संयुक्त राष्ट्र महासभा में #Islamophobia विरोधी दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित हुआ


भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में मंगलवार को 'इंटरनेशन डे टू कॉम्बैट इस्लामोफ़ोबिया' यानी इस्लामोफ़ोबिया #Islamophobia विरोधी दिवस मनाने के लिए पाकिस्तान की ओर से लाए गए एक प्रस्ताव के पारित होने पर चिंता जताई है.

भारत ने कहा है कि एक धर्म विशेष को लेकर डर उस स्तर पर पहुंच गया है कि इसके लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने की स्थिति आ गई है. भारत ने कहा है कि धर्मों को लेकर अलग-अलग तरह से डर का मौहाल बनाया जा रहा है, ख़ासकर हिंदुओं, बौद्ध और सिख धर्म के ख़िलाफ.

193 सदस्यों वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के राजदूत मुनीर अकरम ने ये प्रस्ताव रखा था कि 15 मार्च को 'इंटरनेशन डे टू कॉम्बैट इस्लामोफोबिया' यानी 'इस्लाम के प्रति डर के ख़िलाफ़ लड़ाई का अंतरराष्ट्रीय दिवस' के तौर पर मनाया जाए.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ऑर्गनाइजेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन के इस प्रस्ताव को अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, ईरान, इराक़, जॉर्डन, कज़ाख़स्तान, कुवैत, किर्गिस्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, पाकिस्तान, क़तर, सऊदी अरब, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, उज़्बेकिस्तान और यमन का समर्थन हासिल था.

इस प्रस्ताव के पारित होने पर प्रतिक्रिया देते हुए, संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने महासभा में कहा कि भारत को उम्मीद है कि ये प्रस्ताव नज़ीर नहीं बनेगा. इस प्रस्ताव के बाद अन्य धर्मों के प्रति डर को लेकर कई प्रस्ताव आ सकते हैं और संयुक्त राष्ट्र धार्मिक शिविरों में बदल सकता है.

भारत का पक्ष:

उन्होंने कहा, "1.2 अरब लोग हिंदू धर्म को मानते हैं. बौद्ध धर्म को मानने वाले 53.5 करोड़ लोग हैं और तीन करोड़ से ज़्यादा सिख दुनिया भर में फैले हुए हैं. ये समय है कि हम एक धर्म के बजाय सभी धर्मों के प्रति फैल रहे डर के माहौल को समझें."

"संयुक्त राष्ट्र का ऐसे धार्मिक मामलों से ऊपर रहना ज़रूरी है जो दुनिया को एक परिवार की तरह देखने और हमें शांति और सौहार्द के मंच पर साथ लाने के बजाय हमें बांट सकती है."

इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्म के ख़िलाफ़ की जा रही किसी भी गतिविधि की निंदा करता है. लेकिन डर का माहौल केवल इन्हीं धर्मों को लेकर नहीं फैलाया जा रहा है.

उन्होंने कहा, "वास्तव में इस बात के सबूत हैं कि धर्मों के प्रति इस तरह से डर के माहौल ने यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों के अलावा अन्य धर्मावलंबियों को भी प्रभावित किया है. इससे धर्मों के प्रति, ख़ासकर हिंदुओं, बौद्धों और सिखों के प्रति डर का माहौल बढ़ा है."

उन्होंने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को ये नहीं भूलना चाहिए कि 2019 में 22 अगस्त को पहले ही धर्म के नाम पर होने वाली हिंसा में मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है. ये दिवस पूरी तरह से सभी पहलुओं को समेटे हुए है.

टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, "यहां तक कि 16 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है. हम इस बात से सहमत नहीं हैं कि हमें किसी एक धर्म विशेष के प्रति डर के ख़िलाफ़ एक अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाने की ज़रूरत है."

उन्होंने ये बात जोर देकर कही कि धर्मों के प्रति इस तरह के डर की वजह से कई देशों में गुरुद्वारों, बौद्ध मठों और मंदिरों जैसी धार्मिक जगहों पर हमले की घटनाएं और यहूदी, इस्लाम और ईसाई धर्म के अलावा अन्य धर्मों को लेकर भ्रामक सूचनाएं और घृणा बढ़ी है.

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान के बामियान में बौद्ध प्रतिमा के विध्वंस, गुरुद्वारे का अपमान, सिख धर्मावलंबियों के नरसंहार, मंदिरों पर हमले, मंदिरों में प्रतिमा तोड़े जाने जैसी घटनाओं को वाजिब ठहराने की कोशिश, जैसी कई घटनाओं का उदाहरण भी दिया.

टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से ग़ैर यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों के लोगों प्रति डर का माहौल आज कल बढ़ा है.

महासभा में प्रस्ताव के पारित होने के बाद तिरुमूर्ति ने एक बयान जारी कर कहा, "इसी संदर्भ में हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि बाक़ी धर्मों को छोड़कर किसी एक धर्म को लेकर डर के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है. किसी धर्म का उत्सव मनाना एक बात है लेकिन किसी धर्म के प्रति घृणा के ख़िलाफ़ लड़ाई के लिए एक दिन मनाना बिलकुल दूसरी बात है. इस प्रस्ताव से अन्य धर्मों के ख़िलाफ़ डर की गंभीरता को कमतर आंका गया है."

उन्होंने कहा कि भारत को इस बात का गर्व है कि विविधता उसके अस्तित्व की बुनियाद है.

"हम सभी धर्मों को समान रूप से संरक्षित किए और बढ़ावा दिए जाने पर यकीन रखते हैं. इसलिए ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि 'विविधता' जैसे शब्द का इस प्रस्ताव में जिक्र तक नहीं किया गया है और इस प्रस्ताव को लाने वाले देशों ने हमारे संशोधन प्रस्ताव के जरिए इस शब्द को शामिल करना ज़रूरी नहीं समझा जिसकी वजह वे लोग ही समझते होंगे."

तिरुमूर्ति ने कहा कि एक विविधतापूर्ण और लोकतांत्रिक देश होने की वजह से भारत सदियों से कई धर्मों का घर रहा है. भारत ने दुनिया भर में धर्म के नाम पर दमन का शिकार होने वाले लोगों को पनाह दी है.

उन्होंने कहा, "ऐसे लोगों को भारत में सुरक्षित पनाह मिली है. वे चाहे पारसी हों या बौद्ध या यहूदी हों या फिर किसी और धर्म को मानने वाले लोग."

उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न धर्मों को मानने वाले लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा, असहिष्णुता और भेदभाव की घटनाओं के बढ़ने पर गहरी चिंता जाहिर की.

फ्रांस का बयान:

संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के स्थाई प्रतिनिधि निकोलस डे रिविरे ने तिरुमूर्ति के बाद महासभा में अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि ये प्रस्ताव सभी तरह के भेदभाव के ख़िलाफ़ हमारी साझा लड़ाई से जुड़ी चिंताओं का जवाब नहीं देता है.

उन्होंने कहा, "धर्म को मानने या न मानने की आज़ादी का जिक्र किए बिना अन्य धर्मों को छोड़कर एक धर्म को तरजीह देकर ये प्रस्ताव धार्मिक असहिष्णुता के ख़िलाफ चल रही लड़ाई को बांटता है."

निकोलस डे रिविरे ने कहा कि समाज में हर तरह के लोग हैं. इनमें बहुत से लोग अलग-अलग धर्मों को मानते हैं या फिर वे किसी को भी नहीं मानते हैं.

पहली बार पाकिस्तानी सेना में तैनात हिन्दुओं को मिला प्रमोशन


पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) में दो हिंदू अधिकारियों (Hindu Officers) का प्रमोशन करते हुए उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल बना दिया गया है. यह पहली बार है जब हिंदू अफसरों को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है. मेजर डॉ. कैलाश कुमार और मेजर डॉ. अनिल कुमार को पदोन्नत कर लेफ्टिनेंट कर्नल बनाया गया है. पाकिस्तानी सेना के प्रोन्नति बोर्ड ने उनकी पदोन्नति को
मंजूरी दी है.

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सिंध प्रांत के तारपारकार जिले के कैलाश कुमार 2019 में हिंदू समुदाय से देश के पहले मेजर बने थे. वह 1981 में पैदा हुए थे और लियाकत विश्वविद्यालय से एमबीबीएस करने के बाद 2008 में कैप्टन के रूप में सेना में शामिल हुए. वहीं, अनिल कुमार कैलाश कुमार से एक साल छोटे हैं. वह भी सिंध प्रात के बादिन के रहने वाले हैं. वह 2007 में सेना में भर्ती हुए थे.

सरकारी पाकिस्तान टेलीविजन ने गुरुवार को कैलाश कुमार की प्रोन्नति के बारे में ट्वीट किया. पीटीवी ने लिखा, ‘कुमार लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में पदोन्नत होने वाले पहले हिंदू अधिकारी हैं’. इस खबर पर पाकिस्तान में हिंदुओं के अधिकार के लिए अभियान चलाने वाले कपिल देव ने लिखा कि कैलाश कुमार को लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में प्रोन्नत करने से इतिहास रच गया है. हालांकि इन प्रोन्नतियों के बारे में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

पाकिस्तान से अल्पसंख्यक खासकर हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें अक्सर सुनने में आती रहती हैं. कई बार हिंदू मंदिरों पर भी हमले हो चुके हैं. प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर दावे करते रहे हैं, लेकिन हकीकत ये है कि कट्टरपंथियों के आगे उसकी सरकार बेबस है. हिंदू-इसाई परिवारों की लड़कियों को अगवा करके जबरन धर्म परिवर्तन और फिर शादी पाकिस्तान में आम हो गई है.

मोदी सरकार का अगला एजेंडा POK को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना: जितेंद्र सिंह


नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के बाद हमारा अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना है. जितेंद्र सिंह ने मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के 100 दिनों की सबसे बड़ी उपलब्धि में जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करना है. उन्होंने देश विरोधी काम करने वाले लोगों और ताकतों को चेतावनी देते हुए कहा कि, 'यह मानसिकता है कि आप कुछ भी करके बच निकलेंगे. अब आप बच कर निकल नहीं पाएंगे, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए आपको कीमत चुकानी होगी.'

पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने पारित किया था संकल्प:

ऊधमपुर-कठुआ लोकसभा सीट से सांसद जितेंद्र सिंह ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के विषय पर कहा कि, ‘यह केवल मेरी या मेरी पार्टी की प्रतिबद्धता नहीं है बल्कि यह 1994 में पीवी नरसिंह राव के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा संसद से सर्वसम्मति से पारित कराया गया संकल्प है. यह एक स्वीकार्य रुख है.’

