रेल क्लाउड परियोजना की शुरुआत हुई, पढ़िए क्या होंगे लाभ



रेल क्लाउड परियोजना:

निवारण-शिकायत पोर्टल (रेल क्लाउड के बारे में पहला आईटी एप्लीकेशन)
रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए आपात स्थिति में कैशलैस इलाज योजना (सीटीएसई), पहला सीटीएसई कार्ड सौंपा


विभिन्न रेलवे पहलों की शुरूआत के मौके पर रेल राज्य मंत्री श्री राजेन गोहेन, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री ए.के. मित्तल, रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। रेल मंत्रालय ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सहयोग से रेल क्लाउड परियोजना शुरू की है।

इस अवसर पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने कहा कि समूची रेल प्रणाली को समन्वित डिजिटल मंच पर लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। रेलवे के डिजिटलीकरण की दिशा में रेल क्लाउड एक अन्य कदम है। रेल क्लाउड लोकप्रिय क्लाउड कम्प्यूटिंग प्रणाली पर कार्य करता है। अधिकतर महत्वपूर्ण कार्य क्लाउड कम्प्यूटिंग के जरिए किए जाते हैं। इससे लागत कम होगी और सर्वर पर सुरक्षित आंकड़े सुनिश्चित हो सकेंगे। इसके साथ ही एक अन्य महत्वपूर्ण कदम आपात स्थिति में कैशलेस इलाज योजना है। लोगों का अनुमानित जीवन काल बढ़ने के कारण स्वास्थ्य संबंधित अनेक समस्याएं पैदा होती है इस योजना से रेलवे कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

शुरू की गई पहल की विशेषताएं-

रेल क्लाउड:

भारतीय रेलवे ने रणनीतिक आईटी पहल की है, जिसका उद्देश्य ग्राहक की संतुष्टि में सुधार करना, राजस्व बढ़ाना और प्रभावी, कुशल और सुरक्षित संचालन करना है। रेलवे के लिए एकल डिजिटल मंच के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुछ मौलिक परियोजनाओं को लागू करना जरूरी था और रेल क्लाउड की स्थापना इस तरह की परियोजना है। क्लाउड कम्प्यूटिंग तेजी से और मांग पर सर्वर संसाधनों को स्थापित करने के लिए उभरती हुई प्रौद्योगिकी है जिसके परिणामस्वरूप लागत कम होती है। तदनुसार रेल क्लाउड चरण-1 को 53.55 करोड़ रुपये की लागत पर मंजूरी दी गई। रेल क्लाउड लागू होने के बाद रेलवे को होने वाले संभावित लाभ इस प्रकार हैः-

एप्लीकेशन का तेजी से और मांग पर फैलाव- रेल क्लाउड एप्लीकेशन के तेजी से फैलाव (परम्परागत समय, सप्ताहों और महीनों की तुलना में 24 घंटे के भीतर) का मार्ग प्रशस्त करेगा, साथ ही क्लाउड हार्डवेयर और परिवेश नए एप्लीकेशन के परीक्षण के लिए उपलब्ध होगा।

सर्वर और स्टोरेज का अधिकतम इस्तेमाल- इस प्रौद्योगिकी से उपलब्ध सर्वर और स्टोरेज का अधिकतम इस्तेमाल हो सकेगा, जिसके परिणामस्वरूप उसी सर्वर की जगह पर अधिक आंकड़े और अधिक एप्लीकेशन समा सकेंगे।

क्लाउड के हिस्से के रूप में वर्तमान बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल- रेलवे के पास उपलब्ध वर्तमान संसाधनों को रेल क्लाउड में मिला दिया जाएगा, ताकि नए संसाधन प्राप्त करने में होने वाले खर्च को कम किया जा सके।

त्वरित मापनीयता और लचीलापन- सर्वर और स्टोरेज की जगह मांग के अनुसार ऊपर-नीचे होगी, इससे सिस्टम अधिक मांग वाले घंटों में कम खर्च के साथ मांग को पूरा कर सकेगा।

आईटी सुरक्षा बढ़ाना और मानकीकरण- यह क्लाउड सरकार के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार सुरक्षा विशेषताओं से लैस होगा। सुरक्षा विशेषताओं को क्लाउड में मौजूद सभी एप्लीकेशनों के लिए अद्यतन किया जा सकता है इसके परिणामस्वरूप अधिक सुरक्षा और स्थिरता कम खर्च में मिल सकेगी।

लागत में कमी- सर्वर और स्टोरेज बुनियादी ढांचा जरूरत के अनुसार लगाया जाएगा, जिससे रेलवे की बचत होगी और जरूरत पड़ने पर मंहगे सर्वर की खरीद पर धनराशि खर्च करने की बजाए इसका इस्‍तेमाल किया जा सकेगा।

बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव- क्लाउड में सर्वर के संसाधन उपयोगकर्ताओं की संख्या के अनुसार ऊपर-नीचे होते है इससे ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

निकट भविष्य में प्रबंधित नेटवर्क और वर्चुअल डेस्कटॉप इंटरफेस (वीडीआई) सेवाओं की योजना बनाई गई है ताकि प्रत्येक रेल कर्मचारी को तेजी से और अधिक प्रभावी कार्य का माहौल दिया जा सके।

निवारण- शिकायत पोर्टल रेल क्लाउड पर पहला आईटी एप्लीकेशन:

