नौवीं कक्षा से पोस्टग्रेजुएट तक विभिन्न भाषाओं में होंगे कोर्सेसः प्रकाश जावड़ेकर



प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप योजना से बढ़ेगा देश में अनुसंधान और नवीन खोजः  मानव संसाधन विकास मंत्री 

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कहा कि शीघ्र ही लोगों को घरों में अच्छे शिक्षकों से पढ़ने का अवसर मिलेगा। ऐसा संभव होगा डीटीएच और केबल टीवी के माध्यम से। इसमें कोई भी शिक्षक यदि किसी एक विषय में अच्छा है तो उसे भी पढ़ाने का अवसर मिलेगा। साथ ही छात्रों को भी अच्छे शिक्षकों का मार्गदर्शन मिल सकेगा। इसके लिए डीटीएच और केबल टीवी आपरेटर्स ने भी रुचि दिखाई है। 

श्री जावड़ेकर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी चाहते हैं कि देश में अच्छा अनुसंधान हो। इसके लिए हम प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप योजना को प्रभावी बनाएँगे जिससे देश के प्रतिभावान अनुसंधानकर्ता विदेश न जाकर यहीं पर नवीन खोजों को अंजाम दे सकें। 

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम ‘जागरण कुलपति फोरम-उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षाः वर्तमान और भविष्य’ में शिरकत करते हुए विश्वविद्यालयों के उपस्थित कुलपतियों से अपील भी की कि देश की संपन्नता अच्छे रिसर्च और नवीन खोजों से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे जवान देश है और यहां के लोगों में दक्षता बहुत है। लेकिन हम देश में मेधा को इसलिए नहीं रोक पाते कि उन्हें देश में चुनौती नहीं मिल पाती जो विदेशों में मिल जाती है। 

कुलपतियों के फोरम में मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए हम उच्चतर अनुष्ठान और औद्योगिक इकाइयों को जोड़ेंगे। आने वाले 3 सालों में 20 हजार करोड़ रुपयों की सहायता से हाई क्लास रिसर्च इनफ्रास्ट्रक्चर देश में तैयार किए जाने की योजना है। साथ ही प्रयास है कि विदेशों में बसी भारतीय मेधा न सिर्फ भारत वापस आए बल्कि यहां निवेश भी करे जिससे मेक इन इंडिया के माध्यम से रिसर्च के लिए मजबूत इनफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सके।

अपने उद्बोधन में श्री जावड़ेकर ने कहा कि आज विश्व के सारे बड़े शोधों में शामिल टीमों में भारतीय हैं लेकिन भारत के नाम पेटेंट्स नहीं हो रहे। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों से कहा कि अच्छे विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को अपने संस्थान में हफ्ते दो हफ्ते के लिए बुलाना चाहिए और उन्हें सही से विकसित करने में मदद भी करनी चाहिए। 

श्री जावड़ेकर ने कहा कि देश में शिक्षा की भलाई के लिए शिक्षकों और छात्रों में अच्छा संवाद हो। केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है कि देश में नवीन खोजों के लिए एक बेहतर वातावरण बने व यहां पर आधुनिक लैब हों। और अगर हम सिलेबस को आधुनिक नहीं करेंगे तो अच्छी शिक्षा कैसे दे पाएंगे। 

हाल ही में उड़ी में हुई 18 सैनिकों की शहादत को याद करके केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि एक सैनिक की शहादत के बाद मैंने उसकी मां को बोलते सुना कि ये तो बेटे के सेना में जाने के बाद से ही एहसास था कि कभी भी शहादत हो सकती लेकिन ये दुख हुआ कि वो सोते हुए मर गया अगर बंदूक हाथ में लेकर मरता तो अच्छा होता। ये एक मां का कथन था। इसी भांति अगर हम सब मिलकर शिक्षा के विकास की ठानें तो बहुत जल्द हम भी देश में रिसर्च के क्षेत्र में अच्छे परिणाम दे सकते हैं। 