अनुच्छेद 370 हटाने पर भारत के अनुकूल है पूरी दुनिया का रुख

अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान समाप्त करने पर पाकिस्तान की ओर से शुरू किये गए दुष्प्रचार अभियान पर सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया का रुख भारत के अनुकूल है. उन्होंने कहा, कुछ देश जो भारत के रुख से सहमत नहीं थे, अब वे हमारे रुख से सहमत हैं. सिंह ने कहा कि कश्मीर में आम आदमी भारत सरकार से मिलने वाले लाभों को लेकर खुश है.

कश्मीर में कर्फ्यू नहीं, केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं

केंद्रीय मंत्री ने अपनी बात के समर्थन में कहा कि, कश्मीर न तो बंद है और ना ही कर्फ्यू के साए में है, बल्कि वहां केवल कुछ पाबंदियां लगी हुई हैं. सिंह ने देश विरोधी लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी उस मानसिकता को बदलना पड़ेगा कि वे कुछ भी करके आसानी से बच निकलेंगे. आतंकियों द्वारा आम लोगों की हत्या किए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें पाकिस्तान का हाथ है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “हमें, कश्मीर कर्फ्यू के साए में है और पूरी तरह से बंद है, जैसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है. कश्मीर बंद नहीं है. वहां कर्फ्यू नहीं है. अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को बाहर निकलने के लिए ‘कर्फ्यू पास’ की जरूरत होती.” उन्होंने कहा कि कश्मीर में धीरे-धीरे हालात सामान्य हो रहे हैं.

इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है सरकार

इंटरनेट सेवा बंद रखने के बारे में मोदी के मंत्री ने कहा कि, 'हम इंटरनेट सेवा को जल्द से जल्द बहाल करना चाहते हैं. इसके लिए प्रयोग के तौर एक कोशिश की गई थी लेकिन सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले गए, इसलिए फैसले की फिर से समीक्षा करनी पड़ी.' जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इन पाबंदियों को खत्म करने और इंटरनेट पर रोक हटाने को इच्छुक है.

भारत को परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान के रेल मंत्री की लंदन में पिटाई


जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में केंद्र सरकार की ओर से आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद भारत (India) को परमाणु हमले की धमकी देने वाले पाकिस्तान (Pakistan) के रेल मंत्री शेख रशीद (Sheikh Rashid) की लंदन (London) में जमकर पिटाई की गई है. लंदन में कुछ लोगों ने उन्हें घूंसे मारे और उनपर अंडे फेंके.

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, अवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख व रेल मंत्री शेख रशीद पर लंदन में उस समय हमला किया गया जब वह एक होटल में पुरस्कार समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे. हमलावर शेख रशीद को पीटने के बाद वहां से भाग निकले. इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से संबद्ध पीपुल्स यूथ ऑर्गनाइजेशन यूरोप के अध्यक्ष आसिफ अली खान और पार्टी की ग्रेटर लंदन महिला शाखा की अध्यक्ष समाह नाज ने ली है.

रेल मंत्री शेख रशीद ने कुछ दिन पहले ही पीपीपी प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी के खिलाफ अपशब्द कहे थे, जिसके बाद से पीपुल्स यूथ ऑर्गनाइजेशन यूरोप और ग्रेटर लंदन महिला शाखा के सदस्य उनसे नाराज चल रहे थे. हालांकि उन्होंने रशीद पर केवल अंडा फेंकने की बात कही है.

हमलावरों ने कहा- केवल अंडे फेंके गए

दोनों नेताओं ने कहा कि पाकिस्तान के रेल मंत्री शेख रशीद को उनका अहसानमंद होना चाहिए कि उन्होंने उनके खिलाफ 'विरोध जताने के लिए ब्रिटेन में अंडा फेंकने के सभ्य तरीके का ही इस्तेमाल किया.' अवामी मुस्लिम लीग ने कहा कि उनके पास इस घटना का कोई वीडियो तो नहीं है लेकिन उन्होंने बताया कि उनके संगठन के सदस्यों ने शेख रशीद के ऊपर हमला किया था. इस मामले में जल्द मामला दर्ज कराया जा सकता है.

पलटवार : भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक कीं

भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक कीं

कथित भारतीय हैकर्स ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट हैक कीं. भारतीय हैकर्स ने रैंजमवेयर के जरिए पाकिस्तान की वेबसाइट हैक कीं. हैकर्स ने पाकिस्तान की 'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' की वेबसाइट भी हैक करने का दावा किया है. इससे कुछ घंटे पहले ही पाकिस्तानी हैकर्स ने भारत की टॉप यूनिवर्सिटी के अकाउंट हैक किए थे.

भारत के कथित हैकर ग्रुप ने पाकिस्तान की 500 से ज्यादा वेबसाइट्स हैक करने का दावा किया है. इनमें वो वेबसाइट्स भी शामिल हैं जो HTTPS से सिक्योर हैं.

हैक की गईं वेबसाइट्स में से ज्यादातर वेबसाइट पाकिस्तान सरकार के अधीन आती हैं. दावा किया गया है कि टीम इंडियन ब्लैक हैट नाम के एक ग्रुप ने हैकिंग को अंजाम दिया. हालांकि हैक्ड वेबसाइट के होम पेज पर टीम केरला साइबर वॉरियर्स लिखा हुआ है.

'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' की वेबसाइट भी हैक:

हैकर्स ने पाकिस्तान की 'पाकिस्तान पीपल्स पार्टी' की वेबसाइट भी हैक करने का दावा किया है. इन वेबसाइट में वहां के सरकारी शिक्षण वेबसाइट्स भी शामिल हैं. इसके अलावा ट्रेड वेबसाइट्स और रुरल डेवेलपमेंट वेबसाइट्स भी शामिल हैं.

हमने हैकर ग्रुप से बात की तो उन्होंने बताया है कि ये सिर्फ एक ग्रुप ने नहीं किया है बल्कि कई ग्रु ने मिलकर किया है. इसमें Luzsecind, team black hats और United Indian hackers जैसे ग्रुप्स शामिल हैं. इनका कहना है कि आने वाले समय में वहां कि और भी वेबसाइट्स को हैक किया जाएगा.

ये कोई आम हैकिंग नहीं है. बल्कि इन्होंने रैंजमवेयर का इस्तेमाल किया है. रैंजमवेयर का मतलब वेबसाइट को हैकर के कब्जे से छुड़ाने के लिए पैसे देने होते हैं. इसके लिए वेबसाइट पर हैकर्स के फेसबुक पेज की डीटेल्स हैं जहां से वो पैसे के लेन देन की बात करेंगे.

हैक की गई वेबसाइट को देखकर लगता है कि केरल साइबर वॉरियर ने किया है. यहां एक बॉक्स है जिसमें Key डालने को कहा जा रहा है. आम तौर पर हैकर रैंजम मनी लेने के बाद एक Key देते हैं जिससे वेबसाइट को वापस लिया जा सकता है.

10 भारतीय यूनिवर्सिटी की वेबसाइट की थीं हैक:

मंगलवार को दिन के वक्त पाकिस्तानी हैकर्स ने भारत की 10 यूनिवर्सिटीज की वेबसाइट हैक की थीं. हैक की गई वेबसाइट्स में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी भुवनेश्वर, दिल्ली यूनिवर्सिटी, नेशनल एयरोस्पेस लैबोरैट्रीज और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की वेबसाइट शामिल हैं. हैकर्स ने इन वेबसाइट्स को हैक करके उन पर पाकिस्तान जिंदाबाद लिखा था. इसके अलावा कश्मीर के बारे में भी लिखा गया था. हैक की गई वेबसाइट्स में ज्यादातर आर्मी और डिफेंस से जुड़ी शिक्षण संस्थान शामिल हैं. इन वेबसाइट्स की हैकिंग का दावा पाकिस्तान के PHC ग्रुप ने किया है.

अब पढ़िए #DGMO द्वारा जारी #SerjicalStrike पर पूरा प्रेस नोट


यह गंभीर चिंता का विषय है कि जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पार से आतंकवादियों की घुसपैठ लगातार जारी है, जो क्रमश: पूंछ और उड़ी में 11 और 18 सितंबर 2016 को हुए आतंकवादी हमलों के रूप में परिलक्षित हुआ है। भारतीय सेना ने इस वर्ष नियंत्रण रेखा पर करीब 20 घुसपैठ के प्रयासों को नाकाम करने में सफलता प्राप्त की है।

इन आतंकवादी हमलों और घुसपैठ की कोशिशों के दौरान हमें कई ऐसी चीजें जैसे जीपीएस और सामान मिले हैं जिनका सीधा संबंध पाकिस्तान से है। पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के रहने वाले पकड़े गये आतंकवादियों ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें प्रशिक्षण और हथियार पाकिस्तान में या पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाके में मिले हैं। हमने यह मामला उच्चतम राजनयिक स्तर पर और सैन्य चैनलों के माध्यम से भी उठाया था । भारत ने अपने बयान को सत्यापित करने के लिए पाकिस्तान के इन गिरफ्तार आतंकवादियों को दूतावास सहायता की पेशकश की है। इसके साथ ही हमने यह भी प्रस्ताव दिया था कि पूंछ और उड़ी में मारे गये आतंकवादियों के उंगलियों के निशान और डीएनए के नमूने जांच के लिए पाकिस्तान को उपलब्ध करा सकते हैं।

हमारे लगातार आग्रह के बावजूद पाकिस्तान द्वारा जनवरी 2004 में की गई अपनी प्रतिबद्धता, पाकिस्तान अपनी जमीन या अपने नियंत्रण में आने वाले इलाके को भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल की इजाजत नहीं देगा, का सम्मान करना चाहिए। लेकिन नियंत्रण रेखा के पार से घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों में कोई कमी नहीं आई है।

अगर क्षति सीमित था, तो यह मुख्य रूप से घुसपैठ में आतंकवादियों को निष्क्रिय करने में बहु-स्तरीय जवाबी घुसपैठ ग्रिड में तैनात हमारे सैनिकों के प्रयासों की वजह से था जिन्होंने आतंकवादियों के घुसपैठ को निष्क्रिय करने में सफलता प्राप्त किया। मौजूदा खतरे को देखते हुए भारतीय सशस्त्र बलों को अत्यधिक सतर्क कर दिया गया है।

विशिष्ट और विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कि कुछ आतंकवादी घुसपैठ करने के लिए नियंत्रण रेखा पर तैयार हैं जो जम्मू-कश्मीर और दूसरे महानगरों में आतंकवादी हमलों को अंजाम देंगे। ऐसे में भारतीय सेना ने सर्जिकल हमले करते हुए आतंकवादियों के घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर दिया है। हमारा यह अभियान इस पर केन्द्रित था कि ये आतंकवादी किसी भी सूरत में अपने मंसूबों में कामयाब न हो पायें ।

