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'उदय’ योजना से जुड़ा बिहार, 9,000 करोड़ रुपये का होगा फायदा


भारत सरकार, बिहार राज्य और बिहार की डिस्कॉम कंपनियों (नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रब्यूशन कंपनी लिमिटेड और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रब्यूशन कंपनी लिमिटेड) ने डिस्कॉम्स के परिचालन और वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए आज यहां उदय-‘उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना’ के अंतर्गत समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता केंद्रीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री पीयूष गोयल की गरिमामयी मौजूदगी में हुआ। 

देश की वितरण कंपनियां कर्ज के भारी बोझ से जूझ रही हैं। 30 सितंबर, 2015 तक देश की डिस्कॉम्स पर कुल 4.3 लाख करोड़ रुपए का कर्ज था। इन कंपनियों को कर्ज के बोझ से राहत देने और इनके प्रदर्शन में सुधार करने के लिए भारत सरकार ने 20 नवंबर, 2015 को उदय योजना शुरू की थी। इससे पहले इससे संबंधित पक्षों मुख्य रूप से राज्य सरकारों, डिस्कॉम्स, ऋणदाताओं आदि के बीच लंबा विचार-विमर्श हुआ था। उदय का उद्देश्य टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय स्थायित्व और परिचालन क्षमताओं में सुधार के द्वारा कर्ज में डूबी वितरण कंपनियों के लिए एक स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। 

इस प्रकार बिहार राज्य के बिजली क्षेत्र के हालात में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उदय योजना को स्वीकार करने वाला छठा राज्य बन गया है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड पहले ही डिस्कॉम्स के परिचालन और वित्तीय सुधार के लिए उदय के अंतर्गत एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। समझौता ज्ञापन पर बिहार के हस्ताक्षर करने के साथ ही डिस्कॉम्स के लगभग 33 फीसदी कर्ज का पुनर्गठन कर दिया जाएगा, जो लगभग 1.40 लाख करोड़ रुपए है। गुजरात ने भी राज्य की डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति पर विचार करते हुए परिचालन में सुधार के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिए। 

बिहार सरकार ने उदय के अंतर्गत एमओयू पर हस्ताक्षर करके डिस्कॉम्स की वित्‍तीय सेहत में सुधार लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है और डिस्कॉम्स के कर्ज को अपने ऊपर लेने पर सहमति जाहिर की है। जैसा कि योजना में उल्‍लेख है बिहार सरकार डिस्कॉम के 2,332 करोड़ रुपए के कर्ज को अपने ऊपर लेगी, जो डिस्कॉम के 30.03.2015 तक के कुल 3,110 करोड़ रुपये के बकाया कर्ज का 75 फीसदी है। योजना में बाकी 778 करोड़ रुपए के कर्ज का पुनर्मूल्यांकन (री-प्राइस) या राज्य गारंटेड डिस्कॉम बॉन्ड के रूप में जारी करने की व्यवस्था है। ऐसा मौजूदा औसत ब्याज दर की तुलना में 3 फीसदी कम कूपन दर पर होगा। 

उदय में न सिर्फ डिस्कॉम की वित्तीय सेहत में सुधार पर जोर दिया गया है, बल्कि उनकी परिचालन क्षमताओं में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है। डिस्कॉम्स के टिकाऊ विकास के क्रम में बिहार राज्य और डिस्कॉम्स अनिवार्य फीडर और डिस्कॉम ट्रांसफार्मर मीटरिंग, उपभोक्ता इंडेक्सिंग और नुकसान की जीआईएस मैपिंग, ट्रांसफार्मर अपग्रेड करना या बदलाव, मीटर आदि बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटरिंग के माध्यम से परिचालन क्षमता में सुधार करेंगे। इससे बिजली की आपूर्ति की लागत और वास्तविक कीमत के अंतर को खत्म किया जाएगा, साथ ही पारेषण हानि और एटीएंडसी हानियों में भी कमी लाई जाएगी। एटीएंडसी हानियों और पारेषण हानियों में कमी से क्रमशः 15 प्रतिशत और 4 प्रतिशत अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है, जो लगभग 6,650 करोड़ रुपये के बराबर होगा। 