निवारण- शिकायत पोर्टल रेल क्लाउड पर पहला आईटी एप्लीकेशन है। यह वर्तमान और पूर्व रेलवे कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के लिए मंच है। वर्तमान एप्लीकेशन को परम्परागत सर्वर में डाला गया है। इससे राजस्व की बचत होगी और साथ ही उपयोगकर्ता को बेहतर अनुभव मिलेगा।

आपात स्थिति में कैशलैस इलाज योजना (सीटीएसई):

रेलवे स्वास्थ्य संस्थानों, रेफरल और मान्यता प्राप्त अस्पतालों के जरिए अपने कर्मचारियों को विस्तृत स्वास्थ्य सेवा सुविधा प्रदान करती है। लाभ लेने वालों में उसके सेवानिवृत्त कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य होते है। बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त लाभार्थी विभिन्न शहरों के नव-विकसित उप-नगरों में रहते है। शहर के यह हिस्से अक्सर रेलवे स्वास्थ्य संस्थानों से दूर होते है आपात स्थिति में ऐसे लाभार्थियों के स्वर्णिम घंटे यात्रा में बर्बाद हो जाते है।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्वर्णिम घंटे में तत्काल चिकित्सा प्रदान करने के लिए रेलवे बोर्ड ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए सूची में सम्मिलित अस्पतालों में आपात स्थिति में कैशलैस इलाज की योजना शुरू की है। निजी अस्पतालों और रेलवे अधिकारियों के बीच एक वेब आधारित संचार प्रणाली विकसित की गई है जिसमें लाभार्थी की पहचान आधार सर्वर में दर्ज बायोमीट्रिक का इस्तेमाल करते हुए स्थापित की जाएगी, पात्रता रेलवे डेटाबेस का इस्तेमाल करते हुए पता लगाई जाएगी तथा आपात स्थिति की पुष्टि निजी अस्पताल की क्लिनिकल रिपोर्ट के आधार पर रेलवे चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जाएगी। पूरी प्रणाली ऑनलाइन है और बिल भी ऑनलाइन तैयार होगा। इस योजना से जरूरत के समय सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारियों को मदद मिलेगी।

इस योजना से लाल फीताशाही को खत्म करने के लिए आईटी उपकरणों का इस्तेमाल और कैशलैस लेन-देन को बढ़ावा देने के सरकार के स्वीकृत उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

वर्तमान में यह योजना चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में शुरू की गई है। इस शहरों के अनुभव के आधार पर इस योजना को पूरे देश में लागू किया जा सकता है।

अनुसूचित जातियों,अन्य पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति अब डिजिटल माध्यम से


अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के 3.54 करोड़ विद्यार्थियों को डिजिटल भुगतान के अंतर्गत 14 छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ 

अनुसूचित जातियों और अन्य पिछड़े वर्गों (अपिव)/विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध-घुमंतु जातियों के विद्यार्थियों के लिए 14 स्कालरशिप योजनाएं डिजिटल भुगतान के अंतर्गत संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ 3.54 करोड़ विद्यार्थियों को मिल रहा है। छात्रवृत्ति की समस्त राशि विद्यार्थियों के बैंक खातों में अंतरित की जा रही है और अजा विद्यार्थियों के 60 प्रतिशत बैंक खाते आधार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि छात्रवृत्तियों, विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों, प्रशिक्षण सुविधाओं, परिसरों,संस्थानों के निर्माण/उन्नयन के लिए पूंजी प्रदान करने आदि उपायों के जरिए अनुसूचित जातियों से सम्बद्ध विद्यार्थियों का शैक्षिक सशक्तिकरण किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत ने “प्रमुख सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों” के बारे में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दी। 

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अलग अलग तरह की सात छात्रवृत्तियां कार्यान्वित करता है, जिनमें मैट्रिक-परवर्ती और मैट्रिक-पूर्ववर्ती छात्रवृत्तियां, टॉप क्लास स्कालरशिप, राष्ट्रीय विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति, अनुसूचित जातियों के लिए यूजीसी द्वारा संचालित राष्ट्रीय फेलोशिप, अस्वच्छ व्यवसायों में लगे व्यक्तियों के बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक स्कालरशिप, अनुसूचित जातियों और अपिव के लिए निशुल्क कोचिंग (70 : 30 अनुपात में) और योग्यता उन्नयन छात्रवृत्तियां शामिल हैं। भारत सरकार का यह विश्वास है कि सब के लिए शिक्षा सशक्तिकरण की कुंजी है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय अपने बजट का करीब 54 प्रतिशत अनुसूचित जातियों के लिए छात्रवृत्तियों पर खर्च करता है। 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की प्रत्‍येक शाखा को वित्‍त मंत्रालय द्वारा एक उद्यमी के रूप में कम से कम एक अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के युवक की सहायता करने की जिम्‍मेदारी सौंपी गई है जिससे कि उनके बीच अधिक रोजगार का सृजन किया जा सके। 

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन पर फीस माफ़


डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्त् मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से जनता के हित को ध्यान में रखते हुए लेन-देन के लिए फीस चार्ज नहीं करने को कहा है 

नकदी के बजाय कार्ड और डिजिटल साधनों से भुगतान को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के उद्देश्य हेतु भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1000 रूपये तक के तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस), एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) और असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) से लेन-देन को तर्कसंगत बनाते हुए 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक चार्जेज में छूट दी है। भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 जनवरी 2017 से 31 मार्च 2017 तक डेबिट कार्ड से 2000 रूपये तक के लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को भी तर्कसंगत बनाया है।