आतंकवादियों के खिलाफ इस अभियान के दौरान आतंकवादियों को तो नुकसान पहुंचाया ही गया साथ ही उनको समर्थन देने वालों को भी बख्शा नहीं गया है। आतंकवादियों को निष्क्रिय करने के उद्देश्य से इस काम को अंजाम दिया गया। हमें इसे आगे जारी रखने की कोई योजना नहीं है। हालांकि भारतीय सशस्त्र बल किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

मैं पाकिस्तान सेना के डीजीएमओ के साथ लगातार संपर्क में हूं और हमने उन्हें इस बारे में अवगत करा दिया है कि यह इस क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखने की भारत की मंशा है।लेकिन किसी भी सूरत में नियंत्रण रेखा के पार से आंतकवादियों को हम अपने देश के नागरिकों पर हमले की अनुमति नहीं दे सकते। हम पाकिस्तान को जनवरी 2004 में की गई प्रतिबद्धता कि पाकिस्तान अपनी जमीन या अपने नियंत्रण में आने वाले इलाके को भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल की इजाजत नहीं देगा, को याद दिलाना चाहते हैं और हम पाकिस्तानी सेना से यह आशा करते हैं कि पाकिस्तानी सेना इस क्षेत्र से आतंकवाद के को मिटाने में हमारा सहयोग करे।


56 इंच : भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों को मारा


भारतीय सेना ने कहा है कि उसने पाकिस्तान के साथ लगती नियंत्रण रेखा के पास चरमपंथी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक्स की हैं.

पूंछ और उरी में हुए आतंकी हमले में जवानों की शहादत का बदला भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकियों को ढेर कर के लिया है. DGMO और विदेश मंत्रालय की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह खुलासा किया गया कि भारतीय फौज ने बुधवार देर रात नियंत्रण रेखा को पार करते हुए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक किया.

भारतीय सेना के डीजीएमओ लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने कहा, "ये स्ट्राइक्स बुधवार रात को उनके अड्डों पर की गईं, जब ये पक्की जानकारी मिली कि आतंकवादी नियंत्रण रेखा पर जमा हो रहे हैं."

उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के डीजीएनओ से इस बारे में बात की गई है और उन्हें बता दिया गया है कि ये स्ट्राइक्स ख़त्म हो चुकी हैं और फ़िलहाल इनको जारी नहीं रखा जाएगा.

लेफ़्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह का कहना था भारत किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. सेना के डीजीएमओ का कहना था कि चरमपंथी भारत में घुसकर कई अहम शहरों पर हमला करने की योजना रखते थे.

उनके मुताबिक़ पुंछ सेक्टर में ही सिंतबर में घुसपैठ की तक़रीबन 20 कोशिशें हुई हैं जिन्हें भारतीय सेना ने नाकाम किया. उन्होंने ये भी कहा कि वो कुछ लोगों को पकड़ने में भी कामयाब हुई जिन्होंने कथित तौर पर ये माना कि उनकी ट्रेनिंग पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हुई थी. जिसके बाद उन्हें हथियार मुहैया करवाए गए.

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि गोलीबारी रात के ढाई बजे से शुरू हुई और सुबह के आठ बजे तक जारी रही.
पाकिस्तानी सेना के मुताबिक़ नियंत्रण रेखा पर 'बिना किसी उकसावे के' भारत की तरफ़ से भिम्बर, हॉट स्प्रिंग, केल और लीपा सेक्टरों में फ़ायरिंग हुई.'

पाकिस्तानी सेना ने कहा है कि "भारत की ओर से कोई सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हुई है, ये सीमा पार से फायरिंग थी जो पहले भी होती रही है."

पाकिस्तानी सेना की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि "अगर पाकिस्तान की ज़मीन पर कोई सर्जिकल स्ट्राइक हुई तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा."

पाकिस्तान के चैनल पीटीवी के मुताबिक़, प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने 'भारत के खुले अत्याचार' की कड़ी निंदा की है और "मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि दी है."

नवाज़ शरीफ़ ने भारतीय सेना के हमले की निंदा की जिसमें दो पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई है. शरीफ़ ने कहा है कि शांति की हमारी ख़्वाहिश को कमज़ोरी नहीं समझा जाना चाहिए और हमारे सैनिक सीमा की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं.


पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने को लेकर अमेरिका में विधेयक पेश


दो अमेरिकी जनप्रतिनिधियों ने पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाला मुल्क करार देने से जुड़ा विधेयक यूएस कांग्रेस में पेश किया है। यूएन जनरल असेंबली में पीएम नवाज शरीफ के भाषण से पहले इसे पाकिस्तान के लिए शर्मिंदगी भरा घटनाक्रम माना जा रहा है। नवाज शरीफ यूएन में कश्मीर का मुद्दा उठाने वाले हैं। एचआर 6069 या द पाकिस्तान स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिजम डेजिगनेशन ऐक्ट नाम के इस बिल के आने के चार महीने के अंदर अमेरिकी प्रशासन को इस मामले पर औपचारिक रुख तय करना होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति को 90 दिन के भीतर एक रिपोर्ट जारी करनी होगी। इसमें इस बात की विस्तृत जानकारी दी जाएगी कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को बढ़ावा दिया कि नहीं। इसके तीस दिन बाद यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट को एक फॉलोअप रिपोर्ट पेश करना होगा। इसके जरिए यह तय होगा कि पाकिस्तान आतंकवाद प्रायोजित करने वाला मुल्क है। अगर ऐसा नहीं होता तो इस बात की विस्तृत जानकारी देनी होगी कि ऐसा न करने के पीछे क्या कानूनी बाध्यताएं हैं?

इस बिल को टेक्सस शहर के कांग्रेसमेन टेड पो और कैलिफोर्निया के कांग्रेसमेन डेना रोअरबाकर ने रखा है। टेड टेररिजम पर बनी हाउस सब कमिटी के चेयरमैन भी हैं। डेना बलूच आंदोलन के समर्थक हैं।

बिल का ऐलान करते हुए टेड ने मंगलवार को एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान न केवल एक न भरोसा किया जाने लायक सहयोगी है, बल्कि वह सालों से अमेरिका के दुश्मनों को मदद देता रहा है। उसने न केवल ओसामा को पनाह दी, बल्कि उसके हक्कानी नेटवर्क से भी अच्छे रिश्ते हैं। इसके अलावा भी पर्याप्त सबूत हैं कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान किसके साथ खड़ा है।

कम से कम वह अमेरिका के साथ नहीं है। वक्त आ गया है जब हम पाकिस्तान को उसकी धोखेबाजी के लिए पैसे देना बंद करें और उसे वह दर्जा दें जिसका कि वह हकदार है-आतंकवाद प्रायोजित करने वाला मुल्क।'

टेड ने जम्मू-कश्मीर के उड़ी स्थित भारतीय सैन्य मुख्यालय पर हुए हमले की भी निंदा की। बता दें कि वर्तमान अमेरिकी कांग्रेस अपने आखिरी दौर में है। ऐसे में यहां पेश हजारों बिलों में से कुछ के ही कानून में तब्दील होने की संभावना है। हालांकि, ताजा बिल इस बात का संकेत है कि अमेरिकी जनप्रतिनिधियों में उस पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा किस कदर बढ़ रहा है, जो अमेरिकी और भारतीय लोगों की हत्या में शामिल आतंकी समूहों की मदद कर रहा है।

कई सालों बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि जब पाकिस्तान को आतंकवादी मुल्क घोषित करने को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू हुई है। इस तरह के मुद्दे पर आखिरी बार चर्चा 1993 में हुई थी, जब पाक ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के जरिए मुंबई बम धमाकों की साजिश रची। इन धमाकों में 259 लोगों की मौत हो गई थी। यह तो बस एक शुरुआत थी। इसके बाद, इससे मिलते जुलते कई हमले न्यू यॉर्क, लंदन, मैड्रिड और दुनिया के कई दूसरे शहरों में हुए।

इनमें से कई हमलों में पाकिस्तान का हाथ होने के संकेत मिलने के बावजूद यह देश सिर्फ इसलिए बचता रहा क्योंकि वह आतंक के खिलाफ जंग में खुद को साथी बताता रहा।

हालांकि, पाकिस्तान का यह खेल ज्यादा दिन नहीं चला। आज बहुत सारे अमेरिकी सैन्य जनरल, अफसर और एक्सपर्ट्स इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि पाकिस्तान डबल गेम खेल रहा है।

वह एक तरफ अमेरिकी टैक्स पेयर्स का दिया पैसा मदद के नाम पर अमेरिकी सरकार से हासिल कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह अपने यहां आतंकियों को फलने-फूलने का माहौल दे रहा है। इन आतंकियों की वजह से न केवल भारतीय, बल्कि अमेरिकी सैनिकों और आम नागरिकों को जान गंवानी पड़ी।

पढ़िए सार्क सम्मलेन में राजनाथ सिंह का वो भाषण जो पाक ने नहीं दिखाया


वक्‍तव्‍य का मूल पाठ हिंदी में निम्‍नलिखित है: 

“सार्क गृह मंत्रियों की 7वीं बैठक में मैंने दिनांक 04.08.2016 को भाग लिया। 

इस बैठक में मुख्‍य Agenda आतंकवाद, Narcotic Drugs की तस्‍करी, Cyber crime एवं Human Trafficking थे। लगभग सभी देशों ने, आतंकवाद की घोर भ्रत्‍सना की। 

भारत की ओर से मैंने आतंकवाद पर विशेष बल दिया -मुझे विश्‍वास है कि इस सदन के सभी सदस्‍य इस बात से सहमत होंगे- क्‍योंकि दक्षिण एशिया में शांति और खुशहाली के लिए सबसे बड़ी चुनौति और सबसे बड़ा खतरा यदि कोई है तो वह आतंकवाद है। मैंने इस बुराई को जड़ सहित उखाड़ फेंकने का पक्‍का संकल्‍प करने का आवाह्न किया। 

सार्क के सभी सदस्‍यों से आग्रह किया कि वे आतंकवाद को न तो Glorify करें, न ही Patronage दें। एक देश का आतंकवादी किसी के लिए भीMartyr या स्‍वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकता। 

