रुचि लेंगे और आपके अगल-बगल में जो नौजवान होंगे, वो ज़रूर इन चीज़ों को जानते होंगे, आप थोड़ा सा उनको पूछोगे वो बता देंगे। अरे, आपके परिवार में भी 10वीं-12वीं का बच्चा होगा, तो वो भी भली-भाँति चीज़ आपको सिखा देगा। ये बहुत सरल है - जैसे आप मोबाइल फोन से WhatsApp भेजते हैं न उतना ही सरल है। 

मेरे प्यारे देशवासियो, मुझे ये जान करके ख़ुशी होती है कि देश में technology का उपयोग कैसे करना, e-payment कैसे करना, online payment कैसे करना, इसकी जागरूकता बहुत तेज़ी से बढ़ रही है। पिछले कुछ ही दिनों में cashless कारोबार, बिना नगद का कारोबार, 200 से 300 प्रतिशत बढ़ा है। इसको बढ़ावा देने के लिये भारत सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। ये फैसला कितना बड़ा है इसका अंदाज़ तो व्यापारी बहुत अच्छी तरह लगा सकते हैं। जो व्यापारी digital लेन-देन करेंगे, अपने कारोबार में नगद के बज़ाय online payment की पद्धति विकसित करेंगे, ऐसे व्यापारियों को Income Tax में छूट दे दी गई है। 

मैं देश के सभी राज्यों को भी बधाई देता हूँ। Union Territory को भी बधाई देता हूँ। सबने अपने-अपने प्रकार से इस अभियान को आगे बढ़ाया है। आंध्र के मुख्यमंत्री श्रीमान् चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में एक committee भी बनाई है, जो इसके लिये अनेक योजनाओं पर विचार कर रही है, लेकिन मैंने देखा कि सरकारों ने भी अपने तरीक़े से कई योजनाएँ लागू की है, आरंभ की है। किसी ने मुझे बताया की असम सरकार ने property tax और व्यापार license fee का digital भुगतान करने पर 10 फ़ीसदी छूट देने का निर्णय किया है। ग्रामीण बैंको के branch अपने 75% उपभोक्ता से जनवरी से मार्च के बीच कम से कम दो digital transaction करवाते हैं, तो उन्हें सरकार की ओर से 50 हज़ार रूपये ईनाम मिलने वाले हैं। 31 मार्च 2017 तक अगर 100% digital transaction करने वाले गाँवों को सरकार की ओर से Uttam Panchayat for Digi-Transaction के तहत 5 लाख रुपये का ईनाम देने की उन्होंने घोषणा की है। उन्होंने किसानों के लिये Digital Krishak Shiromani असम सरकार ने ऐसे पहले 10 किसानों को 5 हज़ार रुपया ईनाम देने का निर्णय किया है जो बीज और खाद की ख़रीद के लिए पूरी तरह digital भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। मैं असम सरकार को बधाई देता हूँ लेकिन इस प्रकार से initiative लिये सभी सरकारों को बधाई देता हूँ। कई Organisations ने भी गाँव ग़रीब किसानों के बीच digital लेन-देन को बढ़ावा देने के कई सफल प्रयोग किये हैं। मुझे किसी ने बताया GNFC Gujarat Narmada valley Fertilizer और Chemical limited जो मुख्यतः खाद का काम करता है, उन्होंने किसानों को सुविधा हो इसलिये एक हज़ार Pose Machine खाद जहाँ बेचते हैं, वहाँ लगाए हैं और कुछ ही दिनों में 35 हज़ार किसानों को 5 लाख खाद के बोरे digital भुगतान के माध्यम से कर दिये और ये सब सिर्फ दो हफ्ते में किया है। और मज़ा यह है कि पिछले वर्ष की तुलना में GNFC की खाद की बिक्री में 27 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। 