इससे आगे बढ़ते हुए डिजिटल और कार्ड से भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), वित्त मंत्रालय ने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) को जनता के हित में तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) और एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) से भुगतान करने पर चार्ज नहीं लेने को कहा है, साथ ही नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (एनईएफटी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी सिर्फ सेवा कर ही लेने को कहा है। इसके साथ असंरचित पूरक सेवा डाटा (यूएसएसडी) के जरिए 1000 रूपये से ज्यादा के भुगतान पर भी पचास पैसे की छूट देने को कहा है।

यह 31.03.2017 तक के सभी लेनदेन के लिए लागू होगा।

आयकर अधिनियम की धारा 44 AD के तहत अब 6% ही लाभ मिलेगा


सरकार का बैंकिंग चैनल/डिजिटल साधनों से प्राप्‍त राशि और प्राप्तियों के संदर्भ में आयकर अधिनियम की धारा 44एडी के तहत मानित मुनाफे को कम करने का फैसला 

आयकर अधिनिमय,1961(अधिनियम) की धारा 44एडी के तहत कुछ करदाताओं (उदाहरण के लिए व्‍यक्तिगत ,एचयूएफ या एलएलपी को छोड़कर किसी साझेदारी फर्म) जिनका करोबार दो करोड़ रुपये या इसे कम है के लिए कुल कारोबार पर मानित मुनाफे का प्रावधान 8 प्रतिशत है।

सरकार के कम नकदी व्‍यवस्‍था की ओर बढ़ने के मिशन को प्राप्‍त करने के लिए छोटे व्‍यापारियों को प्रोत्‍साहित करने /लगातार डिजिटल साधनों से भुगतान स्‍वीकार करने के लिए अधिनियम की धारा 44एडी के तहत लगने वाली मौजूदा मानित लाभ की दर 8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। यह दर वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के दौरान बैंकिंग चैनल/डिजिटल साधनों के माध्‍यम से प्राप्‍त कुल कारोबार या सकल प्राप्तियों के संदर्भ में ही लागू होगी।

हालांकि नकद प्राप्तियों के मामले में कुल कारोबार या सकल प्राप्तियों के संदर्भ में अधिनियम की धारा 44 एडी के तहत मानित मुनाफे की मौजूदा दर 8 प्रतिशत ही जारी रहेगी।

इस संदर्भ में विधायी संशोधन 2017 के वित्‍त विधेयक में लाया जाएगा।

डिजिटल भुगतान की जागरूकता के लिए लगेगा #DigiDhanMela


डिजिटल भुगतान विकल्प के लोभों के बारे में जन जागरुकता जगाने के लिए इलेक्ट्रानिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में दो दिन(17-18 दिसंबर,2016) का डिजिधन मेला #DigiDhanMela आयोजित कर रहा है। इस मेले का लक्ष्य डिजिटल लेनदेन के लिए यूजर को डाउनलोडिंग, इंस्टॉलिंग और विभिन् डिजिटल भुगतान प्रणालियों की जानकारी देना है। इससे नागरिकों और व्यापारियों को डिजिधन बाजार के माध्यम से रियल टाइम डिजिटल लेनेदेन में सहयोग मिलेगा। 

डिजिधन मेले में बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, मोबाइल वॉलेट आपरेटरों, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क कंपनियों , आधार सक्षम भुगतान प्रणाली(एईपीएस) वेंडरों ,डाक विभाग(विपणन एसोसियेशनों के माध्यम से)केंद्रीय भंडार जैसे कोआपरेटिव तथा सफल जैसे संगठित फल, सब्जी चेनों, मिल्क बूथों तथा कृषि उत्पाद बाजार समितियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। 

मेले में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों को डिजिटल भुगतान के लिए विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी जाएगी। वे विजिटरों को विभिन्न ऐप्प की डाउनलोडिंग , इंस्टॉलिंग तथा डिजिटल लेनदेन करने में सहायता देंगे । दो दिन के मेले में लोगों को बैंक खाता खोलने, आधार नामांकन कराने तथा वर्तमान खातों को एईपीएस खाता सक्षम बनाने में सहायता दी जाएगी। 

आधार नामांकन के इच्छुक नागरिकों से अपने साथ निम्नलिखित कागजात लाने का अनुरोध किया जाता हैः

नाम और फोटो के साथ पहचान पत्र

आवासीय पते का प्रमाण

जन्म तिथि का प्रमाण(पैन कार्ड, पासपोर्ट तथा जन्म प्रमाण पत्र) 

नागरिकों को ऐप्प सक्षम होने के लिए अपने बैंक खाते का विवरण रखना होगा। 

व्यापारियों को उनके खातों को डिजिटल सक्षम बनाने के लिए निम्नलिखित कागजात रखने होंगेः

कंपनी का प्रमाण

पैन कार्ड(मालिक और कंपनी का) 

केवाईसी(ड्राइविंग लाइसेंस ,पासपोर्ट,आधार कार्ड,मतदाता पहचान पत्र)-कोई एक

बैंक खाते का विवरण तथा आईएफएससी कोड

डिजिधन मेले के बाद राज्य तथा बैंक शाखा स्तर पर शिविर आयोजित किए जाएंगे। इस मेले का लक्ष्य शहरी लोगों को आकर्षित करना है। मेले में वाई-फाई सुविधा उपलब्ध होगी ताकि लोग मोबाइल ऐप्प डाउनलोड और इंस्टॉल कर सकें।