आतंकवाद को बढ़ावा नहीं मिले, इस हेतु मैंने कहा कि जरूरी है कि न सिर्फ आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध, बल्‍कि उन्‍हें समर्थन देने वाले व्‍यक्‍तियों, संस्‍थाओं, संगठनों औरराष्‍ट्रों के विरुद्ध भी कठोर से कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। आतंकवाद की हैवानियत से तभी निपटा जा सकेगा। इसके अलावा मैंने सार्क के गृहमंत्रियों की इस बैठक में भारत की ओर से निम्‍न सुझाव रखे:- 

(i). आतंकवादियों पर विश्‍व समुदाय की सहमति से लगाए गए प्रतिबंध का सम्‍मान किया जाए। 

(ii). अच्‍छे और बुरे आतंकवाद में भेद करने की भूल कदापि नहीं की जाए। 

(iii). आतंकवाद को बढ़ावा या समर्थन देने वाले सभी States अथवा Non-states actor के विरुद्ध प्रभावी कदम आवश्‍यक हैं। 

(iv). आतंकवाद में सम्‍मिलित व्‍यक्‍तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और उनका Extradition सुनिश्‍चित किया जाना चाहिए ताकि वे कानून से न बच पाएं। 

(v). SAARC Convention on Mutual Assistance on Criminal Matters को उन देशों द्वारा Ratify किया जाना आवश्‍यक है जिन्‍होंने अब तक इसको Ratify नहीं किया है। 

(vi). SAARC Terrorist Offences Monitoring Desk (STOMD) और SAARC Drug Offences Monitoring Desk (SDOMD)को उन देशों की सहमति की आवश्‍यकता है जिन्‍होंने अब तक इस पर अपनी सहमति नहीं दी है। 

मैंने भारत में महिलाओं और बच्‍चों की सुरक्षा हेतु Track Child और Operation Smile जैसे उठाए गए कदमों की ओर सार्क गृहमंत्रियों का ध्‍यान आकर्षित किया। भारत द्वारा ईमानदार, Transparent और Accountable Governance हेतु जनधन योजना और आधार जैसे कार्यक्रमों से भी सार्क गृहमंत्रियों को अवगत कराया। 

भारत की ओर से सार्क गृहसचिवों एवं गृहमंत्रियों की बैठक के दौरान भारत द्वारा निम्‍न Initiatives की भी घोषणा की गई :- 

1. STOMD और SDOMD का प्रभावी रूप से लागू करने हेतु भारत की ओर से तकनीकी सहायता। 

2. भारत में 22-23 सितम्‍बर को SAARC Anti Terrorism Mechanism के Experts की बैठक का आयोजन। सौभाग्‍य से,सभी सदस्‍य देशों ने इस बैठक में भाग लेने पर सहमति दी। 

3. नशीले पदार्थों की रोकथाम हेतु भारत द्वारा SAARC सदस्‍य देशों के अधिकारियों को विभिन्‍न प्रकार का प्रशिक्षण। 

4. सार्क देशों की Computer Emergency Response Teams (CERTs) की पहली बैठक भारत में आयोजित करने का प्रस्‍ताव। 

जहां तक हमारे पड़ोसी देश पाकिस्‍तान का सवाल है मैं माननीय सदस्‍यों को बताना चाहूंगा कि SAARC Convention on Mutual Assistance on Criminal Matters को उसने अब तक Ratify नहीं किया है। STOMD और SDOMD हेतु भी उनकी सहमति अभी शेष है। पाकिस्‍तान की ओर से कहा गया कि वे इस ओर शीघ्र कार्यवाही करेंगे, और मैं आशा करता हूं कि,यह “शीघ्र”, वास्‍तव में शीघ्र होगा। 

दक्षिण एशिया क्षेत्र समेत पूरी दुनिया में आतंकवाद के गहरे बादल मंडरा रहे हैं। पूरी World Community इस गंभीर खतरे से बेहद चिंतित है, ऐसा सर्व विदित है। यह इस बात से भी स्‍पष्‍ट है कि भारत ने तो इस मानवता विरोधी खतरे पर अपना स्‍पष्‍ट Messageतो दिया ही,साथ में लगभग सभी सदस्‍य देशों ने भी इस हैवानियत पर अपनी चिंता व्‍यक्‍त की। 

माननीय, अध्‍यक्ष महोदया, मैं इस बात पर बल देना चाहता हूं कि भारत का यह Message मानवता की खातिर, और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए है। माननीय सदस्‍य इस बात पर सहमत होंगे कि प्रमुख रूप से आतंकवाद ही मानविधकारों का सबसे बड़ा दुश्‍मन है।” 

पाक की तारीफ करने वालों को मारो जूते - साध्वी बालिक

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की एक नेता बालिक सरस्वती ने एक साहसी बयान देकर सेकुलर प्रजाति में खलबली पैदा कर दी है। विहिप नेत्री बालिक सरस्वती ने अपने बयान में कहा कि ऐसे लोग जो भारत में रहते हैं और पाकिस्तान का गुणगान करते हैं तो उन्हें जूता मारना चाहिए और वहीं भेज देना चाहिए। 

एक कार्यक्रम में शरीक होने पहुंची साध्वी बालिक सरस्वती ने यह बयान दिया। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में रहने-खाने वाले लोग अगर पाकिस्तान की तारीफ करें तो उन्हें जूतों से मारना चाहिए और पाकिस्तान भेज देना चाहिए।

अयोध्या में राम मंदिर बनाने का आह्वाहन करते हुए साध्वी ने कहा कि हिदुंओं को एक मंदिर अयोध्या में और एक इस्लामाबाद में बनाना चाहिए। साथ ही वहां पूजा अर्चना भी करने जाना चाहिए। 

साध्वी के इस बयान के बाद पुलिस का कहना है कि अगर शिकायत की गई तो कार्रवाई होगी। 

कुछ दिन पहले भी साध्वी ने एक अच्छा बयान दिया था। साध्वी ने कहा था कि मैं हिंदू लड़कियों से आग्रह करती हूं कि वे मुस्लिम लड़कों से दूर रहें। यदि आपसे कोई मुस्लिम संपर्क साधने की कोशिश करता है तो उस पर पत्थर बरसाओ। 

हिन्दू लड़कियों को मुस्लिम लड़के जबरन इस्लाम कबूल करवाते हैं ताकि देश में मुस्लिमों की आबादी हिन्दुओं जितनी की जा सके। ये आबादी में बढ़ोतरी के लिए हिंदू महिलाओं को डिलिवरी मशीन में तब्दील कर देते हैं।    

भारत में घुसपैठ के लिए पाकिस्तान दे रहा अल-कायदा का साथ

जांच एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किए गए आतंकवादियों से पूछताछ के बाद इस बात का पता चला कि पाकिस्तान का इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (आईएसआई) सभी प्रकार के आतंकवादियों को आश्रय, संरक्षण और धन उपलब्ध करा कर भारत में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा है। 

03 सितंबर, 2014 को एक वीडियो अपलोड किया गया था, जिसमें अल-कायदा के शेख अय्यम अल-जवाहिरी का भाषण शामिल है। इसमें अल-जवाहिरी ने 'भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा' (एक्यूआईएस) नामक अल-कायदा की एक नई शाखा स्थापित करने की घोषणा की थी। पता चला है कि असीम उमर और उस्माना महमूद को एक्यूआईएस का क्रमशः 'अमीर' और 'प्रवक्ता' नियुक्त किया गया है। 

सरकार ने गृह/आंतरिक मंत्री/सचिव स्तरीय वार्ताओं, विदेश सचिव स्तरीय वार्ताओं आदि जैसे अनेक मंचों पर विभिन्न आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान की ओर से मिल रही सहायता का मुद्दा उठाया है और पाकिस्तान के अधिकारियों को संबंधित तथ्य/डोजियर सौंपे गए हैं। इतना ही नहीं, सरकार अपनी ओर से भारत में पाकिस्तान आधारित/समर्थित आतंकवादी संगठनों की नापाक गतिविधियों को विफल करने के लिए सभी आवश्यक उपाय कर रही है। 

जिन्हें पाकिस्तान पसंद है, वे जाएँ, किराया हम देंगे - योगी आदित्यनाथ

गोरखपुर के सांसद तथा गोरक्षपीठ के महंत आदित्यनाथ ने कहा कि जिन्हें पाकिस्तान पसंद है, वे वहीं चले जाएं, अगर किराया न हो तो हमसे ले जाएं। 

भारत में रहकर किसी को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की छूट नहीं दी जा सकती। यहां संविधान विरोधी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा। 

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम की ड्रेस पहनकर प्रदर्शन करने वालों पर अगर प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो हिंदू युवा वाहिनी कार्यकर्ता इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।

महंत शनिवार को कलेक्ट्रेट के सामने हिंदू पंचायत को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बुद्ध की धरती पर राष्ट्र विरोधी, संविधान विरोधी, धर्मांतरण समर्थक शक्तियां मजबूत हो रही हैं।

भारत लोकतांत्रिक देश है। इसके सभी निवासियों पर कानून को समान रूप से लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की विफलता से उत्तर प्रदेश गंदा प्रदेश बन गया है। प्रदेश सरकार सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति कर रही है। 

बिजली, पानी, सड़क, खाद-बीज की कमी से जनता जूझ रही है। इन समस्याओं के समाधान में प्रदेश सरकार विफल साबित हो रही है। 

उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। नोएडा में जिस यादव सिंह जैसे चीफ इंजीनियर के घर बेशुमार दौलत मिली है, वैसे अधिकारी प्रदेश के हर जिले में हैं, जिन्हें सपा नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। महंत ने कहा कि महापुरुषों की जयंती मनाने पर रोक निंदनीय है। यह वोट की राजनीति का परिणाम है। 

मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और विभाजन

‘‘कांग्रेस सदस्यों में सरदार वल्लभभाई पटेल विभाजन के सबसे बड़े समर्थक थे लेकिन उन्हें भी विश्वास नहीं था कि भारत की समस्याओं का सबसे बेहतर समाधान विभाजन हो सकता है। उन्होंने अपने आप को बंटवारे के पक्ष से बाहर रखा। उनका कहना था कि इससे रंजिश और दंभ बढ़ेगा। उन्होंने अपने आप को हर कदम पर तब दुविधा में पाया जब तत्कालीन वित्‍तमंत्री लियाकत अली खॉ ने उनके प्रस्ताव ठुकरा दिये। बेहद गुस्से में उन्होने फैसला किया कि अगर कोई विकल्प न बचे, तो बंटवारे का प्रस्ताव मान लिया जाये। उनका विचार था कि अगर ये प्रस्ताव मान लिया गया तो यह मुस्लिम लीग के लिए एक कड़वा सबक होगा। पाकिस्तान थोड़े ही समय में लड़खड़ा जायेगा और जो सूबे भारत छोड़ कर पाकिस्तान में शामिल हुये हैं उन्हें बहुत मुश्‍किलों का सामना करना होगा’’ - मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने अपनी आत्मकथा ‘‘इंडिया विन्स फ्रीडम’’ में यह बात आजादी मिलने के दस साल बाद 1957 में लिखी है।