भाइयो-बहनो, हमारी अर्थव्यवस्था में, हमारी जीवन व्यवस्था में, Informal Sector बहुत बढ़ा है और ज्यादातर इन लोगों का मज़दूरी का पैसा, काम का पैसा या पगार नग़द में दिया जाता है, Cash में salary दी जाती है और हमें पता है, उसके कारण मजदूरों का शोषण भी होता है। 100 रूपए मिलने चाहिये तो 80 मिलते हैं, 80 मिलने चाहिये तो 50 मिलते हैं और insurance जैसे health sector की दृष्टि से अन्य कई सुविधाएँ होती हैं उससे वो वंचित रह जाते हैं लेकिन अब cashless payment हो रहा है। सीधा पैसा बैंक में जमा हो रहा है। एक प्रकार से Informal Sector formal convert होता जा रहा है, शोषण बंद हो रहा है, cut देना पड़ता था वो cut भी अब बंद हो रहा है और मज़दूर को, कारीगर को, ऐसे ग़रीब व्यक्ति को पूरे पैसे मिलना संभव हुआ है। साथ-साथ अन्य जो लाभ मिलते हैं वे लाभ का भी वो हक़दार बन रहा है। हमारा देश तो सर्वाधिक युवाओं वाला देश है। Technology हमें सहज़ साध्य है। भारत जैसे देश ने तो इस क्षेत्र में सबसे आगे होना चाहिये। हमारे नौजवानों ने Start-Up से काफ़ी प्रगति की है। ये digital movement एक सुनहरा अवसर है हमारे नौजवान नये-नये idea के साथ, नयी-नयी technology के साथ, नयी-नयी पद्धति के साथ इस क्षेत्र को जितना बल दे सकते हैं देना चाहिये, लेकिन देश को काले धन से, भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के अभियान में पूरी ताक़त से हमें जुड़ना चाहिये। 

मेरे प्यारे देशवासियो, मैं हर महीने ‘मन की बात’ के पहले लोगों से आग्रह करता हूँ कि आप मुझे अपने सुझाव दीजिये, अपने विचार बताइए और हज़ारों की तादाद में MyGov पर और NarendraModiApp पर इस बार जो सुझाव आये, मैं कह सकता हूँ 80-90 प्रतिशत सुझाव भ्रष्टाचार और काले धन के ख़िलाफ़ की लड़ाई के संबंध में आये, नोटबंदी की चर्चा आयी। इन सारी चीज़ों को जब मैंने देखा तो मैं मोटे-मोटे तौर पर कह सकता हूँ कि मैं उसको तीन भागों में विभाजित करता हूँ। कुछ लोगों ने जो मुझे लिखा है, उसमें नागरिकों को कैसी-कैसी कठिनाइयाँ हो रही है, कैसी असुविधायें हो रही हैं। इसके संबंध में विस्तार से लिखा है। लिखने वालों का दूसरा तबक़ा वो है जिन्होंने ज्यादातर उन बातों पर बल दिया है कि इतना अच्छा काम, देश की भलाई का काम, इतना पवित्र काम, लेकिन उसके बावजूद भी कहाँ-कहाँ कैसी-कैसी धांधली हो रही है, किस प्रकार से बेईमानी के नये-नये रास्ते खोज़े जा रहे हैं, इसका भी ज़िक्र लोगों ने किया है। और तीसरा वो तबक़ा है जिन्होंने जो हुआ है, उसका तो समर्थन किया है लेकिन साथ-साथ ये लड़ाई आगे बढ़नी चाहिये। भ्रष्टाचार, काला धन पूर्णतः नष्ट होना चाहिये, इसके लिए और कठोर कदम उठाने चाहिये तो उठाने चाहिये, ऐसा बड़ा ही बल दे करके लिखने वाले लोग भी हैं। 