इस कार्यक्रम में केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री श्री महेंद्र नाथ पांडे भी उपस्थित थे। उन्होने अपने सम्बोधन में कहा कि प्राइवेट शिक्षा के स्तर के लिए मानक तय हों ऐसा प्रयास किया जाएगा, हम इसको नई शिक्षा नीति में लाने का प्रयास करेंगे।

रेलवे अधिकारियों को मिलेगी एमबीए डिग्री, यूनिवर्सिटी से हुआ करार


भारतीय रेलवे ने रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को रेलवे के विशिष्‍ट क्षेत्रों में एमबीए डिग्री प्रदान करने के लिए महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा के साथ गठबंधन किया 

रेल मंत्रालय ने अपने कर्मचारियों को प्रोफेशनल दृष्टि से और कार्य सक्षम बनाने के उद्देश्‍य से एक महत्‍वपूर्ण कदम उठाते हुए अपने अधिकारियों को एमबीए डिग्री हासिल करने के लिए भेजने का निर्णय लिया है। तदनुसार, रेलवे अधिकारियों को प्रशिक्षण देने वाले शीर्ष भारतीय रेलवे प्रशिक्षण संस्‍थान यानी भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय अकादमी (नायर), वडोदरा ने भारतीय रेल लेखा सेवा (आईआरएएस), भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा (आईआरपीएस) और भारतीय रेलवे स्टोर सेवा (आईआरएसएस) से संबंधित रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों को रेलवे के विशिष्‍ट क्षेत्रों में एमबीए डिग्री प्रदान करने के लिए महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा के साथ एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्‍ताक्षर किए हैं। रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु की गरिमामय उपस्थिति में इसी सप्‍ताह इस एमओयू पर हस्‍ताक्षर किए गए। इसे रेलवे के विशिष्‍ट क्षेत्रों में रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों की प्रोफेशनल प्रबंधन शिक्षा को बेहतर करने की दृष्टि से एक महत्‍वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह कार्यक्रम अगस्‍त, 2016 से ही शुरू हो जाएगा।

भारतीय रेलवे की राष्ट्रीय अकादमी में फिलहाल प्रशिक्षण पा रहे रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारीगण अध्‍ययन करके संबंधित क्षेत्रों जैसे कि वित्‍त, मानव संसाधन प्रबंधन, उत्‍पादन व परिचालन प्रबंधन एवं विपणन प्रबंधन में विशेषज्ञता के साथ विश्‍वविद्यालय से एमबीए डिग्री प्राप्‍त करेंगे।

इस औपचारिक गठबंधन से महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय को अपने स्‍तर पर रेलवे अधिकारियों के साथ-साथ एमबीए के लिए विद्यार्थियों के चयन में मदद मिलेगी। इन विद्यार्थियों को भी संबंधित विषयों में एमबीए डिग्री प्रदान की जाएगी। यही नहीं, रेलवे से जुड़े बुनियादी ढांचागत निर्माण ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं, मेट्रो एवं पोर्ट रेलवे की जरूरतें भी इससे पूरी हो सकेंगी। वे यूपीएससी द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा में शामिल होकर रेलवे में नौकरी की तलाश भी कर सकते हैं।

पढ़िए केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन में पारित हुए प्रस्ताव


केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी ने सूरजकुंड (फरीदाबाद) में केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन की अध्यक्षता की। सम्‍मेलन में निम्‍नलिखित प्रस्‍ताव सर्वसम्‍मति से पारित हुए :