एक राय यह भी है कि आज़ाद ने जवाहरलाल नेहरू को इस बात का दोष दिया था कि उन्‍होंने कांग्रेस और मुस्लिम लीग में दो अवसरों पर सुलह सफाई की सम्भावनाओं पर पानी फेर दिया। पहला मौका आया 1937 में, जब मोहम्मद अली जिन्ना ने मांग की उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लीग के दो प्रतिनिधियों को लेकर सरकार बनाई जाये। ऐसा दूसरा मौका तब आया जब नेहरु ने एक बयान जारी करके कहा कि आजाद भारत को संविधान निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा बनाया जाएगा और कैबिनेट मिशन के साथ जिस योजना पर सहमति हुई थी वह बाध्‍य नहीं होगी।

यह सर्व विदित है कि मौलाना आज़ाद, मोहम्मद अली जिन्ना और बंटवारे के प्रबल विरोधी थे और धर्म निरपेक्ष भारत में मुसलमानों के सह-अस्तित्व की सामूहिक भावना के प्रतीक थे। अखबारों के लिए जारी एक बयान में 15 अप्रैल, 1946 को कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना आजाद ने कहा था ‘‘मैंने हर तरह से पाकिस्तान की उस स्कीम को समझ लिया है जिसे मुस्लिम लीग ने तैयार किया है। एक भारतीय होने के नाते मैंने इसके भारत के भविष्‍य पर पड़ने वाले प्रभाव का भी अंदाजा लगाया है। एक मुसलमान होने के नाते मैंने इस पहलू पर भी गौर किया है कि इसका भारत के मुसलमानों पर क्‍या असर होगा। इस योजना के सभी पक्षों पर विचार करने के बाद मैंने निष्‍कर्ष निकाला है कि यह सिर्फ भारत के लिए ही नुकसानदेह नहीं है, बल्‍कि पूरे मुस्‍लिम समुदाय के लिए नुकसानदेह है। यह योजना जिन समस्‍याओं के समाधान के लिए बनाई गई है वह और समस्‍याएं पैदा करेगी।’’

कांग्रेस अध्‍यक्ष होने के नाते मौलाना आजाद ने जिन्‍ना को यह समझाने की कोशिश की कि वह अपना कठोर रवैया बदलें। उन्‍होंने एक गोपनीय तार भी भेजा। इस तार में उन्‍होंने कहा ‘‘मैंने आपका 9 जुलाई का बयान पढ़ा है। दिल्‍ली प्रस्‍ताव एक अच्‍छा प्रस्‍ताव है और राष्‍ट्रीय सरकार सिर्फ एक ही पार्टी की सरकार नहीं होगी। लेकिन लीग इसे मानने को तैयार नहीं थी क्‍योंकि यह योजना दो राष्‍ट्र के सिद्धांत पर आधारित नहीं थी।’’

जिन्‍ना का जवाब सिर्फ नकारात्‍मक नहीं था बल्‍कि यह निश्‍चय ही अपमानित करने वाला था। उन्‍होंने कहा ‘‘मैं आपका विश्‍वास नहीं लेना चाहता। मुस्‍लिम भारत का आपका विश्‍वास पूरी तरह खत्‍म हो चुका है। क्‍या आप ऐसा नहीं सोचते कि कांग्रेस ने आपको ऐसा दिखावटी अध्‍यक्ष बना दिया है जिसे सामने लाकर वह गैर-कांग्रेसी दलों और दुनिया के अन्‍य देशों को डराती है। आप न तो मुसलमानों के प्रतिनिधि हैं और न ही हिन्‍दुओं के। कांग्रेस हिन्‍दुओं की संस्‍था है और अगर आपमें ज़रा भी आत्‍मसम्‍मान बाकी है तो आप इससे तुरंत इस्‍तीफा दे दें।’’

यह मौलाना आज़ाद की उदार भावना और एकता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता थी कि इसके बावजूद जिन्‍ना को मनाने की महात्‍मा गांधी की कोशिशों का उन्‍होंने विरोध नहीं किया। गांधी, जिन्‍ना का दिल नहीं बदल पाए। गांधी को भी उनका जवाब कोई अलग नहीं था। गांधी ने हजार कहा हो लेकिन उन्‍होंने ज़ोर देकर दो राष्‍ट्रों के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। उन्‍होंने कहा कि ‘‘हम इस बात को पक्‍का कह सकते हैं कि मुसलमानों और हिन्‍दुओं में सभी मानकों के अनुसार दो राष्‍ट्रों की भावना है। सभी अंतर्राष्‍ट्रीय मानकों और सिद्धांतों के आधार पर हम मुसलमान एक राष्‍ट्र हैं।’’

मौलाना आज़ाद ने कांग्रेस नेताओं को भरसक समझाने की कोशिश की कि वह तब तक इंतजार करें जब तक समस्‍या का सही समाधान न निकल आए। लेकिन उन्‍हें कामयाबी नहीं मिली। वस्‍तुत: मौलाना ने गुस्‍सा और हताशा में इसे कांग्रेस नेताओं की नेत्रहीनता (दूरदृष्‍टि का अभाव) कहा।

ऐसा जान पड़ता है कि जिन्‍ना का विश्‍वास था कि राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को मानना जरूरी नहीं है। बंटवारे के बाद मुस्‍लिम लीग की बुरी हालत हुई और उसके नेता जो भारत में रह गए उन्‍होंने भी इसे महसूस किया। जिन्‍ना अपने अनुयायियों को यह संदेश देकर कराची चले गए कि अब देश बंट चुका है और उन्‍हें भारत के वफादार नागरिकों की तरह व्‍यवहार करना चाहिए। जब इन गुस्‍साए नेताओं ने मौलाना आज़ाद से भेंट की तो उन्‍होंने शिकायत की कि ‘‘जिन्‍ना ने उन्‍हें धोखा दिया है और उनके हाल पर छोड़ दिया है।’’ इस पर मौलाना ने आश्‍चर्य व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि पहले तो मैं समझ ही नहीं पाया कि वह क्‍या कह रहे हैं और जिन्‍ना ने उन्‍हें कैसे धोखा दिया। ‘‘उन्‍होंने तो खुले आम देश को बांटने की मांग की थी और मुस्‍लिम बहुमत वाले प्रांतों को इसका आधार बताया था।’’

जिन्‍ना की हालत से यह स्‍पष्‍ट हो जाता है कि वह अपने प्रस्‍ताव को लेकर गंभीर नहीं थे और सिर्फ एक खेल खेल रहे थे। जहां तक उनके सिद्धांत का सवाल है, यह उनके संविधान सभा में दिए गए पहले भाषण से ही स्‍पष्‍ट है। नए राष्‍ट्र का नाम पाकिस्‍तान रखा गया। आज़ाद और गांधी को हराने के बाद साम्राज्‍यवादी शासकों की मक्‍कारी खुल गई और उन्‍होंने नए देश के लिए राष्‍ट्रीयता की मांग की। उन्‍होंने नए देश और इसके निवासियों को सलाह दी कि वे हिन्‍दुओं और मुसलमानों को पाकिस्‍तानी समझें। इसी आधार पर कुछ इतिहासकारों ने जिन्‍ना को धर्म-निरपेक्ष नेता बताया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्‍ठ नेता एल. के. आडवाणी ने इसी आधार पर जिन्‍ना को धर्म निरपेक्ष कहा था।

लेकिन मौलाना आज़ाद ने जिन्‍ना की मक्‍कारी का खुलासा कर दिया। उन्‍होंने द्वि- राष्‍ट्रवाद सहित इसके कई आधार बताए। मौलाना ने कहा कि ‘‘यह लोगों के साथ बहुत बड़ा धोखा होगा और इसी के आधार पर हम भौगोलिक, आर्थिक और भाषाई रूप से अलग होते हुए भी धार्मिक रूप से एकता का दावा कर सकते हैं। यह सही है कि इस्‍लाम ने एक ऐसे समाज की स्‍थापना की बात कही, जो जातीय, भाषाई, आर्थिक और राजनीतिक सीमाओं में नहीं बंधता। लेकिन इतिहास ने साबित कर दिया है कि पहली सदी के बाद इस्‍लाम सभी मुसलमान देशों को  एक नहीं रख पाया।’’

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि यह स्थिति ‘‘बंटवारे से पहले थी, और अब हालत यह है।’’ मौलाना ने 1958 में कहा था ‘‘कोई उम्‍मीद नहीं कर सकता कि पूर्वी और पश्‍चिमी पाकिस्‍तान अपने सभी मतभेद सुलझा लेंगे और एक राष्‍ट्र बने रहेंगे।’’ इतिहास ने हालांकि सिद्ध कर दिया कि किस तरह से पूर्वी पाकिस्‍तान पश्‍चिमी पाकिस्‍तान से अलग हो गया और 1971 में वह एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र – बांग्लादेश बना।

मौलाना आज़ाद अपनी बातों को लेकर कितना गंभीर थे यह इसी बात से समझा जा सकता है कि उन्‍होंने कहा था ‘‘पश्‍चिम पाकिस्‍तान के तीन प्रांत – सिंध, पंजाब और सीमा प्रांत, आंतरिक रूप से असंबद्ध हैं और अलग-अलग उद्देश्‍यों तथा हितों के लिए काम कर रहे हैं।’’ पाकिस्‍तान के बनने के एक साल बाद मौलाना आज़ाद ने लाहौर की एक उर्दू पत्रिका ‘चट्टान’ को इंटरव्‍यू देते हुए पाकिस्‍तान के लिए एक अंधकारमय समय की भविष्‍यवाणी की थी और आज यह सच साबित हुआ।

‘‘सिर्फ इतिहास यह फैसला करेगा कि क्‍या हमने बुद्धिमानी और सही तरीके से बंटवारे का प्रस्‍ताव मंजूर किया था।’’ मौलाना को यह तथ्‍य अच्‍छी तरह पता था कि अनेक लोग उनकी बातों को नहीं मानते। उन्‍होंने कहा था ‘‘मज़हब में, साहित्‍य में, राजनीति में और दर्शन के रास्‍ते में जहां भी मैं गया, मैं अकेला गया। समय के कारवां ने, मेरी किसी भी यात्रा में मेरा साथ नहीं दिया।’’

सीताराम शर्मा

(श्री सीताराम शर्मा कोलकाता के मौलाना अबुल कालाम आज़ाद एशियाई अध्‍ययन संस्‍थान के अध्‍यक्ष हैं। यह संस्‍थान भारत सरकार के संस्‍कृति मंत्रालय के तत्‍वाधान में चल रहा है।)

