बीजेपी मुसलमानों को हथियारों की ओर ढकेल रही है - यासीन मलिक

जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट ( जेकेएलएफ ) के मुखिया यासीन मलिक ने अपनी अजमेर यात्रा के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध पर मुखर होते हुए कहा कि दक्षिणपंथी पार्टी मुसलमानों को हथियार उठाने के लिए मजबूर कर रही है।

मलिक ने देश में मुस्लिम दरगाहों और मस्जिदों में विस्फोटों के बारे में जानकारी देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी मुसलमानों को हथियारों की ओर ढकेल रही है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी नेतृत्व और लोगों को राज्य के बाहर परेशान करके बीजेपी राज्य के युवाओं को हथियार उठाने को मजबूर कर रही है। उन्होंने बीजेपी की आलोचना करते हुए कहा कि वह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप को आग में चाहती है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह यासीन मलिक की अजमेर यात्रा के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनके होटेल के बाहर मलिक का पुतला फूंकने के साथ ही उन्हें काले झंडे भी दिखाए। जब मलिक होटल की बालकनी में आए तो उनकी ओर एक चप्पल भी उछाली गई। हालांकि, वह उन्हें लगी नहीं थी।

यासीन मलिक ने तिरंगा लेने से किया इनकार, भाजपा ने जूते मारे

जम्मू-कश्मीर के देशद्रोही और अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने शुक्रवार शाम तिरंगा लेने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह झंडा उनके देश का नहीं है। मलिक शुक्रवार शाम ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर पहुंचे थे, जहां खादिम और कांग्रेस के अभाव अभियोग प्रकोष्ठ के जिला महासचिव सैयद नातिक ने उन्हें फूलों के साथ तिरंगा भी भेंट करना चाहा था।

मलिक के जवाब से वहां मौजूद खादिम सकते में आ गए। इससे पहले दोपहर में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने मलिक के खिलाफ प्रदर्शन किया और होटल में उनकी ओर जूते-चप्पल उछाले। कार्यकर्ताओं ने पुतला फूंक कर प्रदर्शन भी किया। इस घटना से प्रशासन में खलबली मच गई। पुलिस ने होटल की सुरक्षा बढ़ा दी है। जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट के एक धड़े के अध्यक्ष यासीन मलिक अपनी पाकिस्तानी बेगम मुशाला के साथ बुधवार से अजमेर में हैं।

भाजयुमो कार्यकर्ता नया बाजार से जुलूस के रूप में धानमंडी स्थित होटल रॉयल पैलेस पहुंचे। इसी होटल में यासीन अपने पत्नी के साथ रुके हुए हैं। कार्यकर्ताओं ने होटल में घुसने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया। इस बीच बॉलकनी में आए यासीन को देखकर कार्यकर्ताओं ने यासीन मलिक वापस जाओ, अलगाववादी नहीं चलेगा-नहीं चलेगा, नारे लगाए और उनकी ओर चप्पल-जूते उछाले। पुलिस ने भाजपा नेताओं को समझाइश के बाद होटल के बाहर से हटा दिया।

प्यास लगी है तो पेशाब पी लो - जम्मू कश्मीर पुलिस

अलगाववादी नेता यासिन मलिक जब लाल चौक पर काले झंडे फहरा रहे थे तो जम्मू कश्मीर पुलिस चाय और सिगरेट से उनकी आवभगत में जुटी थी परंतु जब राष्ट्रवादी कार्यकर्ता 'एकता यात्रा' को लेकर तिरंगा लहराने पहुंचे तो उन्हें पानी तक नहीं दिया गया।
यही नहीं पुलिस ने उन्हें यह तक कह दिया कि प्यास लगी है तो पेशाब पी लो यह कहना है एकता यात्रा से लौटे भाजयुमो कार्यकर्ताओं का।

राजधानी में लौटे दर्जनों घायल कार्यकर्ताओं के चेहरे पर तिरंगा फहराने के लिए ऐसे व्यवहार की पीड़ा साफ देखी जा सकती थी। यह वे कार्यकर्ता थे जो युवा मोर्चा अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के बाद छोटे-छोटे गुटों में 26 जनवरी को लालचौक पहुंचे और उनके साथ जम्मूकश्मीर पुलिस द्वारा जानवरों जैसा व्यवहार किया गया।

