आतंकवादी मसर्रत आलम गिरफ्तार, गिलानी नजरबन्द

"मेरी जान पाकिस्तान" का नारा लगाने वाले जम्मू-कश्मीर के अलगाववादियों के खिलाफ राज्य की पीडीपी-भाजपा सरकार ने सख्त कदम उठाया है। मसरत आलम को शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया गया। उसे श्रीनगर से बडग़ाम थाने ले जाया जाएगा। 

इससे पहले गुरुवार शाम को मसरत आलम और कट्टरपंथी हूर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी सहित पांच अलगाववादी नेताओं को नजरबंद किया गया था।

पुलिस ने इनके खिलाफ रणबीर आचार संहिता और गैरकानूनी गतिविधि निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। राज्य के मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद ने कहा था कि कानून अपना काम करेगा और देश के खिलाफ किसी भी तरह की हरकत स्वीकार नहीं की जाएगी।

उधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मुख्यमंत्री से इस संबंध में कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अलगाववादी नेता मसरत आलम ने बुधवार को श्रीनगर में रैली की थी। इसमें कुछ युवक पाकिस्तान का झंडा लिए हुए थे।

अलगाववादियों ने बुधवार को श्रीनगर में रैली की। इस रैली का नेतृत्व हूर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने किया। इसमें अलगाववादी नेता मसरत आलम ने पाकिस्तानी झंडा लहराया और पाकिस्तान मेरी जान के नारे लगाए। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर या शिकायत दर्ज की थी। इस रैली के बाद केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री सईद से फोन पर बात की थी और कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता है। जिस पर सईद ने कार्रवाई का भरोसा दिया था।

हूर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े ने अपने अध्यक्ष सैयद अली शाह गिलानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने का विरोध किया था। हूर्रियत कॉन्फ्रेंस के मजलिस ए शूरा ने कहा  था कि वह इसकी कड़ी निंदा करते हैं।

जम्मू-कश्मीर में किसी हिंदू का मुख्यमंत्री बनना नामुमकिन : पीडीपी

जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के एक और नेता विवादित बयान देकर विवादों में घिर गए हैं। पीडीपी नेता पीर मंसूर ने अपने एक बयान में कहा है कि जम्मू-कश्मीर में किसी भी हिंदू का मुख्यमंत्री बनना नामुमकिन है। 

उन्होंने कहा कि राज्य में कोई भी हिंदू मुख्यमंत्री इसलिए नहीं बन सकता क्योंकि कश्मीर मुस्लिम-बहुल इलाका है। मुस्लिम बहुल राज्य में भला हिंदू मुख्यमंत्री कैसे हो सकता है। उनके इस बयान की सियासी हलकों में आलोचना हो रही है।

यह पहली बार नहीं है जब कोई पीडीपी नेता विवादों में घिरा हैं। इससे पहले भी पीडीपी विधायक जावेद मुस्‍तफा मीर विवादों में घिरे क्योंकि उनपर चुनाव प्रचार के दौरान एके-47 बंदूक लेकर चलने का आरोप है। 

यह तस्वीर बाकायदा फेसबुक पर पोस्ट की गई थी जिसमें वह बड़े शान से बंदूक लेकर चलते हुए दिख रहे हैं। कई लोगों ने उनके इस तरह के व्यवहार पर आपत्ति जताई । जबकि विधायक ने कहा कि वह अपनी सुरक्षा के लिए बंदूक रखते हैं।

चुनाव बाद बीजेपी के साथ आ सकती है पीडीपी

विधानसभा के लिए होने जा रहे चुनावों से पहले जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी पीडीपी ने संकेत दिए हैं कि वह चुनाव के बाद बीजेपी के साथ आ सकती है। पार्टी चीफ मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि वह पहले भी बीजेपी के नेताओं के साथ काम कर चुके हैं और आगे भी कर सकते हैं।

एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने कहा कि मैं वाजपेयी और आडवाणी के साथ काम कर चुका हूं और हमें आगे भी दिल्ली सरकार के साथ मिलकर चलना होगा। उन्होंने कहा, 'जम हम आए थे(राज्य में सत्ता में) तो वाजपेयी जी हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री थे और आडवाणी होम मिनिस्टर। उनको भी हमने साथ चलाया। हम अकेले नहीं चला सकते हैं। कंधे से कंधा मिलाकर चलना है। उन लोगों के साथ भी जो दिल्ली में आज भी बैठे हैं।' 

पीडीपी चीफ ने यह भी कहा कि भारत को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बातचीत शुरू करनी चाहिए, ताकि इलाके में शांति कायम रह सके। उन्होंने कहा, 'अगर आज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदुस्तान को एक महान देश बनाना चाहते हैं तो उन्हें अटल जी की मिसाल पर काम करना होगा। अटल जी ने कहा था- आप अपने दोस्त बदल सकते हैं, मगर पड़ोसी नहीं बदल सकते।' 

जम्मू-कश्मीर में 25 नवंबर से 20 दिसंबर तक पांच चरणों में चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव के नतीजे 23 दिसंबर को आएंगे।

भारत की धरा को चीन का दर्शाने पर महबूबा मुफ्ती को कोई अफ़सोस नहीं

अपने 'विजन ऑफ कश्मीर' नक्शे में अक्साई चिन व कराकोरम क्षेत्र को चीन का हिस्सा बताने वाली पीडीपी को अपनी इस हरकत पर कोई अफसोस नहीं है। कश्मीर के मुख्य विपक्षी दल की नेता महबूबा मुफ्ती सोमवार को भी न केवल अपने रुख पर कायम रहीं, बल्कि यहां तक कह दिया कि केंद्र को भी पीडीपी के रुख की सराहना करनी चाहिए।

वहीं, कांग्रेस ने विवादास्पद नक्शे को अत्यंत आपत्तिजनक बताते हुए पीडीपी को आड़े हाथों लिया। साथ ही कूटनीतिक और राजनीतिक गंभीरता के मद्देनजर जल्द से जल्द उसे वापस लेने की भी सलाह दी है।बकौल महबूबा, 'पीडीपी एक मात्र ऐसी पार्टी ने जिसने कश्मीर समस्या के समाधान संबंधी अपनी योजना में राज्य के उन क्षेत्रों को भी शामिल किया है, जिन्हें चीन अवैध तरीके से हथियाए हुए है।

केंद्र को हमारी इस दमदारी की प्रशंसा करनी चाहिए।'उन्होंने सवालिया अंदाज में पूछा, क्या जम्मू- कश्मीर के हथियाए गए हिस्से की वापसी की मांग करना नाजायज है। पीडीपी के नक्शे के बारे में गृह मंत्री पी चिदंबरम की टिप्पणी पर पीडीपी अध्यक्ष ने कहा,तथ्यों को जाने बगैर गृह मंत्री ने प्रतिक्रिया व्यक्त व्यक्त कर दी। महबूबा ने गृह मंत्री को नसीहत देते हुए कहा, बेहतर होता अगर वह अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए नत्थी वीजा जैसे चीन से जुड़े मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करते।

महबूबा के मुताबिक, चिदंबरम को पीडीपी की चिंता छोड़ कर लेह क्षेत्र में चीनी घुसपैठ को रोकने के लिए कुछ करना चाहिए। केंद्र को चीन के दबाव में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा, पीडीपी को वैसा ही जम्मू-कश्मीर चाहिए, जो 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के पूर्व था। यानी उन सभी हिस्सों के एकीकरण की पक्षधर है, जो पाकिस्तान और चीन के नियंत्रण में है।वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दिल्ली में कहा, पीडीपी को यह कतई नहीं भूलना चाहिए कि भारतीय संसद 22 फरवरी, 2004 को सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में यह फिर से स्पष्ट कर चुकी है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है।

