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सेवानिवृति के बाद मिलने वाले पद की लालसा में जज सुनाते है गलत फैसले - जेटली


न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आयोग के गठन की मांग और न्यायिक सुधारों की वकालत करते हुए बीजेपी ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की न्यायाधिकरणों में नियुक्ति के प्रचलन से न्यायपालिका पर असर पड़ रहा है.

बीजेपी के विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय अधिवक्ता अधिवेशन को संबोधित करते हुए बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि पार्टी के एजेंडा में न्यायिक सुधार प्राथमिकता में हैं और सेवानिवृत्ति के दो साल की अवधि के बाद ही जजों की नियुक्ति न्यायाधिकरणों में की जानी चाहिए.

उधर, पार्टी नेता अरुण जेटली ने सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की न्यायाधिकरणों में नियुक्ति के प्रचलन से न्यायपालिका पर असर पड़ने की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘न्यायपालिका में निष्पक्षता को बनाये रखने के लिए न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के समय मिल रहे वेतन के बराबर पेंशन देने और सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायपालिका पर असर पड़ रहा है.’

जेटली ने कहा, ‘सेवानिवृति की उम्र होने के बावजूद न्यायाधीश अवकाश ग्रहण करने के इच्छुक नहीं होते हैं.’

पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई का दुरुपयोग किये जाने का आरोप लगाते हुए मांग की कि सीबीआई की कार्यशैली की जांच होनी चाहिए.

जेटली ने परमाणु करार के मामले में संप्रग-1 सरकार द्वारा सपा के सहयोग से विश्वास मत साबित किये जाने का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सीबीआई सरकार की सबसे बड़ी सहयोगी नहीं होती, तो आज संप्रग सरकार नहीं होती. उन्होंने कहा कि सपा, बसपा जैसे दल केंद्र सरकार का कितना भी विरोध करें लेकिन बाद में वे मिल जाते हैं क्योंकि उनपर सीबीआई की तलवार लटकी होती है.

गडकरी ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि सीबीआई के अलावा सरकार विपक्षी दलों को ब्लैकमेल करने के लिए न्यायापालिका का भी दुरुपयोग कर रही है.’ उन्होंने गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में भाजपा नेताओं के खिलाफ सीबीआई के दुरुपयोग का आरोप लगाया.

गडकरी ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को पहचानने की चेतावनी देते हुए कहा, ‘हम ईंट का जवाब पत्थर से देंगे.’ उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि बीजेपी विपक्षी दल से ‘सुशासन’ वाली पार्टी बने.

जेटली ने देश में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया को भी सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय न्यायिक आयोग का गठन होना चाहिए जिसमें न्यायाधीश हों, सरकार के प्रतिनिधि हों और समाज के प्रतिनिधि हों और यह आयोग नियुक्ति तथा न्यायपालिका संबंधी शिकायतों की सुनवाई करे.

जेटली ने अन्य देशों में मुकदमों की प्रक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि वहां अदालतों में जाने से पहले मामलों को सुलझाने का प्रचलन है लेकिन भारत में अनावश्यक तौर पर वाद बनाये जाते हैं. उन्होंने कानून के पेशे से जुड़े लोगों को निरंतर प्रशिक्षण दिये जाने की भी हिमायत की.

जेटली ने न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका द्वारा अपनी अपनी सीमाओं में काम करने की वकालत करते हुए कहा कि सभी संस्थाओं को सक्रियता के साथ संयम बरतना चाहिए. उन्होंने छत्तीसगढ़ में माओवादियों से लड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) पर उच्चतम न्यायालय द्वारा पाबंदी लगाये जाने के संदर्भ में कहा कि ‘जम्मू कश्मीर और पंजाब में आतंकवाद से लड़ाई न्यायाधीशों ने नहीं पुलिस और सेना ने लड़ी थी.’ जेटली ने खुदरा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश पर केंद्र सरकार के फैसले पर भी विरोध दोहराया.

जेटली के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि संकेतों में कलंक लगाने के बजाए उन्हें कुछ चीजों को साफ-साफ दृढ़ता से कहना चाहिए अगर वे इन्हें सच जानते हैं.

पूर्व कानूनी मंत्री होने के नाते जेटली को मालूम होना चाहिए कि कुछ संवैघानिक संस्थाओं के प्रमुख केवल पदस्थ और सेवानिवृत्त न्यायाधीश ही हो सकते हैं.

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