वित्तीय और परिचालन क्षमताओं में सुधार के साथ डिस्कॉम्स की रेटिंग में सुधार होगा, जिससे भविष्य की निवेश की जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता फंड जुटाने में मदद मिलेगी। इससे डिस्कॉम्स की ब्याज लागत के रूप में लगभग 80 करोड़ रुपए की बचत होने का अनुमान है। 

इसके साथ ही राज्य सरकार और डिस्कॉम्स द्वारा डिस्कॉम्स की परिचालन क्षमताओं में सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे, और बिजली की आपूर्ति की लागत में कमी आएगी, केंद्र सरकार भी राज्य में बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचे में सुधार और बिजली की लागत में कमी लाने के लिए डिस्कॉम्स और राज्य सरकार को रियायतें देगी। डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस, पावर सेक्टर डेवलपमेंट फंड या एमओपी और एमएनआरई की अन्य योजनाओं, जैसी केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से पहले ही राज्य में बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए कोष उपलब्ध कराया जा रहा है और अगर राज्य/डिस्कॉम्स योजना के लक्ष्यों को हासिल करने में कामयाब रहते हैं तो आगे इन योजनाओं के अंतर्गत अतिरिक्त धनराशि या प्राथमिकता वाला वित्‍तपोषण भी दिया जाएगा। राज्य को अधिसूचित कीमतों पर अतिरिक्त कोयला देकर और ज्यादा क्षमता के इस्तेमाल, एनटीपीसी और अन्य सीपीएसयू से सस्ती बिजली के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा। कोयले की अदला-बदली (स्वैपिंग), कोयले के सही इस्तेमाल, कोयला ग्रेड स्लिपेज में सुधार, धुले कोयले की 100 फीसदी उपलब्धता से बिजली की लागत में और कमी लाने में मदद मिलेगी। राज्य को कोयला सुधारों से लगभग 1,086 करोड़ रुपये का फायदा होगा। 

उदय में पीएटी (परफॉर्म, अचीव, ट्रेड) के माध्यम कम बिजली की खपत वाले एलईडी बल्बों, कृषि पंपों, पंखों और एयर कंडीशनरों और कुशल औद्योगिक उपकरणों की मांग बढ़ाई जाएगी, जिससे पीक लोड, फ्लैटन लोड कर्व घटाने में सहायता मिलने से बिहार में बिजली की खपत में कमी लाने में मदद मिलेगी। इससे लगभग 720 करोड़ रुपये का फायदा होने का अनुमान है। एमओयू पर हस्ताक्षर से आखिरकार बिहार की जनता को फायदा होगा। डिस्कॉम्स से बिजली की ज्यादा मांग का मतलब उत्पादन इकाइयों का ज्यादा पीएलएफ होगा और इस प्रकार प्रति यूनिट बिजली की लागत कम होगी, जिसका फायदा उपभोक्ताओं को होगा। डिस्कॉम्स एटीएंडसी हानियों में कमी के साथ क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बढ़ा सकेंगी। इस योजना से बिहार के लगभग 1,152 गांवों और 160.60 लाख परिवारों को बिजली उपलब्ध कराना आसान हो जाएगा, जो अभी तक बिजली से वंचित हैं। बिजली से वंचित गांवों या घरों को 24*7 बिजली की उपब्धता होने से अर्थव्यवस्था व उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार की संभावनाएं पैदा होंगी और बिहार भारत के अग्रणी औद्योगिक राज्य के तौर पर विकसित होगा। 

इस प्रकार उदय योजना में भागीदारी से राज्य को ब्याज लागत, एटीएंडसी और पारेषण हानियों में कमी, ऊर्जा कुशलता, कोयला सुधारों आदि से लगभग 9,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा। 

उदय डिस्कॉम्स की वित्तीय आत्‍मनिर्भरता और परिचालन सेहत में सुधार की दिशा में किया जा रहा प्रयास है, जिससे ये शत-प्रतिशत ग्रामीण बिजलीकरण और सभी को 24X7 बिजली उपलब्ध कराने के माध्‍यम से किफायती दरों पर पर्याप्‍त बिजली की आपूर्ति करने में सक्षम होगीं। 

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