अब मिलेगी ईपीएफ खातें में जमा राशि पर 8.65% ब्याज दर #EPFO


ईपीएफ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड ने वर्ष 2018-19 के लिए ईपीएफ सदस्य के खातें में जमा राशि पर 8.65 प्रतिशत ब्याज दर जमा करने की सिफारिश की है 

केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संतोष कुमार गंगवार की अध्यक्षता में आज ईपीएफ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की 224 वीं बैठक का आयोजन किया गया। केंद्रीय बोर्ड ने वर्ष 2018-19 के लिए ईपीएफ सदस्य के खातें में जमा राशि पर 8.65 प्रतिशत ब्याज दर जमा करने की सिफारिश की है।

केंद्रीय बोर्ड ने 12 फरवरी, 2019 को आयोजित वित्तीय निवेश और लेखा परीक्षा समिति की 141 वीं बैठक में अनुमोदित अनुसार ईपीएफ योजना 1952 में संशोधन की पुष्टि की है ताकि एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) (इक्विटी और संबंधित निवेश) में निवेश के लेखा जोखा को संक्षम बनाया जा सके।

केंद्रीय बोर्ड ने सीबीटी ईपीएफ के चेयरमैन के कम्प्यूट्रीकरण परियोजना के दूसरे चरण को पूरा करने के लिए एक सलाहकार के रूप में सी-डेक को जारी रखने के अनुमोदन की पुष्टि की है। बोर्ड ने 31 मार्च, 2019 तक की अवधि के लिए अनुबंध की मौजूदा शर्तों पर ईपीएफओ प्रतिभूतियों के संरक्षक के रूप में मैसर्स स्टेंडर्ड चार्टर्ड बैंक को सेवा विस्तार दिया है।

केंद्रीय बोर्ड ने वर्ष 2018-19 के संशोधित अनुमानों और वर्ष 2019-20 के बजट अनुमानों के लिए मंजूरी देते हुए केंद्र सरकार को अनुमोदन करने की सिफारिश की है। केंद्रीय बोर्ड ने ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 की धारा 17(2) के साथ पठित ईपीएफ योजना 1952 के पैरा 27ए के तहत उचित शासन द्वारा 6 प्रतिष्ठानों को छूट देने की सिफारिश के प्रस्ताव पर भी विचार किया है। बोर्ड ने  ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 की धारा 17(2) के साथ पठित ईपीएफ योजना 1952 के पैरा 27ए के तहत उचित शासन द्वारा मैसर्स सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया को छूट देने की सिफारिश के प्रस्ताव पर भी विचार किया है।

पीएफ में बचत राशि की जानकारी मिस्‍ड कॉल एवं SMS से ऐसे पाए


यूनिवर्सल एकाउंट नम्‍बर (यूएएन) पोर्टल पर पंजीकृत सदस्‍य ईपीएफओ में उपलब्‍ध विवरण की जानकारी अपने पंजीकृत मोबाइल नम्‍बर से 011-22901406 पर मिस्‍ड कॉल देकर प्राप्‍त कर सकते हैं। यदि सदस्‍य का यूएएन किसी भी एक बैंक खाते, आधार और पैन से जुड़ा हुआ है तो सदस्‍य को अंतिम योगदान और भविष्‍य निधि बचत का विवरण मिल सकता है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए यूनिफाइड पोर्टल का यूएएन सक्रिय होना चाहिए। 

011-22901406 पर पंजीकृत मोबाइल नम्‍बर से मिस्‍ड कॉल देने पर दो घंटियां बजने के बाद फोन स्‍वत: कट जाएगा। सदस्‍य के लिए यह सेवा मुफ्त उपलब्‍ध है। इसके अलावा इन सेवाओं का लाभ गैर स्‍मार्ट फोनों से भी उठाया जा सकता है।

भविष्‍य निधि बचत और अंतिम भुगतान की जानकारी के लिए मिस्‍ड कॉल और एसएमएस सेवा से जानकारी प्राप्‍त करने की सुविधा उमंग ऐप पर भी उपलब्‍ध है।