मैं देशवासियों का आभारी हूँ कि इतनी सारी चिट्ठियाँ लिख करके मुझे आपने मदद की है। श्रीमान गुरुमणि केवल ने My Gov पर लिखा है काले धन पर लगाम लगाने का ये कदम प्रसंशा के योग्य है। हम नागरिकों को परेशानी हो रही है, लेकिन हम सब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं और इस लड़ाई में हम जो सहयोग दे रहे हैं, उससे हम खुश हैं। हम भ्रष्टाचार, काला धन इत्यादि के खिलाफ़ Military Forces की तरह लड़ रहे हैं। गुरु मणिकेवल जी ने जो बात लिखी है देश के हर कोने में से यही भावना उजागर हो रही है। हम सब इसको अनुभव कर रहे हैं। लेकिन ये बात सही है जब जनता कष्ट झेलती है, तकलीफ झेलती है तो कौन इंसान होगा जिसको पीड़ा न होती हो। जितनी पीड़ा आपको होती है, उतनी ही पीड़ा मुझे भी होती है। लेकिन एक उत्तम ध्येय के लिये, एक उच्च इरादे को पार करने के लिये, साफ नीयत के साथ जब काम होता है तो ये कष्ट के बीच, दुख के बीच, पीड़ा के बीच भी देशवासी हिम्मत के साथ डटे रहते हैं। ये लोग ही असल में Agent of Change बदलाव के पुरोधा हैं। मैं लोगों को एक और कारण के लिये भी धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने न केवल परेशानियाँ उठाई हैं, बल्कि उन चुनिन्दा लोगों को करारा जवाब भी दिया है, जो जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। कितनी सारी अफवाहें फैलाइ गई। भ्रष्टाचार और काले धन जैसी लड़ाई को भी साम्प्रदायिकता के रंग से रंगने का भी कितना प्रयास किया गया। किसी ने अफवाह फैलाइ नोट पर लिखी Spelling गलत है, किसी ने कह दिया नमक का दाम बढ़ गया है, किसी ने अफवाह चला दी 2000 के नोट भी जाने वाली है, 500 और 100 के भी जाने वाली है, ये भी फिर से जाने वाला है, लेकिन मैंने देखा भाँति-भाँति अफवाहों के बावज़ूद भी देशवासियों के मन को कोई डुला नहीं सका है। इतना ही नहीं, कई लोग मैदान में आए, अपने Creativity के द्वारा , अपने बुद्धि शक्ति के द्वारा अफवाह फैलाने वालों को भी बेनकाब किया, अफवाहों को भी बेनकाब कर दिया और सत्य लाकर के खड़ा कर दिया। मैं जनता के इस सामर्थ्य को भी शत-शत नमन करता हूँ। 

मेरे प्यारे देशवासियो, ये मैं साफ अनुभव कर रहा हूँ, हर पल अनुभव कर रहा हूँ। जब सवा-सौ करोड़ देशवासी आपके के साथ खड़े हों तब कुछ भी असंभव नहीं होता है और जनता जनार्दन ही तो ईश्वर का रूप होती है और जनता के आशीर्वाद, ईश्वर के ही आशीर्वाद बन जाते हैं। मैं देश की जनता को धन्यवाद देता हूँ, उन्हें नमन करता हूँ कि भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ इस महायज्ञ में लोगों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया है। मैं चाहता था कि सदन में भ्रष्टाचार और काले धन के खिलाफ जो लड़ाई चल रही है राजनैतिक दलों के लिये भी, Political Funding के लिये भी, व्यापक चर्चा हो। अगर सदन चला होता तो ज़रूर अच्छी चर्चा होती। जो लोग अफवाहें फैला रहे हैं कि राजनैतिक दलों को सब छूट-छाट है, ये गलत है। कानून सब के लिये समान होता है और कानून का पालन भी चाहे व्यक्ति हो, संगठन हो या राजनैतिक दल हो, हर किसी को कानून का पालन करना ही होता है और करना ही पड़ेगा। जो लोग खुल कर के भ्रष्टाचार और काले धन का समर्थन नहीं कर पाते हैं, वे सरकार की कमियाँ ढूंढने के लिए पूरी देर लगे रहते हैं। एक बात ये भी आती है बार-बार नियम क्यों बदलते हैं। ये सरकार जनता-जनार्दन के लिये है। जनता का लगातार feedback लेने का प्रयास सरकार करती है। जनता-जनार्दन को कहाँ कठिनाई हो रही है! किस नियम के कारण दिक्कत आती है! उसका क्या रास्ता खोजा जा सकता है! हर पल सरकार एक सवेंदनशील सरकार होने के कारण जनता-जनार्धन की सुख-सुविधा को ध्यान में रखते हुए जितने भी नियम बदलने पड़ते हैं, बदलती है, ताकि लोगों की परेशानी कम हो। दूसरी तरफ, मैंने पहले ही दिन कहा था, 8 तारीख को कहा था, ये लड़ाई असामान्य है। 70 साल से बेईमानी और भ्रष्टाचार के काले कारोबार में कैसी शक्तियाँ जुड़ी हुई है? उनकी ताक़त कितनी है? ऐसे लोगों से मैंने जब मुकाबला करना ठान लिया है तो वे भी तो सरकार को पराजित करने के लिए रोज नये तरीके अपनाते हैं। जब वो नये तरीके अपनाते हैं तो हमें भी तो उसके काट के लिये नया तरीका अपनाना पड़ता है। तू डाल-डाल, तो मैं पात-पात, क्योंकि हमने तय किया है कि भ्रष्टाचारियों को, काले कारोबारों को, काले धन को, मिटाना है। दूसरी तरफ, कई लोगों के पत्र इस बात को लेकर के आए हैं जिसमें किस प्रकार की धाँधलियां हो रही हैं, किस प्रकार से नये-नये रास्ते खोजे जा रहे हैं इसकी चर्चा है। 

