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शरद पवार अपमानित हुए : यूपीए टूटने की कगार पर

केंद्र सरकार मुश्किल में घिरती नज़र आ रही है। इस बार सहयोगी पार्टी एनसीपी कांग्रेस से नाराज है। खबर है कि एनसीपी सुप्रीमो और केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार और उनकी ही पार्टी के एक अन्य केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने सरकार से नाराज़गी दिखाते हुए गुरुवार देर रात प्रधानमंत्री के पास अपना इस्तीफा भेज दिया।

यह भी कहा जा रहा है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गईं तो सरकार के साथ कांग्रेस का गठबंधन भी तोड़ सकते हैं। बताया जा रहा है कि दोनों आज अपने दफ्तर नहीं जाएंगे। शरद पवार ने प्रधानमंत्री के पास दो चिट्ठियां भेजी हैं। एक में उन्होंने अपना इस्तीफा भेजा है, जबकि दूसरे में उन्होंने यूपीए में गठबंधन धर्म का पालन नहीं किए जाने की बात कही है। इसी विवाद के मद्देनज़र शुक्रवार को प्रधानमंत्री 'नाराज' पवार से मुलाकात कर सकते हैं। 

इस बीच, पवार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मिले। वहां उन्होंने अपनी बात रखी। पवार और सोनिया की मुलाकात के बाद मीडिया में सूत्रों के मुताबिक खबर आ रही है कि पवार की कुछ मांगों को मानने के लिए कांग्रेस तैयार है। सोनिया से पवार की भेंट के बाद पवार के आवास पर एनसीपी नेताओं की बैठक चल रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद एनसीपी की तरफ से कोई ऐलान किया जा सकता है। शुक्रवार शाम पौने छह बजे कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में एनसीपी की नाराजगी के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है। 

सूत्रों का कहना है कि पवार कैबिनेट में प्रणब मुखर्जी की जगह 'नंबर 2' न बनाए जाने से नाराज हैं। यूपीए सरकार में प्रणब की जगह एके एंटनी को 'नंबर 2' की जगह दी गई है। 12 जुलाई की बैठक में एंटनी मनमोहन सिंह की बगल में बैठाए गए थे। कैबिनेट की बैठकों में पवार पहले प्रणब के बगल में बैठते थे। 3 जुलाई (जब प्रणब की कुर्सी खाली हो चुकी थी) को पवार को प्रधानमंत्री के बगल में कुर्सी दी गई, लेकिन 12 जुलाई को यह कुर्सी एंटनी को मिल गई।

सुशील कुमार शिंदे को लोकसभा में नेता सदन बनाए जाने की बात से भी पवार नाराज बताए जाते हैं। बताया जाता है कि इससे महाराष्ट्र की राजनीति में पवार के लिए परेशानी हो सकती है। वहीं, एनसीपी को लगता है कि सरकार कई फैसलों में उनकी रजामंदी नहीं लेती है और न ही तवज्जो देती है। टेलीकॉम पर बने अधिकार प्राप्त मंत्रियों के समूह (ईजीओएम) के अध्यक्ष पद से भी पवार बीती 2 जुलाई को इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफे से कुछ दिनों पहले ही वे ईजीओएम के अध्यक्ष बने थे। 

सरकार से नाराज पवार और पटेल गुरुवार की कैबिनेट की बैठक में भी नहीं गए थे। गुरुवार को कैबिनेट बैठक के दौरान एनसीपी नेताओं की पवार के घर पर बैठक हुई। इसमें आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। एनसीपी के प्रवक्ता डीपी त्रिपाठी ने कहा, 'हम बैठक में शामिल नहीं हुए। कारण पूछने पर कहा, 'कोई टिप्पणी नहीं।' 

एनसीपी नेताओं ने आधिकारिक रूप से चुप्पी के बावजूद अनौपचारिक बातचीत में कांग्रेस पर गठबंधन धर्म का पालन न करने का आरोप लगाया। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस का व्यवहार गठबंधन के साथियों के साथ नौकरों जैसा होता है। वे गठबंधन के भागीदार को उसका हिस्सा नहीं देना चाहते। राज्यपाल की नियुक्ति से लेकर बैंक का डायरेक्टर तक खुद ही बनाना चाहते हैं। किसी भी अहम मसले पर चर्चा नहीं की जाती। एंटनी को नंबर दो बनाने के मसले पर भी राकांपा को भरोसे में नहीं लिया गया।

दोनों दलों के बीच तनातनी का असर महाराष्ट्र में पड़ सकता है, जहां कांग्रेस-एनसीपी की मिलीजुली सरकार चल रही है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल के पहले इसे पवार की ओर से दबाव बनाने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि मौजूदा तनातनी को कांग्रेस गंभीर नहीं मान रही है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि दोनों दल एक साथ सरकार चला रहे हैं। कोई तनातनी जैसी चीज नहीं है।

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