यूएएन सक्रिय सदस्‍य अपने पंजीकृत मोबाइल नम्‍बर से 7738299899 पर एसएमएस भेजकर ईपीएफओ के पास उपलब्‍ध बचत और नवीनतम पीएफ योगदान की जानकारी ले सकते हैं। सदस्‍य को ‘ईपीएफओएचओ यूएएन’ लिखकर 7738299899 पर एसएमएस भेजना होगा। यह सुविधा 10 भाषाओं यानि अंग्रेजी, हिन्‍दी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, कन्‍नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम और बांग्‍ला में उपलब्‍ध है। अंग्रेजी को छोड़कर किसी भी भाषा एसएमएस प्राप्‍त करने के लिए चुनी गई भाषा के पहले तीन शब्‍द यूएएन के बाद डालने होंगे। उदाहरण के लिए तेलुगु में एसएमएस प्राप्‍त करने के लिए एसएमएस ‘ईपीएफओएचओ यूएएन टीइएल’ लिखकर 7738299899 पर भेजना होगा।

यूएएन के पंजीकृत मोबाइल नम्‍बर से एसएमएस भेजना होगा। बदले में ईपीएफओ भविष्‍य निधि के अंतिम योगदान और उपलब्‍ध केवाईसी सूचना के साथ सदस्‍य की बचत का विवरण भेजेगा।

अब कांट्रेक्ट लेबर को भी मिल सकेगा ईपीएफ का लाभ


ईपीएफओ सरकारी विभागों में ठेका श्रमिकों को कवर करने के लिए कदम उठाता है 

जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 जनवरी, 2017 कर दिया गया है 

केंद्रीय न्यासी बोर्ड की एक उप-समिति, ईपीएफ की 7 नवंबर, 2016 को बैठक हुई। समिति को पता चला कि ठेका श्रमिकों की कवरेज 89.25 लाख से बढ़कर 1.02 करोड़ हो गई है। देश में बड़ी संख्या में ठेका श्रमिक अभी भी पीएफ लाभ से वंचित है। इसका कारण यह है कि केन्द्र सरकार के अनेक विभाग/संगठन ईपीएफ और एमपी एक्‍ट, 1952 के दायरे में नहीं आते। सभी कामगारों के मूल अधिकार के रूप में सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे सहित ऐसी सभी श्रेणियों को बाहर रखे जाने के कार्य को रद्द करने के लिए भारत सरकार से सिफारिश करने का निर्णय लिया गया। 

समिति ने यह भी कहा कि ठेका मजदूरों के खातों का हस्‍तांतरण अब यूनिवर्सल खाता संख्या (यूएएन) के माध्‍यम से संभव है। इसलिए ठेका श्रमिकों को आधार यूएएन का पूरा उपयोग करने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाए। समिति ने सरकार से यह भी सिफारिश की है कि ईपीएफओ के अधीन मौजूदा वेतन सीमा को 15,000 रूपये प्रति माह से बढ़ाकर 25,000/- रूपये प्रति माह कर दी जाए।

अपर केन्द्रीय भविष्‍य निधि आयुक्‍तों की बैठक की जोनल समीक्षा 26 नवंबर 2016 को हुई, जिसमें सभी संभागों के अपर केन्द्रीय भविष्‍य निधि आयुक्‍तों को यह सलाह दी गई कि सभी ठेका श्रमिकों की कवरेज सुनिश्चित करने के लिए राज्‍य सरकारों से सम्‍पर्क करें, ताकि राज्‍यों के सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, राज्‍य निगमों, राज्‍य सरकार के विभागों और राज्‍यों के सार्वजनिक निर्माण विभागों से यह कार्य करने के लिए कहा जा सके। कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत पेंशन धारकों द्वारा जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की आखिरी तिथि बढ़ाकर 15 जनवरी, 2017 कर दी गई है। ईपीएफओ के लगभग 54 लाख पेंशनधारक है। 

कार्यकारी समिति, सीबीटी, ईपीएफ 24 नवंबर 2016 का पुनर्गठन किया गया था। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव इस कार्यकारी समिति के अध्यक्ष हैं। सीबीटी, ईपीएफ की कार्यकारी समिति की 87वीं बैठक, 12 दिसंबर, 2016 को आयोजित करने का कार्यक्रम है।

ईपीएफओ ने माह के दौरान 18,501 शिकायतों का निपटारा किया और 3153 मामले लंबित है। लंबित शिकायतों में से 82 प्रतिशत केवल 07 दिन पहले ही प्राप्‍त हुई हैं। 

#EPFO #ESIC : मृत्‍यु दावों का निपटान 7 दिनों में और सेवानिवृत्ति दावों का उसी दिन


मृत्‍यु दावों का निपटान 7 दिनों के भीतर और सेवानिवृत्ति दावों का निपटान अवकाश प्राप्ति के दिन ही कर दिया जाएगा 