मैं प्यारे देशवासियों को एक बात का हृदय से अभिनन्दन करना चाहता हूँ। आज आप लोग टी.वी. पर समाचार-पत्रों में देखते होंगे! रोज़ नये-नये लोग पकड़े जा रहे हैं! नोटें पकड़े जा रहे हैं! छापे मारे जा रहे है! अच्छे-अच्छे लोग पकड़े जा रहे हैं। ये कैसे संभव हुआ है? मैं Secret बता दूँ। Secret ये है कि जानकारियाँ मुझे लोगों की तरफ से मिल रही हैं। सरकारी व्यवस्था से जितनी जानकारी आती है उस से अनेक गुना ज्यादा सामान्य नागरिकों से जानकारियाँ आ रही हैं और ज्यादातर हमें सफलता मिल रही है वो जन-सामान्य की जागरूकता के कारण मिल रही है। कोई कल्पना कर सकता है - मेरे देश का जागरूक नागरिक ऐसे तत्वों को बेनकाब करने के लिए कितना risk ले रहा है और जो जानकारियाँ आ रही हैं उसमें ज्यादातर सफलता मिल रही है। मुझे विश्वास है कि सरकार ने इसके लिये जो एक e-mail address इस प्रकार की ख़बरें देना चाहते हैं उनके लिए बनाया है। उस पर भी भेज सकते हो, MyGov पर भी भेज सकते हो। सरकार ऐसी सारी बुराइयों के साथ लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और जब आपका सहयोग है तो फिर लड़ना बहुत आसान है। 

तीसरे पत्र, लेखकों का ग्रुप ऐसा है, वे भी बहुत बड़ी संख्या में हैं। वो कहते हैं मोदी जी थक मत जाना, रुक मत जाना और जितना कठोर कदम उठा सकते हो, उठाओ, लेकिन अब एक बार रास्ता पकड़ा है तो मंजिल तक पहुंचना ही है। मैं ऐसे पत्र लिखने वाले सब को विशेष रूप से धन्यवाद करता हूँ क्योंकि उनके पत्र में एक प्रकार से विश्वास भी है, आशीर्वाद भी है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि ये पूर्ण विराम नहीं है, ये तो अभी शुरुआत है, ये जंग जीतना है और थकने का तो सवाल ही कहाँ उठता है, रुकने का तो सवाल ही नहीं उठता है और जिस बात पर सवा-सौ करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद हो, उसमें तो पीछे हटने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। आपको मालूम होगा हमारे देश में ‘बेनामी संपत्ति’ का एक कानून है। Nineteen Eighty Eight, उन्नीस सौ अठास्सी में बना था, लेकिन कभी भी न उसके Rules बनें, उसको Notify नहीं किया, ऐसे ही वो ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। हमनें उसको निकाला है और बड़ा धार-धार ‘बेनामी संपत्ति’ का कानून हमने बनाया है। आने वाले दिनों में वो कानून भी अपना काम करेगा। देशहित के लिये, जनहित के लिये, जो भी करना पड़े, ये हमारी प्राथमिकता है। 