इन्हीं में एक कार्यकर्ता गुडग़ांव के इंजीनियर के. के. उपाध्याय थे जिन्होंने सबसे पहले तिरंगा फहराने की कोशिश की परंतु पुलिस ने न सिर्फ उनके साथ मारपीट की बल्कि तिरंगा तक फाड दिया। दूसरे गुट की भी कमोबेश यहीं स्थिति हुई और इनमें से अधिकांश के हाथ-पैरों में फे्रेक्चर हो गए। गिरफ्तार भाजपा कार्यकर्ताओं का यह भी कहना था कि अलगाववादियों की तरह ही जम्मूकश्मीर पुलिस ने भी भारतीय कुत्तों वापस जाओ के पोस्टर थामे हुए थे।

भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने बताया कि कार्यकर्ताओं के प्रति जम्मूकश्मीर पुलिस का रवैया आतंकियों से भी बदतर था। कार्यकर्ताओं को थर्ड डिग्री की यातनाएं दी गई और जमा देने वाली ठंड में उनके कपड़े फाड दिए गए।

यासिन मलिक की चुनौती की बावजूद, कश्‍मीर में तिरंगा फहराने पर अड़ी भाजपा

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से पहले जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अलगाववादी जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख मोहम्मद यासिन मलिक ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा है कि उसे श्रीनगर के लाल चौक पर झंडा नहीं फहराने दिया जाएगा। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने पिछले दिनों जम्मू में हुई रैली के दौरान 26 जनवरी को श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहराने का ऐलान किया था।

मलिक की चुनौती के बाद पार्टी झंडा फहराने पर अड़ गई है, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चेतावनी दी है कि बीजेपी के इस कदम के परिणाम की जिम्‍मेदार भी वह खुद होगी। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी झंडा फहराती है तो घाटी में एक बार फिर आग लग जाएगी। लंबी अशांति के बाद फिलहाल घाटी शांत है। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी के लाल चौक पर झंडा फहराने के बाद घाटी में अशांति फैलती है तो इसके लिए वे ही जिम्मेदार होंगे।

उन्होंने कहा कि श्रीनगर में सरकारी कार्यक्रम में झंडा फहराया जाएगा फिर अलग से तिरंगा फहराने की क्या जरुरत है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों, सेना और पुलिस के दफ्तरों पर ध्वजारोहण होगा, फिर बीजेपी अलग से क्यों कार्यक्रम करना चाहती है। क्या वे हमसे ज्यादा देशभक्त हैं?

भाजपा के इसी ऐलान को यासिन मलिक ने चुनौती दी है। मलिक ने कहा कि मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि यहां आकर झंडा फहराकर दिखाएं। नहीं तो हम बताएंगे कि झंडा कैसे फहराया जाता है। उन्होंने कहा कि भाजपा को लाल चौक में झंडा फहराने की बजाए कश्मीर मसले का हल ढूंढने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यासिन मलिक हुर्रियत कांफ्रेंस की 61वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक सेमिनार में बोल रहे थे।

सेमिनार में उपद्रव के दौरान हुई मौत की एफआईआर दर्ज करने को लेकर अलगाववादी नेताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की बात पर भी जोर दिया।
संयुक्त राष्ट्र से अपेक्षा बेकार : मीरवाइज

संयुक्त राष्ट्र को असफल करार देते हुए हुर्रियत नेता मीरवाइज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र कश्मीर में अपने ही नियम लागू नहीं कर पाया है। अत: संयुक्त राष्ट्र से ज्यादा अपेक्षा रखना व्यर्थ है। मीरवाइज ने इस बात पर जोर दिया की कश्मीर के हल हेतु भारत-पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में कश्मीरियों से बात करनी चाहिए। इसी बीच अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराने का आग्रह किया है।

1990 में हुई तिरंगा फहराने की शुरुआत

१९८९ में कश्मीर में आतंकवाद शुरू होने के बाद लालचौक में तिरंगा फहराने की शुरूआत २६ जनवरी १९९क् को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने की थी। उसके बाद २६ जनवरी १९९२ को भाजपा अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने लालचौक पर तिरंगा फहराया था

