जानिये क्या है चुनावी बॉण्‍ड योजना, आप कैसे खरीद सकतें हैं


चुनावी बॉण्‍ड योजना-2018 

भारतीय स्‍टेट बैंक (एसबीआई) की अधिकृत शाखाओं पर चुनावी बॉण्‍डों की बिक्री 

भारत सरकार ने राजपत्र अधिसूचना संख्‍या 20 दिनांक 02 जनवरी, 2018 द्वारा चुनावी बॉण्ड योजना-2018 को अधिसूचित किया है। योजना के प्रावधानों के अनुसार चुनावी बॉण्‍ड की खरीद ऐसे व्‍यक्ति द्वारा की जा सकती है, जो भारत का नागरिक हो या भारत में निगमित या स्‍थापित हो। व्‍यक्ति विशेष के रूप में कोई भी एक व्‍यक्ति एकल रूप से या अन्‍य व्‍यक्तियों के साथ संयुक्‍त रूप से चुनावी बॉण्‍डों की खरीद कर सकता है। 

केवल वैसी राजनीतिक पार्टियां, जो जन प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 (1951 का 43)  के अनुच्‍छेद 29ए के तहत पंजीकृत हों और जिसने आम लोकसभा चुनावों या राज्‍य विधानसभा चुनावों में डाले गये मतों के एक प्रतिशत से कम मत प्राप्‍त नहीं किये हों, चुनावी बॉण्‍ड प्राप्‍त करने की पात्र होंगी।  चुनावी बॉण्‍डों को किसी योग्‍य राजनीतिक पार्टी द्वारा केवल अधिकृत बैंक के किसी बैंक खाते के माध्‍यम से ही भुनाया जा सकेगा।

भारतीय स्‍टेट बैंक को बिक्री के दूसरे चरण में अपनी 11 अधिकृत शाखाओं (सूची संलग्‍न) के माध्‍यम से 02-10 अप्रैल, 2018 तक चुनावी बॉण्‍डों को जारी करने तथा भुनाने के लिए अधिकृत किया गया है।  
  
चुनावी बॉण्‍ड योजना-2018

चरण-II : 02-10 अप्रैल, 2018

प्रस्‍तावित अधिकृत शाखाएं

क्र. संख्‍या
राज्‍य
शाखा का नाम तथा पता
शाखा कोड नम्‍बर
वर्तमान/ नया
1
दिल्‍ली
नई दिल्‍ली, मुख्‍य शाखा, 11 संसद मार्ग,
नई दिल्‍ली – 110001
00691
वर्तमान
2
गुजरात
गांधीनगर शाखा, प्रथम तल, क्षेत्रीय कार्यालय सेक्‍टर-10बी, गांधी नगर, जिला-‍गांधीनगर, गुजरात
पिन :382010.
01355
नया
3
हरियाणा और पंजाब
चंडीगढ़, मुख्‍य शाखा, एससीओ 43-48, बैंकिंग स्‍कवॉयर, सेक्‍टर-17बी, चंडीगढ़, जिला-चंडीगढ़, राज्‍य-चंडीगढ़, पिन - 160017
00628
नया
4
कर्नाटक
बेंगलूरू मुख्‍य शाखा, पोस्‍ट बैग न. 5310, सेंट मार्क्स रोड, बेंगलूरू, जिला-बेंगलूरू शहरी, राज्‍य कर्नाटक, पिन : 560001
00813
नया
5
मध्‍य प्रदेश  
भोपाल मुख्‍य शाखा, टी.टी.नगर, भोपाल-462003, भोपाल, मध्‍य प्रदेश, जिला भोपाल, राज्‍य मध्‍य प्रदेश, पिन : 462003
01308
नया
6
महाराष्‍ट्र
मुम्‍बई मुख्‍य शाखा, मुम्‍बई समाचार मार्ग, हॉर्निमन सर्कल, फोर्ट, मुम्‍बई, महाराष्‍ट्र, पिन: 400001
00300

वर्तमान
7
राजस्‍थान
जयपुर मुख्‍य शाखा,पोस्‍ट बॉक्‍स न.72, सांगानेरी गेट, जयपुर, राजस्‍थान, जिला-जयपुर, राज्‍य राजस्थान, पिन : 302003
00656
नया

8
तमिलनाडु
चेन्‍नई मुख्‍य शाखा, 336/166, थम्‍बुचेट्टी स्‍ट्रीट, पेरिज, चेन्‍नई, राज्‍यतमिलनाडु, पिन : 600001
00800
वर्तमान
9
उत्‍तर प्रदेश
लखनऊ मुख्‍य शाखा, तारावाली कोठी, मोतीमहल मार्ग, हजरतगंज, लखनऊ, उत्‍तर प्रदेश, जिला लखनऊ, राज्‍य-उत्‍तर प्रदेश, पिन : 226001
00125
नया
10
पश्चिम बंगाल
कोलकाता मुख्‍य शाखा, समृद्धि भवन-1, स्‍ट्रांड रोड़, कोलकाता, पश्चिम बंगाल, जिला कोलकाता, राज्‍य- पश्चिम बंगाल, जिला कोलकाता, राज्‍य - पश्चिम बंगाल, पिन : 700001
00001
वर्तमान
11
असम, अरूणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम,
त्रिपुरा
गुवाहाटी शाखा,
पान बाजार,
एम.जी.रोड़,
कामरूप, गुवाहाटी
पिन : 781001
00078
नया

2017-18 के प्रथम तिमाही के लिए लघु बचत योजनाओं पर ब्याज में 0.1% की कमी

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केन्द्र सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 के प्रथम तिमाही के लिए लघु बचत योजनाओं पर ब्याज की संशोधित दरों की घोषणा की है ताकि उन्हें बाजार दर के करीब लाया जा सके।

