अटल योजनाओं को 6 राज्‍यों के 13 नगरों में 495 करोड़ रुपए मंजूर


अटल मिशन योजनाओं को 6 राज्‍यों के 13 नगरों में 495 करोड़ रुपए के परिव्‍यय के साथ 2015-16 के लिए मंजूरी मिली 

केंद्र सरकार 425 करोड़ रुपए की सहायता मुहैया कराएगी 

असम मूलभूत बुनियादी ढांचे में 186 करोड़ रुपए ; जम्‍मू-कश्‍मीर 171 करोड़ रुपए, गोवा 59 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 37 करोड़ रुपए, मेघालय 23 करोड़ रुपए, पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए निवेश करेगा 

अभी तक 483 नगरों के लिए मूलभूत बुनियादी ढांचे में 20,491 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी मिली 

त्रिपुरा ने शहरी क्षेत्रों में स्‍वच्‍छ भारत अभियान को क्रियान्‍वित करने पर सहमति जताई 

असम को शौचालयों के निर्माण में तेजी लाने को कहा गया 

शहरी विकास मंत्रालय ने आज 2015-16 के लिए अटल कायाकल्‍प एवं शहरी रूपांतरण कार्य योजना मिशन (अमृत) के तहत 6 राज्‍यों के 13 नगरों में जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क एवं सेप्टेज प्रबंधन, तूफान जल निकासी, शहरी परिवहन एवं हरित स्थलों के प्रावधान के लिए 495.11 करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी दे दी। शहरी विकास सचिव श्री मधुसूदन प्रसाद की अध्‍यक्षता में एक अंत: मंत्रीस्तरीय शीर्ष कमेटी में गुवाहाटी, जम्‍मू, श्रीनगर, पणजी, शिलौंग, अगरतल्‍ला और पुदुचेरी समेत 13 नगरों की निवेश योजनाओं को मंजूरी दे दी है। 

495.11 करोड़ रुपए की कुल परियोजना लागत में से केंद्र सरकार 425 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान करेगी। 

राज्‍यवार मंजूरी प्राप्‍त निवेश इस प्रकार हैं: असम 186.27 करोड़ रुपए, जम्‍मू-कश्‍मीर 171 करोड़ रुपए, गोवा 59.44 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 36.62 करोड़ रुपए, मेघालय 22.81 करोड़ रुपए और पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए। 

केंद्र सरकार पूर्वोत्‍तर राज्‍यों एवं जम्मू-कश्‍मीर के संदर्भ में योजना लागतों का 90 प्रतिशत, पुदुचेरी के लिए 100 प्रतिशत एवं गोवा के लिए लागत का 50 प्रतिशत वहन करेगी। 

इसी के अनुरूप 2015-16 के लिए असम को 169.34 करोड़ रुपए, त्रिपुरा 32.96 करोड़ रुपए, मेघालय 20.53 करोड़ रुपए, जम्‍मू-कश्‍मीर 153.90 करोड़ रुपए, गोवा 29.72 करोड़ रुपए और पुदुचेरी 18.97 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी। 

अटल मिशन का लक्ष्‍य जलापूर्ति और सीवर कनेक्‍शनों, जलापूर्ति बढ़ाने, सीवरेज नेटवर्क सेवाओं तथा हरित स्‍थलों को बढ़ावा देने के अतिरिक्‍त तूफान जल निकासी के साथ 500 मिशन नगरों के सभी शहरी परिवारों में ये सुविधाएं सुनिश्‍चित करना है। 

मंजूरी प्राप्‍त कुल निवेशों में से 201.86 करोड़ रुपए जलापूर्ति बढ़ाने पर, 116.10 करोड़ रुपए सीवरेज नेटवर्क को विस्‍तारित करने एवं सेप्‍टेज प्रबंधन पर, 85 करोड़ रुपए गैर-मोटर परिवहन के साथ शहरी परिवहन को बढ़ाने पर, 77.37 करोड़ रुपए तूफान जल निकासी परियोजनाओं पर एवं 14.69 करोड़ रुपए हरेक स्‍थल मुहैया कराने पर खर्च किए जाएंगे। 