डिजिटल पेमेन्ट प्रोत्साहन योजना से अब आप भी पा सकतें हैं पुरस्कार


पिछले ढाई वर्ष में भ्रष्टाचार एवं कालेधन के खिलाफ भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। एक हजार और पाँच सौ रूपये के नोट को बंद करने संबंधित निर्णय भी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 1000 और 500 के नोट के ढेर ने देश के अंर्थतंत्र में अनेक बुराइयों को आश्रय दिया। भविष्य में भी देश फिर से एक बार भ्रष्टाचार एवं काले धन का शिकार न हो, इसलिए भविष्यलक्षी स्थाई योजनाओं को लागू करना बहुत ही आवश्यक है।

आज तकनीक (technology) के  माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग , ई-वॉलेट, डेबिट कार्ड के ज़रिए डिजिटल बिज़नेस ट्रांसज़ेक्शन संभव है। ऐसे कई वैकल्पिक साधनों के ज़रिए डिजिटल से डिजी-धन (digi-dhan) की  दिशा में बढ़ने में मदद मिलेगी। अफ्रीका में केन्या  जैसे विकासशील देश न  ऐसा करके दिखाया है। भारत जैसा देश जिसकी 65% जनसंख्या 35 वर्ष की आयु से कम है, भारत जो पूरी दुनिया में आईटी कौशल के लिए जाना जाता है, भारत जिसके करोड़ों-करोड़ अनपढ़ और गरीब व्यक्ति ईवीएम से वोट देते हैं, ऐसी क्षमता वाले देश के नागरिक निश्चित ही मौजूदा अर्थव्यवस्था को डिजिटल अर्थव्यवस्था में बदलने में सक्षम हैं। जो अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। 

इस सपने को पूरा करने के लिए, ई-पेमेंट (e-payment) को बढ़ावा देना, ई-वॉलेट (e-wallet) और मोबाइल बैंकिग के प्रचलन को बढ़ाना, डिजिटल (digital ) से समाज को डिजी-धन (digi-dhan) की ओर ले जाना अपरिहार्य हो गया है। 1000 और 500 रू. के नोटों के विमुद्रीकरण के पश्चात डिजिटल पेमेन्ट्स में काफी वृद्धि हुई है। यह आवश्यक है कि इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का प्रचलन समाज के हर वर्ग में फैले। अतः नीति आयोग स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) से अनुरोध किया जाए कि वह डिजीटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई योजना शीघ्र लागू करें। उल्लेखनीय है कि NPCI एक गैर-लाभकारी कम्पनी है जो भारत को कैशलेस समाज की ओर ले जाने के लिए प्रयासरत है।

प्रोत्साहन योजना के मुख्य बिन्दु:

वो उपभोक्ता (Consumers) और विक्रेता (Merchants) जो इलेक्टॉनिक पेमेंट (Electronic Payment) का उपयोग करते हैं, इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

इस योजना में दो तरह की प्रोत्साहन धनराशि की व्यवस्था है-
  • प्रत्येक सप्ताह भाग्यशाली विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए जाने की रूपरेखा बनाई जाएगी।
  • हर तीन माह में उपभोक्ताओं में से कुछ को एक बड़ा पुरस्कार दिया जाएगा।
  • योजना में यह ध्यान रखा जाएगा कि गरीबों,निम्न-मध्यम वर्ग तथा छोटे व्यापारियों को प्राथमिकता मिले
  • इस योजना में निम्न प्रकार के डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) अनुमन्य होगें- USSD, AEPS, UPI और RuPay Card
  • विक्रेताओं के लिए उनके द्वारा स्थापित POS मशीन पर किये गये  ट्रांज़ेक्शंस (Transactions) इस योजना हेतु मान्य होगीं।
  • योजना की रुपरेखा शीध्र ही देश के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी किन्तु यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे जितने लोग डिजिटल पेमेन्ट प्रणाली का उपयोग कर रहे है वे इस योजना के लाभ उठाने के हक़दार होंगे
  • वर्तमान में दो प्रकार के सुझाव चल रहे हैं कि प्रोत्साहन योजना 6 महीने चलाई जाए अथवा एक वर्ष तक चलाई जाए।
  • राज्य सरकारों, उनके उपक्रमों, जिलों, महानगर निगमों एवं पंचायतों में भी जहां कैशलेस ट्रांज़ेक्शंस (Cashless Transactions को प्रोत्साहित करने हेतू उल्लेखनीय कार्य किया गया हो, उन्हें भी पुरस्कृत किया जाएगा।

किसानों द्वारा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने किये ये उपाय


केन्‍द्र सरकार ने चालू रबी सीजन में किसानों के हितों के साथ-साथ अर्थव्‍यवस्‍था में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न निर्णय लिये 

500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों के चलन को निरस्‍त करने के बाद केन्‍द्र सरकार ने समाज के विभिन्‍न तबकों की जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए अनेक उपायों की घोषणा की है। एपीएमसी बाजार/मंडियों में किसानों और पंजीकृत व्‍यापारियों के लिए अपेक्षाकृत ज्‍यादा नकदी की निकासी सीमा, फसल बीमा प्रीमियम के भुगतान के लिए समय सीमा बढ़ाना, चुनिंदा सरकारी केन्‍द्रों इ‍त्‍यादि से 500 रुपये के पुराने बैंक नोटों से बीजों की खरीद की अनुमति जैसे विशेष उपायों की घोषणा पहले ही किसानों के हित में की जा चुकी है। बैंकों की ग्रामीण शाखाओं और 1.55 लाख डाकघरों में नकदी की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाये गये हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए अपेक्षाकृत ज्‍यादा नकदी सीमा के साथ बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट के नेटवर्क को सक्रिय कर दिया गया है।