लघु बचत योजनाओं को आकर्षक बनाये रखा जायेगा ताकि उनमें से कुछ आय कर लाभ तथा अतिरिक्त ब्याज दर के फायदे लेते रहें

दरों में संशोधन वित्तीय क्षेत्र में केंद्र सरकार के अंशशोधित सुधार की प्रक्रिया का प्रतिबिंब है ताकि लोगों को बेहतर ब्याज दर मिल सके
         
केन्द्र सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 के प्रथम तिमाही के लिए कई लघु बचत योजनाओं पर ब्याज की संशोधित दरों की घोषणा की है। ऐसी दरों को बाजार दर के करीब लाने के लिए, सरकार ने सभी योजनाओं डाकघर जमा खातों को छोड़कर के ब्याज दरों में 0.1 प्रतिशत अंक (10 आधार अंक) की कटौती करने का निर्णय लिया है।

सरकार छोटे बचतकर्ताओं के हितों का विशेष ध्यान रखते हुए, मुख्यत: लड़कियों के लाभ के लिए बचत, वरिष्ठ नागरिकों और नियमित बचतकर्ताओं, जो बचत की रीढ़ हैं, को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। वर्तमान में दरों में संशोधन वित्तीय क्षेत्र में केंद्र सरकार के अंशशोधित सुधार की प्रक्रिया का प्रतिबिंब है ताकि लोगों को बेहतर ब्याज दर मिल सके।

कई लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में 0.1 प्रतिशत अंक की सीमांत कमी के बाद भी ऐसी परिपक्वता और अवधि के दौरान बैंक जमाओं की तुलना में बहुत ही आकर्षक होंगी। बैंक जमा योजनाओं की तुलना में उच्च ब्याज दरों की पेशकश के अलावा कुछ लघु बचत योजनाओं से आयकर में भी लाभ मिलता है। इसके अलावा, लघु बचत योजनाएं जैसे वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस), 
सुकन्या समृद्धि खाता (एसएसए), 
पीपीएफ, 5 वर्षों के लिए राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी), 
5 वर्षों के लिए मासिक आय योजना (एमआईएस), 
5 वर्षों के लिए जमा योजना (टीडी) पर अतिरिक्त ब्याज मिलता है। 

यह अतिरिक्त ब्याज दर 
वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के मामले में 100 आधार अंक, 
सुकन्या समृद्धि खाते में 75 आधार अंक और पीपीएफ,  
5 वर्ष के एनएससी, 5 वर्ष के एमआईएस और 
5 वर्ष के टीडी में 25 आधार अंक है।  

रिपोर्ट कार्ड : 1 अप्रैल 2017 से लागू हो जाएगा #GST


जीएसटी को लागू करने पर रिपोर्ट कार्ड, भारत सरकार ने जीएसटी को लागू करने की दिशा में अब तक कुछ भी समय नहीं गंवाया है 

जीएसटी परिषद में विचार-विमर्श अत्यंत सौहार्दपूर्ण रहे हैं और अब तक सभी निर्णय आम सहमति से लिए गए हैं 

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर आम सहमति तक पहुंचने में लगे समय की तुलना में संबंधित विधेयक के पारित होने के बाद के घटनाक्रमों से यह पता चलता है कि भारत सरकार और राज्यों ने जीएसटी को लागू करने के लिए समस्त आवश्यक कदम उठाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है। नीचे पेश किए गए रिपोर्ट कार्ड से यह साफ पता चलता है कि भारत सरकार ने जीएसटी को लागू करने की दिशा में अब तक कुछ भी समय नहीं गंवाया है :

जीएसटी से जुड़े संविधान संशोधन अधिनियम पर 8 सितंबर, 2016 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के महज एक सप्ताह के भीतर कैबिनेट ने सचिवालय के साथ जीएसटी परिषद का सृजन कर दिया। संविधान के अनुच्छेद 279ए के तहत जीएसटी परिषद को जीएसटी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर केंद्र एवं राज्यों के समक्ष सिफारिशें पेश करने का अधिकार दे दिया गया है। किन-किन वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी लगाया जा सकता है, किन-किन वस्तुओं एवं सेवाओं को जीएसटी से मुक्त रखा जा सकता है, कुल कारोबार की सीमा क्या हो, जिससे नीचे की वस्तुओं एवं सेवाओं को जीएसटी से मुक्त रखा जा सकता है और जीएसटी के बैंड के साथ न्यूनतम दरों सहित जीएसटी की दरें तय करना इन मुद्दों में शामिल हैं।

12 सितंबर, 2016 को जीएसटी परिषद की अधिसूचना जारी होने के बाद से लेकर अब तक परिषद की छह बैठकें नई दिल्ली में हो चुकी हैं। ये बैठकें 22-23 सितंबर 2016, 30 सितंबर, 18-19 अक्टूबर, 3-4 नवम्बर, 2-3 दिसंबर और 11 दिसंबर 2016 को आयोजित की गईं। इन बैठकों के दौरान अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए हैं, जिससे 01 अप्रैल, 2017 से जीएसटी को लागू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

जीएसटी परिषद की इन छह बैठकों में लिये गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय निम्नलिखित हैं –

  • जीएसटी से छूट के लिए सीमा सामान्य राज्यों के लिए 20 लाख रुपये होगी (संविधान के अनुच्छेद 279ए में उल्लिखित विशेष श्रेणी वाले राज्यों के लिए सीमा 10 लाख रुपये होगी)
  • संरचना योजना से लाभ उठाने की सीमा 50 लाख रुपये होगी। सेवा प्रदाताओं को संरचना योजना के दायरे से बाहर रखा जाएगा।
  • जीएसटी को लागू करने के कारण राज्यों को राजस्व नुकसान की भरपाई 5 वर्षों तक करने हेतु राज्य के राजस्व के लिए आधार वर्ष 2015-16 होगा और 14 फीसदी की निश्चित वृद्धि दर इस पर लागू होगी।
  • जीएसटी के तहत वस्तुओं के लिए दरों के बैंड 5, 12, 18 एवं 28 फीसदी होंगे और इसके अलावा छूट प्राप्त वस्तुओं की एक श्रेणी होगी। यही नहीं, राज्यों को मुआवजे की अदायकी के लिए कुछ विशेष वस्तुओं जैसे की लक्जरी कारों, एरेटेड ड्रिंक, पान मसाला और तंबाकू उत्पादों पर 28 फीसदी की दर के अलावा उपकर लगाया जाएगा।