मेरे प्यारे देशवासियो, पिछली बार भी ‘मन की बात’ में मैंने कहा था कि इन कठिनाइयों के बीच भी हमारे किसानों ने कड़ी मेहनत कर के ‘बुवाई’ में पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। कृषि क्षेत्र के दृष्टि से ये शुभ संकेत हैं। इस देश का मजदूर हो, इस देश का किसान हो, इस देश का नौजवान हो इन सब के परिश्रम आज नये रंग ला रहे हैं। पिछले दिनों विश्व के ‘अर्थ मंच’ पर भारत ने अनेक क्षेत्र में अपना नाम बड़े गौरव के साथ अंकित करवाया है। हमारे देशवासियों के लगातार प्रयासों का परिणाम है कि अलग-अलग Indicators के ज़रिये अलग-अलग Indicators के ज़रिये भारत की वैश्विक ranking में बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। World Bank की doing business report में भारत की ranking बढ़ी है। हम भारत में business practices को दुनिया के best Practices के बराबर बनाने का तेज़ी से प्रयास कर रहे हैं और सफलता मिल रही है। UNCTAD उसके द्वारा जारी world Investment report के अनुसार top prospective host economies for 2016-18 में भारत का स्थान तीसरा पहुँच गया है। World Economic Forum के global competitiveness Report में भारत ने 32 Rank की छलांग लगाई है। Global Innovation Index 2016 में हमने 16 स्थानों की बढ़त हासिल की है और World Bank के Logistics Performance Index 2016 में 19 rank की बढ़ोतरी हुई है। कई report ऐसे हैं जिसके मूल्यांकन भी इसी ओर इशारा करते हैं। भारत तेज़ी से आगे बढ़ रहा है । 