जम्‍मू एवं कश्‍मीर में जम्‍मू में 22.50 करोड़ रुपए, अनंतनाग 15.00 करोड़ रुपए एवं श्रीनगर में 13 करोड़ रुपए समेत सीवरेज एवं सेप्‍टेज प्रबंधन पर 50.50 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। श्रीनगर में 50 करोड़ रुपए, जम्‍मू में 22 करोड़ रुपए एवं अनंतनाग में 5.00 करोड़ रुपए समेत जल निकासी सुविधाएं प्रदान करने पर 77 करोड़ रुपए का व्‍यय किया जाएगा। श्रीनगर में 15 करोड़ रुपए, जम्‍मू में 13 करोड़ रुपए एवं लेह में 5 करोड़ रुपए के साथ शहरी परिवहन को बेहतर बनाया जाएगा। श्रीनगर, जम्‍मू, अनंतनाग एवं लेह में 5.50 करोड़ रुपए की लागत से हरित स्‍थलों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।

असम में नागोन में 51.79 करोड़ रुपए की लागत से, डिब्रूगढ में 46.51 करोड़ रुपए एवं सिलचर में 43.20 करोड़ रुपए की लागत से जलापूर्ति को बढ़ाया जाएगा। पहले निकासी परियोजनाओं पर राज्‍य सरकार द्वारा अन्‍य 40 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का प्रस्‍ताव था, इसे अब गुवाहाटी समेत चार मिशन नगरों में जलापूर्ति बढ़ाने एवं सीवरेज नेटवर्क पर खर्च किया जाएगा। इन तीन नगरों एवं गुवाहाटी में 4.73 करोड़ रुपए की लागत से हरित स्‍थलों का विकास किया जाएगा। 

मेघालय के शिलौंग में 22.22 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज एवं सेप्‍टेज परियोजना शुरू की जाएगी एवं 59 लाख की लागत से हरित स्‍थलों का विकास किया जाएगा। 

त्रिपुरा के अगरतल्‍ला में जलापूर्ति को बेहतर बनाने पर 32.50 करोड़ रुपए, शहरी परिवहन पर 2.12 करोड़ रुपए एवं हरित स्‍थलों को बेहतर बनाने पर 2.00 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। 

गोवा के पणजी में पेडेस्‍ट्रानाइजेशन ऑफ सिटी स्‍क्‍वायर, फुटपाथों, साइडवॉक्‍स एवं वॉकवेज जैसी शहरी परिवहन परियोजनाओं को 49.97 करोड़ रुपए एवं 7.38 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज एवं सेप्‍टेज प्रबंधन कार्य, 36 लाख रुपए प्रत्‍येक की लागत से जल निकासी एवं जलापूर्ति परियोजनाओं एवं हरित स्‍थलों के विकास पर 1.40 करोड रुपए खर्च किये जाएंगे। 

पुद्दुचेरी में जलापूर्ति को 5.76 करोड रुपये की लागत से एवं ओलगरेट 6.7 करोड रुपये की लागत से बेहतर बनाया जाएगा। ये दोनों शहरी स्थानीय निकाय सीवरेज परियोजनाओं पर 3 – 3 करोड रुपये खर्च करेंगे। इन शहरी क्षेत्रों में हरित स्थल मुहैया कराने पर 47 लाख रुपये की राशि खर्च की जाएगी। 