जीएसटी परिषद में विचार-विमर्श अत्यंत सौहार्दपूर्ण रहे हैं और अब तक सभी निर्णय आम सहमति से लिए गए हैं। परिषद के सदस्य अत्यंत सकारात्मक नजरिये के साथ बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं और तय समय सीमा के मुताबिक जीएसटी को लागू करने की दिशा में काम कर रहे हैं। 

बैंकों को नगदी जमा करते समय नए-पुराने नोटों का सही ब्यौरा लेने का निर्देश


वित्‍त मंत्रालय ने पीएसबी के सभी एमडी एवं सीईओ/सीएमडी, आईबीए के अध्‍यक्ष को एक पत्र के माध्‍यम से निर्देश दिया कि देश की सभी बैंक शाखाओं को पुराने एवं नए करेंसी नोटों में नकदी जमा को सही तरीके से प्रदर्शित करने के लिए सावधान कर दिया जाए और ग्राहकों को इसके बारे में सूचित किया जाए ; इस बारे में क्‍या कार्रवाई की गई, उसकी रिपोर्ट 16.12.2016 तक दी जाए 

भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय ने अपने वित्‍तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के माध्‍यम से सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों (पीएसबी) एवं भारतीय बैंकर एसोसिएशन (आईबीए) को कहा है कि वे इसे शत प्रतिशत (100 फीसदी) सुनिश्चित करें कि नई करेंसी की जमाएं ग्राहकों के प्रतिपन्‍नों (काउंटफ्वॉयल) में समुचित तरीके से प्रदर्शित हो। डीएफएस ने पीएसबी के सभी प्रबंध निदेशकों (एमडी) एवं मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ)/ अध्‍यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी), आईबीए के अध्‍यक्ष को संबोधित एक पत्र में कहा है कि एसबीएन एवं नॉन-एसबीएन, जैसा भी मामला हो, से संबंधित रिकॉर्डों का बैंक रिकॉर्ड में एवं ग्राहकों के रिकॉर्ड दोनों में ही, रखरखाव अनिवार्य है। पत्र में यह भी कहा गया कि हालांकि अधिकांश बैंक ग्राहकों को सही जानकारी उपलब्‍ध करा रहे हैं, फिर भी यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसा बिना किसी विफलता के शत प्रतिशत मामलों में हो, देश की सभी बैंक शाखाओं को सावधान कर दिया जाए कि वे पुराने एवं नए करेंसी नोटों में नकदी जमा को सही तरीके से प्रदर्शित करें और ग्राहकों को इसके बारे में सूचित करें। 

मंत्रालय ने पीएसबी के सभी एमडी एवं सीईओ/सीएमडी, आईबीए के अध्‍यक्ष को कहा है कि इसका पालन निष्‍ठापूर्वक किया जाना चाहिए और इस बारे में किसी भी विचलन को रोका जाना चाहिए और अगर ऐसी बात सामने आती है तो इस पर तत्‍काल और दृढ़तापूर्वक कार्रवाई होनी चाहिए। 

पत्र में आगे कहा गया है कि आम लोगों को शिक्षित बनाने के लिए बैंकों को अपनी संबंधित बैंक शाखाओं में प्रमुखता से एक चिह्न (स्‍थानीय भाषा समेत) प्रदर्शित करनी चाहिए और ग्राहकों से डिपोजिट स्लिप भरने और सुस्‍पष्‍ट तरीके से पुराने एवं नए करेंसी नोटों की जानकारी देने का आग्रह करना चाहिए।

डीएफएस ने पीएसबी के सभी एमडी एवं सीईओ/सीएमडी, आईबीए के अध्‍यक्ष को इस पर तत्‍काल विचार करने को कहा है और इस बारे में क्‍या कार्रवाई की गई, उसकी रिपोर्ट 16.12.2016 तक देने को कहा है।

मंत्रालय ने विमुद्रीकरण के बाद, विशेष रूप से, जब पुरानी करेंसी स्‍वीकार की जा रही थी और 24 नवंबर, 2016 तक, जब एक निर्दिष्‍ट सीमा तक पुरानी करेंसी के नोट बदलने की अनुमति दी गई थी, बैंकों द्वारा निभाई गई भूमिका की भी सराहना की। 

शेयरों से प्राप्‍त राशि के निर्धारण के लिए मसौदा नियम तैयार हुए

शेयरों के संदर्भ में कंपनी को प्राप्‍त राशि के निर्धारण का तरीका तय करने के लिए मसौदा नियम तैयार किये गये (आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115 क्‍यूए) 

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 115 क्‍यूए के तहत कंपनी द्वारा गैर सूचीबद्ध शेयरों के बायबैक (वापस खरीदना) से जुड़ी वितरित आय पर 20 फीसदी की दर से अतिरिक्‍त आयकर लगाया जाता है। 

वित्‍त अधिनियम, 2016 में 1 जून, 2016 से ‘वितरित आय’ की परिभाषा को संशोधित किया गया है, जिसका मतलब यह है कि शेयरों के बायबैक के लिए कंपनी द्वारा अदा की जाने वाली राशि को उस रकम में से घटा दिया जाएगा, जो कंपनी को इन शेयरों को जारी करने के दौरान प्राप्‍त हुई थी। इसका निर्धारण तय किये गये तरीके से किया जा सकता है।