वैधानिक योगदान का भुगतान अब से केवल इंटरनेट बैंकिंग के जरिए ही होगा 

भारत के प्रधानमंत्री ने 26 अक्‍टूबर को ‘प्रगति’ समीक्षा बैठक के दौरान यह इच्‍छा व्‍यक्‍त की थी कि मृत्‍यु मामलों से जुड़े दावों को प्राथमिकता देते हुए इनके निपटान में तेजी लाई जाए, जबकि सेवानिवृत्ति दावों का निपटान अवकाश प्राप्ति के दिन ही कर दिया जाए। तदनुसार, संबंधित प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई है और क्षेत्रीय कार्यालयों को मृत्‍यु दावों का निपटान संबंधित प्रस्‍ताव की प्राप्ति की तारीख के बाद 7 दिनों के भीतर और सेवानिवृत्ति दावों का निपटान अवकाश प्राप्ति के दिन ही करने का निर्देश दिया गया है। 

क्षेत्रीय कार्यालयों के सुविधा केंद्रों में कार्यरत पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे दावों की जांच-पड़ताल करें और दावा करने वाले व्‍यक्तियों का मार्गदर्शन करें, ताकि वे संबंधित दस्‍तावेजों को सही ढंग से पेश कर सकें। दावों की इस श्रेणी के लिए ईपीएफओ के सुविधा केंद्रों में एक पदाधिकारी को तैनात किया गया है। 

नियोक्‍तागण आजकल ईपीएफ की वैधानिक बकाया रकम जमा करने के लिए इंटरनेट बैंकिंग का व्‍यापक इस्‍तेमाल कर रहे हैं, क्‍योंकि ईपीएफओ ने ईपीएफ की बकाया रकम की प्राप्ति के लिए इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग अनिवार्य कर दिया है। अक्‍टूबर 2016 में 96.03 प्रतिशत योगदान ऑनलाइन ही प्राप्‍त हुए थे। 

भारत और जापान के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौता अक्‍टूबर से होगा प्रभावी


भारत और जापान के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौता 1 अक्‍टूबर 2016 से प्रभावी होगा। इस अतिरिक्‍त सामाजिक सुरक्षा समझौता के प्रभावी हाने के साथ ही सामाजिक सुरक्षा समझौतों की संख्‍या 16 हो जाएगी। विदेश मंत्रालय के साथ कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन (ईपीएफओ), जो कि सामाजिक सुरक्षा समझौतों के लिए बातचीत और समापन का सक्षम प्राधिकरण भी है, ने समझौते को प्रभाव में लाने के लिए औपचारिकताएं पूरी कर ली है। भारत और जापान के बीच 16 नवंबर, 2012 को टोकियो में सामाजिक सुरक्षा समझौता हुआ था। 

अन्‍य देशों के साथ सामाजिक सुरक्षा समझौता, विदेशों में काम कर रहे भारतीय पेशवरों और कुशल श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए किया जाता है। भारत सरकार ने अब तक 19 देशों से सामाजिक सुरक्षा समझौता किया है जिसमें 15 देशों के साथ यह प्रभाव में है। 

1 अक्‍टूबर, 2016 से भारत और जापान के बीच व्‍यापक सामाजिक सुरक्षा समझौता के प्रभाव में आने के साथ ही मुनाफे पर इसका सकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, लागत कम होने से विदेशों में कारोबार करने वाली भारतीय और जापानी कंपनियों की प्रतिस्‍पर्धात्‍मक स्थिति भी बदलेगी। इस समझौते से भारत में काम कर रहे जापानी और जापान में काम कर रहे भारतीय लोगों को लाभ होगा। यह समझौता जापानी कंपनियों को भारत को निर्माण में निवेश स्‍थल के रूप में विचार करने हेतु भी मदद करेगा। इसके अलावा, 27-28 जुलाई, 2016 को हैदाराबाद में ब्रिक्‍स सेकेन्‍ड इम्‍पलॉयमेंट वर्किंग ग्रुप की बैठक होगी। इस मंच की योजना ब्रिक्‍स के सदस्‍य देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा समझौता प्रवेश कराने हेतु आवश्‍यक कदम उठाने के लिए एक संकल्‍प पास करने के लिए प्रोत्‍साहित करना है क्‍योंकि ब्रिक्‍स देशों ने अन्‍य देशों से व्‍यक्तिगत रूप से सामाजिक सुरक्षा समझौता पहले से कर रखा है। ब्रिक्‍स देशों के बीच कुछ सालों में व्‍यापार संबंध बढ़ा है और इन देशों के महत्‍वपूर्ण उद्योग और प्रतिष्‍ठान निवेश कर रहे हैं। 

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