त्रिपुरा सरकार ने आखिरकार राज्य में शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ भारत अभियान को क्रियान्वित करने पर सहमति जता दी है। यह सूचना राज्य सरकार के प्रमुख सचिव श्री संजय राकेश ने शहरी विकास मंत्रालय को प्रेषित कर दी है। राज्य सरकार का मानना था कि केंद्र सरकार द्वारा प्रति शौचालय 4 हजार रुपये की मुहैया करायी जा रही केंद्रीय सहायता पर्याप्त नहीं है। श्री राकेश ने आज जानकारी दी कि राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में एकल परिवार शौचालयों के निर्माण के लिए 12 हजार रुपये प्रत्येक की सहायता देने का फैसला किया है। 

शीर्ष समिति ने आज असम में शौचालयों के निर्माण में धीमी प्रगति पर चिंता जताई और राज्य सरकार से इसमें तेजी लाने का आग्रह किया। 

इन मंजूरियों के साथ, शहरी विकास मंत्रालय ने अभी तक 20,491 करोड़ रुपए के निवेश से 26 राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 483 मिशन नगरों में पानी के नल के प्रावधान समेत जलापूर्ति बढ़ाने, एकल परिवारों में सीवर कनेक्शन के प्रावधान समेत सीवरेज नेटवर्क सेवाओं को विस्तारित करने, तूफान जल निकासी, शहरी परिवहन एवं हरित स्थलों के विकास के लिए 2015-16 के लिए अटल मिशन कार्य योजनाओं को मंजूरी दे दी है।

अटल मिशन के अंतर्गत 13 राज्यों को 1,062 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता मिली



तमिलनाडु को 274 करोड़ रुपये , मध्य प्रदेश को 134 करोड़ रुपये, गुजरात को 113 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल को 110 करोड़ रुपये , राजस्थान को 92 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 60 करोड़ रुपये मिले ....

शहरी विकास मंत्रालय ने अटल मिशन के अंतर्गत वित्त वर्ष 2015-16 के लिए कायाकल्प और शहरी परिवर्तन (अमृत) के लिए 13 राज्यों को 1.062.27 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है।

यह 13 राज्यों को घोषित 5,311.38 करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता का हिस्सा है। मंत्रालय ने 2015-16 के लिए अटल मिशन कार्य योजना को स्वीकृति दी है । इसके अंतर्गत 13 राज्यों के 286 शहरों में 11,671.76 करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे। मंत्रालय ने अभी तक 286 शहरों के लिए कुल 939 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं अधिकतर पानी सप्लाई तथा सीवर नेटवर्क सेवाओं से जुड़ी हैं।

अटल मिशन इस वर्ष जून में लांच किया गया था। इसका उद्देश्य प्राथमिकता के आधार पर प्रति दिन प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी की सप्लाइ करने के अतिरिक्त 500 मिशन शहरों में सभी घरों को पानी सप्लाई कनेक्शन और सीवर कनेक्शन देना है। इसके अंतर्गत बरसाती पानी के लिए नाली बनाने , गैर-मोटर परिवहन प्रणाली को प्रोत्साहित करने , पार्क तथा हरित क्षेत्र की व्यवस्था को समर्थन दिया जाता है।

अटल मिशन के अंतर्गत वस्तुपरक मानक के आधार पर केंद्रीय सहायता दी जाती है। इसमें प्रत्येक राज्य की कुल शहरी आबादी और वैधानिक शहरी निकायों की संख्या को समान महत्व दिया जाता है। मिशन के अंतर्गत 5 वर्षों के लिए 50,000 करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय सहायता देने का प्रावधान है। केंद्रीय सहायता के रूप में 10 लाख से कमी आबादी वाले शहरों के लिए परियोजना लागत का 50 प्रतिशत और 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए लागत की एक तिहाई तक दिया जाता है।

स्वीकृत राज्य वार्षिक कार्य योजना(एसएएपी) तथा जारी पहली किस्त का ब्यौरा इस प्रकार हैः-
                                                        