इस संबंध में कंपनी को विभिन्‍न परिस्थितियों में अपने शेयरों के उपयोग से प्राप्‍त होने वाली धनराशि के निर्धारण के लिए मसौदा नियम तैयार कर लिये गये हैं और उन्‍हें वित्‍त मंत्रालय की वेबसाइट (www.finmin.nic.in)  और आयकर विभाग की वेबसाइट (www.incometaxindia.gov.in)  पर अपलोड कर दिया गया है, ताकि हितधारकों एवं आम जनता की टिप्‍पणियां प्राप्‍त हो सकें।    

मसौदा नियमों पर टिप्‍पणियों एवं सुझावों को 31 जुलाई, 2016 तक इलेक्‍ट्रॉनिक ढंग से ईमेल पता  ustpl1@nic.in पर भेजा जा सकता है।

आयकर घोषणा योजना में भुगतान करने के लिए समय में संशोधन हुआ

देश के विभिन्‍न भागों में आयोजित बैठकों और गोष्ठियों में हितधारकों ने इस बात पर चिंता प्रकट की थी कि कर, अधिभार तथा पेनल्टी का भुगतान करने के लिए 30 नवंबर, 2016 तक का उपलब्ध समय बहुत कम समय है, विशेषकर आय घोषित करने वालों के पास तरल रूप में धन उपलब्ध नहीं है। यह भी कहा गया कि 30 नवंबर, 2016 तक भुगतान करने के लिए आय घोषित करने वालों को अपनी परिसंपत्तियों को बाध्य होकर बेचना पड़ सकता है। 

सरकार ने हितधारकों की व्‍यावहारिक कठिनाइयों को ध्‍यान में रखते हुए भुगतान करने के लिए समय में संशोधन इस प्रकार किया है : 

1. कर, अधिभार तथा पेनल्टी की न्‍यूनतम 25 प्रतिशत राशि का भुगतान 30 नवंबर, 2016 तक किया जा सकेगा। 

2. कर, अधिभार तथा पेनल्टी की एक और न्‍यूनतम 25 प्रतिशत राशि का भुगतान 31 मार्च, 2017 तक किया जा सकेगा। 

3. और शेष राशि का भुगतान 30 सितम्‍बर, 2017 को या उससे पहले किया जा सकता है। 

इस आशय की अधिसूचना शीघ्र जारी की जाएगी। 

सरकार द्वारा कालेधन पर रोक लगाने हेतु अभूतपूर्व कदम उठाये गए


सरकार द्वारा भारत और विदेशों में कालेधन की समस्‍या पर रोक लगाने के लिए विभिन्‍न कदम उठाये गये हैं। इस संबंध में प्रमुख निर्णय और कार्यवाही निम्‍नलिखित हैं:

1     कालेधन पर रोक लगाने के लिए उठाये गये प्रमुख कदम:

(1)    कड़े दंड वाले प्रावधानों के साथ एक नया काला धन अधिनियम लागू किया गया।
(2)    29 मई, 2014 को जारी अधिसूचना के तहत उच्‍चतम न्‍यायालय के न्‍यायाधीश एम. बी. शाह की अध्‍यक्षता में विशेष जांच दल का गठन किया गया। विशेष जांच दल के कई सिफारिशों पर कार्यवाही की गई ।
(3)    घरेलू कालेधन के लिए एक नई आय घोषणा योजना की शुरूआत की गई।
(4)    कठोर कार्यवाही करने के परिणामस्‍वरूप लगभग 50,000 करोड़ रूपये के अप्रत्‍यक्ष कर चोरी को पकड़ा गया। इसके साथ ही 21,000 करोड़ रूपये की अघोषित आय का भी पता चला। गत दो वर्षों में तस्‍करी गतिविधियों में जब्‍त किये गये सामान की राशि बढ़कर 3963 करोड़ रूपये पहुंच गई। यह गत दो वर्षों के मुकाबले 32 प्रतिशत अधिक है।
(5)    गत दो वर्षों के 1169 मामलों के मुकाबले 1466 मामलों में कानूनी कार्रवाई की शुरूआत की गई। इसमें 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 

2     वित्‍त अधिनियम-2015 के द्वारा काला धन शोधन अधिनियम-2002 में संशोधन:
·         कालाधन शोधन अधिनियम के अंतर्गत अपराध से आय की परिभाषा में संशोधन किया गया जिससे देश के बाहर स्थित संपत्ति जिसे जब्‍त करना संभव न हो के लिए भारत में समान संपत्ति की कुर्की या अधिकरण को संभव किया जा सके।
·         कालाधन शोधन अधिनियम में धारा (8) को जोड़ा गया ताकि विशेष न्‍यायालय के निर्देश पर कालाधन शोधन के अपराध के परिणामस्‍वरूप हानि उठाने वाले दावेदार को जब्‍त संपत्ति फिर से लौटाई जा सके।
·         सीमा शुल्‍क अधिनियम की धारा 132 जिसमें सीमा शुल्‍क से जुड़े झूठे घोषणाओं या दस्‍तावेजों से जुड़े अपराधों को विधेयक अपराध बनाया गया। व्‍यापार पर आधारित कालेधन शोधन पर रोक लगाई जा सके।
·         कालाधन (अघोषित विदेश आय और संपत्ति) और अधिरोपण कर अधिनियम 2015 की धारा 51 के अंतर्गत किसी कर दंड या ब्‍याज से इच्‍छानुसार बचने के अपराध को पीएमएलए के अंतर्गत अधिसूचीबद्ध अपराध बनाया गया। 

3  पीएमएलए के अंतर्गत हाल ही में की गई अधिसूचनाएं:

    डीएनएफबी सेक्‍टर में जोखिम राहत के लिए राजस्‍व विभाग द्वारा उठाये गये कदम निम्‍नलिखित हैं- 
  