  1. छात्र समुदाय के शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए विश्‍वविद्यालय वरिष्ठ छात्रों और संकाय से जुड़ी एक सक्रिय सलाह प्रणाली के जरिये सहकर्मी की मदद से विद्या प्राप्ति को संस्थागत रूप प्रदान करेंगे।
  2. छात्रों, स्टाफ और संकाय सहित विश्वविद्यालय समुदाय के शिकायत निवारण के लिए एक पारदर्शी सक्रिय तंत्र सुनिश्चित करने हेतु एक भेदभाव निरोधक अधिकारी नियुक्त करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
  3. उच्च शिक्षा में किफायती और पारदर्शी पहुंच बढ़ाने के लिए ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
  4. उच्च शिक्षा में सकल दाखिला अनुपात को बढ़ाकर 30 फीसदी किया जाएगा, बुनियादी ढांचा और मानव संसाधन संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए दो पालियों (डबल शिफ्ट) में कक्षाओं की शुरुआत करके पहुंच बढ़ाई जाएगी।
  5. वैश्विक दुनिया में तेजी से उभरते ज्ञान समाज के साथ तालमेल बैठाने के लिए देश की भावी जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने हेतु नए एवं अभिनव पाठ्यक्रमों को शुरू करने का प्रस्ताव है :

ए) सामाजिक विज्ञान और मानविकी:

(i) विदेशी भाषाओं में अप्‍लायड पाठ्यक्रम
(ii) न्यू मीडिया और युवा
(iii) विभिन्न धर्मों का अध्ययन
(iv) संस्कृति और सभ्यताओं पर संवाद
(v) महिला एवं उद्यमिता
(vi) महामारी विज्ञान एवं लोक स्वास्थ्य
(vii)  जराविज्ञान 
(viii) नागरिकता और मूल्य शिक्षा
(ix) प्रवासी अध्ययन

बी) विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कृषि:

(i) नैनो-प्रौद्योगिकी 
(ii) सामंजस्‍य करती प्रौद्योगिकियां 
(iii) एप्लाइड विज्ञान और गणित
(iv) कृषि प्रौद्योगिकी
(v) ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
(vi) नवीकरणीय ऊर्जा का विकास

6.  यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी छात्र भाषायी सीमाओं के कारण उच्‍चतर शिक्षा से वंचित न रहे, विश्‍वविद्यालयों को अंग्रेजी एवं एक भारतीय भाषा में, जो उस राज्‍य में लागू हो, निर्देश सुनिश्चित करना।

7. छात्रों को सही व्‍यक्तिगत एवं व्‍यावसायिक निर्णय लेने में सक्षम बनाने के लिए विशेषज्ञों द्वारा व्‍यापक दिशा-निर्देश एवं परामर्श की एक पेशेवर प्रणाली को क्रियान्वित करना।

8. महिलाओं, छात्रों, कर्मचारियों एवं संकाय के लिए एक स्‍वस्‍थ, सुरक्षित एवं अनुकूल कार्य माहौल सुनिश्चित करने के लिए एक अनुकूल शिकायत निवारण तंत्र को संस्‍थागत बनाना एवं मौजूदा प्रणाली को मजबूत करना।
9. प्रत्‍येक विश्‍वविद्यालय के एक केन्‍द्रीय स्‍थान पर राष्‍ट्रीय ध्‍वज प्रमुखता एवं गर्वपूर्वक फहराया जाएगा।

10.  छात्रों को सामाजिक रूप से जागरूक एवं जिम्‍मेदार नागरिक बनने के लिए प्रोत्‍साहित करना और युवाओं के बीच श्रम के प्रति गर्व की भावना एवं सामाजिक उत्‍थान के लिए प्रतिबद्धता का संचार करना, उन्‍नत भारत अभियान के तहत पहले से ही जारी गांव गोद लेने के कार्यक्रम को मजबूत बनाना। 

11.  पारदर्शिता लाने एवं सेवाओं की त्‍वरित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ई-गवर्नेंस के साथ प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू करना।

12.   उपकुलपतियों, उप उप-कुलपतियों एवं पंजीयकों के लिए दो चयनित आईआईएम में नेतृत्‍व एवं प्रबंधन पर एक सप्‍ताह का पाठ्यक्रम।        

कश्मीरी हिन्दुओं के अच्छे दिन - विस्थापित विद्यार्थियों को दाखिले में 10 प्रतिशत की छूट

कश्मीरी हिन्दू विस्थापित विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों के सेशन 2015-16 के दाखिले के कट ऑफ में 10 फीसद तक की छूट मिलेगी. इतना ही नहीं उन्हें कश्मीर का डोमिसाईल सर्टिफिकेट भी नहीं देना होगा.