पाकिस्तानी हिंदू भारतीय नागरिकता के लिए बिना पासपोर्ट कर सकेंगे आवेदन

केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से आने वाले हिंदू और सिख शरणार्थियों की लंबे समय से चली आ रही मांग को मानते हुए उन्हें यहां की नागरिकता पाने के नियम में कई राहत देने की घोषणा की है। यह सुविधा पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान के भी लोगों को समान रूप से मिलेगी। होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने गुरुवार को इस पर अपनी मंजूरी दी।

नए नियम के अनुसार 31 दिसंबर 2009 से पहले भारत में आए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक देश में नागरिकता के लिए ऑनलाइन की जगह हाथ से लिखे आवेदन भी दे सकते हैं। ये अब अपने आवेदन पासपोर्ट के साथ दे सकते हैं। हालांकि आवेदक का लंबी अवधि का वीजा, नागरिकता के लिए आवेदन पत्र जमा कराने के समय वैध होना चाहिए। 

इन दोनों देशों के अल्पसंख्यक, जिनमें अधिकतर हिंदू और सिख हैं, जो माता-पिता के पासपोर्ट के आधार पर भारत आ गए थे, वे भी भारतीय नागरिकता के लिए पासपोर्ट के बिना आवेदन कर सकते हैं।

पढ़िए वैदिक और सईद के बीच हुई बातचीत का पूरा इंटरव्यू

मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक की मुलाकात पर संसद से सड़क तक हंगामा मचा हुआ है। विवाद है कि खत्म होता नजर नहीं आ रहा। आतंकवादी संगठन ‘जमात उद दावा’ के मुखिया हाफिज सईद से वेद प्रताप ने लंबी बातचीत की। इस मामले को लेकर वेद प्रताप और हाफिज की तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो चुकी है।

दूसरी ओर वैदिक ने इस बात पर सवाल उठाया है कि एक पत्रकार का हाफिज से मिलना क्या गलत है? वैदिक ने कहा कि एक पत्रकार होने के नाते मैं दूसरों के पक्ष को सुनने और समझने की पूरी कोशिश करता हूं इस संदर्भ में हमारी मुलाकात हुई।

वैदिक और सईद के बीच हुई बातचीत का पूरा इंटरव्यू दैनिक भास्कर ने प्रकाशित किया है, जिसे हम अपने पाठकों के लिए ज्यों का त्यों पेश कर रहे हैं।  

वेदप्रताप वैदिक, वरिष्ठ पत्रकार

'अचानक हुई मुलाकात पर हमला अनावश्यक'

मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के साथ मुलाकात को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। मुलाकात का उद्देश्य क्या था? सईद का इंटरव्यू किस प्रकाशन के लिए किया गया? तीखे सवालों के जवाब भी सईद ने ऐसी 'विनम्रता' से क्यों दिए जबकि यह उसकी करतूतों से मेल नहीं खाता? सईद एक भारतीय पत्रकार की मुलाकात में जो तनाव नजर आना था, वह नदारद क्यों था?

यहां लेखक ने इन्हीं सवालों के जवाब देने का प्रयास किया है। साथ में पाठकों की सुविधा के लिए विवादित इंटरव्यू : 

वेदप्रताप वैदिक हाफिज सईद से मुलाकात अचानक तय हुई। 2 जुलाई की दोपहर मैं भारत लौटने वाला था। 1 जुलाई की शाम को कुछ पत्रकार मुझसे बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आप भारत-विरोधी आतंकवाद का मुद्दा इतनी जोर से उठा रहे हैं तो आप कभी हाफिज सईद से मिले? मैंने कहा, नहीं। उनमें से लगभग सबके पास हाफिज के नंबर थे। उनमें से किसी ने फोन मिलाया और मुलाकात तय हो गई। सुबह 7 बजे इसलिए तय हुई कि मुझे लाहौर हवाई अड्डे पर 10-11 बजे के बीच पहुंचना था। मैंने कह दिया था कि अगर मुलाकात देर से तय हुई तो मैं नहीं मिल सकूंगा।

इस मुलाकात के लिए मैंने तो अपने किसी राजनयिक से संपर्क किया और ही पाकिस्तान के किसी नेता या अधिकारी से। इसके पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री, विदेश सचिव और अनेक केंद्रीय तथा प्रांतीय नेताओं से मेरी भेंट हो चुकी थी। फौज और विदेश मंत्रालय के अनेक सेवानिवृत्त अधिकारियों से भी मैं मिल चुका था। मैं पाकिस्तान समेत पड़ोसी देशों में दर्जनों बार जा चुका हूं। पूरे 45 साल से मेरा यात्रा संपर्क बना हुआ है। कई पड़ोसी देशों के लोग, जो मेरे साथ भारत या विदेशों में पढ़ते थे, वे अपने-अपने देश के नेता बन गए हैं। इनमें संपादक प्रोफेसर भी हैं।

पड़ोसी देशों के टीवी चैनलों पर अक्सर मेरे कार्यक्रम होते रहते हैं, वहां के अखबार भी मेरे लेख छापते रहते हैं। पड़ोसी देशों के विश्वविद्यालयों और अकादमिक संस्थानों में आयोजित सेमिनारों में मुझे आमंत्रित किया जाता है। इस बार भी एक भारत-पाक संवाद में मुझे आमंत्रित किया गया था। पेशे से पत्रकार हूं, इसलिए मैं इन अवसरों का उपयोग पत्रकारिता के लिए करता ही हूं। यदि बहुत ही महत्वपूर्ण हो तो उस भेंट को मैं इंटरव्यू के तौर पर लिख देता हूं, वरना अपने लेखों में उनका इस्तेमाल कर लेता हूं।

जब मैंने हाफिज सईद से मिलने की हां भरी तो वह बिल्कुल अचानक थी। मेरी पहले से कोई कल्पना नहीं थी, लेकिन जब भेंट तय हो गई तो मैंने सोचा कि चाहे जो भी हो, मुझे उससे मुंबई-हमले के बारे में सीधे सवाल पूछने चाहिए। यह इंटरव्यू किसी खास अखबार के लिए पहले से प्रायोजित नहीं था। इससे पहले मैं अपने स्तंभ में दो-तीन लेख मेरी पाकिस्तान-यात्रा पर लिख चुका था। मैंने टि्वटर पर तो हाफिज सईद का फोटो और ही इंटरव्यू पहले दिया। इंडिया टीवी के एंकर रजत शर्मा ने कहा कि वे हाफिज पर एक घंटे का विशेष कार्यक्रम कर रहे हैं। इसमें आप क्यों नहीं बताते कि वह कैसा है, उसका दिमाग कैसे चलता है? रजत शर्मा और हेमंत शर्मा को मैंने दो-चार दिन पहले पाकिस्तान में सबसे मिलने की बात बताई थी।

यदि मुझे मोदी सरकार ने भेजा होता तो अपने पत्रकार-बंधुओं या अपनी पत्नी को भी मैं क्यों बताता? यदि यह भेंट कूटनीतिक या गोपनीय होती तो सदा गोपनीय ही रहती, चाहे फिर मुझे इसकी कितनी ही कीमत चुकानी पड़ती। रजतजी के मांगने पर मैंने उसी समय ई-मेल पर हाफिज के फोटो मंगाए और उन्हें शायद डेढ़-दो घंटे पहले 'फारवर्ड' करवाए। दूसरे दिन सिर्फ फोटो वेबसाइट पर डाले। इस भेंट को शब्दों में बयां करता उसके पहले ही देश में हमारे कुछ नेताओं और चैनलों ने हंगामा खड़ा कर दिया।

इंटरव्यू के दौरान सवाल-जवाब :

हाफिज सईद: मैं आपके लेख पढ़ता रहा हूं और आपके टीवी इंटरव्यू भी मैंने देखे हैं। अपने बारे में थोड़ा और बताइए।

वेदप्रताप वैदिक: मैं अखबार और एक न्यूज एजेंसी का संपादक रहा। विदेश नीति और अन्य विषयों पर लगभग दर्जन भर किताबें लिखी हैं। पिछले 50-55 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। आपके देश में पिछले 30-35 साल से बराबर रहा हूं। क्या आप मुझे अपने बारे में बताएंगे?

सईद: हां,क्यों नहीं। मेरा जन्म मार्च 1948 में हुआ। मेरे माता-पिता भारत से पाकिस्तान आए थे।

वैदिक: आप क्या बिहार के हैं, मुहाजिर ?

सईद: मेरी मां रोपड़ की थीं और पाकिस्तान आकर उन्होंने मुझे जन्म दिया। इस तरह मेरा भारत से भी संबंध है।

वैदिक:यदिभारत से संबंध है तो फिर यह बताइए कि आपने भारत पर ऐसे भयंकर हमले क्यों करवाए?

सईद: यह बेबुनियाद इल्जाम है। जब बंबई के ताज होटल की खबर मैंने टीवी पर देखी तो क्या देखा कि दो घंटे के अंदर ही अंदर मेरा नाम आने लगा। बार-बार आने लगा।

वैदिक: उसकी कुछ तो वजह होगी?

सईद: वजह बस एक ही थी। पिछली सरकार मेरे पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई थी। उसका गृहमंत्री रहमान मलिक मेरा दुश्मन था। उसने मुझे जबर्दस्ती गिरफ्तार कर लिया।

वैदिक: उनके पास कुछ ठोस सबूत जरूर रहे होंगे?

सईद: सबूत वगैरह कोई नहीं थे। उसे सिर्फ अमेरिका की गुलामी करनी थी। सरकार का दिवाला पिट रहा था। मुझे पकड़कर अमेरिका को खुश कर दिया और बड़ी मदद ले ली, लेकिन मैंने अदालत में सरकार को चारों खाने चित कर दिया।

वैदिक: ये आपकी अपनी अदालते हैं। यदि ये अंतरराष्ट्रीय अदालतें होतीं तो कुछ और बात होती। मैं आपसे पूछता हूं कि अल्लाहताला का कोई कानून आप मानते हैं या नहीं ?

सईद: क्यों नहीं मानता हूं? मैं तो जिहादी हूं।

वैदिक: क्या अल्लाहताला बेकसूरों की हत्या को जायज मान लेगा? उसकी अदालत में आप क्या जवाब देंगे?