(करोड़ रुपये)            
 क्रम संख्या
राज्य
स्वीकृत एसएएपी का आकार
जारी पहली किस्त
1
तमिलनाडु
3249.23
274.48
2
मध्य प्रदेश
1655.81
134.40
3
गुजरात
1204.42
112.86
4
पश्चिम बंगाल
1104.86
110.49
5
राजस्थान
  919.00
91.90
6
आंध्र प्रदेश
  662.86
60.08
7
केरल
  587.99
 57.60
8
छत्तीसगढ़
 573.40
  55.29
9
ओडिशा
  461.30
 45.63
11
हरियाणा
  458.02
 43.80
11
तेलंगाना
  408.51
  40.85
12
झारखंड
 313.36
27.59
13
मिजोरम
  73.00
 7.30

आंध्र प्रदेश, गुजरात व राजस्थान के 89 नगरों के लिए अटल मिशन को मंजूरी


शहरी विकास मंत्रालय ने आंध्र प्रदेश, गुजरात एवं राजस्थान के 89 नगरों के लिए 2,786 करोड़ रुपये के बराबर की अमृत परियोजनाओं के पहले समूह को मंजूरी दी 

पर्याप्त जल आपूर्ति एवं सीवरेज नेटवर्क सुनिश्चित करने पर फोकस

केन्द्र सरकार 1,356 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करेगी

सीवरेज परियोजनाओं के लिए 1,471 करोड़ रुपये तथा जल आपूर्ति योजनाओं के लिए 1,225 करोड़ रुपये

मंत्रालय ने राज्यों से सभी उपभोक्ताओं को पानी का मीटर सुनिश्चित करने को कहा

शहरी विकास मंत्रालय ने पुनरोद्धार एवं शहरी रूपांतरण के लिए अटल मिशन (अमृत) के तहत राज्य स्तरीय कार्य योजनाओं के पहले समूह को मंजूरी दे दी है। इनका उद्देश्य नियमों के अनुसार जल आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा सभी शहरी परिवारों को जलापूर्ति एवं सीवरेज कनेक्शन मुहैया कराना है। शहरी विकास सचिव श्री मधुसूदन प्रसाद की अध्यक्षता में अमृत की एक अंतः मंत्रीस्तरीय शीर्ष समिति ने कल आंध्र प्रदेश, गुजरात एवं राजस्थान राज्यों के 89 नगरों के लिए 2,786 करोड़ रुपये के बराबर की परियोजना को मंजूरी दी।

ऐसा पहली बार हुआ है कि शहरी विकास मंत्रालय ने राज्य स्तरीय योजनाओँ को मंजूरी दी है। इससे पहले अभी तक एकल परियोजनाओं का मूल्यांकन करने तथा उन्हें मंजूरी देने का प्रचलन था।

मंजूरी प्राप्त कार्य योजनाओं की इन तीन राज्यों के 89 अमृत नगरों में कुल 143 परियोजनाएं हैं। इनमें 47 योजनाएं जलापूर्ति कनेक्शन सुनिश्चित करने और जल की आपूर्ति बढ़ाने से संबंधित हैं जबकि 31 परियोजनाएं चिन्हित नगरों एवं शहरों में सीवरेज नेटवर्क सेवाओं के विस्तार से संबंधित हैं। शेष परियोजनाएं आंधी जल निकासी, शहरी, परिवहन तथा हरित स्थलों एवं उद्यानों से संबंधित हैं।

सीवरेज परियोजनाओँ को सबसे अधिक 1471.07 करोड़ रूपये प्राप्त हुए जबकि जल आपूर्ति संबंधित योजनाओं के लिए 1225 करोड़ रूपये की मंजूरी दी गयी।

अमृत की शीर्ष समिति ने तीन राज्यों के लिए वित्त वर्ष 2015-16 के लिए राज्य वार्षिक कार्य योजनाओं (एसएएपी) को मंजूरी दी। गुजरात द्वारा प्रस्तावित एसएएपी में 1204.42 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता थी जबकि राजस्थान के लिए 909 करोड़ रुपये तथा आंध्र प्रदेश के लिए 662.86 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा गया।