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देश पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं.

यूजीसी द्वारा जारी निर्देश के अनुसार कश्मीर विस्थापित विद्यार्थियों को न सिर्फ कट ऑफ में किसी भी सब्जेक्ट के लिए तय न्यूनतम पर्सेटेज के स्तर पर दस फीसद तक की छूट मिल सकेगी, बल्कि उन्हें डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए भी परेशान नहीं होना होगा.

साथ ही साथ विद्यार्थियों को अब स्ट्रीम की जगह कोर्स स्तर पर पांच फीसद का कोटा भी दिया गया है.

इस प्रकार प्रत्येक कोर्स में पांच फीसद अतिरिक्त सीटें मिल सकेगी. बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में फिलहाल कश्मीर विस्थापित विद्यार्थियों के लिए स्ट्रीम के आधार पर सीटें निर्धारित की गई हैं. अभी आर्ट्स, कॉमर्स व साइंस में एक-एक सीट का कोटा तय है.

इस प्रकार हर वर्ष सवा सौ से डेढ़ सौ सीटें ग्रेजुएशन के स्तर पर भरी जाती हैं. अब नए नियम के तहत सेशन 2015-16 में ज्यादा संख्या में कश्मीर विस्थापित विद्यार्थियों को दाखिला मिल सकेगा.

शिक्षा एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण के लिए स्मृति ईरानी ने जर्मनी के राजदूत से चर्चा की

जर्मनी के राजदूत श्री मिशेल स्टीनर ने मानव संसाधन विकास मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी के साथ आज उनके कार्यालय में शिष्टाचार के नाते मुलाकात की। 

जर्मनी के राजदूत ने भारत की जनसंख्या के लाभ का उल्लेख किया और दोहराया कि उनका देश उच्च शिक्षा, अनुसंधान, व्यवसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी को सुदृढ़ करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान भारत-जर्मन नीतिगत साझेदारी (आईजीएसपी) के और विस्तार की आवश्यकता पर भी बल दिया। 

जर्मन राजदूत के विचारों पर अपना मत रखते हुए मंत्री ने जर्मनी के साथ सहयोग करने की भारत की वचनबद्धता को दोहराया और उच्च शिक्षा में भारत-जर्मन नीतिगत साझेदारी (आईजीएसपी) की प्रशंसा की। मंत्रालय ने इस पहल के अंतर्गत पहले ही धनराशि कर दी है, उन्होंने बताया कि वे 18-19 नवंबर 2014 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली उच्च शिक्षा संबंधी अगली भारत-जर्मन संयुक्त कार्य समूह की बैठक के दौरान अनुसंधान एवं छात्रवृति कार्यक्रम के अंतिम चयन की प्रतीक्षा में हैं। 

इस मुलाकात में दोनों देशों के बीच सहयोग की अन्य अवसरों में दक्षता एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में जर्मन के मॉडल की अनुकृति सहित चुने हुए भारतीय विश्वविद्यालयों के जर्मन में बी.एड का अध्यापन तथा जर्मनी की शीर्षस्थ संस्थाओं के साथ भारत के राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय तथा ई-भाषा पहल की स्थापना के लिए विचार-विमर्श किया गया। वहीं मानवीय एवं समाज विज्ञान के क्षेत्र में उच्च अध्य्यन के लिये अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र की स्थापना की उनकी पहल में साझेदारी की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। 

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