सईद: मैं जिहादी हूं।

वैदिक: मैं तो 'जिहादे-अकबर' को मानता हूं। इस ऊंचे जिहाद का मतलब तो मैं यही समझता हूं कि इसमें हिंसा की कोई जगह नहीं है।

सईद: आप फिर मुझ पर इल्जाम लगा रहे हैं। मेरा दहशतगर्दी से कोई लेना-देना नहीं है। मैं हिंसा में विश्वास करता ही नहीं। मैं तो शुद्ध सेवा-कार्य करता हूं। मदरसे चलाता हूं, अनाथों की देखभाल करता हूं और देखिए अभी जो वजीरिस्तान से लाखों लोग भाग रहे हैं, उनकी सेवा सरकार से ज्यादा मेरे संगठन के लोग कर रहे हैं। आप चलें, खुद अपनी आंखों से देखें।

वैदिक: लेकिन आखिर संयुक्त राष्ट्र ने आपके संगठन को गैर-कानूनी क्यों घोषित किया है? अमेरिका ने आपके सिर पर करोड़ों का इनाम क्यों रखा है? भारत सरकार ने आपके खिलाफ ठोस सबूत देकर कई दस्तावेज़ तैयार किए हैं। उन सबका आपके पास क्या जवाब है?

सईद: (थोड़ा उत्तेजित होकर) जवाब क्या है? सारे जवाब मैं दे चुका हूं। क्या मेरे जवाबों से आप संतुष्ट नहीं हैं?

वैदिक: भारत के खिलाफ आप जबर्दस्त नफरत फैलाते हैं। मैंने खुद टीवी पर आपके भाषण सुने हैं।

सईद: और भारत जो हमारे कश्मीरी भाइयों की हत्या करता है, जो बलूचिस्तान और सिंध में दहशतगर्दी फैलाता है, वह कुछ नहीं? अफगानिस्तान को हमारे खिलाफ भड़काता है।

वैदिक: यह बिल्कुल गलत है। हम उस देश की दोस्ताना मदद करते हैं। हिन्दुस्तान की जनता आपके नाम से नफरत करती है। मुंबई के रक्तपात को भुलाना मुश्किल है।

सईद: मैं हिन्दुस्तानियों की गलतफहमी दूर करना चाहता हूं।

वैदिक: इसका तो एक ही तरीका है कि आप अपना जुर्म कबूल करें और उसकी उचित सजा मांगें। यह आपकी बहादुरी होगी। आप यह रास्ता नहीं अपना सकते हैं तो माफी मांगे।

सईद: (थोड़ी ऊंची आवाज में) मैंने जब कोई जुर्म ही नहीं किया तो इन सब बातों का सवाल हीं नहीं उठता।

सईद: यह बताइए कि यह नरिंदर मोदी कैसा आदमी है? इसका आना समूचे दक्षिण एशिया के लिए खतरनाक नहीं है?

वैदिक: इसमें शक नहीं कि नरेंद्र मोदी बहुत सख्त आदमी हैं, लेकिन मोदी साहब ने अपने चुनाव-अभियान में किसी मुल्क के खिलाफ कुछ नहीं बोला। इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ कुछ नहीं बोला। देखिए, आते ही उन्होंने अपनी शपथ-विधि में पड़ोसी देशों और खासकर पाकिस्तान क प्रधानमंत्री को बुलाया।

सईद: क्या बुलाया? बुलाकर बेइज्जत कर दिया। आपकी विदेश सचिव ने कहा कि मोदी ने मियां नवाज को डांट लगाई?

वैदिक: मैंने मियां नवाज, आपके विदेश मंत्री और विदेश सचिव से भी यह पूछा तो उन्होंने ऐसी किसी बात से साफ इनकार किया। यह तो सिर्फ मीडिया की करतूत है।

वैदिक: हम मानते हैं कि भारत-पाक संबंधों की राह में आप सबसे बड़े रोड़े हैं। जरा संबंध सुधरते हैं कि कोई कोई आतंकवाद की घटना घट जाती है।

सईद: मैं बिल्कुल भी रोड़ा नहीं हूं। आपकी यही गलतफहमी दूर करने के लिए मैं एक बार भारत आना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि दोनों मुल्कों के ताल्लुकात अच्छे बनें। हम दोनों मुल्कों की तहजीब एक जैसी है। मैं भारत के किसी बड़े जलसे में भाषण (तकरीर) देना चाहता हूं।

वैदिक: मुझसे पाकिस्तान में लोगों ने कहा कि मोदी साहब पाकिस्तान क्यों नहीं आते। अगर आएं तो क्या आप पत्थरबाजी करवाएंगे? प्रदर्शन करेंगे? विरोध करेंगे?

सईद: (थोड़ा रुककर) नहीं, नहीं, हम उनका स्वागत (इस्तकबाल) करेंगे।


प्रधानमंत्री मोदी ने शरीफ के सामने सख्ती के साथ आतंकवाद का मुद्दा उठाया

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच आज हैदराबाद हाउस में द्वीपक्षीय वार्ता हुई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से अपनी पहली मुलाकात में नरेंद्र मोदी ने सख्ती के साथ आतंकवाद का मुद्दा उठाया। इसके अलावा मोदी ने नवाज शरीफ के सामने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम, लश्कर आतंकी हाफिज सईद का मुद्दा उठाया।

साथ ही भारत की तरफ से हेरात में भारतीय दूतावास पर हुए हमले का मुद्दा रखा। बताया जा रहा है कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने इस हमले के पीछे लश्कर ए तैयब्बा की ओर इशारा किया था। इसी को लेकर भारत ने अपनी चिंता जताई। पाकिस्तान की तरफ से नवाज शरीफ ने भी समझौता ब्लास्ट का मुद्दा उठाया। हैदराबाद हाउस में ये मुलाकात करीब 40 मिनट तक चली। बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और एनएसए अजीत डोभाल भी मौजूद थे।

करीब 40 मिनट तक चली मोदी-शरीफ की यह मुलाकात कई मायनों से अहम मानी जा रही है। कई सालों से दोनों देशों के बीच आपसी संबंध बिगड़ते रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मोदी के न्योते पर भारत आए नवाज शरीफ भी शिष्टाचार के नाते मोदी को पाकिस्तान आने का बुलावा दे सकते हैं।

पाक पीएम और मोदी की मुलाकात पर पाकिस्तान में भी काफी चर्चा है। पाक मीडिया दोनों की मुलाकात को अच्छा संकेत मान रही है। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों देशों के विदेश सचिव या कई दूसरे मंत्रियों के बीच भी मेल-मुलाकात हो सकती है।

मोदी से मिलने से पहले नवाज शरीफ जामा मस्जिद पहुंचे थे। इसके अलावा नवाज शरीफ आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मुलाकात करेंगे। आज सुबह सबसे पहले सुबह साढे नौ बजे नरेंद्र मोदी ने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की। प्रधानमंत्री के तौर पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष से उनकी पहली मुलाकात थी।

आधे घंटे से ज्यादा चली इस मुलाकात में दोनों देशों के आपसी रिश्तों को और मजबूती देने को लेकर बात हुई, वहीं पिछले हफ्ते हेरात में भारतीय दूतावास में हुए हमले पर भी चर्चा की गई। इसके अलावा नाटो सैनिकों के अफगानिस्तान छोड़ने के बाद हालात पर भी चर्चा हुई। इस दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, और विदेश सचिव सुजाता सिंह भी मौजूद थीं।

पकिस्तान में हिन्दू मंदिर के गार्ड की गोली मार कर हत्या

उत्तर पश्चिम पाकिस्तानी शहर पेशावर में दो बंदूकधारियों ने रविवार को हिंदू मंदिर के गार्ड को गोली मार दी। अधिकारियों ने बताया कि गार्ड की मौत हो गई और हमलावर बाद में भाग गए। यह घटना झंडा बाजार में हुई। पाकिस्तान में हिंदुओं पर भी हमले होते रहते हैं। 

पुलिस के अनुसार यह आतंकवादी हमला भी हो सकता है। इस शहर में हिन्दुओं की संख्या कुछ हजार है। यह शहर अलकायदा और तालिबान उग्रवादियों के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी है।

गत वर्ष नवम्बर में पेशावर में एक चर्च के बाहर डयूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को गोली मार दी गई थी। सितम्बर में शहर में एक चर्च पर हुए दो आत्मघाती हमलों में 82 लोग मारे गए थे। 

कराची में 80 साल पुराना मंदिर गिराया, हिन्दूओ ने किया प्रदर्शन

पाकिस्तान की फाइनेंस राजधानी कराची में 80 साल पुराना मंदिर गिराए जाने के विरोध में हिंदू समुदाय के लोगों ने प्रदर्शन किया। सोल्जर बाजार इलाके में स्थित राम पीर मंदिर को एक बिल्डर के साथ जमीनी विवाद की पृष्ठिभूमि में गिराया गया। इसको लेकर हिंदुओं ने प्रेस क्लब के सामने प्रदर्शन किया। पाकिस्तान हिंदू परिषद के संरक्षक रमेश कुमार वांकवानी ने कहा, अब भी कई धार्मिक चीजें और तस्वीरें मलबे में दबी हुई हैं। मंदिर परिसर में रहने वाले परिवार बेघर हो गए हैं। सनद रहे कि कुछ समय पहले ही पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि देश में नाबालिग हिन्दू लड़कियों का जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है जिससे अल्पसंख्यक समुदाय बहुत चिंतित है।

मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से मामलों में हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर उनके साथ रेप किया जाता है और बाद में उन्हें धर्म परिवर्तन पर मजबूर किया जाता है। सिंध प्रान्त विशेष कर देश की व्यापारिक राजधानी कराची में जबर्दस्ती परिवर्तन की घटनाएं हो रही हैं। पाकिस्तान की सीनेट की अल्पसंख्यक मामलों की स्थाई समिति ने ऐसी घटनाएं रोकने के लिए ठोस उपाए करने का आग्रह किया था।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन की घटनाएं केवल सिंध तक सीमित नहीं है बल्कि देश के अन्य भागों में भी ऐसा हो रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों का अपहरण होता है, उनके साथ रेप किया जाता है और बाद में यह दलील दी जाती है कि लडकी ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया है। उसकी मुस्लिम व्यक्ति से शादी हो गई है और वह अपने पुराने धर्म में लौटना नहीं चाहती।

आयोग ने कहा कि अदालतें भी अल्पसंख्यक लड़की या उसके परिवार वालों के साथ इंसाफ नहीं करतीं। 12 या 13 साल की लड़की को भी अभिभावकों के संरक्षण में नहीं छोडा जाता। आयोग ने एक घटना का उल्लेख किया जिसमें 12 साल की एक लड़की ने यह बयान दिया कि उसने स्वेच्छा से इस्लाम कबूल कर लिया है। अदालत ने परिवार वालों के वकील की इस दलील की अनसुनी कर दी कि लड़की नाबालिग है। आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों पर अदालतें निष्पक्ष रूप से विचार नहीं कर पातीं क्योंकि मजहबी नारेबाजी करने वाले कट्टरपंथी लोगों से भय रहता है।