·         पीएमएलए की उपधारा 2 (1) (एसए) (6) के अंतर्गत निर्धारित व्‍यापार या व्‍यवसाय करने वाले को 15.4.2015 को बीमा आढ़ती अधिसूचित किया गया।
·         पीएमएलए की उपधारा 2 (1) (एसए) (2) के अंतर्गत निर्धारित व्‍यापार या व्‍यवसाय करने वाले को 17.4.2015 को पंजीयक या उपपंजीयक अधिसूचित किया गया। 

4  विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) 1999 में वित्‍त अधिनियम 2015 के द्वारा संशोधन किये गये संशोधनों के अंतर्गत फेमा की धारा-4 के उल्‍लंघन के परिणामस्‍वरूप किसी व्‍यक्ति के विदेशी मुद्रा विदेशी प्रतिभूति या अचल संपत्ति अर्जित करने की स्थिति में भारत में समान राशि को जब्‍त करने और अधिग्रहण करने के संशोधन किया गया हैं।

वित्‍त मंत्रालय ने विकास एवं रोजगार सृजन के लिए उठाए ये कदम


राजस्‍व विभाग ने विकास एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न उपाय किए: छोटे करदाताओं एवं छोटे व्‍यवसाय एवं व्‍यावसायियों को राहत देने के लिए कदम उठाए
वित्‍त मंत्रालय के राजस्‍व विभाग ने विकास एवं रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न कदम उठाए हैं:

क. नई विनिर्माण कंपनियों के लिए कंपनी कर दरों को घटाकर 25 प्रतिशत करना।

ख. निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए आवास क्षेत्र के लिए कर लाभों को विस्‍तारित करना।

ग. तकनीकी सेवाओं के लिए रॉयल्‍टी एवं शुल्‍कों पर कर की दरों को 25 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत करना।

घ. स्‍टार्ट अप इंडिया के लिए कर रियायत।


ठीक इसी प्रकार, राजस्‍व विभाग ने छोटे करदाताओं एवं छोटे व्‍यवसाय एवं व्‍यावसायियों को राहत देने के लिए कदम उठाए हैं :

आयकर अधिनियम 1961 के सेक्‍शन 80 (सी) के तहत छूट की सीमा को सालाना एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये सालाना कर दिया गया है, जोकि एनपीएस को अतिरिक्‍त पचास हजार रुपये के योगदान का विषय होगा। इसके अतिरिक्‍त, छोटे व्‍यावसायों के लिए प्रकल्पित कराधान क्षेत्र के दायरे को बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक कर दिया गया है। प्रकल्पित कराधान लाभ अब व्‍यावसायों के लिए 50,00,000 रुपये के टर्नओवर तक उपलब्‍ध है।

विश्व मंदी के बाद भी देश में 2015-16 में 7.65% विकास दर बरकरार :जेटली


वैश्विक स्‍तर पर विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत वर्ष 2015-16 में 7.65 फीसदी की ऊंची आर्थिक विकास दर को बरकरार रखने में कामयाब रहा: वित्‍त मंत्री

सरकार दूरगामी ढांचागत सुधारों के जरिये ‘बदलाव के लिए सुधार’ की अवधारणा को अपना रही है: अरुण जेटली
केंद्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि वैसे तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र अब भी विश्‍व का विकास इंजन बना हुआ है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इस क्षेत्र की विकास दर पिछले साल के अनुमानित 5.9 फीसदी से घटकर वर्ष 2016 और वर्ष 2017 में 5.7 फीसदी रह जाएगी। श्री जेटली ने कहा कि वैश्विक स्‍तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भारत वर्ष 2015-16 में 7.65 फीसदी की ऊंची आर्थिक विकास दर हासिल करने में कामयाब रहा, जबकि पिछले साल यह 7.2 फीसदी आंकी गई थी। इस क्षेत्र के निर्धनतम देशों में विकास एवं गरीबी उन्‍मूलन में भागीदार बनने की भारतीय प्रतिबद्धता को दोहराते हुए वित्‍त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार ने एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के एडीएफ-12 के तहत अपना अंशदान बढ़ाकर 40 मिलियन अमेरिकी डॉलर कर दिया है। वित्‍त मंत्री कल जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में आयोजित एशियाई विकास बैंक की 49वीं वार्षिक आम बैठक के कारोबारी सत्र को संबोधित कर रहे थे।

भारत में विकास की मिसाल को रेखांकित करते हुए वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि सरकार दूरगामी ढांचागत सुधारों के जरिये ‘बदलाव के लिए सुधार’ की अवधारणा को अपना रही है। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने निवेश माहौल को बेहतर करने एवं कारोबार में और ज्‍यादा सुगमता सुनिश्चित करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं। वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि बु‍नियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए राष्‍ट्रीय बुनियादी ढांचा निवेश कोष (एनआईआईएफ) बनाया गया है। इसी तरह नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया, स्‍टार्टअप इंडिया और स्किल इंडिया जैसी अनेक योजनाएं क्रियान्‍वित की जा रही हैं। वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि भारत के व्‍यापक वित्‍तीय समावेश कार्यक्रम के परिणामस्‍वरूप बगैर बैंकिंग सुविधा वाले व्‍यक्तियों के 200 मिलियन से भी ज्‍यादा बैंक खातों को खोलना संभव हो पाया है।