पीडीपी ने विजन ऑफ कश्मीर मैप [नक्शे] में पीले, हरे व लाल रंग में भारतीय भूभाग को चीन में दर्शाया है। यह अत्यंत आपत्तिजनक है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती जिस क्षेत्र की बात कर रही हैं, भारत के लिए उसका कूटनीतिक और राजनीतिक महत्व है। लिहाजा पीडीपी को तुरंत अपने उस नक्शे को वापस लेना चाहिए।गौरतलब है कि भारत सरकार जम्मू-कश्मीर के किसी भी हिस्से में अभी तक चीन का किसी प्रकार के दखल की बात को नहीं मानती है, जबकि पीडीपी ने अक्साई चिन व कराकोरम क्षेत्र में चीन का कब्जा बताया है।

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेंगे अलगाववादी

घाटी में तीन महीने से चल रही अशांति को खत्म करने के रास्ते तलाशने के लिए गृहमंत्री पी चिदंबरम के नेतृत्व में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल आज यहां बैठकें कर रहा है।

अलगाववादियों ने इन बैठकों से खुद को दूर कर लिया है। वहीं पीडीपी की ओर से भी पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ्ती प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलने वाली हैं।

प्रदेश के वास्तविक हालाता का आकलन करने के लिए 42 सदस्यीय दल यहां पहुंचा, जिसकी अगवानी मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने की। राजधानी में आज भी कफ्र्यू लगा हुआ है।

पीडीपी की ओर से प्रतिनिधिमंडल से पार्टी के महासचिव मोहम्मद दिलावर मीर अपने 14 सदस्यों के साथ मुलाकात करेंगे। इस बैठक में पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती शामिल नहीं होंगी।

दूसरी ओर जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक ने बताया कि मीरवाइज उमर फारुक के नेतृत्व वाला हुर्रियत कांफ्रेंस का उदारवादी धड़ा और जेकेएलएफ भी प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलेगा और दल को सिर्फ एक ज्ञापन सौंपेगा।

मलिक ने कहा ‘‘यह एक रचनात्मक ज्ञापन है। आशा है कि इसे सही तरीके से लिया जाएगा और प्रतिनिधिमंडल लोगों की नब्ज को समझ सकेगा।’’

महबूबा मुफ्ती की प्रधानमंत्री से बिना शर्त बातचीत की अपील

जम्मू एवं कश्मीर की प्रमुख विपक्षी पार्टी, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से कहा कि उन्हें कश्मीर के हालात के समाधान के लिए बिना शर्त बातचीत की घोषणा करनी चाहिए।

पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर पर पांच घंटे तक चली सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया,

"हम प्रधानमंत्री से अपील करते हैं कि वे बिना शर्त बातचीत की घोषणा करें।"

महबूबा ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री और अलगाववादियों को कोई शर्त नहीं रखनी चाहिए। महबूबा ने कहा, "बल्कि सरकार को जन सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किए गए युवकों को रिहा कर देना चाहिए। कश्मीरियों को पीड़ा पहुंचा रहे कर्फ्यू को भी उठा लिया जाना चाहिए।"

सशस्त्र सेना विशेष शक्तियां अधिनियम (एएफएसपीए) को हटाए जाने के मुद्दे पर महबूबा ने कहा, "ऊपरी मरहम लगाने के बदले हमारे पास निश्चित रूप से कुछ वास्तविक और ठोस समाधान होना चाहिए।"

महबूबा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि बातचीत मानवता के दायरे में होना चाहिए। हमें उनकी बातों पर गौर करना चाहिए।

महबूबा ने आगे कहा, "सभी पार्टियों को अपने राजनीतिक हित से ऊपर उठना चाहिए। आइए हम सभी मिल कर कश्मीर की जटिल समस्या का समाधान तलाशें।"

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