इस मामले में आगे समीक्षा करने के बाद सरकार ने चालू रबी सीजन में किसानों के हितों के साथ-साथ अर्थव्‍यवस्‍था में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष निर्णय लिये हैं। ये निर्णय परिचालनगत उपायों के रूप में हैं, जिनका उल्‍लेख नीचे किया गया है :

  1. नाबार्ड ने रबी सीजन में कृषि संबंधी कार्यकलापों के लिए राज्‍य सहकारी बैंकों के जरिये जिला केन्‍द्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी) को 21,000 करोड़ रुपये की सीमा उपलब्‍ध कराई है। इससे डीसीसीबी को प्राथमिक कृषि सहकारी सोसायटी (पीएसीएस) के नेटवर्क के जरिये किसानों के लिए फसल ऋणों को मंजूरी देने एवं इनका वितरण करने में सहूलियत होगी। इससे 40 फीसदी से भी ज्‍यादा ऐसे छोटे एवं सीमांत किसान लाभान्वित होंगे, जो संस्‍थागत कर्ज/फसल ऋण लेते रहे हैं। यही नहीं, आवश्‍यकता के मुताबिक नाबार्ड द्वारा अतिरिक्‍त सीमाएं सुलभ कराई जाएंगी।
  2. आरबीआई और बैंकों को डीसीसीबी में आवश्‍यक नकदी उपलब्‍ध कराने की सलाह दी गई है। इससे चालू रबी सीजन के दौरान विशेषकर बुवाई एवं अन्‍य कृषि कार्यों के लिए किसानों को ऋणों का त्‍वरित एवं निर्बाध प्रवाह के साथ-साथ आवश्‍यक नकदी भी सुनिश्चित होगी।
  3. छोटे कर्जदारों (अर्थात् एक करोड़ रुपये तक के कर्ज लेने वाले लोग) को राहत देने के उद्देश्‍य से भारतीय रिजर्व बैंक बकाया रकम के पुनर्भुगतान के लिए 60 दिनों का अतिरिक्‍त समय देने का निर्णय पहले ही ले चुका है। यह फैसला आवास एवं कृषि ऋणों  सहित उन सभी पर्सनल एवं फसल ऋणों पर लागू होगा, जो बैंकों, एनबीएफसी, डीसीसीबी, पीएसी अथवा एनबीएफसी-एमएफआई से लिये गये हैं।
  4. कुल मिलाकर 30 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किये गये हैं, जिनमें जन धन खाता धारकों को जारी किये गये रुपे डेबिट कार्ड भी शामिल हैं। पिछले 12 दिनों में रुपे डेबिट कार्डों के इस्‍तेमाल में लगभग 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस डेबिट कार्ड के उपयोग को सुविधाजनक बनाने के लिए बैंकों ने 31 दिसम्‍बर, 2016 तक ट्रांजैक्‍शन शुल्‍क (एमडीआर) न लेने का निर्णय लिया है। भारतीय राष्‍ट्रीय भुगतान परिषद (एनपीसीआई) ने रुपे कार्डों के लिए स्विचिंग चार्ज को पहले ही माफ कर दिया है। इन सभी कदमों से विभिन्‍न प्रतिष्‍ठानों ने डेबिट कार्डों की स्‍वीकार्यता बढ़ेगी।
  5. डेबिट कार्डों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ कुछ निजी बैंकों ने भी 31 दिसम्‍बर, 2016 तक एमडीआर शुल्‍क को माफ करने का निर्णय लिया है। निजी क्षेत्र के अन्‍य बैंकों द्वारा भी इस आशय का निर्णय लिये जाने की आशा है। इस तरह स्विचिंग सेवाओं पर लगने वाले शुल्‍कों सहित ट्रांजैक्‍शन शुल्‍क को 31 दिसम्‍बर, 2016 तक माफ कर दिया गया है।
  6. ई-वॉलेट के जरिये भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्‍य से आरबीआई ने आम लोगों के लिए मासिक ट्रांजैक्‍शन सीमा को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये करने का निर्णय लिया है। आरबीआई ने कारोबारियों के लिए भी इस सीमा में इतनी ही बढ़ोतरी की है।
  7. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने आरक्षित ई-टिकट लेते समय द्वितीय श्रेणी पर 20 रुपये का सर्विस चार्ज और इससे ऊपर की श्रेणी के टिकटों पर 40 रुपये का सर्विस चार्ज 31 दिसम्‍बर, 2016 तक न लेने का निर्णय लिया है। इससे नकदी के जरिये रेलवे के काउंटरों पर टिकट खरीदने के बजाय ई-टिकटों को खरीदने के लिए यात्रीगण प्रोत्‍साहित होंगे।
  8. टिकटों की कुल खरीद में ऑनलाइन ई-टिकट खरीदने वाले यात्रियों की दैनिक औसत संख्‍या 58 प्रतिशत और नकदी के जरिये काउंटरों पर टिकट खरीदने वाले यात्रियों की दैनिक औसत संख्‍या 42 प्रतिशत है। अब ई-टिकट की खरीदारी बढ़ाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। उम्‍मीद की जा रही है कि इस कदम से लोग नकदी रहित लेन-देन करने के लिए प्रोत्‍साहित होंगे। 
  9. टीआरएआई ने बैंकिंग से संबंधित लेन-देन और भुगतान के लिए यूएसएसडी चार्ज को मौजूदा 1.50 रुपये प्रति सत्र से घटाकर 0.50 रुपये प्रति सत्र करने का निर्णय लिया है। इसने संबंधित चरणों की संख्‍या को भी मौजूदा पांच से बढ़ाकर आठ चरण कर दिया है। टेलीकॉम कंपनियां भी प्रति सत्र 50 पैसे के उपर्युक्‍त यूएसएसडी चार्ज को 31 दिसम्‍बर, 2016 तक माफ करने पर सहमत हो गई हैं। इसके परिणामस्‍वरूप यूएसएसडी चार्ज 31 दिसम्‍बर, 2016 तक शून्‍य रहेगा। इससे विशेषकर फीचर फोन वाले गरीब लोगों (इनकी संख्‍या फिलहाल देश में कुल फोनों का 65 फीसदी है) को डिजिटल वित्‍तीय लेन-देन की अत्‍यंत किफायती सुविधा सुलभ हो जाएगी। 
  10. वाहन चालकों को अपना काफी समय चेक पोस्‍ट और टोल प्‍लाजा पर गुजारना पड़ता है।  जहां एक ओर जीएसटी की बदौलत चेक पोस्‍ट पर यह समस्‍या दूर हो जाएगी, वहीं दूसरी ओर राष्‍ट्रीय राजमार्गों पर अवस्थित टोल प्‍लाजा पर भुगतान में सहूलियत के लिए कुछ विशेष उपाय अत्‍यंत आवश्‍यक हैं। इस तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय वाहन निर्माताओं को अपने सभी नये वाहनों में ईटीसी के अनुरूप 'आरएफआईडी' सुलभ कराने की सलाह दे रहा है।
  11. सभी सरकारी संगठनों, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और अन्‍य सरकारी प्राधिकरणों को सलाह दी गई है कि वे सभी हितधारकों और कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए केवल डिजिटल भुगतान वाली प्रणालियों जैसे कि इंटरनेट बैंकिंग, एकीकृत भुगतान इंटरफेस, कार्डों, 'आधार' के अनुरूप भुगतान प्रणाली इत्‍यादि का ही उपयोग करें। भुगतान करने के समय प्राधिकरणों के लिए यह आवश्‍यक होगा कि वे कार्डों, इंटरनेट बैंकिंग, एकीकृत भुगतान इंटरफेस, 'आधार' के अनुरूप भुगतान प्रणाली इत्‍यादि के जरिये भुगतान का विकल्‍प मुहैया करायें।

दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक ऑनलाइन पुस्तकालय का शुभारंभ

 

सुगम्य डिजिटल भारत की तरफ एक कदम आगे बढ़ते हुए ‘सुगम्य पुस्तकालय’ (दृष्टिबाधित लोगों के लिए एक ऑनलाइन पुस्तकालय) का शुभारंभ आज विधि एवं न्याय और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने किया। समाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्रालय के विकलांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा आयोजित एक समारोह में इस पुस्तकालय की शुरूआत की गई। इस समारोह की अध्यक्षता सामाजिक न्याय और आधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने की। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर और सामाजिक न्याय और आधिकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर और श्री रामदास अठावले मुख्य अतिथि थे। उद्घाटन समारोह से पहले सुगम्य डिजिटल भारत पर एक पैनल परिचर्चा का आयोजन भी हुआ।

इस अवसर पर श्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह सूचना और प्रौद्योगिकी का दौर है क्योंकि यह दोनों ही बड़ी शक्तियां है। डिजिटल इंडिया के माध्यम से हम संपन्न और वंचितों के बीच के अंतर को खत्म करने का प्रयास कर रहे है। हमनें देश में सामान्य सेवा केन्द्रों से दिव्यांगजनो को जोड़ा है साथ है राष्ट्रीय सूचना केन्द्र दिव्यांगजनों के अनुकूल 100 सरकारी वेबसाइट बनाने की प्रक्रिया में है, जिनमें से 16 को पहले ही दिव्यांगजनों के इस्तेमाल में आसान बना दिया गया है। उन्होंने गैर-सरकारी संगठनों और नागरिकों से सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव देने के लिए ‘My Gov’ वेबसाइट इस्तेमाल करने का भी आह्वन किया।

वहीं थावरचंद गहलोत ने कहा कि उनका मंत्रालय सुगम्य भारत अभियान के लिए प्रतिबद्ध है और कई शहरों में इमारतों को सुगम्य बनाया जाएगा। 6 लाख से भी ज्यादा दिव्यांगजनों को उपकरण दिए गए है। जबकि ऐसे लोगों को सम्मानित करने के लिए चार हजार शिविर भी लगाए गए हैं। दिव्यांगजनों और समाज के दबे-कुचले लोगों को ऊपर उठाने के लिए यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 18 नई ब्रेल प्रिंटिंग प्रेस स्थापित करने के लिए अनुमति दे दी गई है। त्रिवेंद्रम के दिव्यांग कॉलेज को दिव्यांग विश्वविद्यालय में परिवर्तित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वाराणसी में जब 1500 दिव्यांगजनों को उपकरण वितरित किए जाएगे तो यह एक विश्व रिकॉर्ड होगा।

अपने संबोधन में मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर ने कहा कि उनका मंत्रालय दिव्यांगजनों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि उनका पहला दीक्षांत संबोधन चित्रकूट में दिव्यांग विश्वविद्यालय में होगा।