एडीबी की भूमिका का उल्‍लेख करते हुए वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र जिस तरह से वैश्विक आर्थिक परिदृश्‍य में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच अपना मार्ग प्रशस्‍त कर रहा है, ठीक उसी तरह से समय पर मूल्‍यवान योगदान करने संबंधी एडीबी की क्षमता पर गौर किया जा रहा है। वित्‍त मंत्री श्री जेटली ने विशेष जोर देते हुए कहा कि एडीबी को अभिनव परियोजनाओं के लिए अपनी ओर से सहायता देते हुए परिवर्तन का वाहक बनने की जरूरत है, जो संभवत: स्‍थानीय प्रयासों के जरिये संभव नहीं है। उन्‍होंने कहा कि एडीबी के रेजीडेंट मिशनों का सशक्तिकरण और निर्णय लेने में प्रत्यायोजन एवं विकेन्‍द्रीकरण कुछ सुधार संबंधी अनिवार्यता हैं। वित्‍त मंत्री ने सुधारों पर निरंतर जोर देने की बात को रेखांकित किया ताकि एडीबी को एक बेहतर और बड़े एमडीबी में तब्‍दील किया जा सके।

आयकर अधिनियम,1961 के अंतर्गत फंड मैनेजर के संबंध में नए नियम


आयकर अधिनियम 1961 के सेक्‍शन 9ए में भारत ने विदेशी फंडों के फंड मैनेजरों के लोकेशन में मदद के लिए 01-04-2016 से विशेष कर लगाने की व्‍यवस्‍था का प्रावधान है। इस व्‍यवस्‍था के तहत एक पात्र निवेश फंड द्वारा भारत में पात्र फंड मैनेजर के माध्‍यम से चलाए जा रहे काम से भारत में कारोबारी संबंध स्‍थापित नहीं होता और इससे भारत में फंड का अवसर साबित नहीं होता।  

15-03-2016 को जारी अधि‍सूचना संख्‍या SO 1101(E) के माध्‍यम से अधिनियम के सैक्‍शन 9ए के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम आयकर अधिनियम 1961 में जोड़ दिया गया है। इन नियमों में निम्‍न व्‍यवस्‍थाएं हैं।
  • एक पूर्व स्‍वीकृति व्‍यवस्‍था जिसके अंतर्गत एक फंड  अपने विकल्‍प पर सीबीडीटी से स्‍वीकृति की मांग सकता है और एक बार स्‍वीकृति मिल जाने पर सेक्‍शन 9ए के लाभ से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता जब तक सीमित परिस्थितियों के अंतर्गत स्‍वीकृति वापस न ले ली गई हो।
  • यह देखकर कि फंड में निवेश एक संस्‍थागत कंपनी द्वारा प्रत्‍यक्ष रूप से की गई है तो सदस्‍यों की संख्‍या का निर्धारण तथा फंड में भागीदारी हितनिर्धारण।
  • फंड के 18वें महीने या इसके अंतिम क्‍लोजिंग, जो भी पहले हो, में निवेशक विविधिकरण शर्त से छूट। यह छूट फंड की चरण स्‍थापना तथा फंड के समाप्‍त होने में एक वर्ष की अवधि के लिए मान्‍य।
  • 90 दिनों तक निवेशक विविधिकरण शर्तों को अल्‍पकालीक रूप से पूरा न करने के मामले में फंड की पात्रता प्रभावित नहीं करेगी।
  • फंड की पात्रता पर काम का ब्‍यौरा देने में देरी से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बशर्ते विलंब की अवधि 90 दिनों से अधिक न हो।
  • यदि फंड प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से 26 प्रतिशत वोटिंग अधिकार है तो किसी कंपनी द्वारा कारोबार चलाने में फंड का नियंत्रण और प्रबंधन समझा जाएगा।

अधि‍सूचना संख्‍या SO 1101(E) दिनांक 15-3-2016 आयकर विभाग की वेबसाइट  www.incometaxindia.gov.in. पर उपलब्‍ध है।

केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने आम बजट के लिए वित्तमंत्री को बधाई दी


केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को आम बजट 2016-17 पर बधाई दी। अपने बयान श्री सिंह ने कहा कि 'मैं केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली को 2016-17 के उत्तम आम बजट पेश करने पर बधाई देता हूं। यह बजट पूर्ण रूप से किसानों, गरीबों और सुधार के पक्ष में है। इस बजट में सरकार की प्राथमिकता की रूपरेखा के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्वप्न नजर आता है।' 

अगर यह आम बजट प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सालाना परीक्षा है तो मैं यह अवश्य कहूंगा कि श्री मोदी इस परीक्षा में पूर्ण रूप से सफल हुए हैं। बजट 2016-17 से सरकार को आर्थिक नीव को मजबूत करने और बुनियादी सुविधाओं के जाल को बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इस वर्ष सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को आय सुरक्षा प्रदान करना होगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बीस हजार करोड़ के आवंटन के साथ संयोजित सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाये जाने पर बल दिया जायेगा जिससे भारत में कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा। 

किसानों को कृषि संबंधी ऋण देने के लिए उच्चतम लक्ष्य 9 लाख करोड़ रखा गया है और मनरेगा के लिए 38500 करोड़ रुपये का आवंटन किया जायेगा जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना निधि को बढ़ाकर 19000 करोड़ किया जायेगा जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की ओर बड़ा कदम है। 

इस वर्ष बुनियादी ढांचे का विकास बजट की पहली प्राथमिकताओं में रहेगा जिसमें 55 हजार करोड़ को राजमार्गों के विकास के लिए रखा जायेगा। इस बार की एनडीए सरकार रेलवे में बड़ी राशि निवेश करने के साथ बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में पहले की तुलना में 2.2 लाख करोड़ का इजाफा करेगी। 

बजट में बीपीएल परिवारों को एक लाख से ज्यादा का स्वास्थ्य बीमा दिया की बात कही गई है जो यह दर्शाती है कि वर्तमान सरकार गरीब और जरुरतमंदों की चिंता करती है। रेलवे में पूंजी व्‍यय को जोड़ देने से राजग सरकार द्वारा बुनयादी सेक्‍टर में किया जाने वाला निवेश बढ़कर 2.2 लाख करोड़ हो जाएगा। 

बजट में यह ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को 2.87 करोड़ का वित्तीय सहायता दिये जाने की बात कही गई है जो कि लंबे समय तक पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी। 