अलगाववादियों से मिलना उचित नहीं था - सुषमा स्वराज

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों की कश्मीर के अलगाववादी नेताओं से मुलाकात पर अपनी आपत्ति जताते हुए भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने आज कहा कि अलगाववादियों से मुलाकात दल के कार्यक्रम में शामिल नहीं थी और ही यह सामूहिक फैसला था।

सुषमा ने कहा ‘‘यह उनका स्वयं का फैसला था, पूरे प्रतिनिधिमंडल का नहीं। अगर कोई जाना चाहता था, तो हम उन्हें कैसे रोक सकते थे? वे लोग गए, पर हमारा फैसला वहां नहीं जाने का था, इसलिए हम नहीं गए।’’ सुषमा से संवाददाताओं ने पूछा था कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों ने अलगाववादी नेताओं से बातचीत की और कुछ नेता कल उनके घर जाकर उनसे मिले, इस बारे में उनकी क्या प्रतिक्रिया है।

प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्यों ने हुर्रियत के कट्टरपंथी और उदारवादी धड़े के प्रमुखों सय्यद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारुक से उनके घरों पर और जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक से उनके कार्यालय में मुलाकात की थी।

सुषमा ने कहा कि अलगाववादियों से मिलने के मुद्दे पर प्रतिनिधिमंडल में विभाजन का कोई प्रश्न नहीं था।

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेंगे अलगाववादी

घाटी में तीन महीने से चल रही अशांति को खत्म करने के रास्ते तलाशने के लिए गृहमंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल आज यहां बैठकें कर रहा है।

अलगाववादियों ने इन बैठकों से खुद को दूर कर लिया है। वहीं पीडीपी की ओर से भी पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलने वाली हैं।

प्रदेश के वास्तविक हालाता का आकलन करने के लिए 42 सदस्यीय दल यहां पहुंचा, जिसकी अगवानी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने की। राजधानी में आज भी कफ्र्यू लगा हुआ है।

पीडीपी की ओर से प्रतिनिधिमंडल से पार्टी के महासचिव मोहम्मद दिलावर मीर अपने 14 सदस्यों के साथ मुलाकात करेंगे। इस बैठक में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती शामिल नहीं होंगी।

दूसरी ओर जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक ने बताया कि मीरवाइज उमर फारुक के नेतृत्व वाला हुर्रियत कांफ्रेंस का उदारवादी धड़ा और जेकेएलएफ भी प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेगा और दल को सिर्फ एक ज्ञापन सौंपेगा।

मलिक ने कहा ‘‘यह एक रचनात्मक ज्ञापन है। आशा है कि इसे सही तरीके से लिया जाएगा और प्रतिनिधिमंडल लोगों की नब्ज को समझ सकेगा।’’

बातचीत करके समय बर्बाद न करे मनमोहन : मीरवाइज

अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि किसी रोजगार पैकेज से कश्मीर का मसला सुलझ जाएगा। मीरवाइज ने कहा कि यह कोई बेरोजगारी की समस्या नहीं है, बल्कि एक अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा है।

जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस के नरमपंथी धड़े के प्रमुख मीरवाइज ने बोला कि "मनमोहन सिंह को यह नहीं समझना चाहिए कि किसी रोजगार पैकेज की घोषणा कर देने से कश्मीर की समस्या सुलझ जाएगी। यह कोई बेरोजगारी की समस्या नहीं है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा है।"

मीरवाइज ने कहा कि भारत सरकार को समस्या के समाधान के प्रति गंभीरता दिखानी चाहिए और बातचीत के बहाने समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।

बुधवार को कश्मीर पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक पर चर्चा करते हुए मीरवाइज ने कहा, "भारतीय नेताओं को कश्मीर की वास्तविकता को ईमानदारी के साथ स्वीकार करनी चाहिए और इसे एक अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा मानना चाहिए। उन्हें चिकनी-चुपड़ी घोषणाओं, पैकेज और प्रतीकात्मक सहानुभूति की योजना नहीं बनानी चाहिए।"

हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख सैयद अली गिलानी और जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के प्रमुख यासीन मलिक से सहमति जताते हुए मीरवाइज ने कहा, "कश्मीर के ताजा हालात पर और उसके समाधान के बुनियादी दृष्टिकोण को लेकर हम सभी, यानी मैं, गिलानी साहेब और मलिक का एक संयुक्त दृष्टिकोण है।"