मंजूरी प्राप्त एसएएपी के तहत गुजरात 916 करोड़ रुपये की लागत से 25 अमृत नगरों में सीवरेज परियोजनाएं शुरू करेगा तथा 233.65 करोड़ रुपये की लागत से 11 शहरों में जलापूर्ति योजनाएं प्रारंभ करेगा।

राजस्थान 555 करोड़ रुपये की लागत से 6 नगरों में सीवरेज योजनाएं शुरू करेगा तथा 344 करोड़ रुपये की लागत से 10 नगरों में जलापूर्ति परियोजनाएं प्रारंभ करेगा।

आंध्र प्रदेश 646.29 करोड़ रुपये की लागत से 26 नगरों में जलापूर्ति परियोजनाएं प्रारंभ करेगा तथा 16.57 करोड़ रुपये की लागत से 30 नगरों में हरित स्थलों एवं उद्यानों का प्रावधान करेगा।

अमृत के तहत केन्द्र सरकार 10 लाख प्रत्येक की आबादी वाले नगरों के लिए परियोजनाओं की लागत के 50 फीसदी की सहायता देगी और 10 लाख प्रत्येक से अधिक की आबादी वाले नगरों के लिए परियोजना लागत की एक तिहाई का व्यय वहन करेगी। परियोजना लागत की शेष राशि का भाग राज्यों एवं शहरी स्थानीय निकायों द्वारा वहन की जाएगी। इन नियमों के अनुसार तीन राज्यों में मंजूरी प्राप्त परियोजनाओं के लिए केन्द्रीय सहायता 1,356.23 करोड़ रुपये के बराबर की होगी।

शीर्ष समिति ने तीन घंटे तक चले विचार-विमर्शों एवं राज्यों द्वारा प्रस्तावित योजनाओँ की जांच करने के बाद इन तीनों राज्यों के एसएएपी को मंजूरी दी। प्रत्येक राज्य का एसएएपी संबंधित राज्यों में सभी अटल मिशन नगरों की सभी नगर स्तरीय सेवा स्तर बेहतरी योजनाओं (एसएलआईपी) का समेकन है।

नगर स्तरीय एसएलआईपी का निर्माण जलापूर्ति, सीवरेज नेटवर्क सेवाओं, तूफान जल निकासी, शहरी परिवहन आदि से संबंधित बुनियादी ढांचे की उपलब्धता में अंतरालों के विस्तृत आकलन के आधार पर किया जाता है।

शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 135 लीटर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना तथा सभी शहरी परिवारों को जलापूर्ति एवं सीवरेज कनेक्शन मुहैया कराना राष्ट्रीय प्राथमिकता है जिसे हासिल करना अटल मिशन का ध्येय है।

शहरी विकास सचिव श्री मधुसूदन प्रसाद ने सभी राज्यों से बिना शुल्क लिए (गैर-राजस्व जल) जल आपूर्ति के बेहतर प्रबंधन तथा जल आपूर्ति में कमी के लिए शहरी क्षेत्रों में सभी उपभोक्ताओँ के लिए पानी का मीटर सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। राज्यों से कहा गया है कि वे अगले वर्ष के बाद से इस पर ध्यान केन्द्रित करें।

अटल मिशन के तहत गुजरात के लिए 118.03 करोड़ रुपये, राजस्थान के लिए 91.90 करोड़ रुपये तथा आंध्र प्रदेश के लिए 66.29 करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता की पहली किस्त जल्दी ही जारी कर दी जाएगी।
राज्यों ने इनके लिए समयसीमा सहित 11 सुधारों के एक समूह के क्रियान्वयन पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण पेश किया। आंध्र प्रदेश, गुजरात और राजस्थान 22.23 करोड़ रुपये की लागत से शहरी स्थानीय निकायों के क्षमता निर्माण का काम भी शुरू करेंगे।

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