बजट में कई ऐसे प्रावधानों को शामिल किया गया है जो निर्माण क्षेत्र को बढ़ाने के साथ युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध करायेगा। यह बजट निश्चित रूप से हर मोर्चे पर लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरा है और अर्थव्यवस्था पर भविष्य में कई तरह के सकरात्मक प्रभाव देखे जा सकेंगे। 

#NSS पर ब्‍याज दरें 1 अप्रैल, 2016 से हर तिमाही तय की जाएंगी


वित्त मंत्रालय द्वारा विनियमित राष्ट्रीय बचत योजनाओं (NSS) में आकर्षक उच्‍च रिटर्न के साथ निवेश की पूर्ण सुरक्षा की पेशकश की जाती है। ये योजनाएं मुख्‍यत: डाक घरों के जरिये क्रियान्‍वयन के कारण खासकर दुर्गम क्षेत्रों में वित्तीय समावेश के प्रपत्रों की भी भूमिका निभाती हैं।

यह निर्णय लिया गया है कि राष्‍ट्रीय बचत योजनाओं के संदर्भ में 1 अप्रैल, 2016 से निम्‍नलिखित को क्रियान्वित किया जाएगा:

  1. सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना और मासिक आय योजना प्रशंसनीय सामाजिक विकास या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लक्ष्यों पर आधारित बचत योजनाएं हैं। अत: तुलनीय परिपक्‍वता अवधि वाले जी-सेक रेट के मुकाबले इन योजनाओं को ब्‍याज दरों और वृद्धि या फैलाव (स्‍प्रेड) के मामले में जो बढ़त अर्थात 0.75 फीसदी, 1 फीसदी और 0.25 फीसदी हासिल है, उन्‍हें सरकार द्वारा अपरिवर्तित रखा गया है।
  2. इसी तरह दीर्घकालिक प्रपत्रों जैसे कि 5 साल की सावधि जमा, 5 साल वाले राष्ट्रीय बचत पत्र और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (पीपीएफ) को तुलनीय परिपक्‍वता अवधि वाले जी-सेक रेट के मुकाबले 0.25 फीसदी का जो स्‍प्रेड फिलहाल हासिल है, उसे सरकार द्वारा अपरिवर्तित रखा गया है।
  3. 1 साल, 2 साल और 3 साल की सावधि जमाओं, केवीपी और 5 साल की आवर्ती जमाओं को तुलनीय परिपक्‍वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों के मुकाबले 0.25 फीसदी का जो स्‍प्रेड फिलहाल हासिल है, उसे 1 अप्रैल 2016 से समाप्‍त कर दिया जायेगा, ताकि इन्‍हें बैंकिंग क्षेत्र के समान प्रपत्रों पर देय ब्‍याज दरों के और करीब लाया जा सके।
  4. अल्‍प बचत योजनाओं पर ब्‍याज दरों को प्रासंगिक सरकारी प्रतिभूतियों की ब्‍याज दरों के अनुरूप करने के उद्देश्‍य से अल्‍प बचत योजनाओं पर ब्‍याज दरें 1 अप्रैल, 2016 से हर तिमाही तय की जाएंगी, जैसा कि नीचे दिया गया है।


क्रम संख्‍या
जिस तिमाही के लिए ब्‍याज दर प्रभावी मानी जाएगी
जिस तारीख को संशोधन अधिसूचित किया जाएगा
जिस अवधि के संदर्भ में एफआईएमएमडीए के मासांत जी-सेक रेट पर ब्‍याज दर आधारित होगी
1.
अप्रैल-जून
15 मार्च
दिसम्‍बर-जनवरी-फरवरी
2.
जुलाई-सितम्‍बर
15 जून
मार्च-अप्रैल-मई
3.
अक्‍टूबर–दिसम्‍बर
15 सितम्‍बर
जून-जुलाई-अगस्‍त
4.
जनवरी–मार्च
15 दिसम्‍बर
सितम्‍बर-अक्‍टूबर- नवम्‍बर 

प्रधानमंत्री जन-धन योजना में 440 मिलियन बचत खाते खुले : वित्‍त मंत्री


केंद्रीय वित्‍त मंत्री श्री अरूण जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई) के अंतर्गत सरकार की पहल को देखते हुए वर्ष 2015-16 के दौरान कई बैंक बचत जमा खाते (बीएसडीए) खोले गये हैं। उन्‍होंने कहा कि सितम्‍बर 2015 को समाप्‍त हुई अवधि के दौरान 440 मिलियन बीएसडीए हो गये जबकि मार्च, 2015 को समाप्‍त हुए वर्ष में 398 मिलियन बीएसडीए थे। वित्‍त मंत्री ने कहा कि सरकारी बैंकों में संचालन सुधारों के रूप में बैंक बोर्ड ब्‍यूरो की स्‍थापना की गई है, जो बैंक की प्रगति और विकास के लिए उचित कार्यप्रणाली तैयार करने के लिए पूर्णकालिक निदेशकों और गैर कार्यकारी अध्‍यक्षों की नियुक्ति के लिए नियुक्ति बोर्ड का स्‍थान लेगा। उन्‍होंने कहा कि सरकार ने महत्‍वपूर्ण निष्‍पादन मानदंडों के साथ सरकारी बैंकों के लिए वार्षिक लक्ष्‍य के लिए प्रयोजन ब्‍यौरा तैयार करने की पहले की प्रक्रियाओं को बैंक विशिष्‍टता से बदल कर लक्ष्‍य आधारित बना दिया है ताकि बैंक के साथ संपर्क की आवश्‍यकता को दूर किया या कम से कम किया जा सके। वित्‍त मंत्री ने आज यहां पर बैंक और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों के साथ बजट पूर्व विचार-विमर्श बैठक के दौरान शुरूआत में यह टिप्‍पणी की। 