इस अवसर पर श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा कि दिव्यांगजनों को लोगों की दया की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें प्यार, स्नेह और सहायता चाहिए। सुगम्य पुस्तकालय की शुरूआत के जरिए उन्हें महत्वपूर्ण जानकारी हो सकेगी। साथ ही इस पहल में प्रकाशकों का सहयोग भी उन्होंने मांगा।

श्री रामदास अठावले ने कहा कि समाज के दिव्यांगजनों और पिछड़ों के हितों और बेहतरी के लिए काम करना उनके मंत्रालय की पहली प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंन उम्मीद जताई कि यह पहल अपना लक्ष्य हासिल करेगी।

इस अवसर पर सक्षम ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्ट्री श्री दीपेन्द्र मनोचा ने ई-लाइब्रेरी सुगम्य पुस्तकालय पर एक संक्षिप्त प्रस्तावना पेश की।

"सुगम्‍य पुस्‍तकालय" एक ऑनलाइन मंच है, जहां पर प्रिंट विकलांग लोगों के लिए सुलभ सामग्री उपलब्ध करायी जाती है। इस पुस्‍तकालय में विविध विषयों और भाषाओं तथा कई सुलभ प्रारूपों में प्रकाशन उपलब्‍ध है। इसे डेज़ी फोरम ऑफ इंडिया संगठन के सदस्यों और टीसीएस एक्‍सेस के सहयोग से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के दिव्‍यांग सशक्तिकरण विभाग द्वारा तैयार किया गया है। यहां पर दृष्टिहीन और अन्य प्रिंट विकलांग लोगों के लिए सुलभ प्रारूपों में पुस्तकें उपलब्ध हैं। विविध भाषाओं में दो लाख से अधिक किताबें हैं। देश और दुनिया भर में सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय, बुकशेयर सहित पुस्तकालयों का एकीकरण किया जा रहा है।  

अंतिम उपयोगकर्ता यानि प्रिंट विकलांग व्यक्ति के मामले में: अब अगर प्रिंट विकलांग जन किताब पढ़ना चाहता है तो इसके लिए उसे किसी पढ़ कर सुनाने वाले व्यक्ति या स्कैन और संपादन करने के लिए स्वयंसेवकों की तलाश करने के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। सुगम्य पुस्तकालय पर शीघ्र खोज के बटन को क्लिक करते ही उसे अपनी पसंद की पुस्तके मिल जायेंगी। इसके लिए उसे डीएफआई संगठन में प्रिंट विकलांग सदस्य के रूप में पंजीकरण करवाना होगा। जिसके बाद वह अपनी सदस्यता के जरिये पुस्तक डाउनलोड कर सकता है या ऑफ लाइन खरीद सकता है। वह एक बटन क्लिक कर पुस्तकालय की सभी किताबों तक पहुंच सकता है। मोबाइल फोन, टेबलेट, कम्प्यूटर, डेजी प्लेयर जैसे अपनी पसंद के किसी भी उपकरण पर ब्रेल लिपि में भी पुस्तकें पढ़ी जा सकती है। ब्रेल प्रेस वाले संगठन के सदस्य के जरिये वे ब्रेल लिपि की प्रतिलिपि भी मंगवा सकते हैं।

स्कूल/कॉलेज/पुस्तकालय के मामले में : विश्वविद्यालय, स्कूल पुस्तकालय, सार्वजनिक पुस्तकालय या इस प्रकार के अन्य संस्थान डीएफआई के सदस्य बन सकते हैं अथवा अपने प्रिंट विकलांग सदस्यों या छात्रों को सुगम्य पुस्तकालय का पूरा संग्रह उपलब्ध कराने के लिए ऑन लाइन पुस्तकालय के सदस्य बन सकते हैं। शैक्षिक संस्थान भी इस पुस्तकालय में अपने छात्रों के लिए सुलभ प्रारूप में उपलब्ध कराने के लिए तैयार की गई पुस्तकों का योगदान दे सकते हैं ताकि अन्य संस्थानों के छात्रों को भी वही  पुस्तकें उपलब्ध हो सके और कई स्थानों पर ऐसी पुस्तकों को दोबारा तैयार करने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।

प्रकाशक/सरकारी प्रकाशक/पाठ्य पुस्तक प्रकाशक के मामले में : ये लोग विकासशील देश में सबसे अधिक पहुंच वाले ऑन लाइन पुस्तकालय का निर्माण कर इतिहास का एक हिस्सा बन सकते हैं। प्रिंट विकलांग लोगों को शामिल कर अपने पाठक आधार को बढ़ाने के लिए वे अपने प्रकाशनों को सुलभ प्रारूपों में  सुगम्य पुस्तकालय पर साझा कर सकते हैं। पुस्तकालय की पहले से ही रीडर्स डाइजेस्ट और इंडिया टूडे जैसे प्रकाशनों के साथ साझेदारी है और वह बड़ी संख्या में निजी और सरकारी प्रकाशन विभाग और प्रकाशनों के साथ नई साझेदारी करना चाहता है। पाठ्यपुस्तक प्रकाशन विभाग, राज्य पाठ्य पुस्तक बोर्ड (एससीईआरटी/ एनसीईआरटी) इस मंच के जरिये प्रिंट विकलांग छात्रों के लिए अपनी सामग्री उपलब्ध कराकर  शिक्षा के अधिकार अधिनियम (2009) के अंतर्गत अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर सकते हैं। सुगम्य पुस्तकालय से जो सामान्य प्रिंट नहीं पढ़ पाते हैं केवल उन्हें पुस्तकें देने से पुस्तकें संरक्षित रहेंगी।