मेरे प्यारे देशवासियो, इस बार संसद का सत्र देशवासियों की नाराज़गी का कारण बना, चारों तरफ संसद के गतिविधि के संबंध में रोष प्रकट हुआ। राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति जी ने भी प्रकट रूप से नाराज़गी व्यक्त की, लेकिन इस हालत में भी, कभी-कभी कुछ अच्छी बात भी हो जाती है और तब मन को एक बहुत संतोष मिलता है। संसद के हो-हल्ले के बीच एक ऐसा उत्तम काम हुआ जिसकी तरफ देश का ध्यान नहीं गया है। भाइयो-बहनो, आज मुझे इस बात को बताते हुए गर्व और हर्ष की अनुभूति हो रही है कि दिव्यांग-जनों पर जिस Mission को ले करके मेरी सरकार चली थी, उससे जुड़ा एक बिल संसद में पारित हो गया, इसके लिये मैं लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूँ, देश के करोड़ों दिव्यांग-जनों की तरफ से आभार व्यक्त करता हूँ। दिव्यांगों के लिए हमारी सरकार Committed है। मैंने निजी-तौर पर भी इसे लेकर मुहिम को गति देने की कोशिश भी की है। मेरा इरादा था, दिव्यांग-जनों को उनका हक़ मिले, सम्मान मिले, जिसके वो अधिकारी हैं। हमारे प्रयासों और भरोसों को हमारे दिव्यांग भाई-बहनों ने उस वक़्त और मजबूती दी जब वे Paralympics में चार Medal जीत करके ले आये, उन्होंने अपनी जीत से न केवल देश का मान बढ़ाया बल्कि अपनी क्षमता से लोगों को आश्चर्य चकित भी कर दिया। हमारे दिव्यांग भाई-बहन भी देश के हर नागरिक की तरह हमारी एक अनमोल विरासत है, अनमोल शक्ति है। मैं आज बेहद खुश हूँ कि दिव्यांग-जनों के हित के लिए ये कानून पास होने के बाद दिव्यांगों के पास नौकरी के ज्यादा अवसर होंगे। सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा बढ़ा करके 4% कर दी गयी है। इस कानून से दिव्यांगो की शिक्षा, सुविधा और शिकायतों के लिए विशेष प्रावधान भी किये गए हैं। दिव्यांगों को ले करके सरकार कितनी संवेदनशील है इसका अंदाज़ आप इस बात से लगा सकते हैं कि केंद्र सरकार ने पिछले दो वर्ष में दिव्यांग-जनों के लिए चार हज़ार तीन सौ पचास कैंप लगाए। तीन सौ बावन करोड़ रूपयों की राशि खर्च करके पाँच लाख अस्सी हज़ार दिव्यांग भाई-बहनों को उपकरण बाँटे। सरकार ने United Nation की भावना के अनुरूप ही नया कानून पारित किया है। पहले दिव्यांगों की श्रेणी सात प्रकार की हुआ करती थी, लेकिन अब कानून बना करके उसे इक्कीस प्रकार की कर दी गई हैं। इसमें चौदह नई श्रेणियाँ और जोड़ दी हैं। दिव्यांगों की कई ऐसी श्रेणियाँ शामिल की गयी हैं जिसे पहली बार न्याय मिला है, अवसर मिला है। जैसे- Thalassemia, Parkinson’s, या फिर बौनापन, ऐसे क्षेत्रों को भी इस श्रेणी के साथ जोड़ दिया गया है। मेरे युवा साथियो, पिछले कुछ हफ्तों में खेल के मैदान में ऐसी ख़बरें आईं जिसने हम सब को गौरवान्वित कर दिया। भारतीय होने के नाते हम सब को गर्व होना बहुत स्वाभाविक है। भारतीय cricket टीम की इंग्लैंड के खिलाफ़ चार शून्य से सीरीज में जीत हुई है। इसमें कुछ युवा खिलाड़ियों की Performance काबिले तारीफ़ रही। हमारे नौजवान करुण नायर ने Triple Century लगाई, तो, के.एल. राहुल ने 199 रनों की पारी खेली। टेस्ट कप्तान विराट कोहली ने तो अच्छी batting के साथ-साथ अच्छा नेतृत्व भी दिया। भारतीय क्रिकेट टीम के off-spinner गेंदबाज आर. अश्विन को ।CC ने वर्ष 2016 का ‘Cricketer Of The Year’ और ‘Best Test Cricketer’ घोषित किया है। इन सब को मेरी बहुत-बहुत बधाईयाँ, ढेर सारी शुभकामनायें। हॉकी के क्षेत्र में भी पंद्रह साल के बाद बहुत अच्छी खबर आई, शानदार खबर आई। Jun।or Hockey Team ने World Cup पर कब्ज़ा कर लिया। पंद्रह साल के बाद ये मौका आया है जब Jun।or Hockey Team ने World Cup जीता। इस उपलब्धि के लिये नौजवान खिलाड़ियों को बहुत-बहुत बधाई। ये उपलब्धि भारतीय हॉकी टीम के भविष्य के लिये शुभ संकेत है। पिछले महीने हमारी महिला खिलाड़ियों ने भी कमाल करके दिखाया। भारत की महिला हॉकी टीम ने As।an Champions Trophy भी जीती और अभी-अभी कुछ ही दिन पहले Under 18 As।a Cup भारत की महिला हॉकी टीम ने Bronze Medal हासिल किया। मैं क्रिकेट और हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों को ह्रदय से बहुत-बहुत अभिनन्दन करता हूँ। 

मेरे प्यारे देशवासियो, 2017 का वर्ष नई उमंग और उत्साह का वर्ष बने, आपके सारे संकल्प सिद्ध हों, विकास की नई ऊँचाइयों को हम पार करें। सुख चैन की ज़िन्दगी जीने के लिए ग़रीब से ग़रीब को अवसर मिले, ऐसा हमारा 2017 का वर्ष रहे। 2017 के वर्ष के लिये मेरी तरफ से सभी देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनायें। बहुत-बहुत धन्यवाद।

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