बैठक के दौरान बैंक और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों ने भी कई सुझाव दिये। प्रमुख सुझावों में आयकर अधिनियम के अंतर्गत 2.5 लाख तक की बचत के लिए कर छूट की सीमा को बढ़ाना, डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिये कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्‍साहन, वृद्धि को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्र निवेश जब तक नहीं बढ़ता है तब तक सरकारी व्‍यय बढ़ाने पर ध्‍यान केंद्रित करना शामिल है। अन्‍य सुझावों में अधिकतर सरकारी नियंत्रण रखते हुए सरकारी क्षेत्र के गैर जीवन बीमा उपक्रमों को सूचीबद्ध करना, पीएफएम के लिए व्‍यावसायिक रूप से व्‍यावहारिक प्रोत्‍साहन के साथ एनपीएस क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने की परिकल्‍पना के साथ पीएफआरडीए नियामक तैयार करना शामिल हैं। सरकारी केपेक्‍स आधारित व्‍यय, बैंकों को अपनी बुनियादी ढांचा जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑफशोर आईएनआर बान्‍ड जारी करने की अनुमति और घरेलू इंफ्रा बॉन्‍ड्स दिशानिर्देशों के साथ इन बॉन्‍डों के नियामक सममूल्‍य के सुझाव भी दिये गये। 

अन्‍य सिफारिशों में कृषि क्षेत्र में प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश, प्रौद्योगिकी समर्थित और व्‍यापक वित्‍तीय समावेशन के साथ नई फसल बीमा योजना शुरू करना और सरकार के बॉयोमैट्रिक सत्‍यापन पहल शामिल है। 

बैंकों और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों से उपरोक्‍त बजट पूर्व विचार-विमर्श में वित्‍त मंत्री श्री अरूण जेटली के साथ वित्‍त राज्‍य मंत्री श्री जयंत सिन्‍हा, वित्‍त सचिव श्री आर पी वटल, डीईए सचिव श्री शक्तिकांत दास, राजस्‍व सचिव डॉ. हसमुख अढि़या, वित्‍तीय सेवाएं सचिव सुश्री अंजुली चिब दुग्‍गल, मुख्‍य आर्थिक सलाहकार (सीईए) डॉ. अरविंद सुब्रह्मण्‍यम भी उपस्थित थे। 

विभिन्‍न बैंकों और वित्‍तीय संस्‍थानों के प्रतिनिधियों में आरबीआई के डिप्‍टी गवर्नर श्री उर्जित पटेल, भारतीय स्‍टेट बैंक के अध्‍यक्ष सुश्री अरूंधति भट्टाचार्य, बैंक ऑफ बडौदा के कार्यकारी निदेशक श्री बी बी जोशी, जनग्रह के श्री भारत सोंदूर, जीवन बीमा निगम के अध्‍यक्ष श्री एस के रॉय, आईआईएफसीएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री एस बी नायर, आईडीबीआई बैंक के सीएमडी श्री किशोर खरात, नाबॉर्ड के अध्‍यक्ष श्री एच के भनवाला, इंडियन बैंकर्स एसोसिएशन (आईबीए) के अध्‍यक्ष श्री अश्विनी कुमार, एक्सिस बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी सुश्री शिखा शर्मा, सिटी बैंक के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री प्रमीत झवेरी, एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक श्री आदित्‍य पुरी, यस बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी श्री राणा कपूर, आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक श्री एस एन कनन, शेयर माइक्रोफीन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री एम उदई कुमार, एल एंड टी फाइनेंस होल्डिंग्‍स के मुख्‍य प्रबंध निदेशक श्री वाई एम देवोस्‍थाली, भारतीय दलित वाणिज्‍य और उद्योग परिसंघ के श्री मिलिंद काम्‍बले, बेसिक्‍स–माइक्रोफाइनेंस लाइवलीहुड इंस्टिट्यूट के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी श्री विजय महाजन और भारतीय म्‍युचुअल फंड एसोसिएशन के चीफ एक्जिक्‍यूटिव श्री सीवीआर राजेन्‍द्रन शामिल थे। 

तमिलनाडु में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नावों पर ATM लगाने के निर्देश

चित्र सिर्फ प्रदर्शन हेतु
तमिलनाडु में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए वित्‍तीय सेवाओं के विभाग ने बैंक और अन्‍य वित्‍तीय संगठनों को कई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बाढ़ से प्रभावित लोगों की हर संभव मदद के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे। 

बाढ़ के कारण बैंकों की शाखाओं और एटीएम के प्रभावित होने की संभावना है। बैंकों से एटीएम के संचालन को सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है और जहां ऐसा करना संभव न हो वहां वैकल्पिक व्‍यवस्‍थाओं जैसे मोबाइल एटीएम, एटीएम बैंक और नावों पर लगाए गए मोबाइल एटीएम की व्‍यवस्‍था करने को कहा गया है। बैंक इसके साथ ही विभिन्‍न स्‍थानों पर धन की निकासी के लिए अपने कर्मचारियों को लैपटॉप के साथ तैनात कर सकते है। 

प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना को लागू करने वाले बैंक एक नॉडल अधिकारी या सभी बैंकों के लिए एक अधिकारी या किसी जिले के लिए अधिकारी की नियुक्ति करने के साथ-साथ लोगों की सुविधा के लिए उनके टेलीफोन नंबर को प्रसारित करेंगे। बैंकों से राहत एवं बचाव अभियानों में प्रयोग होने वाले प्रारूप में रोज की प्रगति का दर्ज करने का अनुरोध किया गया है। 

सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनियों और भारतीय जीवन बीमा निगम को राज्‍य में दावों के शीघ्र निपटारे के लिए तुरंत कार्यवाही करने और एक वरिष्‍ठ अधिकारी को अधिकृ‍त करने का निर्देश दिया गया है। 

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