पाकिस्तानी हिन्दुओं ने मानवाधिकार दिवस पर अपने अधिकारों की मांग की

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के मौके पर पाकिस्तान से आए सैकड़ों हिंदू रिफ्यूजीयों ने अपने अधिकारों की मांग को लेकर दिल्ली स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। हिंदू सेना की अगुवाई में रिफ्यूजी ने बंटवारे के बाद पाकिस्तान में हिंदूओं की दशा को सुधारने की मांग की।

धरने को संबोधित करते हुए हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान में 23 फीसद हिंदू थे। आज वहां मात्र 2 फीसद रह गए हैं। ये सभी अल्पसंख्यक हिंदू खौफ के साए में जी रहे हैं। करीब तीन हजार हिंदू रिफ्यूजी भारत में अधिकार व सुविधाओं के अभाव में रह रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान के बाद अब भारत में भी उनके मानव अधिकारों का हनन हो रहा है।

अधिकारों की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने लोधी रोड स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय पर प्रदर्शन किया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं व बच्चे भी शामिल थे।

बंटवारे के लिए सिर्फ नेहरू थे जिम्मेदार : मौलाना आजाद


मिस्टर जिन्ना सन् 1946 के आरंभ में अखंड भारत के लिए तैयार हो गये थे, पर उसी साल के मध्य में जवाहर लाल नेहरू ने एक ऐसा बयान दे दिया कि जिन्ना ने डायरेक्ट एक्शन का नारा देकर पाकिस्तान बनवा लिया। यह बात आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री अबुल कलाम आजाद ने लिखी है। अपनी आत्मकथा ‘आजादी की कहानी’ में आजाद ने लिखा कि ब्रिटिश सरकार के कैबिनेट मिशन, कांग्रेस महासमिति और मुस्लिम लीग परिषद के बीच इस बात पर आपसी सहमति बन चुकी थी कि अखंड आजाद भारत की केंद्रीय सरकार के अधीन तीन विषय होंगे-रक्षा, विदेश और संचार। राज्यों को तीन श्रेणियों में बांट दिया जाएगा। उन्हें स्वायतता रहेगी। ‘बी’ श्रेणी के राज्यों में पंजाब, सिंध, उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत व ब्रिटिश बलोचिस्तान शामिल किए जाएंगे। ‘सी’ श्रेणी के राज्यों में बंगाल और असम शामिल थे। बाकी राज्य ‘ए’ श्रेणी में रखे गये थे। कैबिनेट मिशन का ख्याल था कि इस भावी व्यवस्था से मुसलमान अल्पसंख्यक वर्ग को पूरी तरह से इतमिनान हो जाएगा।

याद रहे कि आजादी के लिए हिंदुस्तान के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श की खातिर ब्रिटिश सरकार ने कैबिनेट मिशन भारत भेजा था। मौलाना आजाद ने लिखा कि ‘मिशन ने मेरी यह बात भी मान ली थी कि अधिकतर विषय प्रांतीय धरातल पर संभाले जाएंगे। इसलिए बहुमत वाले राज्यों में मुसलमानों को प्रायः पूरी स्वायत्तता प्राप्त होगी। बी और सी श्रेणियों के राज्यों में मुसलमानों का बहुमत था। इस तरह वे अपनी सारी औचित्यपूर्ण आशाओं को सफल बना सकते थे।’

‘शुरू- शुरू में मि. जिन्ना ने इस योजना का घोर विरोध किया। मुस्लिम लीग स्वतंत्र देश की अपनी मांग को लेकर इतना आगे बढ़ चुकी थी कि उसके लिए कदम वापस लौटाना मुश्किल था। पर कैबिनेट मिशन ने बहुत ही साफ -साफ और असंदिग्ध शब्दों में कह दिया कि वह देश के बंटवारे का सुझाव कभी नहीं दे सकता। मिशन के सदस्य लाॅर्ड पेथिक लारेंस और सर स्टैफर्ड क्रिप्स ने बार- बार कहा कि हमारी समझ में नहीं आता कि मुस्लिम लीग जिस पाकिस्तान सरीखे राज्य की कल्पना कर रही है, वह कैसे जियेगा, कैसे बढ़ेगा और कैसे स्थायी होगा? उनका ख्याल था कि मैंने जो सूत्र दिया है, वही समस्या का हल है। मंत्रिमंडलीय मिशन का ख्याल था कि इसमें कोई हर्ज नहीं है ।’

मौलाना आजाद ने लिखा कि ‘मुस्लिम लीग परिषद की तीन दिन तक बैठक हुई। तब कहीं जाकर वह किसी फैसले पर पहुंच सकी। आखिरी दिन जिन्ना को यह तसलीम करना पड़ा कि मिशन की योजना में जो हल प्रस्तुत किया गया है, अल्पसंख्यकों की समस्या का उससे अधिक न्यायपूर्ण हल और कोई नहीं हो सकता। और उन्हें इससे अच्छी शर्तें मिल ही नहीं सकतीं। उन्होंने परिषद को बताया कि मंत्रिमंडल मिशन ने जो योजना प्रस्तुत की है, उससे और कुछ भी ज्यादा मैं नहीं कर सकता। इसलिए उन्होंने मुस्लिम लीग को योजना मान लेने की सलाह दी और लीग परिषद ने सर्वसम्मति से उसके पक्ष में वोट दिया।’

इस संबंध में कांग्रेस के फैसले के बारे में मौलाना आजाद ने लिखा कि ‘कांग्रेस कार्य समिति में जो विचार विमर्श हुआ, उसमें मैंने कहा कि कैबिनेट मिशन की योजना मूलतः वही है जो कांग्रेस पहले स्वीकार कर चुकी है। ऐसी हालत में योजना में जो प्रमुख राजनीतिक हल प्रस्तुत किया गया था, उसे मान लेने में कार्यसमिति को कोई मुश्किल नहीं हुई। 26 जून, 1946 के अपने प्रस्ताव में कांग्रेस कार्य समिति ने भविष्य के संबंध में कैबिनेट मिशन की योजना स्वीकार कर ली-यद्यपि उसने अंतरिम सरकार का सुझाव मानने में अपनी असमर्थता प्रकट की। कैबिनेट मिशन योजना का कांग्रेस व मुस्लिम लीग दोनों के द्वारा स्वीकार कर लिया जाना हिंदुस्तान के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास की एक गौरवमय घटना थी। यह भी लगा मानो हम आखिरकार सांप्रदायिक कठिनाइयों को भी पीछे छोड़ आए हैं। मि. जिन्ना बहुत खुश न थे, लेकिन और कोई रास्ता न था, इसलिए योजना मानने के लिए उन्होंने खुद को तैयार कर लिया था।’

पर इस पूरी योजना को पलीता लगाने वाली घटना की चर्चा करते हुए मौलाना अबुल कलाम आजाद ने लिखा कि ‘तभी एक ऐसी दुःखद घटना घटी जिसने इतिहास का क्रम ही बदल दिया। दस जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू ने बम्बई में एक संवाददाता सम्मेलन बुलाया। वहां उन्होंने एक बयान दिया जिस पर शायद सामान्य परिस्थितियों में कोई ध्यान भी न देता। पर उस बयान ने शंका और घृणा के तत्कालीन वातावरण में बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण परिणामों के एक क्रम को जन्म दिया।’

‘कुछ पत्र प्रतिनिधियों ने उनसे सवाल किया, ‘क्या कांग्रेस कार्य समिति के प्रस्ताव पास कर देने का मतलब यह है कि कांग्रेस ने योजना को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया है जिसमें अंतरिम सरकार के गठन का सवाल भी निहित है ?’

जवाब में जवाहर लाल ने कहा कि कांग्रेस करारों की बेड़ियों से बिलकुल मुक्त रह कर और जब जैसी स्थिति पैदा होगी, उसका मुकाबला करने के लिए स्वतंत्र रहते हुए, संविधान सभा में जाएगी।’ पत्र प्रतिनिधियों ने फिर पूछा कि क्या इसका मतलब यह है कि कैबिनेट मिशन योजना में संशोधन किए जा सकते हैं?

जवाहर लाल बड़ा जोर देकर जवाब दिया कि कांग्रेस ने सिर्फ संविधान सभा में भाग लेना स्वीकार किया है और वह मिशन योजना में जैसा उचित समझे, वैसा संशोधन-परिवर्तन करने के लिए अपने आपको स्वतंत्र समझती है।मौलाना आजाद ने लिखा कि ‘मैं यह कह दूं कि जवाहर लाल का बयान गलत था।

यह कहना सही न था कि कांग्रेस योजना में जो चाहे संशोधन करने के लिए स्वतंत्र है। असल में यह तो हम मान चुके थे कि केंद्रीय सरकार संघीय होगी ।’ (आजादी की कहानी:मौलाना अबुल कलाम आजाद की आत्म कथा-पृष्ठ-173)

आजाद के शब्दों में ‘जवाहर लाल नेहरू के इस बयान से मि. जिन्ना भौंचक रह गये। उन्होंने तुरंत एक बयान जारी किया कि कांग्रेस अध्यक्ष के इस वक्तव्य से सारी स्थिति पर फिर से विचार करना जरूरी हो गया है। जिन्ना ने लियाकत अली खान से लीग परिषद की बैठक बुलाने के लिए कहा और अपने बयान में कहा कि मुस्लिम लीग परिषद ने दिल्ली में कैबिनेट मिशन की योजना इसलिए स्वीकार कर ली थी कि यह आश्वासन दिया गया था कि कांग्रेस ने भी उसे स्वीकार कर लिया है और यह योजना हिंदुस्तान के भावी संविधान का आधार होगी। अब चूंकि कांग्रेस अध्यक्ष ने यह एलान किया है कि कांग्रेस संविधान सभा में अपने बहुमत से योजना को बदल सकती है, इसलिए इसका मतलब यह हुआ कि अल्पसंख्यक वर्ग बहुसंख्यक की दया पर जियेगा।

उसके बाद मुस्लिम लीग की बैठक 27 जुलाई को बम्बई में हुई। अपने उद्घाटन भाषण में मिस्टर जिन्ना ने फिर से पाकिस्तान की मांग की और कहा कि मुस्लिम लीग के सामने यही एक रास्ता रह गया है। तीन दिनों की बहस के बाद लीग परिषद ने मिशन योजना को अस्वीकार करते हुए एक प्रस्ताव पास कर दिया। उसने पाकिस्तान की मांग पूरी कराने के लिए ‘सीधी कार्रवाई’ करने का भी फैसला किया।’

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