गैर-सरकारी संगठन के मामले में : वे एक सदस्य के रूप में प्रिंट विकलांग लोगों के लिए पुस्तकालय सेवा शुरू कर सकते हैं और अपने सदस्यों को सुगम्य पुस्तकालय की पूरी सामग्री उपलब्ध करा सकते हैं।

कॉरपोरेट के मामले में : उनके कर्मचारी स्वयं अपनी इच्छा से सामग्री तैयार कर करोड़ो प्रिंट विकलांग लोगों की मदद कर सकते हैं। सूचना प्रोद्योगिकी उद्योग सभी भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री के लेखन और पाठन में खामियों को दूर करने के लिए प्रोद्योगिकी विकसित कर योगदान दे सकते हैं।

01 जनवरी, 2016 से शहरी क्षेत्रों में केबल टीवी सेवायें डिजिटल होंगी


केबल टीवी मनोरंजन और शिक्षा का सर्वाधिक लोकप्रिय माध्‍यम है। देश में 100 मिलियन से अधिक केबल टीवी उपभोक्‍ता हैं। केबल टीवी सेवाओं का डिजिटलीकरण चरणबद्ध तरीके से चार चरणों में किया जा रहा है। इसका ब्‍यौरा इस प्रकार है :


चरण
क्षेत्र
एनालॉग केबल टीवी प्रसारण का अंतिम दिन
चरण –1
चार महानगर- दिल्‍ली, मुम्‍बई, कोलकाता, और चेन्‍नई
31.10.2012
चरण –2
10 लाख से अधिक आबादी वाले शहर (38 शहर)
31.03.2013
चरण –3
चरण-1 और चरण-2 के लिए नियत शहरों/कस्‍बों/क्षेत्रों को छोड़कर अन्‍य सभी शहरी क्षेत्र (नगर निगम/नगर पालिकाओं)
31.12.2015
चरण –4
शेष भारत
31.12.2016

चरण-1 और चरण-2 के डिजिटलीकरण के दायरे में आने वाले चार महानगरों और 38 शहरों के
उपभोक्‍ताओं को डिजिटल केबल टीवी सेवाओं के लाभ मिल रहे हैं। जैसा कि ऊपर उल्‍लेख किया गया है,
तीसरे चरण के अंतर्गत शेष शहरी क्षेत्रों में डिजिटलीकरण की अंतिम तिथि 31 दिसम्‍बर, 2015 तय की
गई है। इसके बाद कानून के मुताबिक एनालॉग प्रसारण या टीवी चैनलों का पुनर्प्रसारण नहीं होगा।
तीसरे चरण के डिजिटलीकरण के अंतर्गत आने वाले शहरी क्षेत्रों की सूची सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
की वेबसाइट www.mib.nic.in पर उपलब्‍ध है।

एनालॉग केबल टीवी सेवाओं की अपेक्षाकृत डिजिटल केबल टीवी सेवाओं के विशेष लाभ हैं, क्‍योंकि इनके 
जरिये बेहतर प्रसारण और ध्‍वनि गुणवत्‍ता प्राप्‍त होती है। उपभोक्‍ता अपनी पसंद के चैनल चुन सकते हैं 
और अपने बजट के अनुरूप इन्‍हें प्राप्‍त कर सकते हैं। डिजिटल केबल टीवी सेवायें प्राप्‍त करने के लिए 
उपभोक्‍ता को अपने यहां सैट टॉप बॉक्‍स (एसटीबी) लगाना होता है। ये एसटीबी किराये पर या खरीदकर 
प्राप्‍त किये जा सकते है। उपभोक्‍ता सेवा प्रदाताओं द्वारा दी जाने वाली विभिन्‍न योजनाओं में से कोई 
योजना चुन सकते हैं।

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) डिजिटल केबल टीवी सेवाओं के बारे में उपभोक्‍ताओं और हितधारकों को जानकारी देने के लिए कई कदम उठा रहा है। इस संबंध में ट्राई ने प्रसारण और केबल टीवी 
क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों के साथ 01 दिसम्‍बर, 2015 को एक बैठक की थी, जिसमें तीसरे चरण में होने वाले डिजिटल केबल टीवी सेवाओं की समीक्षा की गई थी। बैठक में यह जानकारी दी गई कि तीसरे चरण के अधिसूचित क्षेत्र में एसटीबी लगाने की प्रगति संतोषजनक है और उपभोक्‍ताओं को डिजिटलीकरण के लाभ मिल रहे हैं। प्रसारकों, डीटीएच ऑपरेटरों और एमएसओ से आग्रह किया गया कि वे एसटीबी लगाने के लिए 
शेष शहरी क्षेत्रों के उपभोक्‍ताओं को जानकारी दें, ताकि अंतिम तिथि 31 दिसम्‍बर, 2015 के पहले एसटीबी 
लगा लिये जाएं।

टीबी चैनलों के प्रसारकों से कहा गया है कि वे 07 दिसम्‍बर, 2015 तक केबल ऑपरेटरों को अग्रिम सूचना दे दें कि 01 जनवरी, 2016 से उपभोक्‍ताओं को एनालॉग प्रणाली के तहत टीवी चैनलों का प्रसारण उपलब्‍ध नहीं होगा।

शहरी क्षेत्रों के जो उपभोक्‍ता बिना एसटीबी के केबल टीवी सेवायें प्राप्‍त कर रहे हैं, उन्‍हें सलाह दी जाती है कि वे निर्बाध टीवी सेवायें प्राप्‍त करने के लिए अंतिम तिथि के पहले एसटीबी लगा लें।

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