मीरवाइज ने कहा, "81 वर्षीय गिलानी से लेकर पथराव करने वाले किशोर तक, कश्मीर की चार पीढ़ियां 63 वर्ष पुराने इस मुद्दे के समाधान के लिए उत्सुक हैं।"

श्रीनगर में ईद की नमाज के बाद मीरवाइज उमर फारुख ने कराया हिंसक प्रदर्शन

जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में शनिवार कोईद-उल-फितर की नमाज के बाद जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।अलगाववादियों ने जहां लाल चौक तक जुलूस निकाला वहीं भीड़ ने पुलिस कीबैरक और राज्य बिजली बोर्ड की इमारत को आग लगा दी।

हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी गुट के प्रमुख मीरवाइज उमर फारुख ने ईदगाह मैदान में ईद की नमाज के बाद शहर के लाल चौक तक एक विशाल जुलूस कीअगुवाई की। इससे पहले यह कार्यक्रम था कि नमाज अदा करने के बाद सभी लोग शांतिपूर्वक वहां से चले जाएंगेऔर त्योहार की खुशियां मनाएंगे।

हजारों लोगों से सादगीपूर्वक ईद मनाने का अनुरोध करते हुए मीरवाइज ने कहा, आजादी हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और कश्मीर की युवा पीढ़ी ने तयकिया है कि वह इसे किसी भी कीमत पर हासिल करके रहेगी। मीरवाइज ने कहा कि भारत को स्वीकार करना ही होगा कि एक कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय विवादहै।

उसने कहा, ‘कश्मीर के मसले के अर्थपूर्ण समाधान के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के वास्ते विसैन्यीकरण, राजनीतिज्ञों और युवकों की रिहाई, कठोर कानून हटाने और आजादी चाहने वालों के खिलाफ मुकदमे वापस लिए जाने चाहिए।

मीरवाइज ने कहा कि कश्मीर में अलगाववादी आंदोलन के इतिहास के इस अहम मोड़ पर अलगाववादी नेताओं के बीच एकता महत्वपूर्ण है। उनके साथ जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के अध्यक्ष मोहम्मद यासीन मलिक भी था एक खुफिया अधिकारी ने बताया, ‘शहर के लाल चौक तक जुलूस निकालने का मीरवाइज का फैसला यकीनन राष्ट्रविरोधी भावनाएं भड़काने वाला है।

लाल चौक से लौट रही भारी भीड़ ने राज्य बिजली विभाग के एक कार्यालय की इमारत को आग लगा दी। लाल चौक में मोटर साइकिल पर सवार सैकड़ों युवकों ने आजादी की मांग के समर्थन में नारेबाजी की। लाल चौक के क्लॉक टॉवर पर नारेबाजी कर रहे युवकों ने हरे झंडे फहराए।

इससे पहले हजरतबल में ईद की नमाज के बाद बड़ी संख्या में जमा लोगों ने वहां तैनात स्थानीय पुलिसकर्मियों की बैरके फूंक डालीं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि लोगों को तितर-बितर करने के लिए हवा में गोलियां चलाईगईं। इस गोलीबारी में किसी के घायल होने का समाचार नहीं है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मी विभिन्न संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं और भीड़ द्वारा उकसावे वाले नारे लगाए जाने के बावजूद श्रीनगर में कहीं भी सुरक्षाबलों ने बल प्रयोग नहीं किया।

अधिकारी ने बताया, ‘हालात तनावपूर्ण हैं और स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों को संयम बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि असामाजिक तत्वों के हिंसा भड़काने के नापाक इरादे पूरे होनेपाएं।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर के गुपकार में अपने निवास के समीप एक मस्जिद में ईद की नमाज अदा की।लोगों को ईद की नमाज अदा करने और खुशियां मनाने का अवसर देने के लिए प्रशासन ने घाटी के किसी भी हिस्सेमें कर्फ्यू या प्रतिबंध नहीं लगाए।

घाटी के अन्य मुख्य शहरों से मिली जानकारी के अनुसार लोगों ने ईद की नमाज के बाद भारत विरोधी रैलियांनिकालीं और आजादी की मांग के समर्थन में नारेबाजी की।

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